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“हे धामी तिन नि थामी रे”: पवन सेमवाल के गाने से मचा हड़कंप, पुलिस बना रही हटाने का दबाव

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेकर सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक गीत तेजी से वायरल हो रहा है। “हे धामी तिन नि थामी रे” शीर्षक वाले इस गीत को भुवनेश्वरी प्रोडक्शन यूट्यूब चैनल पर 15 जुलाई को रिलीज किया गया था, और उस गाने को तब  30 हजार लोग देख चुके थे। उसके बाद पवन सेमवाल को पुलिस उनके घर से उठा लाई, जिसके बाद पुलिस गाने को यूट्यूब से डिलीट करना पड़ा। उसके बाद लोकगायक पवन सेमवाल ने सोशल मीडिया में एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमेँ कहा था कि एक और वीडियो जल्द अपलोड करेंगे।

पवन ने वैसा ही किया। “गाना रिलीज़ हुए अभी सिर्फ 20 घंटे ही हुए हैं, लेकिन इसे अब तक 16 हजार से ज़्यादा बार देखा जा चुका है। इस बार पवन सेमवाल ने गाना रिलीज़ करने से पहले एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि ‘दबाव के चलते पहले गाना हटाना पड़ा था, लेकिन अब मैं पीछे हटने वाला नहीं हूं।’ गाने के वीडियो में उन लोगों की तस्वीरें भी शामिल की गई हैं, जिन्होंने खुलकर उनका समर्थन किया।”

गाने में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महिला अपराधों और जन आंदोलनों के दमन जैसे कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। गीत की भाषा में व्यंग्य के साथ तीव्र असंतोष झलकता है, जिसमें कहा गया है, “उत्तराखंड की ह्वेगी बदनामी, रे धामी रे तिन नि थामी रे…”

गीत में आरोप लगाया गया है कि धामी सरकार प्रदेश में बढ़ते बलात्कार, शराब की भरमार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को नियंत्रित करने में विफल रही है। इसके साथ ही, गीत में यह भी कहा गया है कि शांतिपूर्ण आंदोलनों को पुलिसिया कार्रवाई और लाठीचार्ज के जरिए कुचला गया है।

https://www.youtube.com/watch?v=79jiUd7p1yo

बेरोजगारों और आंदोलनकारियों की पीड़ा के स्वर

गीत में बेरोजगार युवाओं की नाराज़गी को भी प्रमुखता से उठाया गया है। आरोप लगाया गया है कि जिन युवाओं ने नौकरी की मांग को लेकर आंदोलन किया, उन्हें लाठियों और जेल की सजा मिली। गीत के एक हिस्से में कहा गया है कि “आंदोलन करने वालों को अपराधियों की तरह पेश किया गया और उनकी आवाज़ को दबा दिया गया।”

नेताओं की ‘चमकती जवानी, जनता की बर्बादी

गीत का अंतिम भाग सत्ता में बैठे नेताओं की “धन की भूख” और “जनता से दूरी” पर चोट करता है। इसमें उत्तराखंड को बर्बादी की ओर धकेले जाने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि राज्य की दुर्दशा के बीच सत्ता पक्ष के नेता ऐशोआराम में डूबे हैं।

राजनीतिक हलकों में हलचल

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पवन सेमवाल के गीत को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पवन ने अपने गाने के जरिए सरकार की असलियत उजागर की है। गोदियाल ने आरोप लगाया कि जनता की पीड़ा को स्वर देने वाले इस युवा कलाकार को सत्ता के इशारे पर लगातार परेशान किया जा रहा है। उनका कहना है कि आधी रात को पुलिस उसके घर दबिश दे रही है और तरह-तरह के दबाव बनाए जा रहे हैं। इसी बीच यह खबर भी सामने आई है कि पवन सेमवाल को एक बार फिर पुलिस ने हिरासत में लिया है, हालांकि इसकी अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

उत्तराखंड पंचायत चुनाव : चुनाव प्रचार में उतरे BJP के बड़े चेहरे, क्या बचा पाएंगे साख?

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  • प्रदीप रावत ‘रवांल्टा’ 

उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है। गांव-गांव में राजनीतिक सरगर्मी तेज़ है और सत्ताधारी भाजपा ने इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। पार्टी ने जिला पंचायत और ब्लॉक प्रमुख की सीटों पर जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर मंत्री और विधायक तक प्रचार में उतर आए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या पंचायत स्तर की ज़मीनी राजनीति में बड़े नेताओं की एंट्री वाकई असर दिखा पाएगी? या फिर ये चुनाव स्थानीय समीकरणों, व्यक्तिगत रिश्तों और धनबल की खुली होड़ बनकर रह जाएगा? यही सवाल इस चुनाव को खास बनाते हैं।

सत्ता की शतरंज और मोहरे बने दिग्गज
उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की गूंज अब शोर में बदल चुकी है। गांव की गलियों से लेकर जिला मुख्यालयों तक राजनैतिक बिसात बिछ चुकी है और भाजपा इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना चुकी है। जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख की कुर्सियों पर काबिज़ होने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। खुद प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री और तमाम विधायक गांव-गांव, टोले-टोले घूम रहे हैं। पर क्या ये ‘बड़े’ नेता गांव की राजनीति के ‘छोटे मगर गहरे’ समीकरणों को साध पाएंगे? यह सवाल गांव के हर नुक्कड़ पर तैर रहा है।

गांव में रिश्तों का गणित, नेताओं की चाल फेल?
पंचायत चुनाव कोई विधानसभा नहीं होता, जहां पार्टी की लहर हो और नेता की तस्वीर से वोट गिरते हों। यहां जनता देखती है कि कौन अंतिम संस्कार में आया था, किसने बीमार पड़ने पर हौसला दिया और किसने शादी-ब्याह में मदद पहुंचाई। भाजपा के बड़े-बड़े नाम यहां बौने पड़ सकते हैं क्योंकि पंचायत चुनाव दिल से लड़ा जाता है, दल से नहीं। गांव की चूल्हा-चौका राजनीति में झूठे वादों की जगह नहीं होती।

पार्टी कैडर का नहीं पड़ता प्रभाव
भले ही पार्टी अधिकृत प्रत्याशी मैदान में हों, लेकिन उत्तराखंड की पंचायत राजनीति में यह मुहर महज़ एक औपचारिकता बनकर रह जाती है। यहां वोट जाति, ज़ात, रिश्तेदारी और व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर डाला जाता है। ऐसे में भाजपा की यह रणनीति, बड़े नेताओं को प्रचार में झोंकना कहीं अपने ही दांव में फंसने जैसा न हो जाए?

उल्टा पड़ सकता है प्रचार का तामझाम
प्रचार में उतरे विधायक और मंत्री खुद जनता की अदालत में कठघरे में खड़े दिखते हैं। गांव वाले पूछते हैंवो हमारी सड़क कब बनी? पानी की लाइन कब आई? बिजली क्यों गायब है? और भी कई तीखे सवाल होते हैं, ऐसे में किसी प्रत्याशी के लिए वोट मांगते हुए बड़े नेता, खुद अपने कामों की पोल भी साथ में खोलते नज़र आते हैं। प्रचार यहां फायदे से ज़्यादा नुकसान दे सकता है।

सौदेबाज़ी की खुली मंडी
अब आइए असली सच्चाई पर। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी कोई समाजसेवा का मंच नहीं, बल्कि एक खुलेआम बिकाऊ माल की मंडी है। एक-एक सदस्य 50 लाख से लेकर 60-70 लाख तक में बिकता है, यह कोई आरोप नहीं, बल्कि सार्वजनिक सच्चाई है। जिसे अध्यक्ष बनना है, उसके पास कम से कम 8-10 करोड़ की जेब होनी चाहिए। यह ‘चुनाव’ नहीं, ‘निवेश’ है, जिसका रिटर्न पूरे पांच साल में वसूला जाता है, ठेके, कमीशन, बंदरबांट और ऊपर से आशीर्वाद का खेल।

भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस ढकोसला
भाजपा हो या कांग्रेस या फिर कोई निर्दलीय, जिला पंचायत का खेल सबके लिए एक सा है। भ्रष्टाचार यहां कोई छुपा हुआ अजेंडा नहीं, बल्कि निर्वाचित पद की बुनियाद है। सरकार ज़ीरो टॉलरेंस की बात करती है, लेकिन पंचायत चुनाव में यह शब्द सिर्फ बयानबाज़ी की काली पट्टी है। यहां से निकलने वाली हर सिफारिश, हर ठेका और हर योजना पहले इस भ्रष्ट व्यवस्था की छाती से होकर गुज़रती है। ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी भी इससे अलग नहीं। यहां भी वही सौदे, वही बंदरबांट और वही जातिगत समीकरण चल रहे हैं। फर्क बस इतना है कि यहां मंडी थोड़ी सस्ती है, मगर नीयत वैसी ही बिकाऊ।

उल्टा नेता लोगों के निशाने पर आ जाएंगे?
भाजपा ने एक बड़ा दांव खेला है, पर क्या गांव उसे समझ पाएंगे या उल्टा नेता लोगों के निशाने पर आ जाएंगे? पंचायत चुनाव का असली चेहरा बहुरंगी नहीं, बल्कि कड़वा सच है। यह लोकतंत्र नहीं, धनतंत्र की परीक्षा बनता जा रहा है। जहां भावनाएं नहीं, नोट गिनती में आते हैं, तो सवाल यह है] क्या भाजपा की यह साख की लड़ाई, वाकई जीत में बदलेगी या फिर गांव की ज़मीन उसे राजनीति का सबक पढ़ा देगी?

हरिद्वार में स्कूलों में तीन दिन की छुट्टी, ये है वजह

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हरिद्वार |कांवड़ यात्रा के दौरान संभावित भीड़ और यातायात व्यवस्था को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन कदम उठाए हैं। नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले समस्त विद्यालयों के साथ-साथ हरिपुर, रायवाला, प्रतीत नगर, श्यामपुर और हाईवे से लगे क्षेत्रों के सभी स्कूलों में 21, 22 और 23 जुलाई को अवकाश घोषित किया गया है।

इस संबंध में अपर जिला मजिस्ट्रेट एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कार्यालय द्वारा औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भारी भीड़, सुरक्षा व्यवस्था तथा छात्र-छात्राओं की आवाजाही पर प्रभाव को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

प्रशासन की ओर से अभिभावकों से अपील की गई है कि वह इन तिथियों में बच्चों को स्कूल न भेजें और यात्रा के दौरान सतर्कता बरतें।

कांवड़ मेले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह फैसला एक एहतियाती उपाय के तौर पर लिया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

उत्तर प्रदेश इटावा में निर्माणाधीन श्री केदारनाथ धाम की प्रतिकृति के मंदिर का मामला

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उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई में बन रहे श्री केदारनाथ धाम की प्रतिकृति मंदिर को लेकर उत्तराखंड में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने इस निर्माण कार्य पर आपत्ति जताई है। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा है कि केदारनाथ मंदिर भारत के 11वें ज्योतिर्लिंग के रूप में वैदिक और पुराणों में वर्णित है और इसका धार्मिक महत्व अत्यंत विशिष्ट है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमालय क्षेत्र में स्थित मूल श्री केदारनाथ धाम का प्रतिरूप किसी अन्य स्थान पर बनाना धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं का उल्लंघन है।

बीकेटीसी अध्यक्ष ने कहा कि इस मामले पर विधिक राय लेने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड सरकार इस विषय को गंभीरता से ले रही है और पूर्व में दिल्ली में प्रस्तावित श्री केदारनाथ मंदिर निर्माण और केदारनाथ ट्रस्ट पर भी रोक लगाई जा चुकी है। इसके अलावा, प्रदेश सरकार पहले ही चारधाम के नाम के दुरुपयोग को रोकने के लिए कानूनी कदम उठाने की दिशा में कार्य कर रही है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सैफई में बन रहे केदारनाथ धाम के प्रतिकृति मंदिर का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। इसके बाद उत्तराखंड के तीर्थ-पुरोहितों और धार्मिक संस्थाओं में भी रोष देखने को मिला है। बीकेटीसी ने साफ कहा है कि इटावा में निर्माणाधीन केदारेश्वर मंदिर को लेकर समिति जल्द ही उचित कदम उठाएगी।

एक लाख करोड़ के निवेश पर रुद्रपुर में मना उत्सव, अमित शाह और सीएम धामी ने किया विकास कार्यों का लोकार्पण शिलान्यास

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रुद्रपुर : उत्तराखंड की औद्योगिक नगरी रुद्रपुर शनिवार को ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनी, जब प्रदेश में एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की ग्राउंडिंग को लेकर उत्तराखंड निवेश उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

केंद्रीय गृह मंत्री ने निवेश के इस पड़ाव को उत्तराखंड के भविष्य की मजबूत नींव बताया। उन्होंने कहा, “मैं जब भी उत्तराखंड आता हूं, यहां की चारधाम संस्कृति और संतों के आशीर्वाद से नई ऊर्जा लेकर लौटता हूं। यहां की पर्वत चोटियां, नदियां और आध्यात्मिक विरासत पूरे भारत को दिशा देने का कार्य करती हैं।”

शाह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सराहना करते हुए कहा, “पहाड़ी राज्यों में निवेश लाना एक कठिन कार्य होता है, लेकिन धामी जी ने इस धारणा को तोड़ दिया है। आज उत्तराखंड में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश जमीनी सच्चाई बन चुका है और इसके साथ ही 81 हजार से अधिक रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि धामी सरकार ने औद्योगिक विकास और पर्यावरण के बीच बेहतरीन संतुलन कायम किया है। नीतियों में पारदर्शिता, क्रियान्वयन में तेजी और दूरदर्शी दृष्टिकोण से राज्य के समग्र विकास का मजबूत खाका तैयार किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान शाह ने 1165.4 करोड़ रुपये की लागत से 14 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया। इनमें रुद्रपुर में दो कामकाजी छात्रावास, गांधी पार्क का सौंदर्यीकरण, PAC में 108 आवासों का निर्माण, NH-87 चौड़ीकरण, नैनीताल में पार्किंग निर्माण, और टनकपुर, हल्द्वानी, चंपावत में कई आधारभूत विकास कार्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा, “आज का दिन उत्तराखंड की विकास यात्रा में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो रहा है। निवेश का यह आंकड़ा केवल आर्थिक आंकड़ा नहीं है, यह प्रदेश की समृद्ध संभावनाओं और जनभागीदारी पर आधारित समेकित विकास का प्रतिबिंब है।”

सीएम धामी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ‘नए भारत के लौहपुरुष’ की संज्ञा देते हुए कहा, “आपने धारा 370 को हटाकर एक भारत-श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को साकार किया है। साथ ही, सीएए लागू कर उपेक्षित शरणार्थियों को सम्मान दिलाया है।”

धामी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश ने आतंकवाद और नक्सलवाद को झुकने पर मजबूर किया है और सहकारिता के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलताएं प्राप्त की हैं। कार्यक्रम में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, उद्यमी, निवेशक, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे।

गैरसैंण को लेकर फिर गरमाई बहस : हाईकोर्ट के जस्टिस राकेश थपलियाल ने दी तीखी प्रतिक्रिया, जनता को गुमराह करना नेताओं की आदत बन गई है…

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देहरादून। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बार मामला राजनीतिक मंच या आंदोलनकारियों के नारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी गूंज उत्तराखंड उच्च न्यायालय तक पहुंच गई है। राज्य के माननीय न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने गैरसैंण को लेकर राज्य सरकार और नेताओं की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सालों से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के नाम पर जनता को सिर्फ गुमराह किया जा रहा हैऔर अब समय आ गया है कि जनता इस धोखे को समझे और जवाब मांगे।

हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बयान दिया था कि “2027 के चुनाव में हमें जिताओ, हम गैरसैंण को राजधानी बनाएंगे।” ऐसा पहली बार नहीं है, कांग्रेस ही नहीं, भाजपा भी वर्षों से ऐसे ही वादे दोहराती रही है। लेकिन, जब-जब ये दल सत्ता में आए, गैरसैंण का मुद्दा फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसी राजनीतिक रवैये पर उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनता को बार-बार गुमराह किया जाना अब एक आदत बन गई है और ये सिलसिला अब बंद होना चाहिए।

न्यायमूर्ति थपलियाल ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि 2027 में हमें जीताओ और हम गैरसैंण को राजधानी बनाकर दिखाएंगे, ये नारा सुन-सुनकर जनता थक चुकी है। उत्तराखंड की जनता को बेवकूफ बनाना अब आदत बन गई है। जब चाहे नेताओं द्वारा जनता को गुमराह किया जाता है। पेपरों में झूठे वादे और भ्रामक खबरें दी जाती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि गैरसैंण में 8000 करोड़ रुपये की सरकारी संपत्तियां और मजबूत बुनियादी ढांचा पहले से मौजूद है। कोई भी व्यक्ति जाकर देख सकता है कि वहां कितनी सुविधाएं खड़ी की जा चुकी हैं। नेताओं को सिर्फ अपना अटैची उठाकर वहां जाना है। अगर गैरसैंण को ही राजधानी बनाया गया होता, तो आज उत्तराखंड की तस्वीर ही कुछ और होती। गांव-गांव में अस्पताल होते, स्कूल होते, बिजली-पानी की सुविधाएं होतीं। लेकिन सारा विकास सिर्फ देहरादून तक सिमटकर रह गया है।

गैरसैंण में प्रस्तावित विधानसभा सत्र को लेकर भी न्यायमूर्ति थपलियाल ने कड़ा रुख अपनाया। आप गैरसैंण में जो विधानसभा सत्र करने जा रहे हैं, हम उसे रोक सकते हैं। जब तक ठोस नीति और राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखती, तब तक यह सब दिखावा है। न्यायमूर्ति ने अपने बयान में जनता से भी अपील की कि अब वक्त आ गया है कि जनता सिर्फ सोशल मीडिया पर नहीं, सड़कों पर उतरकर अपने हक के लिए आवाज उठाए। ताकि भविष्य की पीढ़ी एक जवाबदेह और संतुलित उत्तराखंड देख सके।

उत्तराखंड राज्य के गठन को 24 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक स्थायी राजधानी को लेकर स्पष्टता नहीं है। हर सरकार ने गैरसैंण को लेकर वादे किए, घोषणाएं कीं, लेकिन आज तक यह मुद्दा राजनीतिक हथियार भर बना रहा। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी ने न केवल सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आम जनमानस को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक गैरसैंण वादों में ही सिमटा रहेगा?

गूगल और Meta को ED का नोटिस, ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप केस में पूछताछ के लिए बुलाया

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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दुनिया की दो सबसे बड़ी दिग्गज कंपनियों गूगल और मेटा को नोटिस भेजा है। सट्टेबाजी ऐप के मामले में जांच कर रही ईडी ने दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों को 21 जुलाई को पेश होने का आदेश दिया है। इस दौरान ईडी दोनों से पूछताछ करेगी। दरअसल, ईडी ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप (Online Betting App Cases) के मामलों की जांच कर रही है। इससे जुड़े कई वित्तीय अपराध उजागर हो रहे हैं। इन ऐप को गूगल और मेटा जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी प्रमोट किया जाता है, जिसके सिलसिले में ईडी ने अब दोनों कंपनियों को समन भेज दिया है।

क्या है पूरा मामला?

सट्टेबाजी ऐप मामले में ईडी को पता चला है कि कई ऑनलाइन बेटिंग ऐप हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग में भी शामिल हैं। ईडी की पूछताछ में सामने आया कि गूगल और मेटा जैसे प्लेटफॉर्म पर इन ऐप्स को धड़ल्ले से प्रमोट किया जा रहा है। गूगल और मेटा विज्ञापन के लिए इन ऐप्स को कई स्लॉट्स देते हैं, जिससे न सिर्फ बेटिंग ऐप की लोकप्रियता बढ़ती है बल्कि इनके अवैध कार्यों को भी बल मिलता है।

ईडी ने भेजा समन

ऑनलाइन बेटिंग ऐप का नेटवर्क काफी दूर तक फैला है। ईडी अपनी जांच में सभी कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में गूगल और मेटा कंपनियों को भी समन भेजा गया है। बता दें कि प्ले स्टोर और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म गूगल का हिस्सा हैं, तो वहीं मेटा इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप की पेरेंट कंपनी है।

कई तेलुगु सेलेब्स का आया नाम

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 5 FIR दर्ज होने के बाद ईडी एक्शन में आई और पिछले हफ्ते तेलुगु के 29 सेलेब्स के खिलाफ एक्शन लिया गया था। इस लिस्ट में एक्टर विजय देवरकोंडा, राणा दग्गुबाती, प्रकाश राज, निधि अग्रवाल, प्रणिता सुभाष और मांचू लक्ष्मी का नाम शामिल था। इसके अलावा कई टीवी एक्टर्स का नाम भी इस मामले में सामने आया था।

जांच के घेरे में कई ऐप्स

बता दें कि ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में ईडी के रडार पर कई बड़े ऐप हैं। इस लिस्ट में जंगल रमी, ए23, जीतविन, परिमैच और लोटस365 समेत कई ऐप्स के नाम शामिल हैं।

नीलकंठ जा रहे कांवड़ियों से भरा ट्रक पलटा, तीन गंभीर, 25 घायल

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ऋषिकेश। नीलकंठ महादेव मंदिर जलाभिषेक के लिए जा रहे कांवड़ियों से भरा एक ट्रक शनिवार को देहरादून-ऋषिकेश मोटर मार्ग पर सात मोड़ के समीप दुर्गा माता मंदिर के पास अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में ट्रक में सवार 28 कांवड़ियों में से तीन गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि बाकी को हल्की चोटें आई हैं।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने कोतवाली पुलिस को जानकारी दी। पुलिस और आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं और सभी घायलों को 108 एंबुलेंस सेवा व सरकारी अस्पताल की एंबुलेंस के जरिए एसपीएस राजकीय चिकित्सालय, ऋषिकेश भेजा गया।

चिकित्सकों ने बताया कि तीन कांवड़ियों की हालत गंभीर होने के चलते उन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया है। शेष घायलों का इलाज एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में जारी है।

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि वाहन चालक द्वारा ट्रक पर नियंत्रण खो देने के कारण यह हादसा हुआ। सभी कांवड़िए हरियाणा के कैथल जिले से नीलकंठ दर्शन के लिए आए थे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सावधानीपूर्वक यात्रा करें और वाहन चालकों को तेज रफ्तार से बचने की हिदायत दें।

उत्तराखंड में देर रात को फिर आया भूकंप, इतनी थी तीव्रता

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चमोली : उत्तराखंड में भूकंप के झटके लगातार आ रहे हैं, जिससे लोगों में चिंता बनी रहती है। 19 जुलाई की रात ठीक 12 बजकर 2 मिनट पर चमोली ज़िले में हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.3 मापी गई, जिसका केंद्र जोशीमठ से 22 किमी दक्षिण-पश्चिम (WSW) में था। इस भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर दर्ज की गई। इस भूकंप की पुष्टि राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (BhoKamp) द्वारा की गई है।

भूकंप का केंद्र बिंदु चमोली ज़िले में रहा, लेकिन इसके प्रभाव हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ के कुछ हिस्सों तक भी महसूस किए गए। हालांकि इस भूकंप से किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है, लेकिन पहाड़ी इलाकों की संवेदनशीलता को देखते हुए यह हलचल चिंता का कारण ज़रूर बनती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही भूकंपीय गतिविधियाँ उत्तराखंड के टेक्टॉनिक सक्रिय क्षेत्र होने की ओर इशारा करती हैं।स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने स्थिति पर नज़र बनाए रखी है और फिलहाल किसी आपात स्थिति की ज़रूरत नहीं बताई है।

पर्वतीय इलाकों में हो रहे इस तरह के लगातार भूकंप हिमालयी क्षेत्र की नाज़ुक भूगर्भीय संरचना की याद दिलाते हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो छोटे झटके जहां ऊर्जा का कुछ हद तक निकास करते हैं, वहीं ये बड़े भूकंप की संभावनाओं की चेतावनी भी हो सकते हैं।

उत्तराखंड के इन जिलों में हो सकती है भारी से बहुत भारी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया रेड अलर्ट

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उत्तराखंड में अगले पांच दिनों तक मौसम का मिजाज बेहद खराब रहने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने 18 जुलाई से 22 जुलाई 2025 तक के लिए भारी से अत्यंत भारी बारिश, गरज-चमक, तेज़ हवाओं और आकाशीय बिजली को लेकर येलो से लेकर रेड अलर्ट तक जारी किया है।

विशेष रूप से 20 और 21 जुलाई को देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर और ऊधमसिंह नगर जैसे ज़िलों में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है, जहां रेड अलर्ट लागू किया गया है।

इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। राज्य के पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन, सड़कों के बंद होने और नदी-नालों के उफान पर आने की आशंका जताई गई है।

प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि यह बारिश जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।