Home Blog Page 186

उत्तराखंड : भारी बारिश का अलर्ट, यहां स्कूल बंद, राज्य में 93 सड़कें अब भी बाधित

0

देहरादून: उत्तराखंड में मानसून का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य के अधिकांश जिलों में मंगलवार को भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र ने देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी और रुद्रप्रयाग जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए बहुत भारी से अत्यधिक वर्षा की संभावना जताई है। वहीं नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जहां कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। अन्य जिलों में भी गर्जन, बिजली चमकने और तेज बारिश की आशंका बनी हुई है।

टिहरी में स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद

तेज बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए टिहरी जिले में मंगलवार (23 जुलाई) को कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, गैर-सरकारी और निजी विद्यालयों के साथ-साथ सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में एक दिन का अवकाश घोषित किया गया है। जिला प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है।

93 सड़कें अब भी बंद

राज्य में हो रही लगातार बारिश के चलते जगह-जगह भूस्खलन और मलबा आने की घटनाएं सामने आ रही हैं। सोमवार को एक राष्ट्रीय राजमार्ग और दस राज्यमार्गों समेत कुल 121 सड़कें बंद हो गई थीं। हालांकि, देर शाम तक 28 सड़कों को खोल दिया गया, लेकिन अब भी 93 सड़कें अवरुद्ध हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अवरुद्ध सड़कों की स्थिति 

  • अल्मोड़ा – 2
  • बागेश्वर – 7
  • चमोली – 14
  • देहरादून – 8
  • नैनीताल – 3
  • पौड़ी – 20
  • पिथौरागढ़ – 11
  • रुद्रप्रयाग – 7
  • टिहरी – 8
  • उत्तरकाशी – 13

सावधानी जरूरी

प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि अनावश्यक यात्रा से बचें, पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्क रहें और मौसम विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। बचाव एवं राहत टीमें अलर्ट मोड पर हैं, और सड़कों को खोलने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

BIG BREAKING: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा

0

नई दिल्ली। देश की राजनीति से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए यह फैसला लिया है।

सूत्रों के अनुसार, उपराष्ट्रपति धनखड़ पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, और डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने अपना पद त्यागने का निर्णय लिया। हाल ही में उनके नैनीताल दौरे के दौरान भी उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके कारण उन्हें कार्यक्रम बीच में छोड़कर लौटना पड़ा था।

धनखड़ ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि “स्वास्थ्य में लगातार गिरावट के चलते मैं अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से नहीं कर पा रहा हूं। डॉक्टरों की सलाह पर मैं यह महत्वपूर्ण निर्णय ले रहा हूं।”

उनके अचानक इस्तीफे से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा। गौरतलब है कि जगदीप धनखड़ ने 2022 में उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी, और वे अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर मुखर रहे।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस संवेदनशील पद को भरने के लिए किसे आगे लाती है।

भूस्खलन ने रोकी मां वैष्णो देवी यात्रा की रफ्तार, एक श्रद्धालु की मौत, छह घायल

0

कटड़ा। मां वैष्णो देवी की यात्रा के दौरान सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। तेज बारिश के बीच सुबह करीब 8:30 बजे बाणगंगा क्षेत्र में गुलशन लंगर के पास भूस्खलन हुआ, जिसमें एक श्रद्धालु की मौत हो गई जबकि छह अन्य घायल हो गए। हादसे में टीन शेड, चट्टानों के गिरने से क्षतिग्रस्त हो गया और एम टेक कंपनी का प्रमुख प्रीपेड काउंटर भी टूटकर बर्बाद हो गया।

चट्टानें टूटीं, श्रद्धालु दबे
लगातार बारिश के कारण भारी चट्टानें और मलबा अचानक मार्ग पर आ गिरा। हादसे के समय श्रद्धालु तेज बारिश के बीच यात्रा कर रहे थे। दो स्थानीय कर्मचारी और सात श्रद्धालु चपेट में आ गए। फिलहाल एक श्रद्धालु के. उपाना (70), चेन्नई निवासी की मौत हो गई है। बाकी छह घायल श्रद्धालुओं में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर के लोग शामिल हैं।

घायलों की पहचान

  • राजेंद्र भल्ला (70), जमुना नगर, हरियाणा

  • लीला रैकवार (56), ललितपुर, उत्तर प्रदेश

  • के. राधा (66), चेन्नई, तमिलनाडु

  • सुरेश कुमार आहूजा (66), पुणे, महाराष्ट्र

  • निखिल ठाकुर (26), टिकरी, उधमपुर (स्थानीय)

  • विक्की शर्मा (36), धनोरी, कटड़ा (स्थानीय)

निखिल और विक्की को मामूली चोटें आईं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। गंभीर रूप से घायल राजेंद्र भल्ला, राधा और उपाना को श्राइन बोर्ड के नारायण अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपाना ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

राहत व बचाव कार्य जारी
हादसे की सूचना मिलते ही श्राइन बोर्ड, स्थानीय प्रशासन, पुलिस, सीआरपीएफ और आपदा प्रबंधन दल ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। हालांकि, लगातार हो रही तेज बारिश राहत कार्य में बाधा बन रही है।

यात्रा मार्गों पर असर

  • बाणगंगा मार्ग फिलहाल बंद कर दिया गया है।

  • नया ताराकोट मार्ग से यात्रा जारी है।

  • बैटरी कार मार्ग भी रात 12 बजे बंद कर दिया गया, क्योंकि वहां लगातार कंकड़, मिट्टी और पत्थर गिर रहे हैं।

  • हेलीकॉप्टर सेवा भी स्थगित है।

हालात कठिन हैं, फिर भी श्रद्धालुओं का हौसला कम नहीं हुआ है। सोमवार दोपहर 11 बजे तक करीब 8500 श्रद्धालु पंजीकरण कर भवन की ओर रवाना हो चुके थे। एसपी कटड़ा बिपिन चंद्रन ने बताया कि घटना में एक श्रद्धालु की मौत हुई है, बाकी घायलों का इलाज जारी है। भूस्खलन स्थल पर मार्ग को जल्द साफ करने के लिए कार्य तेज कर दिया गया है।

संसद का मानसून सत्र शुरू : लोकसभा की कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित

0

नई दिल्ली  :देश की संसद का मानसून सत्र सोमवार से आरंभ हो गया। यह सत्र आगामी 21 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कुल 21 बैठकें होंगी। हालांकि 14 से 17 अगस्त तक स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर संसद स्थगित रहेगी। मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। इस बार संसद का यह सत्र पाकिस्तान में आतंकियों पर किए गए भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद का पहला सत्र है। ऐसे में यह सत्र सिर्फ विधायी कार्यवाही नहीं, बल्कि सुरक्षा, विदेश नीति और राजनीतिक रणनीति का भी मंच बन गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा: यह सत्र विजयोत्सव

सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “विजयोत्सव” करार देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने आतंक के आकाओं को उनके घर में घुसकर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह सत्र देश के सैन्य सामर्थ्य, विज्ञान-तकनीक और अंतरिक्ष मिशनों के लिए प्रेरणादायक बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब देश “रेड जोन” से निकलकर “ग्रीन जोन” की ओर बढ़ रहा है—नक्सलवाद और आतंकवाद सिमट रहे हैं, और संविधान की जीत हो रही है।

विपक्ष ने पहलगाम हमला और ट्रंप के दावों को उठाया

हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम में मध्यस्थता के दावों को लेकर विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी, सुरजेवाला और नसीर हुसैन समेत कई नेताओं ने नियम 267 के तहत कार्य स्थगन नोटिस दिया। उनका आरोप है कि सरकार सुरक्षा चूक और विदेश नीति के सवालों से बच रही है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सत्र के पहले ही दिन नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “जब रक्षा मंत्री को बोलने की अनुमति है, तो विपक्ष के नेता को क्यों नहीं?” उन्होंने इसे संसदीय परंपरा के खिलाफ बताया।

सरकार चर्चा को तैयार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार है। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने भी सांसदों से शांतिपूर्वक कार्यवाही चलाने की अपील की। वहीं लोकसभा स्पीकर जगदंबिका पाल ने सभी से संयम रखने का अनुरोध किया।

भाजपा सांसदों का पलटवार

भाजपा सांसद रवि किशन ने विपक्ष पर राजनीति करने और बेबुनियाद हंगामा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “वे विकास और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर बोलने की बजाय सुरक्षा ऑपरेशन को राजनीतिक रंग दे रहे हैं।”

सत्र की शुरुआत श्रद्धांजलियों के साथ

सत्र की शुरुआत पूर्व सांसदों—किशन कपूर, गिरिजा व्यास, मिनाती सेन, सुखदेव सिंह ढिंढसा आदि को श्रद्धांजलि देकर हुई। साथ ही पहलगाम हमले, एयर इंडिया दुर्घटना और प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों को भी श्रद्धांजलि दी गई।

सत्र के प्रमुख विधेयक

  • जन विश्वास संशोधन विधेयक 2025

  • भारतीय प्रबंधन संस्थान संशोधन विधेयक 2025

  • कराधान कानून संशोधन विधेयक 2025

  • राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025

  • राष्ट्रीय डोपिंग रोधी संशोधन विधेयक 2025

  • विरासत स्थल संरक्षण विधेयक 2025

इस बार का मानसून सत्र सिर्फ सरकार और विपक्ष की बहसों का नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मूल प्रश्नों का मंच बन चुका है। जहां एक ओर सरकार ‘विजयोत्सव’ मना रही है, वहीं विपक्ष जवाब और जवाबदेही की मांग कर रहा है। अब देखना होगा कि इस सत्र में किसकी बात संसद के पटल पर गूंजती है और किसे जनता की अदालत में सुनवाई का इंतज़ार करना पड़ता है।

सावन में शिव भक्ति का ज्वार, बारिश के बीच श्रद्धालुओं की कतारें

0

हरिद्वार : सावन का महीना, शिवभक्तों के लिए आस्था का महासागर बनकर उमड़ता है। आज सुबह से हो रही लगातार बारिश भी श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर पाई। जगह-जगह शिवालयों में जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं। भक्ति में भीगते तन और तपते मन के साथ श्रद्धालु ‘हर हर महादेव’ के उद्घोष करते हुए शिव को जल अर्पित कर रहे हैं।

उत्तराखंड में सावन के महीने में महादेव के कई प्रसिद्ध मंदिरों में विशेष भीड़ उमड़ती है। इनमें सबसे विशेष स्थान रखता है कनखल का दक्षेश्वर महादेव मंदिर, वह पवित्र भूमि जहां भगवती सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अपमान सह न पाकर आत्मदाह किया था।

कनखल, ब्रह्मापुत्र दक्ष की प्राचीन राजधानी, महज एक तीर्थ नहीं बल्कि शिव और शक्ति की अनंत गाथा का साक्षात केंद्र है। यही वह भूमि है जहाँ दक्ष ने विराट यज्ञ का आयोजन किया, जहां भगवती सती ने अपनी देह त्याग दी, और जहां से पृथ्वी पर 52 शक्तिपीठों का निर्माण हुआ।

कहा जाता है कि इस यज्ञ भूमि पर 84 हज़ार ऋषि, विष्णु, ब्रह्मा और असंख्य देवता पधारे थे। और स्वयं महादेव, सती से विवाह करने यक्षों, गंधर्वों और किन्नरों के साथ यहां पहुंचे थे। अब श्रावण में, हर साल, शिव ‘दक्षेश्वर’ रूप में कनखल लौटते हैं, अपने वचन को निभाने।

यह मायानगरी केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय संतुलन का आधार है। यहीं पर ऋषियों ने पहली बार अरणी मंथन से यज्ञाग्नि उत्पन्न की थी। कनखल में शिव का केंद्र आकाश में माना जाता है, जबकि महामाया का शक्तिपीठ पाताल में स्थित है। यही वह अदृश्य शक्ति है जिससे ब्रह्मांड की डोर बंधी हुई है।

आज हो रही निरंतर वर्षा को श्रद्धालु शिव का आशीर्वाद मानते हैं। मंदिरों के प्रांगण में नंगे पैर खड़े श्रद्धालु, जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर महादेव से अपने सुख-शांति की कामना कर रहे हैं। भक्त मानते हैं कि सावन में किया गया एक जलाभिषेक, सैंकड़ों जन्मों के पापों का क्षालन करता है।

गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़ यात्रियों का ट्रक पलटा, पांच घायल, एक युवक लापता

0

उत्तरकाशी : गंगोत्री से गंगाजल भरकर लौट रहे दिल्ली के कांवड़ यात्रियों से भरा ट्रक रविवार देर शाम सोनगाड़ के पास अनियंत्रित होकर गंगोत्री हाईवे पर पलट गया। हादसे में पांच कांवड़ यात्री घायल हो गए, जिन्हें तत्काल गंगनानी अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और राहत व बचाव कार्य शुरू किया। ट्रक के हाईवे के बीच पलटने के कारण करीब आधे घंटे तक यातायात बाधित रहा। पुलिस ने बड़े वाहनों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाकर यातायात सुचारु कराया, जबकि छोटे वाहन उसी मार्ग से गुजरते रहे।

इसी दौरान, देर रात गंगनानी से आगे नाग देवता मंदिर के पास एक कांवड़ यात्री सड़क से नीचे गिर गया। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने युवक की तलाश में तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाया, लेकिन अंधेरा होने के कारण सर्च ऑपरेशन को रात में स्थगित करना पड़ा। युवक का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है।

हर्षिल थानाध्यक्ष दीपक रावत ने बताया कि ट्रक में सवार सभी यात्री दिल्ली निवासी हैं और गंगोत्री से गंगाजल भरकर अपने स्थानीय शिवालय लौट रहे थे। जैसे ही वाहन सोनगाड़ के पास एक तीखे मोड़ पर पहुंचा, चालक का नियंत्रण ट्रक से हट गया और वाहन सड़क के बीचों-बीच पलट गया।

इन दिनों गंगोत्री घाटी बोल बम और हर हर महादेव के जयकारों से गूंज रही है। बड़ी संख्या में कांवड़ यात्री गंगाजल लेने के लिए गंगोत्री पहुंच रहे हैं, जिससे हाईवे पर यातायात का दबाव बढ़ा हुआ है। पुलिस प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार गश्त कर रहा है।

मानसून सत्र आज से शुरू, विपक्ष के सवाल और सरकार के बिल आमने-सामने

0

नई दिल्ली : संसद का बहुप्रतीक्षित मानसून सत्र आज से शुरू हो गया है, जो आगामी 32 दिनों तक चलेगा। इस दौरान 21 बैठकें आयोजित होंगी, जबकि 14 और 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोहों के चलते संसद की कार्यवाही स्थगित रहेगी। सत्र का समापन 21 अगस्त को होगा।  सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मीडिया को संबोधित करेंगे, जबकि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और अन्य प्रमुख नेता सुबह संसद भवन पहुंच चुके हैं।

ट्रंप और ऑपरेशन सिंदूर पर जवाब

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी है कि सरकार इस सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े दावों और हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर पर विस्तृत जवाब देगी। यह वही ऑपरेशन है, जो 7 मई 2025 को लॉन्च किया गया था और जिसके बाद पहली बार संसद का सत्र बुलाया गया है।

विपक्ष उठाएगा पहलगाम हमला

विपक्ष इस सत्र को पूरी तरह हमलावर मुद्रा में शुरू करने की तैयारी में है। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले, वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और वक्फ संपत्तियों को लेकर बने नए विधेयक विपक्ष की रणनीति के केंद्र में हैं। विपक्ष ने संकेत दिया है कि इन मुद्दों को सदन में जोरशोर से उठाया जाएगा।

सरकार लाएगी कई अहम विधेयक

मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार कई अहम विधेयकों को संसद में पेश करने और उन्हें पारित कराने की योजना में है। इनमें कुछ प्रमुख विधेयक इस प्रकार हैं:

  • मणिपुर माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025

  • जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2025

  • भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2025

  • कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2025

  • विरासत स्थल और भू-अवशेष (संरक्षण और रखरखाव) विधेयक, 2025

  • खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2025

  • राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, 2025

  • राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक, 2025

इस बार का मानसून सत्र कई मामलों में खास रहेगा। जहां सरकार अपने विधायी एजेंडे को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष सरकार को घेरने के लिए पुराने और ताज़ा मुद्दों को हथियार बना रहा है। अब देखना होगा कि यह सत्र जनहित के कानूनों पर केंद्रित रहता है या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की भेंट चढ़ता है।

गायक पवन सेमवाल के खिलाफ मुकदमा, दिल्ली से लाया गया देहरादून, पूछताछ के बाद नोटिस देकर छोड़ा गया

0

देहरादून। धामी सरकार के खिलाफ गाए गाने के बाद लोकगायक पवन सेमवाल एक बार सरकार के निशाने पर हैं। एक महिला की शिकायत पर देहरादून के पटेलनगर थाने में सेमवाल के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने पवन सेमवाल को पूछताछ के लिए दिल्ली के कल्याणपुरी थाने से हिरासत में लेकर देहरादून लाया, जहां पूछताछ के बाद उन्हें नोटिस देकर छोड़ दिया गया।

जानकारी के अनुसार, 19 जुलाई को पवन सेमवाल द्वारा एक यूट्यूब चैनल पर अपनी फेसबुक आईडी से एक गीत दोबारा प्रसारित किया गया, जिसमें उत्तराखंड सरकार की नीतियों के खिलाफ टिप्पणी की गई है। इस गाने में बेटियों के साथ हो रहे बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों का भी जिक्र किया गया है। इस गीत को पहले भी विवाद के बाद हटा दिया गया था, लेकिन दोबारा पोस्ट करने पर एक महिला ने पटेलनगर कोतवाली में तहरीर दी।

शिकायत के आधार पर पवन सेमवाल के खिलाफ मुकदमा संख्या 369/25 दर्ज किया गया है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 353(1)(b), 79 के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने पवन सेमवाल को दिल्ली के कल्याणपुरी थाने में नियमानुसार बुलाया, और वहां से आवश्यक पूछताछ के लिए उन्हें देहरादून लाया गया। पूछताछ के बाद उन्हें BNSS की धारा 35(a) के तहत नोटिस तामील कराकर थाने से छोड़ दिया गया।

साथ ही, उन्हें भविष्य में जांच में सहयोग करने की कानूनी हिदायत भी दी गई है। यह मामला सोशल मीडिया पर भी सुर्खियों में है, जहां समर्थक और विरोधी दोनों पक्षों से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

“हे धामी तिन नि थामी रे”: पवन सेमवाल के गाने से मचा हड़कंप, पुलिस बना रही हटाने का दबाव

0

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेकर सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक गीत तेजी से वायरल हो रहा है। “हे धामी तिन नि थामी रे” शीर्षक वाले इस गीत को भुवनेश्वरी प्रोडक्शन यूट्यूब चैनल पर 15 जुलाई को रिलीज किया गया था, और उस गाने को तब  30 हजार लोग देख चुके थे। उसके बाद पवन सेमवाल को पुलिस उनके घर से उठा लाई, जिसके बाद पुलिस गाने को यूट्यूब से डिलीट करना पड़ा। उसके बाद लोकगायक पवन सेमवाल ने सोशल मीडिया में एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमेँ कहा था कि एक और वीडियो जल्द अपलोड करेंगे।

पवन ने वैसा ही किया। “गाना रिलीज़ हुए अभी सिर्फ 20 घंटे ही हुए हैं, लेकिन इसे अब तक 16 हजार से ज़्यादा बार देखा जा चुका है। इस बार पवन सेमवाल ने गाना रिलीज़ करने से पहले एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि ‘दबाव के चलते पहले गाना हटाना पड़ा था, लेकिन अब मैं पीछे हटने वाला नहीं हूं।’ गाने के वीडियो में उन लोगों की तस्वीरें भी शामिल की गई हैं, जिन्होंने खुलकर उनका समर्थन किया।”

गाने में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महिला अपराधों और जन आंदोलनों के दमन जैसे कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। गीत की भाषा में व्यंग्य के साथ तीव्र असंतोष झलकता है, जिसमें कहा गया है, “उत्तराखंड की ह्वेगी बदनामी, रे धामी रे तिन नि थामी रे…”

गीत में आरोप लगाया गया है कि धामी सरकार प्रदेश में बढ़ते बलात्कार, शराब की भरमार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को नियंत्रित करने में विफल रही है। इसके साथ ही, गीत में यह भी कहा गया है कि शांतिपूर्ण आंदोलनों को पुलिसिया कार्रवाई और लाठीचार्ज के जरिए कुचला गया है।

https://www.youtube.com/watch?v=79jiUd7p1yo

बेरोजगारों और आंदोलनकारियों की पीड़ा के स्वर

गीत में बेरोजगार युवाओं की नाराज़गी को भी प्रमुखता से उठाया गया है। आरोप लगाया गया है कि जिन युवाओं ने नौकरी की मांग को लेकर आंदोलन किया, उन्हें लाठियों और जेल की सजा मिली। गीत के एक हिस्से में कहा गया है कि “आंदोलन करने वालों को अपराधियों की तरह पेश किया गया और उनकी आवाज़ को दबा दिया गया।”

नेताओं की ‘चमकती जवानी, जनता की बर्बादी

गीत का अंतिम भाग सत्ता में बैठे नेताओं की “धन की भूख” और “जनता से दूरी” पर चोट करता है। इसमें उत्तराखंड को बर्बादी की ओर धकेले जाने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि राज्य की दुर्दशा के बीच सत्ता पक्ष के नेता ऐशोआराम में डूबे हैं।

राजनीतिक हलकों में हलचल

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पवन सेमवाल के गीत को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पवन ने अपने गाने के जरिए सरकार की असलियत उजागर की है। गोदियाल ने आरोप लगाया कि जनता की पीड़ा को स्वर देने वाले इस युवा कलाकार को सत्ता के इशारे पर लगातार परेशान किया जा रहा है। उनका कहना है कि आधी रात को पुलिस उसके घर दबिश दे रही है और तरह-तरह के दबाव बनाए जा रहे हैं। इसी बीच यह खबर भी सामने आई है कि पवन सेमवाल को एक बार फिर पुलिस ने हिरासत में लिया है, हालांकि इसकी अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

उत्तराखंड पंचायत चुनाव : चुनाव प्रचार में उतरे BJP के बड़े चेहरे, क्या बचा पाएंगे साख?

0
  • प्रदीप रावत ‘रवांल्टा’ 

उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है। गांव-गांव में राजनीतिक सरगर्मी तेज़ है और सत्ताधारी भाजपा ने इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। पार्टी ने जिला पंचायत और ब्लॉक प्रमुख की सीटों पर जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर मंत्री और विधायक तक प्रचार में उतर आए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या पंचायत स्तर की ज़मीनी राजनीति में बड़े नेताओं की एंट्री वाकई असर दिखा पाएगी? या फिर ये चुनाव स्थानीय समीकरणों, व्यक्तिगत रिश्तों और धनबल की खुली होड़ बनकर रह जाएगा? यही सवाल इस चुनाव को खास बनाते हैं।

सत्ता की शतरंज और मोहरे बने दिग्गज
उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की गूंज अब शोर में बदल चुकी है। गांव की गलियों से लेकर जिला मुख्यालयों तक राजनैतिक बिसात बिछ चुकी है और भाजपा इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना चुकी है। जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख की कुर्सियों पर काबिज़ होने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। खुद प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री और तमाम विधायक गांव-गांव, टोले-टोले घूम रहे हैं। पर क्या ये ‘बड़े’ नेता गांव की राजनीति के ‘छोटे मगर गहरे’ समीकरणों को साध पाएंगे? यह सवाल गांव के हर नुक्कड़ पर तैर रहा है।

गांव में रिश्तों का गणित, नेताओं की चाल फेल?
पंचायत चुनाव कोई विधानसभा नहीं होता, जहां पार्टी की लहर हो और नेता की तस्वीर से वोट गिरते हों। यहां जनता देखती है कि कौन अंतिम संस्कार में आया था, किसने बीमार पड़ने पर हौसला दिया और किसने शादी-ब्याह में मदद पहुंचाई। भाजपा के बड़े-बड़े नाम यहां बौने पड़ सकते हैं क्योंकि पंचायत चुनाव दिल से लड़ा जाता है, दल से नहीं। गांव की चूल्हा-चौका राजनीति में झूठे वादों की जगह नहीं होती।

पार्टी कैडर का नहीं पड़ता प्रभाव
भले ही पार्टी अधिकृत प्रत्याशी मैदान में हों, लेकिन उत्तराखंड की पंचायत राजनीति में यह मुहर महज़ एक औपचारिकता बनकर रह जाती है। यहां वोट जाति, ज़ात, रिश्तेदारी और व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर डाला जाता है। ऐसे में भाजपा की यह रणनीति, बड़े नेताओं को प्रचार में झोंकना कहीं अपने ही दांव में फंसने जैसा न हो जाए?

उल्टा पड़ सकता है प्रचार का तामझाम
प्रचार में उतरे विधायक और मंत्री खुद जनता की अदालत में कठघरे में खड़े दिखते हैं। गांव वाले पूछते हैंवो हमारी सड़क कब बनी? पानी की लाइन कब आई? बिजली क्यों गायब है? और भी कई तीखे सवाल होते हैं, ऐसे में किसी प्रत्याशी के लिए वोट मांगते हुए बड़े नेता, खुद अपने कामों की पोल भी साथ में खोलते नज़र आते हैं। प्रचार यहां फायदे से ज़्यादा नुकसान दे सकता है।

सौदेबाज़ी की खुली मंडी
अब आइए असली सच्चाई पर। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी कोई समाजसेवा का मंच नहीं, बल्कि एक खुलेआम बिकाऊ माल की मंडी है। एक-एक सदस्य 50 लाख से लेकर 60-70 लाख तक में बिकता है, यह कोई आरोप नहीं, बल्कि सार्वजनिक सच्चाई है। जिसे अध्यक्ष बनना है, उसके पास कम से कम 8-10 करोड़ की जेब होनी चाहिए। यह ‘चुनाव’ नहीं, ‘निवेश’ है, जिसका रिटर्न पूरे पांच साल में वसूला जाता है, ठेके, कमीशन, बंदरबांट और ऊपर से आशीर्वाद का खेल।

भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस ढकोसला
भाजपा हो या कांग्रेस या फिर कोई निर्दलीय, जिला पंचायत का खेल सबके लिए एक सा है। भ्रष्टाचार यहां कोई छुपा हुआ अजेंडा नहीं, बल्कि निर्वाचित पद की बुनियाद है। सरकार ज़ीरो टॉलरेंस की बात करती है, लेकिन पंचायत चुनाव में यह शब्द सिर्फ बयानबाज़ी की काली पट्टी है। यहां से निकलने वाली हर सिफारिश, हर ठेका और हर योजना पहले इस भ्रष्ट व्यवस्था की छाती से होकर गुज़रती है। ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी भी इससे अलग नहीं। यहां भी वही सौदे, वही बंदरबांट और वही जातिगत समीकरण चल रहे हैं। फर्क बस इतना है कि यहां मंडी थोड़ी सस्ती है, मगर नीयत वैसी ही बिकाऊ।

उल्टा नेता लोगों के निशाने पर आ जाएंगे?
भाजपा ने एक बड़ा दांव खेला है, पर क्या गांव उसे समझ पाएंगे या उल्टा नेता लोगों के निशाने पर आ जाएंगे? पंचायत चुनाव का असली चेहरा बहुरंगी नहीं, बल्कि कड़वा सच है। यह लोकतंत्र नहीं, धनतंत्र की परीक्षा बनता जा रहा है। जहां भावनाएं नहीं, नोट गिनती में आते हैं, तो सवाल यह है] क्या भाजपा की यह साख की लड़ाई, वाकई जीत में बदलेगी या फिर गांव की ज़मीन उसे राजनीति का सबक पढ़ा देगी?