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उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट, 26 से 29 जुलाई तक सतर्क रहने की अपील

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उत्तराखंड में 25 जुलाई से 29 जुलाई तक भारी से बहुत भारी वर्षा का सिलसिला चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने इस अवधि के लिए चेतावनी जारी करते हुए राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई है। खासतौर पर देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। साथ ही राज्य के पर्वतीय जिलों में तेज गर्जना, बिजली चमकने और तीव्र वर्षा के दौर की भी संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, 26 जुलाई को देहरादून, नैनीताल और चंपावत में भारी बारिश हो सकती है। 27 जुलाई को यह दायरा बढ़कर टिहरी, पौड़ी, बागेश्वर और उधम सिंह नगर तक फैल जाएगा। 28 और 29 जुलाई को देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, नैनीताल, चंपावत और उधम सिंह नगर में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है, जबकि पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भी भारी बारिश हो सकती है। इसके लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

राज्य के सभी जिलों में इस दौरान आकाशीय बिजली के साथ तेज बारिश के दौर की संभावना है, जिससे निचले और पहाड़ी इलाकों में जलभराव, भूस्खलन, सड़क अवरोध और यात्रा में बाधा जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम की ताज़ा जानकारी पर नजर बनाए रखने की अपील की है।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों में टीमों को हाई अलर्ट पर रखा है। विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। जनता से अपील की गई है कि वह नदी-नालों और भूस्खलन संभावित स्थानों से दूर रहें। यह बारिश राहत से ज़्यादा चुनौती भी बन सकती है, इसलिए सतर्क रहना ही सबसे बड़ी समझदारी होगी।

बुजुर्ग की निर्मम हत्या से सनसनी, चाकू से गोदकर की गई हत्या, एक हाथ भी काटा

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रुड़की : हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र में एक बुजुर्ग की निर्मम हत्या से इलाके में हड़कंप मच गया। टोडा कल्याणपुर गांव में रहने वाले 60 वर्षीय कंवरपाल का शव गांव के एक मंदिर के पास खून से लथपथ हालत में मिला। कंवरपाल की हत्या चाकुओं से गोदकर की गई थी, और हैवानियत की हद पार करते हुए उनका एक हाथ भी काट दिया गया था।

चाकुओं से किए गए कई वार

जानकारी के मुताबिक, कंवरपाल पिछले तीन घंटे से लापता थे। जब परिजनों ने उन्हें ढूंढना शुरू किया, तो मंदिर के पास उनका शव मिला। गले, पेट और पीठ पर चाकू के गहरे वार किए गए थे। शरीर पर कई जगह काटने और घाव के निशान मिले हैं, जिससे स्पष्ट है कि हत्या अत्यंत बेरहमी से की गई। कंवरपाल के पुत्र के बीएसएफ में तैनात होने की जानकारी सामने आई है। परिजनों ने आशंका जताई है कि यह हत्या पुरानी रंजिश के चलते की गई है।

पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची

घटना की सूचना मिलते ही सीओ नरेंद्र पंत पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया। टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए और इलाके की बारीकी से जांच की।पुलिस ने आसपास मौजूद लोगों से प्रारंभिक पूछताछ भी की है। शव को कब्जे में लेकर रुड़की के सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

हत्या के पीछे रंजिश की आशंका

एसपी हरिद्वार देहात शेखर चंद्र सुयाल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि कंवरपाल का शव टोडा कल्याणपुर गांव में मंदिर के पास मिला है। उनकी हत्या की गई है। फॉरेंसिक टीम से जांच कराई जा रही है। प्रारंभिक जांच और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, हत्या की वजह पुरानी रंजिश मानी जा रही है। जांच के लिए पुलिस टीम गठित कर दी गई है और आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा।

गांव में दहशत का माहौल

इस खौफनाक वारदात के बाद टोडा कल्याणपुर गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने पुलिस से हत्यारों को जल्द पकड़ने और कड़ी सजा दिलाने की मांग की है। पुलिस सभी संभावित एंगल से मामले की जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और स्थानीय इनपुट के आधार पर संदिग्धों की तलाश की जा रही है।

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला : पूरे देश में वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण कराएगा आयोग

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नई दिल्ली। भारतीय चुनाव आयोग ने देशभर की मतदाता सूचियों को पारदर्शी और शुद्ध बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के बाद अब पूरे देश में यह प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है।

24 जून को जारी आदेश में, आयोग ने कहा कि  “आयोग ने मतदाता सूचियों की अखंडता की रक्षा के लिए अपने संवैधानिक दायित्व के तहत पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू करने का फैसला किया है। अन्य राज्यों के लिए शेड्यूल यथासमय घोषित किया जाएगा।”

क्यों ज़रूरी है SIR?

चुनाव आयोग के अनुसार, मतदाता सूची का नियमित पुनरीक्षण न केवल एक संवैधानिक दायित्व है, बल्कि यह लोकतंत्र की शुचिता और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए अनिवार्य भी है। SIR के ज़रिए मृतक मतदाताओं, पलायन कर चुके नागरिकों, दोहरी प्रविष्टियों और फर्जी नामों को सूची से हटाया जाता है।

आयोग ने SIR के विरोध पर उठे सवालों का जवाब देते हुए दो टूक कहा, “भारत का संविधान भारतीय लोकतंत्र की जननी है। तो क्या आयोग कुछ लोगों के बहकावे में आकर संविधान के खिलाफ जाकर, मृतक, पलायन कर चुके, दोहरे नाम वाले, फर्जी या विदेशी मतदाताओं को सूची में रहने दे और फर्जी मतदान का रास्ता खुला छोड़ दे?”

विरोध के बीच आयोग का सख्त रुख

SIR को लेकर बिहार में कुछ दलों और संगठनों की ओर से उठाए गए विरोध पर आयोग ने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि संविधान सम्मत प्रक्रिया है। यह देश की मतदाता पहचान की शुद्धता और चुनाव प्रणाली में जनता के विश्वास को बनाए रखने का प्रयास है।

बिहार में SIR प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, और अब देश के अन्य राज्यों में भी चरणबद्ध तरीके से यह अभियान चलाया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी इस संबंध में तैयारी कर रहे हैं और स्थानीय प्रशासन को दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। चुनाव आयोग का यह कदम देशभर में स्वच्छ, पारदर्शी और विश्वसनीय चुनाव प्रणाली की दिशा में एक मजबूत पहल मानी जा रही है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता ही लोकतंत्र की मजबूती की पहली शर्त है।

सरकारी स्कूल की छत गिरी, मलबे में कई बच्चों के दबे होने की आशंका

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झालावाड़ (राजस्थान): राजस्थान के झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र स्थित पीपलोदी गांव में शुक्रवार सुबह एक सरकारी स्कूल में बड़ा हादसा हो गया। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे विद्यालय परिसर में चीख-पुकार मच गई।

हादसा सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान हुआ, जब बच्चे अपने-अपने कमरों की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान एक कमरे की छत भरभरा कर गिर गई। जानकारी के अनुसार, करीब 20 से अधिक बच्चे मलबे में दब गए, जबकि अब तक चार बच्चों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी मोर्चा संभालते हुए बचाव कार्य में रेस्क्यू टीम का साथ दिया। सभी मिलकर मलबा हटाने और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुटे हैं।

घटना के तुरंत बाद गंभीर रूप से घायल बच्चों को झालावाड़ जिला अस्पताल रेफर किया गया है। बताया जा रहा है कि सभी बच्चे 7वीं कक्षा के थे और हादसे के वक्त कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे।

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि स्कूल की छत काफी समय से जर्जर अवस्था में थी, लेकिन समय रहते कोई मरम्मत कार्य नहीं किया गया। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते छत की हालत और बिगड़ चुकी थी, जिससे हादसे का खतरा पहले से बना हुआ था।

यह दुर्घटना प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी विद्यालयों की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता खड़ी करती है। ग्रामीणों का आक्रोश भी देखने को मिल रहा है और वे सवाल उठा रहे हैं कि यदि समय रहते छत की मरम्मत कर दी जाती, तो मासूमों की जान बचाई जा सकती थी।

जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं और जिला प्रशासन ने हादसे की उच्च स्तरीय समीक्षा की बात कही है। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है।

पंचायत चुनाव पहले चरण का मतदान शुरू: मतदाता तय करेंगे 17,829 प्रत्याशियों का भविष्य, 15.79 करोड़ की अवैध सामग्री जब्त

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देहरादून : उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन के पहले चरण की वोटिंग आज सुबह से शुरू हो गई। प्रदेश के सभी जनपदों—सिर्फ हरिद्वार को छोड़कर—में यह चुनावी रण सज चुका है। खास बात यह है कि इस बार कई गांवों में पारिवारिक भिड़ंत भी चुनावी रंग में रंगी है: कहीं चाचा-भतीजा आमने-सामने हैं, तो कहीं भाई-भाई वोट की चौपड़ पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

पदवार प्रत्याशी विवरण (जनपद हरिद्वार को छोड़कर):

  • ग्राम पंचायत सदस्य: 948 पदों पर 2247 प्रत्याशी मैदान में।
  • ग्राम प्रधान: 3393 पदों पर 9731 प्रत्याशी दमखम दिखा रहे हैं।
  • क्षेत्र पंचायत सदस्य: 1507 पदों पर 4980 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं।
  • जिला पंचायत सदस्य के लिए 871 प्रत्याशी चुनावी समर में डटे

कुल मिलाकर पहले चरण में 17,829 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनकी तकदीर का फैसला आज करीब 26 लाख मतदाता करेंगे। पंचायत चुनाव सुरक्षा के लिए पुलिस और प्रशासन ने सख्त निगरानी रखी है। 22 जुलाई 2025 तक जब्त अवैध सामग्री का आंकड़ा यह दर्शाता है कि राज्य में कानून व्यवस्था के लिए प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है।

  • अवैध शराब जब्त: 28,546.905 लीटर (अनुमानित कीमत ₹1,77,19,512)
  • ड्रग्स जब्त: 38.4167 किलोग्राम (अनुमानित कीमत ₹13,69,46,209)
  • कीमती धातु: 0.3915 किलोग्राम (अनुमानित कीमत ₹25,10,000)
  • नकदी जब्ती: अब तक कुल ₹6,92,100
  • कुल जब्ती का मूल्य: ₹15,79,46,756 (पंद्रह करोड़ उन्यासी लाख छियालीस हजार सात सौ छप्पन रुपये मात्र)

स्वतंत्रता संग्राम के अद्वितीय योद्धा चन्द्रशेखर आज़ाद को भावभीनी श्रद्धांजलि

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ब्रिटिश हुकूमत के लिए आतंक का पर्याय बने महान क्रांतिकारी पंडित चन्द्रशेखर आज़ाद  की 119वीं जयंती के अवसर पर समूचा राष्ट्र उन्हें शत् शत् नमन कर रहा है। राष्ट्रवादी विचारधारा के वाहक आज़ाद ने उत्तर भारत में सशस्त्र क्रांति की ज्वाला भड़काई और क्रांतिकारी युवाओं की एक पूरी पीढ़ी को तैयार किया।

1920 से 1931 के बीच लगभग हर प्रमुख क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़े चन्द्रशेखर आज़ाद ने अपने जीवन को भारत माता की आज़ादी के लिए समर्पित कर दिया था। काकोरी कांड के बाद आज़ाद लंबे समय तक छिपकर रहते रहे, वेश बदलते रहे और ब्रिटिश खुफिया तंत्र को छकाते रहे।

एक समय उन्होंने झाँसी को अपना गढ़ बना लिया था। लेकिन जब वहाँ पुलिस की गतिविधियाँ तेज़ हुईं, तो वे ओरछा की ओर बढ़े और सातार नदी के किनारे एक कुटिया बनाकर, पंडित हरिशंकर ब्रह्मचारी के नाम से जीवन व्यतीत करने लगे। यही वह स्थान था जहाँ आज़ाद ने एक ओर अपने क्रांतिकारी साथियों को प्रशिक्षण दिया, तो दूसरी ओर गाँव के बच्चों को पढ़ाया और स्थानीय जनजीवन में घुल-मिल गए।

ओरछा के जंगलों में उनकी निशानेबाजी की गूंज आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। उनका यह समय एक अहम पड़ाव था—जहाँ उन्होंने सधे हुए रणनीतिकार की भांति गतिविधियों को चलाया और पुलिस की नज़रों से भी बचते रहे।

उनका जीवन इस बात का साक्षी है कि देशभक्ति, साहस और दृढ़ संकल्प से हर चुनौती को मात दी जा सकती है। चन्द्रशेखर आज़ाद का बलिदान ना सिर्फ उनके युग को प्रेरणा देता रहा, बल्कि आज भी हम सभी को स्वतंत्रता और संप्रभुता के मूल्य याद दिलाता है।

इस अवसर पर प्रशांत सी बाजपेयी, अध्यक्ष—स्वतंत्रता आंदोलन यादगार समिति एवं सुपुत्र स्व. शशि भूषण (पद्म भूषण सम्मानित राष्ट्रवादी स्वतंत्रता सेनानी, सांसद—4 व 5वीं लोकसभा) ने कहा कि “शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद न केवल एक नाम हैं, बल्कि विचार हैं। उनका साहस, उनकी निडरता और भारत माता के लिए समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए पथप्रदर्शक रहेगा।”

सावन शिवरात्रि 2025: आज बन रहा 24 साल बाद दुर्लभ योग, गूंजे ‘बम-बम भोले’ के जयकारे

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श्रावण मास की शिवरात्रि आज पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जा रही है। इस बार की सावन शिवरात्रि को बेहद खास बना रहा है एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग, जो पूरे 24 वर्षों बाद बन रहा है। इससे पहले यह योग 2001 में बना था।

इस बार शिवरात्रि पर गजकेसरी, मालव्य, नवपंचम और बुधादित्य योग एक साथ बन रहे हैं, जिसे ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने ‘महायोग’ बताया। माना जा रहा है कि इस दुर्लभ संयोग में भोलेनाथ की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।

शिव-पार्वती की पूजा से मिलेगा पुण्य

सनातन धर्म की परंपरा के अनुसार, सावन की शिवरात्रि पर शिव-पार्वती की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। पवित्र भाव और विधिपूर्वक पूजा करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

बटेश्वर के 41 प्राचीन मंदिरों में विशेष रुद्राभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर के पुजारी जयप्रकाश गोस्वामी ने बताया कि वाराणसी से आए यज्ञाचार्य सूर्यकांत गोस्वामी के नेतृत्व में कालसर्प दोष और पितृ दोष निवारण के लिए विशेष अनुष्ठान भी आयोजित हो रहे हैं। बटेश्वर में आज यमुना स्नान और भोलेनाथ के दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

सावन शिवरात्रि पूजन विधि

  • सूर्योदय से पूर्व स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान शिव की जल, दूध, घी, शहद, दही आदि से रुद्राभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, श्रीफल चढ़ाएं।
  • धूप, दीप, फूल, फल अर्पित करें।
  • पूजा में शिव चालीसा, शिवाष्टक, शिव पुराण का पाठ करें।
  • संध्या के समय फलाहार करें।

शिवालयों में सुबह से ही घंटियों की गूंज और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ माहौल भक्तिमय हो गया है। महिलाएं, पुरुष, बच्चे, सभी शिवभक्ति में लीन नजर आए। पंडितों का मानना है कि इस महायोग में पूजा करने से भविष्य के संकट टलते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

 

पंचायत चुनाव ड्यूटी पर गए कर्मचारी की हार्ट अटैक से मौत, एक अन्य पीठासीन अधिकारी का पैर टूटा

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मुनस्यारी (पिथौरागढ़) : उत्तराखंड पंचायत चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को सीमांत क्षेत्रों की कठिन परिस्थितियों का भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। मुनस्यारी विकासखंड के एक दुर्गम पोलिंग बूथ पर ड्यूटी के लिए जा रहे वरिष्ठ सहायक की हार्ट अटैक से मौत हो गई, जबकि एक अन्य पीठासीन अधिकारी पहाड़ी रास्ते पर फिसलकर गंभीर रूप से घायल हो गया।

सीएमओ कार्यालय में तैनात 44 वर्षीय वरिष्ठ सहायक मनीष पंत मंगलवार सुबह अपनी टीम के साथ प्राथमिक विद्यालय गोल्फा में बने पोलिंग बूथ के लिए रवाना हुए थे। सड़क मार्ग से चार किलोमीटर दूर बूथ तक पहुंचने के लिए टीम को खड़ी चढ़ाई पार करनी थी। इसी दौरान मनीष पंत को सीने में तेज दर्द उठा और वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। साथी कर्मियों ने तत्काल मदद की कोशिश की, लेकिन कुछ ही देर में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर भेजी गई और शव को निकाला गया। उनकी जगह अन्य कर्मचारी को बूथ पर भेजा गया।

इसी तरह, चामी भैंसकोट पोलिंग बूथ की ओर बढ़ रहे पीठासीन अधिकारी गौरव कुमार दुर्गम और फिसलनभरे रास्ते पर गिर पड़े, जिससे उनका पैर फ्रैक्चर हो गया। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए नाचनी स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। उन्हें रेस्क्यू टीम के जरिए मुख्यालय भेजा गया और उनकी जगह एक अन्य अधिकारी को बूथ पर तैनात किया गया।

आरओ दिगंबर आर्य ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हार्ट अटैक से एक कर्मचारी की मौत हुई है, जबकि दूसरे पीठासीन अधिकारी को चोट आई है। सीमांत क्षेत्रों में बारिश और खराब रास्तों के चलते पोलिंग पार्टियों को भारी जोखिम उठाना पड़ रहा है।

प्रदेश के सीमांत क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश के चलते कई सड़कें बंद हो चुकी हैं और रास्ते बेहद खतरनाक हो गए हैं। ऐसे हालात में पोलिंग पार्टियों को बूथों तक पहुंचने में भारी जोखिम उठाना पड़ रहा है। मंगलवार को मुनस्यारी विकासखंड से 60 पोलिंग पार्टियां रवाना हुई थीं, जिनमें से कई को जोखिम भरे रास्तों से गुजरना पड़ा।

Uttarakhand : सरकारी अस्पतालों से अनावश्यक रेफरल पर लगेगा ब्रेक, SOP जारी

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देहरादून :  प्रदेश में अब सरकारी अस्पतालों से बिना पुख्ता कारण मरीजों को मेडिकल कॉलेज या बड़े अस्पतालों में रेफर करना आसान नहीं होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने रेफरल सिस्टम को लेकर कड़े मानक तय किए हैं। इसके तहत मरीज को प्राथमिक इलाज और विशेषज्ञ सलाह जिला स्तर पर ही उपलब्ध कराई जाएगी।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने सोमवार को इस संबंध में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी करते हुए साफ कर दिया कि अब रेफरल केवल चिकित्सकीय आवश्यकता पर आधारित होगा। अनावश्यक रेफरल की स्थिति में संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।

 

रेफरल के लिए तय किए गए मानक

विशेषज्ञ की गैरमौजूदगी में ही रेफरल किया जा सकेगा।मरीज की हालत के आधार पर ऑन-ड्यूटी वरिष्ठ डॉक्टर ही लेंगे अंतिम फैसला। रेफरल का निर्णय अब फोन या ईमेल से नहीं लिया जा सकेगा। आपात स्थिति में कॉल या व्हाट्सऐप से लिए गए फैसले बाद में दस्तावेज में दर्ज करना होगा। हर रेफरल के कारणों का लिखित उल्लेख जरूरी होगा – जैसे संसाधन या विशेषज्ञ की कमी।

गैरजरूरी रेफरल पर CMO या CMS की जवाबदेही तय होगी। एम्बुलेंस और शव वाहनों की व्यवस्था भी मजबूत होगी, रेफरल व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ एम्बुलेंस प्रबंधन को भी दुरुस्त किया जा रहा है।

राज्य में 272 “108 एम्बुलेंस”, 244 विभागीय एम्बुलेंस और केवल 10 शव वाहन हैं। कई जिलों – जैसे अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, पौड़ी और नैनीताल में शव वाहन उपलब्ध नहीं हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिए हैं कि इन जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को तत्काल वैकल्पिक शव वाहन की व्यवस्था करनी होगी। पुराने वाहनों को नियमों के अनुसार शव वाहन के रूप में पुनः तैनात करने का भी विकल्प खोला गया है। इसके संचालन के लिए क्षेत्रवार व्यय सीमा भी तय की गई है।

सरकार की मंशा साफ

स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि यह व्यवस्था केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि मरीजों को समय पर और उपयुक्त इलाज दिलाने की गंभीर कोशिश है। अब हर रेफरल दस्तावेजीकृत होगा, और SOP का पालन अनिवार्य होगा।

डॉ. कुमार ने दोहराया, “अब रेफरल कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि ठोस चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर ही किया जाएगा। इससे प्रदेश का स्वास्थ्य ढांचा और अधिक उत्तरदायी और मजबूत बनेगा।”

राज्य में 31 जुलाई से पहले पूरी होगी पदोन्नति की प्रक्रिया, तबादलों पर फिलहाल रोक

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देहरादून। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में चयन वर्ष 31 जुलाई को समाप्त हो रहा है। इस तारीख से पहले अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जाएगी, लेकिन तबादलों पर फिलहाल रोक लगी रहेगी। इसका कारण है प्रदेश में जारी पंचायत चुनाव की आचार संहिता, जो 31 जुलाई तक प्रभावी रहेगी।

चूंकि चुनावी आचार संहिता के दौरान तबादले और नई नियुक्तियां प्रतिबंधित होती हैं, इसलिए कई विभागों ने राज्य निर्वाचन आयोग से दिशा-निर्देश मांगे थे। इस पर राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राहुल कुमार गोयल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि आयोग ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि वे 31 जुलाई से पहले चयन वर्ष की अवधि समाप्त होने से पहले पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी कर लें। पदोन्नति के आदेश भी जारी किए जा सकते हैं, लेकिन तबादले नहीं किए जाएंगे।

सचिव ने यह भी स्वीकार किया कि कई पदोन्नति आदेशों में तबादला भी निहित होता है। ऐसे मामलों में विभागों को सलाह दी गई है कि वे पदोन्नति तो कर लें, लेकिन तबादले आचार संहिता खत्म होने के बाद ही करें।

आपदा जैसे मामलों में मिल रही सीमित अनुमति

इस दौरान कई विभाग राज्य निर्वाचन आयोग से अपनी निविदा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अनुमति मांग रहे हैं। इस पर आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि जो कार्य चुनाव के बाद हो सकते हैं, उन्हें अभी अनुमति नहीं दी जा रही है।

केवल आपदा प्रबंधन या अन्य अत्यावश्यक कार्यों के लिए ही अनुमति दी जा रही है।आयोग के अनुसार, औसतन रोजाना तीन फाइलों को स्वीकृति दी जा रही है, जबकि तीन अन्य को खारिज किया जा रहा है।

तबादलों का इंतजार करेंगे अफसर

ऐसे में पदोन्नत अफसरों को फिलहाल अपने स्थान पर ही कार्य करना पड़ेगा। माना जा रहा है कि आचार संहिता समाप्त होने के बाद सरकार तबादलों की सूची जारी करेगी।