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अदाणी-हिंडनबर्ग मामले में SC में सुनवाई आज

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सुप्रीम कोर्ट अदाणी-हिंडनबर्ग विवाद को लेकर दाखिल याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत ने दो मार्च को बाजार नियामक सेबी को अदाणी समूह के शेयर की कीमतों में हेरफेर के आरोपों की दो महीने के भीतर जांच करने का निर्देश दिया था।

शीर्ष अदालत ने भारतीय निवेशकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक पैनल भी गठित किया था, जब अमेरिकी लघु विक्रेता हिंडनबर्ग की एक हानिकारक रिपोर्ट ने भारतीय समूह के बाजार मूल्य के 140 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक का सफाया कर दिया था। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

इससे पहले बाजार नियामक सेबी ने शेयर मूल्य में हेरफेर के आरोपों और नियामकीय खुलासे में किसी तरह की चूक की जांच पूरी करने के लिए और छह महीने का समय देने की सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी। शीर्ष अदालत ने दो मार्च को सेबी से दो महीने के भीतर मामले की जांच करने और भारतीय निवेशकों की सुरक्षा पर गौर करने के लिए एक समिति गठित करने को कहा था।
अदालत के समक्ष दायर एक आवेदन में सेबी ने कहा था कि वित्तीय गलत बयानी, नियमों की अवहेलना और लेनदेन की धोखाधड़ी से संबंधित संभावित उल्लंघनों का पता लगाने के लिए इस अभ्यास को पूरा करने में छह महीने और लगेंगे।

कहां और कब होगी परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा की सगाई?

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बॉलीवुड की एक और एक्ट्रेस अब शादी की डोर में बंधने जा रही हैं. ये एक्ट्रेस कोई और नहीं बल्कि परिणीति चोपड़ा हैं. परिणीति की सगाई की खबरें पिछले काफी दिनों से लगातार आ रही हैं. परिणीति चोपड़ा और आप पार्टी के लीडर राघव चड्ढा की सगाई की जानकारी हम आपके लिए लेकर हाजिर हैं. प्रियंका चोपड़ा की छोटी बहन अब जिंदगी की नई शुरुआत के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.

परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा की 13 मई यानी शनिवार को सगाई होने जा रही है. इस दिन ये जोड़ी एक-दूसरे को रिंग पहनाकर अपने रिश्ते पर प्यार की मुहर लगा देगी. माना जा रहा है कि ये फंक्शन बेहद प्राइवेट होगा. जहां महज घरवाले ही शामिल होंगे. वहीं लेटेस्ट अपडेट की मानें को इस जोड़ी की सगाई का फंक्शन दिल्ली के कनॉट प्लेस में मौजूद कपूरथला हाउस में ऑर्गनाइज किया जाएगा.

इस फंक्शन के लिए सिक्योरिटी का भी पूरा इंतजाम किया गया है. ताकि मीडिया को इससे दूर रखा जा सकें. वहीं ये भी जानकारी मिली है कि ये जोड़ी भी बाकि मशहूर जोड़ियों की तरह बॉलीवुड के मशहूर डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के ही आउटफिट्स पहनने वाले हैं. परिणीति चोपड़ा को बीते दिनों मनीष मल्होत्रा के घर के बाहर स्पॉट किया गया था. तब खबरें भी आई थीं कि परिणीति अपनी सगाई के लहंगे के लिए वहां गई हैं.

परिणीति और राघव के आउटफिट्स मैचिंग होंगे. माना जा रहा है कि राघव चड्ढा की नेता वाली इमेज को ध्यान रखते हुए ही उनका आउटफिट तैयार किया गया है. राघव प्लेन खादी सिल्क पहनने वाले हैं. अब ये खबरें सच होती हुई नजर आ रही हैं. परिणीति और राघव का यूं आए दिन साथ नजर आना. इस बात का सबूत है कि अब ये जोड़ी भी चाहती है कि लोग ये समझ जाए कि अब ये लोग हमेशा-हमेशा के लिए एक-दूसरे के होने जा रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हुए केजरीवाल, बोले-ये दिल्ली की जनता की जीत

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सुप्रीम कोर्ट ने आज ट्रांसफर पोस्टिंग के अधिकारों को दिल्ली सरकार के अधीन करने का जो फैसला सुनाया है उसके बाद आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार को नई संजीवनी मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद केजरीवाल सरकार और मजबूत हो गई है। इस फैसले के आते ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सचिवालय में मंत्रियों की बैठक बुलाई है। वहीं आप नेताओं की प्रतिक्रिया भी लगातार आ रही है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से केजरीवाल काफी खुश हैं। उन्होंने ट्वीट कर जनता को बधाई दी है और कहा दिल्ली के लोगों के साथ न्याय करने के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट का तहे दिल से शुक्रिया। इस निर्णय से दिल्ली के विकास की गति कई गुना बढ़ेगी। जनतंत्र की जीत हुई।

राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि, लंबे संघर्ष के बाद जीत मिली है। अरविंद केजरीवाल के जज्बे को नमन है। दिल्ली की दो करोड़ जनता को बधाई। सत्यमेव जयते। संजय सिंह ने आगे कहा मोदी जी ने दिल्ली की जनता का 8 साल बर्बाद कर दिया। हर काम में रोड़ा लगाया उनकी दुर्भावनापूर्ण कार्यवाहियों का आज अंत हो गया। स्ळ बॉस नहीं चुनी हुई सरकार के पास सारे अधिकार। मंत्रिमंडल का फैसला एलजी पर बाध्यकारी। दिल्ली का लाल केजरीवाल।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आप सांसद राघव चड्ढा ने कहा, सत्यमेव जयते। माननीय सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले का स्वागत। ये फैसला लोकतंत्र की जीत है, हर एक दिल्लीवासी की जीत है। केजरीवाल जी और दिल्ली की जनता का संघर्ष रंग लाया। आज दिल्ली के लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ी जीत का तोहफा दिया है। जिस प्रकार केंद्र की भाजपा सरकार और पीएम मोदी ने देशभर में चुनी हुई सरकारों को असंवैधानिक तरीके से हड़पने की मुहिम चला रखी थी उसपर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा तमाचा है।

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने ट्वीट किया, ये जनता की जीत है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 8 साल तक दिल्ली की जनता की लड़ाई अदालत में लड़ी और आज जनता जीत गई।

SC ने उद्धव ठाकरे के इस्तीफे पर उठाए सवाल, पूर्व CM बोले-गद्दार लोगों के साथ सरकार कैसे चलाता?

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मुंबई: शिवसेना मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र की हत्या हो रही है. लोकतंत्र की रक्षा के लिए ही बिहार से नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव यहां आए हैं और हम सब एक साथ हैं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय बहुत महत्वपूर्ण है. इसमें हर किसी के राजनीति पर सवाल उठाया गया है. इसमें राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाया गया है. दिल्ली और महाराष्ट्र दोनों के राज्यपालों की भूमिका पर संदेह जताया गया है.

उद्धव ठाकरे गुरुवार को नीतीश कुमार और तेजस्वी के साथ मीडिया को संबोधित कर रहे थे. कहा कि आज लड़ाई की शुरुआत हो चुकी है. उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि यदि वह इस्तीफा नहीं दिए होते तो फिर से सीएम बन जाते. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट से पहले इस्तीफे पर सवाल उठाया था. लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि गद्दार लोगों के साथ मिलकर सरकार कैसे चलाएं. उन्होंने कहा कि वह यह लड़ाई अपने लिए नहीं, बल्कि देश और महाराष्ट्र की जनता के लिए लड़ रहे हैं. यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी.

इसी क्रम में नीतीश कुमार ने कहा कि उद्धव ठाकरे के साथ जो अन्याय हुआ था उस पर आज फैसला आ गया है. उन्होंने कहा कि अब हम लोग चाहते हैं कि देश की ज्यादा से ज्यादा पार्टियां एकत्रित हों और लोकतंत्र को बंधक बनाने वालों के खिलाफ अभियान चलाएं. इस मौके पर नीतीश कुमार ने कहा कि मीडिया भी इन्हीं लोगों के कब्जे में है. नीतीश कुमार ने कहा कि इस समय देश में कोई काम नहीं हो रहा है. देश को आगे बढ़ाने की कोशिश होनी चाहिए, लेकिन हो क्या रहा है, यह सबके सामने है. वह लोग चाहते हैं कि जनता जाति और धर्म के नाम पर लड़ती मरती रहे. इस तरह की कोशिशें लगातार हो रही हैं.

एकनाथ शिंदे की ‘सुप्रीम’ जीत, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, उद्धव ठाकरे सरकार बहाल नहीं कर सकते

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नई दिल्ली: उद्धव ठाकरे-शिंदे सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि उद्धव सरकार को बहाल नहीं किया जा सकता। इससे एक बात तो साफ हो गई है कि महाराष्ट्र में शिंदे सरकार बरकरार रहेगी। लेकिन, विधायकों की अयोग्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट मामले को बड़ी बेंच में भेजने का फैसला दिया है।

उद्धव ठाकरे-शिंदे सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि उद्धव सरकार को बहाल नहीं किया जा सकता। इससे एक बात तो साफ हो गई है कि महाराष्ट्र में शिंदे सरकार बरकरार रहेगी। लेकिन, विधायकों की अयोग्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट मामले को बड़ी बेंच में भेजने का फैसला दिया है।

पिछले साल एकनाथ शिंदे और उनके गुट के कुछ विधायकों ने बगावत कर ली थी और उसके बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली तत्कालीन महा विकास आघाड़ी (एमवीए) गठबंधन सरकार गिर गई थी।

दिल्ली पर SC का बड़ा फैसला: कहा- ट्रांसफर, पोस्टिंग का अधिकार सरकार के पास, इन कामों में सलाह मानें LG

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केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण को लेकर लंबे समय चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की पीठ अपना फैसला सुना रही है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह सर्वसम्मति का फैसला है।

इस पीठ के अन्य सदस्य जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा है। ये पीठ राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियंत्रण से संबंधित दिल्ली सरकार की याचिका पर फैसला सुना रही है। पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से क्रमश: सालिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की पांच दिन दलीलें सुनने के बाद 18 जनवरी को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

CJI ने कहा कि अगर एक चुनी हुई सरकार को अपने अधिकारियों को नियंत्रित करने का अधिकार नहीं होगा तो इससे जवाबदेही के सिद्धांतों की कड़ी अनावश्यक साबित हो जाएगी। संविधान पीठ का गठन दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं पर केंद्र और दिल्ली सरकार की विधायी एवं कार्यकारी शक्तियों के दायरे से जुड़े कानूनी मुद्दे की सुनवाई के लिए किया गया था। पिछले साल छह मई को शीर्ष कोर्ट ने इस मुद्दे को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेज दिया था।

यहां फिर आया भूकंप, रिक्टर पैमाने पर 3.5 रही तीव्रता

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पिथौरागढ़ में आज सवेरे भूकंप के झटके महसूस किये गए। जानकारी के मुताबिक भूकंप सवेरे 5 बजकर 1 मिनट पर आया और इसकी जमीन में गहराई 10 किलोमीटर बताई गई है।

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नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया है कि इससे पहले जनवरी में भी उत्तर-उत्तरपश्चिम पिथौरागढ़ में 4.2 की तीव्रता का भूकंप आया था।

एग्जिट पोल में कांग्रेस सरकार, BJP नेता ने कहा: तैयार रखें एंबुलेंस

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 के लिए बुधवार को वोट डाले गए। राज्य की सभी 224 विधानसभा सीटों पर एक साथ वोटिंग हुई। निर्वाचन आयोग (ईसी) के मुताबिक 72 फीसदी वोट डाले गए। अब 13 मई को उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा।

वहीं, शाम 6 बजे के बाद एग्जिट पोल के अनुमान सामने आए, जिसमें भाजपा से आगे कांग्रेस को बढ़त दी गई है। हालांकि, भाजपा का मानना है कि एग्जिट पोल गलत है। शनिवार को नतीजे पलटते दिखेंगे।

इस बीच, भाजपा प्रवक्ता अमित मालवीय ने भी एग्जिट पोल में दिखाई कांग्रेस की जीत पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ भी वाक्या सामने नहीं आया है, जो बताता हो कि कांग्रेस की जीत होगी। उन्होंने कहा कि न तो वोटिंग पर्सेंटेज से लगता है और न ही जमीनी स्तर पर कि उनकी जीत होगी।

भाजपा नेता ने ट्वीट कर कहा कि यह सिर्फ एग्जिट पोल है। अभी वास्तविक नतीजे सामने नहीं आए हैं। उन्होंने आगे कहा कि नतीजे पलटने की काफी संभावना है, इसलिए इस स्थिति में एंबुलेंस तैयार रखें।

स्कूल बस का इंतजार कर रहे बच्चों को कार ने रौंदा, तीन की दर्दनाक मौत

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आगरा के डौकी क्षेत्र में गुरुवार को सुबह-सुबह बड़ा हादसा हो गया। स्कूल बस के इंतजार में सड़क किनारे खड़े बच्चों को कार ने रौंद दिया। इनमें से तीन बच्चों की मृत्यु हो गई। जबकि दो को गंभीर हालत में हास्पिटल में भर्ती कराया है। गुस्साए ग्रामीणों ने फतेहाबाद-आगरा रोड पर जाम लगा दिया।

हादसा गुरुवार सुबह आठ बजे हुआ। डौकी के गांव बास महापत में बच्चे सड़क किनारे खड़े होकर स्कूल बस का इंतजार कर रहे थे। तभी फतेहाबाद रोड की ओर से आ रही तेज रफ्तार कार ने पांच बच्चों को रौंद दिया। कुछ बच्चों ने सड़क किनारे भागकर जान बचाई।

बच्चों ने गांव में जाकर स्वजन को बताया। वे मौके पर पहुंच गए और रोड पर जाम लगा दिया। एसीपी फतेहाबाद सौरभ सिंह ने बताया कि हादसे में तीन बच्चों की मृत्यु हुई है। दो को हास्पिटल में भर्ती करा दिया है। ग्रामीणों को समझाकर जाम खुलवाने का प्रयास किया जा रहा है।

आज आयेगा फैसला, उद्धव ठाकरे सही हैं या एकनाथ शिंदे?

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शिवसेना बनाम शिवसेना विवाद में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ आज फैसला सुनाएगी. इस केस में नौ दिनों की सुनवाई के बाद 16 मार्च को संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. संविधान पीठ ने उद्धव ठाकरे गुट, एकनाथ शिंदे गुट और राज्यपाल की दलीलें सुनी थीं. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की संविधान पीठ फैसला सुनाएगी.

शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे (अब मुख्यमंत्री) द्वारा दायर याचिका में डिप्टी स्पीकर द्वारा जारी किए गए अयोग्यता नोटिस को चुनौती दी गई है और भरत गोगावाले और 14 अन्य शिवसेना विधायकों द्वारा दायर याचिका में डिप्टी स्पीकर को इस मामले में अयोग्यता याचिका पर कोई कार्रवाई करने से रोकने की मांग की गई है जब तक डिप्टी स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव तय नहीं हो जाता.
शिवसेना के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु द्वारा दायर याचिका में महा विकास अघाड़ी सरकार के बहुमत साबित करने के लिए मुख्यमंत्री को महाराष्ट्र के राज्यपाल के निर्देश को चुनौती दी गई है.

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले समूह द्वारा नियुक्त व्हिप सुनील प्रभु द्वारा दायर याचिका में नव निर्वाचित महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष की कार्यवाही को चुनौती देते हुए एकनाथ शिंदे समूह द्वारा नामित व्हिप को शिवसेना के मुख्य सचेतक के रूप में मान्यता देने को चुनौती दी गई है. एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने के लिए आमंत्रित करने के महाराष्ट्र के राज्यपाल के फैसले को चुनौती देने वाली शिवसेना के महासचिव सुभाष देसाई द्वारा दायर याचिका में 03.07.2022 और 04.07.2022 को आयोजित राज्य विधानसभा की आगे की कार्यवाही को ‘अवैध’ के रूप में चुनौती दी गई है. उद्धव खेमे के 14 विधायकों द्वारा नवनिर्वाचित स्पीकर द्वारा दसवीं अनुसूची के तहत उनके खिलाफ अवैध अयोग्यता कार्यवाही शुरू करने को चुनौती देने वाली याचिका है.

उद्धव पक्ष द्वारा एक प्रारंभिक मुद्दा उठाया गया था कि मामले को नबाम रेबिया (2016) के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए एक बड़ी बेंच को भेजा जाना चाहिए. स्पीकर द्वारा अयोग्यता नोटिस जारी नहीं किया जा सकता है, जब उन्हें हटाने की मांग का नोटिस लंबित हो. पीठ ने प्रारंभिक मुद्दे पर तीन दिनों तक दलीलें सुनीं. पीठ ने 17 फरवरी को मामले के गुण-दोष के साथ इस प्रारंभिक मुद्दे पर विचार करने का फैसला किया. उसी दिन चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे को आधिकारिक शिवसेना के रूप में मान्यता देने का आदेश पारित किया. पीठ ने 21 फरवरी से मामले के गुण-दोष के आधार पर सुनवाई शुरू की थी. उद्धव पक्ष की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, डॉ अभिषेक मनु सिंघवी और देवदत्त कामत ने बहस की. शिंदे की ओर से सीनियर एडवोकेट नीरज किशन कौल, हरीश साल्वे, महेश जेठमलानी और मनिंदर सिंह ने बहस की. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने महाराष्ट्र के राज्यपाल की ओर से दलील दी.

राज्यपाल को प्रदान की गई वस्तुनिष्ठ सामग्री के कारण, जिसमें शिंदे समूह के 34 विधायकों द्वारा एकनाथ शिंदे के नेतृत्व की पुष्टि करने वाला प्रस्ताव शामिल था, 47 विधायकों द्वारा उद्धव गुट द्वारा जारी किए गए हिंसक खतरों के बारे में पत्र और विपक्ष के नेता के पत्र ने ही राज्यपाल को फ्लोर टेस्ट के लिए बुलाने के लिए बाध्य किया गया था. यह कहते हुए कि यह सुनिश्चित करना राज्यपाल का संवैधानिक उत्तरदायित्व था कि सरकार को सदन का समर्थन प्राप्त हो, तर्क दिया गया कि सदन का विश्वास खोने के बाद सरकार चलाना एक पाप था जिसका राज्यपाल एक पक्ष नहीं हो सकता था. यह भी प्रस्तुत किया गया था कि चाहे वह फ्लोर टेस्ट हो या अविश्वास प्रस्ताव, परिणाम वही होगा.

क्या किसी राजनीतिक दल में आंतरिक विद्रोह को आधार मानकर राज्यपाल फ्लोर टेस्ट कंडक्ट करा सकते हैं? विश्वास मत हासिल करने के लिए सदन बुलाते समय क्या राज्यपाल को इस बात का आभास नहीं था कि इससे सरकार का तख्तापलट हो सकता है? अगर किसी राजनीतिक दल के नेता के प्रति विधायकों में असंतोष है तो वे पार्टी के संविधान में दिए गए नियमों के मुताबिक अपना नया नेता चुन सकते हैं लेकिन क्या इसके लिए सरकार को ही गिरा देने की जरूरत है? शिवसेना का विचारधारा से हटकर एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन करने और राज्यपाल द्वारा सिर्फ पार्टियों के कहने पर ट्रस्ट वोट कराने में जमीन आसमान का फर्क है. यह लोकतंत्र को चिंतित करने वाला है.

सुप्रीम कोर्ट की उद्धव ठाकरे गुट पर टिप्पणी

विलय का मतलब है कि शिवसेना के रूप में उनकी राजनीतिक पहचान खो गई है. आप कहते हैं कि अगर आप में मतभेद है, तो आप पार्टी छोड़ दें. लेकिन उनका कहना है कि वह पार्टी नहीं छोड़ना चाहते क्योंकि वह शिवसेना के आदमी हैं. भाजपा या इसके अलावा से विलय उनके लिए खुला नहीं था. क्योंकि वे ऐसा नहीं करना चाहते थे. क्या होगा यदि हम यह कहने के निष्कर्ष पर पहुंचें कि राज्यपाल द्वारा शक्ति का प्रयोग सही नहीं था? क्या होता अगर उद्धव ठाकरे सीएम बने रहते? यह ऐसा ही है जैसे अदालत से कहा जा रहा है कि जो सरकार इस्तीफा दे चुकी है, उसे बहाल करें. जिस मुख्यमंत्री ने विश्वास मत का सामना किए बगैर इस्तीफा दे दिया, हम उसे उसके पद पर दोबारा कैसे बहाल कर सकते हैं?