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शीतकालीन चार धाम तीर्थ यात्रा पहुंची खरसाली गांव उत्तरकाशी। मां यमुना आरती का वीडियो

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खरसाली, उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड 27 दिसंबर

शीतकालीन चार धाम तीर्थ यात्रा

शीतकालीन चारधाम तीर्थ यात्रा के क्रम में भगवती यमुना जी की शीतकालीन पूजा स्थली खरसाली गांव के यमुना मन्दिर में पहुंचे ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती जी महाराज, मां यमुना जी की महापूजा के बाद काशी के विद्वानों द्वारा भव्य यमुना आरती सम्पन्न।

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कांग्रेस की ‘भारत न्याय यात्रा’ का ऐलान

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नई दिल्ली, 27 दिसंबर:

कांग्रेस पार्टी ने ‘ भारत जोड़ो यात्रा’ की सफलता के बाद अब इसका दूसरा भाग, ‘भारत न्याय यात्रा’ का ऐलान किया है।

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‘भारत न्याय यात्रा’ की शुरुआत पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर से होगी, जो पश्चिम में महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में जाकर खत्म होगी। इस तरह राहुल गांधी ‘भारत न्याय यात्रा’ में पूरब से पश्चिम की ओर सफर करने वाले हैं। पूरी यात्रा में 6200 किमी सफर तय किया जाएगा। ज्यादातर यात्रा बस के जरिए कवर की जाएगी और कई स्थानों पर पैदल भी सफर किया जाएगा। ‘भारत न्याय यात्रा’ को ‘ भारत जोड़ो यात्रा’ का दूसरा संस्कृरण बताया गया है, जिसकी शुरुआत 14 जनवरी 2023 से होगी।

कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 14 जनवरी को मणिपुर में ‘भारत न्याय यात्रा’ को झंडा दिखाकर, यात्रा की आधिकारिक शुरुवात करेंगे। ये यात्रा 20 मार्च 23 को जाकर मुंबई में खत्म होगी। ‘भारत न्याय यात्रा’ 14 राज्यों के 85 जिलों से होकर गुजरेगी। मणिपुर, नागालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से ‘भारत न्याय यात्रा’ अपना सफर तय करेगी।

शीतकालीन चार धाम यात्रा आरंभ

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हरिद्वार, 27 दिसंबर:

आज प्रात हरिद्वार के चण्डी घाट (नमामि गंगे घाट) पर गंगा जी की पूजा और आरती करके पूज्यपाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ जी महाराज ने शीतकालीन चार धाम तीर्थ यात्रा का आरंभ करी।

 

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वीर बाल दिवस सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक: राज्यपाल ले.ज. ( से.नि.) गुरमीत सिंह

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वीर बाल दिवस

वीर सपूतों ने राष्ट्र धर्म के लिए दिया सर्वोच्च बलिदान: राज्यपाल लेप्टिनेंट जनरल ( से. नि.) गुरमीत सिंह

देहरादून:, 26 दिसम्बर।राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने वीर बाल दिवस के अवसर पर कहा कि आज वीर साहिबजादों के त्याग, बलिदान, शौर्य व पराक्रम की पराकाष्टा को याद करने का दिन है जिन्होंने अपने राष्ट्र धर्म और अपनी संस्कृति के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन वीर सपूतों ने हमें यह बताया कि एक समाज और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान किस प्रकार होना चाहिए। सर्वोच्च बलिदान का यह उदाहरण पूरी मानवता में अलग ही है। उन्होंने कहा कि नन्हें साहिबजादों ने क्रूर अत्याचारियों की बात नहीं मानते हुए सिख धर्म की उस महान परंपरा को आगे बढ़ाया जिसमें अन्यायी शासकों के सामने कभी न झुकने की महान शिक्षा दी है।

वीर बाल दिवस के अवसर पर राजभवन में संस्कृत विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह और माता गुजरी को श्रद्धांजलि अर्पित कर नमन किया। उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह के महान बलिदानी पुत्रों की शहादत को वीर बाल दिवस के रूप में मनाये जाने की सोच के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी ने ऐसे योद्धाओं के बलिदान को चिरस्थायी बनाने का जो कार्य किया है उसे युगों-युगों तक याद किया जाएगा।

राज्यपाल ने कहा कि वीर बाल दिवस समरसता व सामाजिक एकता का प्रेरणापूंज है। उन्होंने कहा कि वीर बाल दिवस का संदेश पूरी दुनिया और मानवता को स्वाभिमानपूर्ण साहस और बलिदान से अवगत कराएगा। उन्होंने कहा कि यह दिवस राष्ट्र भक्ति के लिए करोड़ों बच्चों को प्रेरित करेगा। राज्यपाल ने कहा कि वीर साहिबजादों के बलिदान से हमें विषम परिस्थितियों में अपने आप को संयमित रखने की सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि सिख धर्म, धर्म ही नहीं बल्कि राष्ट्रप्रेम की भावना के साथ जीवन जीने की सभ्यता है। सिख धर्म ने पूरे भारत को एक भारत, श्रेष्ठ भारत का मार्ग प्रशस्त किया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो संदेश के जरिये गुरु गोबिंद सिंह के चार वीर साहिबजादों को उनकी धर्म, निष्ठा, अनुकरणीय साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए कोटि-कोटि नमन करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति व धर्म की रक्षा के लिए दी गई इस शहादत जैसा दूसरा कोई उदाहरण शायद ही हमें कहीं और सुनने या देखने को मिलता हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर बाल दिवस हमें याद दिलाता है कि धर्म, निष्ठा और शौर्य की पराकाष्टा के समय आयु मायने नहीं रखती यह दिन हमें चार साहिबजादों विशेष रूप से उनके पुत्र जोरावर सिंह और फतेह सिंह द्वारा छोटी सी आयु में सिख परंपरा और देश के स्वाभिमान के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान के लिए याद दिलाता है।

उन्होंने कहा कि सभी सिख गुरुजनों ने हमेशा राष्ट्र को प्रथम रखते हुए पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोन का कार्य किया है और पूरी दुनिया में मानवता की सेवा के लिए अपने निशान छोड़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार की शहादत को आज भी इतिहास की सबसे बड़ी शहादत माना जाता है। उन्होंने कहा कि कृतज्ञ राष्ट्र गुरु पुत्रों के बलिदान को सदेव स्मरण रखेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार विरासत और विकास दोनों को महत्व देती है इसलिए हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने चार साहिबजादों के सर्वोच्च बलिदान को सम्मान देते हुए देश भर में 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

वीर बाल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हेमकुंड मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा और पंजाब विश्वविद्यालय के प्रो. दलजीत सिंह ने वीर साहिबजादों को याद करते हुए इस दिवस के महत्व पर अपने वक्तव्य रखे। इस अवसर पर श्री तरनजीत सिंह सेठी द्वारा वीर साहिबजादों पर आधारित शबद कीर्तन और कृत कौर द्वारा एक कविता सुनाई गई।

  • कार्यक्रम में संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चन्द्र शास्त्री ने सभी उपस्थित गणमान्य लोगों का स्वागत किया। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. दिनेश चन्द्र शास्त्री द्वारा एक वर्ष के दौरान किये गये कार्यों एवं उपलब्धियों से संबंधित कॉफी टेबल बुक ‘‘आरोही’’ का विमोचन राज्यपाल के द्वारा किया गया। वीर बाल दिवस के अवसर में विधि परामर्शी राज्यपाल अमित कुमार सिरोही, अपर सचिव राज्यपाल स्वाति एस. भदौरिया, तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओंकार सिंह, वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. परविंदर कौशल, चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. हेम चंद्र, आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी, प्रबंधक गुरुद्वारा रीठा साहिब बाबा श्याम सिंह, उपाध्यक्ष राज्य किसान आयोग राजपाल सिंह, उपाध्यक्ष राज्य अल्पसंख्यक आयोग इकबाल सिंह, पंजाबी सिंह सभा और राष्ट्रीय सिंह संगत के सदस्यगण एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

सरकारी झूठ के विरुद्ध अंतिम व निर्णायक आंदोलन: राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच

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देहरादून, 26 दिसंबर:

आज शहीद स्मारक देहरादून में पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सयुंक्त मंच के तत्वावधान में राज्य आंदोलनकारियों को राजकीय सेवाओं में 10% क्षैतिज आरक्षण बहाल करने व चिन्हीकरण की प्रक्रिया पूर्ण करने की माँग को लेकर अंतिम व निर्णायक आंदोलन प्रारंभ कर दिया गया।

सँयुक्त मंच के संयोजक क्रांति कुकरेती ने कहा कि “लंबे संघर्ष के बावजूद सरकार केवल झूठ बोल रही है, झूठे विज्ञापन जारी कर रही है और झूठे आँसू बहा रही है। सदन में बहाए गये आँसू और सदन को दिया गया वचन दोनों नकली सिद्ध हुए। इसलिए 14 दिसंबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिये गये वक्तयव के अनुसार 26 दिसम्बर से सरकारी झूठ के विरुद्ध निर्णायक आंदोलन के लिए विवश होकर हम शहीद स्मारक पर बैठे हैं “।

आज सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से आंदोलनकारी सुनीता ठाकुर ने एक नोटिस मुख्यमंत्री को भेजा है। शहीद स्मारक पर मोहन सिंह रावत, सुनीता ठाकुर, अंबुज शर्मा, विनोद असवाल, सूर्यकांत शर्मा, अजय शर्मा, बाल गोविंद डोभाल, हरदेव रावत, मुन्नी खंडूरी, पुष्पा रावत, रेखा शर्मा, सावित्री पंवार,धर्मानन्द भट्ट , विशम्भर दत्त बौंठियाल, प्रांजल नौडियाल, क्रांति कुकरेती आदि आंदोलनकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

जम्मू कश्मीर में शहीद हुए वीर जवानों को मुख्य मंत्री ने श्रद्धांजलि दी

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राजोरी- पुंछ( जम्मू- कश्मीर) में
आतंक के खिलाफ लड़ते हुए
उत्तराखंड के लाल हुए शहीद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

जौलीग्रांट/ देहरादून: 25
दिसंबर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचकर जम्मू कश्मीर में माँ भारती की सेवा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले कोटद्वार निवासी राइफलमैन गौतम कुमार और ग्राम बमियाला नारायण बगड़ -चमोली निवासी वीरेन्द्र सिंह के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

  1. मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले हमारे इन शहीदों को देश हमेशा याद रखेगा। राज्य सरकार हर पल सैनिक परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने शहीद गौतम कुमार और वीरेन्द्र सिंह के परिजनों से बात कर ढांढस बंधाया। दिवंगत आत्माओं की शांति और दुःख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की मुख्यमंत्री ने ईश्वर से कामना की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र रक्षा के लिए हमारे जवानों द्वारा दिया गया बलिदान सदैव हम सभी को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

ऐतिहासिक होगी शीतकालीन चार धाम तीर्थ यात्रा: मुख्य मंत्री धामी

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देहरादून,24 दिसम्बर 2023

सप्त दिवसीय शीतकालीन तीर्थ यात्रा की शुरुआत आगामी 27 दिसम्बर से होगी। यह ऐतिहासिक *शीतकालीन चारधाम तीर्थ यात्रा* ‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ के पावन सान्निध्य में हो रही है। यात्रा के आमंत्रण के लिए ज्योतिर्मठ का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से मिला । उन्हें यात्रा का आमंत्रण पत्र दिया । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शंकराचार्य जी की यात्रा के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की है ।

IMG 20231224 WA0020उल्लेखनीय है कि आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा ढाई हजार वर्ष पूर्व स्थापित परंपराओं का निर्वहन करते हुए ज्योतिष्पीठ पीठ के शंकराचार्य शीतकालीन पूजा स्थलों की तीर्थ यात्रा कर रहे हैं। आदिगुरु शंकराचार्य परंपरा के इतिहास में यह पहला अवसर है कि जब ज्योतिष्पीठ के आचार्य द्वारा उत्तराखंड स्थित चार धामों के पूजा स्थलों की तीर्थ यात्रा की जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शंकराचार्य जी की यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि उनकी तीर्थ यात्रा से चारों धामों में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस अवसर पर चार धाम यात्रा की मंगल कामनाएं प्रेषित की ।

जगतगुरु शंकराचार्य जी की चार धामों की यात्रा 27 दिसम्बर से प्रारंभ हो रही है । इस यात्रा का समापन आगामी 2 जनवरी को हरिद्वार में समाप्त होगी ।

प्रतिनिधिमंडल में ज्योतिर्मठ प्रभारी ब्रह्मचारी मुकुन्दानन्द, ब्रह्मचारी श्रवणानन्द ,ज्योतिर्मठ मीडिया प्रभारी डॉक्टर बृजेश सती, प्रवीण नौटियाल, देवेन्द्र धर, रजनीश, विकास, गौरव आदि शामिल रहे।

डाॅ श्वेता व्यास को प्रो.एच.जे. अर्निकर अवार्ड

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उत्तराखंड भू कानून समिति की अनुशंसा से उच्चस्तरीय समिति गठित

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भू कानून समिति की अनुशंसा से कानून के लिए उच्चस्तरीय समिति।

देहरादून 23 दिसंबर।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य के व्यापक हित में पूर्व में गठित भू-कानून समिति की अनुशंसा पर कार्यवाही हेतु शासनादेश सं0 2232 दिनांक 22 दिसम्बर, 2023 द्वारा उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति राज्य सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले भू-कानून के प्रारूप के साथ ही साथ मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में मानकों का निर्धारण करने के संबंध में भी अपनी संस्तुति शासन को उपलब्ध कराएगी।*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त होने के बाद उसी वर्ष अगस्त माह में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति को राज्य में औद्योगिक विकास कार्यों हेतु भूमि की आवश्यकता तथा राज्य में उपलब्ध भूमि के संरक्षण के मध्य संतुलन को ध्यान में रख कर विकास कार्य प्रभावित न हों, इसको दृष्टिगत रखते हुए विचार – विमर्श कर अपनी संस्तुति सरकार को उपलब्ध कराने को कहा था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में गठित समिति द्वारा राज्य के हितबद्ध पक्षकारों, विभिन्न संगठनों, संस्थाओं से सुझाव आमंत्रित कर गहन विचार -विमर्श कर लगभग 80 पृष्ठों में अपनी रिपोर्ट तैयार की थी। इसके अलावा समिति ने सभी जिलाधिकारियों से प्रदेश में अब तक दी गई भूमि क्रय की स्वीकृतियों का विवरण मांग कर उनका परीक्षण भी किया। समिति ने अपनी संस्तुतियों में ऐसे बिंदुओं को सम्मिलित किया है जिससे राज्य में विकास के लिए निवेश बढ़े और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो। साथ ही भूमि का अनावश्यक दुरूपयोग रोकने की भी समिति ने अनुशंसा की है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनके लिये राज्य हित सर्वोपरि है। राज्यवासियों ने जिस संकल्प के साथ राज्य निर्माण का सपना देखा है उसको पूर्ण करने के लिये वे निरंतर प्रयासरत है। राज्यवासियों का राज्य हित से जुड़ा भू-कानून हो या मूल निवास प्रमाण पत्र का विषय इस दिशा मे राज्य सरकार संजीदगी के साथ राज्यवासियों के साथ है। इसी के दृष्टिगत इन विषयों पर सम्यक रूप से विचार विमर्श कर अपनी सुस्पष्ट संस्तुति राज्य सरकार को उपलब्ध कराने के लिये ही अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। जिसमें विषय विशेषज्ञ के रूप में अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। उक्त समिति भू-क़ानून को लागू करने के प्रारूप के साथ ही मूल निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाने हेतु मानकों के निर्धारण का कार्य भी करेगी।

शीतकालीन चारधाम तीर्थ यात्रा ऐतिहासिक पहल

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हरिद्वार, उत्तराखंड 23 दिसम्बर 2023

“भारत की आध्यात्मिक उन्नति में यदि साधु-सन्तों का योगदान है तो आर्थिक उन्नति में भी भारत के सन्त पीछे नहीं रहे हैं । भगवान वेदव्यास जी ने वेद के चार विभाग किए , 18 पुराणों व उप-पुराणों की रचना की और उसमें यह स्पष्ट रूप से निरूपित किया कि भारत के इन तीर्थों में जाकर दर्शन करने से पुण्यलाभ होगा । आज देश में जो भी धार्मिक यात्राएं चल रही है वे सभी हमारे पूर्वज ऋषि – मुनियों की देन है और आप सब भी इन बात को स्पष्ट रूप से समझते ही हैं कि उत्तराखण्ड में आर्थिक उन्नति के पीछे इन धार्मिक यात्राओं का बहुत बडा योगदान है” उक्त बातें ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ जी महाराज ने अपनी आगामी शीतकालीन चारधाम तीर्थ यात्रा को लेकर समस्त देशवासियों को सन्देश देते हुए कही है ।Screenshot 2023 12 23 16 13 12 50 6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7

शीतकालीन चारधाम तीर्थ यात्रा ऐतिहासिक पहल है, ज्ञात इतिहास में पहली बार कोई शंकराचार्य ऐसी यात्रा कर रहे हैं

यह सर्वविदित है कि शीतकाल के छः मास उत्तराखण्ड के चार धामों की बागडोर देवताओं को सौंप दी जाती है और उन स्थानों पर प्रतिष्ठित चल मूर्तियों को शीतकालीन पूजन स्थलों में विधि-विधान से उत्सव सहित विराजमान कर दिया जाता है । इन स्थानों पर भी देवता की पूजा छः मास तक पारम्परिक पुजारी आदि निरन्तर करते रहते हैं परन्तु सामान्य लोगों में यह धारणा बनी रहती है कि अब छः मास के लिए पट बन्द हुए तो देवताओं के दर्शन भी दुर्लभ होंगे ।

ज्योतिर्मठ के प्रभारी मुकुन्दानन्द ब्रह्मचारी ने बताया कि जन-सामान्य की इसी अवधारणा को हटाने और उत्तराखण्ड की शीतकालीन चारधाम तीर्थ यात्रा को आरम्भ कर देवताओं के इन शीतकालीन प्रवास स्थल पर दर्शन की परम्परा का शुभारम्भ करने के लिए ‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती 1008 जी आगामी मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा तदनुसार दिनांक 26 दिसम्बर 2023 को देवभूमि उत्तराखण्ड के हरिद्वार स्थित अपने आश्रम में पहुँच रहे हैं ।
27 दिसम्बर 2023 से 2 जनवरी 2024 तक चलेगी ये यात्रा ।

देव-दर्शन से जहाँ एक ओर यात्रियों को धार्मिक-आध्यात्मिक लाभ होगा वहीं इस यात्रा से पहाड़ के स्थानीय लोगों का भौतिक लाभ भी निहित है ।

कार्यक्रम विवरण
27/12/23 को प्रातः 8 बजे हरिद्वार स्थित- श्रीशंकराचार्य मठ, ज्ञानलोक कालोनी, फेज 2- , कनखल, हरिद्वार से निकलकर – ऋषिकेश – देहरादून – मसूरी – यमुना पुल – नैनबाग – डामटा – नौगाव – बड़कोट – छटांगा- खरादी – कुथनौर- कुनसाला – राना – हनुमान चट्टी – जानकी चट्टी – होते हुए यमुना जी की शीतकालीन पूजा स्थली खरसाली गांव आगमन ।
सायं 3:30 बजे से यमुना मन्दिर परिसर में धर्मसभा / यमुना जी की आरती के बाद खरसाली गांव में रात्रि-विश्राम करेंगे ।

28/12/23 को प्रातः 10 बजे यमुना जी की शीतकालीन पूजा स्थली खरसाली गांव से प्रस्थान कर – बडकोट- होते हुए उत्तरकाशी आगमन ।

सायं 4 बजे श्री विश्वनाथ संस्कृत महाविद्यालय, उजेली, उत्तरकाशी में आयोजित अभिनन्दन सभा में पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज का आशीर्वचन सभी भक्तों को प्राप्त होगा ।
रात्रि-विश्राम – श्रीविश्वनाथ संस्कृत विद्यालय परिषद भवन , उजेली, उत्तरकाशी में ।

29/12/23 श्रीविश्वनाथ संस्कृत महाविद्यालय परिषद भवन से प्रातः 8 बजे भटवाडी- गंगनानी – हर्षिल होते हुए गंगा जी की शीतकालीन पूजा स्थली मुखवा गांव पहुँच आगमन ।

मध्याह्न 11 बजे से 1 बजे तक मुखवा गांव में भगवती जी की पूजा / आशीर्वचन सभा / महाआरती/ भण्डारा आदि सम्पन्न होगा ।
मध्याह्न 1 बजे मुखवा गांव से उत्तरकाशी की ओर रवाना होंगे ।
सायं 5 बजे गंगा घाट, कैलास आश्रम, उजेली, उत्तरकाशी में भगवती गंगा जी की महाआरती श्रीशंकराचार्य जी महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न की जाएगी ।
रात्रि-विश्राम- उत्तरकाशी में ।

30/12/23 को प्रातः भगवान काशी विश्वनाथ जी के दर्शन के बाद 9 बजे उत्तरकाशी से चमियाला – घनशाली – जाखोली- तिलवाडा- अगस्तमुनि- होते हुए भगवान केदारनाथ जी की शीतकालीन पूजा स्थली ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मन्दिर में सायं 3:30 बजे स्वागत / आशीर्वचन/ भगवान ओंकारेश्वर जी की महाआरती/ प्रसाद वितरण किया जाएगा ।
रात्रि-विश्राम

31/12/23 को प्रातः भगवान ओंकारेश्वर जी की महापूजा के बाद – प्रातः 9 बजे जोशीमठ प्रस्थान – दो रास्ते हैं मौसम के आधार पर तय किया जाएगा
पहला रास्ता – ऊखीमठ- अगस्तमुनि- तिलवाडा- रुद्रप्रयाग- गौचर – कर्णप्रयाग – नन्दप्रयाग – चमोली – पीपलकोटि होते हुए जोशीमठ
दूसरा रास्ता – ऊखीमठ- चोपता – मण्डल- गोपेश्वर- चमोली- पीपलकोटि- होते हुए जोशीमठ पहुँचेंगे ।
सायं पांच बजे ज्योतिर्मठ परिसर में काशी की विश्वप्रसिद्ध 5 महाआरती की जाएगी ।
रात्रि-विश्राम- तोटकाचार्य गुफा, ज्योतिर्मठ, बदरिकाश्रम, हिमालय

01/01/24 – प्रातः 8 बजे नृसिंह मन्दिर परिसर में महापूजा /

प्रातः 9 बजे / विष्णुप्रयाग के विष्णु मन्दिर में महापूजा

प्रातः 10 बजे पाण्डुकेश्वर स्थित श्री योग-ध्यान बदरी मंदिर में महापूजा / प्रसाद वितरण कर ज्योतिर्मठ आगमन

दोपहर 12 बजे ज्योतिर्मठ में भण्डारा का आयोजन है , जहां सबको प्रसाद वितरित किया जाएगा ।
दोपहर 2 बजे पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज की पत्रकार वार्ता , ज्योतिर्मठ, बदरिकाश्रम, हिमालय में
रात्रि-विश्राम- ज्योतिर्मठ

02/01/23 को प्रातः 8 बजे ज्योतिर्मठ से प्रस्थान – जोशीमठ पीपलकोटि- चमोली- नन्दप्रयाग- कर्णप्रयाग – गौचर – रुद्रप्रयाग में अल्प विश्राम- पत्रकार मिलन के बाद रुद्रप्रयाग से – श्रीनगर- देवप्रयाग – ऋषिकेश होते हुए हरिद्वार आगमन- श्रीशंकराचार्य निवास, ज्ञानलोक कालोनी, फेज- 2, कनखल , हरिद्वार में रात्रि-विश्राम