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UPI को लेकर आया बड़ा अपडेट, जानें क्यों है ख़ास

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RBI ने गुरूवार को देश के करोड़ों लोगों को बड़ा तोहफा दिया है. अब लोग बिना इंटरनेट के ऑफलाइन भी UPI के जरिये पैसे भेज सकते हैं. दरअसल, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने UPI लाइट को लेकर RBI क्रेडिट पॉलिसी का ऐलान करते हुए कहा कि अब बिना इंटरनेट के UPI Lite के जरिए यूजर्स 200 के बजाय 500 रुपये तक का पेमेंट कर सकते हैं. RBI के इस बड़े फैसले से अब देश में डिजिटल पेमेंट की पहुंच और ज्यादा बढ़ेगी.

देश ज्यादातर लोग हर छोटी-बड़ी पेमेंट के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं. कई बार इंटरनेट या सर्वर में दिक्कत की वजह से पेमेंट फंस जाती थी. ऐसे में ऑफलाइन UPI इस्तेमाल से लोगों को अब इस समस्या से राहत मिलेगी. RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि डिजिटल पेमेंट एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए AI जैसी टेक्निक का इस्तेमाल किया जा रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम को जोड़ने में मदद करेगा और यूजर्स के अनुभव को बेहतर बनाएगा.

क्यों बढ़ाई ट्रांजैक्शन लिमिट?

यूपीआई लाइट की लिमिट को बढ़ाने के पीछे मुख्य कारण यह है कि लोग आम दिनों में छोटे ट्रांजैक्शन के लिए भी यूपीआई का इस्तेमाल करने में सक्षम बन सके. यूपीआई लाइट के लॉन्चिंग के बाद से ही इसकी लेनदेन की लिमिट को बढ़ाने की मांग की जा रही थी. ऐसे में यूजर्स की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने अब इसकी लिमिट को बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया है.

क्या है UPI लाइट?

आमतौर पर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिये पेमेंट करने के लिए इंटरनेट की जरूरत पड़ती है, लेकिन यूपीआई लाइट के जरिये यूजर्स 500 रुपये तक का पेमेंट बिना इंटरनेट के भी कर सकते हैं. यह एक एक ऑन डिवाइस वॉलेट सुविधा है जिसमें यूजर्स रियल टाइम में छोटे अमाउंट का पेमेंट बिना यूपीआई पिन के कर सकते हैं. RBI ने यूपीआई लाइट में मैक्सिमम 2,000 रुपये तक का बैलेंस रखने की सुविधा दी है.

नूंह हिंसा के दो आरोपियों का एनकाउंटर

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हरियाणा के नूंह में 31 जुलाई को ब्रजमंडल धाम जलाभिषेक यात्रा के दौरान हुई हिंसक झड़प के बाद प्रशासन लगातार उपद्रवियों पर कार्रवाई कर रहा है।

ताजा मामले में पुलिस ने नूंह हिंसा के दो आरोपियों का एनकाउंटर किया है। बताया जा रहा है कि उपद्रवी सिलखो गांव की पहाड़ी में छिपे थे।

एनकाउंटर के दौरान एक उपद्रवी को पैर में गोली लगी है, दूसरे को गोली नहीं लगी उसे पकड़ लिया गया है। उसे घायल हालत में इलाज के लिए नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।

मुठभेड़ में आरोपित ने पहले क्राइम ब्रांच तावडू के प्रभारी संदीप मोर की टीम पर फायरिंग की थी। अपने बचाव में जब इंस्पेक्टर संदीप मोर ने गोली चलाई तो वह एक आरोपित के पैर में जा लगी।

इससे पहले आरोपितों की खोज में लगी एसटीएफ ने बुधवार सुबह ड्रोन की मदद से पहाड़ी पर ठिकाना तलाश कर नौ लोगों को हिरासत में ले लिया था। सभी नल्हड़ और मेवली गांव के रहने वाले हैं। पूछताछ कर साक्ष्य मिलने के बाद इनकी गिरफ्तारी की जाएगी। वहीं, मंगलवार हिरासत में लिए गए संदिग्ध लोगों में आठ को गिरफ्तार कर लिया गया है।

हिंसा में गिरफ्तार होने वाले आरोपितों की संख्या 189 हो चुकी है। गांव से सटी अरावली पहाड़ी बदमाशों की शरणस्थली बन रही है। नल्हड़ तथा समीपवर्ती गांव के चार सौ लोगों से अधिक मुस्लिम युवकों ने नल्हड़ मंदिर में फंसे शिव भक्तों पर गोली और पत्थर चलाए थे।

नल्हड़ के पास पहाड़ी का हिस्सा नूंह की ओर तरह अधिक ऊंचा नहीं हैं। कई चोर रास्ते भी बने हुए हैं। ऐसे में एसटीएफ तथा क्राइम ब्रांच को परेशानी आ रही है। पहले ड्रोन से सटीक ठिकाने खोजे गए फिर पहाड़ी पर चढ़कर संदिग्धों को दबोच लिया।

मणिपुर में असम राइफल्स और पुलिस में टकराव बढ़ा

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मणिपुर पुलिस और असम राइफल्स आमने-सामने हो गए हैं। दोनों के बीच टकराव बढ़ गया है। दोनों के बीच बहस के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आ चुके हैं।

पुलिस ने असम राइफल्स जवानों के खिलाफ कुकी उग्रवादियों के विरुद्ध ऑपरेशन में रुकावट डालने के आरोप में 5 अगस्त को FIR दर्ज की थी। इसे लेकर असम राइफल्स ने कहा है कि उसने सेना के कमांड मुख्यालय के निर्देशों का पालन किया था।

असम राइफल्स ने बताया कि उन्हें बफर जोन की गाइडलाइंस को बनाकर रखने के निर्देश मिले थे, जिससे दोनों समुदायों में संघर्ष को रोका जा सके। असम राइफल्स का ये भी कहना है कि एक अन्य घटना को लेकर उसको निशाना बनाया जा रहा है, जबकि वहां सेना की इन्फैंट्री बटालियन तैनात है।

सूत्रों ने कहा कि मैतेई लोगों को रोकने के कारण असम राइफल्स कुकी हमलावरों का तरफदार बताकर निशाना बनाया जा रहा है। हिल्स एरिया में कई जगह असम रायफल्स के कैंप कुकी-जो सू-संगठनों के ठिकानों के समीप हैं। इन्हें सोशल मीडिया में दिखा दोनों की मिलीभगत का आरोप लगाया जा रहा है।

राज्यसभा में बोले मलिकार्जुन खरगे : आने दो प्रधानमंत्री जी को, वो कोई भगवान नहीं हैं…

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सरकार के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर हो रही चर्चा का आज पीएम मोदी लोकसभा में जवाब देंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को इस बात की पुष्टि की। पीएम अपने भाषण में सरकार द्वारा किए गए कार्यों को गिनाने के साथ कांग्रेस पर हमलावर रुख अपना सकते हैं।

बता दें कि विपक्ष ने 26 जुलाई को मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वीकार कर लिया था। हालांकि, मोदी-सरकार मात नहीं खाएगी, क्योंकि भाजपा और उसके सहयोगियों के पास लोकसभा में बहुमत है।

भाजपा सांसद सुकांता मजूमदार ने विपक्ष पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि खासकर विपक्ष के लिए आज का दिन अहम है, क्योंकि पीएम आज संसद में बोलेंगे। मजूमदार ने कहा कि पीएम मोदी एक घंटे से ज्यादा बोलेंगे, विपक्ष को इसके लिए तैयार रहना चाहिए।

संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर PM मोदी के जवाब देने को लेकर आज कांग्रेस सांसद मनिकम टैगोर ने हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई से विपक्षी INDIA गठबंधन मांग कर रहा है कि प्रधानमंत्री संसद में आकर मणिपुर के बारे में बोलें और वहां के लोगों को शांति और एकजुटता का संदेश दें। टैगोर ने कहा कि प्रधानमंत्री को संसद में आने में 14 दिन लग गए…हमें उम्मीद है कि वह प्रस्तावक कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब देंगे।

उत्तराखंड : यहां हुआ हादसा, मलबे में दबे दो साधु, एक की मौत

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ऋषिकेश: भारी बारिश का दौर लगातार जारी है। भारी बारिश के चलते प्रदेशभर से भूस्खलन की खबरें सामने आ रही है। ऐसी ही एक घटना ऋषिकेश में सामने आई है। यहां दीवार गिरने से दो साधु मलबे में दब गए। इनमें से एक की मौत हो गई। जबकि, दूसरे का रेस्क्यू कर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

जानकारी के अनुसार लक्ष्मण झूला चौरासी कुटिया के पास सुबह दीवार गिर गई, जिसके मलबे में दो साधू दब गए। आनन-फानन आसपास के लोगों ने एक साधु को मलबे से बाहर निकाल लिया, जबकि दूसरे का शव एसडीआरएफ ने बरामद कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, लक्ष्मण झूला चौरासी कुटिया के पास सुबह करीब साढ़े छह बजे एक दीवार गिर गई। दीवार के मलबे की चपेट में दो साधु आ गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। इनमें से एक साधु को तो बचा लिया गया, लेकिन दूसरे साधु की मौत हो गई।

राहुल के ‘फ्लाइंग किस’ विवाद पर स्वाति मालीवाल का स्मृति ईरानी पर तीखा हमला, तब क्यों गुस्सा नहीं आता…

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दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘फ्लाइंग किस’ विवाद को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। स्वाति मालीवाल ने किस कंट्रोवसी को महिला पहलवान के यौन उत्पीड़न से जोड़कर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर तीखा हमला बोला है।

हवा में फेंकी हुई एक कथित फ्लाइंग किस से इतनी आग लग गई। दो पंगती पीछे एक आदमी बृजभूषण बैठा हुआ है। जिसने ओलम्पियन पहलवानों को कमरे में बुलाके छाती पे हाथ रखा, कमर पे हाथ रखा और यौन शोषण किया। उसके करे हुए पर गुस्सा क्यों नहीं आता?

उत्तराखंड: चार जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट, इन जिलों में स्कूल बंद

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उत्तराखंड में आसमानी आफत थमने का नाम नहीं दे रही है भारी बारिश से कई जगहों पर तबाही हुई है। इस बीच मौसम विभाग ने चार जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के निदेशक विक्रम सिंह का कहना है कि नैनीताल, चंपावत, उधम सिंह नगर और पौड़ी में भारी से भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

 

देहरादून, टिहरी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भारी बारिश हो सकती है। वहीं, तीन-चार घंटे की बारिश में ही तेज आंधी-तूफान की भी आशंका है। उन्होंने नदी किनारे रहने वालों लोगों को आगामी 15 अगस्त तक सतर्क रहने की सलाह दी है।

 

मौसम विभाग के बारिश के अलर्ट को देखते हुए  आज  चंपावत, बागेश्वर, पौड़ी, नैनीताल और चमोली जिले के सभी विद्यालयों में छुट्टी घोषित की गई है। मौसम विभाग की ओर से जारी पूर्वानुमान के तहत चमोली जिले में भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई है। जिसे देखते हुए सभी शासकीय, गैर शासकीय और निजी विद्यालयों (कक्षा एक से 12 तक) के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया है।

उत्तराखंड : गरीब जनता से उगाही कर रहा UPCL : गरिमा मेहरा दसौनी

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देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने ऊर्जा विभाग के उगाही के नए तरीकों पर राज्य सरकार और UPCL को आड़े हाथों लिया है। दसौनी ने कहा की एक तरफ जहां गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार आसमान छूती महंगाई से जूझ रहे हैं वहीं दूसरी ओर प्रदेश के युवा सुरसा का रूप ले चुकी बेरोजगारी से संघर्ष कर रहा है ।

ऐसे में गरीब जनता का शोषण करने का एक नया तरीका ऊर्जा विभाग द्वारा इजाद किया गया है। दसौनी ने कहा की ऊर्जा विभाग के गजब हाल है इनके फैसले केवल जनता की जेब काटने के अलावा कुछ नहीं होते।भाजपा सरकार में बिजली के रेट तो ऊर्जा विभाग ने समय समय पर बढ़ाए ही हैं वही अब एक और नया खेल सिक्योरिटी मनी के रूप मे खेला जा रहा है जिससे ऊर्जा विभाग क़ो जनता की जेब काटने का एक और मौका मिल गया है।

दसौनी ने बताया की ऊर्जा विभाग मे सिक्योरिटी मनी तब ली जाती है, जब किसी का नया मकान बना हो और उसके द्वारा नया बिजली के कनेक्शन के लिए अप्लाई किया गया हो। ऊर्जा विभाग उपभोक्ता से सिक्योरिटी मनी के रूप मे पैसा लेता है। यहां तक तो बात समझ में आती है, लेकिन प्रदेश की जनता को बिना बताए या बिना सूचना किए अब ऊर्जा विभाग ने नया खेल शुरु कर दिया है।

उनके द्वारा सालो पुराने बिजली कनेक्शन के उपभोक्ताओं से भी सिक्योरिटी मनी ली जा रही है। और यह कोई छोटा-मोटा अमाउंट नहीं है भारी-भरकम अमाउंट लिया जा रहा है। दसोनी ने कहा की हैरानी की बात ये है कि इस सिक्योरिटी मनी का बिजली के बिल मे कही भी कोई जिक्र नहीं है।

बड़ा सवाल ये उठता है की पहले तो जिनके पुराने कनेक्शन है उनसे नए सिरे से सिक्योरिटी मनी लेने का क्या औचित्य है? और अगर किसी के निर्देश के बाद यूपीसीएल ये ले भी रहा है तो इसकी सार्वजानिक सूचना क्यों उपभोक्ता क़ो नहीं दी गई?

दसौनी ने बताया की जब एक उपभोक्ता ने ऑनलाइन अपना बिजली का बिल जमा कराना चाहा तो पहले सिक्योरिटी मनी के लिए UPCL की वेबसाइट पर उन्हें एक अमाउंट भेजा गया , उन्हें लगा की ये ही उनका बिजली का मूल बिल है उन्होंने लगभग 7 हजार रूपए जमा करा दिए लेकिन फिर जब उन्होंने वेबसाइट मे फिर खोला तो उनका मूल बिल उतना ही था जितना उन्हें भरना था। उपभोक्ता हैरान रह गए जब उन्होंने बिजली स्टेशन जाकर पूछा तो स्थानीय SDO ने इस सिक्योरिटी मनी के बारे मे बताया।

उपभोक्ता के अनुसार ना तो उन्हें सिक्योरिटी मनी की जानकारी थी और ना ही कही उन्होंने अख़बार मे इसके बारे मे पढ़ा था की अब पुराने उपभोक्ताओं क़ो भी सिक्योरिटी मनी देनी पड़ेगी।

उनके अनुसार उनका तो बजट बिगड़ गया है उनके अनुसार उनका 1981 का कनेक्शन है तब उन्होंने सिक्योरिटी मनी दी थी और अब फिर दी है उनके अनुसार सिक्योरिटी मनी तो तब मिलती है जब आप कनेक्शन कटाओ लेकिन अगर कोई अपने निवास पर परमानेंट तरीके से रहेगा तो कनेक्शन कटाएगा ही नहीं तो फिर ली गई सिक्योरोटी UPCL के ही पास रहेगी यानि अगर किसीने 10 हजार सिक्योरिटी मनी दी तो वो हमेशा के लिए UPCL के पास ही रहेगी रिफंड होने का तो सवाल ही नही होता।उपभोक्ताओं के अनुसार हम समय पर बिजली बिल दे रहें है तो फिर ये सिक्योरिटी मनी क्यों मांगी जा रही है??

दसौनी ने कहा की साफ है ये केवल एक व्यक्ति की स्थिति नहीं है प्रदेश भर मे कई लोग अब UPCL की सिक्योरोटी मनी देने को बाध्य और परेशान किए जायेंगे।दसौनी ने कहा की बार-बार बिजली के रेट बढ़ने से धामी सरकार की अच्छी खासी किरकिरी हो रही थी इसलिए अब उगाही करने का यह नया तरीका यूपीसीएल के द्वारा निकाला गया है।

दसौनी ने कहा कि धामी सरकार या भाजपा सरकार की कोई भी नीति गरीब को लाभ पहुंचाने वाली नहीं होती बल्कि किस तरह से गरीब की कमर तोड़ दी जाए यही कवायद भाजपा सरकारों में होती रही है। दसौनी ने कहा कि इस खबर को यूपीसीएल ने बड़े पैमाने पर समाचार पत्रों में छपवाकर जन सामान्य को जानकारी देनी चाहिए थी कि यह नीति कब से लागू हुई और किसके आदेशों से हुई ताकि गरीब व्यक्ति अपने घर का बजट उसी हिसाब से प्लान करें। दसौनी ने कहा भाजपा ने 2014 में नारा दिया था बहुत हुई महंगाई की मार अबकी बार भाजपा सरकार लेकिन अपने कृत्यों से भाजपा ने साबित कर दिया कि वह सत्ता में आए ही गरीबों की जेब में डाका डालने के लिए है।

 

 

‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 81वीं वर्षगांठ पर शहीदों, क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता सेनानियों और बलिदानियों को सलाम

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क्या था यह आंदोलन? महात्मा गांधी जी द्वारा लिया गया एक बहुत बड़ा निर्णय जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 8-9 अगस्त 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मुंबई सत्र में भारत में ब्रिटिश शासन को समाप्त करने की मांगों को लेकर शुरू किया गया एक आंदोलन था। क्रिप्स मिशन के साथ ब्रिटिश शासन के युद्ध के प्रयासों में जब भारतीय समर्थन ब्रिटिशर्स को नहीं मिला और ब्रिटिश इसमें विफल हुए ,उस समय गांधी जी ने मुंबई में गोवालिया टैंक में दिए गए अपने ष्भारत छोड़ो आंदोलन में करो या मरो का आवाहन भी किया। इससे अंग्रेज बहुत घबरा गए इसलिए वायसराय लिनलिथगो ने इस आंदोलन को 1857 के बाद का अब तक का सबसे गंभीर विद्रोह बताया।

गांधी जी द्वारा शुरू किया गया यह आंदोलन एक ऐसा आंदोलन था जिससे ब्रिटिश शासन को हमेशा के लिए भारत से बाहर कर देने का संकल्प था। इसके बाद गांधी जी सहित सभी कांग्रेस कमेटी के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया परंतु इससे पूरे भारत में सकारात्मक प्रभाव हीं पड़ा ।बल्कि और उत्साह के साथ उन्होंने अपना आंदोलन हड़ताल के माध्यम से और तोड़फोड़ करते हुए रेलिया निकालते हुए जारी रखा।

कांग्रेस के कई नेता, स्वतंत्रता सेनानी भूमिगत प्रतिरोधी गतिविधियों में सक्रिय थे। पश्चिम में सातारा और पूर्व में मेदिनीपुर जैसे कई जिलों में स्वतंत्र सरकार प्रति सरकार की स्थापना कर दी गई थी। यहां अंग्रेज कहां मानने वाले थे उन्होंने सभी आंदोलनों के प्रति काफी सख्त रवैया अपनाया हुआ था इस विरोध को दबाने में लगभग साल भर से ज्यादा समय लग गया।

भारत छोड़ो आंदोलन सही रूप में एक जन आंदोलन था जिसमें लाखों भारतवासी प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से इस आंदोलन में शामिल थे इसमें अत्यधिक युवाओं को बड़ी संख्या में देखा गया। वे गांधी जी को अपना आदर्श मानते हुए समर्पित भाव से इस आंदोलन को तेज गति से आगे बढ़ा रहे थे। गांधी जी के आदेशानुसार अंग्रेजी सामान का बहिष्कार किया जा रहा था।

गांधी जी के साथ इसके समर्थन में जिन नामों का उल्लेख आता है वह पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलाना आजाद, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ राजेंद्र प्रसाद, मिस्टर अशोक मेहता, जयप्रकाश नारायण आदि ने खुलकर इसका समर्थन किया। जहां एक ओर अनुभवी क्रांतिकारियों को जेल में डाला जा रहा था, वही ओज से परिपूर्ण युवा क्रांतिकारी और लोगों के लिए बने प्रेरणा स्त्रोत, निडर ,साहसी अपने आपको भारत माता के लिए समर्पित कर ने में अग्रणी, युवा फौज इन्हें भी विभिन्न जेलों में डाला जा रहा था उन्हीं में प्रमुख क्रांतिकारी तथा देशभक्त शशिभूषण तथा उनके साथियों में अनेक प्रसिद्ध क्रांतिवीर थे,जिनमें ग़दर पार्टी के बाबा सोहन सिंह भक्कना,बाबा गुरदीत सिंह, बाबा हरजाब सिंह, शहीद भगत सिंह के भाई सरदार कुलतार सिंह और कुलबीर सिंह, साम्यवादी नेता कामरेड धनवन्ती, देवदत्त अटल,टीका राम सुखन,मलिक कुंदन लाल।

समाजवादी विचारक प्रेम भसीन, प्रोफ़ेसर तिलकराज चड्ढा,मुन्शी अहमद्दीन,रामानन्द मिश्र, पत्रकार निरंजन सिंह तालिब,सरदार गुलाब सिंह, जीवाराम पालीवाल,चन्द्रकांत मोदी,वाई एन.ए त्रेहान, बलवंत सिंह क़ौमी और इन्द्र कुमार गुजराल(पूर्व प्रधानमंत्री) और अन्य अनेक भारत माता के सपूत जेलों में डाल दिए गए। यह श्रृंखला बढ़ती गई और यह एक ऐतिहासिक दिन बन गया। जब भारत के तिरंगे के लिए लाखों लोग अपनी जान कुर्बान करने आगे आ गए। इस आंदोलन में, आजादी के संघर्ष में भारतीय एकता रीढ़ की हड्डी की तरह सशक्त नजर आई।

भारत छोड़ो आंदोलन तथा अगस्त क्रांति में क्रांतिकारी वीर महिलाओं की अत्यधिक अहम भूमिका रही जिनमें प्रमुख हैं। कनकलता बरुआ , अरुणा आसफ अली, सुचेता कृपलानी, ऊषामेहता, मीराबेन, कमलादेवी चट्टोपाध्याय, सरोजिनीनायडू, अनुसूयाबाई काले, राजकुमारी अमृत कौर, कल्पना दत्ता, आदि भारत की इस क्रांति ने कई अन्य अनेक देश जो अंग्रेजों के गुलाम थे उन्हें हिम्मत दी और उनके स्वतंत्रता के संघर्ष में प्रेरणा देते हुए एक अहम भूमिका अदा की।

आज हम याद करते हैं भारत छोड़ो आंदोलन और अगस्त क्रांति को, और सलाम करते हैं उन शहीदों को वीरों को जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। स्वराज, स्वदेशी, और सामाजिक न्याय तथा आत्मिक अनुभूति इस संघर्ष की चेतना बने। आज भी इस मूलमंत्र को हर भारतवासियों को याद रखना चाहिए और भारत देश के लिए स्वाभिमान से जीने की जो प्रेरणा ,वीर शहीदों क्रांतिकारियों स्वतंत्रता सेनानियों ने दी उन्हें नमन करते हुए याद करना चाहिए।
जय हिंद…।

  • प्रशांत सी बाजपेयी

उत्तराखंड: आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी परीक्षा पर क्यों उठे सवाल, यहां पढ़ें पूरा सच

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  • EXCLUSIVE 

देहरादून: आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी भर्ती को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया में सवाल उठाए जा रहे हैं। इस मामले में कहा जा रहा है कि पूर्व मंत्री की बेटी के लिखित परीक्षा में 13 नंबर होने पर उनका सलेक्शन कैसे किया गया? इस बात के सामने आते ही सरकार पर सवाल उठाए जा ने लगे। इतना ही नहीं परीक्षा में धांधली की बातें भी कही जा रही हैं। लेकिन, इसका सच कुछ और ही है।

कोई गड़बड़ी नहीं हुई
परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों को कहना है कि परीक्षा में किसी तरह की की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। इस मामले में बेवहज सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोग बेवजह परीक्षा को सवालों के घेरे में लाने का काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं यह भी कहा जा रहा है कि परीक्षा पर वो लोग सवाल उठा रहे हैं, जिनका चयन नहीं हो पाया है।

ये है चयन प्रक्रिया
परीक्षा का विज्ञापन जारी होने के साथ ही विज्ञप्ति में साफ किया गया था कि लिखित परीक्षा (स्क्रीनिंग परीक्षा) उसी स्थिति में कराई जाएगी, जब 1500 अधिक आवेदन प्राप्त होंगे। यह भी उल्लेख किया गया है कि स्क्रीनिंग परीक्षा के अंक परिक्षा के अन्तिम परिणाम में नहीं जोड़ी जाएंगे। आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी के पद पर चयन के लिए यह भी शर्त रखी गई थी कि साक्षात्कार के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा में शामिल कुल अभ्यर्थियों में से निर्धारित पदों के सापेक्ष तीन गुना अभ्यर्थियों को ही  शामिल किया जाएगा।

ऐसे हुआ चयन
जहां तक पूर्व मंत्री की बेटी के चयन का सवाल है। उसके पीछे सबसे बड़ी वजह उनका एकेडमिक रिकॉर्ड और अनुभव की सबसे अहम भूमिका है। चयन के लिए 100 नंबर का साक्षात्कार रखा गया था, जिसमें से 10 नंबर का वेटेज PG, 10 नंबर UG (55 प्रतिशत से अधिक अंकों वाले), अधिकतम 20 नंबर सरकारी संस्थानों में संविदा के लिए और 60 प्रतिशत साक्षात्कार पैनल के सवालों के जवाब के आधार पर नंबर दिए जाने थे।

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छंटनी के लिए थी स्क्रीनिंग
स्क्रीनिंग परीक्षा के बाद परिणाम सामने आए, जिसमें SC के अभ्यर्थियों की मैरीट 12.5 थी। जबकि, पूर्व मंत्री की बेटी के 13 नंबर थे। जैसा की विज्ञप्ति में पहले ही साफ किया जा चुका है कि स्क्रीनिंग परीक्षा केवल छंटनी के लिए थी। अंतिम परिण मे इन नंबर शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में धांधली का सवाल ही पूरी तरह से गलत है। चयन प्रक्रिया के अनुसार ही अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि इस तरह से वो लोग सरकार को बदनाम करने का काम कर रहे हैं, जिनका चयन नहीं हो पाया है।

अनुभव वालों को मिला लाभ
चयन के लिए विज्ञप्ति में पहले से ही यह साफ किया गया था कि चयन साक्षात्कार के आधार पर ही होगा। ऐसे में स्क्रीनिंग परीक्षा में अधिक नंबर हासिल करना परीक्षा पर सवाल उठाने का आधार नहीं हो सकता है। अधिकांश उन अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, जिनके पास अच्छा अनुभव था।