ओडिशा के बारगढ़ में मालगाड़ी पटरी से उतर गई है. बताया जा रहा है कि मालगाड़ी में चूना पत्थर लदा था और इसके 5 डिब्बे बारगढ़ में पटरी से उतर गए. हालांकि, हादसे में किसी को कोई नुकसान होने की जानकारी नहीं है. पुलिस ने मौके पर पहुंच गई है. बता दें कि ओडिशा के बालासोर जिले में शुक्रवार रात ट्रेन दुर्घटना में 270 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. देश के सबसे भीषण रेल हादसों में से एक इस दुर्घटना में 1100 से ज्यादा यात्री घायल हुए हैं.
गंगा नदी पर बन रहा निर्माणाधीन फोरलेन पुल फिर गिरा, 2 गार्ड लापता, लागत इतनी कि…
बिहार: भागलपुर में सुलतानगंज-अगुवानी गंगा नदी पर बन रहे निर्माणाधीन फोरलेन पुल एक बार फिर जमींदोज हो गया। निर्माणाधीन पुल का सुपर स्ट्रक्चर नदी में गिर गया। वहीं पुल पर ड्यूटी कर रहे दो गार्ड भी हादसे के बाद से लापता हैं। SDRF की टीम इनकी तलाश कर रही है। अगुवानी के तरफ से पुल के पाया नंबर 10,11,12 के ऊपर का पूरा सुपर स्ट्रक्चर गिर गया है जो लगभग 200 मीटर का हिस्सा होगा। हालांकि, हादसे का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
इस महासेतु का निर्माण एसपी सिंगला कंपनी द्वारा किया जा रहा है। बता दें कि यह भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में बन रहा यह पुल खगड़िया और भागलपुर जिलों को जोड़ने के लिए बनाया जा रहा है। घटना रविवार शाम की है। इस महासेतु का निर्माण एसपी सिंगला कंपनी द्वारा किया जा रहा है। पिछले साल 27 अप्रैल को इस निर्माणाधीन पुल का सुपर स्ट्रक्चर नदी में गिर गया था। तेज आंधी और बारिश में करीब 100 फीट लंबा हिस्सा भरभराकर जमीन में गिर गया था। हालांकि, उस वक्त जानमाल को क्षति नहीं पहुंची थी।
इसके बाद पुल निर्माण का काम फिर शुरू हुआ। इस बार करीब 80 प्रतिशत काम सुपर स्ट्रक्चर का पूरा हो गया था। इतना ही नहीं अप्रोच रोड का काम भी 45 फीसदी पूरा कर लिया गया है। इस पुल को उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना माना जाता है। इस परियोजना का आरंभिक मूल्यांकन 1710.77 करोड़ किया गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 23 फरवरी 2014 को इसका शिलान्यास किया गया था।
इस पुल तथा सड़क निर्माण से एनएच 31 तथा एनएच 80 आपस में जुड़ जाएंगे। बता दें कि इस पुल की लंबाई 3.160 किलोमीटर है। जबकि एप्रोच पथ की कुल लंबाई करीब 25 किलोमीटर है। वहीं इस हादसे के पहले पुल निर्माण एजेंसी दावा कर रही थी कि अगले दो माह में सुपर स्ट्रक्चर और अप्रोच रोड तैयार हो जाएगा। बता दें कि पुल का निर्माण 2015 से चल रहा है। इसकी लागत 1710.77 करोड़ रुपए है। एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन लिमिटेड कंपनी इसे बना रही है।
ट्रेन हादसे पर बोले राहुल गांधी : सरकार से पूछो, वो कहती है…कांग्रेस ने 50 साल पहले किया
राहुल गांधी इन दिनों अमेरिका में हैं। अमेरिका में रहकर राहुल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर लगातार हमला कर रहे हैं। इस बार उन्होंने ओडिशा रेल हादसे के बहाने भाजपा को निशाने पर लिया है। न्यूयॉर्क में प्रवासी भारतीयों की एक सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस अपने शासन के दौरान हुई रेल दुर्घटनाओं के लिए अंग्रेजों को दोषी नहीं ठहराते थे बल्कि रेल मंत्री जिम्मेदारी लेते थे और इस्तीफा देते थे. बीजेपी और आरएसएस लोगों का भविष्य देखने में असमर्थ है.
10 दिन के अमेरिका दौरे पर गए राहुल ने कहा उनसे (केंद्र सरकार) जो भी पूछेंगे, वे पीछे मुड़कर देखेंगे. अगर आप सरकार से पूछेंगे की ट्रेन हादसा क्यों हुआ, तो वे कहेंगे कि 50 साल पहले कांग्रेस ने ऐसा किया था. आप उनसे पूछेंगे कि किताबों से विकासवाद और आवर्त सारणी क्यों हटा दिया? वो कहेंगे कांग्रेस ने 60 साल पहले ऐसा किया था. उनकी ओर से तत्काल प्रतिक्रिया ही पीछे देखने की है.
राहुल ने कांग्रेस सरकार में हुई एक ट्रेन दुर्घटना का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे एक ट्रेन हादसा याद है, जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी तो कांग्रेस ने यह नहीं कहा कि ब्रिटिशों की गलती की वजह से हादसा हुआ. रेल मंत्री ने कहा था यह मेरी जिम्मेदारी है और मैं इस्तीफा दे रहा हूं. यह एक समस्या है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार बहाने बनाती है और वास्तविकता को स्वीकार नहीं करती है.
उन्होंने कहा कि बीजेपी को किसी की बात नहीं मानने की आदत है. गलतियां करते हैं और जब सवाल किया जाता है तो दोष कांग्रेस पर डाल देते हैं. राहुल ने रविवार को भी कहा था कि पीएम नरेंद्र मोदी को चाहिए की रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से तत्काल इस्तीफा मांगे. 270 से अधिक लोगों की मौत के बाद भी कोई जवाबदेही नहीं है. सरकार घटना की जिम्मेदारी लेने से भाग नहीं सकती है.
गौरतबल है कि ओडिशा के बालासोर में उस समय दर्दनाक हादसा हो गया जब 120 से ऊपर की रफ्तार में दौड़ रही कोरोमंडल एक्सप्रेस डिरेल हो गई. डिरेल होने के बाद लूप लाइन पर खड़ी मालगाड़ी से टकराई. जबकि कुछ बोगियां बगल की पटरी से गुजर रही यशवंतपुर एक्सप्रेस से जा टकराई. रेलवे बोर्ड की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, हादसे में 275 यात्रियों की जान गई है.
सचिन तेंदुलकर के जीवन लिखी किताब स्किंटिलेटिंग सचिन – स्टोरी बियॉन्ड द स्टेट्स का विमोचन
सचिन तेंदुलकर के 50वें जन्मदिन समारोह के अवसर पर स्किंटिलेटिंग सचिन – स्टोरी बियॉन्ड द स्टेट्स नामक पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसमें क्रिकेट के गोल्डन बॉय के स्वर्णिम वर्षों के बारे में बताया गया।
मूल रूप से यह किताब मराठी में द्वारकानाथ संजगिरी ने लिखा था, जिसका अंग्रेजी अनुवाद सतीश मुताटकर ने किय। यह ग्रंथाली प्रकाशन का पहला अंग्रेजी प्रकाशन है।
शनमुखानंद हॉल में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद लोग अपने चहेते सचिन की एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आए। सभागार के बाहर भी लोगों की खूब भीड़ जमा थी।
कार्यक्रम के दौर जाने-माने क्रिकेटरों और अन्य हस्तियों ने न केवल खेल बल्कि एक व्यक्ति के रूप में सचिन के बारे में बात की। इस मौके पर सचिन की पत्नी भी मौजूद रहीं।
रेलवे बोर्ड ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, बताई बालासोर दुर्घटना की पूरी कहानी
रेलवे बोर्ड ने प्रेस कॉन्फेंस कर मामले की जानकारी दी। इस दौरान बताया गया कि प्रारंभिक जांच में सिग्नल के साथ कुछ समस्या पाई गई है। आगे की जांच जारी है। दो लूप लाइनों पर मालगाड़ी खड़ी थी। कोरोमंडल एक्सप्रेस की रफ्तार 128 किमी प्रति घंटा थी। यशवंतपुर एक्सप्रेस ट्रेन भी 126 किमी. की स्पीड से आ रही थी।
इस दौरान कोरोमंडल एक्सप्रेस मालगाड़ी से टकरा गई। मालगाड़ी में लोहा लदा हुआ था। इस वजह से मालगाड़ी के डिब्बे अपनी जगह से हिले भी नहीं और यही कारण है कि कोरोमंडल एक्सप्रेस के यात्रियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इस दौरान यशवंतपुर एक्सप्रेस वहां से गुजर रही थी। टक्कर के बाद पटरी से उतरे कोरोमंडल एक्सप्रेस के डिब्बे यशवंतपुर एक्सप्रेस के पीछे के दो डिब्बों से टकरा गए। इस वजह से यशवंतपुर एक्सप्रेस के डिब्बे भी पटरी से उतर गए।
जया वर्मा सिन्हा, सदस्य संचालन व्यवसाय विकास ने बताया कि रेलवे ने हादसे के बाद सबसे पहले राहत और बचाव कार्य किया, उसके बाद मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। बहानागा स्टेशन पर 4 लाइने हैं। इसमें 2 मेन लाइन है। लूप लाइन पर एक मालगाड़ी थी। स्टेशन पर ड्राइवर को ग्रीन सिग्नल मिला था। दोनों गाड़ियां अपने पूरे गति पर चल रही थी। प्रारंभिक जांच में लग रहा है कि सिग्नल में गड़बड़ी हुई है। घटना की चपेट में सिर्फ कोरोमंडल आई थी।
उत्तराखंड : श्री देव सुमन विश्वविद्यालय का कारनामा, ये है तैयारी
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देहरादून: श्री देव सुमन, जिनको पहाड़ का भगत सिंह कहा जाता है। वो श्री देव सुमन जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाई। जिन्होंने राजशाही के खिलाफ ऐतिहासिक भूख हड़ताल की और शहादत दे दी। उनके नाम पर बने श्री देव सुमन विश्वविद्यालय में नौकरियों के नाम पर काले कारनामे किए जा रहे हैं। नियमों को दरकिनार कर पहली भी भर्ती की गई और अब एक बार फिर से उसी तरह भर्ती करने की तैयारी है।
श्री देव सुमन विश्वविद्यालय ने कंप्यूटर प्रोग्रामर, तकनीकी सहायक, कनिष्ठ अभियंता सिविल, कंटेंट राइटर, इलेक्ट्रिीशियन और पलंबर की भर्ती निकाली है। इसके लिए श्रम विभाग के प्रचलित नियमों के अनुसार भर्ती की बात कही गई है। भर्ती वाक-इन-इंटरव्यू के जरिए की जाएगी। इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि विश्वविद्यालय श्रम विभाग के उस शासनादेश के तहत भर्ती कर रहा है, जो विश्वविद्यालय पर लागू ही नहीं होता है।

इससे पूर्व में भी विश्वविद्यालय के मुख्यालय और ऋषिकेश परिसर में विभिन्न पदों पर श्रम विभाग के उस शासनादेश के तहत भर्ती कराने के बाद वेतन भी आहरित कर रहा है, जो पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है। जिस जीओ के माध्यम से इनका वेतन निकाला जा रहा है, वह विश्वविद्यालय पर लागू ही नहीं होता, ऐसे में इन कार्मिकों को कैसे वेतन दिया जा रहा है ? यह अपने आप में गंभीर सवाल तो खड़े करता ही है। साथ ही यह वित्तीय अनियमितता का मामला भी है।
जिस शासनोदेश के आधार पर भर्ती की गई है। उसकी पहली बात यह है कि वह उन मदरसों पर लागू होता है, जिनमें फीस नहीं ली जाती है। उन प्राइवेट स्कूलों के लिए भी मान्य है, जो किसी संस्था की ओर से संचालित हैं और या तो फीस नहीं लेते हैं या फिर नाम मात्र की फीस लेते हैं। विश्वविद्यालय में पढ़ाई के लिए फीस ली जाती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल तो यही उठता है कि इसके आधार पर भर्ती कैसे की गई।

जानकारी के अनुसार ऋषिकेश परिसर में जो गेस्ट फैकल्टी लगाई गई है, उनकी नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय ने शासन से कोई अनुमनति प्राप्त नहीं की है। आलम यह है कि किसी भी रेगुलेटरी बोर्ड से इस संबंध में कोई अनुमति नहीं ली गई।
विश्वविद्यालय ने एक बार फिर विभिन्न पदों पर दैनिक वेतनभोगी कार्मिक नियुक्त करने के लिये विज्ञापन जारी किया, जो कि विवादों में आ गया है। विश्वविद्यालय ने उक्त विज्ञापन में ऐसे पदों पर दैनिक वेतनमान पर कार्मिक रखे जो समूह ‘ख’ के पद हैं।
नियुक्तियों के मामले में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने जांच के आदेश दे दिए हैं। मामले में सचिव को जांच करने के लिए कहा गया है। उनका कहना है कि गड़बड़ी किसी हाल में बर्दाश्त नहीं जाएगी, जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, इस मामले में वित्त अधिकारी नीलू वर्मा का कहना है कि नियुक्तियां कार्मिक विभाग करता है। उनके संज्ञान में जांच की बात है, लेकिन अब तक जांच के आदेश उनके पास नहीं पहुंचा है। जैसे जांच के आदेश प्राप्त होगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ओडिशा ट्रेन हादसे का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ पैनल द्वारा बालेश्वर ट्रेन दुर्घटना की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। जनहित याचिका में कवच नामक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (ATP) प्रणाली के कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देश /निर्देश भी मांगे गए हैं। ओडिशा के बालेश्वर में हुए ट्रेन हादसे में 288 लोगों की मौत हो गई, जबकि 1000 से ज्यादा लोग घायल हो गए। यह हादसा बाहानागा बाजार स्टेशन पर तीन ट्रेनों बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस, कोरोमंडल एक्सप्रेस और मालगाड़ी के आपस में टकराने की वजह से हुआ।
रेल मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से बालासोर ट्रिपल ट्रेन दुर्घटना स्थल पर बहाली कार्य की प्रगति का जायजा लेने के लिए फोन किया। वैष्णव दुर्घटनास्थल पर मौजूद हैं और बहाली कार्य का जायजा ले रहे हैं। इससे पहले आज वैष्णव ने कहा था कि ओडिशा के बालासोर में बहाली का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। पीएम मोदी ने शनिवार को खुद ओडिशा के बालासोर में दुर्घटनास्थल पर जाकर स्थिति का जायजा लिया था। इस दौरान प्रधानमंत्री के साथ अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी थे। पीएम ने एक ट्वीट में कहा,
ओडिशा में दुर्घटनास्थल पर स्थिति का जायजा लिया। शब्द मेरे गहरे दुख को व्यक्त नहीं कर सकते। हम प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मैं उन सभी लोगों की सराहना करता हूं जो चौबीसों घंटे जमीन पर काम कर रहे हैं और राहत कार्य में मदद कर रहे हैं।
दुर्घटनास्थल का दौरा करने के बाद, पीएम मोदी ने फकीर मोहन अस्पताल, बालासोर का दौरा किया, जहां कुछ घायल यात्रियों को भर्ती कराया गया है। हादसे में जीवित बचे लोगों से मिलने के बाद उन्होंने कहा कि हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हादसे की समीक्षा के लिए पीएम मोदी ने एक हाईलेवल मीटिंग भी बुलाई थी.
शरद पवार ने की रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से इस्तीफे की मांग
पुणे : NCP चीफ शरद पवार ने रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव के इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने जोर देकर कहा कि लाल बहादुर शास्त्री ने जब उनके कार्यकाल में भयावह रेल हादसा हुआ था तो इस्तीफा दे दिया था, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने ये मांग की कि ओडिशा में शुक्रवार को हुए दर्दनाक रेल हादसे के बाद मौजूदा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव इस्तीफा दे दें.
उन्होंने मीडिया से कहा कि जब लाल बहादुर शास्त्री रेल मंत्री थे, तब एक दुर्घटना हुई और ये फिर से हुई. उसके बाद, जवाहरलाल नेहरू इस्तीफा देने के फैसले के खिलाफ थे. लेकिन शास्त्री ने कहा कि यह मेरी नैतिक जिम्मेदारी है और इस्तीफा दे दिया. फिर उसी घटना का देश ने सामना किया, ऐसे में राजनेताओं को संभावित कदम उठाने चाहिए. पवार ने ओडिशा के बालासोर में हुई भीषण ट्रेन दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया. विनाशकारी ट्रेन दुर्घटना में अब तक 288 लोगों की जान गई है, जबकि 1,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं.
त्रासदी पर प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन-तरफा दुर्घटना में बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस, कोरोमंडल एक्सप्रेस और मालगाड़ी जो बालासोर जिले के बहानागा बाजार स्टेशन पर खड़ी थी, शामिल है. इसमें कहा गया था कि शुक्रवार शाम को हुए हादसे में इन दोनों ट्रेनों के 17 डिब्बे पटरी से उतर गए और गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए.
हालांकि, स्थिति का जायजा लेने के लिए शनिवार को घटनास्थल पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ओडिशा के बालासोर में हुई ट्रेन दुर्घटना की जांच के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें 260 से अधिक यात्रियों की मौत हो गई. जो भी दोषी पाया जाएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा.
क्या रेल मंत्री की लापरवाही से हुआ ओडिशा हादसा, कांग्रेस ने PM से पूछे 9 सवाल?
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने ओडिशा के बालेश्वर में हुए भयानक रेल हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि अब तक 288 लोगों की जान जा चुकी है और 56 लोग जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
सुरजेवाला ने एक ट्वीट में कहा, “रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने फरवरी में इंटरलॉकिंग की विफलता के बारे में चिंता जताई थी और तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। अधिकारियों ने कहा था कि अगर सिग्नल रखरखाव प्रणाली की निगरानी नहीं की गई और इसे तुरंत ठीक नहीं किया गया, तो इससे गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन मंत्री ने कुछ नहीं किया।
ये हैं 9 सवाल
1- रेल मंत्री और रेल मंत्रालय अधिकारियों की चिंता से अनभिज्ञ या लापरवाह क्यों थे? कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रारंभिक समाचार रिपोर्टों से पता चलता है कि बालेश्वर ट्रेन दुर्घटना सिग्नलिंग प्रणाली की विफलता के कारण हुई थी, लेकिन रेल मंत्री और रेल मंत्रालय सिग्नल प्रणाली की विफलता पर दी गई महत्वपूर्ण चेतावनी से अनभिज्ञ थे। सुरजेवाला ने कहा कि जिम्मेदारी तय करते हुए रेल मंत्री को तुरंत बर्खास्त करना चाहिए।
2- सुरजेवाला ने कहा कि हाल ही में कई मालगाड़ियों के पटरी से उतरने की खबरें आई थी। इन हादसों में कई लोको पायलटों की मौत हो गई और कई वैगन नष्ट हो गए। क्या रेल सुरक्षा की कमी पर पहले से मिल रहे ये अलार्म कम थे, रेल मंत्री और रेल मंत्रालय ने पहले ही उचित कदम क्यों नहीं उठाए।
3- क्या यह सही है कि रेल मंत्री रेलवे सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय मार्केटिंग और प्रधानमंत्री को खुश करने के लिए अधिक चिंतित हैं? क्या रेल मंत्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के कठिन काम को देखने के बजाय प्रधानमंत्री से वंदे भारत ट्रेनें शुरू कराने, रेलवे स्टेशनों के नवीनीकृत तस्वीरें ट्वीट करने और राजस्व बढ़ाने में व्यस्त हैं? क्या मंत्री राजस्व बढ़ाना में व्यस्त हैं?”
4- क्या रेलवे सुरक्षा की बढ़ती चूक आवश्यक मानव संसाधन – गैंगमैन, स्टेशन मास्टर, लोको पायलट आदि जैसे पैदल सैनिकों की कमी के कारण नहीं है? सुरजेवाला ने कहा कि क्या यह सही नहीं है कि रेलवे द्वारा दिए गए एक आरटीआई जवाब के अनुसार 39 रेलवे जोनों में से अधिकांश के पास आवश्यक मानव संसाधन की कमी है? क्या यह सही नहीं है कि रेलवे में ग्रुप सी के 3,11,000 पद खाली हैं जिससे रेल सुरक्षा के साथ-साथ परिचालन क्षमता भी खतरे में है? क्या रेलवे में 18,881 गजेटेड कैडेट के पदों में से 3,081 पद खाली पड़े हैं?
5- सुरजेवाला ने आगे पूछा- क्या यह सही नहीं है कि पिछले वर्ष की 35 भयानक दुर्घटनाओं की तुलना में वर्ष 2022-23 में 48 बड़ी रेल दुर्घटनाएं हुईं है?
6- ‘ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली’ (टीसीएएस) जिसे कवच कहा जाता है, रेलवे जोन में क्यों लागू नहीं किया गया है? क्या यह सही नहीं है कि केवल 2 फीसद रेल नेटवर्क यानी 68,000 किमी रेलवे नेटवर्क में से 1,450 किलोमीटर ही ‘कवच’ द्वारा कवर किया गया है?
7- रेल मंत्रालय ने ‘रेल सुरक्षा आयोग’ की शक्तियों में कटौती करके उसे फालतू क्यों बना दिया है?
8- क्या यह सही नहीं है कि CAG रिपोर्ट 2021 में बताया गया है कि “राष्ट्रीय रेल सुरक्षा फंड” का 20 फीसद ही गैर-सुरक्षा उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया था और पर्याप्त राशि का उपयोग नहीं किया गया था? क्या यह जानबूझकर की गई चूक नहीं है?
9- रेल मंत्री पर आईटी और टेलीकॉम जैसे बड़े मंत्रालयों का बोझ क्यों है, जो रेलवे सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं?
मीडिया में चली कैंसर होने की खबर, भड़के मेगास्टार चिरंजीवी, बोले- बकवास मत लिखो
साउथ इंडस्ट्री के मेगास्टार और एक्टर राम चरण के पिता चिरंजीवी अक्सर सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते है। आए दिन कुछ न कुछ पोस्ट साझा करते रहते है, लेकिन इस बार एक्टर ने एक पोस्ट के जरिए मीडिया पर गुस्सा जाहिर किया है, जिसके बाद से एक्टर सुर्खियों में आ गए है।
एक्टर को लेकर खबर सामने आई थी उन्होंने कैंसर हो गया था और वह इलाज से बच गए। चिरंजीवी को कैंसर होने की खबर से उनके फैन्स भी टेंशन में आ गए थे। ऐसे में अब एक्टर ने न सिर्फ इसकी सच्चाई बताई है, बल्कि ऐसी खबरें फैलाए जाने पर गुस्सा भी जाहिर किया है। चिरंजीवी ने कहा है कि उन्हें नॉन-कैंसर पॉलिप्स डिटेक्ट हुए थे, जिन्हें निकाल दिया गया है।
शनिवार की शाम चिरंजीवी ने ट्विटर पर एक पोस्ट साझा किया है, जिसमे लिखा, ‘कुछ समय पहले एक कैंसर सेंटर का उद्घाटन करते वक्त मैंने बताया था कि कैंसर के बारे में जागरूकता फैलाना जरूरी है। मैंने आपसे कहा था कि अगर आप रेगुलर मेडिकल टेस्ट करवाएं तो कैंसर से बच सकते हैं। मैं अलर्ट था और मैंने कोलोन स्कोप टेस्ट करवाया। मैंने कहा था कि नॉन-कैंसर पॉलिप्स डिटेक्ट हुए थे और उन्हें निकाल दिया गया। मैंने कहा था कि अगर मैं टेस्ट नहीं करवाता तो यह कैंसर बन जाता। इसलिए हर किसी को सावधानी बरतनी चाहिए और टेस्ट करवाने चाहिए। मैंने सिर्फ इतना ही कहा था।
चिरंजीवी ने आगे लिखा है, ‘लेकिन कुछ मीडिया ऑर्गनाइजेशन ने इसे ठीक से नहीं समझा और ‘मुझे कैंसर हो गया’ और ‘मैं इलाज के कारण बच गया’ जैसे पोस्ट लिख डाले। ऐसे पत्रकारों से अपील है कि इस तरह की झूठी खबरें न दें। विषय को समझे बिना बकवास न लिखें। इस वजह से बहुत से लोग डरे हुए हैं और आहत हैं।
एक्टर की इस पोस्ट के बाद उनके लाखों फैंस अब राहत की सांस लेते नजर आ रहे हैं। एक्टर के पोस्ट पर फैंस कमेंट कर भगवान का शुक्रिया कर रहे है। साथ ही साथ एक्टर को भी धन्यवाद कर रहे है कि उन्होंने दुनिया के सामने सच बताया। एक्टर की मूवी की बात करे तो जल्द भोला शंकर की मूवी में नजर आने वाले हैं।

















