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बिहार टॉपर्स घोटाले में अब आया पूर्व जेडीयू एमएलए का नाम, 12 साल की उम्र में ही कर ली थी ग्रेजुएशन

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बिहार के टॉपर्स घोटाले में एक और नया खुलासा हुआ है, अभी तक बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर सिंह को ही इस घोटाले का मुख्य सूत्रधार मानकर चल रही पुलिस को अब उसकी पूर्व विधायक पत्नी के खिलाफ भी पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं।

जेडीयू के टिकट पर गया जिले की हिलसा सीट से दो बार विधायक रही लालकेश्वर ‌की पत्नी उषा सिंह अपने करीबियों के माध्यम से बोर्ड परीक्षा में पास और फेल कराने के इस रैकेट को संचालित करती थी। पति पत्नी की यह जोड़ी बिहार की राजनीति के साथ ही शिक्षा क्षेत्र में भी काफी रसूख रखती थी।

उषा सिंह के बारे में हुए एक और चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि उसने फर्जी डिग्रियों के माध्यम से कालेज में शिक्षक की नौकरी पाई ‌थी। वहीं सवाल चुनाव के दौरान आयोग को दिए गए उसके हलफनामे पर भी है। वहीं मामले के दूसरे मुख्य आरोपी बच्चा राय से भी इस दंपति की काफी नजदीकी सामने आई है।

मामले की तलाश में लगी एसआईटी ने दो दिन पूर्व लालकेश्वर प्रसाद सिंह और उषा सिंह के घर पर छापामारी की थी। इस दौरान पति पत्नी दोनों फरार मिले, लेकिन पुलिस को उनके घर की तलाशी में काफी महत्वपूर्ण सबूत हाथ लगे हैं।

जिसके बाद पुलिस का दावा है कि पास और टॉप कराने के इस रैकेट में पति लालकेश्वर के साथ उषा सिंह की भी बराबर की भागीदारी थी। उषा सिंह के लिए बोर्ड का सारा काम उसके दो नजदीकी लोग देखते थे, वो ही शिकार की तलाश करके इनके पास लाते और फिर सेटिंग का सारा खेल चलता था। पुलिस ने अभी तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया है।

लालकेश्वर और उनकी पत्नी उषा सिंह का बिहार की राजनीति के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी रसूख था। लालकेश्वर बोर्ड अध्यक्ष बनने से पहले जहां पटना कालेज में प्रधानाचार्य पद पर थे वहीं उनकी पत्नी दो बार विधायक रहने से पूर्व और हाल फिलहाल पटना स्थित गंगा देवी महिला महाविद्यालय की प्राचार्या भी थी।

उनके रसूख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब तक उषा सिंह विधायक रही जब तक वह कालेज से अनिश्चितकालीन छुट्टी पर रहीं और जब इस बार उन्हें जेडीयू से टिकट नहीं मिला तो वापिस कालेज आकर प्रधानाचार्या पद की कुर्सी संभाल ली।

इसके अलावा वह संस्कृत बोर्ड में भी सदस्य थीं। उषा सिंह के बारे में एक चर्चा ये भी है कि उन्होंने फर्जी डिग्रियों के माध्यम से कालेज में लेक्चरर का पद पाया था जिससे वह प्रधानाचार्या के पद तक पहुंची। मीडिया में चल रही खबरों के अनुसार उषा सिंह ने उत्तर प्रदेश के जिस विश्वविद्यालय से साल 1976 में एमए किया था वह तो कहीं अस्तित्व में ही नहीं है।

साल 2010 के विधानसभा चुनावों में दिए हलफनामे में उषा सिंह ने अपनी योग्यता 1973 में गोरखपुर से बीए-बीएड और 1976 में आमोध विश्वविद्यालय से एमए और 1984 में मगाध विश्वविद्यालय से पीएचडी करना बताया है। सवाल उनके एमए करने के लेकर है क्योंकि जिस आमोध विश्‍वविद्यालय से उन्होंने अपनी डिग्री बताई है वो कहीं है ही नहीं।

इसके अलावा उनके द्वारा दी गई एक और जानकारी पर भी सवाल उठ रहा है हलफनामे में दी गई उनकी इस जानकारी पर यकीन करें तो उन्होंने आठ साल की उम्र में दसवीं और दस साल की उम्र में 12वीं की परीक्षा पास कर ली थी।

सूत्रों के अनुसार उन्होंने 2010 में हिलसा सीट से विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन करते समय अपनी उम्र 49 साल बताई ‌थी। जिसके अनुसार उनका जन्म का वर्ष 1961 बैठता है। वहीं हलफनामे के अनुसार उन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा 1969 में और इंटरमीडिएट की 1971 में पास कर ली थी।

अब अगर उनके हलफनामे पर यकीन किया जाए तो उसके अनुसार उन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा मात्र आठ साल में ही पास कर ली थी और इंटर की परीक्षा मात्र दस साल की उम्र में। इसी तरह 1973 में मात्र 12 साल की उम्र में उनकी ग्रेजुएशन और 15 साल की उम्र में उनकी पीजी कंपलीट हो गई थी।

हलफनामे का सच क्या है यह तो उषा सिंह की बता सकती हैं लेकिन वह पुलिस की पकड़ से दूर चल रही हैं। माना जा रहा है कि पति पत्नी की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले से कुछ बड़े रहस्य बेपर्दा हो सकेंगे।

कैराना पर बोलीं मेनका, एक दिन सब छोड़ देंगे यूपी

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यूपी के शामली जिला के कैराना में हिंदुओं के पलायन के मामले पर सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने यूपी सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि ऐसे हालात रहे तो राज्य से सभी लोग पलायन कर जाएंगे। वहीं इस मामले पर शामली के ASP का कहना है कि प्रशासन ने 150 परिवारो की जांच की है, जिसमें से सभी परिवारों ने किसी निजी काम या कारोबार की वजह से पलायन करने की बात कही है।

ASP के मुताबिक हिन्दुओं के साथ साथ मुस्लिम परिवार भी कैराना से गए हैं। वहीं कैराना मामले पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि इस मामले में राज्य सरकार पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है…वहीं, कैराना से बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने इन परिवारों के मुखिया के नाम की लिस्ट जारी की। उन्होंने दावा किया है कि ये लोग डर और जान बचाने के लिए अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए जबकि बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि कैराना को कश्मीर बनाने की कोशिश की जा रही है।

इलाहाबाद में बीजेपी कार्यकारिणी की बैठक में कैराना मुद्दा गर्माने के बाद वहां पहुंचे नेताओं की तरफ से भी प्रतिक्रिया आनी शुरू हुई। आंवला से सांसद और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने राज्य सरकार पर हमला किया और कहा कि एक वक्त ऐसा भी आएगा जब सभी लोग यूपी छोड़ना चाहेंगे। उन्होंने कहा, ‘मैं सांसद हूं और मुझे दिन में 10 या 15 फोन आते हैं… कोई कहता है कि मेरी बेटी का अपहरण हो गया है, कोई कहता है, गाय कटने जा रही है, पुलिस कुछ नहीं कर रही है।’

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि पुलिस का राजनीतिकरण करके हमने अच्छा नहीं किया। शर्म नाम की चीज यहां की सरकार में है ही नहीं। अगर राष्ट्रपति शासन लगाने से कोई फायदा हो तो मैं कहूंगी कि लगा देना चाहिए।

यूपी के कैराना में हिंदुओं के पलायन मुद्दे पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजीजू ने बयान दिया। रिजीजू ने अभी तक की खबर पर चिंता जताई और कहा कि राज्य सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इसपर एक आधिकारिक रिपोर्ट भी भेजनी चाहिए।

कैराना से सैकड़ों हिंदू परिवारों के पलायन पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सख्त रुख अपनाने और शनिवार को आईबी के पहुंचने के बाद तेजी से हरकत में आए प्रशासन ने दो ही दिन में 150 परिवारों का सत्यापन कर लिया। हालांकि इस सत्यापन में पलायन के क्या कारण सामने आये, इस पर प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। तर्क है कि समग्र रिपोर्ट डीएम को जल्दी ही सौंप दी जाएगी। इस बारे में शासन स्तर से ही कुछ कहा जाएगा।

वहीं, इस मुद्दे को उठाने वाले बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से मिली जानकारी के बाद ही यह सूची जारी की। उन्होंने कहा, ‘मैंने प्रमाणिकता की जांच की और पाया कि लिस्ट सही है। एक और दो नाम गलत हो सकते हैं लेकिन व्यापक रूप से यह सही है।

केंद्रीय मंत्री और गौतमबुद्धनगर से सांसद महेश शर्मा ने कहा कि कैराना की घटना को बिल्कुल अलग तरह से देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अखिलेश को इस्तीफा दे देना चाहिए और राष्ट्रपति को कार्रवाई करनी चाहिए।

जोधपुर में इमारत पर गिरा मिग 27, दोनों पायलट सुरक्षित

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जोधपुर: जोधपुर में एक मिग27 विमान गिर गया। इसमें सवार दोनों पायलट सुरक्षित हैं। यह विमान एक इमारत पर गिरा, जिसमें दो या तीन लोगों के घायल होने की खबर है। वायुसेना ने कोर्ट ऑफ इनक्वायरी के आदेश दे दिए हैं। यह विमान ट्रेनिंग मिशन पर था।

यह विमान रनवे से 7 किलोमीटर दूर एक इमारत पर 11.32 मिनट पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इंजन फेल होने की वजह से इसकी इमरजेंसी लैंडिंग की कोशिश की जा रही थी।

गौरतलब है कि यह काफी पुराना विमान है। यह अपनी आखिरी सांसें गिन रहा था। इसे अपग्रेड करके उड़ाया जा रहा था। यह विमान रूस में बना था।

NSG : चीन को उसी की 'भाषा' में समझाने में जुट गए पीएम मोदी

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तू डाल डाल तो मैं पात पात…’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब चीन को उसी की भाषा में समझाने की पहल शुरू कर दी है. मामला है न्‍यूक्लियर सप्‍लाई ग्रुप में एंट्री का.

चीन की ये मुराद की भारत की एनएसजी में एंट्री न हो, इसे लेकर पीएम मोदी अब सख्‍त हो गए हैं. उन्‍होंने इस बाबत रूस से मदद मांगी है. बकायदा पीएम ने रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की और उनसे कहा कि वह भारत का एनएसजी ग्रुप में एंट्री का समर्थन करता रहे.

रूस की तरफ से जारी किए गए बयान में बताया गया है कि, ‘भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से शनिवार को फोन आया था. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए व्यापक सहयोग पर बात की, दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी भी रही है.’ मोदी और पुतिन के बीच जल्द ही मुलाकात होने की संभावना भी जताई जा रही है.
हाल ही में प्रधानमंत्री को पांच देशों के दौरे के बाद एनएसजी के मुद्दे पर भारत के लिए समर्थन जुटाने में कामयाबी हासिल हुई है. अमेरिका और मैक्सिको ने भारत का एनएसजी पर खुलकर समर्थन किया.

दरअसल चीन और पाकिस्तान ने भारत की न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप में एंट्री रोकने के लिए हाथ मिलाया है. बीजिंग ने पाक का सपोर्ट करते हुए कहा है कि एनएसजी में भारत और पाकिस्तान दोनों देशों को एंट्री मिले या किसी को भी नहीं. चीन ने भारत को रोकने के लिए पाकिस्तान की नॉन-स्टार्टर पोजिशन का इस्तेमाल किया है. एनएसजी के सूत्रों की मानें तो चीन और पाकिस्तान, भारत की एंट्री रोकने के लिए साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

US में 9/11 के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला, गूंजी गोलियों की आवाज

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ओरलैंडो : फ्लोरिडा के ओरलैंडो स्थित एक ‘गे क्लब’ में भारी हथियारों से लैस हमलावर ने शनिवार की देर रात अंधाधुंध गोलियां चलाये जाने और कुछ लोगों को बंधक बना लेने के हादसे में 50 लोग मारे गये, जबकि 53 अन्य अस्पताल में भरती हैं. पुलिस का कहना है कि अमेरिका के इतिहास में अब तक का यह सबसे भयावह गोलीबारी कांड है. ओरलैंडो के मेयर बडी डेयर ने घटना की पुष्टि की है. मीडिया के अनुसार हमलावर अफगान मूल का अमेरिकी नागरिक था. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसे आतंकी हमला करार दिया है.

एफबीआइ अधिकारी रोनाल्ड हॉपर ने कहा कि हमें विश्वास है कि क्षेत्र में या अमेरिका को फिलहाल कोई आसन्न खतरा नहीं है. ओरलैंडो में आपात स्थिति घोषित कर दी है. फ्लोरिडा सरकार से पूरे राज्य में ऐसे ही कदम उठाने का अनुरोध किया है. संघीय सरकार ने जांच में अपनी ओर से पूर्ण सहयोग की पेशकश की है. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हादसे में मारे गये सभी लोग हमलावर की गोलियों से मरे हैं, या फिर मुठभेड़ के दौरान पुलिस की ओर से चलायी गयी गोलियों से. हमला ऐसे वक्त में हुआ है, जब अमेरिका में ‘गे प्राइड’ महीना मनाया जा रहा है.
फ्लोरिडा के अफसरों ने मीडिया से बातचीत करने के लिए एक स्थानीय इसलामी नेता को बुलाया है, ताकि मुसलिम समुदाय के खिलाफ किसी प्रकार का गुस्सा फूटने से रोका जा सके.
शनिवार को अमेरिकी समय के मुताबिक रात करीब दो बजे, क्लब बंद होने वाला था, तभी वहां संगीत के साथ-साथ गोलियों की आवाज गूंजी. भारी हथियार व एक बंदूकों से लैस हमलावर ने गोलियां चलायीं. फिर पुलिस और हमलावर के बीच मुठभेड़ शुरू हो गयी. इस बीच हमलावर क्लब के भीतर घुस गया और वहां और गोलियां चलीं. यह बंधकवाली स्थिति में बदल गया. रविवार की सुबह करीब पांच बजे, अंदर मौजूद बंधकों को छुड़ाने का फैसला लिया गया. पुलिस ने विस्फोटक व बख्तरबंद गाड़ी‘बीयरकैट’ की मदद से क्लब की दीवार गिरायी व अंदर घुसे. अभियान में करीब 30 लोगों को बाहर निकाला गया.

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि फ्लोरिडा के ओरलैंडो के एक नाइटक्लब में हुई ‘‘भयावह’ अंधाधुंध गोलीबारी एक ‘‘आतंकी’ और ‘‘नफरत’ का कृत्य है. उन्होंने अपने देश के लोगों को बंदूकों तक आसान पहुंच की भी याद दिलाई. ओबामा ने कहा, ‘‘यह एक आतंकी और नफरत का कृत्य था.’ उन्होंने यह भी कहा कि एफबीआई इसे आतंकवादी घटना मानकर जांच कर रही है. बहरहाल, पत्रकारों से ओबामा ने कहा कि इस गोलीबारी के पीछे की वजह का अब तक सही-सही कुछ पता नहीं चल सका है. ओबामा ने कहा, ‘‘यह समलैंगिक समुदाय के लिए दिल तोडने वाला दिन है.’ उन्होंने कहा, ‘‘गोलीबारी अमेरिकी इतिहास की सबसे जानलेवा गोलीबारी है.’ उन्होंने यह भी कहा कि यह इस बात की भी याद दिलाता है कि ऐसी हिंसा के लिए किसी को कितनी आसानी से बंदूकें मिल जाती हैं. ओबामा ने कहा कि अमेरिका के लोगों को तय करना होगा कि ‘‘क्या हम एक ऐसा देश बनना चाहते हैं’ जहां बंदूकों तक आसान पहुंच हो.’ उन्होंने कहा, ‘‘हम डरने वाले नहीं हैं. इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.’ यह 15वीं बार है जब ओबामा ऐसी गोलीबारी के बाद राष्ट्र को संबोधित करने सामने आए हों.
इस बीच, फ्लोरिडा में हुई गोलीबारी के बाद इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ओबामा को शोक संदेश भेजा. नेतन्याहू ने कहा कि ओरलैंडों में समलैंगिक समुदाय पर हुए भयावह हमले के बाद मैं इस्राइल के लोगों और सरकार की तरफ से अमेरिका के लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. उन्होंने कहा कि दुख की इस घडी में इस्राइल अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खडा है. पोप फ्रांसिस ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह ‘‘हिंसक मूर्खता और बेमतलब नफरत’ है. ‘होली सी’ से जारी एक बयान में कहा गया कि इस घटना ने पोप फ्रांसिस और हम सब में खौफ और निंदा की भावनाएं भर दी हैं. यह हिंसक मूर्खता और बेमतलब नफरत है.

हार के लिए मतदान

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चौंकाने वाली जीत और हार आमतौर पर सीधे चुनावों में देखी जाती है. अप्रत्यक्ष रूप से होने वाले राज्य सभा चुनावों में ऐसा कम होता है और जब होता है तो यह अक्सर आपसी कलह और संदिग्ध किस्म के बाहरी प्रभाव की कहानी कहता है. हालिया राज्य सभा चुनावों के आखिरी दौर में हरियाणा में कांग्रेस और कर्नाटक में जनता दल (सेकुलर) को उनके ही विधायकों ने झटका दे दिया. इन दलों के नेतृत्व ने जो रणनीति बनाई थी वह धरी की धरी रह गई. नेतृत्व के फैसलों से असंतुष्ट विधायकों ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार की हार सुनिश्चित कर दी.

हरियाणा में चेतावनी के संकेत पहले ही मिल गए थे. लेकिन भाजपा द्वारा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार और मीडिया क्षेत्र के दिग्गज सुभाष चंद्रा को किसी भी कीमत पर हराने को आतुर कांग्रेस हाईकमान ने इनकी उपेक्षा की. वरिष्ठ अधिवक्ता आरके आनंद को जिताने के लिए पार्टी नेतृत्व का इंडियन नेशनल दल से हाथ मिलाना कांग्रेस की हरियाणा इकाई के लिए झटका था. दोनों पार्टियां राज्य में एक-दूसरे की धुर विरोधी रही हैं. कांग्रेस हाईकमान और राज्य इकाई के हित आपस में टकरा रहे थे. हाईकमान इस पर अड़ा था कि राज्य सभा में भाजपा की सीटों में एक की ही सही पर कमी आए. लेकिन पार्टी के विधायक हरियाणा के सियासी रण के समीकरणों को लेकर ज्यादा फिक्रमंद थे.

कांग्रेस के लिए स्थिति इसलिए और खराब हो जाती है कि यह बागी विधायकों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं है. जिन 15 विधायकों ने जानबूझकर अपने वोट अवैध करवाए उन्हें पार्टी की राज्य इकाई के एक बड़े धड़े का समर्थन हासिल है जिसकी अगुवाई पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुडा कर रहे हैं. अब सुनने की बारी कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व की है.
कर्नाटक में कांग्रेस के लिए हालात उलट रहे जहां उसे दूसरी पार्टी में पड़ी फूट का फायदा मिला. जनता दल (सेकुलर) में बगावत का इतिहास पुराना है. यहां क्रॉस वोटिंग का लेना-देना उम्मीदवार के चयन से ज्यादा पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली से था. बागी विधायकों में से कुछ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी माने जाते हैं जो पहले खुद भी जनता दल (सेकुलर) में थे. फिर भी उनकी बगावत का मतलब कांग्रेस से लगाव नहीं बल्कि अपनी पार्टी के नेतृत्व को संदेश देना है. उत्तर प्रदेश में भी गुजराती मूल की कारोबारी प्रीति महापात्रा के पक्ष में कुछ क्रॉस वोटिंग हुई जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी समझा जाता है. हालांकि कांग्रेस के आधिकारिक प्रत्याशी कपिल सिब्बल यहां से जीतने में सफल रहे. अतीत में राज्य सभा चुनाव के कुछ उदाहरणों की तरह इस बार भी अमीर उम्मीदवारों को हर पार्टी से वोट मिलने की खबरें हैं. इससे यह धारणा और मजबूत होती है कि संसद के उच्च सदन के चुनाव में पैसे का असर जारी है.

कोहिनूर 10 लाख करोड़ के उस कर्ज के सामने कुछ भी नहीं जो ब्रिटेन ने हमें वापस नहीं किया

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कोहिनूर को तो शायद हमने ही अंग्रेजों को हमेशा के लिए दिया था पर दूसरे विश्वयुद्ध में आज के मुताबिक जो करीब 10 लाख करोड़ रुपयों का कर्ज ब्रिटेन ने हमसे लिया था, उसका क्या हुआ?
पिछले साल नौ मई को दूसरे विश्वयुद्ध में मित्र राष्ट्रों की विजय की 70वीं जयंती मनाई गई. अमेरिका जैसे कई देशों के बहिष्कार के बीच मॉस्को में हुए इस आयोजन में भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी मौजूद थे. रूस पर इस युद्ध की मार सबसे ज्यादा पड़ी थी. दुनिया भर में चली इस लड़ाई में कुल मिला कर जो छह करोड़ लोग मरे थे, उनमें से दो करोड़ तत्कालीन सोवियत संघ के सैनिक व निवासी थे.

दूसरे विश्व युद्ध की मार भारत पर भी कम नहीं पड़ी थी. आंकड़े बताते हैं कि करीब 25 लाख भारतीय सैनिकों ने इसमें हिस्सा लिया था. लड़ाई के दौरान इनमें 24 हजार से भी ज्यादा मारे गए. घायल या लापता होने वालों की संख्या इससे करीब तिगुनी थी. लड़ाई का खर्च गुलाम भारत के करदाताओं ने भी उठाया. आज के हिसाब से देखा जाए तो भारत ने ब्रितानी हुकूमत को जो रकम लडाई के लिए दी थी, वह आज 150 अरब डॉलर (करीब नौ लाख 75 हजार करोड़ रुपये) से कम नहीं होगी. लेकिन न तो भारत ने कभी यह उधार वापस मांगा, न ही ब्रिटेन ने कभी इसकी कोई चर्चा की.

दूसरे विश्व युद्ध में भारत के करीब 25 लाख सैनिकों ने हिस्सा लिया था. इनमें 24 हजार से भी ज्यादा मारे गए. घायल या लापता होने वालों की संख्या इससे करीब तिगुनी थी.
जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ़ हिटलर ने एक सितंबर 1939 की सुबह पौने पांच बजे पोलैंड पर अकारण हमला कर जब द्वितीय विश्वयुद्ध छेड़ा था, तब भारत अंग्रेज़ों का उपनिवेश था. भारत का इस युद्ध से कुछ लेना-देना नहीं था. तब भी उसे बहुत कुछ देना पड़ गया. दो ही दिन बाद तीन सितंबर को दिन में 11 बजे ब्रिटेन ने और पांच बजे फ्रांस ने भी जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी. दोनों देश पोलैंड की स्वाधीनता के संरक्षक थे. इसी दिन भारत की ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार की ओर से वाइसरॉय लॉर्ड लिनलिथगो ने कांग्रेस पार्टी और मुस्लिम लीग के नेताओं और देश की जनता को बताया कि भारत भी जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की स्थिति में है, उसे ब्रिटेन के हाथ मज़बूत करने होंगे.

जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी ने भारत पर थोपी गई इस एकतरफा युद्ध-घोषणा का ज़ोरदार विरोध किया. उनका कहना था कि ब्रिटेन यदि भारतीय जनता का समर्थन चाहता है तो उसे पहले बताना होगा कि युद्ध खत्म होने के बाद भारत के प्रति उसके ‘लक्ष्य और आदर्श’ क्या होंगे. दरअसल ब्रिटिश सरकार प्रथम विश्व युद्ध के समय भी स्वतंत्रता का प्रलोभन देकर भारत को युद्ध में घसीट चुकी थी. कांग्रेस के नेता फिर किसी झांसे में नहीं आना चाहते थे.

ब्रिटेन का साथ नहीं देने की नेहरू-गांधी की नीति और 1942 में महात्मा गांधी के ‘अंग्रेज़ों भारत छोड़ो’ आंदोलन के बावजूद भारत के 25 लाख से अधिक लोग ब्रिटिश सेना में भर्ती हो कर द्वितीय विश्व युद्ध के एशियाई, यूरोपीय और अफ्रीकी मोर्चों पर लड़े. 30 अप्रैल 1945 को हिटलर द्वारा बर्लिन के अपने बंकर में आत्महत्या कर लेने के एक ही सप्ताह बाद आठ मई को जर्मन सेना ‘वेयरमाख़्त’ के तीन उच्च कमांडरों ने बिना शर्त आत्मसमर्पण के दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए. इसके साथ ही यूरोप में युद्ध का अंत हो गया. लेकिन एशिया में लड़ाई तब तक चलती रही जब तक छह अगस्त 1945 को हिरोशिमा और नौ अगस्त को नागासाकी पर गिरे अमेरिकी परमाणु बमों ने जापान को तीन सितंबर 1945 के दिन विधिवत आत्मसमर्पण करने पर विवश नहीं कर दिया.
द टेलीग्राफ में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि युद्ध का अंत होते-होते ब्रिटेन पर कुल तीन अरब पाउंड-स्टर्लिंग का जो कर्ज चढ़ गया था उसमें 1.24 अरब की रकम भारत से आई थी.
यह युद्ध तब तक 24,348 भारतीय सैनिकों के प्राणों की भी बलि ले चुका था. 64,354 घायल हुए और 11,754 का कोई पता नहीं चला. जापान में रासबिहारी बोस, जर्मनी में नेताजी सुभाषचंद्र बोस और मलाया-सिंगापुर में कैप्टन मोहन सिंह ने ब्रिटिश सेना से पलायन करने वालों या जापानियों और जर्मनों द्वारा युद्धबंदी बनाये गये भारतीय सैनिकों को मिला कर लगभग 40 हज़ार सैनिकों की एक ‘आज़ाद हिंद फ़ौज़’ बनाई थी. यह फौज ही नेताजी बोस के नेतृत्व में अंग्रेज़ों से लड़ते हुए भारत की पूर्वी सीमा तक पहुंच गयी थी. ये फ़ौज़ी तब तक लड़ते रहे, जब तक जापान ने अमेरिकी परमाणु बमों की मार से हार कर घुटने नहीं टेक दिये.

1914 से 1918 तक चले प्रथम विश्वयुद्ध की तरह दूसरे विश्वयुद्ध के समय भी भारतीय सैनिकों की संख्या सभी मित्र राष्ट्रों के सैनिकों के बीच सबसे अधिक थी. इस बार भी इन सैनिकों के खाने-पीने, अस्त्र-शस्त्र और लड़ने का सारा ख़र्च गुलाम भारत के करदाताओं को उठाना पड़ा. उस समय ब्रिटिश मुद्रा पाउन्ड-स्टर्लिंग के कुल भंडार का एक-तिहाई भारत के पास हुआ करता था. ब्रिटेन की सरकार ने उसमें से जो धन निकाला या उधार लिया, उसे कभी नहीं लौटाया. स्वतंत्र भारत की सरकारें इतनी दानवीर निकलीं कि उन्होंने इस पैसे का न कभी हिसाब-किताब मांगा और न ही कभी इसे लौटाने की बात की. ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि युद्ध का अंत होते-होते ब्रिटेन पर कुल तीन अरब पाउंड-स्टर्लिंग का जो कर्ज चढ़ गया था उसमें 1.24 अरब भारत से आया था. आज के हिसाब से देखा जाए तो यह आंकड़ा 150 अरब डॉलर से कम नहीं होगा.

इस प्रसंग में इस समय कर्ज के बोझ से कराह रहे यूनान (ग्रीस) का उदाहरण लिया जा सकता है. उसका जर्मनी के साथ एक प्रमुख झगड़ा यह है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जर्मनी ने यूनान पर क़ब्ज़ा करके वहां के राष्ट्रीय बैंक से ज़बरदस्ती जो उधार लिया था, उसे आज तक लौटाया नहीं. इस उधार और युद्ध के कारण हुए नुकसान को यूनानी वित्त मंत्रालय आज 279 अरब यूरो के बराबर बताता है. जबकि यूनान पर आज जो बाहरी कर्ज है, वह कुल मिलाकर 240 अरब यूरो के बराबर है. दूसरे शब्दों में, जर्मनी यदि वह क्षतिपूर्ति कर दे तो यूनान अपने सारे ऋणभार से मुक्त हो जाये. भारत में विदेशी बैंकों में रखे काले धन को लेकर चौतरफ़ा गुहार तो है, पर दूसरे विश्वयुद्ध में ब्रिटेन ने गुलाम भारत से जो उधार लिया उसे लौटाने की बात कभी किसी ने नहीं की.

फ्रांस ने जीत के साथ किया यूरो कप का आगाज, रोमानिया को 2-1 हराया

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पेरिस। फुटबॉल-प्रेमियों का इंतजार खत्म हुआ और रंगारंग प्रस्तुतियों के बीच यूरो कप 2016 का आगाज हो गया। कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुए इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में पहला मैच फ्रांस और रोमानिया के मध्य खेला गया।

फ्रांस ने ग्रुप ए के पहले मैच में रोमानिया पर 2-1 से जीत हासिल कर विजय अभियान का आगाज किया। फ्रांस को यह जीत मैच के आखिरी मिनटों में दिमित्री पाएट के गोल की वजह से मिली।
मैच के 89वें मिनट में दिमित्री ने यह गोल दागा। फर्स्ट हाफ तक दोनों टीमों की ओर से कोई गोल नहीं हुआ था। मैच का पहला गोल 58वें मिनट में फ्रांस के ओलिवर ने हेडर की मदद से किया।
इस गोल के साथ फ्रांस ने 1-0 की बढ़त बना ली थी। हालांकि बढ़त ज्यादा देर तक नहीं रही और 65वें मिनट में रोमानिया को पेनल्टी शूटआउट मिला और स्टेकियू ने गोल कर मैच 1-1 की बराबरी पर ला दिया था, लेकिन मैच के बाकी समय में रोमानिया की टीम संघर्ष करती नजर आई। जिसका फायदा फ्रांस की टीम ने उठाया और आखिरी मिनट में दिमित्री ने गोल दाग कर 2-1 से जीत दिलाई।

यूरो फुटबॉल कप 2016 के लिए आज दो मैच खेले जाएंगे। टूर्नामेंट का दूसरा मैच भारतीय समयानुसार शाम 6.30 बजे ग्रुप ए की टीम स्विट्जरलैंड और अल्बानिया के बीच होगा। तीसरा मैच ग्रुप बी की टीम वेल्स और स्लोवाकिया के बीच रात 9.30 बजे से होगा।

समय से पहले रिलीज होगी पुलकित-यामी की फिल्म 'जुनूनियत'

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बॉलीवुड एक्टर पुलकित सम्राट और यामी गौतम स्टारर फिल्म ‘जुनूनियत’ 24 जून को रिलीज होने के बजाय अब 17 जून को रिलीज होगी. फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने इसे बिना किसी कट के मंजूरी दे दी है.

फिल्म निर्देशक ने बताया, ‘हम पहले से ही फिल्म के साथ तैयार थे. फिल्म के गाने काफी लोकप्रिय हुए हैं. फिल्म को लेकर काफी एक्साइटमेंट है, इसलिए हमने इसे पहले ही रिलीज करने का फैसला लिया.’

उन्होंने कहा, ‘फिल्म को समय से पहले रिलीज करना पोस्टपोन करने से बेहतर है. इससे फिल्म निर्माता का फिल्म के प्रति आत्मविश्वास का पता चलता है. हमें सेंसर बोर्ड से बिना किसी कट के ‘यू’ सर्टिफिकेट मिला. सेंसर बोर्ड ने कहा कि हम चाहते हैं कि ज्यादातर निर्देशक ऐसी खूबसूरत फिल्में बनाएं.’

दाऊद मामले में खड़से को क्लीन चिट

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मुंबई एटीएस ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री एकनाथ खड़से को क्लीन चिट देते हुए कहा है कि उनके मोबाइल पर पिछले एक महीने में कोई अंतरराष्ट्रीय कॉल न आया और न ही रिसीव किया गया. एटीएस अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से खड़से के संबंध होने के आरोपों की जांच कर रही थी.

जलगांव के रहने वाले एथिकल हैकर मनीष भंगाले ने पाकिस्तान टेलिकॉम विभाग में सेंध मारकर दावा किया था कि अंडरवर्ल्ड सरगना दावूद इब्राहिम के कराची स्थित घर से खड़से के मोबाइल फ़ोन पर कई बार काल किए गए. इसके बाद चौतरफ़ा आलोचना के बीच उन्हें महाराष्ट्र सरकार में राजस्व मंत्री का पद छोड़ना पड़ा था. लेकिन क़रीब एक महीने तक इस मामले की जाँच करने के बाद एटीएस ने खडसे को इस मामले में क्लीन चिट दी है.

मुंबई एटीएस प्रमुख जॉइंट पुलिस कमिशनर अतुलचंद्र कुलकर्णी ने बताया कि खड़से के मोबाइल फ़ोन के कॉल रिकॉर्ड की जाँच में यह सामने आया है कि इस नंबर पर न कभी अंतरराष्ट्रीय कॉल आया न किया गया. एटीएस ने खड़से को कुछ हद तक राहत दी है. हालांकि उन पर लगे बाकी आरोपों की अभी जाँच चल रही है.