स्मृति ईरानी को मानव संसाधन मंत्रालय हटाए जाने के एक हफ्ते बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीबीएसई के नए अध्यक्ष के चुनाव में उनकी पसंद को ठुकरा दिया है। इसके अलावा चयन की सभी प्रक्रिया से उन्हें हटा भी दिया गया है।
पीएम मोदी जो कि कैबिनेट की चयन समिति के अध्यक्ष हैं, ने सीबीएसई के अगले अध्यक्ष के तौर पर डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह के नाम के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार मंगलवार को एचआरडी मंत्रालय को एक पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें कहा गया है कि सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत तमाम पदों पर होने वाली भर्ती संबंधित नियम को फिलहाल लंबित किया जाता है।
गौरतलब हो कि CBSE दिसंबर 2014 से बिना अध्यक्ष के है। इस पोस्ट के लिए जिस अधिकारी की तलाश है वह संयुक्त सचिव रैंक का होना चाहिए। रिक्रूटमेंट नियम के मुताबिक इस पद के लिए वही अधिकारी योग्य होगा जिसके पास शिक्षा प्रबंधन के क्षेत्र में तीन साल का अनुभव हो।
अभी तक की चयन प्रक्रिया में पैनल ने तीन नाम पर चर्चा की है। इसमें डॉ. सर्वेंद्र का नाम स्मृति ईरानी की पसंदीदा सूची में था। इसकी जानकारी 15 जून को भेजी की चिट्ठी में भी दी गई थी। वर्तमान में सर्वेंद्र स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग के डायरेक्टर हैं।
यह दूसरा मौका है जब स्मृति ईरानी के पसंदीदा अधिकारी के नाम को ठुकरा दिया गया है। इससे पहले एसीसी ने अगस्त 2015 में भी सतबीर बेदी के नाम को भी ठुकरा दिया था।
CBSE नए अध्यक्ष के नाम पर स्मृति ईरानी के प्रस्ताव को मोदी ने ठुकराया
अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार बहाल, राष्ट्रपति शासन रद्द
नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने आज अहम फैसला सुनाते हुए केंद्र की बीजेपी सरकार को बड़ा झटका दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार बहाल करते हुए राष्ट्रपति शासन रद्द कर दिया। बता दें कि 26 जनवरी से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू था। यहां बता दें कि इसी साल मई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए प्रेजिडेंट रूल को हटा दिया था।
यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट ने पुरानी सरकार को वापस किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम घड़ी की सुइयां वापस कर सकते हैं। कोर्ट ने राज्य में 15 दिसंबर 2015 वाली स्थिति बरकार रखने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गर्वनर को विधानसभा बुलाने का अधिकार नहीं था। यह गैरकानूनी था। 15 दिसंबर 2015 के बाद से सारे एक्शन रद्द कर दिए गए हैं।
हालांकि जस्टिस जे एस खेहर, जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस मदन लोकुर ने अलग अलग फैसले सुनाए। सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि क्या राज्यपाल को यह अधिकार है कि वह स्वत संज्ञान लेकर विधानसभा का सत्र बुला सकता है या नहीं।
नबाम तुकी के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार इस फैसले पर बहुत खुश है। तुकी ने NDTV से कहा- कोर्ट में हम लोगों की जीत हुई है। यह पूछे जाने पर कि विधायकों की शिकायत थी कि राहुल गांधी मुलाकात का वक्त नहीं देते और वे अलग थलग महसूस करते हैं, उन्होंने कहा- राहुल गांधी जनता के नेता हैं और वह उनसे भी मिल थे। उन्होंने गलत बोला था।
दरअसल अरुणाचल प्रदेश के स्पीकर नबम रेबिया ने सुप्रीम कोर्ट में ईटानगर हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें 9 दिसंबर को राज्यपाल जेपी राजखोआ के विधानसभा के सत्र को एक महीने पहले 16 दिसंबर को ही बुलाने का फैसले को सही ठहराया था।
इसके बाद 26 जनवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया और कांग्रेस की नबाम तुकी वाली सरकार परेशानी में आ गई क्योंकि 21 विधायक बागी हो गए। इससे कांग्रेस के 47 में से 26 विधायक रह गए। सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी को दूसरी सरकार बनने से रोकने की तुकी की याचिका नामंजूर कर दी। 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही बागी हुए कालीखो ने 20 बागी विधायकों और 11 बीजेपी विधायकों के साथ मुख्यमंत्री की शपथ ले ली और सरकार बना ली थी।
बुरहान के बाद महमूद गजनवी को बनाया गया हिजबुल मुजाहिदीन का नया कमांडर
श्रीनगर: बुरहान वानी के मारे जाने के बाद प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने कश्मीर में अपने कैडर को एकजुट रखने के लिए महमूद गजनवी को अपना ऑपरेशनल कमांडर नियुक्त किया है. हिजबुल मुजाहिदीन के चीफ सैयद सलाहुद्दीन ने पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर के मुजफ्फराबाद में मंगलवार को हिज्ब की कमांड काउंसिल की बैठक बुलाई थी.
बैठक में बुरहान को श्रद्धांजलि देते हुए कमांडरों ने सर्वसम्मति से कश्मीर में महमूद गजनवी को ऑपरेशनल कमांडर नियुक्त करने का फैसला किया. सलाहुद्दीन ने फिलहाल पाक अधिकृत कश्मीर को अपना ठिकाना बना रखा है. बताया जा रहा है कि बुरहान सलाहुदीन का खासमखास था. मंगलवार को बुरहान के साथ उसके पोस्टर सड़कों पर लगे नज़र आए.
सैयद सलाहुद्दीन ने कहा, “हम बुरहान के बलिदान को बर्बाद करने की अनुमति नहीं देंगे. बुरहान के इस मिशन को उसके निष्कर्ष तक ले जाया जाएगा.’’ उन्होंने कहा, “हिज्ब 13 जुलाई को पाक अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में एक कार्यक्रम का आय़ोजन करेगा. इसमें संयुक्त जिहाद परिषद और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता भी भाग लेंगे.”
हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के सुरक्षा बलों के हाथों मारे जाने के बाद से प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों के दौरान अबतक हिंसा में 33 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि करीब 1400 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई गंभीर रूप से घायल हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को जम्मू एवं कश्मीर की हिंसा को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की. इसके साथ ही उन्होंने घाटी में शांति बनाए रखने की अपील की. पीएम ने भी घाटी में हिंसा को लेकर चिंता जताई है.
इस बीच मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शाम को अपने एक वीडियो संबोधन में कश्मीरवासियों से हिंसा त्याग कर राज्य में अमन-चैन बहाल करने में मदद मांगी.
मुफ्ती ने कहा, “जैसे ही मैंने बुरहान वानी के मुठभेड़ में मारे जाने की खबर सुनी विरोध प्रदर्शन का अनुमान लगाते हुए मैंने कर्फ्यू लगा दिया ताकि किसी और के जीवन को हम बचा सकें. इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन्होंने अपनों को खोया है हम उनके साथ हैं और इस मामले की पूरी जांच होगी.’’
भारत के खिलाफ लड़ने वाले आतंकियों के बच्चों के लिए PAK के कॉलेजों में कोटा
आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के दोहरे रवैये का एक बार फिर पर्दाफाश हो गया है. एक समाचार पत्र को मिली खुफिया जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान के कॉलेजों में भारत विरोधी आतंकवादियों के बच्चों को कोटा दिया जाएगा. इनमें हिजबुल मुजाहिदीन और कश्मीर में हिंसक हमलों में शामिल अन्य अलगाववादी संगठनों के नेता शामिल हैं.
पाकिस्तान ने यह कोटा उन आतंकियों के बच्चों को दिया है जो भारत के खिलाफ लड़ते हुए मर गए. उच्च अधिकारियों के मुताबिक इस योजना को लागू करवाने में हिजबुल मुजाहिदीन के सुप्रीम कमांडर सैयद सलाहुद्दीन का सबसे बड़ा योगदान है. इसके जरिए जम्मू-कश्मीर में लड़ रहे आतंकियों के परिजनों को स्कॉलरशिप दी जाएगी
सूत्रों के मुताबिक हिजबुल चीफ कमांडर सलाहुद्दीन यह सुझाव देता है कि किसे मेडिकल, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेज में दाखिला देना चाहिए. इतना ही नहीं वह अपने सुझाव पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के जरिए देता है.
पाकिस्तान ने यह योजना बनाई है कि जिन कश्मीरी किशोरों के रिश्ते आतंकवादियों और अलगाववादियों से हैं, जो भारतीय सेना के खिलाफ हैं, उनके लिए कॉलेजों में सीट आरक्षित की जाएगी.
भारतीय खुफिया सूत्रों के मुताबिक इन बच्चों को पाकिस्तान में एमबीबीएस, बीडीएस, इंजीनियरिंग, ग्रैजुएशन, पोस्ट ग्रैजुएशन और अन्य सरकारी इंस्टीट्यूट्स में दाखिला दिया जाता है.
पाकिस्तानी अथॉरिटीज ने इन कश्मीरी छात्रों के लिए कोटा तीन कैटेगरी में बांटा है. इनमें से पहले वे हैं जो उनके मुताबिक शहीदों (जिन आतंकियों को भारतीय सेना ने मार गिराया) के बच्चे हैं, दूसरे एक्टिव मुजाहिद्दीन और फिर अलगाववादियों के बच्चे.
समाचार पत्र की इनवेस्टिगेशन टीम के पास कश्मीरी छात्रों की वह पूरी लिस्ट है जिनके नाम हायर एजुकेशन के लिए सलाहुद्दीन ने पाकिस्तान को भेजे हैं. उदाहरण के लिए हिजबुल चीफ ने एस इमरान नाम के छात्र का नाम पीएचडी कोर्स के लिए रेफर किया. इसके साथ कहा कि यह कश्मीरी युवा सुरक्षा कारणों से अपनी रिसर्च पूरी नहीं कर पा रहा है.
सलाहुद्दीन ने ISI को लिखी चिट्ठी में बताया है कि इमरान को मुजफ्फराबाद के बेस कैंप में भेज दिया गया है. जानकारी के मुताबिक इमरान एस मोहियूद्दीन का बेटा है और जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में रहता है. इमरान ने पंजाब से कंप्यूटर साइंस में एमएससी की और फिर मध्य प्रदेश से एम. फिल.
कश्मीर पर पाक का नया 'पैंतरा', इस बीच अमेरिकी सांसदों ने दिया है बड़ा झटका
कश्मीर हिंसा को लेकर पाकिस्तान हर बार नया पैंतरा खेल रहा है. पहले उसने आतंकी को मार गिराए जाने के लिए भारत की ‘निंदा’ कर दी. अब पाकिस्तान दुनिया के 5 बड़े देशों के सामने ‘शिकायत’ लेकर पहुंच गई है. पाक ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के पांच स्थायी सदस्य देशों (पी-5) से कहा कि वे कश्मीर में तनावपूर्ण हालात का संज्ञान लें. इधर आतंकवाद मामले में अमेरिकी सांसदों एवं विशेषज्ञों ने पाक को बड़ा झटका दिया है.
इससे पहले पी-5 से पाक ने कहा है कि भारत से अपील करें कि वह हिंसा प्रभावित घाटी में लोगों के ‘मानवाधिकारों का सम्मान’ करे. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बयान दिया है कि विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी ने चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के दूतों को कश्मीर के हालात की जानकारी दी. हालांकि, इससे पहले ही अमेरिका ने कह दिया है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है.
पाकिस्तान के इन सब पैंतरों के बीच अमेरिकी सांसदों एवं विशेषज्ञों ने पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद में कटौती करने को कहा है. इसके साथ ही पाक को आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश के तौर पर सूचीबद्ध करने की अपील की है. विशेषज्ञों ने हा कि आतंकवादी तत्वों को समर्थन देने वाला और चीजों को जोड़ तोड़ कर पेश करने वाला यह देश(पाकिस्तान) अमेरिका को मूर्ख समझता रहा है.
सदन की विदेश मामलों की समिति की एशिया एवं प्रशांत उपसमिति के अध्यक्ष मैट सैल्मन ने कहा, ‘वे हमें मूर्ख बना रहे हैं. वे हमें मूर्ख समझते हैं. यह माफिया को धन देने की तरह है.’ पूर्ववर्ती बुश काल के शीर्ष राजनयिक जाल्मे खलीलजाद ने सांसदों से कहा कि पाकिस्तानी नेतृत्व ने किस प्रकार दशकों से अमेरिकी प्रणाली के साथ खेल खेला है.
उन्होंने कहा, ‘यदि मैं गैरराजनयिक शब्द का इस्तेमाल कर सकता हूं तो हम बहुत भोले भाले रहे हैं.’ सैल्मन ने खलीलजाद की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘भोले भाले मूर्ख अधिकतर अमेरिकी यह देख सकते हैं और हमारे तथाकथित नेताओं को यह बात अभी तक समझ नहीं आई.’
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के लॉन्ग वार जर्नल के वरिष्ठ संपादक बिल रोजियो ने खलीलजाद से अपील की कि पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद में कटौती की जाए. उसे आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश के रूप में सूचीबद्ध किया जाए. रोजियो ने कांग्रेस की सुनवाई के दौरान खलीलजाद एवं अन्य विशेषज्ञों के साथ ‘पाकिस्तान: आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मित्र या दुश्मन’ विषय पर अपना पक्ष रखा.
उन्होंने कहा, ‘अंतत: वे हमें मूर्ख समझकर हमसे व्यवहार कर रहे हैं और हम पाकिस्तान को धन देने के लिए बहुत आतुर हैं.’ खलीलजाद ने बुश के शासनकाल में अफगानिस्तान में अमेरिकी राजदूत एवं संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि समेत विभिन्न राजनयिक पदों की जिम्मेदारी संभालते हुए पाकिस्तान नेतृत्व के साथ हुए अनुभव को साझा किया.
उन्होंने जानकारी दी कि, ‘पाकिस्तान बहुत चालाकी से चीजों को तोड़ मरोड़कर पेश करके हमारा इस्तेमाल करता रहा है. मुझे यह कहना होगा.’ उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस के विशिष्ट सदस्यों तक पहुंचते हैं. वे उन्हें यात्रा के लिए आमंत्रित करते हैं. वे उन्हें लुभाते हैं, वे एक बार फिर वादा करते हैं और हमारे बयानों का ऐसा निष्कर्ष निकालते हैं जो तथ्यों के सापेक्ष ‘हैरान करने वाले’ होते हैं.
यह पूछे जाने पर कि अमेरिका उसी नीति को क्यों अपनाता रहा है. खलीलजाद ने कहा कि अपने कृत्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की पाकिस्तान की क्षमता इसका एक कारण रही है. पूर्व शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा, ‘पाकिस्तान के साथ संबंधों का मेरा अनुभव यह है कि वे आपको तभी कुछ देंगे, जब उन्हें यह पता होगा कि उन्हें कुछ मिलने वाला है.’
कांग्रेस के सदस्य डाना रोहराबाचर ने कहा कि पाकिस्तान सरकार और सउदी अरब ने तालिबान एवं हक्कानी नेटवर्क बनाया. रोहराबाचर ने कहा कि अमेरिका का पाकिस्तान को मदद देना ‘मूखर्तापूर्ण’ है. उन्होंने कहा, ‘यह भ्रष्ट दमनकारी शासन बलूचिस्तान के लोगों को मार रहा है. बलूचिस्तान के लोगों को यह समझना चाहिए कि अमेरिका एक भ्रष्ट, आतंकवादी समर्थन शासन से उनकी स्वतंत्रता एवं स्वाधीनता के लिए उनके साथ है.’
उन्होंने कहा, ‘ऐसी ही स्थिति सिंधियों के साथ है. ऐसे ही हालात पाकिस्तान के अन्य समूहों के साथ हैं. यदि कोई शासन लोगों की जान लेता है, दमन करता है और भ्रष्ट है और इसके बावजूद हम उन्हें किसी प्रकार का समर्थन देना जारी रखते हैं.. तो यह वाकई बेतुका है.’ आतंकवाद, अप्रसार एवं व्यापार उपसमिति के रैंकिंग सदस्य विलियम कीटिंग ने पैनल के सदस्यों से सवाल किया कि क्या आईएसआईएस सरकार के भीतर एक सरकार है.
अमेरिकन यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर ट्रीसिया बैकन ने कहा, ‘यह पाकिस्तान के भीतर एक दुष्ट संस्था कतई नहीं है. यह स्वतंत्र रूप से या स्वयं संचालन नहीं करता. यह पाकिस्तानी सेना का एक हथियार है. यह पाकिस्तानी सेना की नीतियां लागू कर रहा है. यह पाकिस्तानी सेना की ओर से नीतियां लागू कर रहा है.’
बैकन ने कहा, ‘रोजियो ने कहा कि आईएसआई पाकिस्तानी सेना की एक शाखा है. यह पाकिस्तानी सेना की इच्छा को अंजाम दे रहा है जो वास्तव में पाकिस्तानी सरकार है. (चयनित) सरकार पाकिस्तानी सेना का केवल चेहरा है.’ खलीलजाद ने कहा, ‘मैं अपने सहकर्मी से सहमत हूं.’ सैल्मन ने कहा कि निजी रूप से उनका मानना है कि अमेरिका को पहले कदम के तौर पर पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए.
श्वेत पत्र में चीन का दावा, 2000 साल से दक्षिण चीन सागर पर उसका अधिकार
चीन ने आज संयुक्त राष्ट्र समर्थित न्यायाधिकरण के उस फैसले के खिलाफ श्वेत पत्र जारी किया है, जिसने दक्षिण चीन सागर (एससीएस) में उसके ऐतिहासिक अधिकारों को निरस्त कर दिया है। श्वेत पत्र जारी करते हुए चीन ने कहा कि इस रणनीतिक क्षेत्र में बीजिंग का दावा 2000 साल पुराना है।
चीन को कूटनीतिक तौर पर एक बड़ा झटका देते हुए स्थायी मध्यस्थता अदालत ने कल रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण दक्षिण चीन सागर में इस कम्युनिस्ट देश के दावों को निरस्त कर दिया था।
हेग स्थित अदालत ने कहा है कि चीन ने फिलीपीन के संप्रभुता के अधिकारों का उल्लंघन किया है। उसने कहा कि चीन ने कृत्रिम द्वीप बनाकर मूंगे की चट्टानों वाले पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है।
श्वेत पत्र में कहा गया कि चीन का 2000 साल से दक्षिण चीन सागर पर दावा है और याचिका दायर करने वाला फिलीपीन चीनी क्षेत्र पर कब्जा कर रहा है।
इसमें कहा गया कि दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपीन के बीच विवादों के मूल में वे क्षेत्रीय मुद्दे हैं, जो 1970 के दशक में शुरू हुई फिलीपीन की घुसपैठ और कुछ द्वीपों एवं चीन के नांशा कुंदाओ (नांशा द्वीपसमूहों) पर अवैध कब्जे के कारण पैदा हुए हैं।
चीन और फिलीपीन के बीच दक्षिण चीन सागर को लेकर उपजे प्रासंगिक विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने को तैयार है चीन शीर्षक वाले दस्तावेज में कहा गया, फिलीपीन ने इस तथ्य को छिपाने के लिए और अपने क्षेत्रीय दावे बरकरार रखने के लिए कई बहाने गढ़े हैं।
स्टेट काउंसिल इंफॉर्मेशन ऑफिस की ओर से जारी श्वेत पत्र में कहा गया कि फिलीपीन का दावा इतिहास और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार आधारहीन है।
पत्र में कहा गया कि इसके अलावा, समुद्र के अंतरराष्ट्रीय कानून के विकास के साथ दक्षिण चीन सागर के कुछ नौवहन क्षेत्रों को लेकर चीन और फिलीपीन में नौवहन सीमा-निर्धारण संबंधी विवाद भी पैदा हो गया।
श्वेत पत्र में फिलिपीन पर हमला बोलते हुए कहा गया कि मनीला ने चीन और फिलीपीन के बीच के द्विपक्षीय सहमति को नजरअंदाज करते हुए बार-बार प्रासंगिक विवादों को जटिल करने वाले कदम उठाए हैं, जिससे वे बढ़े ही हैं।
इस श्वेत पत्र में कहा गया है कि फिलिपीन ने घुसपैठ और अवैध कब्जा करके चीन के नांशा द्वीपसमूह के कुछ द्वीपों पर सैन्य प्रतिष्ठान बनाए हैं। उसने जानबूझकर चीन की ओर से लगाए गए सर्वेक्षण संकेतक नष्ट कर दिए और एक सैन्य वाहन को अवैध रूप से चलाकर चीन के रेनाई जियाओ द्वीप पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की।
इसमें कहा गया कि फिलिपीन चीन के हुआनग्यान दाओ के क्षेत्र पर भी दावा करता है। यह इसे अवैध रूप से कब्जाने की कोशिश कर चुका है और इसने जानबूझकर हुआनग्यान दाओ की घटना को अंजाम दिया था।
श्वेत पत्र के अनुसार, फिलिपीन ने बार-बार चीनी मछुआरों को प्रताड़ित किया और मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर हमला किया।
पत्र में कहा गया है कि जनवरी 2013 में, फिलिपीन गणतंत्र की तत्कालीन सरकार ने एकपक्षीय तरीके से दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता शुरू कर दी थी। ऐसा करके उसने द्विपक्षीय वार्ता के जरिए विवादों को सुलझाने के चीन के साथ चल रहे समझौते का उल्लंघन किया।
इसमें कहा गया, फिलिपीन ने तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा है, कानूनों की गलत व्याख्या की है और बहुत से झूठ गढ़े हैं ताकि दक्षिण चीन सागर में चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री अधिकार एवं हितों को नकारा जा सके।
आगे श्वेत पत्र में कहा गया है कि फिलिपीन के एकपक्षीय अनुरोध पर स्थापित न्यायाधिकरण का यह अधिकारक्षेत्र नहीं है और इसकी ओर से सुनाए गए फैसले अमान्य हैं और ये बाध्यकारी नहीं हैं। चीन ऐसे फैसलों को न तो स्वीकार करता है और न ही मान्यता देता है।
गांगुली का बड़ा बयान, टीम इंडिया को मिल सकता है नया बॉलिंग कोच
अनिल कुंबले के हेड कोच बनने के साथ ही टीम इंडिया के लिए और बड़ी खबर मिल सकती है। सूत्रों के मुताबिक पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जहीर खान भारतीय टीम के अगले बॉलिंग कोच बन सकते हैं। खबर है कि अनिल कुंबले अनुभवी भारतीय गेंदबाजों की तलाश कर रहें है, जो इस रोल के लिए फिट हों।
कुंबले को हेड कोच चुनने वाली कमेटी के सदस्य और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने कहा कि जहां तक सहायक कोच चुनने की बात है, गेंद पूरी तरह से बीसीसीआई के पाले में है।
साथ ही उन्होंने कहा कि जहीर के उपलब्ध होने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यह फैसला बीसीसीआई को लेना है और साथ ही यह भी देखना होगा कि क्या जहीर पूरे साल उपलब्ध होंगे। गांगुली ने स्पष्ट किया का क्रिकेट सलाहकार समिति का सहायक कोच चुनने में कोई रोल नहीं होगा। सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण भी क्रिकट सलाहकार समिति के सदस्य हैं।
गांगुली ने बताया कि अनिल खुद एक गेंदबाज हैं, इसलिए शायद उन्होंने कोई बॉलिंग कोच नहीं नियुक्त किया। हो सकता कि वो कोई तेज गेंदबाजी कोच चुन सकते हैं।
इससे पहले गांगुली ने कहा कि पूर्व भारतीय निदेशक रवि शास्त्री को बल्लेबाजी कोच का पद ऑफर किया गया था।, जिसका कोई नतीजा नहीं निकला था। भारतीय टीम फिलहाल वेस्टइंडीज के मेजबानी में 4 टेस्ट मैचों के सीरीज खेलने गई हुई है।
जहीर खान ने हाल ही में क्रिकेट से संन्यास लिया था। जहीर ने इस साल आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स की कप्तानी भी की थी। जहीर भारत के सबसे सफल बाएं हाथ के तेज गेंदबाज माने जाते हैं। जहीर स्विंग और रिवर्स स्विंग दोनों में माहिर हैं। यदि वो इस पद पर नियुक्त होते हैं, तो भारतीय टीम को फायदा ही होगा।
लूलिया के घरवालों से मिलने चले सलमान, जल्द कर सकते हैं शादी का फैसला?
सलमान खान की लव लाइफ एकदम सही ट्रैक पर जा रही है। सलमान की शादी के इंतजार में बैठे फैन्स के लिए एक खुशखबरी है। सलमान खान ने तय किया है कि वो लूलिया के घरवालों से जल्द ही मिलेंगे। अब जल्द मिलने का कारण तो हम सभी जानते हैं। लगता है कि अब यह रिश्ता पक्का होकर ही रहेगा।
बॉलीवुड लाइफ की खबर के मुताबिक सलमान खान ने लूलिया के घरवालों के लिए सुल्तान की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी है। यह स्क्रीनिंग कहीं और नहीं बल्कि सलमान खान के पनवेल फार्म हाउस पर होगी। खबर यह भी है कि इस स्क्रीनिंग को खुद लूलिया होस्ट करेंगी। आपको बता दें कि यह पहली बार होगा जब सलमान खान इस रोमानियाई सुंदरी के घरवालों से मिलेंगे।
इससे पहले लूलिया सलमान खान की सुल्तान में की एक्टिंग की काफी मुरीद दिखीं। बॉलीवुड लाइफ की ही एक खबर के मुताबिक अभी कुछ दिनों पहले लूलिया सलमान खान के घरवालों के साथ उनके गैलेक्सी अपॉर्टमेंट वाले घर में रुकीं थी।
यही नहीं सलमान ने लूलिया के साथ मोर्निंग में रोमांटिक स्टाइल में साइलिंग भी की। खबर के मुताबिक फिल्म की स्क्रीनिंग इसी महीने के अंत तक हो सकती है। आपको बता दें कि सलमान जल्द ही कबीर खान की अगली फिल्म ट्यूबलाइट की शूटिंग स्टार्ट करने वाले हैं।
‘सुल्तान’ के सुपर-डुपर हिट होने के बाद जानिए फैंस से क्या बोले सलमान?
मुंबई: बॉलीवुड सुपर स्टार सलमान खान इस बात से काफी खुश हैं कि उनके प्रशंसकों ने हाल में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘‘सुल्तान’’ में एक पहलवान के रूप में उनकी भूमिका को पसंद किया। सलमान ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, ‘सुल्तान को सराहने के लिए धन्यवाद।’ अली अब्बास जफर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘सुल्तान’ ईद के मुबारक मौके पर रिलीज हुई थी।
‘दबंग’ स्टार ने आइफा 2016 में अपनी प्रस्तुति का भी जिक्र किया। सलमान ने चार वर्ष के अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्म अकादमी पुरस्कार में प्रस्तुति दी। सलमान अभिनीत ‘बजरंगी भाईजान’ ने समारोह में वर्ष की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार अपने नाम किया।
गौर हो कि अभिनेता सलमान खान की फिल्म ‘सुल्तान’ बॉक्स ऑफिस पर कमाई के नए रिकॉर्ड बना रही है। अपने रिलीज के चौथे दिन भी इस फिल्म की कमाई की रफ्तार धीमी नहीं पड़ी है। अली अब्बास की इस फिल्म को देखने के लिए सिनेमाघरों में दर्शकों की भारी भीड़ पहुंच रही है। ‘सुल्तान’ की कमाई का सिलसिला यूं ही चलता रहा तो यह फिल्म इस साल ब्लॉकबस्टर साबित होगी।
शादी के बाद नहीं मिल रहा काम, फिल्मों से संन्यास लेंगी बिपाशा!
बिपाशा बसु भी उन हीरोइनों की फेहरिस्त में शामिल हो गई हैं जिन्हें शादी के बाद निर्माता-निर्देशक आकर्षक रोल ऑफर करना बंद कर देते हैं। ऐक्टर करन सिंह ग्रोवर से बिपाशा की शादी को अभी ढाई महीने ही हुए हैं और उनके सामने यह सच्चाई सिर उठा कर खड़ी हो गई है। सूत्रों की मानें तो कभी हॉट कहलाने वाली बिपाशा ने भी खुद अपने दिल को समझाना शुरू कर दिया है कि फिल्मों में उनकी पारी आखिरी पड़ाव पर आ गई है। इसलिए वह अब इन दिनों अपने लिए नया करिअर तलाशने में लग गई हैं।
हकीकत भी यही है कि पिछले कुछ वर्षों में बिपाशा ने कोई यादगार फिल्म नहीं दी। उल्टे हाल के वर्षों में उन पर केवल हॉरर फिल्मों की हीरोइन होने का लेबल लग गया और वह फिल्में भी फ्लॉप होती गईं। सूत्रों की मानें तो लंबे हनीमून से लौटीं बिपाशा बॉलीवुड में काम तो करना चाहती हैं परंतु उन्हें ढंग के ऑफर नहीं मिल रहे हैं। हॉरर फिल्मों से अब वह थोड़ा दूर रहना चाहती हैं। परंतु जब अच्छे ऑफर नहीं आ रहे हैं तो बिपाशा ने अब घर की साज सज्जा के सामान यानी होम डेकोर के क्षेत्र में हाथ आजमाने का फैसला किया है।
सूत्रों के मुताबिक बिपाशा इन दिनों बॉलीवुड की उन महिला सेलेब्रिटीज से सलाह मशवरा कर रही हैं जो पहले से इस फील्ड में हैं। बिपाशा का इरादा अपने नाम के ब्रांड वाली घर की सजावटी चीजों को बाजार में उतारने की है। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों उन्होंने इस सिलसिले में शिल्पा शेट्टी, मलाइका अरोड़ा और सुजैन खान से लंबा सलाह-मशविरा किया।
बिपाशा के करीबी दोस्त डिजाइनर रॉकी एस ने भी उन्हें विश्वास दिलाया है कि वह उनके ब्रांड की चीजों को बाजार में जमाने में मदद करेंगे। अब तय है कि आपको बिपाशा की तरफ से कुछ नई घोषणाओं की खबरें मिलेंगी परंतु वह फिल्मों की नहीं बल्कि घरेलू साज-सज्जा की होंगी।







