बढ़ती आबादी से उपजने वाली चिंताओं पर दुनिया को जागरूक करने के उद्देश्य के साथ आज विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जा रहा है. जनसंख्या वृद्धि एक मुख्य समस्या के तौर पर विमर्श और नीतियों का आधार बनी हुई है. लेकिन, इसके बरक्स आदिवासियों की घट रही जनसंख्या पर न के बराबर बात हो रही है.
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े बताते हैं कि आज दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में 37 करोड़ आदिवासी रह रहे हैं. भारत में भी लगभग 705 जनजातीय समूह हैं जिनकी कुल संख्या 2011 में 10 करोड़ से थोड़ा ज्यादा दर्ज की गई थी. चिंता की बात यह है कि इनमें कई ऐसे जनजातीय समूह हैं जो अब विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गए हैं. अंडमान में जारवा जनजाति की जनसंख्या तो लगभग 400 के आंकड़े तक सिमट गई है.
भारत के जिन राज्यों में एक बड़ी संख्या में आदिवासी आबादी रहती है उनमें छत्तीसगढ़ प्रमुख है. 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि राज्य के सात जिलों जशपुर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और कोरिया में आदिवासी आबादी काफी गिरी है. करीब 30 फीसदी आदिवासी आबादी वाले इस राज्य में नक्सल प्रभावित इलाकों को देखें तो वहां आबादी की वृद्धि दर तेजी से घटी है. 2001 की जनगणना में यह दर 19.30 फीसदी थी जो 2011 में घटकर 8.76 फीसदी रह गई. इन आंकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद तमाम आदिवासी संगठनों ने राज्य सरकार से इस मुद्दे की तरफ ध्यान देने की मांग की थी लेकिन, उसका कोई खास नतीजा देखने में नहीं आया.
छत्तीसगढ़ की पांच संरक्षित जनजातियों-बिरहोर, पहाड़ी, अबूझमाड़िया, बैगा, कोरवा और कमार- की आबादी लगातार कम हो रही है. राज्य में लुप्त प्राय बिरहोर आदिवासियों की आबादी का आंकड़ा 401 तक सिमट गया है. जशपुर जिले में बसने वाली असुर जाति के तो अब सिर्फ 305 लोग बचे हैं.
एक साक्षात्कार में छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजित जोगी स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी को इसकी वजह मानते हैं. वे कहते हैं कि नक्सल प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में 95 फीसदी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर काबिल डॉक्टर नहीं हैं. उनके मुताबिक जब वे मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने आदिवासी इलाकों में परिवार नियोजन बंद करा दिया था लेकिन, अब टारगेट पूरा करने के लिए यह अभियान चोरी-छिपे चलाया जा रहा है.
हजारों साल से अपनी दुनिया में मस्त और अपनी कम ज़रूरतों में खुश रहने वाले आदिवासियों पर आधुनिकीकरण की मार भी पड़ रही है. जानकारों के मुताबिक उनके परिवेश में दूसरे समुदायों के दखल से उनका विस्थापन तो हो ही रहा है, उनमें कई आधुनिक बीमारियों का संक्रमण भी तेजी से फैलता जा रहा है. लंबे समय से अपने परिवेश तक सीमित रहे आदिवासियों की प्रतिरोधक क्षमता इन बीमारियों के आगे बेहद कमजोर पड़ जाती है इसलिए उनकी मृत्यु दर में बढ़ोतरी हो रही है.
भोजन के मोर्चे पर सिमटते संसाधन इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं. बाजरा, कोदों, कुटकी जैसे अनाजों की घटती खेती के साथ आदिवासियों का परंपरागत भोजन खत्म होने के कगार पर पहुंच रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके चलते 54 फीसदी आदिवासी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. तीन साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का एक बड़ा कारण डायरिया होता है. आयरन की भरपूर मात्रा के चलते बाजरा न सिर्फ शरीर के लिए पोषक होता है बल्कि डायरिया से लड़ने में भी यह बहुत प्रभावी होता है. यह तथ्य सामने आने के बाद सरकार ने कई जगहों पर बच्चों को आंगनबाड़ी में जिंक और आयरन की गोलियां देने का उपाय खोजा है. लेकिन इसी तरह की आपात कोशिशें इस दिशा में नहीं दिखतीं कि आदिवासी समुदाय को फिर उसकी परंपरागत फसलों से जोड़ा जाए.
मुख्यधारा के विमर्श में ऐसे मुद्दों पर चर्चा के बजाय आबादी के बढ़ने से खाद्यान संकट पैदा होगा जैसे वाक्यों का दोहराव जारी है. पत्रकार प्रमोद भार्गव लिखते हैं, ‘बढ़ती आबादी को लेकर खाद्यान्न संकट की भयावहता दिखाई जा रही है. लेकिन हैरानी यह है कि वर्तमान में ही खाद्यान्न का जो उत्पादन हो रहा है वह 11.5 अरब लोगों की भूख मिटाने के लिए पर्याप्त है. एक व्यक्ति को 2400 कैलोरी खाद्यान्न चाहिए, जबकि प्रति व्यक्ति उपलब्ध कैलोरी 4600 है.’ भार्गव के मुताबिक समस्या खाद्यान्न की कमी नहीं बल्कि उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने में व्यवस्था की अक्षमता है.
अक्सर यह भी कहा जाता है कि आदिवासियों की आबादी पर मुख्यधारा के दूसरे समुदायों की आबादी बढ़ने का दुष्प्रभाव पड़ रहा है. कहा जाता है कि जंगलों में आम शहरी और ग्रामीण समुदाय का दखल बढ़ने से ऐसे चिंताजनक हालात पैदा हो रहे हैं. इसे सही ठहराने के लिए कई उदाहरण भी दिए जाते हैं. जैसे अंडमान द्वीप में रहने वाली जारवा जनजाति को पर्यटकों के लिए अघोषित रूप में ह्यूमन सफारी की तरह इस्तेमाल किया जाता है. इसी तरह अबूझमाड़ में रहने वाले माड़िया आदिवासियों को भी अजूबे की तरह देखने आने वालों की संख्या कम नहीं रहती. लेकिन इस तर्क में यह बात छिपाने की कोशिश की जाती है कि वे कौन हैं जो वहां दखल देकर आदिवासियों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं, उनके वनों, रीति-रिवाजों,पेड़-पौधों, भोजन और भाषा को नष्ट करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इसकी जिम्मेदार भी हमारी बढ़ती आबादी यानी आम जनता है. एकबारगी तो यही लगता है क्योंकि अक्सर हवाला दिया जाता है कि हमारी ज़रूरतें बढ़ रही हैं इसलिए जंगलों का भी सफाया हो रहा है और आदिवासियों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है. आदिवासियों के बीच काम करने वाले पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी महात्मा गांधी का उद्धरण देते हुए कहते हैं कि हमारी ज़रूरतों की पूर्ति के लिए पर्याप्त मात्रा में संसाधन उपलब्ध हैं लेकिन हमारे लोभ की पूर्ति के लिए ये कम हैं. वे आगे कहते हैं, ‘मैं मानता हूं कि बढ़ती आबादी का प्रभाव भी इन आदिवासियों पर पड़ रहा है लेकिन, मूल बात यह नहीं है. मूल बात यह है कि इन पर कुछ लालची तत्वों का दुष्प्रभाव पड़ रहा है जो अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए आदिवासियों को मिटाने पर तुले हुए हैं.’
आबादी का बढ़ना चिंता की बात नहीं है, यह नहीं कहा जा सकता. लेकिन किसी समुदाय का अस्तित्व खत्म होना भी कम चिंताजनक नहीं है. आदिवासी मामलों के विशेषज्ञ और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक गंगा सहाय मीणा कहते हैं, ‘कथित विकास के नाम पर विकास का बाहरी मॉडल आदिवासियों पर थोपा जा रहा है जिससे इनके अस्तित्व के लिए संकट पैदा हो रहा है. इनकी घटती आबादी को लेकर किसी को कोई परवाह नहीं है. अगर परवाह है तो उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाना चाहिए.’
आदिवासी समाज की सेहत हमारे पर्यावरण के स्वास्थ्य की भी सूचक है. उनकी खुशहाली का मतलब है कि हमारे जंगल और बड़े अर्थों में देखें तो हमारा पर्यावरण सुरक्षित है. इसलिए दुनिया की आबादी बढ़ना जितना चिंताजनक है उससे कम चिंताजनक आदिवासियों की आबादी घटना नहीं है
दुनिया की आबादी बढ़ना बहुत चिंताजनक है तो आदिवासियों की आबादी घटना भी कम फिक्र की बात नहीं
संदीप गाड़ोली एनकाउंटर मामला: मुंबई एसआईटी ने एसीपी राजेश से की पूछताछ
मुंबई। गैंगस्टर संदीप गाड़ोली एनकाउंटर मामले में मुंबई एसआईटी ने गुड़गांव के तत्कालीन एसीपी राजेश कुमार से पूछताछ की. एसीपी राजेश आजकल फरीदाबाद में तैनात है और संदीप के एनकाउंटर के वक़्त वो गुड़गांव में तैनात थे.
मुंबई पुलिस शनिवार को एसीपी राजेश के फरीदाबाद दफ्तर में पहुंची और पूछताछ की, इसके बाद मुंबई पुलिस ने अगले ही दिन रविवार को एसीपी राजेश को मुंबई बुलाया और वहां लगातार दो दिन रविवार और सोमवार को पूछताछ की.
गौरतलब है की 7 फ़रवरी को गुड़गांव पुलिस ने गैंगस्टर संदीप का मुंबई के एक होटल में एनकाउंटर कर दिया था. तभी से गैंगस्टर का परिवार इस एनकाउंटर को फ़र्ज़ी बता आरोप लगा रहा है कि गुड़गांव पुलिस ने दूसरे गैंगस्टर बिन्दर गुर्जर से सुपारी लेकर संदीप का फ़र्ज़ी एनकाउंटर किया है.
एसआईटी ने इस केस में कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया है. इनमें सब इंस्पेक्टर प्रद्युम्न यादव सहित पांच पुलिस वाले हैं. प्रद्युम्न को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया था. एसआईटी सूत्रों के अनुसार, कुछ आरोपियों के कॉल डेटा (सीडीआर) में राजेश का नंबर आया था.
संदीप गाडोली के परिवार वालों ने भी राजेश पर गंभीर आरोप लगाए हैं. एसआईटी ने अभी अधिकृत रूप से साफ नहीं किया है कि वह गुड़गांव के एसीपी को अपने केस में गवाह बनाएगी या आरोपी. एक टॉप लेबल के अधिकारी के अनुसार, जांच में यह बात भी सामने आई है कि गुड़गांव की पुलिस टीम वहां के एक डीसीपी की परमिशन लेकर फरवरी में मुंबई आई थी. आने वाले दिनों में इस डीसीपी का भी स्टेटमेंट लिए जाने की संभावना है.
महाराष्ट्र के कृषि मंत्री सब्जियों से भरे 300 ट्रक लेकर मंडी पहुंचे
मुंबई। महाराष्ट्र के किसानों के उत्पादन सीधे बाजारों और ग्राहकों को बेचने को लेकर निर्णय लिये जाने के बाद मंगलवार को राज्य के कृषि मंत्री भाउ साहेब खोत महाराष्ट्र के अलग-अलग जिले से तकरीबन 300 से भी जादा साग-सब्जियों से भरे ट्रक लेकर मुंबई के दादर मार्केट पहुंचे। गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले से सीधे तौर पर किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार ने किसानों को फल और सब्जियां ग्राहकों तक सीधे बेचने का रास्ता अब मंत्री जी के पहल के बाद खोल दिया है।
किसानों का मानना है कि किसानों का उत्पादन सीधे बाजार लाकर या ग्रहाकों को बेचने से किसानों के घर खुशहाली आएगी क्योंकि यहां उनकी कमाई पर डंक मारनेवाला कोई बिचौलिया नहीं होगा। सुबह 5 बजे मुंबई के दादर सब्जी मंडी में महाराष्ट्र सरकार के इस निर्णय पर अपनी मुहर खुद लगाने के लिये कृषि मंत्री भाउसाहेब खोत किसानों को उत्पादित साग-सब्जी सीधे ग्राहकों को बेचते दिखाई दिए।
सरकार का मानना है कि इस पहल के बाद किसानों को अपने उत्पाद का सही दाम मिल सकेगा। जिससे उनकी आमदनी भी बढ़ेगी और विश्वास भी। मौजूदा हालात में किसानों के उत्पादों को बेचने के लिए नवी मुंबई के APMC अर्थात सरकारी मंडी का ही सहारा लिया जाता है। जहां 7.5 से 10 प्रतिशत तक दलाली देने के बाद किसान को पैसे मिलते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार की पॉलिसी के तहत महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को अपना माल खुले बाजार में बेचने की छूट देने के तहत इस तरह का यह खास निर्णय लिया है।
मंगलवार को मुंबई के दादर मार्केट में कृषि मंत्री के साथ भले ही किसान पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ आकर अपने उत्पादों को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हों लेकिन ये पहल आनेवाले दिनों में क्या इसी तरह टिक सकेगी ये गौर करनेवाली बात होगी। दादर के कई बड़े सब्जी विक्रेता का संबंध अन्य सब्जी मार्केट से है, जो रोजाना वहां से सब्जियां खरीदकर यहां बेचते हैं। ऐसे में किसानों के उत्पादन के सस्ते दाम एक तरफ और दूसरी तरफ बड़े विक्रेताओं के दामों को लेकर नोक-जोंक भी हो सकती है।
कच्ची नौकरी को ऐसे पक्की करेगी उत्तराखंड सरकार
आउटसोर्सिंग समाप्त कर उपनल कर्मचारियों को नियमित करने की मांग को लेकर शासन ने नया फार्मूला निकाला है। चतुर्थ श्रेणी के पदों की भर्ती में उपनल के अकुशल श्रेणी कर्मचारियों को 50 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा, जबकि अर्द्धकुशल और कुशल श्रेणी वालों को 20 प्रतिशत का वेटेज देने की योजना है। इसके साथ ही निकाले गए सभी उपनल कर्मचारियों को तुरंत वापस रख भविष्य में नहीं निकालने पर भी सहमति बनी है।
उपनल कर्मचारियों की हड़ताल सरकार के गले की फांस बन चुकी है। नियमितीकरण की मांग कर रहे उपनल कर्मचारियों को राहत देने के लिए शासन स्तर पर हुई बैठक में निगम के अकुशल कर्मियों (चतुर्थ श्रेणी) को विभागीय भर्तियों में पचास प्रतिशत वेटेज देने पर सहमति बनी।
उपनल कर्मियों को विभागीय भर्ती में साक्षात्कार के दौरान इस वेटेज का लाभ मिलेगा। तृतीय श्रेणी के पदों में आउटसोर्सिंग पर तैनात उपनल कर्मचारियों को नियमित विज्ञाप्ति होने वाले पदों पर बीस प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। इसके अलावा निकाले गए सभी उपनल कर्मियों को दोबारा तैनात करने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए जाएंगे।
हालांकि उपनल के माध्यम से तैनाती समाप्त कर सीधे विभागीय संविदा पर नियुक्ति की मांग पर शासन सहमत नहीं है। सचिव सैनिक कल्याण आनंद बर्धन ने बताया कि उपनल महासंघ को इस संबंध में अवगत करवा दिया गया है। चतुर्थ और तृतीय श्रेणी के पदों पर होने वाली भर्तियों के साक्षात्कार के दौरान उपनल कर्मचारियों को वेटेज दिए जाने पर सहमति बनी है।
उत्तराखंड: विनियोग विधेयक, बागियों की सदस्यता पर SC में सुनवाई आज
देहरादून: पिछले 18 मार्च को पारित विनियोग विधेयक और बर्खास्त नौ बागी विधायकों के मामले और राष्ट्रपति शासन को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
विनियोग विधेयक पर सीएम हरीश रावत पहले ही हलफनामा दाखिल कर चुके हैं कि बिल 18 मार्च को पास हो चुका है, जिस पर केंद्र अपना जवाब दाखिल करेगा। इसके अलावा बर्खास्त नौ बागियों की सदस्यता पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर सबकी नजर टिकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई को राष्ट्रपति शासन को अवैधानिक ठहराने वाली हरीश रावत की याचिका पर 10 मई को फ्लोर टेस्ट आहूत करने का निर्णय सुनाया था। फ्लोर टेस्ट में आए नतीजे पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को सुनवाई कर राष्ट्रपति शासन समाप्त कर रावत सरकार को बहाल कर दिया।
याचिका से संबंधित विनियोग विधेयक पास होने के मसले पर कोर्ट ने 12 जुलाई की तिथि तय की। इसके अलावा नौ बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की एक अन्य याचिका की सुनवाई भी 12 जुलाई तय की गई। ऐसे में मंगलवार को होने वाली सुनवाई बेहद अहम रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट का आने वाले दिनों में जो भी निर्णय रहेगा उससे राज्य में पैदा हुए सियासी हालात को लेकर कई स्थितियां स्पष्ट हो जाएंगी।
सपा में चापलूसों की कमी नहीं, मुझे जाने क्या-क्या बना दिया: मुलायम
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने सोमवार को राज्य सरकार की ग्रीन यूपी-क्लीन यूपी योजना के तहत यहां कुकरैल वन क्षेत्र (सूगामऊ-जगहरा) में 24 घंटे के भीतर प्रदेश भर में 5 करोड़ पौधे रोपने के अभियान का शुभारंभ किया।
इस मौके पर वह नेताओं, कार्यकर्ताओं को नसीहत देने से नहीं चूके। कहा, सपा में चापलूसों की कमी नहीं है। मुख्यमंत्री और अधिकारी अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन नेता उसका प्रचार नहीं कर रहे हैं।
मुलायम सिंह ने कहा कि इच्छा शक्ति, संकल्प शक्ति और साहस हो तो आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। दुविधावादी लोग कभी आगे नहीं बढ़ सकते। आलोचना से कभी डरो मत। आलोचना करने वाला असली मित्र होता है। यदि हममें कोई कमी है तो वह उसे दूर कर देता है। हमारे यहां (सपा में) चापलूसों की कमी नहीं है। उन्होंने मुझे जाने क्या से क्या बना दिया। पत्रों में भी चापलूसी करने लगे।
कहा, मुझे खुशी है कि यूपी तेजी से बढ़ रहा है। हमने लोकसभा में यह बात कही तो एक भी सांसद ने विरोध नहीं किया। मुख्यमंत्री और अधिकारी काम में जुटे हैं लेकिन नेता उनके कामों का प्रचार नहीं कर पा रहे हैं। यहां बैठा एक भी नेता बताए कि उसने कार्यकर्ताओं की मीटिंग बुलाकर सरकार के कामों का प्रचार किया है।
सपा मुखिया ने कहा, उप्र विकास में देश में नंबर-1 हो सकता है। विकास के लिए तीन चीजों की जरूरत होती है, लकड़ी, पत्थर और पानी। किसी दूसरे सूबे में ये तीनों चीजें उतनी मात्रा में नहीं हैं जितनी यूपी में हैं।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, देश में 50 साल राज करने वालों ने कभी गांवों की तरफ ध्यान नहीं दिया। एक भी समस्या का समाधान नहीं किया। कश्मीर समस्या ज्यों की त्यों है। कश्मीर समस्या के पीछे पाकिस्तान है और पाकिस्तान के पीछे कौन है, यह सब जानते हैं।
मुलायम ने कहा, अधिकारियों से काम लेना पड़ता है। नेताओं, कार्यकर्ताओं से मुखातिब होते हुए कहा कि गांव, मुहल्लों में क्या हो रहा है, क्या समस्या है, इसका अनुभव आपको ज्यादा है।
साधारण परिवार से आने वाले अधिकारी भी समस्याओं के बारे में जानते हैं लेकिन पद पर बैठकर भूल जाते हैं। पहले लोग बिना पढ़े-लिखे थे। हमारे गांव के लोग चिट्ठी पढ़वाने नजदीकी उझानी गांव जाते थे। अब पढ़ लिख रहे हैं लेकिन पढ़ाई का संबंध डिग्री से नहीं है।
सपा मुखिया ने कहा, मुझे मुख्यमंत्री अखिलेश बता रहे थे कि कितने काम किए हैं। हमने पूछा पेड़ कितने लगवाए? इसके बाद से वह पौधरोपण अभियान में जुट गए हैं। सीएम ने इसी फील्ड में पढ़ाई की है, वह पर्यावरण के इंजीनियर हैं। प्रदेश में पौधरोपण का आंदोलन चल रहा है। इसमें सभी को मदद करनी चाहिए। प्रतिज्ञा लेकर जाएं कि हर व्यक्ति पांच-पांच पौधे लगाएगा।
मुलायम बोले, कोशिश करें कि पौधे 10-12 फीट के हों, 8 फीट से कम के तो होने ही नहीं चाहिए। छोटे पौधे बकरी और दूसरे पशु खा जाते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री की प्रमुख सचिव अनिता सिंह से कहा, वह जिलाधिकारियों से बात करें और पूछें कि कितने पौधे लगाए हैं। लगातार निगरानी होगी तो प्रदेश में पांच करोड़ पौधे रोपने का लक्ष्य पूरा हो जाएगा।
मुलायम ने पीपल, नीम व पाकड़ के पौधे लगाने की सलाह दी। कहा कि पहले गांवों में ये पेड़ जरूर होते थे। पीपल के पेड़ की पूजा होती थी। बाद में पता लगा कि पीपल का पेड़ 24 घंटे और नीम पूरे दिन ऑक्सीजन देता है। मौजूदा दौर में प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है। यह बीमारियां फैलने की प्रमुख वजह है। पौधे लगाकर प्रदूषण कम किया जा सकता है।
मुलायम बोले, हमने यहां पांच पौधे रोपे हैं। उन्होंने मंच पर बैठे अधिकारियों से सवाल किया कि वे बताएं कितने पौधे लगाए हैं।
कहा, भाषण अच्छा दें और काम न करें, यह नहीं होना चाहिए। कथनी और करनी में भेद नहीं होना चाहिए। वादा खिलाफी नहीं होनी चाहिए। वादा करो मत, करो तो उसे निभाओ।
यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका, प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री ने दिया इस्तीफा
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले कांग्रेस को सियासी झटका लगा है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल खत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक निर्मल खत्री ने कांग्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा भेज दिया है। निर्मल खत्री ने लिखित में अपना इस्तीफा सोनिया गांधी को भेजा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी हाईकमान ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
चुनाव के नजरिए से प्रदेश कांग्रेस में यह पहला बड़ा बदलाव माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक यह कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी विधानसभा चुनाव से पहले खासकर ब्राह्मण समुदाय से राज्य के लिए नया प्रदेश प्रमुख को ढूंढ रही है। कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद ने भी संकेत दिया था कि प्रदेश कांग्रेस समिति में बदलाव हो सकता है।
गौर हो कि चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कांग्रेस को अपने परम्परागत वोट बैंक ब्राह्मण और मुस्लिम पर फोकस करने का सुझाव दिया था। इसके बाद ही गुलाम नबी आजाद को यूपी कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया। जिसके बाद से ही मीडिया में निर्मल खत्री के इस्तीफे को लेकर चर्चा थी। खत्री के इस्तीफे के साथ ही इन अटकलों पर विराम लग गया है।
BSF ने अजनाला सेक्टर में तीन पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया
पंजाब के अजनाला सेक्टर में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने तीन पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया. ये तीनों मंगलवार सुबह अजनाला सेक्टर के शाहपुर पोस्ट से घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे. बीएसएफ (बॉर्डर रेंज) आईजी अनिल पालिवाल ने तीनों घुसपैठियों के मारे जाने की पुष्टि की है.
इससे पहले सोमवार को भी जम्मू के कठुआ में हीरानगर एरिया के अतंरराष्ट्रीय बॉर्डप पर बीएसएफ जवानों ने 4 से 5 लश्कर आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसने से रोका था. ये आतंकी भारी संख्या में हथियारों के साथ भारत घुसना चाहते थे. सूत्रों के मुताबिक हर आतंकी के पास 30 से 40 किलोग्राम का बैग है. लेकिन बीएसएफ की मुस्तैदी की वजह से इन्हें वापस लौटना पड़ा.
बीएसएफ के डीजी ने हाल ही में यह बयान दिया था कि पाकिस्तान की ओर से आतंकी लगातार सीमा भेदने की कोशिश कर रहे हैं. खुफिया एजेंसियों ने यह अलर्ट जारी किया था और बीएसएफ के डीजी ने इसकी पुष्टि भी की थी. खुफिया सूत्र बताते हैं कि सीमा पार पाकिस्तानी एरिये में लॉन्चिंग पैड पर आतंकी मौजूद हैं. ये आतंकी भारतीय हैंडलर्स की मदद से भारत में घुसने की फिराक में हैं. खुफिया रिपोर्ट की मानें तो जो इंटरसेप्ट पर कॉल आ रहे हैं वह भारत के लिए चिंताजनक है.
दो-तीन हफ्ते तक भारत नहीं लौटेगा जाकिर, जांच एजेंसियों को सहयोग देने को तैयार
मुंबई: विवादास्पद इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के अब दो-तीन हफ्ते तक देश में लौटकर आने के आसार नहीं है जिसके सउदी अरब से आज यहां लौटकर आने की उम्मीद थी। उसने कहा कि वह उसके खिलाफ आरोपों की जांच करने वाली किसी भी भारतीय एजेंसी को सहयोग देने को तैयार है। इस बीच सरकार ने आज कहा कि नाइक के भाषणों का प्रसारण करने वाले पीस टीवी को सुरक्षा कारणों से भारत में प्रसारण करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया गया था।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने दिल्ली में संवादाताओं से कहा, ‘हमने हाल के दिनों में देखा कि तथाकथित पीस टीवी शांति को प्रभावित कर रहा है तथा बाद में कई देशों ने उस चैनल पर प्रतिबंध लगा दिया। किन्तु यहां प्रतिबंध का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि उसे अनुमति ही नहीं दी गयी थी।’ अपने भड़काउ भाषणों के जरिये आतंकवाद को प्रेरित करने का आरोप झेल रहे नाइक ने कल स्काइप के जरिये होने वाले अपने संवाददाता सम्मेलन को भी रद्द कर दिया है तथा सुझाव दिया है कि वह मीडिया मुकदमे का शिकार बन गया है।
आज शाम विदेश से जारी एक बयान में नाइक ने कहा कि किसी भी सरकारी एजेंसी ने उसके खिलाफ आरोपों के सन्दर्भ में उससे अभी तक सम्पर्क नहीं किया है। उसने कहा, ‘अभी तक एक भी भारत सरकार की एजेंसी ने इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण के लिए मुझसे सम्पर्क नहीं किया है। किसी भी आधिकारिक भारतीय सरकारी जांच एजेंसी के साथ वह मुझसे जो भी सूचना चाहेंगे उसके बारे में सहयोग करना मेरे लिए खुशी की बात होगी।’
बहरहाल, नाइक ने मीडिया पर बयानों को तोडने मरोड़ने तथा मूल बयान नहीं देने का आरोप लगाया ताकि ‘‘निहित स्वाथरें की पूर्ति की जा सके।’’ उसने कहा, ‘यदि समय मिला तो मैं वीडियो पर कुछ प्रमुख आरोपों का जवाब दूंगा और उन्हें मीडिया को दूंगा एवं उन्हें सोशल मीडिया एवं अन्य सार्वजनिक मंचों पर डालूंगा जिससे यदि मीडिया उनका दुरूपयोग करती है तो मूल उत्तर उपलब्ध हो सके।’ नाइक ने दोहराया कि वह आतंकवाद या हिंसा का समर्थन नहीं करता और न ही वह किसी आतंकवादी संगठन का समर्थन करता है।
नाइक के एक सहायक ने कहा, ‘उनका (नाइक का) यात्रा कार्यक्रम काफी पहले बन चुका था। उमराह में व्याख्यान देने के बाद उनका जेद्दाह जाने का कार्यक्रम है जहां से वह सार्वजनिक व्याख्यान देने के लिए अफ्रीका जाएंगे। उनके कम से कम अगले दो-तीन हफ्ते तक देश में आने की संभावना नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘डा. जाकिर नाइक को मंगलवार को होने वाली मीडिया ब्रीफिंग में स्वयं उपस्थित नहीं होना था। उन्होंने निर्णय किया था कि वह स्काइप के जरिये मीडिया को संबोधित करेंगे और मीडिया कर्मियों के जो भी सवाल होंगे, सभी का जवाब देंगे।’ भारत में निगरानी में आने के अलावा नाइक के पीस टीवी पर बांग्लादेश ने प्रतिबंध लगा दिया है।
कश्मीर के हालात पर PM मोदी की हाई लेवल मीटिंग जारी, राजनाथ ने रद्द किया अमेरिका दौरा
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार अफ्रीकी देशों की यात्रा पूरी कर आज सुबह स्वदेश लौट आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू कश्मीर की स्थिति की समीक्षा करने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं । पीएम ने कश्मीर के हालात पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के अलावा अन्य वरिष्ठ अफसरों की बैठक बुलाई है।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, वित्त मंत्री अरुण जेटली और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी भी मौजूद है। कश्मीर के बिगड़ते हालात की वजह से गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपना अमेरिकी दौरा रद्द कर दिया है। राजनाथ 17 जुलाई को अमेरिका में सुरक्षा को लेकर होने वाली बैठक में शामिल होने वाले थे।
इससे पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को पर्रिकर, जेटली, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक कर कश्मीर की स्थिति का जायजा लिया। और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित विपक्ष के कई नेताओं के साथ फोन पर बात की और कश्मीर में पूर्व स्थिति बहाल करने पर चर्चा की। हांलाकि उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि कश्मीर घाटी में जल्द ही शांति बहाल कर ली जाएगी।
हिज्बुल मुजाहिदीन के शीर्ष आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं । बैठक से पहले कल केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अन्य केंद्रीय मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता की जिसमें सुरक्षाबलों को सलाह दी गई कि वे बल का ‘विवेकपूर्ण’ इस्तेमाल करें और अमरनाथ तीर्थयात्रियों के लिए सुगम आवागमन सुनिश्चित करें । आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री को कश्मीर की मौजूदा स्थिति के बारे में विस्तृत ब्योरा दिया जाएगा । आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद हुई झड़पों में अब तक 23 लोग मारे जा चुके हैं । अपुष्ट खबरों में 31 लोगों के मारे जाने की बात कही गई है ।







