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मंदिर समिति अध्यक्ष की संतों से भेंट आशीर्वाद लिया

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श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने संतों का आशीर्वाद लिया।

•शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज तथा जूना अखाड़ा पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी जी महाराज से भेंट की।

हरिद्वार, 22 दिसंबर।
श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने आज हरिद्वार में शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज और जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज से भेंट कर विभिन्न विषयों पर चर्चा की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

बीकेटीसी अध्यक्ष ने आज जगद्गुरु आश्रम में शंकराचार्य स्वामी राजेश्वराश्रम महाराज और हरिहर आश्रम में महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज से भेंट की। संतों से भेंट के दौरान उन्होंने बीकेटीसी द्वारा यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के कुशल मार्गदर्शन में वर्तमान में केदारनाथ व बदरीनाथ धाम को दिव्य व भव्य स्वरूप देने के लिए व्यापक स्तर पर पुनर्निर्माण के कार्य चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोविड के कारण बीच के वर्षों में चारधाम यात्रा पूरी तरह से बाधित हो गई थी। मगर मुख्यमंत्री श्री धामी के प्रयासों से चारधाम यात्रा ने ना केवल रफ्तार पकड़ी, अपितु एक नया रिकॉर्ड भी कायम किया।

बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने हाल के अपने देहरादून दौरे के दौरान उत्तराखंड में वेडिंग डेस्टिनेशन की व्यापक संभावनाओं पर जोर दिया था। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री की अपेक्षाओं के अनुरूप बीकेटीसी मुख्यमंत्री धामी के मार्गदर्शन में अपने अधीनस्थ मंदिरों में वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभारने की योजना बना रही है। इस क्रम में ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर और त्रियुगीनारायण में आधारभूत ढांचे के विकास के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने संतो से बीकेटीसी की कार्ययोजनाओं के लिए आशीर्वाद की अपेक्षा की। संतो ने अजेंद्र को आशीर्वाद व सहयोग का आश्वासन दिया।

आतंकी हमले में उत्तराखंड का लाल शहीद

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राजौरी,जम्मू कश्मीर में सेना पर हुए आतंकी हमले में उत्तराखंड का लाल नायक बीरेंद्र सिंह शहीद हो गया।

जैसे ही यह खबर शहीद नायक बीरेंद्र सिंह के गांव बमियाला, विकास खंड नारायणबगड़ जिला चमोली पहुंची क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ पड़ी। शहीद जवान का पार्थिव शरीर कल उनके गृह जनपद पहुंचेगा।

जानकारी के अनुसार ग्राम प्रधान बमियाला कमल कान्त टम्टा ने बताया कि पुंछ के राजौरी में सेना पर हुए आतंकी हमले में बीरेंद्र सिंह पुत्र सुरेंद्र सिंह के शहीद होने की सेना के उच्चाधिकारी ने जानकारी दी। उन्होने बताया कि शहीद जवान के पार्थिव शरीर को रुड़की लाया जा रहा है। कल शहीद जवान का शव उनके पैतृक गांव बमियाला पहुंचेगा। शहीद बीरेंद्र सिंह अपने पीछे अपनी पत्नी और दो बेटियों को छोड़ गए, शहीद बीरेंद्र के घर में उनके माता पिता, दो भाई और एक बहन है। उनके पिता पेशे से किसान है और माता गृहणी हैं, बड़े भाई आईटीबीपी में तैनात हैं बहन की शादी हो चुकी है। भाई बहनों में नायक बीरेंद्र सिंह सबसे छोटे थे।

 

 

 

143 विपक्षी सांसदों का निलंबन भाजपा की तानाशाही उजागर : कांग्रेस

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देहरादून 22 दिसंबर: आज देहरादून में कांग्रेस ने विपक्षी दलों के सांसदों के निलंबन और उत्पीडन को लेकर प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा के नेतृत्व में विशाल विरोध प्रदर्शन निकाला और राजभवन कूच किया।

लोकसभा एवं राज्यसभा में संसद की सुरक्षा में हुई चूक के मसले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे विपक्षी दलों के 143 सांसदों की अलोकतांत्रिक तरीके से की गई निलंबन की कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय से राजभवन की ओर कूच किया तथा वहां पर राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया।

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जहां से पुलिस द्वारा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर पुलिस लाईन ले जाया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन में कांग्रेस ने कहा कि लोकसभा एवं राज्यसभा में संसद की सुरक्षा में हुई चूक के मसले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे विपक्षी दलों के 143 सांसदों की अलोकतांत्रिक तरीके से की गई निलंबन की कार्रवाई का उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस विरोध करते हुए इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निन्दा करती है। लोकसभा अध्यक्ष एवं राज्य सभा उपसभापति द्वारा लोकतंत्र के सभी मानकों एवं मापदण्डों पर कुठाराघात करते हुए अलोकतांत्रिकता का घिनौना चेहरा सबके सामने लाते हुए कांग्रेस पार्टी सहित सभी विपक्षी दलों के 143 सांसद, जो देश की जनता के हितों की रक्षा के लिए चुने गए हैं, उन्हें जनता ने जो कर्तव्य निर्वहन की जिम्मेदारी दी है, उसके अनुसार सरकार से स्पष्टीकरण की मांग कर रहे थे, को संसद से निलंबित कर दिया गया। यह भाजपा के फासीवादी एवं तानाशाही चरित्र का द्योतक ही नहीं अपितु स्वस्थ लोकतंत्र के भविष्य के लिए उचित नहीं है, जिसे लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला कोई भी दल सहन नहीं करेगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का सदैव लोकतंत्र एवं लोकशाही में गहरा विश्वास रहा है और आज देश में लोकतंत्र के जितने भी स्तम्भ हैं, उनकी स्थापना में महात्मा गांधी से लेकर आज तक कंाग्रेस पार्टी का एक लंबा इतिहास रहा है। चुने हुए जन प्रतिनिधियों को उनके कर्तव्यों से विमुक्त करना लोकतंत्र के प्रति अपराध है। असहमति के स्वरों को सुनना एवं स्वीकार करना स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है तथा भारतीय संसद लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा का सर्वोच्च मंच है। संसद एवं देश की सुरक्षा के लिए आवाज उठाने पर लोकसभा अध्यक्ष एवं राज्यसभा के उपसभापति द्वारा की गई यह कार्रवाई लोकतंत्र के लिए अच्छा संदेश नहीं है। चुने हुए सांसदों को संसद से बाहर करने की यह घटना लोकतंत्र के इतिहास में काले अक्षरों में अंकित की जायेगी। स्वस्थ लोकतांत्रिक परम्परा में असहमति को भी सुनना पड़ता है तथा देश और जनता से जुडे हुए मुद्दों पर अगर लोकतंत्र के सर्वोच्च मन्दिर में चर्चा नहीं की जायेगी तो वे बतायें कि वे किस सदन में चर्चा करना चाहते हैं।

कांग्रेस पार्टी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की पहचान है और वे जब सत्ता में होते हैं तो उनके स्वयं के लिए अलग नैतिक मूल्य एवं कानून होते हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण संसद प्रकरण में विजिटिंग पास जारी करने वाले भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं जिन पर संसद कांड के सम्बन्ध मे अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। लोकसभा एवं राज्यसभा में भाजपा ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों के 143 सांसदों के साथ जिस प्रकार की कार्रवाई की है वह भाजपा के तानाशाही रवैये को उजागर करती है।

कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रपति से मांग करते हुए कहा है कि राजनैतिक प्रतिशोध और द्वेष की भावना से प्रेरित होकर विपक्षी दल के सांसदों के खिलाफ की गई निलंबन की कार्रवाई की कडे शब्दो में निन्दा करती है तथा देश के संवैधानिक संरक्षक होने के नाते आपसे इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए विपक्षी दल के सांसदों का निलंबन शीघ्र वापस लिए जाने की मांग करती है।

राजभवन कूच कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह विधायक ममता राकेश, वीरेंद्र जाती, फुरकान अहमद, अनुपमा रावत, पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, डॉ0 हरक सिंह रावत, मंत्री प्रसाद नैथानी, प्रदेश उपाध्यक्ष संगठन मथुरा दत्त जोशी, सूर्यकांत धस्माना, कोषाध्यक्ष आर्येन्द्र शर्मा, पूर्व विधायक राजकुमार, जोत सिंह गुनसोला, रामयश सिंह, डॉ0 संतोष चौहान, मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ,प्रदेश महामंत्री नवीन जोशी, राजेन्द्र शाह, हरि कृष्ण भट्ट, पूरन सिंह रावत, गोदावरी थापली, जयेन्द्र रमोला, भगवती सेमवाल, महानगर अध्यक्ष डॉ0 जसविन्दर सिंह गोगी, महानगर अध्यक्ष हरिद्वार सतपाल ब्रहमचारी, राजेन्द्र चौधरी, जिलाध्यक्ष लक्ष्मी अग्रवाल, मोहित उनियाल, शांति रावत, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचन्द शर्मा, शीशपाल सिंह बिष्ट, अनुकृति गुसांई, सेवादल अध्यक्ष हेमा पुरोहित, विरेन्द्र पोखलियाल, मानवेन्द्र सिंह, मनमोहन मल्ल, मनीष नागपाल, राजेश चमोली, आनन्द बहुगुणा, सोहन लाल रतूडी, अनुसूचित जाति अध्यक्ष दर्शन लाल, राजेश रस्तोगी, अमरजीत सिंह, प्रभुलाल बहुगुणा, सुजाता पॉल, पिया थापा, सुनीता प्रकाश, महेंद्र सिंह नेगी, डॉ0 प्रदीप जोशी, विनोद चौहान, आशा मनोरमा डोबरियाल, विकास नेगी, कै0 बलवीर सिंह रावत, नजमा खान, सपा के राष्ट्रीय सचिव डॉ सत्यनारायण सचान सपा, माले के इंद्रेश मैखुरी सीपीआई के समर भंडारी सीपीएम के राजेन्द्र नेगी, राजेन्द्र पुरोहित, कम्युनिस्ट पार्टी की इंदु नौटियाल, टीकाराम पाण्डेय, अर्जुन सोनकर, जगदीश धीमान, अनूप कपूर, सविता सोनकर, इलियार अंसारी, राजेश परमार, जितेन्द्र बिष्ट, उर्मिला थापा, ललित भद्री, आदर्श सूद, अनुराधा तिवाडी, अवधेश पंत, विनीत भट्ट, संजय सैनी, सावित्री थापा, डॉ0 इकबाल, मेघ सिंह, टीटू त्यागी, मालती देवी, फैजल, पूनम सिंह, विजयप्रताप मल्ल, राकेश सिंह, रेखा काण्डपाल सती, प्रणीता डोभाल, सोनिया आनन्द, अखिलेश उनियाल, जोध सिंह रावत, संग्राम पुण्डीर, डॉ0 सुरेन्द्र सिंह, सुशील राठी, राहुल सोनकर, देवेन्द्र सिंह, महेश प्रताप राणा, हिमांशु रावत, रिषभ जैन, गौरव अग्रवाल, लाखीराम बिजलवाण, सलमान अहमद, अब्दुस समद, दिनेश कौशल, सचिन थापा, अर्जुन पासी, प्रमोद गुप्ता, यूनिस अहमद, अभिषेक तिवारी, लक्की राणा, विजेन्द्र चौहान, सहजाद अंसारी, राजकुमार जायसवाल, राजेश पुण्डीर, हेमन्त उप्रेती आदि सैकडों कांग्रेसजन शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश महामंत्री नवीन जोशी एवं महानगर अध्यक्ष डॉ0 जसविन्दर सिंह गोगी ने संयुक्त रूप से किया।

 

रैट माइनर्स का सम्मान राशि लौटाना दुर्भाग्यपूर्ण: गरिमा दसौनी

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देहरादून 21 दिसंबर: आज उत्तराखंड के मुख्य मंत्री ने उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल हादसे में 41 मजदूरों की जान बचाने वाले रैट माइनर्स को उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया। कार्यक्रम में मुख्य मंत्री ने रैट माइनर्स को रुपए 50 हज़ार की सम्मान राशि का चैक सौंपा, परंतु रैट माइनर्स इस धनराशी से हताश नज़र आए और उन्होंने चैक वापस करने की बात कही।

इसपर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। “रैट माइनर्स का सम्मान राशि लौटाना दुर्भाग्यपूर्ण” – गरिमा मेहरा दसौनी

शुक्रवार को कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में दसौनी ने कहा कि यदि सिलक्यारा टनल हादसे में 17 दिनों तक फंसे हुए 41 मजदूरों को रैट माइनर्स ने ना निकाला होता तो अभी तक धामी जी मुख्यमंत्री पद से हटा दिए गए होते , 41 मजदूरों की जान पर खतरा बना रहता और उत्तराखंड की देश विदेश में जो फजीहत होती उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि आज मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय में रैट माइनर्स को सम्मानित करने के लिए कार्यक्रम रखा गया था जिस कार्यक्रम से मेहनतकश माइनर्स मायूस होकर खाली हाथ लौटे, कार्यक्रम के दौरान रैट माइनर्स ने सरकार द्वारा दिए जा रहे 50,000 के चेक को लेने से मना कर दिया। रैट माइनर्स का मानना था की यह उनके द्वारा किए गए असंभव दिखने वाले कार्य के प्रति न्यायोचित नहीं है ,यह उनका सम्मान नहीं अपमान है ।

दसौनी ने कहा कि जिस सिल्कयारा टनल से मजदूरों को बाहर निकालने में अत्याधुनिक मशीनें तक हांफ गई और फेल हो गई उन सभी 41 जानों को बचाने के लिए रैट माइनर्स ने अपनी जान की बाजी लगा दी , इतना ही नहीं वह संकटमोचक साबित हुए और बिना किसी मजदूर को चोटिल किए उन्होंने वह काम कर दिखाया जो असंभव दिखाई पड़ रहा था। निश्चित रूप से रैट माइनर्स की अव्यावहारिक मांगे तो नहीं मानी जा सकती परंतु सम्मानजनक राशि जरूर दी जा सकती थी, जिससे वह अपना छोटा-मोटा स्वरोजगार शुरू कर सकें और अपने परिवार को एक सम्मानजनक जीवन दे सकें ।

दसौनी ने कहा की रैट माइनर्स का मुख्यमंत्री धामी को इस तरह से भरे कार्यक्रम में चैक वापस करना सरकारी तंत्र की भी विफलता और संवादहीनता ही कही जा सकती है कि अधिकारियों ने रैट माइनर्स से पहले से बातचीत नहीं की और ना ही सरकार और रेट माइनर्स के बीच में समन्वय स्थापित करने की कोशिश की।
दसौनी ने कहा कि रैट माइनर्स का मुख्यमंत्री को इस तरह से चैक लौटाना सरकार के मुंह पर तमाचा है ।दसौनी ने यह भी कहा की जिस दिन मुख्यमंत्री ने 50,000 कि घोषणा की थी उसके दूसरे ही दिन पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जी ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री से इस राशि के नाकाफी होने की बात कही थी।

दसौनी ने कहा कि भाजपा का यही चाल चरित्र चेहरा है। कोरोना के दौरान जब लोगों को बचाने के लिए सरकार खुद को असहाय महसूस कर रही थी उस वक्त कोरोना वॉरियर्स ने साथ दिया और पूरी दुनिया ने देखा की किस तरह केंद्र और राज्य की सरकारों ने उन वॉरियर्स पर पुष्प वर्षा की और आज जब वही कोरोना वॉरियर्स कई महीनों से आंदोलन कर रहे हैं तो कोई उनकी सुध लेने वाला तक नहीं। दसौनी ने कहा की आज एक बार फिर जिन रैट माइनर्स ने उत्तराखंड को शर्मसार होने से बचाया, आज उन्ही रैट माइनर्स का इस तरह से मुख्यमंत्री के दरवाजे से खाली हाथ लौटना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।Screenshot 2023 12 21 19 13 16 63 6012fa4d4ddec268fc5c7112cbb265e7

क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी बाबा सोहन सिंह भाकना

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क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी बाबा सोहन सिंह भाकना को उनकी 55वीं पुण्य तिथि पर याद करते हुए।
(जन्म:22 जनवरी 1870 – मृत्यु:21 दिसम्बर 1968)

बाबा सोहन सिंह का जन्म पंजाब के अमृतसर जिले के खुटराई खुर्द में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के गुरुद्वारे से की और 16 साल की उम्र में उर्दू और फ़ारसी में प्राथमिक शिक्षा उत्तीर्ण करी।

बाबा ने कम उम्र से ही उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलनों में भाग लिया। 1909 में वे घर छोड़कर अमेरिका चले गए और सिएटल पहुँच गए। उन दिनों अमेरिका और कनाडा में भारतीयों को गंभीर भेदभाव का सामना करना पड़ता था। 1913 में भारतीयों के प्रतिनिधियों ने एक संगठन हिंदुस्तानी वर्कर्स ऑफ़ द पेसिफिक कोस्ट स्थापित करने का निर्णय लिया। बाबा इसके अध्यक्ष तथा लाला हरदयाल महासचिव चुने गए। एसोसिएशन के उद्देश्य को प्रचारित करने के लिए एक साप्ताहिक समाचार पत्र      ‘ग़दर’ शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह करना था।

सोहन सिंह ने स्वयं योकोहामा में लौट रहे कोमागाटा मारू से संपर्क किया और बाबा गुरदित सिंह को हथियारों की खेप पहुंचाई। बाबा को गिरफ्तार कर लिया गया और मुल्तान जेल भेज दिया गया। उन पर लाहौर षड़यंत्र केस में मुकदमा चलाया गया और उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। बाद में अंडमान में मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया गया। 1921 में उन्हें कोयंबटूर जेल और फिर येरवाडा जेल और फिर सेंट्रल जेल लाहौर में स्थानांतरित कर दिया गया।

1930 में उन्हें रिहा कर दिया गया लेकिन वे देश की आज़ादी के लिए काम करते रहे। उन्होंने अपना अधिकांश समय किसान सभाओं के आयोजन में समर्पित किया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्हें फिर से लगभग तीन वर्षों तक देवली कैंप जेल में नजरबंद रखा गया।

उनकी मृत्यु के 55 वर्ष बाद भी हम भारतीयों को प्रेरणा मिलती रहती है। वह देश के किसान संघर्ष के सच्चे प्रतीक हैं। उन्होंने न केवल साहस के साथ संघर्ष किया बल्कि सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। उनका जीवन ऐसे किस्सों से भरा है जहां उन्होंने आज़ादी से पहले और आज़ादी के बाद भारत में कठोर कानूनों के खिलाफ लड़ाई लड़ी ।

प्रशांत सी वाजपई, अध्यक्ष, स्वतंत्रता आंदोलन यादगार समिति।

सिलक्यारा मामले में न किसी की जवाबदेही न किसी के विरुद्ध कार्यवाही: धस्माना

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देहरादून 21 दिसंबर: सिलक्यारा टनल हादसे में फंसे 41 मजदूरों की जान बचाने वाले रैट होल माइनर्स को उत्तराखंड के मुख्य मंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मानित किया और करना भी चाहिए।

परंतु इतना बड़ा हादसा क्यों हुआ ? किसकी जवाबदेही है ? इसपर प्रदेश सरकार मौन क्यों है ?

इसपर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि “सिलक्यारा टनल हादसे की जांच रिपोर्ट आये बगैर दोबारा काम शुरू करना सरकार की बदनीयती का सुबूत है, हादसे में न किसी की जवाबदेही न ही कोई कार्यवाही”।

धस्माना ने कहा कि सिलक्यारा निर्माणाधीन टनल में निर्माण एजेंसी ने 20 फरवरी 2018 की केंद्रीय कैबिनेट जिसकी अध्यक्षता स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने की थी , के उस निर्णय को पूरी तरह से नज़रंदाज़ किया जिसमें सिलक्यारा टनल को सशर्त एस्केप पैसेज के साथ निर्माण की अनुमति दी गई, किंतु निर्माण एजेंसी नवयुग कम्पनी ने बिना एस्केप पैसेज व बिना किसी आपातकालीन निकासी के निर्माण किए। चार किलोमीटर टनल खोद दी और जिस तरह से खुदाई की गई उससे यह आशंका है कि टनल में ब्लास्ट किया गया और छोटी दिवाली के दिन टनल में भूस्खलन व मलबा गिरने का हादसा घटा जिसमें 41 श्रमिक फंस गए थे जिनको लम्बी जद्दोजहद के बाद रैट होल माइनर्स ने निकाला।

धस्माना ने कहा कि इस हादसे के लिए साफ साफ निर्माण एजेंसी जिम्मेदार है किंतु आज तक कोई कार्यवाही उनके विरुद्ध नहीं की गयी और रैट होल माइनर्स की मेहनत पर सरकार अपने मुंह मियां मिट्ठू बन कर अपनी ही पीठ थपथपा रही है। जबकि सच्चाई यह है कि राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ और अगर उत्तरप्रदेश के रैट होल माइनर्स न आते तो अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अर्नाल्ड डिक्स ने सार्वजनिक रूप से कह दिया था कि क्रिसमस के आसपास अभियान पूरा हो पायेगा।

धस्माना ने कहा कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय व उत्तराखंड राज्य सरकार से कांग्रेस यह पूछना चाहती है कि सिलक्यारा हादसे का जिम्मेदार कौन है ? और उनके खिलाफ क्या कार्यवाही की गई है ? उन्होंने कहा कि अगर सरकारें जवाब नहीं देती तो यह स्पष्ट रूप से एक बड़ा टनल घोटाला है।

सिलक्यारा सुरंग के बचावकर्मी रैट माइनर्स सम्मानित

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सिलक्यारा सुरंग हादसे के बचावकर्मी रैट माइनर्स

• मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मानित किया

देहरादून: 21 दिसंबर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरूवार को मुख्यमंत्री आवास में उत्तरकाशी के सिलक्यारा रेस्क्यू ऑपरेशन में टनल की खुदाई में अहम भूमिका निभाने वाले 12 रैट माइनर्स को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और सभी रैट माइनर्स को 50-50 हजार रूपये के सम्मान राशि के चेक भी प्रदान किये।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रैट माइनर्स ने अपनी जान की परवाह किये बिना कठिन परिस्थितयों में टनल में खुदाई, सफाई और पाइप को काटने का कार्य किया। सिलक्यारा रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलता तक पहुंचाने में रैट माइनर्स का बहुत बड़ा योगदान रहा। उन्होंने कहा कि जिस लगन और परिश्रम से हमारे रैट माइनर्स ने इस रैस्क्यू अभियान को सफल बनाने में अन्य एजेंसियों के साथ योगदान दिया, इसके लिए सभी रैट माइनर्स बधाई और आशीर्वाद के पात्र हैं। मुख्यमंत्री ने सिलक्यारा रेस्क्यू अभियान में योगदान देने वाले सभी लोगों का भी प्रदेश की जनता की ओर से आभार व्यक्त किया।

सिलक्यारा रेस्क्यू ऑपरेशन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले रैट माइनर्स ने राज्य में स्वागत और सम्मान होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सुरंग में फंसे 41 लोगों की जान बचाने के लिए विभिन्न एजेंसियों के साथ उन्हें भी अपना योगदान देने का अवसर मिला, यह उनके लिए गर्व की बात है।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, जिलाधिकारी उत्तरकाशी अभिषेक रूहेला भी मौजूद थे।

उत्तराखंड में महिलाओं व दलितों के साथ अपराध व अत्याचार: सुनीता प्रकाश

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19 दिसम्बर 2023
देहरादूनः उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रवक्ता एडवोकेट सुनीता प्रकाश के नेतृत्व में महिलाओं व कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्य में महिलाओं व दलितों के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ कांग्रेस भवन से  घंटाघर मार्च किया, फिर एशलेहॉल में एकत्र होकर राज्य व केन्द्र सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी की और पुतला दहन किया।

कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता सुनीता प्रकाश ने कहा कि आखिर कब तक महिलाएं अत्याचार सहती रहेंगी। उन्होंने उत्तराखंड की बेटी अंकिता भण्डारी का जिक्र करते हुए कहा कि आज तक लचर कानून व्यवस्था के कारण अंकिता के हत्यारों का पता नहीं चल पाया और ना ही उस कांड में सम्मिलित वीआईपी का नाम ही उजागर हो पाया है। जिस कारण महिलाओं के साथ अत्याचार एवं उत्पीड़न करने वालों के हौसले बुंलद हैं और किसी को भी कानून का डर नहीं रह गया है। उन्होंने कहा राज्य में एक के बाद एक महिला यौन शोषण का शिकार हो रही है। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में मूक बधिर एवं दृष्टिबाधित बच्चों के संचालक द्वारा नाबालिग छात्राओं का यौन शोषण, हल्द्वानी में ही नारी संरक्षण गृह में नाबालिग लड़की का यौन शोषण, ऋषिकेश में विनीता हत्याकांड, उत्तरकाशी के एक होम स्टे में कार्यरत 18 वर्षीय अमृता रावत का शव लटका मिला पर उसकी भी आजतक कोई ठोस जॉच नहीं हो पाई है। जिससे कानून व्यवस्था पर लोगों का विश्वास नहीं रह गया है।

सुनीता प्रकाश ने कहा कि इस तरह का माहौल हमने अपने जीवन में कभी नहीं देखा। उन्होंने राज्य के बुद्विजीवियों व युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आखिर राज्य व देश किस दिशा की ओर ले जाया जा रहा है ये आप और हम सबको सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मंहगाई, बेरोजगारी चरम पर है पर भाजपा की सरकार लगातार अपनी हठधर्मिता करते हुए देश के नौजवानों को ठगने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं का सपना था कि वह सेना में जाकर देश सेवा करेंगे, परंतु केन्द्र की भाजपा सरकार ने अग्निवीर देकर उनके जज्बे को तोड़ने का काम किया है। उनके कहा कि ऐसी सरकारों का मुकाबला करने के लिए हम सबको एकजुट होकर संघर्ष करने का काम करना होगा। उन्होंने कहा कि आखिर कब तक राज्य के लोग अत्याचार एंव उत्पीडऩ सहन करते रहेंगे।

इस असवर पर प्रदेश प्रवक्ता राजेश चमोली, पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचन्द शर्मा, उदयवीर सिंह पंवार, अनुराधा तिवाडी, सवित्री थापा, मन्जू, आशा, इन्दू सिंह, सुनीता, नीलम, पिंकी, सुलेमान, विरेन्द्र सिह पंवार, मालती देवी, अंकिता, लता, कविता, समर जहां, लक्ष्मन, अनूप पासी, चुन्नीलाल, माया, सुनीता, बबीता, चम्पा देवी, लड्डू, फरमान, वंदना थापा आदि उपस्थित थे।

 

बीकेटीसी विश्रामगहों में निर्माण कार्यों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई।

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‌मंदिर समिति विश्राम गृहों में निर्माण- आपूर्ति संबंधी जांच उप समिति की रिपोर्ट

• संबंधित घटिया निर्माण- अनुरक्षण कार्य से जुड़े ठेकेदारों तथा आपूर्तिकर्ताओं से होगी भरपाई।

देहरादून: 20 दिसंबर। श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति की धर्मशालाओं- विश्रामगृहों तथा मंदिरों में यात्रा वर्ष – 2023 में हुए निर्माण- अनुरक्षण कार्यों तथा विश्राम गृहों में सामान आपूर्ति की गुणवत्ता जांच हेतु बनी उप समिति ने अपनी रिपोर्ट श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) अध्यक्ष अजेंद्र अजय को सौंप दी है।
बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने जांच रिपोर्ट का संज्ञान लेकर आपूर्तिकर्ताओं तथा निर्माण एवं अनुरक्षण कार्य से जुड़े संबंधित ठेकेदारों से दो सप्ताह के अंदर मानकों के अनुरूप पुन: कार्य स़पादित करने के निर्देश दिये है। तब तक संबंधित ठेकेदारों तथा फर्मो के बिल भुगतान को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।
इस संबंध में मुख्य कार्याधिकारी योगेंद्र सिंह ने मंदिर समिति अधिशासी अभियंता तथा लेखा विभाग को आदेश जारी किये है साथ ही मानकों के अनुरूप कार्य किये जाने संबंधी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने एवं भविष्य में भी मानकों के अनुरूप कार्य की अपेक्षा की गयी है।
बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति के विश्राम गृहों में चार धाम यात्रा हेतु तीर्थयात्रियों की सुविधा हेतु विश्राम गृहों के रख- रखाव हेतु मरम्मत- निर्माण कार्यों तथा सामान सप्लाई निविदा में तय मानकों पर संबंधित कार्य के निर्देश हुए थे।
उल्लेखनीय है कि सामान की सप्लाई तथा निर्माण अनुरक्षण कार्यों में कई शिकायते आ रही थी इस पर बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय के निर्दश पर माह सितंबर 2023 में बीकेटीसी उपाध्यक्ष किशोर पंवार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच उप समिति का गठन किया गया। सभी निर्माण कार्यों तथा आपूर्ति सामान की गुणवत्ता की जांच के बाद इसी माह जांच रिपोर्ट  सौंपी।

भाजपा विपक्ष की आवाज़ को हिटलरशाही तरीके से दबाना चाहती है: करन माहरा

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देहरादून 19 दिसंबर: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने संसद में हुई सुरक्षा में चूक के मसले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करने वाले कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के 141 सांसदों के निलंबन को अलोकतांत्रिक बताते हुए सांसदों के निलंबन को तत्काल वापस लिया जाने की मांग की है।

लोकसभा एवं राज्यसभा में सांसदों के निलंबन पर बयान जारी करते हुए करन माहरा ने कहा कि अलोकतांत्रिक तरीके से विपक्षी दलों के 141 सांसदों के निलंबन की कार्रवाई का उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस विरोध करते हुए इस कार्रवाई की घोर निन्दा करती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के सभी मानकों एवं मापदंडों पर कुठाराघात करते हुए अलोकतांत्रिकता का परिचय देते हुए लोकसभा एवं राज्यसभा में विपक्षी दलों के उन सांसदों को, जो देश की जनता के हितों एवं सांसदों की रक्षा के लिए, उन्हें जनता ने जो कर्तव्य निर्वहन की जिम्मेदारी दी है, उसके अनुसार सरकार को चेताने का काम कर रहे थे, को संसद से निलंबित कर दिया गया है। यह भाजपा के फासीवादी एवं तानाशाही चरित्र है, जिसे लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला कोई भी दल सहन नहीं करेगा।
करन माहरा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की सदैव लोकतंत्र में गहरी आस्था रही है और लोकतांत्रिक तरीके से संसद की कार्रवाई में विश्वास रखती है और आज देश में लोकतंत्र के जितने भी स्तंभ हैं, उनकी स्थापना में महात्मा गांधी से लेकर आज तक कांग्रेस पार्टी का एक लंबा इतिहास रहा है। चुने हुए प्रतिनिधियों को उनके कर्तव्यों से वंचित करना लोकतंत्र के प्रति अपराध है। असहमति के स्वरों को सुनना एवं स्वीकार करना स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है तथा भारतीय संसद लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा का सर्वोच्च मंच है। संसद एवं देश की सुरक्षा की आवाज उठाने पर लोकसभा अध्यक्ष एवं राज्यसभा के उपसभापति द्वारा की गई यह कार्रवाई लोकतंत्र के लिए अच्छा संदेश नहीं है। चुने हुए सांसदों को संसद से बाहर करने की यह घटना लोकतंत्र के इतिहास में काले अक्षरों में अंकित की जायेगी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा में असहमति को भी सुनना पड़ता है और जनता से जुडे हुए मुद्दों पर अगर लोकतंत्र के सर्वोच्च मन्दिर में चर्चा नहीं की जायेगी तो वे बताएं कि वे किस सदन में चर्चा करना चाहते हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा विपक्ष की आवाज दबाने के लिए कभी राहुल गांधी जी की संसद सदस्यता समाप्त करने के लिए ऐन-केन-प्रकारेण प्रयास करती है तो कभी निलंबन के रूप में सांसदों को उनके कर्तव्य से विमुक्त करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सदन में गतिरोध बढाने के लिए भाजपा ने मुख्य विपक्षी दल सहित अन्य विपक्षी दलों के सांसदों के साथ जिस प्रकार की कार्रवाई की है वह भाजपा के तानाशाही चेहरे को उजागर करती है। भारतीय जनता पार्टी के नेता विपक्ष के विचारों को सुनना नहीं चाहते हैं तथा विपक्ष की आवाज को हिटलरशाही रवैये से दबाना चाहते हैं।