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स्वतंत्रता दिवस को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, पुलिस ने किया मॉक ड्रिल

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मुंबई: 15 अगस्त यानि स्वतंत्रता दिवस को लेकर देश में सुरक्षा की तैयारियां सख्त की जा रही हैं. बड़े शहरों पर आतंकी खतरे को देखते हुए मुंबई के अंधेरी स्टेशन पर कल रात अचानक काफी अफरातफरी मच गई. लोगों को लगा कि आतंकी हमला हो गया है. हकीकत में आतंकी हमले से निपटने की तैयारियों की जांच के लिए मुम्बई पुलिस और क्विक रिस्पांस टीम ने मॉक ड्रिल किया.
देर रात मुम्बई के अंधेरी मेट्रो स्टेशन इलाके में अचानक हुई घेराबंदी से लोगों में घबराहट फ़ैल गई. मुम्बई पुलिस के साथ मिलकर क्विक रिस्पांस टीम ने पूरे इलाके को कब्जे में ले लिया और बंदूकों से लैस जवान सर्च ऑपरेशन में जुट गए.
स्थिति तब नियंत्रण में आई जब लोगों को पता चला की ये कोई आतंकी हमला नहीं बल्कि मॉक ड्रिल है. दरअसल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रही मुम्बई पुलिस जगह-जगह इसी तरह मॉक ड्रिल कर रही है.
मॉक ड्रिल से जवानों में सतर्कता और आम लोगों में भी जागरूकता निर्माण करने में मदद मिलती है. हमेशा आतंकियों की हिटलिस्ट पर रहने वाली मुम्बई में अंधेरी मेट्रो स्टेशन काफी अहम और भिडभाड़ वाला इलाका माना जाता है.

मुंबई में पुलिस वालों को मिलेंगे मकान

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महाराष्ट्र में पुलिस कर्मचारियों को मकान देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने पुलिस हाउसिंग सोसायटियों के विकास के लिए चार एफ एसआई देने का प्रस्ताव तैयार किया है। राज्य सरकार मुंबई में काम करने वाले 70 फीसदी पुलिस कर्मियों को मकान देने की योजना तैयार की है। पुलिस कर्मचारियों को मकान देने की जानकारी नगर विकास राज्यमंत्री रणजीत पाटिल ने हाल ही में राज्य विधान परिषद में दी थी।
काम के दबाव से परेशान पुलिस वालों की जीवनशैली में सुधार करने के लिए राज्य सरकार कई तरह की योजनाएं लेकर आ रही है, जिनमें योग और काम के घंटों को नियमित करने जैसी योजनाएं शामिल हैं। पुलिस कर्मचारियों की सबसे बड़ी समस्या अपना मकान न होना है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ले पुलिस हाउसिंग सोसायटियों के पुनर्निर्माण के लिए अतिरिक्त एफ एसआई देने की योजना तैयार की है।
कांग्रेसी नेता नारायण राणे ने पुलिस कर्मचारियों के मकानों का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में पाटिल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य मुंबई में कार्यरत पुलिस वालों को मकान मुहैया कराना है। इसके तहत सांताक्रूज में 700 फ्लैट जल्द ही पुलिस कर्मचारियों को दिए जाएंगे और अगले दो साल में 60 से 70 फीसदी पुलिस कर्मचारियों को मकान उपलब्ध करा दिए जाएंगे। हालांकि इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई की इतने प्लैट सरकार कहां से देगी। 70 फीसदी पुलिस कर्मचारियों को घर देने का मतलब है कि 1.40 लाख फ्लैट तैयार करना।

उपराज्यपाल ने दिखाई 'बॉसगिरी', मंगवाई केजरीवाल सरकार से फाइलें

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नई दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) नजीब जंग और अरविंद केजरीवाल सरकार के बीच टकराव की स्थिति कम होती दिखाई दे रही है. सोमवार को एलजी ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया था कि बीते डेढ़ साल में सरकार ने जितने भी ऐसे फैसले लिए हैं, जिनमें एलजी की मंज़ूरी ज़रूरी थी और नहीं ली गई, उन सभी फैसलों की फाइलें एलजी के पास 17 अगस्त तक भेजी जाएं.
इसके बाद अब दिल्ली सरकार के अधिकारी एलजी के इस आदेश का तुरंत और सख्ती से पालन कराने में जुट गए हैं. दिल्ली की डायरेक्टर (एजुकेशन) सौम्या गुप्ता ने अपने तहत आने सभी विभागों और दफ़्तरों को आदेश जारी कर कहा है कि ‘एलजी के आदेश के मुताबिक़ ऐसे सभी फैसलों, जिनमें एलजी की पूर्व अनुमति ज़रूरी थी, लेकिन नहीं ली गई, से जुड़े मामलों की फाइलें 11 अगस्त तक मेरे पास लेकर आएं’. आदेश में यह भी कहा गया है कि ‘इस आदेश के पालन में कोताही को गंभीरता से लिया जाएगा.’
दिल्ली के गृहमंत्री सत्येंद्र जैन से जब एलजी के इस आदेश के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ‘एलजी दिल्ली सरकार से जुड़ी किसी भी फाइल को मंगा सकते हैं, लेकिन आदेश देने के लिए उन्हें ठीक तरीके से जाना होगा. देखते हैं और उन्हें फाइलों की समीक्षा करने दीजिए.’

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री की संदिग्‍ध हालत में मौत

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अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कलिखो पुल का शव उनके घर में पंखे से लटका मिला. 47 साल के कलिखो पुल के सुसाइड का संदेह जताया जा रहा है.
बताया जा रहा है कि कलिखो पुल ने रात को सुसाइड किया. उस वक्त उनकी पत्नी घर के दूसरे कमरे में थीं. वो मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बावजूद अब भी सीएम बंगले में अपने पांच बच्चों के साथ रह रहे थे. युवा कलिखो पुल इस साल 19 फरवरी से 13 जुलाई तक अरुणाचल के मुख्यमंत्री रहे थे. लेकिन अरुणाचल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा था. बीजेपी के समर्थन से वे राज्य के सीएम बने थे. बताया जा रहा है कि वे कुछ समय से डिप्रेशन में थे.
कलिखो पुल 1995 के बाद से लगातार पांच बार विधानसभा चुनाव जीते थे. अंजॉ जिले के हवाई से आने वाले कलिखो मुख्यमंत्री गेगांग अपांग के कार्यकाल (2003-2007) में वित्त मंत्री रहे. पांच बच्चों के पिता पुल कमान मिश्मी से ताल्लुक रखते थे. इस समुदाय की कुल आबादी लगभग 2,500 है. पुल कई बार मंत्री भी रहे थे. 1995 से 1997 तक वे वित्त उपमंत्री रहे, उसके बाद 1997-99 तक बिजली राज्य मंत्री रहे. इसके बाद 1999-2002 तक वित्त राज्य मंत्री और 2002 से 2003 तक भूमि प्रबंधन के राज्य मंत्री रहे. 2003 से 2005 तक पुल ने वित्त मंत्रालय संभाला. उन्हें एक उच्चस्तरीय समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया था. लगभग एक साल तक वे मुख्यमंत्री के सलाहकार भी रहे.

चंद्रशेखर आजाद के गांव जाएंगे PM मोदी, ऐसा करने वाले पहले प्रधानमंत्री बनेगें

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार (9 अगस्त) को स्वतंत्रता सेनानी चंद्र शेखर आजाद के गांव अलीराजपुर जाएंगे। यह मध्यप्रदेश में हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, मोदी ऐसा करने वाले पहले प्रधानमंत्री होंगे। दरअसल, पीएम वहां जाकर ‘याद करो कुर्बानी’ कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे। इस कार्यक्रम के द्वारा केंद्र सरकार आजादी के 70 सालों का जश्न मना रही है। इसका मकसद ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के 74 साल पूरे होने का जश्न मनाना भी है। चंद्र शेखर आजाद का जन्म अलीराजपुर जिले के भाबरा में हुआ था। यह आदिवासी बहुल इलाका है। मोदी भाबरा से करीब 10 किलोमीटर दूर झोतराड़ा गांव पहुंचेंगे और वहां एक सभा को संबोधित करेंगे।
इंदौर के डिविजनल कमिशनर संजय दुबे ने इस तथ्य की पुष्टि करते हुए PTI को बताया था कि देश को 1947 में स्वतंत्रता मिलने के बाद से अब तक कोई भी प्रधानमंत्री भाबरा में आजाद की जन्मस्थली नहीं पहुंचा है। मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री होंगे, जो वहां पहुंचेंगे।
प्रदेश की मौजूदा भाजपा सरकार ने अमर शहीद के सम्मान में भाबरा का नाम बदलकर ‘चंद्रदशेखर आजाद नगर’ कर दिया था। इसके साथ ही, इस कस्बे के जिस मकान में 23 जुलाई 1906 को आजाद का जन्म हुआ था, उसे स्मारक के रूप में विकसित कर ‘आजाद स्मृति मंदिर’ का नाम दिया था। इस स्मारक में छोटा सा संग्रहालय भी है जिसमें आजाद के जीवन की चित्रमय झलकियां पेश की गयी हैं।
भाजपा के प्रदेश महासचिव अरविंद भदोरिया ने कहा, ‘नौ अगस्त भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि यह हमें देश की कठिनाई की गंभीरता के साथ ही क्रांतिकारी नेताओं की ओर से दिये गए बलिदान की लंबी श्रृंखला भी की याद दिलाता है।यह प्रसन्नता की बात है कि प्रधानमंत्री इस मौके पर अलीराजपुर जिले में आजाद के जन्मस्थान भाबरा में ‘आजादी 70, याद करो कुर्बानी’ अभियान शुरू कर रहे हैं।’
अभियान के तहत नौ से 14 अगस्त तक केंद्रीय मंत्री भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े स्थानों विशेष तौर पर शहीद नेताओं के जन्मस्थान का दौरा करेंगे। इसके अलावा 16 से 22 अगस्त तक स्वतंत्रता संघर्ष की स्मृति में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे, जैसे तिरंगा यात्रा, कैंडल मार्च और रक्षाबंधन त्योहार। भदोरिया ने कहा, ‘प्रधानमंत्री की ओर से संबोधित किये जाने वाले कार्यक्रम में करीब दो लाख लोगों के हिस्सा लेने की उम्मीद है जिसमें अधिकतर आदिवासी होंगे। इसके लिए पर्याप्त इंतजाम किये गए हैं।’’
इस बीच झाबुआ सीट से कांग्रेस के सांसद कांतिलाल भूरिया ने एक बयान में आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री का कार्यक्रम आयोजित करने के नाम पर भाजपा ने स्वतंत्रता संघर्ष में कांग्रेस के योगदान को नजरंदाज करते हुए इसे भगवा रंग दे दिया है।

कश्मीर के आतंकी बुरहान वानी के पोस्टर ट्रेन पर लगाए पाकिस्तान ने

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पाकिस्तान ने पहले कश्मीर में मारे गए हिजबुल आतंकी बुरहान वानी को आजादी के लिए लड़ने वाला करार दिया और अब पाकिस्तान ने आतंकवादी बुरहान वानी की तस्वीर को ‘आजादी स्पेशल ट्रेन’ पर जगह दी है. 14 अगस्त को यह ट्रेन पेशावर से कराची जाएगी.
ट्रेन पर बुरहान वानी की तस्वीर बतौर शहीद लगाई गई है. साथ ही बीते दिनों कश्‍मीर हिंसा में मारे गए लोगों के पोस्टर को भी ट्रेन के बोगियों पर लगाया गया है. पाकिस्तान के साथ ही भारत के कुछ अलगाववादी नेता भी इस भारत विरोधी अभियान में पाकिस्तान सरकार का साथ दे रहे हैं. कश्मीर में रहने वाले अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी ने खुशी जताते हुए ट्रेन की बोगी पर लगे बुरहान वानी के पोस्टर को ट्वीट करते हुए लिखा है, ‘स्पेशल आजादी ट्रेन 14 अगस्त को पेशावर से कराची के लिए रवाना होगी, इस पर कमांडर बुरहान वानी और दूसरों की तस्वीर लगी है.’
इससे पाकिस्तान का दोहरा चरित्र सबके सामने आ गया है. एक तरफ जहां गृह मंत्र‍ियों के सार्क सम्मलेन में उनके स्पीच तक को पाकिस्तान सरकार ने टीवी चैनलों पर ब्लैक आउट कर दिया था, वहीं हाफिज सईद और सलाउद्दीन जैसे आतंकवादि‍यों को खुलेआम पाकिस्तान में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारत को परमाणु युद्घ की खुली धमकी देनी की छूट दे रखी है. आतंकवादी बुरहान वानी के पोस्टर को सरकारी ट्रेन के बोगियों पर चिपका कर शहीद का दर्जा दिया जा रहा है. इससे पाकिस्तान की मंशा साफ झलकती है और पता चलता है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए कितना गंभीर है.

बीमार बच्चे को लेकर जा रहा हेलीकॉप्टर क्रैश, 7 लोगों की मौत

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काठमांडो। नेपाल के नुवाकोट जिले के वन क्षेत्र में एक निजी हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उसमें सवार एक नवजात शिशु समेत सभी सात लोगों की मौत हो गई। यह हेलीकॉप्टर शिशु को इलाज के लिए उसकी मां के साथ काठमांडो ले कर जा रहा था।
गोरखा से उड़ान भरने के बाद द फिशटेल एयर हेलीकॉप्टर का एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर से संपर्क टूट गया। अधिकारियों ने कहा कि हेलीकॉप्टर काठमांडो के 150 किलोमीटर पश्चिम में नुवाकोट जिले में भटिना डांडा में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
नेपाल नागर विमानन प्राधिकरण (कान) ने कहा कि 9एन-एकेए हेलीकॉप्टर में सवार पायलट रंजन लिम्बू सहित सभी सात लोगों की मौत हो गई है। कान के प्रवक्ता देवेंद्र केसी ने कहा कि नेपाल सेना की एक टीम और अन्य बचाव अधिकारियों को दुर्घटनास्थल पर लगाया गया है।
फिशटेल एयर के रमेश शिवकोटी ने कहा कि जांच के बिना हम हादसे का कारण नहीं बता सकते हैं। हादसे के कारणों की अभी तक जांच नहीं हुई है। बता दें, नेपाल में सड़क परिवहन की सुविधा बहुत ही कम होने और सड़क संपर्क सीमित होने के कारण हवाई यात्रा बहुत ही लोकप्रिय है।

जिमनास्टिक में भारत की उम्मीदों का भार दीपा पर

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रियो डि जिनेरियो। जिमनास्टिक में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर इतिहास का पहला अध्याय लिख चुकी दीपा करमाकर कल जब रियो खेलों में उतरेंगी तो उनकी निगाहें नई ऊंचाई को छूने पर लगी होंगी। इस स्पर्धा के लिए क्वालीफाई करने वाली दीपा पहली भारतीय महिला हैं।
सभी तरह की मुश्किलों से लड़कर त्रिपुरा की 22 वर्षीय लड़की ने अप्रैल में इसी स्थान पर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। बेहद मुश्किल प्रोडूनोवा में महारत हासिल करने के लिए उन्होंने अपना सबकुछ झोंक दिया और वह अपने प्रदर्शन के लिए उस पर विश्वास कर रही हैं।
दीपा ने कहा कि उन्होंने इसको करीब 1000 बार किया है। ऐसे में उनके लिए अन्य चीजों में बेहतर करना अहम रहेगा। उनके कोच विश्वेश्वर नंदी ने कहा कि मैंने उसकी कठिन परिश्रम और लगन देखी है। शुरुआत में जब उसने इसमें हाथ आजमाया तो मैं थोड़ा डरा हुआ था लेकिन कभी हार नहीं मानने के उसके जज्बे ने उसमें विश्वास पैदा किया। हम लोगों को सिर्फ ध्यान केंद्रित रखने की जरूरत है।
दीपा राष्ट्रमंडल खेलों (ग्लासगो 2014) में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला जिमनास्ट हैं। इसके बाद उन्होंने हिरोशिमा में हुए एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता और 2015 के विश्व चैंपियनशिप में वह फाइनल राउंड तक पहुंची और प्रतियोगिता में पांचवें स्थान पर रही थी।

रियो ओलंपिक: खेलों की रंगारंग शुरुआत, अभिनव बिंद्रा बने भारतीय दल के फ्लैग बेयरर

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ब्राजील के माराकाना स्टेडियम में शुक्रवार को (भारतीय समयानुसार शनिवार सुबह 4:30 बजे) 31वें ओलम्पिक खेलों का रंगारंग आगाज हुआ। रियो ओलम्पिक खेलों में भारतीय दल का नेतृत्व दिग्गज निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने किया।
इस उद्घाटन समारोह में मेजबान देश ब्राजील की विविध संस्कृति की झलक नजर आई। इस कार्यक्रम के जरिए दुनिया को ग्लोबल वॉर्मिंग के कहर से बचाने का संदेश भी दिया गया।
इस उद्घाटन समारोह से पहले रियो के कोकोवाड़े पहाड़ पर स्थित सबसे बड़ी ऐतिहासिक मूर्ति ‘क्राइस्ट द रीडीमर’ को हरे और नीले रंग में जगमगाते देखा गया।
दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी पेले खराब तबियत के कारण ओलंपिक मशाल को नहीं जला पाए। उनके स्थान पर ब्राजील की महिला बीच वॉलीबॉल खिलाड़ी मारिया इसाबेल बोररोसो सालगडो ने मशाल को प्रज्जवलित किया।
माराकाना स्टेडियम में लाखों की तादाद में बैठे लोगों की आंखों में आतिशबाजी की चमक थी। इस समारोह में ‘सिटी ऑफ गॉड’ के निर्देशक फर्नाडो मेरेलेस, आंद्रुचा वॉशिंगटन और डानिएला थोमस शामिल थे।
साम्बिस्ता पॉलिन्हो डा वॉयला ने मधुर आवाज में ब्राजील का राष्ट्रीय गान ‘हीनो नेक्शनल ब्रासिलिएरो’ गाया।
इस समारोह में ब्राजील के इतिहास की झलक भी देखने को मिली, जिसमें देश का दास व्यापार से संबंधित इतिहास को भी दर्शाया गया और साथ ही पहला विमान बनाने वाले अल्बटरे सांतोस-डुमोंट को भी श्रद्धांजलि दी गई।
समारोह का सबसे महत्वपूर्ण क्षण उस वक्त आया, जब दिवंगत गीतकार, संगीतकार टोम जोबिम के गीत ‘द गर्ल फ्रॉम इपानेमा’ को उनके पोते डेनियल ने गाया। इसके साथ ही सुपरमॉडल गिजेल बुंडचेन को मंच पर कैटवॉक करते देखना भी दिलचस्प था।
इसके अलावा अन्य प्रस्तुतियों में दिग्गज साम्बा गायक एल्जा साआरेस की प्रस्तुति और कारोल कोनका और 12 साल के बच्चे एम.सी सोफिया का हिपहॉप डांस शामिल था, जो ब्राजील के अश्वेत समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
विभिन्न प्रस्तुतियों के बाद ‘परेड ऑफ द नेशन्स’ ने समां बांध दिया, जिसमें ओलम्पिक खेलों में भाग लेने वाले दलों के 207 सदस्य शामिल थे। इसमें ओलम्पिक समिति में पहली बार शामिल हो रहे कोसोवो और दक्षिण सूडान के भी सदस्य शामिल थे।
इस बार ओलम्पिक खेलों में सीरिया, दक्षिण सूडान, इथोपिया और कोंगो की 10 सदस्यीय शरणार्थी ओलंपिक टीम भी हिस्सा ले रही हैं जिनका जोरदार स्वागत किया गया।

कमजोर कहानी और स्लो थ्रिलर है 'फीवर'

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एक इंसान नींद से जगता है। उसे अपने बारे में कुछ याद नहीं है। पहचान से संबंधित कोई चीज भी नहीं है। वो क्या करे, किससे अपने बारे में पूछे। बहुत जोर लगाया, लेकिन कुछ याद नहीं आ रहा।
फिल्म ‘फीवर’ का ये प्लॉट अंग्रेजी फिल्म ‘बॉर्न आईडेंटिटि’ (2002) से मिलता-जुलता है। या कहिये पूरी बॉर्न सिरीज की अवधारणा ही इस प्लॉट के आसपास घूमती रही है। फिल्म की कहानी एक एक्सीडेंट से शुरू होती है। एक इंसान अस्पताल में बेहोशी से जगा है। डॉक्टर उसके बारे में कुछ नहीं जानते। वो खुद भी अपने बारे में कुछ नहीं जानता। सिर्फ कुछ हल्की सी परछाइयां है, जिनका पीछा करते हुए वह व्यक्ति अपने बारे में केवल इतना जान पाता है कि वह ज्यूरिख जा रहा था।
घटना के अगले दिन होटल में उसे एक लड़की मिलती है, जो उसे अपना नाम काव्या चौधरी (गौहर खान) बताती है। उस व्यक्ति के हाथ में एक घड़ी है, जिससे वह अंदाजा लगाता है कि उसका नाम आर्मेन सलेम है और वह एक कॉन्ट्रेक्ट किलर है। उसे लगता है कि उसके हाथों किसी लड़की रिया (गेमा एटकिन्सन) का खून हुआ है। रहस्यमयी परिस्थितियों में काव्या और आर्मेन एक-दूजे के करीब आने लगते हैं। एक दिन आर्मेन को लगता है कि उसे कोई करण नाम से पुकार रहा है।
उसे लगता है कि उसका असली नाम करण ही है। काव्या की नजदीकियों से उसे अपने बारे में कुछ और बातें पता चलती हैं, जैसे कि वह रिया को प्यार करता था। लेकिन वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाता। इधर काव्या की मौजूदगी दिन ब दिन और रहस्यमयी होती जाती है और एक दिन आर्मेन उर्फ करण को सब याद आ जाता है। वो जान कर हैरान हो जाता है कि काव्या का असली नाम पूजा है और वो उसकी पत्नी है।
ऐसा कतई नहीं है कि इतनी कहानी से एक सस्पेंस थ्रिलर के सारे राज खुल गए हैं। कहानी में अभी बहुत कुछ ऐसा है, जिसे बयां नहीं किया गया है। बावजूद इसके फिल्म ज्यादा बांध नहीं पाती। दो घंटे की यह फिल्म जरूरत से ज्यादा स्लो है। रोचकता का अभाव है।
राजीव खंडेलवाल अच्छे अभिनेता हैं, लेकिन वह करण के किरदार को ढंग से निभा नहीं पाए। लेखन में भी कई कमियां हैं। अंत में जिस तरह से इस पूरी कहानी का अस्तित्व और कारण गिनाए गए हैं, उसे देख लगता है कि इसे जबरदस्ती सस्पेंस-थ्रिलर का जामा पहनाया गया है। विदेशी तारिकाएं हिन्दी बोलते हुए अजीब लगती हैं। ऐसा लगता है कि उन्हें अंग-प्रदर्शन के लिए फिल्म में लिया गया है।
गौहर खान का किरदार भी आंखों को सूकून देने के अलावा कुछ और नहीं है। जिस तरह का विषय है, फिल्म में तनाव नाम की कोई चीज नहीं है। ऐसा लगता है कि सब छुट्टियां मनाने आए हैं। बस संगीत अच्छा है। ‘फीवर’ अपने कॉन्सेप्ट से आकर्षित करती है, लेकिन कुछ देकर नहीं जाती। अंत में फिर एक बात। फिल्म का नाम ‘फीवर’ क्यों रखा गया है…