बृहस्पतिवार को अहिरवां पुलिस चौकी में कमल बाल्मीकि ने पुलिस की यातना से त्रस्त होकर फांसी लगाई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुलिस की हैवानियत सामने आई है।
पूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ें तो समझ में आता है कि पुलिस की थर्ड डिग्री ऐसी होती है कि कोई भी फांसी लगा लेगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मौत से पहले कमल को बहुत यातनाएं दी गईं। दोनों कानों के पीछे मिले बड़े घाव बता रहे थे कि कमल के कानों में करंट लगाने के लिए क्लिप लगाई गई होगी।
चकेरी की अहिरवां चौकी में चोरी के आरोप में पकड़ कर लाए गए युवक कमल बाल्मीकि (26) का शव बृहस्पतिवार सुबह आरक्षी बैरक में पंखे से लटका मिला था। बृहस्पतिवार देर रात ढाई बजे के बाद तक कमल के शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल ने किया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार कमल के दाहिने पुट्ठे पर एक बड़ा घाव मिला है। यह पुलिस की पिटाई से हुआ है। कानों में करंट लगाने का पता चला है। कमल के पेट में सिर्फ 12 एमएल तरल पदार्थ मिला है।
जिससे स्पष्ट है कि टार्चर के 12 घंटे पहले से कमल को सिर्फ पानी दिया गया था, खाने को कुछ भी नहीं दिया गया। कमल के शरीर पर सभी चोटें मृत्यु पूर्व की थीं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक लूट कबूलवाने के लिए कमल को खाली पेट रखा गया और बुरी तरह पीटा गया। बुधवार रात 12 और बृहस्पतिवार दिन में 12 बजे के बीच कमल की मौत हुई।
गले में रस्सी का तिरछा निशान साबित करता है कि कमल फंदे पर लटका था। अब सवाल ये है कि अहिरवां चौकी में रस्सी कहां से आई। कमल जब फंदा लगा रहा था तो चौकी के पुलिसकर्मी कहां थे।
कमल बाल्मीकि के भाई निर्मल ने पुलिसिया टार्चर की पूरी कहानी खोल कर रख दी। निर्मल ने बताया कि चकेरी पुलिस की स्पेशल टीम ने उसे और उसके बड़े भाई कमल को मंगलवार को उनके घर के पास से उठाया था। निर्मल के मुताबिक पहली रात उन्हें कोयलानगर चौकी में रखा गया था।
चौकी में सिपाहियों ने एक ड्रम में पानी भरकर रखा था और करंट वाली मशीन रखी थी। एक बार पानी में मुंह डुबाते थे फिर मुंह में कपड़ा ठूंसकर करंट लगाते थे। पानी में मुंह डूबने पर हम लोग छटपटाते थे तो सिपाही पीछे से डंडा मारते थे। ये यातना घंटों चली और लाख मांगने पर भी पानी की एक बूंद नहीं दी गई।
पुलिस उनसे टीवी एक्ट्रेस के घर चोरी कबूलने को कह रही थी। निर्मल के मुताबिक अगली रात उसे और कमल को लालबंगला चौकी में रखा गया। वहां भी घंटों टार्चर चलता रहा। टार्चर से टूटकर कमल चोरी कबूलने को तैयार हो गया था लेकिन पुलिस उससे माल बरामदगी के लिए गहने और पैसे का इंतजाम करने को कह रही थी।
इसके बाद बुधवार रात पुलिस कमल को कहीं और ले गई। निर्मल के अनुसार कमल की मौत के बाद ही घबराकर पुलिस ने उसे छोड़ा वर्ना उसे भी फर्जी मामले में फंसा देती।
पुलिस की हैवानियत: कान में करंट लगाया, पानी में डुबो कर मारा
शरद यादव का विवादित बयान, कहा- बेरोजगारी की वजह से सड़कों पर बढ़े कांवड़िए
जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) नेता शरद यादव मोदी सरकार को घेरने के चक्कर में खुद निशाने पर आ गए हैं. वह बेरोजगारी पर बोले कि सड़कों पर बढ़ती कांवड़ियों की संख्या देश में बढ़ती बेरोजगारी का बेहतरीन उदाहरण है.
शरद यादव ने कहा कि अगर रोजगार होता तो कांवड़ियों की इतनी बड़ी तादाद सड़कों पर न होती. दरअसल, शरद यादव ने कानपुर में मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि नौकरियां देने का वादा कर बीजेपी केंद्र में आई, लेकिन वह ये वादा पूरा नहीं कर सकी. इसकी मिसाल है हाल ही में सड़कों पर निकले लाखों कांवड़िए. अपने बयान में शरद यादव ने कांवड़ियों को बेरोजगारी की निशानी बता दिया.
शरद यादव के इस बयान से शिव भक्तों के साथ ही धर्मगुरु भी नाराज हैं. सुमेरू पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्र नंद, अखाड़ा परिषद के नरेंद्र गिरि और आत्मानंद ब्रह्मचारी, हिंदू महासभा के स्वामी चक्रपाणी ने इस बयान पर विरोध दर्ज करवाया है. उत्तर भारत में सावन के महीने में शिव भक्त जलाभिषेक के लिए निकलते हैं. सालों से ये परंपरा चली आ रही है. इनमें हर तबके के भक्त होते हैं. ऐसे में भक्तों को बेरोजगार बता कर शरद यादव बुरी तरह से घिर गए हैं.
अमित शाह और आनंदीबेन के बीच तकरार के बाद विजय रुपानी को गुजरात का मुख्यमंत्री चुना गया
आनंदीबेन पटेल के इस्तीफ़े के बाद गुजरात भाजपा के अध्यक्ष विजय रुपानी को राज्य का अगला मुख्यमंत्री चुना गया है. साथ ही स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल को राज्य का उपमुख्यमंत्री चुना गया. शुक्रवार को गांधीनगर में हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में यह फैसला लिया गया है. इस बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने भी हिस्सा लिया था.
समाचार वेबसाइट इंडिया टुडे के मुताबिक बैठक में मुख्यमंत्री के चयन को लेकर अमित शाह और आनंदीबेन के बीच काफी देर तकरार हुई थी. बताया जाता है कि आनंदीबेन हर हाल में नितिन पटेल को मुख्यमंत्री देखना चाहती थीं जबकि अमित शाह अपने करीबी विजय रुपानी के नाम पर अड़े हुए थे.
इंडिया टुडे के अनुसार बैठक में आनंदीबेन से कहा गया कि नितिन पटेल के पाटीदारों से अच्छे संबंध नहीं हैं, ऐसे में उनके सीएम बनने पर राज्य में पार्टी पर अगला चुनाव हारने का खतरा बना रहेगा. इसके बाद भी जब पूर्व मुख्यमंत्री तैयार नहीं हुईं तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें फोन करके समझाया. इसके बाद दोनों पक्षों में विजय रुपानी को मुख्यमंत्री और नितिन पटेल को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने पर सहमति बनी.
इस पूरे घटनाक्रम का एक दिलचस्प पहलू यह है कि शुक्रवार सुबह से ही मीडिया में नितिन पटेल के अगला मुख्यमंत्री चुने जाने की खबरें आने लगी थीं. यहां तक कि घोषणा से पहले नितिन पटेल ने बधाई लेना भी शुरू कर दिया था लेकिन, इसके कुछ ही घंटे बाद विजय रुपानी के नाम की घोषणा ने सभी को चौंका दिया.
128 वर्षों में पहली बार पार्टी उम्मीदवार ट्रंप का समर्थन नहीं करेगा हार्वर्ड रिपब्लिकन क्लब
हार्वर्ड रिपब्लिकन क्लब 128 वर्षों में पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेगा। क्लब ने डोनाल्ड ट्रंप के ‘नस्लीय और नफरत भरी बयानबाजी’ और उनके द्वारा सैनिकों के बलिदान का बार बार अपमान करने की निंदा करते हुए उन्हें समर्थन नहीं करने का फैसला किया है। 70 वर्षीय नेता पर निशाना साधते हुए क्लब ने कहा कि इसके सदस्य ट्रंप पर ‘शर्मिंदा’ हैं। क्लब ने ट्रंप को ‘गणराज्य के अस्तित्व के लिए खतरा’ करार देते हुए साथी रिपब्लिकन से ‘खतरनाक व्यक्ति’ से समर्थन वापस लेने का आह्वान किया।
ट्रंप पर हमला बोलते हुए क्लब ने कहा कि अमेरिका का नेतृत्व करने के लिए जिस स्वभाव और योग्यता की जरूरत है वह उनके पास नहीं है। क्लब ने कहा कि वह उनके ‘कटु बयानबाजी’ का समर्थन नहीं करेगा जो कि देश और इसके बच्चों में ‘जहर घोल’ रहा है। क्लब ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, ‘हम अपनी पार्टी के निर्वाचित नेताओं से डोनाल्ड ट्रंप से अपना समर्थन वापस लने का आह्वान करते हैं और हम अपने साथी कॉलेज रिपब्लिकन से खतरनाक व्यक्ति की निंदा करने और उनसे अपना समर्थन वापस लेने के लिए हमसे जुड़ने का आग्रह करते हैं।’
क्लब ने कहा कि 128 वर्षों में ऐसा पहली बार हो रहा है जब वह रिपब्लिन उम्मीदवार का समर्थन नहीं कर रहा है। क्लब ने ट्रंप के विचारों की कड़ी आलोचना करते हुये कहा कि उनके विचार ‘न केवल एक रिपब्लिकन के रूप में बल्कि एक अमेरिकी के रूप में भी हमारे मूल्यों के विपरीत हैं।’
डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा हमला, कहा- 'भ्रष्टाचार की रानी हैं हिलेरी'
वाशिंगटन। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नजदीक आते ही उम्मीदवारों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी तेज हो गया है। राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन पर निशाना साधा है।
ट्रंप ने हिलेरी पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रंप ने तो यहां तक कह दिया कि ‘हिलेरी भ्रष्टाचार की रानी है। ट्रंप ने आगे कहा अगर हिलेरी अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर चुनी जाती हैं तो इस देश का विनाश हो जाएगा।’
डेस मोइनेस में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा ‘अगर हिलेरी अमेरिकी की राष्ट्रपति बनती हैं तो आपको आतंकवाद, परेशानी का सामना करना पड़ेगा।’ ओबामा की हिलेरी और ट्रंप को सलाह देते हुए कहा, ‘भावी राष्ट्रपति की तरफ पेश आना शुरू करें।’
शुक्रवार रात को विस्कॉन्सिन में एक अन्य रैली में ट्रंप ने कहा, ‘एक तरह से वो एक राक्षस है। वहीं दूसरी तरह वो एक कमजोर इंसान है। वो वाकई में राष्ट्रपति बनने के लिए मजबूत नहीं है।’ ट्रंप ने आगे कहा ‘हिलेरी एक मुसीबत है। वो हमारे देश के लिए बहुत बुरी रहेंगी इसीलिए हम ऐसा नहीं होने देंगे।’
गौरतलब है कि 68 वर्षीय हिलेरी क्लिंटन पिछले एक हफ्ते से सभी नेशनल पोल्स में बढ़त बनाए हुए हैं। हिलेरी अगर राष्ट्रपति चुनी जाती हैं, तो वो अमेरिकी की पहली महिला राष्ट्रपति होंगी।
दक्षिण चीन सागर मसले पर चीन को चाहिए भारत की मदद
बीजिंग। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह यानी एनएसजी में भारत की राह में रोड़ा अटकाने वाले चीन को अब एक ऐसे मुद्दे पर भारत की मदद की दरकार है जिस पर वह अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल से शिकस्त खा चुका है।
इसी के तहत चीन के विदेश मंत्री वांग यी 12 अगस्त से अपनी तीन दिवसीय यात्रा पर भारत आ रहे हैं। इस दौरे को दक्षिण चीन सागर पर भारत का समर्थन हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल द्वारा दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावे को नकारने के बाद अमेरिका सहित कई देशों ने चीन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है जिस कारण चीन की परेशानी और बढ़ गयी है।
आपको बता दें कि चीन के समुद्री क्षेत्र पर दावे को लेकर फिलीपींस ने संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतरराष्ट्रीय समझौते के आधार पर इसे ट्रिब्यूनल में चुनौती दी थी।
एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, चीन इस मुद्दे पर भारत के रूख से खुश नहीं है, क्योंकि भारत चाहता है कि इस मुद्दे का हल संयुक्त राष्ट्र समझौते के आधार पर ही किया जाना चाहिए। चीन चाहता है कि सितंबर में होनी वाली जी-20 बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा ना हो और साथ में भारत जी-20 की बैठक में भी शामिल ना हो।
चीन हाल ही में आसियान देशों को जी-20 सम्मलेन के दौरान इस मुद्दे से जुड़ी किसी भी चर्चा में शामिल नहीं होने के लिए मनाने की कोशिश कर चुका है। हालांकि इस बात का पता नहीं चल सका है कि वह अपने उद्देश्य में कितना कामयाब रहा।
3 सितंबर से अपनी तीन दिवसीय चीनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन के इतर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से भी मुलाकात करेंगे। वांग फिलहाल तीन देशों के दौरे पर हैं, जिसमें वह 9 अगस्त से केन्या और यूगांडा का दौरा भी करेंगे।
केन्या के विदेश मंत्री अमीना मोहम्मद से मुलाकात करने से पहले वह नई दिल्ली में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से भी मुलाकात करेंगे और इस दौरान वो सितंबर में होने वाली मोदी और जिनपिंग की मुलाकात की रूपरेखा तय करेंगे।
भारत-पाकिस्तान के इस झगड़े में नुकसान उनका ही नहीं, सारे सार्क देशों का हो रहा है
अपवाद के रूप में भूटान को छोड़ दें तो सार्क के सभी देश सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे हैं. बीते साल बांग्लादेश में उदारवादियों के ऊपर हमले बढ़ गए. अफगानिस्तान में फिर तालिबान की पकड़ बढ़ रही है. भारत और पाकिस्तान भी काफी समय से आतंक के साये में हैं. इसे देखते हुए सार्क देशों के गृहमंत्रियों के सम्मेलन की अहमियत समझी जा सकती है.
लेकिन इस बार इस्लामाबाद में हुआ यह आयोजन एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के टकराव की भेंट चढ़ गया. गृहमंत्री ने अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान पर हमला बोला. उन्होंने वहां जुटे अपने समकक्षों के साथ आयोजित दोपहर के भोज में भी हिस्सा नहीं लिया. वहां आए दूसरे देशों के मंत्रियों की बात दो पक्षों के टकराव से उठे शोर में डूब गई.
इस्लामाबाद में हुए इस टकराव को दोनों देशों के राजनेता अपने-अपने वोटरों को लुभाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन, इससे यह भी पता चलता है कि सामूहिक रूप से नीतिगत चुनौतियों का सामना करने के मामले में दक्षिण एशिया आज भी बाकी दुनिया से पीछे है. यह त्रासदी ही है कि जहां दूसरे देश और बहुदेशीय समूह क्षेत्रीय बाधाओं को तोड़कर आगे बढ़ रहे हैं वहीं भारतीय उपमहाद्वीप में हम इन बाधाओं को और मजबूत होता देख रहे हैं. आपसी रूप से अलग-थलग रहने के मामले में दक्षिण एशिया दुनिया में सबसे आगे है. दुनिया की आबादी का 16.5 फीसदी हिस्सा यहां रहता है लेकिन, वैश्विक व्यापार में इसकी हिस्सेदारी महज दो फीसदी है. अर्थशास्त्री यह भी बताते हैं कि दक्षिण एशिया के कुल व्यापार में आपसी व्यापार का छह फीसदी से भी कम योगदान है. इस क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद में आपसी कारोबार का हिस्सा दो फीसदी ही है जबकि पूर्वी एशिया के लिए यह आंकड़ा 20 फीसदी है यानी दस गुना ज्यादा. इससे पता चलता है कि हम क्या खो रहे हैं.
आसियान इसकी एक असाधारण मिसाल है कि चुनौतियों के बावजूद नीतिनियंता आपसी मेलजोल की दिशा में किस तरह काम कर सकते हैं. इस संगठन के तहत आने वाले देशों ने 2010 में एशिया को आपस में जोड़ने के लिए एक मास्टरप्लान बनाया था. इसके तहत प्राथमिकता वाली कुछ परियोजनाओं की एक सूची बनाई गई थी और हर सदस्य एक निश्चित समय सीमा में इन्हें पूरा करने पर सहमत हुआ था. यह जरूर है कि सभी परियोजनाएं योजना के मुताबिक नहीं चल रही हैं क्योंकि दुनिया के आर्थिक हालात ठीक नहीं है जिसके चलते फंड की कमी हो रही है. इसके बावजूद सभी देश दृढ़संकल्प है कि समूचे आसियान क्षेत्र को एक बाजार और उत्पादन केंद्र बनाया जाए. आसियान अब यह भी आकलन कर रहा है कि आपस में जुड़ने की इसकी परियोजनाओं पर चीन की मैरीटाइम सिल्क रोड का का क्या असर पड़ेगा. उधर दक्षिण एशिया की दो बड़ी ताकतें राजनीतिक नफे-नुकसान की कवायदों में व्यस्त हैं.
वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र खिसकता हुआ एशिया की तरफ बढ़ रहा है. अपने विशाल आकार के चलते भारत भी इस खेल में एक बड़ा खिलाड़ी होगा. लेकिन क्षेत्रीय एकजुटता की उपेक्षा करना एक ऐसी गलती है जो उसे एक दायरे से आगे नहीं बढ़ने देगी. यह गलती उन करोड़ों युवाओं का नुकसान करेगी जिनकी आंखों में बड़े सपने हैं.
ओपनिंग सेरेमनी में साड़ी पर ब्लेजर नहीं पहनना चाहतीं भारतीय खिलाड़ी
खेलों के महाकुंभ रियो ओलिंपिक्स में इस बार भी भारतीय खिलाड़ियों की अधिकृत वेशभूषा हिंदुस्तानी परंपरा से कुछ अलग ही होने वाली है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय महिला खिलाड़ियों को इस बार भी साड़ी के साथ ब्लेजर पहनना होगा। यह बात कितने खिलाड़ियों को पसंद आएगी और कितनों को नहीं? यह तो शनिवार को होने वाली ओपनिंग सेरेमनी में ही पता लगेगा।
पिछले ओलिंपिक को याद किया जाए तो मामला कुछ ऐसा ही था। लंदन ओलिंपिक में भी ऐसा ही कुछ हुआ था। भारतीय दल अपनी बारी आने का इंतजार कर रहा था। दूसरी तरफ अधिकृत ओलिंपिक किट में पुरूषों और महिलाओं को समान रुप से नेवी ब्लू कलर का ब्लेजर दिया गया था। खिलाड़ियों के दल में रश्मि चतुर्वेदी भी थीं जिन्हें साड़ी पर ब्लेजर का आइडिया कुछ खास पसंद नहीं आया था।
रश्मि की डबल्स पार्टनर सानिया मिर्जा थीं। दोनों ही खिलाड़ियों ने ब्लेजर पहनने के बजाए हाथ में रखना ज्यादा बेहतर समझा था। अन्य महिला खिलाड़ियों ने भी इसी फैशन स्टेटमेंट को फॉलो किया। हालांकि बाद में यह स्थिति कुछ अजीब बन पड़ी थी। कैमरे पर यह दृश्य फोकस में बने हुए थे। ऐसा लग रहा था मानो भारतीय खिलाड़ियों की एक अलग ही छबि परदे पर आ रही हो।
जानकारी के मुताबिक इस साल भी कुछ अलग नहीं होने वाला है। साड़ी का सवाल तो छोड़िए मगर इस बार ब्लेजर भी साथ होगा। इस पूरे मामले में किसी भी डिजाइनर को दोष नहीं दिया जा सकता है। हमेशा की तरह इस बार भी इंडियन ओलिम्पिक एसोसिएशन के द्वारा ही भारतीय खिलाड़ियों को दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। हो सकता है कि भारतीय महिला खिलाड़ियों के द्वारा यही रवैया दर्शाया जाए।
हो सकता है कि ओपनिंग सेरेमनी में दुनिया देखे कि आखिर भारतीय महिलाएं साड़ी के ऊपर ब्लेजर क्यों पहन रही हैं? या फिर यह सोचें कि सभी महिला खिलाड़ी एक ही ढंग से ब्लेजर को क्यों नहीं पहन रखी हैं।
लिएंडर पेस को खेल गांव में अभी तक नहीं मिला है कमरा
भारतीय टेनिस स्टार लिएंडर पेस को रियो ओलिंपिक खेल गांव में अब तक कमरा आवंटित नहीं किया गया है। अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक सात बार के ओलंपियन टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस गुरुवार शाम को रियो डी जनेरियो में पहुंचे। यहां मौजूद इंतजाम को देख लिएंडर पेस ने अपनी निराशा व्यक्त की है।
खिलाड़ी पेस ने कहा कि कोई कमरा नहीं मिलने के कारण उन्हें भारतीय ओलिंपिक दल के प्रमुख राकेश गुप्ता के कमरे में रुकना पड़ा है। टीम के कप्तान जीशान अली ने भी टेनिस स्टार पेस की बात का समर्थन करते हुए कहा कि पेस ने खेल गांव में न रुकने की बात कभी नहीं कही।
लिएंडर पेस ने देर शाम जीशान के साथ प्रैक्टिस की। लिएंडर ने कहा, ‘लोग कहानी बनाते रहते हैं। कभी-कभी दुख होता है कि लोग समझते नहीं है कि इस उम्र में सात ओलिंपिक खेलने में कितनी मेहनत लगती है।’ ओलिंपिक पदक विजेता पेस ने कहा कि वह देश के लिए खेलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की खबरों के बारे में उन्हें कोई टिप्पणी नहीं करनी।
पेस ने कहा कि उन्होंने पहले ही इस बात की जानकारी दे दी थी कि वह इटली में चैंलेजर खेल रहे हैं। उन्होंने कहा वह प्रैक्टिस के बजाय मैच खेलकर खुद को फिट रख रहे हैं। पेस ने कहा कि वॉशिंगटन में तीन वर्ल्ड टीम टेनिस के तीन मैच खत्म होते ही वह फ्लाइट पकड़कर रियो पहुंच गए।
भारत की ओर से सबसे ज्यादा ओलिंपिक खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ी ने कहा कि जो अपार्टमेंट टीम को अलॉट हुआ है उसमें तीन बेडरूम हैं जिसमें से एक रोहन बोपन्ना के पास है, एक उनके फिजियो के पास और एक टीम के कप्तान जीशान अली के पास। पेस ने कहा कि ऐसे में वह मिशन प्रमुख के कमरे में ही ठहरे हैं।
शर्लिन चाहती हैं ज्यादा बोल्ड हों लोग
एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा का कहना है कि ‘कामसूत्र 3डी’ उनकी फिल्म नहीं है। यह राज भी उन्होंने खोला है कि एक शॉर्ट फिल्म को वे निर्देशित कर रही हैं।
‘इंडिया मोबाइल फिल्म फेस्टिवल’ में मौजूद शर्लिन से जब उनकी फिल्म ‘कामसूत्र 3डी’ के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा ‘वो मेरी फिल्म नहीं है। उस फिल्म की स्टारकास्ट और टीम को मेरी तरफ से बधाई, लेकिन वो मेरी फिल्म नहीं है।’
2012 में इस फिल्म के कई फोटोज वायरल हुए थे और जब 2014 में इसका ट्रेलर आया तब भी कई सीन में वो नजर आई थीं। 2014 में ही यह फिल्म तब चर्चा में रही जब शर्लिन ने निर्देशक रूपेश पॉल के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। बाद में पॉल ने भी मानहानि का दावा शर्लिन के खिलाफ किया था। बाद में ये मामले सुलझ गए थे। लेकिन यह साफ नहीं हो पाया था कि इसकी शूटिंग पूरी हुई है या नहीं।
अपने आने वाले प्रोजेक्ट के बारे में उन्होंने कहा ‘मैंने अपनी शॉर्ट फिल्म की शूटिंग हाल ही में शुरू की है। मैं चाहती हूं कि इस साल 15 अगस्त पर यह रिलीज भी हो जाए। मैं पहली बार बतौर निर्देशक, लेखक और एक्टर के रूप में काम कर रही हूं।’
आजकल की हीरोइनों के बोल्ड अवतार पर उन्होंने कहा ‘मैं तो चाहती हूं कि लोग और ज्यादा बोल्ड हों, ज्यादा खूबसूरत दिखें, ज्यादा मनोरंजन, प्रभावित करने वाले हों।’







