मुंबई: विवादास्पद इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के अब दो-तीन हफ्ते तक देश में लौटकर आने के आसार नहीं है जिसके सउदी अरब से आज यहां लौटकर आने की उम्मीद थी। उसने कहा कि वह उसके खिलाफ आरोपों की जांच करने वाली किसी भी भारतीय एजेंसी को सहयोग देने को तैयार है। इस बीच सरकार ने आज कहा कि नाइक के भाषणों का प्रसारण करने वाले पीस टीवी को सुरक्षा कारणों से भारत में प्रसारण करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया गया था।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने दिल्ली में संवादाताओं से कहा, ‘हमने हाल के दिनों में देखा कि तथाकथित पीस टीवी शांति को प्रभावित कर रहा है तथा बाद में कई देशों ने उस चैनल पर प्रतिबंध लगा दिया। किन्तु यहां प्रतिबंध का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि उसे अनुमति ही नहीं दी गयी थी।’ अपने भड़काउ भाषणों के जरिये आतंकवाद को प्रेरित करने का आरोप झेल रहे नाइक ने कल स्काइप के जरिये होने वाले अपने संवाददाता सम्मेलन को भी रद्द कर दिया है तथा सुझाव दिया है कि वह मीडिया मुकदमे का शिकार बन गया है।
आज शाम विदेश से जारी एक बयान में नाइक ने कहा कि किसी भी सरकारी एजेंसी ने उसके खिलाफ आरोपों के सन्दर्भ में उससे अभी तक सम्पर्क नहीं किया है। उसने कहा, ‘अभी तक एक भी भारत सरकार की एजेंसी ने इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण के लिए मुझसे सम्पर्क नहीं किया है। किसी भी आधिकारिक भारतीय सरकारी जांच एजेंसी के साथ वह मुझसे जो भी सूचना चाहेंगे उसके बारे में सहयोग करना मेरे लिए खुशी की बात होगी।’
बहरहाल, नाइक ने मीडिया पर बयानों को तोडने मरोड़ने तथा मूल बयान नहीं देने का आरोप लगाया ताकि ‘‘निहित स्वाथरें की पूर्ति की जा सके।’’ उसने कहा, ‘यदि समय मिला तो मैं वीडियो पर कुछ प्रमुख आरोपों का जवाब दूंगा और उन्हें मीडिया को दूंगा एवं उन्हें सोशल मीडिया एवं अन्य सार्वजनिक मंचों पर डालूंगा जिससे यदि मीडिया उनका दुरूपयोग करती है तो मूल उत्तर उपलब्ध हो सके।’ नाइक ने दोहराया कि वह आतंकवाद या हिंसा का समर्थन नहीं करता और न ही वह किसी आतंकवादी संगठन का समर्थन करता है।
नाइक के एक सहायक ने कहा, ‘उनका (नाइक का) यात्रा कार्यक्रम काफी पहले बन चुका था। उमराह में व्याख्यान देने के बाद उनका जेद्दाह जाने का कार्यक्रम है जहां से वह सार्वजनिक व्याख्यान देने के लिए अफ्रीका जाएंगे। उनके कम से कम अगले दो-तीन हफ्ते तक देश में आने की संभावना नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘डा. जाकिर नाइक को मंगलवार को होने वाली मीडिया ब्रीफिंग में स्वयं उपस्थित नहीं होना था। उन्होंने निर्णय किया था कि वह स्काइप के जरिये मीडिया को संबोधित करेंगे और मीडिया कर्मियों के जो भी सवाल होंगे, सभी का जवाब देंगे।’ भारत में निगरानी में आने के अलावा नाइक के पीस टीवी पर बांग्लादेश ने प्रतिबंध लगा दिया है।
दो-तीन हफ्ते तक भारत नहीं लौटेगा जाकिर, जांच एजेंसियों को सहयोग देने को तैयार
कश्मीर के हालात पर PM मोदी की हाई लेवल मीटिंग जारी, राजनाथ ने रद्द किया अमेरिका दौरा
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार अफ्रीकी देशों की यात्रा पूरी कर आज सुबह स्वदेश लौट आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू कश्मीर की स्थिति की समीक्षा करने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं । पीएम ने कश्मीर के हालात पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के अलावा अन्य वरिष्ठ अफसरों की बैठक बुलाई है।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, वित्त मंत्री अरुण जेटली और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी भी मौजूद है। कश्मीर के बिगड़ते हालात की वजह से गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपना अमेरिकी दौरा रद्द कर दिया है। राजनाथ 17 जुलाई को अमेरिका में सुरक्षा को लेकर होने वाली बैठक में शामिल होने वाले थे।
इससे पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को पर्रिकर, जेटली, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक कर कश्मीर की स्थिति का जायजा लिया। और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित विपक्ष के कई नेताओं के साथ फोन पर बात की और कश्मीर में पूर्व स्थिति बहाल करने पर चर्चा की। हांलाकि उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि कश्मीर घाटी में जल्द ही शांति बहाल कर ली जाएगी।
हिज्बुल मुजाहिदीन के शीर्ष आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं । बैठक से पहले कल केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अन्य केंद्रीय मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता की जिसमें सुरक्षाबलों को सलाह दी गई कि वे बल का ‘विवेकपूर्ण’ इस्तेमाल करें और अमरनाथ तीर्थयात्रियों के लिए सुगम आवागमन सुनिश्चित करें । आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री को कश्मीर की मौजूदा स्थिति के बारे में विस्तृत ब्योरा दिया जाएगा । आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद हुई झड़पों में अब तक 23 लोग मारे जा चुके हैं । अपुष्ट खबरों में 31 लोगों के मारे जाने की बात कही गई है ।
पेशावर स्कूल के नरसंहार का मास्टरमाइंड अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया
इस्लामाबाद: दिसंबर, 2014 में पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल में हुए नरसंहार के मास्टरमाइंड के मारे जाने की खबर है। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी ने दावा किया है कि इस हमले का मास्टरमाइंड अफगानिस्तान में हुए अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया है।
अधिकारियों ने सोमवार को पाकिस्तानी अखबार डॉन को बताया कि पेशावर हमले का मास्टरमाइंड उमर मंसूर और एक अन्य आतंकी लीडर सैफुल्लाह को शनिवार को अफगानिस्तान में नांगराहर प्रांत के बंडार इलाके में अमेरिकी ड्रोन हमले में मार गिराया गया है। एक और अधिकारी ने बताया कि उसके पास मंसूर और सैफुल्ला के मारे जाने की विश्वसनीय रिपोर्ट है, जो सुसाइड हमलावरों का इंचार्ज रहा है।
अमेरिका ने 25 मई को उमर मंसूर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया था। इससे वह आंतकियों की हिटलिस्ट में शामिल हो गया था। अमेरिका ने यह घोषणा अफगान तालिबान लीडर अख्तर मंसूर के बलूचिस्तान में हुए ड्रोन हमले में मारे जाने के चार दिन बाद 21 मई को की थी।
मंसूर ने 16 दिसंबर 2014 को पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल में हुए हमले की पूरी योजना बनाई थी, जिसमें 122 स्टूडेंट्स और 22 शिक्षकों की मौत हो गई थी। यह पाकिस्तान में हुए सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक था। इसके बाद पाकिस्तान की सरकार ने आतंकवादियों के खिलाफ देश में अभियान छेड़ दिया था।
मंसूर और सैफुल्ला का संबंध तारीख-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के तारीक गीदार संगठन से था। खैबर जनजातीय क्षेत्र में सैन्य अभियान के बाद मंसूर अफगानिस्तान भाग गया और वह वहीं से सभी गतिविधियों का निरीक्षण करता था। वह पाकिस्तान वायुसेना के सैन्यअड्डे पर सितंबर 2015 में हुए हमले के लिए भी जिम्मेदार है। इस हमले में 29 लोगों की मौत हो गई थी।
बाचा खान यूनिवर्सिटी में जनवरी 2016 में हुए हमले के पीछे भी मंसूर का हाथ था। इस हमले में 18 छात्रों और फैकल्टी सदस्यों की मौत हुई थी।
टेरीज़ा मे ब्रिटेन की नई प्रधानमंत्री होंगी: कैमरन
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है वो बुधवार को पद से इस्तीफ़ा देंगे और उसी दिन टेरीज़ा मे देश की नई प्रधानमंत्री बनेंगी. 59 वर्षीय टेरीज़ा मे ब्रिटेन की दूसरी महिला प्रधानमंत्री होंगी. वो 2010 से देश की गृह मंत्री हैं. टेरीज़ा मे ने कहा है कि वो यूरोपीय संघ से ब्रिटेन की विदाई सफलतापूर्वक करवाएंगी.
एक बयान में टेरीज़ा मे ने कहा कि वो कंज़रवेटिव पार्टी की नेता चुने जाने पर सम्मानित महसूस कर रही हैं. डेविड कैमरन ने कहा कि इस्तीफ़ा सौंपने से पहले एक और कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे.जनमत संग्रह के ज़रिए ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर आने के फ़ैसले के बाद, कैमरन ने कहा था कि वो प्रधानंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे देंगे. इसके बाद कंज़रवेटिव पार्टी में नए नेता के चुनाव की दौड़ शुरू हो गई थी. सोमवार को ही आंद्रेया लेडसम इस दौड़ से हट गई थीं. अपनी प्रतिद्वंद्वी को लेकर उनके बयान की काफ़ी तीखी आलोचना हुई थी.उन्होंने कहा था कि वो अपने प्रतिद्वंद्वी से कहीं ज़्यादा सक्षम हैं क्योंकि उनके संतान हैं. टेरीज़ा मे निःसंतान हैं. नाम वापसी की घोषणा के समय आंद्रेया लेडसम ने कहा था कि ये राष्ट्रहित में होगा कि नए नेता की जल्द से जल्द नियुक्ति हो ताकि ब्रिटेन यूरोप से बाहर आने की प्रक्रिया शुरू करे. इस तरह से केवल गृह मंत्री टेरीज़ा मे ही कंज़रवेटिव पार्टी के नेतृत्व की रेस में रह गई थीं.
जजों की नियुक्ति पर जारी यह गतिरोध दूर हो
भारत के 24 उच्च न्यायालयों में 1091 जज होने चाहिए. लेकिन 470 पद खाली पड़े हैं. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की समिति और सरकार के बीच इसे लेकर खींचतान जारी है कि जजों की नियुक्ति पर आखिरी फैसला किसका हो. इसका नुकसान न्यायिक व्यवस्था को हो रहा है. दो दशक पुरानी कॉलेजियम व्यवस्था, जिसमें कुछ जज एक बंद कमरे में बैठकर जजों की नियुक्ति का फैसला करते हैं, भारत में ही हुई एक खोज है जिसे न्यायिक स्वतंत्रता के नाम पर अंजाम दिया गया. हकीकत में देखें तो इसने एक अपारदर्शी न्यायिक व्यवस्था को जन्म दिया है. समय आ गया है कि इसे बदला जाए.
जजों की नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए. सबसे जूनियर जजों का चुनाव राष्ट्रीय न्यायिक सेवा के जरिये किया जा सकता है. चाहे वह जिला स्तर पर हो, उच्च न्यायालय या फिर सर्वोच्च न्यायालय के स्तर पर पर, सभी खाली पदों की सूचना सार्वजनिक होनी चाहिए और उनके लिए पात्रता की शर्तें भी ताकि न्यायिक सेवाओं और बार के सदस्य उनके लिए आवेदन कर सकें. सभी आवेदनों की समीक्षा एक समिति करे. इस समिति में उच्च न्यायालयों या सर्वोच्च न्यायालय के जजों के साथ सर्वोच्च विधि अधिकारी भी शामिल हो. जिला, सत्र या उच्च न्यायालय के मामले में वह राज्य का एडवोकेट जनरल हो सकता है और सर्वोच्च न्यायालय के मामले में अटॉर्नी जनरल. समिति द्वारा की जाने वाली सभी चर्चाएं और सिफारिशें रिकॉर्ड की जानी चाहिए. समिति जो सूची बनाए सरकार उसमें से ही उम्मीदवार नामांकित करे. इसके बाद अलग-अलग पार्टियों के विधायकों या सांसदों से बनी विधायी समिति को उम्मीदवारों के बारे में उपलब्ध जानकारियों का संज्ञान लेते हुए उन्हें मंजूरी देनी चाहिए. नियुक्तियों पर आखिरी फैसला उचित विधानमंडल का ही होना चाहिए. अगर समिति किसी उम्मीदवार को खारिज कर देती है तो सूची में शामिल अगले उम्मीदवार पर विचार किया जा सकता है. यह व्यवस्था न्यायिक स्वतंत्रता का क्षरण करने के बजाय उसे मजबूत बनाएगी.
जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में छायी अपारदर्शिता अप्रत्यक्ष रूप से हेर-फेर का कारण बनी है. इसके चलते यह भी हुआ कि अक्सर सबसे अच्छे कानूनविद न्यायिक व्यवस्था से बाहर रह गए. नियुक्तियों की पारदर्शी, निष्पक्ष और खुली व्यवस्था ही यह सुनिश्चित करने का सबसे अहम उपाय है कि लोगों का कानून व्यवस्था में विश्वास बना रहे. यह कारोबार चलाने, विकास सुनिश्चित करने और लोकतंत्र को सुचारू रूप से चलाए रखने के लिए भी जरूरी है.
फ्रांस को हरा पुर्तगाल बना यूरो कप चैंपियन
स्टार खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो के चोटिल होकर पहले ही हाफ में बाहर होने के बाद उम्मीदें खो चुकी पुर्तगाल की टीम ने अतिरिक्त समय में स्थानापन्न खिलाड़ी एडर के शानदार गोल की बदौलत उतार चढ़ाव भरे बेहद ही रोमांचक फाइनल मुकाबले में मेजबान फ्रांस को 1-0 से हराते हुए यूरो कप खिताब अपने नाम कर इतिहास रच दिया।
मैच के निर्धारित 90 मिनटों में कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी और मुकाबला गोल रहित रहा। इसके बाद मुकाबला अतिरिक्त समय में चला गया। 15 मिनट के पहले अतिरिक्त समय में भी कोई टीम गोल नहीं कर सकी लेकिन 15 मिनट के दूसरे अतिरिक्त समय में पुर्तगाल ने गोल स्कोर कर मैच को रोमांचक मोड़ पर ला दिया।
पुर्तगाल के स्थानापन्न खिलाड़ी एडर ने 109वें मिनट में 25 मीटर की दूरी से लाजवाब गोल दाग कर टीम को बढ़त दिला दी। खेल की समाप्ति तक फ्रांस की टीम इस गोल की बराबरी नहीं कर सकी और पुर्तगाल ने मुकाबला 1-0 से जीत लिया।
यह पुर्तगाल के फुटबॉल इतिहास का पहला अंतर्राष्ट्रीय खिताब है। इससे पहले टीम को साल 2004 के यूरो कप के फाइनल में यूनान के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
मैच की शुरुआत में ही पुर्तगाल को झटका लग गया जब स्टार स्ट्राइकर रोनाल्डो आठवें मिनट में ही फ्रांस के मिडफील्डर दिमित्री पाएट से टकराकर चोटिल हो गए। देश को पहली बार चैंपियन बनाने का सपना लिए रोनाल्डो चोट के बावजूद डटे रहे लेकिन 24वें मिनट में उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा। इसके बाद रोनाल्डो की आंखों से आंसू निकल पड़े और स्टेडियम में मौजूद पुर्तगाली समर्थकों के चेहरे पर निराशा फैल गई। रोनाल्डो पूरे मैच में बाहर ही रहे।
इसके बाद नानी ने पुर्तगाल की कमान संभाल ली। फ्रांस ने निर्धारित समय में पुर्तगाल के गोल पर कई आक्रमण किए लेकिन पुर्तगाल के गोलकीपर लुइस पेट्रीश्यो ने शानदार कीपिंग के जरिए फ्रांस के हर मौके को बेकार कर दिया। मैच के दौरान एंटोएन ग्रिजमेन के एक शानदार हेडर पर पेट्रिश्यो ने बेहतरीन बचाव किया। निर्धारित समय के अंतिम क्षणों में भी फ्रांस के जीनिएक ने एक शॉट लिया जो पोस्ट से टकराकर बाहर आ गया। 90 मिनट की समाप्ति तक मुकाबला गोलरहित रहा।
इसके बाद अतिरिक्त समय का पहला हाफ शुरू हुआ जहां दोनों टीमों ने अपना दबदबा बनाने का प्रयास जारी रखा लेकिन किसी को सफलता हाथ नहीं लगी। दोनों टीमों ने विपक्षी पोस्ट पर आक्रमण जारी रखा। कप्तान रोनाल्डो के बिना खेल रही पुर्तगाल की टीम को पेनल्टी शूटआउट तक मैच ले जाने के लिए बस 15 मिनट और निकालने थे लेकिन इसके बाद अचानक स्थानापन्न खिलाड़ी एडर ने सबको हैरान करते हुए गोल कर दिया। एडर ने बॉक्स के बाहर तकरीबन 25 मीटर दूरी से शानदार ग्राउंड किक जड़ी और मेजबान गोलकीपर व कप्तान ह्यूगो लॉरिस को छकाते हुए गोल कर दिया।
अंतिम सीटी बजने तक यह बढ़त कायम रही और इसके साथ ही 95 वर्षों से फुटबॉल खेल रही पुर्तगाल की टीम ने इतिहास रच दिया। पुर्तगाल के खिलाड़ी अपनी भवनाओं पर काबू नहीं कर सके और मैदान पर जश्न में सराबोर हो गए। वहीं दूसरी तरफ तीसरी बार यूरो कप जीतने का सपना चकनाचूर होने से फ्रांस के खिलाड़ी और प्रशंसक निराशा में डूब गए।
रितिक ने बताया ये है 'मोहनजोदड़ो' में उनका पसंदीदा सीन
बॉलीवुड अभिनेता रितिक रोशन आगामी फिल्म ‘मोहनजोदड़ो’ को लेकर खासा उत्साहित हैं. आशुतोषा गोवारिकर की इस फिल्म में रितिक रोशन और पूजा हेगड़े ने मुख्य भूमिका निभाई है. हाल ही में रितिक ने इस बात का खुलासा किया है कि फिल्म में उन्हें सबसे पसंदीदा सीन कौन सा लगा ?
फिल्म में मारधाड़ वाले सीन्स को लेकर निर्देशकों ने बेहतरीन काम किया है. वहीं रितिक का कहना है कि फिल्म में क्लाईमैक्स वाला सीन उनका फेवरेट है.
उन्होंने कहा,’ हम इस पर (मारधाड़ वाले सीन) पर काफी मेहनत करते हैं. इसमें खतरा है और चोटें भी इसका हिस्सा है. लेकिन जब यह सामने आया तो अच्छा लगा. मेरा सबसे पसंदीदा सीन फिल्म का क्लाईमैक्स सीन है.’
रितिक फिल्म में खतरनाक एक्शन करते दिखाई देंगे. फिल्म का ट्रेलर शानदार है और रिलीज होते ही यह हिट हो गया. ट्रेलर में रितिक मगरमच्छ दो-दो हाथ करते नजर आये थे. फिल्म में वे पहली बार पूजा हेगड़े संग रोमांस करते नजर आयेंगे. फिल्म सिंधु घाटी सभ्यता की पृष्ठभूमि पर आधारित है. फिल्म 12 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है.
बुरहान वानी में ऐसा क्या था कि उसकी मौत ने सरकार की चिंता खत्म करने के बजाय बढ़ा दी है
मुजफ्फर अहमद वानी की खुशी उस दिन आसमान पर थी. आठवीं के इम्तिहान में उनके बेटे बुरहान वानी के 90 फीसदी से भी ज्यादा नंबर आए थे. दक्षिण कश्मीर में त्राल के एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल मुजफ्फर वानी को यकीन था कि उनका बेटा आगे खूब नाम कमाएगा.
वही हुआ है. लेकिन उस तरह से नहीं जैसे उन्होंने सोचा होगा. अनंतनाग जिले में सुरक्षाबलों के साथ चली एक लंबी मुठभेड़ में मारे गए बुरहानी वानी का नाम कश्मीर में आज सबकी जुबान पर है. हिजबुल मुजाहिदीन के इस स्थानीय कमांडर पर 10 लाख रु का ईनाम था. 22 साल का बुरहान कश्मीरी आतंकवाद का नया चेहरा बन गया था इसलिए उसकी मौत को सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.
लेकिन यह कामयाबी अपने साथ चिंताएं लेकर भी आई है. कश्मीर घाटी में हालात पहले से ही बिगड़े हुए हैं और सुरक्षा एजेंसियों को अब फिक्र सता रही है कि कहीं बुरहान की मौत इन्हें काबू से बाहर न कर दे. इस मौत पर विरोध प्रदर्शन शुरू भी हो चुके हैं. श्रीनगर सहित घाटी के कई हिस्सों में कर्फ्यू लागू हो चुका है और एहतियात के तौर पर अमरनाथ यात्रा भी रोक दी गई है. कई जगहों पर मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद किए जाने की भी खबर है.
बीते कुछ समय के दौरान बुरहान वानी का नाम पूरे कश्मीर में मशहूर हो गया था. बताया जाता है कि कश्मीर के अलग-अलग इलाकों से उसने दर्जनों नौजवानों को हिजबुल में भर्ती करवाया. इनमें से कुछ मारे गए हैं लेकिन, कई अब भी सक्रिय हैं. सुरक्षा एजेंसियों के लिए बुरहान वानी बड़ा सिरदर्द बन गया था. इस्लामिक स्टेट की तर्ज पर वह नए रंगरूटों की भर्ती के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता था. इंटरनेट पर अपलोड किए गए उसके जेहादी वीडियो से प्रभावित होकर कई कश्मीरी युवा हिंसा के रास्ते पर चल पड़े थे.
बुरहान वानी के बारे में कहा जाता था कि उसके शब्द जादू सा असर रखते हैं. जींस-टीशर्ट पहने और धाराप्रवाह कश्मीरी में नौजवानों से आतंक के रास्ते पर चलने की अपील करते बुरहान ने पुलिस की नींद उड़ा रखी थी. बताया जाता है कि 16 साल की उम्र से ही उसने इस काम के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल शुरू कर दिया था. लड़ाकू वेशभूषा में राइफलों के साथ उसकी तस्वीरें खूब वायरल हुईं. फेसबुक और वाट्सएप की आज व्यापक पहुंच है और एक स्मार्ट लड़का आपको जिहाद के लिए न्योता दे रहा हो तो जानकारों के मुताबिक कश्मीर जैसे इलाके में इसका काफी असर पड़ता है. आलम यह है कि आतंक का महिमामंडन करते उसके फेसबुक पेजों को ब्लॉक करवाने के लिए पुलिस को अदालत की शरण लेनी पड़ी.
एक तरह से देखा जाए तो बुरहान उस पढ़ी-लिखी नई पीढ़ी का हिस्सा था जो कश्मीर में 2010 के आंदोलन के बाद आतंकवाद की तरफ मुड़ी है. उसके परिवार को जानने वाले लोग बताते हैं कि पढ़ाई और क्रिकेट में होशियार बुरहान तब आतंकवाद की तरफ मुड़ गया जब 2010 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों ने उसके बड़े भाई खालिद को बुरी तरह पीटा. बताते हैं कि 10 वीं के बोर्ड एक्जाम से दस दिन पहले ही बुरहान ने पढ़ाई छोड़ दी थी. एक अखबार से बात करते हुए मुजफ्फर अहमद वानी कहते हैं, ‘उसने किसी से कुछ नहीं कहा. वह रोज की तरह बाहर गया और फिर लौटकर नहीं आया.’
बुरहान के भाई खालिद की भी बीते साल मौत हो चुकी है. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि खालिद मुठभेड़ में मारा गया. परिवार का आरोप है कि उसे सिर्फ इसलिए यातनाएं देकर मारा गया कि वह बुरहान का भाई था.
बुरहान वानी आतंकी हमलों में कभी कभार ही हिस्सा लेता था लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक कई हमले उसी के दिमाग की उपज थे. कुछ समय पहले सुरक्षा बलों पर किए गए एक हमले से पहले उसने आसपास के इलाके में घूम-घूमकर स्थानीय लोगों से कहा था कि वे किसी भी वर्दीवाले से ज्यादा से ज्यादा दूरी पर रहें. एजेंसियों को सबसे ज्यादा चिंता इस बात से थी कि बुरहान जिन्हें बरगला रहा था वे पढ़े-लिखे युवा हैं. माना जा रहा था कि बुरहान वानी और उसके असर की कोई काट नहीं ढूंढी गई तो कश्मीर 90 के दशक वाले आतंक के दौर में लौट सकता है.
हालांकि वह चिंता अब भी खत्म नहीं हुई है. 90 के दशक में कश्मीर घाटी में जब अलगाववाद भड़का तो शुरुआती दौर के बाद इसकी कमान बाहर या दूसरे शब्दों में कहें तो पाकिस्तान से आए लड़ाकों के हाथ में आ गई थी. हिजबुल जैसे संगठनों के ये लोग घाटी में अक्सर दूसरे नामों के साथ सक्रिय रहते थे और स्थानीय जनता इनसे कोई खास जुड़ाव महसूस नहीं करती थी. इसलिए इनके सुरक्षा बलों के हाथों मारे जाने पर भी कोई हलचल नहीं होती थी.
लेकिन बुरहान वानी ने यह समीकरण बदल दिया. उसके उभार के बाद जो कश्मीरी नौजवान पहले आतंकियों के खबरी या कूरियर का काम करने तक सीमित थे वे सीधे हथियार उठाने लगे. जानकारों के मुताबिक पहले ऐसे युवा ट्रेनिंग के लिए सीमा पार जाते थे लेकिन, बुरहान के आने के बाद यह स्थिति बदल गई. बताया जाता है कि इस समय घाटी में 60 से भी ज्यादा ऐसे युवा हैं जिनकी ट्रेनिंग यहीं हुई है.
स्थानीय समाज भी इन नौजवानों से सहानुभूति रखता है. यह भी एक वजह है कि कश्मीर घाटी में इन दिनों जहां भी कोई मुठभेड़ होती है वहां भारी संख्या में लोग पहुंच जाते हैं और सुरक्षा बलों पर पथराव करने लगते हैं ताकि अलगाववादियों को बचकर भागने का मौका मिल जाए. कुछ समय से मुठभेड़ में मारे गए अलगाववादियों के जनाजे में भारी भी भीड़ उमड़ने लगी है. ऐसा कश्मीर में 90 के दशक में ही दिखता था. उस दौरान महिलाएं अलगाववादियों की तारीफ में पारंपरिक गीत गाती थीं, मस्जिदों के लाउडस्पीकरों से आजादी और पाकिस्तान समर्थक संदेश गूंजते थे. बुरहान वानी की मौत के बाद भी कई मस्जिदों की लाउडस्पीकरों पर उसके ऑडियो संदेश बजाए गए.
यही वजह है कि बुरहान वानी की मौत के बाद भी सुरक्षा एजेंसियां चिंतित हैं. एक अखबार से बातचीत में कश्मीर में तैनात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताते हैं कि बुरहान वानी ने जो प्रक्रिया शुरू की वह उसकी मौत के बाद और तेज हो सकती है. वे कहते हैं, ‘मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि उसकी मौत से युवाओं में बहुत गुस्सा पैदा होगा और आतंकी संगठनों को मिलने वाले स्थानीय रंगरूट बढ़ेंगे.’ उनके मुताबिक बुरहान एक प्रतीक के रूप में कश्मीरी युवाओं की नई पीढ़ी के लिए कुछ वैसा ही काम कर सकता है जैसा 1990 में मारे गए जेकेएलएफ के कमांडर इशफाक मजीद ने किया था. मजीद के इर्द-गिर्द बुनी गई बहादुरी की कहानियों ने बड़ी संख्या में कश्मीरी युवाओं को हथियार उठाने के लिए प्रेरित किया था.
मुंबई लोकल में स्टंटबाजों को समझाने के लिए पुलिसवालों की अनोखी पहल
मुंबई: मुंबई की लाइफलाइन लोकल ट्रेन में स्टंटबाजों को रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल अब आरोपियों के हाथों में हथकड़ी पहनाने के बजाय उन्हें फूल दे रहे हैं। कोशिश है ट्रेन की छत पर सफर करने वाले, स्टंट दिखाने वालों को मार नहीं बल्कि प्यार से समझाया जाए।
मुंबई में सेंट्रल रेलवे के हाबर्र और मध्य रेल लाइन के स्टेशनों पर ये मुहिम शुरू की गई है। जहां पुलिस के जवान बन्दूक या राइफल लेकर स्टंट बाजों को डराने के बजाय हार पहना कर हाथ जोड़ कर स्वागत कर रहे हैं। ये पहल इसलिए ताकि नौजवान अपनी जान जोखिम में डाल कर ट्रेन के छत पर चढ़कर यात्रा ना करें।
शुक्रवार को ईद के मौके पर मुम्बई लोकल ट्रेन एक्सीडेंट में मरने और घायलों का आंकड़ा पूरे साल में सबसे अधिक रहा। उस दिन 15 लोगों की जान गयी और 12 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे जिनमें से ज्यादातर मरनेवालों में नौजवान थे और स्टंट करते हुए गिरे। मुंबई की लोकल ट्रेनों में रोज़ाना 75 लाख मुसाफिर सफर करते हैं, औसतन हर दिन 10 मुसाफिर शहर की लाइफ लाइन में सफर के दौरान हादसों का शिकार होते हैं।
पीएम से मिलेंगे सीएम तो बजट की भी होगी बात
राष्ट्रपति भवन में 16 जुलाई को होने वाली चीफ मिनिस्टर काउंसिल की बैठक में मुख्यमंत्री हरीश रावत की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होगी। इस मौके पर प्रदेश को बजट देने की बात भी मुख्यमंत्री रावत प्रधानमंत्री से कर सकते हैं। काउंसिल की बैठक में विभिन्न प्रदेशों को संसाधन के बंटवारे के संबंध में निर्णय लिए जाते हैं।
मुख्यमंत्री हरीश रावत चीफ मिनिस्टर काउंसिल की बैठक में शिरकत करेंगे। इस मौके पर केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान सरीखे दूसरी राष्ट्र स्तर पर चल रही मुहिम के संबंध में राज्यों की स्थिति के बारे में चर्चा की जाएगी। उत्तराखंड का बजट वैसे तो बैठक के एजेंडा का हिस्सा नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि जब मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री से मिलेंगे तो वर्तमान में प्रदेश के बजट के सबसे अहम मुद्दे पर चर्चा जरूर करेंगे।
आपदा प्रभावित प्रदेश होने के कारण उत्तराखंड में चल रहीं विभिन्न परियोजनाओं का मसला भी उठाया जा सकता है। नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा स्वच्छता अभियान में प्रदेश की कई परियोजनाओं का फंड केंद्र में अटका हुआ है।
इससे काम शुरू नहीं हो पा रहा है और एनजीटी प्रदेश शासन पर लगातार दबाव बनाए हुए है। इस संबंध में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था। माना जा रहा है कि जब आमने-सामने मुलाकात होगी तो मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री से बात कर सकते हैं।







