कहा जाता है कि प्रेम और जंग में सब कुछ जायज होता है. उत्तर प्रदेश में यह बात राजनीति पर भी लागू होती है. कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी के साथ हुए विलय के बाद से चल रहे घटनाक्रम का जिस तरह से नाटकीय पटाक्षेप हुआ उससे एक बार फिर से यह बात साबित हो गई कि सत्ता की शतरंजी बिसात पर राजा को बचाना ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, फिर चाहे उसके लिए प्यादा किसी को भी क्यों न बनाना पड़े. मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल के सपा के साथ हुए विलय और फिर इस विलय के पटाक्षेप से अखिलेश को पुनर्स्थापित करने के इस नाटक में समाजवादी पार्टी ,शिवपाल सिंह यादव और स्वयं मुलायम सिंह यादव को प्यादा बना पड़ा. लेकिन इस नाटक का अंत सपा के लिए सुखांत होगा, इसमें संदेह है.
जिस दिन यह विलय हुआ उस दिन विलय के कुछ क्षण पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक जिलास्तरीय कार्यक्रम में पत्रकारों के सवाल पर कहा था कि अगर कार्यकर्ता ठीक से काम करते रहे तो समाजवादी पार्टी को किसी के विलय की जरूरत नहीं है. यह सवाल इसलिए पूछा गया था कि कौमी एकता दल के सपा के साथ विलय की तारीख के बारे में कई दिन से मीडिया में खबरें आ रही थीं. मगर अखिलेश ने उस वक़्त अपनी जुबान से न तो मुख्तार अंसारी का नाम लिया और न ही इस बहुप्रचारित विलय की खबरों पर कोई विराम लगाया. हाल में हुए राज़्य सभा और विधान परिषद चुनावों में भी मुख्तार और उनके कौमी एकता दल के वोट अपने पाले में पड़ते देख कर भी उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई. राजधानी लखनऊ के सभी अखबारों में इस आशय के समाचार छप रहे थे. टीवी चैनलों और न्यूज़ पोर्टलों में भी विलय की ख़बरें थीं. मगर अखिलेश ने इन अटकलों को खारिज नहीं किया. लखनऊ में इस बारे में पत्रकारों के सवालों को भी वे टालते रहे. मगर जब लखनऊ में मुख्तार के दो बड़े भाइयों की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ मंत्री शिवपाल यादव ने कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय की घोषणा कर दी तो अखिलेश यादव को तुरंत गुस्सा आ गया.
नाटक के पहले प्यादे बने मुलायम के पुराने साथी और मंत्री बलराम यादव. अखिलेश ने उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया. बलराम यादव का अपराध यह बताया गया कि उनकी ही मध्यस्थता के कारण कौमी एकता दल का सपा में विलय हुआ था. इसके बाद बलराम यादव को मीडिया के सामने आंसू बहाते देखा गया. ये बलराम यादव वही हैं जिनके मुलायम सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए उत्तर प्रदेश का पहला बड़ा सरकार संरक्षित घोटाला यानि आयुर्वेद घोटाला हुआ था. बहरहाल बलराम यादव को अगर गुनाहगार माना गया था तो उनसे बड़ा गुनाह मुलायम सिंह यादव का था जिन्होंने विलय को हरी झंडी दिखाई थी और शिवपाल यादव का भी जिन्होंने विलय की सार्वजनिक घोषणा की थी. इसके अगले दिन अखिलेश का अलग ही रंग था. उन्होंने पत्रकारों से बहुत संयत ढंग से कहा कि मुख्तार अंसारी को लेखर कोई विवाद नहीं है और इस मामले नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव का फैसला स्वीकार्य है.
इस बीच जब यह बात चर्चा में आ गयी कि विलय होते ही मुख्तार अंसारी को उनकी सुविधा को देखते हुए आगरा जेल से लखनऊ बुला लिया गया है तो नाटक में एक और पात्र जोड़ दिया गया. ये थे कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया.उन्होंने आननफानन में एक प्रेस कांफ्रेंस बुला कर मामले को संभालने की कोशिश की. हालांकि यह दांव उलटा पड़ गया क्योंकि पत्रकारों के सवालों से उलझे रामूवालिया के मुंह से मुख्तार की जेल बदले जाने के मामले में यह निकल गया कि प्रदेश में चींटी भी चलती है तो सीएम को जानकारी रहती है. हालांकि बाद में वे यह सफाई देते रहे कि मुख्यमंत्री को मुख्तार मामले की जानकारी नहीं थी. इस प्रकरण में एक सफाई शिवपाल यादव की ओर से भी आई कि यह फैसला पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव का था लेकिन, अब संसदीय बोर्ड की बैठक में इस पर अंतिम फैसला होगा.
मगर पटकथा में एक दृश्य और बाकी था. बैठक से पूर्व ही एक नेशनल न्यूज चैनल के लाइव प्रोग्राम में मुख्यमंत्री ने घोषणा कर दी कि उन्हें मुख्तार अंसारी जैसे लोगों का समाजवादी पार्टी में आना मंजूर नहीं. हालांकि यह माना जा रहा था कि ऐसी घोषणा संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद होगी.
दरअसल इस पूरे नाटक का मक़सद अखिलेश की 2012 वाली छवि को पुनर्स्थापित करना था. तब उन्होंने इसी तरह पहले घोषणा हो जाने के बाद दागी डीपी यादव और उनकी राष्ट्रीय परिवर्तन पार्टी का समाजवादी पार्टी में शामिल होना रद्द करवा दिया था. चुनावी माहौल में फिर से अखिलेश की बेदाग छवि को पेश करने के मक़सद से मुख्तार प्रकरण में अखिलेश की घोषणा के लिए सबसे तेज चैनल के सजीव प्रसारण को मंच चुना गया और बाद में जब तक संसदीय बोर्ड ने कौमी एकता दल का सपा में विलय रद्द होने की घोषणा की, उसके पहले ही अखिलेश की साफ़ सुथरी राजनीति के काफी कसीदे पढ़े जा चुके थे. साथ ही 2012 की साइकिल यात्रा की तरह ही अखिलेश की विकास रथ यात्रा निकाले जाने की घोषणा भी हो चुकी थी.
अब चाहे इसे चाचा पर भतीजे के भारी पड़ने की बात कह कर प्रचारित किया जाए या फिर मुलायम का धोबी पछाड़ दांव कह कर, मगर इस बार और 2012 की स्थितियों में बहुत अंतर है. तब अखिलेश यादव सत्ता परिवर्तन की लड़ाई लड़ रहे थे और मायावती के भ्रष्ट शासन से त्रस्त, बदलाव चाह रही जनता को एक विकल्प के रूप में दिख रहे थे. लेकिन अब अखिलेश यादव खुद सत्ता में हैं. अब वे सिर्फ मुख्तार को आपराधिक राजनीति का प्रतीक बता कर खुद बेदाग शासन के प्रतीक नहीं बन सकते. जनता की समस्या सिर्फ राजनीति के बाहुबली ही नहीं हैं. समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं, नेताओं और मंत्रियों की करतूतों के लिए भी वह अखिलेश से ही जवाब चाहती है. पुलिस के यादवीकरण, पुलिस प्रमुखों की नियुक्ति में भ्रष्टाचार, पुलिस नियुक्तियों में धांधलियों, लगातार बढ़ रही पुलिसकर्मियों की हत्याओं और खुद पुलिस के अपराध तंत्र में शामिल होने की बढ़ती घटनाओं के लिए भी जवाब अखिलेश यादव को ही देना है. राजधानी के एक थाने में पुलिस द्वारा दबंग अपराधियों को बचाने के लिए बलात्कार पीड़िता के परिवार को ही जेल भेज देने जैसे अनेक मामलों के लिए भी जनता अखिलेश से ही जवाब मांगेगी.
इसलिए मुख्तार अंसारी के नाम पर हुए नाटक का समाजवादी पार्टी के पक्ष में सुखात अंत अब महज एक कल्पना ही साबित होने वाला है. इस प्रकरण के राजनीतिक प्रभावों का आकलन तो बाद में होगा मगर अभी तो अखिलेश की छवि सुधारने का यह नाटक फ्लॉप ही दिखता है.
मुख्तार अंसारी के नाम पर खेला गया नाटक सपा के लिए सुखांत हो सकता था अगर…
शिवसेना का केंद्र सरकार पर तंज, कहा- यहां चाय से ज्यादा केतली गरम…
मुंबई : महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी पार्टी शिव सेना ने एक बार फिर काले धन के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है. मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में शिवसेना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके चुनावी वादे को लेकर सवाल उठाए और पूछा कि आखिर सरकार ने दो साल के कार्यकाल में कितने देशवासियों के बैंक खातों में 15 लाख रुपये जमा करवाए हैं?
मुखपत्र के संपादकीय में पार्टी ने लिखा है कि राष्ट्र निर्माण के कार्य के लिए चुनाव से पहले कालेधन की वापसी की महत्वपूर्ण घोषणा की गई थी उसका क्या हुआ? दो साल में आखिर कितने देशवासियों के बैंक खाते में 15 लाख रुपए जमा करवाए हैं केंद्र सरकार ने? आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रेडियो पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कालेधन को लेकर अपनी राय लोगों के सामने रखी थी और अघोषित संपत्ति का खुलासा 30 सितंबर से पहले करने को कहा था.
प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम पर नि शाना साधते हुए शिवसेना ने लेख का शीर्षक ‘चाय से ज्यादा केतली गरम… मन की बात!’ दिया है. शिवसेना के मुख्सपत्र में कालेधन को केंद्र में रखकर यह लेख लिखा गया है. लेख में तंज कसते हुए कहा गया है कि , ‘देश बदल रहा है, लेकिन हमें मुफ्त चाय नहीं चाहिए? चुनाव से पहले जो आपने वादा किया था उसके अनुसार हमारे बैंक खाते में 15 लाख रुपये कब जमा करते हो, पहले बताओ? ऐसा कोई व्यक्ति चाय की चुस्की मारते हुए पूछे तो क्या उसका जवाब क्या होगा? उसे मारें, जलाएं या पकड़ें, ऐसा सवाल कुछ लोगों के मन में स्वभाविक तौर पर उठ सकता है.’
‘सामना’ में ऐसा सवाल पूछने वालों के लिए जवाब का उल्लेख भी है जिसके अनुसार – ‘बाबा रे, प्रधानमंत्री मोदी 50 साल की गंदगी साफ करने में लगे हैं. उनके हाथ में छड़ी जरूर है, लेकिन वह जादू की छड़ी मालूल नहीं होती. इसलिए सिर्फ दो साल में सब कुछ बदल जाएगा, ऐसी उम्मीद पालने की गलती मत करो. प्रधानमंत्री को कुछ और समय दो.’
शिवसेना ने सामना में लिखा है कि कालाधन उद्योगपति, फिल्मवाले और आतंकवादी संगठनों के साथ राजनीति में भी प्रचुर मात्रा में मिलता है. कालाधन ढूंढने के लिए स्विट्जरलैंड या मॉरिशस जाने की आवश्यकता नहीं है. कालाधन हमारे खुद के घर में है, उसे खोदकर निकाले तो भी मोदी जी का मिशन काला धन सफल हो जाएगा. लेख में आगे लिखा गया है कि मोदी के ‘मन की बात’ कड़क चाय के समान है, लेकिन मुंबई में कालेधन पर लोग ‘मन की बात’ सुने इसलिए कई स्थानों पर मुफ्त में ‘चाय-पानी’ की करवाई गई.
संपादकीय में लिखा गया है कि अगर कोई सिरफिरा सच बोलने की हिम्मत करता है इसलिए उसे मारा जाए, जलाया जाए यह बोलना हमारी संस्कृति के अनुसार उचित नहीं है.
भगोड़े गैंगस्टर कुमार पिल्लई को मुंबई लाया गया, LTTE से रही है नजदीकी
मुंबई: भगोड़े गैंगस्टर कुमार पिल्लई को सोमवार रात मुंबई लाया गया। कुमार पिल्लई को फ़रवरी महीने में सिंगापुर एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि पिल्लई को साथ लेकर आई पुलिस की टीम सोमवार रात करीब 10 बजे यहां अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरी। इंटरपोल द्वारा पिल्लई के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी किए जाने के बाद उसे सिंगापुर में हिरासत में लिया गया था।
मुंबई में अमर नाईक गिरोह के सेनापति रहे कुमार पिल्लई पर यहां हत्या और जबरन वसूली के मामले दर्ज हैं। लेकिन जो बड़ी बात है वो कुमार पिल्लई की श्रीलंका के आतंकी संगठन लिट्टे (एलटीटीई) से नजदीकी। आरोप है कि कुमार पिल्लई लिट्टे को विदेश से हथियार, गोला-बारूद उपलब्ध करवाता था। बदले में लिट्टे से उसे मादक पदार्थ हेरोईन मिलती थी जिसे अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में बेच मोटी कमाई करता था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक कुमार पिल्लई इंजीनियरिंग पास है । अपने तस्कर पिता की हत्या का बदला लेने के ईरादे से वो अमर नाईक गिरोह में शामिल हुआ था। बताया जाता है कि कुमार पिल्लई के पिता की हत्या अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने करवाई थी।
वह देश से फरार होने के बाद कई सालों से सिंगापुर में रह रहा था। वहां दिखावे के लिए उसने इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार जमा रखा था। उसी की आड़ में वह अपना काला कारोबार करता था। वर्ष 1990 में मुंबई से फरार होने से पहले पिल्लै को केवल एक बार गिरफ्तार किया गया था और बाद में वह जमानत पर छूट गया था।
भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते लोकायुक्त ने मांगा शिवसेना के मंत्री से जवाब
मुंबई: शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के गृहनिर्माण राज्यमंत्री रविंद्र वायकर की मुश्किलों में इजाफ़ा होता दिखा रहा है। वायकर के खिलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए मुंबई कांग्रेस ने महाराष्ट्र के लोकायुक्त के पास उनकी शिकायत की है।
रविंद्र वायकर शिवसेना के नेता हैं। वे मुम्बई के जोगेश्वरी विधानसभा चुनाव क्षेत्र से दूसरी बार विधायक बने हैं। उनके क्षेत्र में आरे कॉलोनी बसी हुई है। आरे – राज्य सरकार का दूध उत्पादन और पशु संवर्धन प्रोजेक्ट है। इसलिए मुम्बई के उत्तरी उपनगरों में कई सौ एकड़ जमीन सरकार के कब्जे में है। यह शहर का हरित क्षेत्र भी है जिस से महानगरी मुम्बई को ऑक्सीजन की आपूर्ती होती है।
कांग्रेस का आरोप है कि वायकर ने इस हरित क्षेत्र में 20 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा बनाया हुआ है। साथ ही आदिवासियों के नाम पर शिवसेना मंत्री वायकर ने वहां सौनाबाथ और जैकुजी से संपन्न एक हेल्थ सेंटर बनाया। जिसकी जिम्मेदारी एक ऐसी संस्था को दिलाई जिस में मंत्री की पत्नी सहभागी हैं। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि संस्था चैरिटी कमिश्नर के पास रजिस्टर्ड नहीं है। इस हेल्थ सेंटर के लिए सरकारी तिजोरी से 27 लाख रुपये खर्च करने की बात भी कांग्रेस ने कही है।
मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व सांसद संजय निरुपम ने अपने इन आरोपों की सूची महाराष्ट्र के लोकायुक्त एम एल ताहिलियानी को सुपूर्द की। सोमवार को मुंबई में उन्होंने प्रतिनिधि मंडल समेत लोकायुक्त से मुलाक़ात कर शिकायत पर जांच की मांग की। जिसके बाद उन्होंने मीडियाकर्मियों को बताया कि उनकी शिकायत पर मंत्री वायकर को हफ्तेभर में जवाब देने को कहा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगले सोमवार से मामले पर सुनवाई के लिए भी शिकायतकर्ताओं को आश्वस्त किया गया है।
मुम्बई कांग्रेस अध्यक्ष निरुपम इससे पहले मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को ख़त लिखकर रविंद्र वायकर को मंत्री परिषद से बर्खास्त करने की मांग भी कर चुके हैं।
उधर आरोपों का सिलसिला शुरू हुए हफ़्ता बीत चुका है लेकिन रविंद्र वायकर अज्ञात जगह पर बने हुए हैं। खुद को मुम्बई से दूर होने का हवाला देते हुए व्हाट्सऐप वीडियो जारी कर वायकर ने खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद और ग़लत सूचना के आधार पर रचित बताया है।
देहरादून पुलिस नशे के सौदागरों पर कसेगी शिकंजा
युवाओं की नसों में नशे का जहर कौन पहुंचा रहा है। मैदान से लेकर पहाड़ तक नशे की खेप पहुंचाने के रूट कौन से हैं। नशे के सौदागरों का नेटवर्क किससे जुड़ा है।
पंजाब की तरह यहां भी इस खेल में बड़े सफेदपोश तो शामिल नहीं…. इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए प्रदेश में पहली बार पुलिस एक व्यापक स्टडी रिपोर्ट तैयार कर रही है। यह स्टडी डीजीपी एमए गणपति की पहल पर शुरू हुई है। डीजीपी का मानना है कि अध्ययन पूरा कर पड़ोसी राज्यों पंजाब, हिमाचल हरियाणा और यूपी से मिलकर नशे के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया जाएगा। गणपति का मानना है कि उनके पास टुकड़ों में पहुंच रही सूचनाएं चौंकाने वाली हैं। यदि अब ठोस कदम नहीं उठाए गए तो उत्तराखंड में पंजाब जैसे हालात बन जाएंगे।
नशे के खिलाफ अब तक बातें तो खूब हुई, लेकिन किसी सरकार ने नशाखोरी को रोकने के साथ बड़े सौदागरों तक पहुंचने की ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं हुई। स्पेशल टास्क फोर्स और पुलिस की कार्रवाई भी नशा पहुंचाने वाले बिचौलियों तक समिति रही है। डीजीपी एमए गणपति नशे के कारोबार को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जता चुके हैं। इसी कड़ी में काम्युनिटी पुलिसिंग के जरिये खासतौर से देहरादून में 11 जुलाई को नशे के खिलाफ मुहिम शुरू हो रही है।
डीजीपी का मानना है कि मौजूदा समय में पुलिस की सबसे बड़ी चुनौती कमजोर कड़ियों को जोड़ने की है। युवाओं तक पहुंचने वाले मिडिल मैन तक तो पुलिस पहुंच रही है, लेकिन खेप कहां से सप्लाई की जाती है। सप्लायर का यहां कितना बड़ा गठजोड़ है और उसमें कौन लोग जुड़े हैं यह पता लगाना सबसे जरूरी है। पुलिस द्वारा पकड़े जाने वाले हर सौदागर की अब कुंडली तैयार होगी।
नशा के कारोबार पर अध्ययन रिपोर्ट बनाने के लिए पूरा खाका तैयार किया गया है। नशाखोरी किन-किन क्षेत्रों में ज्यादा है और कौन-कौन से मादक पदार्थों की खपत होती है। नशा बढ़ने की वजह क्या है।
अब तक कितने लोग इस गोरखधंधे में पकड़े गए हैं और फिलहाल वे क्या कर रहे हैं। उन्हें किन प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है। क्या पुलिस स्तर पर किसी तरह की सांठगांठ है। खासतौर से कहां-कहां से नशीले पदार्थों की सप्लाई होती है और कौन बड़े नाम हैं। स्टडी के दौरान इन सभी बिंदुओं पर काम किया जाएगा।
रिपोर्ट तैयार होने के बाद नशे के बड़े सौदागरों पर शिकंजा कसने की कवायद शुरू होगी। डीजीपी की मानें तो सौदागरों पर कार्रवाई के साथ जागरूकता भी जरूरी है। युवाओं और अभिभावकों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम करने के साथ नशे के सौदागरों पर शिकंजा कसने के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि नशा कारोबार के तार उत्तराखंड के अलावा यूपी, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल से जुडे़ हैं।
बिजली की आंखमिचौली से दून की जनता बेहाल
देहरादून के बीचों बीच स्थित परेड ग्राउंड सबस्टेशन की बिजली लाइनों में बारिश से आई खराबी के चलते इस सबस्टेशन से जुड़े इलाकों में करीब एक घंटे तक बिजली गुल रही। पावर कारपोरेशन के इंजीनियरों और कर्मचारियों ने खासी मशक्कत के बाद इन लाइनों को दुरुस्त कर बिजली व्यवस्था सुचारु कराई।
सोमवार को भारी उमस के बीच कई जगह बिजली की आंखमिचौली और लो वोल्टेज की समस्या ने लोगों को खासा परेशान किया। परेड ग्राउंड सब स्टेशन की 33 केवी लाइन दोपहर करीब 2.23 बजे बारिश के चलते ब्रेकडाउन हो गई। इसके चलते इस सबस्टेशन से जुड़े परेड ग्राउंड और एस्लेहॉल, कनक चौक, सर्वे चौक, लैंसडौन चौक, तिब्बती बाजार, सुभाष रोड, कान्वेंट रोड समेत कई इलाकों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई।
सूचना पर पहुंचे इंजीनियरों और फील्ड स्टाफ ने खासी मशक्कत के बाद एक घंटे बाद आपूर्ति सुचारु कराई। इसके अलावा नेहरू कालोनी, रिस्पना नगर, प्रगति विहार, हरिद्वार बाईपास, शास्त्रीनगर, अजबपुर कलां, कारगी चौक, शिवालिक एनक्लेव, आदर्श विहार, सरस्वती विहार, मोहब्बेवाला, शिमला बाइपास, क्लेमनटाउन, टर्नर रोड, सुभाषनगर आदि क्षेत्रों में भी बिजली की आंखमिचौली से लोग परेशान रहे। उधर देहराखास समेत कई इलाकों में वोल्टेज कम ज्यादा की शिकायत बनी हुई है।
पावर कारपोरेशन के डाइरेक्टर (एचआर) एवं प्रवक्ता पीसी ध्यानी ने बताया कि विद्युत उपभोक्ता बिजली संबंधी किसी भी जानकारी या समस्या की शिकायत के लिए कारपोरेशन के कस्टमर केयर टोल फ्री नंबर 18004190405 पर संपर्क कर सकते हैं। उपभोक्ता विद्युत बिल का भुगतान उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड की वेबसाइट www.upcl.org पर आनलाइन भी कर सकते हैं।
निकायों के 1000 कर्मचारियों के नियमितीकरण पर फैसला आज
उत्तराखंड के विकास एवं अन्य मुद्दों से जुड़े तमाम प्रस्तावों पर विचार-विमर्श और सहमति देने के मकसद से मंगलवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है।
इसमें मुख्य तौर पर निकायों के एक हजार कर्मचारियों को नियमित करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अलावा श्रीनगर में जागर महाविद्यालय को खोलने की सहमति भी बैठक में बनने की पूरी उम्मीद है। इसके अतिरिक्त पर्यटन एवं राज्य कर्मचारी कल्याण नियम की नियमावली से संबंधित प्रस्ताव भी कैबिनेट की बैठक में आएंगे।
मंगलवार को दिन में साढ़े ग्यारह बजे कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है। सूत्रों के मुताबिक इसमें सबसे अहम प्रस्ताव शहरी विकास विभाग की ओर से करीब एक हजार तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नियमित करने संबंधी है। शहरी विकास विभाग से संबंधित विभिन्न नगर निकायों के अध्यक्षों ने मनमाने तरीके से समूह ग और घ के करीब एक हजार कर्मचारियों की नियुक्ति कर ली है।
ऐसे में तमाम दौर की चर्चाओं के बाद इन कर्मचारियों विनियमितीकरण नियमावली-2013 के तहत नियमित करने का प्रस्ताव है। गौरतलब है कि इन एक हजार कर्मचारियों में अकेले चतुर्थ श्रेणी के 856 कर्मचारी हैं।
शहरी विकास विभाग ने इन सभी पदों को नियमित करने संबंधी प्रस्ताव गोपन को भेजा है। वहीं श्रीनगर में जागर महाविद्यालय खोले जाने की मांग पर कुछ समय पूर्व मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था।
उत्तराखंडी परंपरा के तहत जागर एक तरह के लोकगीत हैं, जिनकी धार्मिक महत्ता होती है। विभिन्न मौकों पर ये लोकगीत गाए जाते हैं।
राज्य की इस परंपरा को बढ़ावा देने के मकसद से इस संबंध में भी एक प्रस्ताव संस्कृति विभाग की ओर से जागर महाविद्यालय खोलने जाने संबंधी प्रस्ताव कैबिनेट में रखा जाएगा। इसके अतिरिक्त कई अन्य विभागों के महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी बैठक में रखे जाएंगे।
यूपी में गुंडे, माफिया और अपराधियों का आतंक: मायावती
यूपी की जनता सवा चार साल में त्रस्त हो चुकी है। यहां गुंडे, माफियाओं और आपराधियों का आतंक है। बदमाश पुलिसकर्मियों को मार रहे हैं और सरकार कुछ पैसे देकर अपने आपको जिम्मेदारी से मुक्त मान लेती है। ये बातें बसपा सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को लखनऊ में कहीं।
मायावती ने कहा कि यूपी में पुलिस भी अपराधियों से डर रही है। सरकारी कर्मचारी यहां सबसे ज्यादा असुरक्षित है। बसपा सुप्रीमो ने मुख्तार की पार्टी के सपा के विलय की बात भी उठाई। उन्होंने कहा, विलय रद्द करना नाटक है। उन्होंने कहा कि दागियों को मंत्री बनाने से सपा का फायदा नहीं होगा।
मायावती ने आरोप लगाया कि सपा मुखिया की वजह से ही यूपी में गंभीर अपराध होते हैं। उन्होंने कहा कि सपा जातिवादी, क्षेत्रवादी मानसिकता की है, यूपी में विकास रुक गया है। मायावती ने बीजेपी पर निशाना साधा और कहा दादरी, मथुरा और कैरानी सपा-बीजेपी की देन है।
मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव देखते ही मोदी जनता से झूठे वादे करने लगे। 2014 में बीजेपी ने जो वादे किए थे उनका क्या हुआ। यूपी के लोगों को आज भी अच्छे दिनों का इंतजार है। उन्होंने सवाल उठाया कि दो साल में बीजेपी ने कितनी गरीबी दूर की?
मायावती ने कहा कि बीजेपी से बहुत ही सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा, दिल्ली में केंद्र के अधीन लॉ एंड ऑर्डर फेल है। मायावती ने ये भी कहा कि यूपी की अपेक्षा दिल्ली की आबादी कम है फिर भी दिल्ली में कानून व्यवस्था फेल है। मायावती ने कहा कि बीएसपी में टिकट के लिए दूसरी पार्टियों में भगदड़ मची है।
भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े में 2017 तक शामिल हो जाएगा तेजस
नई दिल्ली: देश में बने पहले लाइट कॉम्बेट एयरकाफ्ट यानी तेजस के इंतजार की घड़ियां समाप्त हो गई हैं। दो विमानों का इसका पहला बेड़ा एक जुलाई को बेंगलुरु में तैयार हो जाएगा। इस बेड़े का नाम रखा गया है फ्लांइग ड्रैगर।
शुरू के दो साल बेंगलुरु में रहने के बाद ये स्क्ावड्रन तमिलनाडु के सलूर चला जाएगा। वायुसेना की योजना अगले साल मार्च तक इसके बेड़े में छह तेजस शामिल करने की है। इसके बाद आठ और तेजस बेड़े में शामिल किये जाएंगे। इसके बाद ही तेजस को किसी फॉरवर्ड एरिया में तैनात किया जाएगा।
एक इंजन वाले इस लड़ाकू विमान की तुलना चीन और पाकिस्तान द्वारा मिलकर तैयार किये गए जेएफ-17 से की जाती है। वायुसेना की मानें तो ये विमान जेएफ-17 से कही ज्यादा बेहतर है । धीरे-धीरे तेजस वायुसेना से पुराने पड़ चुके मिग-21 को रिप्लेस कर देगा। मिग-21 का इस्तेमाल हवा से हवा और जमीनी हमले के लिये किया जाता है।
अपग्रेड तेजस वायुसेना के हर तरह के रोल में फिट होगा जिसकी कीमत करीब 250 से 300 करोड़ होगी। वायुसेना ने तेजस बनाने वाली कंपनी हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड को 120 विमानों का ऑर्डर दिया है।
गो-मूत्र से निकला सोना, गुजरात के वैज्ञानिक ने किया दावा
गुजरात के जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर डॉ. बीए गोलकिया ने गोमूत्र से सोना निकालने का दावा किया है। चार सालों की रिसर्च के बाद डॉ. बीए गोलकिया ने गुजरात में पायी जाने वाली प्रसिद्ध गिर नस्ल की गायों के मूत्र से सोना निकालने का दावा किया है।
टाइम्स आफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलाजी विभाग के अध्यक्ष डाॅ.गोलकिया ने अपने चार सालों की रिसर्च के दौरान गिर नस्ल की 400 से अधिक गायों के मूत्र की लगातार जांच करने के बाद उन्होंने एक लीटर गोमूत्र से 3 मिलीग्राम से 10 मिलीग्राम तक सोना निकालने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह धातु आयन के रूप में पाया गया और यह पानी में घुलनशील है।
गोमूत्र परीक्षण के लिए डाॅ.गोलकिया और उनकी टीम ने क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री विधि का इस्तेमाल किया था। डॉ. गोलकिया ने कहा ‘अभी तक हम प्राचीन ग्रंथों में ही गो-मूत्र में स्वर्ण पाए जाने की बात सुनते थे, लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं था। हम लोगों ने इस पर शोध करने का फैसला किया। हमने गिर नस्ल की 400 गायों के मूत्र का परीक्षण किया और हमने उसमें सोने को खोज निकाला।’
उन्होंने कहा कि गोमूत्र से सोना सिर्फ रसायनिक प्रक्रिया के जरिए ही निकाला जा सकता है। डाॅ. गोलकिया ने कहा कि शोध के दौरान हमने गाय के अलावा, भैंस, ऊंट, भेड़ों के मूत्र का भी परीक्षण किया था लेकिन किसी में सोना नहीं मिला। इसके अलावा शोध में यह भी पाया गया है कि गो-मूत्र में 388 ऐसे औषधीय गुण होते है जिससे कई बीमारियों को ठीक किया जा सकता है।
डॉ. गोलकिया की टीम अब भारत में पाए जाने वाली अन्य देसी गायों के गो-मूत्र पर शोध करेगी।







