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इस दिन होगी परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा की शादी, ये है कार्ड

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बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा और आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की शादी का फैंस लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं. दोनों जब भी पब्लिक में स्पॉट होते तो उनसे ये सवाल जरूर पूछा जाता कि दोनों शादी कब कर रहे हैं. अब इस सवाल का जवाब मिल गया है. दोनों इस महीने ही शादी करने जा रहे हैं. दोनों की शादी का कार्ड सामने आया है, जिससे पता चलता है कि दोनों 24 सितंबर को शादी करेंगे. वहीं शादी की रस्में 23 सितंबर से शुरू होंगी.

Parineeti Raghav Card

परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा की सगाई दिल्ली में हुई थी, जिसमें राजनीति के साथ-साथ बॉलीवुड हस्तियां भी शामिल हुए थे. वहीं अब कपल ने शादी के लिए उदयपुर को चुना है. उदयपुर के लीला पैलेस में दोनों की शादी होगी. शादी से जुड़ी तमाम डिटेल्स आप नीचे देख सकते हैं.

Parineeti Raghva Chaddha Card

  • 23 सिंतबर को सुबह 10 बजे परिणीति चोपड़ा की चूड़ा सेरेमनी होगी.
  • 24 सितंबर को दोपहर एक बजे ताज लेक पैलेस में राघव चड्ढा की सेहराबंदी होगी.
  • दोपहर 2 बजे ताज लेक पैलेस से बारात निकलेगी.
  • लीला पैलेस में 3:30 बजे जयमाला कार्यक्रम होगा.
  • शाम 4 बजे फेरे होंगे और फिर साढ़े 6 बजे परिणीति चोपड़ा की विदाई होगी.
  • 24 की रात को ही साढ़े 8 बजे कोर्टयार्ड में एक रिसेप्शन भी रखा गया है.

Parineeti Chopra Raghav Chadha Cards

23 सितंबर से रस्मों के साथ शादी के फंक्शन्स शुरू होंगे. 24 सितंबर को ताज लेक से राघव चड्ढा बारात लेकर निकलेंगे. 3 बजे जयमाला का कार्यक्रम होगा और फिर 4 बजे फेरे के साथ दोनों सात जन्मों के बंधन में बंध जाएंगे. उसी दिन विदाई भी होगी. विदाई की टाइमिंग 6:30 बजे रखी गई है. उसके बाद उसी रात 8 बजे वहीं एक रिसेप्शन भी होगा.

एनकाउंटर में दो आतंकी ढेर, एक जवान शहीद

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जम्मू-कश्मीर : अनंतनाग जिले में बुधवार को  सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच  मुठभेड़ शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि अनंतनाग के कोकरनाग हलूरा गंडूल इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच गोलीबारी हो रही है। इससे पहले जम्मू संभाग के राजोरी जिले में मंगलवार शाम आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई मुठभेड़ हुई। इसमें दो आतंकियों का मार गिराया गया है।

बुधवार सुबह एक बार फिर ऑपरेशन शुरू हुआ, जिसमें सुरक्षाबलों को सफलता मिली है। हालांकि, मुठभेड़ में सेना का एक जवान भी शहीद हुआ है। इसके अलावा एक पुलिस एसपीओ सहित तीन घायल हुए हैं। एनकाउंटर में भारतीय सेना के कुत्ते केंट, 21 आर्मी डॉग यूनिट की छह वर्षीय मादा लैब्राडोर ने राजोरी मुठभेड़ ऑपरेशन के दौरान अपने हैंडलर की रक्षा करते हुए अपनी जान दे दी।

राजोरी एनकाउंटर को लेकर एडीजीपी जम्मू मुकेश सिंह ने बताया कि दूसरे आतंकी को बुधवार को ढेर कर दिया गया है। मंगलवार शाम को शुरू हुई मुठभेड़ में एक आतंकी को मारा गया था। इसके बाद देर रात को गोलीबारी रुक गई थी। बुधवार सुबह एक बार फिर ऑपरेशन शुरू हुआ, जिसमें सुरक्षाबलों को सफलता मिली है। हालांकि, मुठभेड़ में सेना का एक जवान भी शहीद हुआ है। इसके अलावा एक पुलिस एसपीओ सहित तीन घायल हुए हैं।

आपसी रंजिश में चली गोलियां, 5 लोगों की मौत, 6 घायल

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मध्य प्रदेश के दतिया से बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां सिविल लाइन थाना क्षेत्र के रेंडा गांव में रंजिश के चलते बड़ा गोली कांड हुआ है। जानकारी के अनुसार गोलीकांड में पांच लोगों की मौत हो गई है। दतिया मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का विधानसभा क्षेत्र है।

इसमें 6 लोग घायल बताए जा रहे हैं। बुधवार सुबह खेत से मवेशी भगाने को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। पाल समाज और दांगी समाज के लोगों के बीच फायरिंग हुई। बड़ौनी एसडीओपी विनायक शुक्ला अस्पताल पहुंचे हैं। मामले की जांच की जा रही है। गोलीकांड में घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

 

कोटा में अब NEET की छात्रा ने दी जान, आठ महीनें में 24वां मामला

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कोटा : कोटा में कोचिंग करने वाले स्टूडेंट्स की  आत्महत्या के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। झारखंड की 16 वर्षीय NEET अभ्यर्थी ने राजस्थान जिले के विज्ञान नगर इलाके में अपने छात्रावास के कमरे में कथित तौर पर फांसी लगा ली। इस घटना की जानकारी पुलिस ने बुधवार को दी। उन्होंने बताया कि ऋचा सिन्हा, जो राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी कर रही थी, मंगलवार देर रात अपने छात्रावास के कमरे में लटकी हुई पाई गई।

विज्ञान नगर पुलिस स्टेशन के उप-निरीक्षक के सहायक अमर चंद ने कहा, पुलिस को मंगलवार रात करीब 10.30 बजे सिन्हा की मौत की जानकारी उस निजी अस्पताल से मिली, जहां उन्हें ले जाया गया था।

झारखंड के रांची के रहने वाले सिन्हा 11वीं कक्षा के छात्र थे और उन्होंने शहर के एक कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया था। उन्होंने कहा, वह इस साल की शुरुआत में कोटा आई थीं।

चंद ने कहा कि उनके कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है और पुलिस आत्महत्या के पीछे के कारण की जांच कर रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए एमबीएस अस्पताल भेजा गया है।

कोटा में इस साल किसी कोचिंग संस्थान के छात्र द्वारा आत्महत्या का यह 23वां मामला है। पिछले साल कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे पंद्रह छात्रों ने आत्महत्या कर ली।

कोटा में छात्रों द्वारा आत्महत्या करने के मामले में कमी नहीं आ रही है। हर दिन कोटा से छात्रों द्वारा आत्महत्या करने के मामले सामने आ रहे हैं। छात्रों के माता-पिता में भी अब उन्हें कोटा भेजने से डर रहे हैं। कई छात्रों के माता-पिता उनके साथ कोटा में ही रहने लगे हैं, जिससे वह उनका ध्यान रख सके। वहीं, अब तक बीते 8 महीनों में कुल 24 बच्चों ने आत्महत्या कर ली है।

दुश्मनों की अब खैर नहीं, ‘म्यूल’ करेगा काम-तमाम

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जम्मू: भारतीय सेना अपनी रक्षा प्रणाली को लगातार अपग्रेड कर रही है. जम्मू में एक प्रदर्शनी में सेना की ओर से एक आधुनिक उपकरण को प्रदर्शित किया गया. इस मल्टिपर्पस उपकरण का नाम म्यूल है. इसे मल्टिपर्पस इसलिए कहा गया क्योंकि इसका इस्तेमाल कई उद्देश्यों को पूरा करने में किया जा सकता है. सेना ने इसका निर्माण निजी क्षेत्र के वैज्ञानिकों के साथ किया है. म्यूल एक ऐसा उपकरण है, जो AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर काम करता है. इतना ही नहीं इसे रिमोट से भी चलाया जा सकता है. सेना खुद बंकरों में सुरक्षित रहकर इसकी मदद से दुश्मनों के छक्के छुड़ा सकती है.

इसे ‘म्यूल’  ननाम दिया गया है. इसे बनाने वाली कंपनी के इंजीनियर आर्यन सिंह का कहना है कि इसमें आधुनिक हथियार भी लगाया जा सकता है. यह 12 किलो वजन आसानी से वहन कर सकता है. इसमें हथियार के साथ साथ थर्मल कैमरे भी लगाए जा सकते हैं. सिंह ने कहा कि इसका इस्तेमाल विपरीत परिस्थितियों में भी किया जा सकता है. यह किसी भी क्षेत्र में काम कर सकता है. इसका मुख्य उद्देश्य आस पास की गतिविधियों पर नजर रखना या उसकी जानकारी जुटाना है. इसके बाद उनपर हमला करने की भी क्षमता है. इसमें 45 डिग्री तक के पहाड़ पर चढ़ने की क्षमता है. 18 सेंटीमीटर तक की सीढियां आसानी से चढ़ सकता है. इस उपकरण को रिमोट कंट्रोल से नियंत्रित किया जाता है.

लेफ्टिनेंट कर्नल मिहिर ने कहा कि ‘इसे 3 हिस्सों में बांटा गया है. इसके एक हिस्से में हथियार जैसे LMG, राइफल और कार्बाइन लगाए जा सकते हैं. दूसरे हिस्से में AI-आधारित लैपटॉप लगाया जा सकता है. वहीं, तीसरे हिस्से में कंट्रोल बॉक्स. इसे दो मोड में रखा जा सकता है. इंडिपेंडेट और मैनुअल. ऑटोमेटिक मोड में यह ड्रोन का स्वयं पता लगाता है. इसके बाद आब्जेक्ट को ट्रैक करता है. इससे ऑपरेटर टारगेट को अपने हिसाब से भेद सकता है. इसे MCEME ने विकसित किया है. इसमें एक फायरिंग प्लेटफॉर्म भी दिया जा सकता है. एलटीई और वाई-फाई बैंड दोनों का उपयोग किया गया है. छोटी दूरी के लिए, वाई-फाई इस्तेमाल किया जा सकता है. एलटीई का इस्तेमाल 10 किमी तक की दूरी के लिए किया जा सकता है.

उत्तराखंड : गहरी खाई में गिरी बोलेरो, दो युवकों की मौत

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टिहरी: टिहरी जिले के तहसील नरेंद्रनगर क्षेत्रांतर्गत हिंडोलाखाल-नीरगड्डू मोटर मार्ग पर एक बोलेरो वाहन खाई में गिर गई। इस हादसे में चार लोग घायल हो गए. जबकि दो लोगों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वाहन ऋषिकेश से आगरखाल की ओर जा रहा था।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट ने बताया कि कखुर के पास सड़क से नीचे खाई में गिरने से दुघर्टनाग्रस्त हो गई। वाहन में कुल 6 लोग सवार थे। चार लोगों को एम्स ऋषिकेश भेजा गया। जबकि दो लोगों को नरेंद्रनगर अस्पताल ले जाया गया।

बताया कि एम्स से मिली जानकारी के अनुसार दो घायलों बबलू उर्फ संजीत एवं दिलबर की मौत हो गई है।अन्य सभी घायल ठीक हैं।

वाहन सवार

दिलबर पुत्र ज्ञान सिंह ( 35 वर्ष) निवासी ग्राम

कोथली कुसराणी ,नरेंद्र नगर।

शीला पत्नी दिलबर (30 वर्ष) पता उपरोक्त।

आरव पुत्र दिलबर (6 वर्ष)

शिवांशी पुत्री दिलबर (4 वर्ष)

बबलू उर्फ संजीत पुत्र रणजीत सिंह (25 वर्ष)

सुनील पुत्र छप्पन सिहं (26)

आजम खान के ठिकानों पर रामपुर से लखनऊ तक इनकम टैक्स के छापे

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आजम खान पर एक नई मुसीबत आ गई है. रामपुर से लखनऊ तक उनके कई ठिकानों पर इनकम टैक्स की रेड चल रही है. लखनऊ, रामपुर, मेरठ, गाजियाबाद, सहारनपुर, सीतापुर में छापेमारी चल रही है. ट्रस्ट इनकम टैक्स के निशाने पर आजम खान का अल जौहर ट्रस्ट भी है. बताया जा रहा है कि आजम खान ने जो हलफनामा कोर्ट में दिया था उसमें कमियां पाई गई थीं.

सपा नेता ने पूरे परिवार का हलफनामा दिया था. इसमें जो बैंक डिटेल दिए गए थे, उसमें बहुत सारी गड़बड़ियां थीं. इसके अलावा कुछ ऐसी भी संपत्तियां थीं, जिसका जिक्र हलफनामे में नहीं किया गया था. वहीं, अल जौहर ट्रस्ट के डिटेल को लेकर भी कुछ सवाल थे, जो आईटी डिपार्टमेंट को नहीं मिल पाए थे. इसके बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में उनके ठिकानों पर छापेमारी शुरू की.

आजम खान इन दिनों अपने सबसे बुके दौर से गुजर रहे हैं. उनके ऊपर कई सारे आरोप हैं. कुछ महीने पहले हेट स्पीच मामले में रामपुर की एक अदालत ने दो साल की सजा सुनाई थी. इसके अलावा कोर्ट ने 1000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था. फिलहाल सपा नेता जमानत पर बाहर हैं. बता दें कि साल 2019 में एक भड़काऊ भाषण दिया था. इसको लेकर रामपुर के शहजादनगर के थाने में केस दर्ज हुआ था.

मराठा आरक्षण पर मझधार में फंसी BJP, नाराज OBC से कैसे बैठाएगी संतुलन?

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महाराष्ट्र : महराष्ट्र सियासत में लंबे वक्त से कुछ ना कुछ ऐसा हो रहा ह, जिससे महाराष्ट्र चर्चाओं में है. अब मराठा आरक्षण को लेकर काफी लंबे समय से मांग उठती रही है, लेकिन एक बार फिर यह मुद्दा गरमा गया है. मराठा आरक्षण की लड़ाई लड़ रहे मनोज जरांगे मराठों को कुनबी जाति का प्रमाण पत्र देकर ओबीसी कोटे से आरक्षण देने की मांग पर आमरण अनशन कर रहे हैं.

ऐसे में शिंदे सरकार ने मराठा समुदाय को कुनबी जाति के तहत आरक्षण देने की वकालत कर रही है, जिसे लेकर ओबीसी समुदाय विरोध में उतर आया है. मराठों को ओबीसी कोटे से आरक्षण देने का विरोध कर रहे हैं. मराठों के आरक्षण को लेकर लेकर बीजेपी-शिंदे सरकार सियासी मझधार में फंस गई है. ऐसे में देखना है कि कैसे आरक्षण के मझधार से पार पाती है?

मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सोमवार देर शाम महाराष्ट्र में हुई सर्वदलीय बैठक में सहमति बन गई है. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आश्वासन दिया है कि अन्य समाज के आरक्षण में बिना छेड़छाड़ किए मराठा आरक्षण लागू किया जाएगा. सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि मनोज पाटिल के भूख हड़ताल को ध्यान में रखते हुए हम उनसे विनती करते हैं कि वह अपना अनशन वापस लें. मनोज जरांगे पाटिल की सेहत की हमें चिंता है.
TV-9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के अनुसार सर्वदलीय बैठक में सभी ने एक साथ मांग किया है कि सरकार मनोज जरांगे पाटिल की मांग को लेकर काम करे. साथ ही भरोसा दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किया गया मराठा आरक्षण बहाल किया जाएगा. उन्होंने बताया कि जस्टिस शिंदे समिति मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग पर काम कर रही है और राज्य सरकार को कानूनी रूप से इसे लागू करने के लिए कुछ समय चाहिए.
बता दें कि महाराष्ट्र में पिछले चार दशकों से मराठा आरक्षण की मांग चल रही है. इस बीच तमाम पार्टियों की सरकारें आईं और गईं, लेकिन अभी तक किसी ने भी मराठा आरक्षण को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका. मराठा समुदाय लंबे समय से सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण की मांग कर रहे है. तीन दशक पहले मराठा आरक्षण को लेकर पहली बार महाराष्ट्र में आंदोलन हुआ था. यह आंदोलन मठाड़ी लेबर यूनियन के नेता अन्नासाहब पाटिल की अगुवाई में हुआ था. इसके बाद से समय-समय पर मराठा आरक्षण को लेकर आवाज उठती रही और कई बार आंदोलन हिंसक रूप भी अख्तियार कर चुका है. महाराष्ट्र में ज्यादातर समय मराठा समुदाय के मुख्यमंत्रियों के होने के बावजूद कोई हल नहीं निकल सका.
साल 2014 के चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मराठाओं को 16 फीसदी आरक्षण देने के लिए अध्यादेश लेकर आए थे, लेकिन 2014 में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार चुनाव हार गई और बीजेपी-शिवसेना की सरकार में देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने. फडणवीस सरकार में मराठा आरक्षण को लेकर एमजी गायकवाड़ की अध्यक्षता में एक आयोग बना.

 

कमेटी की सिफारिश के आधार पर फडणवीस सरकार ने सोशल एंड एजुकेशनली बैकवर्ड क्लास एक्ट के विशेष प्रावधानों के तहत मराठाओं को 16 फीसदी आरक्षण दिया, पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों में 13 फीसदी और शैक्षणिक संस्थानों में 12 फीसदी कर दिया. फिर साल 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस फैसले को पूरी तरह ही रद्द कर दिया.

महाराष्ट्र में चुनाव भी दस्तक देने को हैं और उससे पहले लोकसभा चुनाव भी है. ऐसे में मराठा आरक्षण को लेकर उठी मांग राज्य सरकार के लिए बड़ी चिंता का सबब बन गई है. मराठा आरक्षण को लेकर पिछले दो सप्ताह से आंदोलन चल रहा है और मराठाओं के लिए ओबीसी का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे हैं. इनका कहना है कि सितंबर 1948 तक निजाम का शासन खत्म होने तक मराठाओं को कुनबी जाति में माना जाता था और ये ओबीसी वर्ग में आते थे. इसलिए अब फिर इन्हें कुनबी जाति का दर्जा दिया जाए और ओबीसी में शामिल किया जाए.

महाराष्ट्र में कुनबी जाति ओबीसी में आते हैं. कुनबी जाति के लोगों को सरकारी नौकरियों से लेकर शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण मिलता है. मराठवाड़ा क्षेत्र महाराष्ट्र का हिस्सा बनने से पहले तत्कालीन हैदराबाद रियासत में शामिल था. मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अनशन पर बैठे मनोज जरांगे का कहना है कि जब तक मराठियों को कुनबी जाति का सर्टिफिकेट नहीं दिया जाता, तब तक भूख हड़ताल खत्म नहीं होगी. मराठा समुदाय के बढ़ते दबाव के चलते शिंदे-बीजेपी गठबंधन सरकार ने मराठा समुदाय को कुनबी जाति का प्रणाण पत्र जारी करने का एक आदेश जारी कर दिया, जिसके चलते अब ओबीसी समुदाय नाराज हो गए हैं,

नागपुर में ओबीसी समाज भी मराठों को ओबीसी कोटे से आरक्षण देने के विरोध में उतर गए थे. इस आंदोलन में बीजेपी और कांग्रेस के ओबीसी नेता भी शामिल हुए. विरोध में बीजेपी के ओबीसी मोर्चा के नेता आशीष देशमुख और कांग्रेस के नेता तथा महाराष्ट्र विधानसभा में नेता विपक्ष विजय वडेट्टीवार भी शामिल हुए. देशमुख ने कहा कि मराठा आर्थिक रूप से पिछड़े नहीं हैं और उन्हें ओबीसी कोटे से आधा फीसदी भी आरक्षण नहीं मिलना चाहिए, वरना हमारे लिए आंदोलन के रास्ते खुले हैं.

कांग्रेस के ओबीसी नेता वडेट्टीवार ने कहा कि कांग्रेस मराठों को आरक्षण देने के खिलाफ नहीं है, लेकिन ओबीसी कोटे से मराठों को आरक्षण देने पर मेरा विरोध है. सरकार चाहे तो ईडब्ल्यूएस कोटे से मराठों को आरक्षण दे सकती है या फिर आरक्षण की लिमिट बढ़ा सकती है, लेकिन ओबीसी कोटे में शामिल न किया जाए.

महाराष्ट्र में मराठों की आबादी 28 से 33 फीसदी है. महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में से 20 से 22 सीटें और विधानसभा की 288 सीटों में से 80 से 85 सीटों पर मराठा वोट निर्णायक माना जाता है. साल 1960 में महाराष्ट्र के गठन के बाद से अब तक यानी साल 2023 तक 20 में से 12 मुख्यमंत्री मराठा समुदाय से ही रहे हैं. राज्य के वर्तमान मंत्री मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी मराठा ही हैं. वहीं, ओबीसी समुदाय भी बड़ी संख्या में है, जो किसी भी दल का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं.

मराठा समुदाय कभी भी बीजेपी का परंपरागत वोटर नहीं रहा है. मराठों की पसंद एनसीपी और शिवसेना हुआ करती थी. उसके बाद कांग्रेस पसंद रही है. बीजेपी का मूल वोटर महाराष्ट्र में शुरू से ही ओबीसी रहा है. इसके बावजूद 2018 में देवेंद्र फणडवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने मराठा समुदाय के लिए आरक्षण दिया था, लेकिन कोर्ट से ब्रेक लग गया.

उद्धव ठाकरे का तख्तापलट करके आए एकनाथ शिंदे मराठा है तो अपने चाचा से बगावत करके आए अजित पवार भी मराठा समुदाय से हैं. ऐसे में शिंदे सरकार ने मराठा समुदाय को कुनबी जाति के तहत आरक्षण देने का रास्ता निकाला, लेकिन अब उससे बीजेपी के नेता ही नाराज हो गए हैं. यही वजह है कि अब शिंदे को कहना पड़ रहा है कि बिना किसी के आरक्षण को छेड़छाड़ किए मराठ समाज को आरक्षण देने का रास्ता तलाशेंगे.

उत्तराखंड: कैबिनेट बैठक में इन फैसलों पर मुहर

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बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। बैठक में करीब 30 प्रस्तावों पर चर्चा के बाद अहम फैसले लिए गए।

 

सचिवालय प्रसाशन मे निजी सचिव परीक्षा मामले मे हाई कोर्ट गए 4 अभ्यर्थियों को अनुमान्य किया गया।

 

औली विकास प्राधिकरण का निर्माण किया गया जों औली मे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बनाया जाएगा।

 

उधम सिंह नगर में गैस आधारित प्लांट को चलाने के लिए विदेशो से आने वाली गैस मे वेट जीरो था। अब CNG पर भी वेट 0 किया गया।

 

बद्रीनाथ मे विभिन्न कलाकृतियों और वहां के इतिहास के बारे में बताने का काम किया जाएगा। जिसने मास्टर प्लान बनाया वही INI डिजाइन स्टूडियो को काम करेगा।

 

ऊर्जा में पम्प स्टोरेज प्लांट पॉलिसी बनाई गई। इसमें नॉन पीक ऑवर में इनका उपयोग होगा।

 

इस पॉलिसी के तहत 12 प्रतिशत बिजली नहीं देनी होगी राज्य को, लैंड अलॉटमेंट भी प्राथमिकता के आधार पर होगा।

क्या महंगी होंगी डीजल गाड़ियां? इसलिए हो रही चर्चा

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डीजल से चलने वाले वाहन मंहगे हो सकते है. ऐसे में उन लोगों को झटका लग सकता है, जो डीजल वाहन खरीदने का प्लान बना ररह हैं. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी देश में डीजल की गाड़ियों पर लगाम लगाने की तैयारी कर रहे हैं. यह फैसला वायु प्रदूषण को कम करने के लिए लिया जा सकता है. नितिन गडकरी ने डीजल से चलने वाले इंजनों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त जीएसटी लगाने का प्रस्ताव रखा है.

नितिन गडकरी ये बात सियाम (सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स) के एक कार्यक्रम में कही. हालांकि बाद में उन्होंने इसे लेकर ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए साफ किया कि सरकार हाल-फिलहाल में इस तरह के किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है.

गडकरी का कहना है कि ऑटो इंडस्ट्री को इस बारे में खुद से एक्शन लेना चाहिए. डीजल गाड़ियों को ‘बाय-बाय’ कह देना चाहिए. नहीं तो सरकार उन पर इतना टैक्स बढ़ा देगी कि कंपनियों के लिए उन्हें बेचना मुश्किल हो जाएगा.

2014 से अब तक देश में डीजल कारों की संख्या गिरी है. नौ साल पहले ये कुल कारों का करीब 33.5 प्रतिशत थीं, जो अब घटकर 28 प्रतिशत रह गई हैं. गडकरी ने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार के इस कदम का मकसद ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को डीजल से हटाकर साफ और स्वच्छ ईंधन विकल्प पर तेजी से मोड़ना है.

बाद में नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखे पोस्ट में कहा कि सरकार 2070 तक ‘कार्बन नेट जीरो’ का लक्ष्य रखा है.साथ ही वायु प्रदूषण के स्तर में कमी लाने का लक्ष्य तय किया है, क्योंकि डीजल जैसे खतरनाक ईंधन बड़ी मात्रा में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि ज्यादा पर्यावरण हितैषी ईंधन विकल्पों को अपनाने पर जोर दिया जाए.