लखनऊ: माफिया डॉन और विधायक मुख्तार अंसारी ने अपनी पार्टी कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय करने से इनकार कर दिया है. यूपी विधानसभा के मॉनसून सत्र में शामिल होने के लिए जेल से आए मुख्तार ने कहा, ‘पहली बार भी हमने विलय नहीं किया था, ना हम चाहते थे और आज भी हम नहीं चाहते हैं.’
पिछले 21 जून को मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय हो गया था. लखनऊ में समाजवादी पार्टी मुख्यालय में मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल यादव ने बाकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसका ऐलान किया था. लेकिन अखिलेश यादव के भारी विरोध करने के बाद 25 जून को लखनऊ में पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक हुई जिसमें विलय को रद्द करने का ऐलान कर दिया गया.
विलय रद्द होने पर मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल अंसारी ने कहा था, मुझे घर बुलाकर कर खातिर की फिर मुझे सोते वक्त हलाल कर दिया गया.’ सियासत के जानकार कहते हैं कि इससे मुख्तार अंसारी को लगा कि वो सरेआम जलील कर दिए गए. पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, बलिया, मऊ और वाराणसी वगैरह जिलों की करीब 20 विधानसभा सीटों पर मुसलमानों में मुख्तार के परिवार का अच्छा असर है. वहां उनकी उनकी छवि रॉबिनहुड जैसी है. कहते हैं कि मुख्तार ने विलय ना करने का सख्त स्टैंड इसलिए लिया है ताकि उनके इलाके में लोग ये ना समझें कि ये लोग ऐसे ही गिरे पड़े हैं कि जब चाहे सपा इनसे विलय कर जब चाहे निकाल देती है.
मुख्तार ने यूपी विधानसभा के सेंट्रल हॉल में मंगलवार को मीडिया से कहा, ‘ये फैसला 14 अगस्त को पार्टी के सभी जिम्मेदारी नेताओं की मीटिंग में हो गया था कि अब समाजवादी पार्टी के साथ कोई विलय नहीं होगा. यही हमारी पार्टी के लिए बेहतर विकल्प है.’
दरअसल मुलामय सिंह ने काफी सियासी गुणा-भाग कर मुख्तार की पार्टी से विलय का फैसला किया था. उन्होंने पूर्वांचल के गाजीपुर, बलिया, मऊ और वाराणसी की 20 सीटों पर पिछले चुनाव के समाजवादी पार्टी और कौमी एकता दल के वोटों को जोड़कर ये हिसाब लगाया है कि विलय के बाद यह सारी सीटें वह जीत लेंगे.
मुलायम सिंह के बंगले पर सोमवार को यादव परिवार की जो पंचायत बैठी उसमें कौमी एकता दल का विलय भी एक मुद्दा था. मुलायम और शिवपाल पहले से इसके हक में हैं जबकि विलय का विरोध करने वाले रामगोपाल कल इसके लिए तैयार हो गए. लेकिन अखिलेश यादव इस पर राजी नहीं हुए. अब मुख्तार अड़ गए हैं.
मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का नहीं होगा समाजवादी पार्टी में विलय
ब्रह्मोस की तैनाती को लेकर चीन की चेतावनी पर भारतीय सेना ने कहा, 'इससे आपको क्या'
नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मोस की तैनाती को लेकर चीन की चेतावनी को दरकिनार करते हुए भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि उसके फैसले बीजिंग से तय नहीं होंगे. सेना के उच्च पदस्थ सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया, ‘हमारी सुरक्षा संबधी चिताएं हमारी अपनी हैं और हम अपने इलाके में किस तरह की तैनाती करें, ये तय करना हमारे अपने अधिकार क्षेत्र में है.’
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेली के मुताबिक चीन से सटी सीमा पर ब्रह्मोस की तैनाती से क्षेत्रीय स्थायित्व पर नकारात्मक असर पड़ेगा. वैसे अभी अरुणाचल में ब्रह्मोस की तैनाती हुई भी नहीं है लेकिन चीन की आपत्ति सामने आ गई है. फिलहाल सरकार ने इस आशय का फैसला भर लिया है कि अरुणाचल में ब्रह्मोस की चौथी रेजीमेंट की तैनाती होगी. करीब 4,300 करोड़ की लागत से रेजीमेंट में करीब 100 मिसाइलें, पांच मोबाइल स्वचालित लॉन्चर और एक मोबाइल कमान पोस्ट तैनात होगी. इसकी तैनाती में करीब सालभर का वक्त लग जाएगा.
वैसे ब्रह्मोस की रेंज 290 किलोमीटर है लेकिन चीन के घबराने की वजह है कि इस मिसाइल का उसके पास कोई तोड़ नहीं है. भारत के पास मौजूद ब्रह्मोस सुपरसोनिक है यानी इसकी स्पीड करीब एक किलोमीटर प्रति सेकेंड है, जबकि चीन के पास मौजूद मिसाइल सबसोनिक यानी उसकी स्पीड 290 मीटर प्रति सेकेंड है. आम भाषा में समझे तो ब्रह्मोस चीनी मिसाइल से तीन गुना तेज है और इसे फायर करने में वक्त भी कम लगता है. साथ ही इसका निशाना चूकता नहीं है.
इसकी तैनाती के बाद अरुणाचल प्रदेश से चीन के 290 किलोमीटर के दायरे में आने वाली हर जगह इसकी पहुंच में होगी. यहां उन्नत ब्रह्मोस की तैनाती होगी जो पहाड़ों में छुपे दुश्मन के ठिकानों को भी निशाना बना सकता है. चीनी सेना के मुताबिक ब्रह्मोस की तैनाती से चीन के तिब्बत और युन्नान प्रांत खतरे की जद में आ जाएंगे.
भारत और रूस की मदद से बना ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जो ध्वनि से तीन गुना रफ्तार से हमला करता है. इसे पनडुब्बी, युद्धपोत, लड़ाकू विमान आदि से दागा जा सकता है.
बांग्ला भाषी श्रोताओं के लिए राष्ट्रपति ने ‘आकाशवाणी मैत्री’ चैनल का किया उद्घाटन
कोलकाता : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज बांग्ला भाषी श्रोताओं के लिए ‘आकाशवाणी मैत्री’ चैनल और उसकी वेबसाइट का उद्घाटन किया। इस पहल से भारत और बांग्लादेश दोनों देशों के कार्यक्रमों के लिए मंच मुहैया होगा और बंगाली संस्कृति का संरक्षण होगा।
कोलकाता में चैनल का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा, ‘आकाशवाणी मैत्री’ और इसकी मल्टीमीडिया वेबसाइट पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और उसके आसपास के इलाकों में बांग्ला भाषी श्रोताओं के लिए ही नहीं वरन समूचे विश्व में अलग-अलग हिस्सों में रह रहे बांग्ला भाषी लोगों के लिए एक अनूठी पहल है।
राष्ट्रपति ने इस बात का उल्लेख किया कि भारत और बांग्लादेश महज पड़ोसी नहीं हैं बल्कि वे जातीयता एवं रिश्तों से भी जुड़े हैं। उन्होंने कहा, ‘अपने साझा इतिहास, विरासत, संस्कृति, भाषा, भौगोलिक समानता के कारण भारत ने हमेशा से ही बांग्लादेश के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को सर्वोच्च महत्व दिया है।’ उन्होंने कहा कि दोनों देश साथ मिलकर समूचे उपमहाद्वीप और उससे इतर विकास और समृद्धि के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बांग्लादेश यात्रा के दौरान लिये गये फैसले से चैनल की अवधारणा निकली थी जहां दोनों पक्षों ने अपने प्रसारण संस्थानों के बीच विषयवस्तु साझा करने की सहमति जताई थी। चैनल का प्रसारण देश के नए अत्याधुनिक उच्च शक्ति वाले 1000 केडब्ल्यू डीआरएम ट्रांसमीटर के जरिए समूचे बांग्लादेश में मीडियम वेव पर व्यापक पहुंच एवं क्षमता के साथ होगा और यह वेबसाइट एवं मोबाइल ऐप के जरिए वैश्विक तौर पर भी उपलब्ध होगा।
राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा कि 1971 से ही बांग्लादेश के लाखों लोगों के दिलों में आकाशवाणी की एक खास जगह है, जब बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के मद्देनजर बांग्ला भाषा में एक विशेष सेवा शुरू की गई थी। उन्होंने उस समय का स्मरण करते हुए कहा कि मुक्ति संग्राम के दौरान इस चैनल ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा कि नया चैनल समग्र बंगाली सांस्कृतिक विरासत के प्रचार एवं प्रसार और संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकता है, जो सभी बांग्ला भाषी लोगों के लिए एक विरासत की तरह है और वे चाहे जहां भी रहते हों उनके लिए बेहद गर्व की बात है।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि कला, संस्कृति, साहित्य, संगीत, खेल एवं साझा सामाजिक-आर्थिक मुद्दों के क्षेत्र में भारत और बांग्लादेश दोनों देशों की विषयवस्तु का संगम इस चैनल को खास बनाएंगे, जो दोनों देशों के श्रोताओं के लिए उपयोगी होगा।’ उन्होंने कहा कि दक्षेस की पहलों की पूर्ण क्षमता को साकार करने में भारत और बांग्लादेश मिलकर काम कर सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर में 12 साल बाद BSF की वापसी, घाटी के भीतरी हिस्सों में तैनाती
श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर में शांति का माहौल बनाए रखने के मद्देनजर घाटी में 12 साल बाद एक बार फिर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को तैनात किया गया है। बीते सोमवार को श्रीनगर के लालचौक और आसपास के इलाके में बीएसएफ के एक दस्ते ने करीब 12 साल बाद फ्लैग मार्च किया। गौर हो कि हिजबुल आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद से कश्मीर घाटी में हिंसा का माहौल बना हुआ है। घाटी में करीब डेढ माह से हिंसा और तनाव का माहौल बना हुआ है। ऐसे में सोमवार से घाटी में बीएसएफ को तैनात कर दिया गया है। घाटी के भीतरी इलाकों में बीएसएफ की तैनाती की गई है। घाटी के कई इलाकों में अभी भी कर्फ्यू है, वहीं 12 साल बाद एक बार फिर शांति कायम करने के उद्देश्य से कश्मीर घाटी में बीएसएफ को तैनात किया गया है।
केंद्र ने कश्मीर में हालात सामन्य बनाने के लिए बीएसएफ की 26 और कंपनियों को भेजने का फैसला किया है। बीएसएफ की इन 26 कंपनियों को राज्य के समस्याग्रस्त इलाकों में कानून व्यवस्था बनाने के लिए भेजा जा रहा है। घाटी में लगातार हो रही हिंसा और कई इलाकों में अशांति के बीच केंद्र ने सोमवार को 2600 अतिरिक्त अर्द्धसैनिक बलों को जम्मू कश्मीर के लिए रवाना कर दिया। सराकरी सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है। इन बलों को गुजरात, राजस्थान और पश्चिम बंगाल से लिया गया है और उनके एक दो दिन में घाटी पहुंच जाने की संभावना है। इसके अतिरिक्त अमरनाथ यात्रा की ड्यूटी से हटाए जाने के बाद बल की 30 अतिरिक्त कंपनियों को भी अगले कुछ दिन में राज्य में भेजे जाने की संभावना है।
बताया जाता है कि जम्मू-कश्मीर के लोग पहले से ही बीएसएफ की तैनाती का विरोध करते आए हैं। इन लोगों की नजरों में सीमा सुरक्षा बल की छवि आक्रामक बल की तरह है। संभवत: यही कारण रहा कि करीब 12 सालों पूर्व सीमा सुरक्षा बल को हटाकर घाटी में सीआरपीएफ की तैनाती कर दी गई थी। हालांकि 1990 के दौरान आतंकी गतिविधियों पर काबू करने के उद्देश्य से सीमा सुरक्षा बल को तैनात किया गया था, लेकिन बाद में वर्ष 2004 के दौरान बल का स्थान सीआरपीएफ ने ले लिया था। अब पुनः एक बार फिर कश्मीर में सीमा सुरक्षा बल के हाथों में सुरक्षा की कमान होगी।
दूसरी ओर, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह बुधवार को जम्मू एवं कश्मीर जाएंगे। घाटी के कई हिस्सों में मंगलवार को लगातार 46वें दिन भी प्रतिबंध लगा हुआ है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान उनके साथ गृह सचिव राजवी महर्षि भी होंगे। राजनाथ का कश्मीर दौरा दो दिनों का होगा। बताया जाता है कि राजनाथ सिंह वहां जाकर प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं से कश्मीर में उपजी हिंसा को लेकर बातचीत करेंगे। गौर हो कि कश्मीर हिंसा में अब तक 70 लोगों की मौत हो चुकी है।
अपने स्तर से कश्मीर मुद्दे का हल नहीं निकाल पाएंगे भारत और पाकिस्तान : मीरवाइज
श्रीनगर : हुर्रियत के नरमपंथी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फारूक ने आज कहा कि भारत और पाकिस्तान अपने स्तर पर कश्मीर मुद्दे का हल नहीं खोज पाएंगे और उन्होंने इस बाबत पोप फ्रांसिस समेत दुनियाभर के कई धार्मिक नेताओं को पत्र लिखकर उनके हस्तक्षेप की मांग की है।
मीरवाइज ने पोप के अलावा दलाई लामा, मक्का में इमाम काबा और शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को भी पत्र लिखे हैं। हुर्रियत के एक प्रवक्ता ने बताया कि मीरवाइज ने कश्मीर के गंभीर हालात के संबंध में नयी दिल्ली, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) में कई देशों के राजदूतों को भी पत्र लिखे हैं।
प्रवक्ता के अनुसार मीरवाइज ने इन सभी से आग्रह किया है कि घाटी के हालात को गंभीरता से लिया जाए और वे एक कल्पनापूर्ण समाधान के लिए इस मुद्दे को मेज पर लाने की खातिर अपने ओहदों का इस्तेमाल करें।
मीरवाइज ने पत्र में लिखा, ‘भारत और पाकिस्तान नहीं कर सकते और अपने दम पर वे यह करने में सक्षम नहीं हैं।’ इस पत्र की प्रति यहां मीडिया को भी उपलब्ध कराई गयी, जिसके अनुसार, ‘अगर हमें दक्षिण एशिया में आर्थिक समृद्धि और विकास, शिक्षा और प्रगति, शांति और सुरक्षा देखनी है तो यह जरूरी हो जाता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे गंभीरता से ले और कश्मीर में जमीनी हकीकत का खुद मूल्यांकन करने में सक्रिय हो।’
अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद के बारे में भारत के दावे पर UN ने लगाई मुहर
संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र की समिति ने पाया है कि भारत ने पाकिस्तान में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के जो नौ पते बताए थे, उनमें से छह पते सही हैं। तीन गलत पतों को सूची से हटा दिया गया है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अलकायदा प्रतिबंध समिति द्वारा सूची में से जो पते हटाए जा रहे हैं, उनमें से एक पता संयुक्त राष्ट्र में इस्लामाबाद की दूत मलीहा लोधी के आवास का है। हालांकि भारत की ओर से उपलब्ध करवाए गए छह अन्य पतों को संशोधित नहीं किया गया है। भारत ने एक डोजियर में इन नौ पतों का उल्लेख करते हुए कहा था कि दाऊद इन स्थानों पर अक्सर आता है।
सुरक्षा परिषद की आईएसआईएल और अलकायदा प्रतिबंध समिति ने दाऊद से जुड़ी इस जानकारी में कल संशोधन किया। वर्ष 1993 में मुंबई में हुए श्रृंखलाबद्ध विस्फोटों के मास्टरमाइंड से जुड़े इस पते को समिति ने रेखांकित किया और काट दिया।
इस संशोधन के बारे में पूछे जाने पर भारत के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि सूचीबद्ध जानकारी में दाऊद का एक पता गलत था। यह पता ‘राजदूत मलीहा लोधी का था, दाऊद का नहीं।’ भारत की ओर से पिछले साल अगस्त में तैयार किए गए डोजियर में पाकिस्तान में दाऊद के नौ पते शामिल किए गए थे। यह इस बात का सबूत था कि दाऊद पाकिस्तान में छिपा हुआ है।
इस्लामाबाद लगातार इस बात से इंकार करता रहा है कि दाऊद पाकिस्तान में रहता है। पाकिस्तान में दाऊद के आवासों की जानकारी दो साल पहले बनाए गए उस डोजियर में है, जिसे पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज और उनके भारतीय समकक्ष अजित डोभाल के बीच वार्ता के दौरान सौंपा जाना था। यह वार्ता बाद में रद्द हो गई थी। इस डोजियर में एक पता उस मकान का था, जो दिवंगत प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी के कराची स्थित घर के पास था।
डोजियर में कहा गया था, ‘दाऊद को पाकिस्तान में अपने ठिकाने और पते तेजी से बदलने के लिए जाना जाता है। उसने पाकिस्तान में अकूत संपत्ति जुटाई है और वह पाकिस्तानी एजेंसियों की सुरक्षा में आता-जाता है।’ समिति ने जो एक और संशोधन किया है, वह दाउद के परिवार से जुड़ा हैं परिवार से जुड़ी जो सूचना सूची में रेखांकित की गई है, वह है- ‘पिता का नाम शेख इब्राहिम अली कासकर, मां का नाम अमीना बी, पत्नी का नाम महजबीं शेख’।
दाऊद को तीन नवंबर 2003 में सूचीबद्ध किया गया था। उससे जुड़ी जानकारी को मार्च और जुलाई 2006 में, जुलाई 2007 में और मार्च 2010 में संशोधित किया गया। संयुक्त राष्ट्र की ओर से आतंकी घोषित किए गए दाउद की संपत्ति कुर्क है, उसकी यात्राओं पर प्रतिबंध है। संशोधन के दौरान दाऊद के जन्मस्थान के रूप में दर्ज ‘बंबई’ को काटकर ‘महाराष्ट्र के रत्नागिरी स्थित खेर’ किया गया।
इसमें उसके दूसरे नामों के रूप में ‘शेख फारूकी, बड़ा सेठ, बड़ा भाई, इकबाद भाई, मुच्छड़ और हाजी साहब’ दर्ज हैं। इसमें उसके विभिन्न पासपोर्टों की जानकारी भी दर्ज है। इनमें वे पासपोर्ट भी हैं, जो पाकिस्तान में जारी किए गए।
इसमें कहा गया है कि दाऊद को 18 अगस्त 1985 को एक पासपोर्ट दुबई में जारी किया गया। एक पासपोर्ट रावलपिंडी में 12 अगस्त 1991 में जारी किया गया। इसमें इन दो पासपोर्टों के ‘गलत इस्तेमाल’ का जिक्र किया गया। दाऊद को जुलाई 1996 में कराची में और जुलाई 2001 में रावलपिंडी में भी पासपोर्ट जारी किया गया।
दाऊद वर्ष 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में भारत में वांछित है। इन हमलों में 257 लोग मारे गए थे और लगभग एक हजार लोग घायल हुए थे। वह अन्य आतंकी हमलों का भी मास्टर माइंड बताया जाता है और वह धनशोधन एवं रंगदारी का भी आरोपी है।
मामूली अंतर से कांस्य पदक से चूकीं दीपा करमाकर को खेल रत्न देने की सिफारिश
नई दिल्ली : रियो ओलंपिक में मामूली अंतर से कांस्य पदक से चूकने वाली जिम्नास्ट दीपा करमाकर को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार दिया जा सकता है। जानकारी के अनुसार, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एसएआई) ने जिमनास्ट दीपा करमाकर और शूटर जीतू राय को खेल रत्न पुरस्कार देने को सिफारिश की है। इस पर फैसला गुरुवार को किया जाएगा।
वैसे तो इस वर्ष भारतीय टेस्ट क्रिकेट के कप्तान विराट कोहली देश के इस सबसे बड़े खेल पुरस्कार के प्रबल दावेदार हैं, लेकिन विशेष नियमों के मुताबिक विशेष परिस्थितियों में यह पुरस्कार एक से ज्यादा खिलाड़ी को भी दिया जा सकता है।
गौर हो कि भारतीय जिम्नास्ट दीपा करमाकर रियो ओलंपिक में वॉल्ट फाइनल में कांस्य पदक जीतने से मामूली अंतर से चूक गईं थीं। जिम्नास्टिक स्पर्धा में वॉल्ट फाइनल में दीपा चौथे स्थान पर रही थी। महिलाओं के वॉल्ट फाइनल में दीपा का स्कोर 15.266 था और वह स्विटजरलैंड की जिउलिया स्टेनग्रबर से पीछे रही जिसने 15.216 के साथ कांस्य पदक जीता था। दीपा की इस उपलब्धि ने उन्हें देश के सर्वोच्च च्च खेल पुरस्कार खेल रत्न के लिये प्रबल दावेदार बना दिया है। भारतीय ओलंपिक के इतिहास में 120 साल में ऐसा पहली बार हुआ है, जब कोई भारतीय एथलीट जिमनास्टिक स्पर्धा के फाइनल तक पहुंचा।
वहीं, एशियाई खेलों के स्वर्ण पदकधारी जीतू राय के नाम की सिफारिश प्रतिष्ठित राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिये की गई है जिन्होंने पिछले दो साल में पिस्टल निशानेबाजी में शानदार प्रदर्शन किया है, हालांकि वह रियो ओलंपिक में पदक नहीं जीत सके। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के सचिव राजीव भाटिया ने कहा कि हमने खेल रत्न के लिये जीतू के नाम की सिफारिश की है। भाटिया के अनुसार एनआरएआई ने महिला राइफल निशानेबाज अपूर्वी चंदेला अैर पुरुष राइफल निशानेबाज गुरप्रीत सिंह और पीएन प्रकाश के नाम की सिफारिश अर्जुन पुरस्कार के लिये की है। उनतीस वर्षीय राय पुरूषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा की विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर हैं, वह रियो में अपनी स्पर्धा में फाइनल में जगह बनाने वाले दो भारतीय निशानेबाजों में से एक थे, जिसमें से दूसरे अभिनव बिंद्रा थे। राय पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा के फाइनल में पहुंचे और आठवें स्थान पर रहे थे लेकिन वह रियो में अपनी पसंदीदा स्पर्धा 50 मीटर पिस्टल के फाइनल के लिये क्वालीफाई नहीं कर पाये थे। रियो ओलंपिक में पदक के प्रबल दावेदार जीतू राय अपनी पसंदीदा स्पर्धा पुरुष 50 मीटर पिस्टल के फाइनल में जगह बनाने के विफल रहे जबकि इससे कुछ दिन पहले 10 मीटर एयर पिस्टल के फाइनल में वह आठवें स्थान पर रहे थे।
खेल रत्न देश का सबसे बड़ा खेल पुरस्कार है। अगर सिफारिश को मंजूरी दी जाती है तो यह निशानेबाज 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के दिन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से पुरस्कार प्राप्त करेगा। गौर हो कि हर साल 29 अगस्त को खेल रत्न पुरस्कार दिया जाता है।
चीनी वांग को हराकर सिंधू बोलीं, 'तकदीर के भरोसे नहीं मिलती जीत'
भारतीय शटलर पी.वी. सिंधू ने रियो ओलंपिक भारत के लिए पदक आस को मजबूत करते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली है। उन्होंने ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट और दुनिया की नंबर-2 चीन की वांग यिहान को हराकर अंतिम चार में जगह बनाई। सिंधू ने इस जीत को अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ पलों में शुमार किया है।
सिंधू ने कहा, ‘यह रियो ओलंपिक है और काफी अलग महसूस कर रही है। यह सर्वश्रेष्ठ पलों में से है। उम्मीद है कि ऐसे कई और पल आएंगे।’ दुनिया की 10वें नंबर की खिलाड़ी सिंधू ने दूसरी रैंकिंग वाली वांग को 22-20, 21-19 से हराया। वह ओलंपिक सेमीफाइनल में पहुंचने वाली साइना नेहवाल के बाद दूसरी भारतीय खिलाड़ी बन गई।
इस मुश्किल दौर में भारत के लिए पदक जीतने के दबाव के बारे में पूछने पर उसने कहा, ‘मैं सिर्फ खेल के बारे में सोच रही थी। अगर आप अच्छा खेलते हैं तो पदक खुद ब खुद मिलेंगे। मैं सिर्फ अपने अगले मैच पर फोकस कर रही हूं। उम्मीद है कि अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकूंगी।’ सिंधू ने कहा कि चीनी खिलाड़ी के खिलाफ उसका संयम सफलता की कुंजी साबित हुआ।
सिंधू ने कहा, ‘बड़ी-बड़ी रैलियां चली और वह काफी आक्रामक खेल रही थी। शुरू में मेरे स्मैश बाहर जा रहे थे लेकिन मैने संयम बनाए रखा और हर बात के लिए तैयार थी। मेरे ख्याल से वही टर्निंग प्वॉइंट था।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने कभी नहीं सोचा कि मैं यह मैच हारूंगी क्योंकि एक पल सब कुछ बदल सकता है। अंक बनाना आसान नहीं था। यह काफी करीबी मुकाबला था। पहले गेम में 20-20 से स्कोर बराबर था और मुझे कभी नहीं लगा कि गेम पूरा हो गया है। वह बहुत अच्छा खेल रही थी।’ दूसरा गेम कमोबेश आसान लग रहा था और एक समय सिंधू 17-13 से आगे चल रही थी लेकिन वांग ने लगातार छह प्वॉइंट लेकर इसे भी करीबी बना दिया।
सिंधू ने कहा, ‘दूसरे गेम में मैं 18-14 से आगे थी लेकिन उसने शानदार वापसी की और बेहतरीन खेल दिखाया। 18-18 से स्कोर बराबर होने के बाद कोई भी जीत सकता था।’ साइना की तरह उनकी फिटनेस को लेकर कोई मसला नहीं था। उन्होंने कहा, ‘फिटनेस ठीक थी। वह अनुभवी खिलाड़ी है और दुनिया की दूसरे नंबर की खिलाड़ी है। मेरे लिए प्वॉइंट जुटाना आसान नहीं था। मुझे पता था कि रेलियां लंबी चलेंगी और वह कोई मौका नहीं छोड़ेगी।’
सिंधू ने कहा कि दुनिया की दूसरे नंबर की खिलाड़ी के खिलाफ तकदीर के भरोसे नहीं जीता जा सकता और अपना बेस्ट प्रदर्शन करना होता है। उसने कहा, ‘मैं लंबी रेलियों के लिए तैयार थी और ऐसा नहीं है कि तकदीर ने मेरा साथ दिया। उसने बेहतरीन खेल दिखाया लेकिन मैंने उसके खिलाफ पहले भी जीता है और हारी भी हूं। यह मैच के दिन अच्छे प्रदर्शन की बात है।’
टेस्ट रैंकिंग में टॉप पर पहुंची विराट कोहली की टीम इंडिया
कोलंबो: ऑस्ट्रेलिया ने कोलंबो में श्रीलंका से तीन टेस्ट मैचों की सीरीज 0-3 से गंवाने के साथ अपनी शीर्ष रैंकिंग भी भारत को गंवा दी. ऑस्ट्रेलियाई टीम कोलंबो आने से पहले 118 अंक लेकर शीर्ष पर काबिज थी, लेकिन पोलेकेले में 106 रन, गाले में 229 रन और कोलंबो में 163 रन से हारने के बाद उसके 108 अंक हो गए जिससे वह इंग्लैंड के बराबर हो गई लेकिन रैंकिंग में वह एलिस्टर कुक की टीम से ऊपर है जबकि श्रीलंका के कुल 95 अंक हो गये हैं.
ऑस्ट्रेलिया के बादशाहत गंवाने का मतलब है कि भारत एमआरएफ टायर्स आईसीसी टेस्ट टीम रैंकिंग में पहले स्थान पर काबिज हो गया है जबकि पाकिस्तानी टीम उससे महज एक अंक पीछे दूसरे स्थान पर पहुंच गई है. भारत ने साल की शुरुआत शीर्ष रैंकिंग से की थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड में न्यूजीलैंड के खिलाफ 2- 0 की जीत के बाद अपना पहला स्थान दोबारा हासिल कर लिया था.
पाकिस्तानी टीम एक साल से भी कम समय में दूसरी बार दूसरे नंबर पर पहुंची है. पिछले साल संयुक्त अरब अमीरात में इंग्लैंड को 2-0 से पराजित करने के बाद भी पाकिस्तान दूसरे स्थान पर पहुंचा था और 2003 में मौजूदा रैंकिंग प्रणाली शुरू करने के बाद ऐसा पहली बार हुआ था.
सलमान खान-लूलिया वंतूर कर चुके हैं शादी, रोमानियन अखबार ने किया दावा!
नई दिल्ली : बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की शादी को लेकर अब एक और दावा किया जा रहा है। एक रोमानियन अखबार ने दावा किया है कि सलमान खान ने बेहद गुपचुप तरीके से शादी कर ली है। गौर हो कि काफी दिनों से दोनों के करीब होने की खबरें मीडिया में सुर्खियों में बनी हुई है।
एक रोमानियन टेब्लायड ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा करते हुए दावा किया है कि सलमान खान और लूलिया वंतूर शादी कर चुके हैं। टेब्लायड के अनुसार, रोमानिया में लूलिया को मिसेज खान कहा जाता है। इस अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, रोमानिया में लूलिया को ‘डोएमना खान’ कहकर बुलाया जाता है। डोएमना खान’ का मतलब है ‘रॉयल मिसेज खान’।
हाल में सलमान खान ने फिल्म टयूबलाइट की शूटिंग पूरी की है। इस फिल्म शूटिंग के दौरान सलमान खान के साथ लूलिया भी मौजूद थीं। उनकी कई तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। कुछ दिनों पहले ऐसी खबरें आई थी कि दोनों इस साल के अंत तक शादी कर सकते हैं। बीते समय में कई कार्यक्रमों में सलमान से शादी को लेकर कई सवाल पूछे गये लेकिन उन्होंने हंसी में टाल दिया था। उनके पिता सलीम खान ने भी अपने बयान में बीते दिनों कहा था कि खुदा भी नही जानता कि सलमान कब शादी करनेवाले हैं।







