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हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में भगदड़ से बड़ा हादसा, 6 श्रद्धालुओं की मौत

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हरिद्वार। उत्तराखंड के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में रविवार को भीषण भगदड़ मच गई, जिसमें छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत-बचाव कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। इस दुखद घटना की खबर मिलते ही गढ़वाल मंडल आयुक्त विनय शंकर पांडे घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं। घटना की पुष्टि करते हुए मंडलायुक्त ने बताया कि मंदिर में भीड़ का अत्यधिक दबाव होने के कारण भगदड़ की स्थिति बनी।

उन्होंने कहा कि मनसा देवी मंदिर में भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई है, जिसमें छह लोगों की जान चली गई। विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है, मैं स्वयं घटनास्थल के लिए रवाना हो चुका हूं।

बताया जा रहा है कि हादसा सुबह उस वक्त हुआ जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए मंदिर परिसर में जमा थे। मंदिर तक पहुंचने वाली रोपवे लाइन और चढ़ाई मार्ग पर भी भारी भीड़ थी, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई।

घटनास्थल पर पुलिस, एसडीआरएफ और प्रशासनिक टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और मृतकों की शिनाख्त की कोशिश की जा रही है।

मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन से जुड़े अधिकारी इस बात की जांच में जुटे हैं कि भीड़ नियंत्रण में चूक कैसे हुई और क्या प्रवेश-निकास व्यवस्था पर्याप्त थी। हादसे के बाद मंदिर क्षेत्र की ओर जाने वाले रास्तों पर कड़ी निगरानी बढ़ा दी गई है।

घटना पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ढक जताया है, उन्होंने कहा कि SDRF उत्तराखण्ड पुलिस, स्थानीय पुलिस तथा अन्य बचाव दल तत्परता से मौके पर पहुँचकर राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। मैं लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हूं और स्थिति पर निकट से निगरानी रखी जा रही है। माता रानी से सभी श्रद्धालुओं की कुशलता की प्रार्थना करता हूँ। इस कठिन समय में हम सभी पीड़ित परिवारों के साथ हैं।

घटनास्थल से विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है।

भारत का ‘नया युद्ध सिद्धांत’: दुश्मनों को मिलेगा करारा जवाब, अब आतंकी हमले को माना जाएगा ‘युद्ध’,

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नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक और आक्रामक नीति अपना ली है। इस नीति की झलक हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में देखने को मिली, जिसमें भारतीय सेना ने सीमा पार आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल कार्रवाई कर उन्हें तबाह कर दिया। अब भारत आतंकवाद से निपटने के लिए एक ‘नया युद्ध सिद्धांत’ अपनाने की योजना बना रहा है, जो देश की सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव लाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ही इस नए सिद्धांत के संकेत मिल चुके थे। इसके तहत भारत में होने वाला कोई भी आतंकी हमला अब केवल ‘आंतरिक संकट’ नहीं, बल्कि सीधे तौर पर ‘एक्ट ऑफ वॉर’ यानी युद्ध की कार्रवाई मानी जाएगी। इसका मतलब साफ है – अब जवाबी कार्रवाई सीमित नहीं, निर्णायक होगी।

CDS की अगुवाई में बनेगा नया ढांचा

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की अगुवाई में इस युद्ध सिद्धांत को संस्थागत रूप दिया जाएगा। इसकी प्रक्रिया चरणबद्ध ढंग से पूरी की जाएगी। इस नई रणनीति का मकसद है– दुश्मन को पहले ही रोकना और अगर हमला हो, तो उसकी भारी कीमत वसूलना।

जनरल द्विवेदी का साफ संदेश

कारगिल विजय दिवस के मौके पर लद्दाख में आयोजित समारोह में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दो टूक कहा ki कि दुश्मन को जवाब देना अब नया सामान्य होगा। ऑपरेशन सिंदूर से यह स्पष्ट हो गया है कि अब आतंक के आकाओं को भी बख्शा नहीं जाएगा।”

‘पहले वार करो, बाद में पूछो’

नई नीति के तहत भारत अब सामरिक संयम (Strategic Restraint) के बजाय निवारक कार्रवाई (Preventive Action) की ओर बढ़ेगा। इसमें शामिल होंगे:

  • प्रोएक्टिव डेटेरेंस: पहले से तैयारी और सख्ती

  • प्रिएम्टिव स्ट्राइक्स: हमला होने से पहले ही दुश्मन को ठिकाने लगाना

  • प्रिवेंटिव ऐक्शन: संभावित खतरों को शुरुआत में ही समाप्त करना

क्या-क्या बदलेगा?

इस युद्ध सिद्धांत के साथ कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:

  • Future Warfare Analysis Group की स्थापना – जो भविष्य के युद्धों के स्वरूप का विश्लेषण करेगी और नई रणनीति बनाएगी।

  • सेना का आधुनिकीकरण, नई ट्रेनिंग प्रणाली और ऑपरेशनल ढांचे का निर्माण

  • जवाबी कार्रवाई का समय, स्थान और तरीका भारत तय करेगा, दुश्मन नहीं

  • आतंकी और उसे पनाह देने वाले में कोई फर्क नहीं होगा – दोनों को बराबर सजा मिलेगी

  • परमाणु धमकियों से डरने का दौर खत्म – भारत संयम के साथ-साथ हर विकल्प के लिए तैयार रहेगा

पाकिस्तान को सीधी चेतावनी

भारत ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान की ओर से आतंक को समर्थन अब ‘अघोषित युद्ध’ के रूप में देखा जाएगा। परमाणु हमले की गीदड़भभकियों से भारत डरने वाला नहीं, बल्कि अब वह सभी स्तरों पर जवाब देने के लिए स्वतंत्र रहेगा।

गौरीकुंड के पास भूस्खलन से बाधित केदारनाथ यात्रा मार्ग, यात्रियों को पैदल भेजा गया धाम की ओर

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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम की ओर जाने वाला पैदल यात्रा मार्ग गौरीकुंड के निकट भूस्खलन के चलते अभी तक पूरी तरह से बहाल नहीं हो सका है। इस आपदा के कारण यात्रा मार्ग पर आवाजाही ठप हो गई है, जिससे हजारों तीर्थयात्री गौरीकुंड में फंसे हुए थे। राहत की बात यह रही कि शनिवार को सुरक्षा जवानों की निगरानी में इन यात्रियों को पैदल ही धाम की ओर भेजा गया।

पहाड़ी दरकने से टूटा मार्ग

शुक्रवार देर रात गौरीकुंड के पास अचानक पहाड़ी दरक गई, जिससे यात्रा मार्ग का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। एसडीआरएफ और प्रशासन ने तत्काल राहत व मरम्मत कार्य शुरू किया, लेकिन लगातार खराब मौसम के चलते मार्ग खोलने में मुश्किलें आ रही हैं।

धाम से उतरे यात्रियों का रेस्क्यू

शनिवार को धाम से नीचे आ रहे यात्रियों को एसडीआरएफ की टीमों ने सुरक्षित निकालकर गौरीकुंड पहुंचाया। लेकिन यात्रा मार्ग ऊपर की ओर चढ़ने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हो पाया था। प्रशासन ने शनिवार को किसी भी यात्री को ऊपर नहीं भेजा।

पैदल ही करनी पड़ रही है चढ़ाई

रविवार सुबह तक भी मार्ग पूरी तरह से नहीं खुल पाया, लेकिन तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ और लगातार इंतजार को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा बलों की निगरानी में पैदल यात्रियों को धाम की ओर रवाना किया।
भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में घोड़े-खच्चर, डंडी-कंडी जैसी सुविधाएं पूरी तरह बंद हैं, जिससे यात्रियों को कठिन पैदल चढ़ाई का सामना करना पड़ रहा है।

हालात अब भी संवेदनशील

प्रशासन की ओर से मार्ग को खोलने के प्रयास लगातार जारी हैं, लेकिन भूस्खलन प्रभावित इलाका अब भी अत्यंत खतरनाक बना हुआ है। चट्टानों के खिसकने और नए भूस्खलन की आशंका के चलते जोखिम बरकरार है।

यात्रियों को अपील

प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले मौसम और मार्ग की स्थिति की जानकारी अवश्य लें। साथ ही मार्ग पर सुरक्षा बलों और बचाव दल के निर्देशों का पालन करें।

UCC लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण में रिकॉर्ड वृद्धि, हर दिन औसतन हो रहे 1634 विवाह पंजीकरण

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देहरादून। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की दर में ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया है। 27 जनवरी 2025 को यूसीसी के लागू होने के साथ ही विवाह पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया था। इसके बाद से अब तक कुल 3,01,526 विवाह यूसीसी के तहत पंजीकृत हो चुके हैं। यानी प्रतिदिन औसतन 1634 विवाह पंजीकृत हो रहे हैं, जो कि पहले के आंकड़ों की तुलना में 24 गुना अधिक है।

यूसीसी लागू होने से पहले विवाह पंजीकरण उत्तराखंड विवाह पंजीकरण अधिनियम-2010 के तहत होते थे। तब पंजीकरण की प्रक्रिया सीमित और जटिल थी, जिस कारण लोग विवाह पंजीकरण को गंभीरता से नहीं लेते थे। वर्ष 2010 से लेकर 26 जनवरी 2025 तक कुल 3,30,064 विवाह ही पंजीकृत हुए थे — यानी प्रतिदिन औसत सिर्फ 67 विवाह पंजीकरण।

वर्तमान में, ठोस कानून, सरल प्रक्रिया और जागरूकता के चलते आम जनता विवाह पंजीकरण के प्रति अधिक सजग हो रही है। यूसीसी के लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की संख्या में इस उल्लेखनीय वृद्धि को समाज के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

राज्य सरकार ने भी विवाह पंजीकरण को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। अब यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण की समय सीमा छह माह से बढ़ाकर एक वर्ष कर दी गई है। इस संबंध में विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। इससे उन दंपतियों को राहत मिलेगी जो किसी कारणवश समय पर पंजीकरण नहीं कर सके थे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता के तहत होने वाले पंजीकरण की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। इससे कानून की व्यापकता और सार्थकता का प्रमाण मिलता है। यूसीसी के तहत हर विवाह पंजीकरण एक मजबूत, न्यायपूर्ण और पारदर्शी समाज की दिशा में ठोस कदम है। इससे विशेषकर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो रही है।

उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है, जहां समान नागरिक संहिता लागू कर समाज के हर वर्ग को एक समान कानून के दायरे में लाया गया है। विवाह पंजीकरण में आया यह उछाल इस ऐतिहासिक कानून की स्वीकार्यता और प्रभावशीलता को सिद्ध करता है।

शौर्य दिवस पर वीरों को सलाम, मुख्यमंत्री धामी ने की अनुग्रह राशि 30 लाख करने का ऐलान

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देहरादून। कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को राजधानी देहरादून के गांधी पार्क स्थित शहीद स्मारक में शौर्य दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भूतपूर्व सैनिकों, शहीदों के परिजनों और जनसाधारण के साथ मिलकर देश की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के 75 वीर सपूतों ने अग्रणी भूमिका निभाई और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उनका बलिदान हमेशा हमें प्रेरणा देता रहेगा। कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, सेना के अधिकारी, पूर्व सैनिक, उनके परिजन और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सैनिकों और शहीदों के परिवारों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि शहीद सैनिकों के परिजनों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹30 लाख किया गया है। परमवीर चक्र विजेताओं की अनुग्रह राशि ₹50 लाख से बढ़ाकर ₹1.5 करोड़ की गई है। उन्हें अब ₹3 लाख की वार्षिक अनुदान राशि भी दी जाएगी। चमोली में ईसीएचएस सेंटर और नैनीताल में सैनिक विश्राम गृह की स्थापना की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारे वीर जवानों ने अपने शौर्य, साहस और पराक्रम से देश का गौरव बढ़ाया है। उत्तराखंड न केवल देवभूमि है, बल्कि वीरभूमि भी है, जहां हर घर से कोई न कोई सैन्य सेवा से जुड़ा है। यह हमारी परंपरा है और हमारी सबसे बड़ी पूंजी भी।”

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान मेड इन इंडिया की शक्ति और भारतीय सेना के पराक्रम का प्रतीक है। केवल चार दिनों में पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर देना हमारी रक्षा ताकत का साक्ष्य है।

मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों के सम्मान और कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शौर्य दिवस के इस आयोजन ने जहां कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी, वहीं हमारे जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव भी जनमानस के बीच सशक्त रूप से व्यक्त किया।

प्रभारी सचिव और वरिष्ठ सहायक निलंबित, विजिलेंस की कार्रवाई से हड़कंप

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काशीपुर : काशीपुर मंडी समिति में फड़ लाइसेंस बनाने के एवज में एक लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पकड़े गए प्रभारी सचिव और वरिष्ठ सहायक को मंडी प्रबंध निदेशक ने निलंबित कर दिया है। विभागीय स्तर पर जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।

मंडी प्रबंध निदेशक हेमंत कुमार वर्मा ने शुक्रवार देर शाम दोनों कर्मचारियों के निलंबन की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि 15 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। पूरा मामला तब सामने आया जब सर्वरखेड़ा निवासी दो आढ़तियों ने हल्द्वानी विजिलेंस टीम को शिकायत दी कि काशीपुर मंडी में प्रभारी सचिव फड़ लाइसेंस जारी करने के नाम पर रिश्वत की मांग कर रहा है। शिकायत की जांच में आरोप सही पाए गए।

22 जुलाई को विजिलेंस की ट्रैप टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए प्रभारी सचिव को रंगेहाथ एक लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में वरिष्ठ सहायक की संलिप्तता भी सामने आई, जिसके बाद उसे भी हिरासत में ले लिया गया।

दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। विजिलेंस की इस कार्रवाई के बाद मंडी परिसर में हड़कंप मच गया और कर्मचारियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

धामी सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रदेशभर में विजिलेंस की कार्रवाई तेज हो गई है। हाल के महीनों में मंडी समितियों समेत अन्य विभागों में लिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ विजिलेंस ने कठोर कदम उठाए हैं। मंडी प्रबंध निदेशक हेमंत कुमार वर्मा ने बताया दोनों आरोपियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जिससे 15 दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

बारिश का कहर: यहां बादल फटा, केदारनाथ यात्रा रोकी गई, श्रीनगर में घरों में घुसा पानी

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उत्तराखंड : लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने पूरे प्रदेश में जनजीवन अस्तव्यस्त कर दिया है। रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि ब्लॉक स्थित रुमसी गांव में शुक्रवार मध्यरात्रि को बादल फटने की घटना सामने आई है, जिससे बिजयनगर सहित कई गांवों में घरों में पानी घुस गया और वाहनों को नुकसान पहुंचा है। हालाँकि अब तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन कृषि भूमि को भारी नुकसान हुआ है।

रुद्रप्रयाग: रुमसी गांव में कहर बनकर टूटा बादल

स्थानीय प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, देर रात अचानक हुई भारी बारिश के बाद रुमसी और आसपास के गांवों में तेज बहाव के साथ पानी घरों में घुस गया। खेतों में कीचड़ भर गया और कई वाहन बह गए। क्षेत्र के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। राहत और बचाव कार्य के लिए आपदा प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंची है।

केदारनाथ यात्रा रोकनी पड़ी

बारिश का प्रभाव चारधाम यात्रा पर भी पड़ा है। गौरीकुंड से आगे केदारनाथ मार्ग पर हो रही मूसलधार बारिश के कारण भूस्खलन और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रशासन ने एहतियातन यात्रा रोक दी है। श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर रोका गया है।

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यमुनोत्री मार्ग बंद, फूलचट्टी-जानकीचट्टी सड़क धंसी

यमुनोत्री धाम को जोड़ने वाली फूलचट्टी–जानकीचट्टी सड़क पर भारी बारिश के चलते भूस्खलन और धंसाव हुआ है। सड़क के दोनों ओर दर्जनों वाहन फंसे हुए हैं, जिनमें स्थानीय लोग और तीर्थयात्री शामिल हैं। जानकीचट्टी चौकी प्रभारी गंभीर सिंह तोमर ने बताया कि बस और बड़े वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। छोटे वाहनों के लिए भी मार्ग बेहद जोखिम भरा है।

श्रीनगर गढ़वाल: एनआईटी क्षेत्र में घुसा पानी

श्रीनगर गढ़वाल नगर निगम के वार्ड 29 भक्तियाना क्षेत्र, जो एनआईटी के समीप स्थित है, वहां शुक्रवार देर रात तेज बारिश के चलते दो घरों में पानी घुस गया। स्थानीय निवासी भास्कर रतूड़ी ने बताया कि शनिवार सुबह चार बजे जब उनकी पत्नी उठीं, तो पूरे कमरे में पानी भरा हुआ था। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग की नाली चोक होने से यह स्थिति बनी। नगर निगम को जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

मौसम विभाग का अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने देहरादून, चंपावत और नैनीताल जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। अन्य पर्वतीय जिलों में भी तेज दौर की बारिश की संभावना जताई गई है। भूस्खलन, सड़कों के अवरुद्ध होने और जलभराव की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन की अपील

प्रदेश सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से नदियों के किनारे ना जाने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। राहत व बचाव टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को नमन: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और रक्षा मंत्री ने दी श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली : आज 26 जुलाई को पूरा देश ‘कारगिल विजय दिवस’ मना रहा है। यह दिन भारतीय सेना के अदम्य साहस, वीरता और मातृभूमि के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान की गौरवगाथा का प्रतीक है। वर्ष 1999 में पाकिस्तान की नापाक हरकत का जवाब भारतीय सेना ने जिस दृढ़ संकल्प और पराक्रम से दिया, उसी की स्मृति में हर वर्ष यह दिवस मनाया जाता है। 84 दिनों तक चले इस संघर्ष में भारत ने विजय पताका फहराई और कई जांबाज वीरगति को प्राप्त हुए। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह समेत देश की शीर्ष हस्तियों ने वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को देश के लिए अमूल्य बताया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में कहा “कारगिल विजय दिवस हमारे जवानों की असाधारण वीरता, साहस एवं दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। देश के प्रति उनका समर्पण और सर्वोच्च बलिदान देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। मैं मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। पीएम मोदी ने देशवासियों को कारगिल विजय दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा,”यह दिन हमें मां भारती के उन वीर सपूतों के अप्रतिम साहस और शौर्य का स्मरण कराता है, जिन्होंने देश के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया।
उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरणा देता रहेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा कि कारगिल विजय दिवस पर मैं उन वीरों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं जिन्होंने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी देश के सम्मान की रक्षा की। उनका सर्वोच्च बलिदान हमारे सशस्त्र बलों की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भारत उनकी सेवा का सदैव ऋणी रहेगा।

गृह मंत्री अमित शाह ने ऑपरेशन विजय को वीरता की अमिट मिसाल बताते हुए लिखा, कि कारगिल विजय दिवस’ देश के वीर जवानों की गौरवगाथा का अविस्मरणीय दिन है। वर्ष 1999 में हमारे जवानों ने ऑपरेशन विजय के तहत दुश्मनों को घुटनों पर लाकर अदम्य साहस और पराक्रम की मिसाल पेश की। मैं सभी शूरवीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।” कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देशभर में श्रद्धांजलि सभाओं, परेडों और सम्मान समारोहों का आयोजन किया गया। स्कूलों, कॉलेजों और सैन्य संस्थानों में विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को वीर सपूतों की गाथा से परिचित कराया गया।

परमवीर चक्र विजेताओं की अनुग्रह राशि अब ₹1.5 करोड़

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  • कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर सीएम धामी का वीर सैनिकों को तोहफा।

देहरादून/खटीमा। उत्तराखंड सरकार ने एक बार फिर साबित किया है कि वह न केवल देवभूमि, बल्कि वीरभूमि के सम्मान की भी सच्ची हितैषी है। कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि अब परमवीर चक्र विजेताओं को मिलने वाली एकमुश्त अनुग्रह राशि ₹50 लाख से बढ़ाकर ₹1.5 करोड़ कर दी गई है। साथ ही उन्हें तीन लाख रुपये वार्षिक अनुदान भी मिलता रहेगा।

मुख्यमंत्री धामी ने यह घोषणा खटीमा में आयोजित सैनिक सम्मान समारोह में की, जो उनके पिता स्वर्गीय सूबेदार शेर सिंह धामी की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित किया गया था। समारोह में मुख्यमंत्री ने सैनिक कल्याण विभाग के इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की।

इससे पहले जून 2022 तक परमवीर चक्र विजेताओं को मात्र ₹30 लाख की अनुग्रह राशि मिलती थी। 10 जून 2022 को इस राशि को बढ़ाकर ₹50 लाख किया गया था, जिसका शासनादेश 14 जुलाई 2022 को जारी हुआ। अब मुख्यमंत्री धामी ने इस सम्मानजनक राशि को सीधे ₹1 करोड़ की वृद्धि के साथ नई ऊंचाई दी है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा :

“हमारे देश की सीमाएं हमारे वीर सैनिकों के शौर्य, साहस और बलिदान के कारण सुरक्षित हैं। प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह उनके बलिदान का सम्मान करे। उत्तराखंड ने देश को अनगिनत वीर योद्धा दिए हैं। सैनिक और उनके परिवार त्याग, अनुशासन और सेवा की मिसाल होते हैं। राज्य सरकार उनके कल्याण और सम्मान के लिए हरसंभव कदम उठा रही है।”

यह फैसला सिर्फ एक घोषणा नहीं, बल्कि देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों के प्रति एक सच्ची कृतज्ञता है। ऐसे निर्णय देशवासियों को यह याद दिलाते हैं कि उनका बलिदान कभी भुलाया नहीं जाता।

कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य कांग्रेस ने किया शहीदों के परिजनों का सम्मान

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  • देश के 527 और उत्तराखंड के 75 शहीदों की वीरता को किया नमन।

देहरादून। कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक गरिमामय समारोह में कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर सपूतों के परिजनों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग ने किया, जिसमें बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना मौजूद रहे।

धस्माना ने देश के 527 और उत्तराखंड के 75 वीर जवानों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि इनकी शहादत को भुलाया नहीं जा सकता। इनकी स्मृतियां हमें हर पल देश सेवा के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

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उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध को याद करते हुए बताया कि कैसे 5 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ कर कारगिल की ऊंचाइयों पर कब्जा जमाने की कोशिश की थी। लेकिन भारतीय सैन्य बलों ने ऑपरेशन विजय के जरिए दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया। इस युद्ध में जहां भारत ने 527 सैनिकों को खोया, वहीं पाकिस्तान के 3000 से अधिक सैनिक मारे गए।

धस्माना ने कैप्टन सौरभ कालिया, कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज पांडे, मेजर राजेश अधिकारी और ग्रेनेडियर योगेन्द्र यादव जैसे जांबाजों का विशेष रूप से उल्लेख किया और कहा कि ये वीर पूरे राष्ट्र के गौरव हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस युद्ध में बोफोर्स तोपों की निर्णायक भूमिका रही। इन्हीं तोपों को लेकर स्वर्गीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उनके परिवार को झूठे आरोपों के जरिए बदनाम किया गया, जबकि इन्हीं तोपों ने कारगिल में विजय सुनिश्चित की।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश कांग्रेस पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी ने कहा कि शहीदों का सम्मान करना उनका सौभाग्य है। खुद सैनिक होने के नाते वह इस सम्मान का महत्व भलीभांति समझते हैं। उन्होंने तोलोलिंग और टाइगर हिल की लड़ाइयों को याद करते हुए कहा कि इनमें भारतीय सैनिकों की अद्भुत वीरता और बलिदान की कहानियां छिपी हैं।

महानगर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने शहीद परिवारों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उनके आशीर्वाद से ही कांग्रेस इस तरह के कार्यक्रमों के आयोजन में आगे बढ़ती है। कार्यक्रम की शुरुआत गीतकार विकास भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत “दिल दिया है जां भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए” से हुई, जिसने माहौल को देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया।

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इस अवसर पर एक दर्जन से अधिक शहीद परिवारों को अंग वस्त्र, माला, उपहार और सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मानित परिजनों में प्रमुख रूप से शहीद नायक शिव चरण की धर्मपत्नी श्रीमती मंजू देवी, शहीद ताजिंग की सुपुत्री तेनजिंग डोल्मा, शहीद हवलदार जगत सिंह की धर्मपत्नी  बुंद्रा देवी, शहीद विजय सिंह भंडारी की माता श्रीमती रामचंद्री देवी और अन्य कई शहीदों के परिजन, जिनकी उपस्थिति ने समारोह को भावुक बना दिया।

कार्यक्रम का संचालन प्रदेश कांग्रेस महामंत्री जगदीश धीमान ने किया। इस मौके पर प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला, श्रम प्रकोष्ठ अध्यक्ष दिनेश कौशल, बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ अध्यक्ष डॉ. प्रदीप जोशी, राजीव गांधी मीडिया सलाहकार अमरजीत सिंह, पार्षद अर्जुन सोनकर, पूर्व पार्षद राजेश पुंडीर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।