कोलकाताः भारत के दो पूर्व कप्तानों के बीच चल रहा विवाद आज तब नये मोड़ पर पहुंच गया जबकि सौरव गांगुली ने रवि शास्त्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि वह भारतीय कोच का पद नहीं मिलने के लिये उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहे हैं तो मुंबई का क्रिकेटर ‘खुशफहमी में जी रहा है.’ अनिल कुंबले के मुख्य कोच पद के लिये चुने जाने के बाद शास्त्री ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि तीन सदस्यीय क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएससी) के एक सदस्य गांगुली तब उपस्थित नहीं थे जब उनका इंटरव्यू लिया गया जिसे वह अनादर मानते हैं.
इस मामले में कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है. गुस्साये गांगुली ने आज शास्त्री पर जवाबी हमला बोला. उन्होंने इस पूर्व भारतीय ऑलरांडर की बैंकॉक में छुट्टियां मनाते हुए इंटरव्यू देने पर इस पद को लेकर उनकी गंभीरता को लेकर सवाल उठाये. गुस्साये गांगुली ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि उनकी (शास्त्री) टिप्पणी बेहद व्यक्तिगत है. यदि रवि शास्त्री को लगता है कि उनके भारतीय कोच नहीं बन पाने के लिये सौरव गांगुली जिम्मेदार है तो फिर वह खुशफहमी में जी रहा है. ’’
भारत के सबसे सफल कप्तानों से एक गांगुली ने शास्त्री के इस सुझाव पर भड़क गये जिसमें उन्होंने कहा था कि अगली बार जब साक्षात्कार लिये जा रहे हों तो उन्हें उपस्थित होना चाहिए. गांगुली ने कहा, ‘‘इससे मुझे गुस्सा आया कि वह मुझे सलाह दे रहा है कि मुझे इस तरह की बैठकों में उपस्थित होना चाहिए. मैं पिछले कुछ समय से बीसीसीआई की बैठकों का हिस्सा रहा हूं और मैं हमेशा उनके लिये उपलब्ध रहा. रवि को मेरी सलाह है कि जब भारत के कोच और सबसे महत्वपूर्ण पद के लिये चयन हुआ तब उन्हें समिति के सामने होना चाहिए था ना कि बैकाक छुट्टियां मनाते हुए प्रस्तुति देनी चाहिए थी.
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने एक दो समाचार पत्र पढ़े और इसे नजरअंदाज करना चाहा. मुझे बहुत दुख हुआ कि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपने विचार रखे. विशेषकर वह जो पिछले 20 साल से बीसीसीआई की प्रत्येक समिति में रहा. दस साल पहले वह कोच के चयन के लिये मेरी पोजीशन में थे. वह सब कुछ जानते थे. मैंने 19 जून को बीसीसीआई को सूचित किया और मुझे आधिकारिक मेल मिला. बीसीसीआई से मंजूरी मिलने के बाद मैं इन मेल की प्रतियां भी बांट दूंगा. ’’
गांगुली ने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि वह गंभीर था या नहीं लेकिन मेरा मानना है कि यदि आप खेल का सबसे महत्वपूर्ण पद चाहते हो तो आपको गंभीर होना चाहिए. लेकिन यदि आप सम्मान की बात कर रहे हो तो आपको भी यहां होना चाहिए था. जब तीन सदस्यीय समिति हो और महत्वपूर्ण लोग फैसले लेने से जुड़े हों तो यह केवल सौरव गांगुली का फैसला नहीं होता है. इसलिए ये निजी टिप्पणियां काफी दुखद हैं. ’’
शास्त्री के सार्वजनिक टिप्पणी करने पर गांगुली ने कहा, ‘‘उन्हें थोड़ी परिपक्वता दिखानी चाहिए विशेषकर जबकि वह दस वर्षों से भी अधिक समय से इस तरह की समितियों में हों. ’’
कुंबले के भारतीय कोच के रूप में शुरूआत करने पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं. जैसे मैंने कहा कि वह दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है. वह भारतीय क्रिकेट का एक चैंपियन है और वह इस टीम को आगे ले जाएगा. ’’
गुस्साये गांगुली ने कहा, शास्त्री को बैंकॉक में छुट्टी मनाने नहीं जाना चाहिए था
रितिक रोशन स्टारर 'मोहनजोदड़ो' के गानों को रहमान ने दी आवाज
ऑस्कर विजेता संगीतकार ए. आर. रहमान ने आगामी फिल्म ‘मोहनजोदड़ो’ के लिए गाना भी गाया है. आशुतोष गोवारिकर निर्देशित इस फिल्म के लिए रहमान ने गीतों की रचना भी की है.
फिल्म के पहले गाने के रूप में ‘तुम हो’ गाने को जुलाई में रिलीज किया जाएगा, जिसमें रितिक रोशन और पूजा हेगड़े दिखेंगे. रहमान के साथ ‘लगान, ‘वन्स अपॉन ए टाइम इन इंडिया’, ‘स्वदेश’ और ‘जोधा अकबर’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके गोवारिकर ने अपने बयान में कहा, ‘मैं पांचवी बार रहमान के साथ काम कर रहा हूं. हम दोनों के लिए काफी अच्छा अनुभव है.’
गोवारिकर ने कहा, ‘हमने कल्पना से काफी कुछ निर्मित किया है और इसके साथ ही हमने शोध के माध्यम से जानकारी हासिल की है और पुरातत्वविदों की भी मदद ली है.’
प्रागैतिहासिक समय की कहानी पर आधारित फिल्म में रितिक और पूजा की प्रेम कहानी दिखाई गई है. निर्देशक ने कहा कि रहमान ने इस दुनिया को सुंदर रूप से निर्मित करने में काफी मदद दी है.
इस फिल्म के निमार्ता सिद्धार्थ राय कपूर और सुनीता गोवारिकर हैं. फिल्म 12 अगस्त को रिलीज होगी.
अमेरिका में बंदूक संस्कृति पर लगाम क्यों नहीं लग सकती?
‘मैंने कुछ महीने पहले कहा था, उससे कुछ महीने पहले भी कहा था और हर बार जब हम गोलीबारी की घटना देखेंगे तो दोबारा कहूंगा. इससे निपटने के लिए हमारा सोचना या प्रार्थना करना ही काफी नहीं है.’
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का यह बयान पिछले साल अक्टूबर में एक कॉलेज में हुई गोलीबारी की घटना के बाद आया था. उन्होंने और भी कई बातें कहीं जिनका मजमून यह था कि अमेरिकी समाज में बंदूक की जो संस्कृति गहरे जम चुकी है उसका इलाज हो. ओबामा कई मौकों पर यह बात कहते रहे हैं. उन्हें अमेरिका में हथियार कानूनों को सख्त बनाने का मुखर समर्थक माना जाता है. लेकिन, दुनिया में सबसे ताकतवर माने जाने वाले इस शख्स की भी इस मुद्दे पर कुछ नहीं चल पा रही.
हाल में ऑरलैंडो गे-नाइटक्लब में गोलीबारी की घटना के बाद एक बार फिर अमेरिका में बंदूक संस्कृति पर बहस शुरू हो गई है. ऑरलैंडो की घटना में 50 लोग मारे गए थे जबकि 58 अन्य घायल हुए. इसे 9/11 के बाद की सबसे बड़ी हिंसक वारदात कहा जा रहा है.
लेकिन इतनी बड़ी घटना के बाद भी बीते हफ्ते अमेरिकी संसद में शस्त्र नियंत्रण के लिए लाए गए प्रस्ताव बुरी तरह गिर गए. सीनेट में इस संबंध में चार प्रस्ताव पेश किए गए थे, लेकिन चारों ही प्रस्ताव सीनेट में आगे बढ़ाए जाने के लिए जरूरी न्यूनतम 60 वोट हासिल नहीं कर पाए. इनमें से एक प्रस्ताव यह भी था कि किसी व्यक्ति को बंदूक बेचे जाने से पहले उसकी पृष्ठभूमि की गहराई से जांच की जाए. इसके अलावा आए प्रस्तावों में पृष्ठभूमि जांच तंत्र के लिए वित्तीय कोष बढ़ाने, आतंकी या अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की पृष्ठभूमि जांचने के लिए ज्यादा समय देने और आतंकी निरीक्षण सूचियों में दर्ज लोगों को बंदूकें न बेचे जाने की बात कही गई थी.
सवाल उठता है कि पूरी दुनिया को झकझोर देने वाली ऐसी घटनाओं के बावजूद अमेरिका में शस्त्र नियंत्रण पर होने वाली चर्चा किसी ठोस मुकाम पर क्यों नहीं पहुंचती.
अमेरिका में बंदूक रखना उतना ही आसान है जैसे भारत में लाठी-डंडा रखना. यहां 88.8 फीसदी लोगों के पास बंदूकें हैं जो दुनिया में प्रति व्यक्ति बंदूकों की संख्या के लिहाज से सबसे बड़ा आंकड़ा है. यही वजह है कि प्रति 10 लाख आबादी पर सरेआम गोली चलाने (मास शूटिंग) की घटनाएं अमेरिका में सबसे ज्यादा हैं. 2012 में इनकी दर 29.7 रही. दिसंबर 2012 में सैंडी हुक स्कूल में हुई मॉस शूटिंग के बाद अमेरिका में ऐसी कुल 998 घटनाएं हो चुकी हैं. इनमें 1105 लोग मारे गए हैं और 3929 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. यहां सिर्फ उन्हीं घटनाओं की बात हो रही है जिनमें चार या चार से ज्यादा लोगों को या तो निशाना बनाया गया था या फिर इतने ही लोगों की जान गई थी. ऐसे मामलों की संख्या बहुत ज्यादा मानी जाती है जो दर्ज ही नहीं हो पाते. मास शूटिंग के अलावा अमेरिका में बंदूक से खुदकुशी के मामले भी सबसे ज्यादा हैं. 2013 में ऐसी 21 हजार से भी ज्यादा घटनाएं सामने आईं.
अमेरिका में बंदूक संस्कृति की जड़ें इसके औपनिवेशिक इतिहास, संवैधानिक प्रावधानों और यहां की राजनीति में देखी जा सकती हैं. कभी ब्रिटेन के उपनिवेश रहे अमेरिका का इतिहास आजादी के लिए लड़ने वाले सशस्त्र योद्धाओं की कहानी रहा है. बंदूक अमेरिका के आजादी के सेनानियों के लिए आंदोलन का सबसे बड़ा औजार रही. इसलिए यह नायकत्व और गौरव की निशानी बन गई.
यही वजह है कि जब नागरिक अधिकारों को परिभाषित करने के लिए 15 दिसंबर 1791 को अमेरिकी संविधान में दूसरा संशोधन हुआ तो उसमें बंदूक रखने को एक बुनियादी अधिकार माना गया. इस संशोधन में कहा गया, ‘राष्ट्र की स्वाधीनता सुनिश्चित रखने के लिए हमेशा संगठित लड़ाकों की जरूरत होती है. हथियार रखना और उसे लेकर चलना नागरिकों का अधिकार है जिसका उल्लंघन नहीं होना चाहिए.’ अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन का भी कहना था कि बंदूक अमेरिकी नागरिक की आत्मरक्षा और उसे राज्य के उत्पीड़न से बचाने के लिए जरूरी है. यही वजह है कि जब भी बंदूकों पर लगाम लगाने की बात होती है तो इसे एक तरह से संविधान पर मंडरा रहे खतरे की तरह पेश किया जाता है.
संवैधानिक व्याख्या को बदलने की अड़चन के बीच अमेरिका की शक्तिशाली हथियार लॉबी भी हथियारों पर नियंत्रण के प्रयासों की मुखर विरोधी है. इनमें नेशनल राइफल एसोसिएशन (एनआरए) नाम सबसे ऊपर आता है. इसका अनौपचारिक नारा ही है कि ‘बंदूकें किसी को नहीं मारतीं, लोग एक-दूसरे को मारते हैं.’ सदस्यों की संख्या 50 लाख होने की वजह से इस संगठन का राजनीतिक वजन भी खासा है. विधायिका के स्तर पर हथियार कानूनों को सख्त बनाने की कोशिशों को रोकने के लिए यह हथियार समर्थक जनप्रतिनिधियों की चुनाव लड़ने और जीतने में मदद करता है. इसने बाकायदा एक ‘पॉलिटिकल विक्ट्री फंड’ बना रखा है. एनआरए सदस्य और अधिकारी इंटरनेट और सोशल मीडिया खूब पर सक्रिय रहते हैं. वे संवैधानिक अधिकार और नागरिक आजादी का हवाला देकर हथियार कानूनों को सख्त बनाने के पैरोकारों की जमकर खिंचाई करते हैं. पिछले साल ओबामा ने इस संगठन का नाम लिए बगैर कहा था, ‘विचार करें कि क्या आपका संगठन आपके विचारों का प्रतिनिधित्व करता है.’
2012 में सैंडी हुक में गोलीबारी की घटना के बाद हथियार कानूनों को सख्त बनाने की दिशा में कुछ ठोस प्रयास हुए थे. लेकिन वे सफल न हो सके. तब भी सीनेट में हथियार कानूनों को सख्त बनाने के प्रस्ताव गिर गए थे. रिपब्लिकन पार्टी के नेता ऐसे बदलाव के मुखर विरोधी हैं. इस समय अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकनों का दबदबा है. एनआरए की तरह वे भी मानते हैं कि बंदूक रखना और इसे लेकर चलना आत्मरक्षा के लिए जरूरी है.
जहां तक आम जनता की बात है तो हथियार कानूनों को सख्त बनाने पर उसकी राय बंटी हुई है. प्यू रिसर्च सेंटर के एक सर्वेक्षण के मुताबिक बीते 20 वर्षों में बंदूक पर नियंत्रण के बजाय जनमानस इस विचार की तरफ ज्यादा झुका है कि बंदूक रखना हर शख्स का अधिकार है. इसमें यह भी पता चला है कि हथियारों का समर्थन करने वालों में श्वेत आबादी (जिसके राजनीतिक रूप से रुढ़िवादी होने की संभावना ज्यादा होती है), रिपब्लिकन या ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है जिन्होंने स्नातक तक पढ़ाई नहीं की है. पिछले साल जुलाई में आए इस सर्वेक्षण के मुताबिक सैंडी हुक जैसी घटना ने भी लोगों की सोच में कोई बदलाव नहीं किया है.
साफ है कि जब तक इन हालात में कोई बदलाव नहीं होता तब तक गोलीबारी की ये घटनाएं नियमित अंतराल पर होती रहेंगी. जैसा कि ऑरलैंडो की घटना के बाद अपनी संपादकीय टिप्पणी में अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना था कि आज ऑरलैंडो है तो कल कोई और शहर होगा.
कोई BJP नेता उद्धव ठाकरे को 'शोले' का असरानी बताए, हम बर्दाश्त नहीं करेंगे: शिवसेना
महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के बीच पोस्टर वार अब मजाक की हद से आगे बढ़कर जुबानी जंग तक पहुंच गया है. बुधवार को शिवसेना ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि किसी बीजेपी नेता ने उनके प्रमुख उद्धव ठाकरे की तुलना फिल्म ‘शोले’ के जेलर से की है और पार्टी इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगी.
इससे पहले शिवसेना ने मंगलवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का मजाक उड़ाने वाले पोस्टर चस्पां किए और पार्टी की शहर इकाई के प्रमुख आशीष शेलार का दक्षिण मुंबई में पुतला फूंका. पार्टी चीफ के बदले पार्टी चीफ की इस नीति के कारण सत्तारूढ़ गठबंधन के दोनों सहयोगी दलों के बीच की तल्खी और बढ़ गई है.
हालांकि इस ओर केंद्र में सत्तासीन बीजेपी ने भी चेताया है कि यदि शिवसेना नेतृत्व अपने कार्यकर्ताओं पर लगाम कसने में विफल रहता है तो वह माकूल जवाब देने में सक्षम है.
दरअसल, यह पूरा माजरा बीजेपी के प्रकाशन ‘मनोगत’ में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता माधव भंडारी के लेख से शुरू हुआ. आलेख में भंडारी ने शिवसेना को सत्ता से अलग होने की चुनौती दी थी और पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की तुलना ‘शोले’ में हास्य कलाकार असरानी की जेलर वाली भूमिका से की थी.
इस तुलना से बौखलाए शिवसेना कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को शहर में ऐसे पोस्टर चस्पां किए, जिसमें अमित शाह और माधव भंडारी ‘शोले’ के किरदारों के परिधान में नजर आ रहे हैं. इसमें अमित शाह को मुख्य विलेन गब्बर सिंह के रूप में दिखाया गया.
शिवसेना ने इसके अलावा बीजेपी शहर ईकाई के प्रमुख आशीष शेलार का पुतला भी दहन किया गया. जबकि कुछ दिनों पहले ही बीजेपी ने शिवसेना को पार्टी नेताओं के पुतला दहन के खिलाफ चेताया था.
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य बीजेपी के सचिव और विधान पाषर्द सुजीत सिंह ठाकुर ने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों में शिवसेना कार्यकर्ताओं के लगातार उकसावे के बावजूद बीजेपी शांत रही है. अगर कोई इसका दूसरा अर्थ निकाल रहे हैं तो उन्हें स्पष्ट रूप से यह समझना चाहिए कि बीजेपी माकूल जवाब देने के लिए सक्षम है.’
अंधेरी में आग लगने से 5 बच्चों समेत एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत
मुंबई के अंधेरी वेस्ट इलाके में एक दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई है. यहां बुधवार देर रात एक मेडिकल शॉप में भीषण आग लग गई, जिस कारण उसके ठीक ऊपर पहली मंजिल पर सो रहे 9 लोग आग की चपेट में आ गए. घायलों को अस्पताल भी ले जाया गया, लेकिन सभी की मौत हो गई. दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया.
मामला अंधेरी पश्चिम के जुहू गली का है. मरने वालों में दो महिलाएं, एक पुरुष और पांच बच्चे शामिल हैं. बताया जाता है कि देर रात किसी समय मेडिकल स्टोर में आग लगी. अंदर रखी दवाओं और केमिकल्स की वजह से आग ने जल्द ही भवायह रूप अख्तियार कर लिया. देखते ही देखते स्टोर के ऊपर पहली मंजिल भी आग की चपेट में आ गई. आस-पास के लोग भी सो रहे थे, इसलिए किसी को इस घटना की खबर नहीं लगी.
बाद में जब लोगों के चीखने और चिल्लाने की आवाज सुनाई दी तो पड़ोसियों की नींद खुली. सभी ने अपने बूते आग बुझाने की कोशिश शुरू की और फायर स्टेशन को फोन किया गया. दमकल की गाड़ियां भी समय से पहुंचीं, लेकिन जब तक ऊपर सो रहे लोगों को निकाला जाता वो बुरी तरह झुलस चुके थे. आनन फानन में सभी आठ पीड़ितों को कूपर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी.
पुलिस ने बताया कि आग लगने के कारणों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है. लेकिन शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जाहिर की जा रही है. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.
उत्तराखंड के मुख्य सचिव को मिली PM मोदी की शाबाशी
सौर पंप कार्यक्रम में भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने वाले दस राज्यों में उत्तराखंड ने भी अपनी जगह बनाई है। इस दिशा में हुए बेहतर काम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह की तारीफ की। वे बुधवार को देशभर के सभी मुख्य सचिवों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए रूबरू थे।
मोदी ने यह भी कहा कि बिजली या डीजल से चलने वाले ज्यादा से ज्यादा पंप सेट को सौर ऊर्जा में परिवर्तित किया जाए। इसके अलावा उन्होंने तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना के अलावा आपदा प्रबंधन की तैयारियों के बारे में मुख्य सचिव से जानकारी ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह से प्रगति (प्रोएक्टिव गवेर्नेस एंड टाइमली इप्लीमेंटेशन) के तहत जोशीमठ में बन रही तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना के बारे में जानकारी ली।
मुख्य सचिव ने बताया कि 3846 करोड़ रुपये से निर्माणाधीन 520 मेगावॉट की रन ऑफ द रिवर परियोजना से उत्तर भारत के राज्यों को बिजली मिलेगी। इसमें 130 मेगावाट क्षमता की चार यूनिट होंगी। एनटीपीसी को जोशीमठ के भलगांव में चुगान की अनुमति उत्तराखंड सरकार ने दे दी है।
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के इको सेंसिटिव जोन के परिसीमन को हटाने (डीलिमिटेशन) के बारे में कैबिनेट में फैसला हो गया है। इसे मंजूरी के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ को भेजा जा रहा है। बताया गया कि इस परियोजना में 12 किमी की सुरंग बननी थी। सात किमी सुरंग बन चुकी थी लेकिन दैवीय आपदा के दौरान यह क्षतिग्रस्त हो गयी।
इसे दोबारा बना लिया गया है। शेष सुरंग बनाने का कार्य चल रहा है। राज्य सरकार ने 29000 निजी नलकूपों को सौर पंप में परिवर्तित करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा है। इसकी अनुमानित लागत 1362 करोड़ रुपये है। बाढ़ से बचाव की तैयारियों के बारे में मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य ने फ्लड प्लेन जॉनिंग एक्ट-2013 बनाकर लागू किया है।
इसके तहत बाढ़ संभावित क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है। पर्वतीय नदियों से गाद देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर की नदियों में जमा होे जाती है। इन जनपदों में नदियों में जमा गाद को हटाने के लिए चुगान की अनुमति दी गई है। एसडीआरएफ के 425 जवान सात संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं। इसके अलावा 107 रेस्क्यू टीम भी तैयार हैं। सभी जनपदों में राहत एवं बचाव कार्य की मॉक ड्रिल कर ली गई है।
उत्तराखंड में आईटी सेक्टर को मिलेगा नया औद्योगिक पैकेज
उत्तराखंड में आईटी और आईसीटी इंडस्ट्री को आकर्षित करने के लिए सरकार नया औद्योगिक पैकेज लाने जा रही है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने इसके लिए आईटी इंडस्ट्री उत्पादन क्षेत्र के 10 अग्रणी राज्यों की स्टडी के बाद यह पैकेज तैयार किया है।
राज्य में सिडकुल के अधीन नए आईटी और इलेक्ट्रोनिक्स इंडस्ट्री क्षेत्र विकसित करने के साथ उद्योगों को विभिन्न करों में छूट, स्टांप शुल्क में रियायत और रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराने जैसे प्रावधान इसमें रखे गए हैं। पालिसी ड्राफ्ट को सचिव समिति की बैठक में रखा जा चुका है अब ड्राफ्ट का अंतिम प्रारूप सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
बंगलूरू और हैदराबाद जैसे आईटी इंडस्ट्रियल हब प्रदेश में विकसित करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग विशेष पैकेज तैयार कर रहा है। आईटी उद्योग को आकर्षित करने के लिए अब तक हुए प्रयासों का प्रभावी नहीं रहे। विभाग अब नए सिरे से पालिसी पर काम कर रहा है, जिसमें राज्य की इंडस्ट्रियल एसोसिएशनों के साथ वार्ता कर तैयार किया गया है। तैयार ड्राफ्ट को सचिव समिति की बैठक में 14 जून को रखा जा चुका है, जिसमें आए सुझावों के बाद बदलाव कर फाइनल कर दिया गया है।
प्रदेश में आईटी और इलेक्ट्रोनिक की बड़ी कंपनियों में माइक्रोमैक्स और एचपी ही हैं। माइक्रोमैक्स दो माह पूर्व प्रदेश में इंफोर्मेशन और कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए अलग से पॉलिसी नहीं होने के चलते इंडस्ट्री शिफ्ट करने की चेतावनी दे चुकी है। अन्य राज्यों में जो सहूलियतें आईटी और आईसीटी इंडस्ट्री को मिल रही हैं वही कंपनी यहां भी चाहती है। दो बड़ी कंपनियों के अलावा प्रदेश में 60 छोटी इकाइयां भी काम कर रही हैं।
इंग्लैंड के प्रिंस चार्ल्स के साथ बुआई करने वाले बैल चोरी
इंग्लैंड के प्रिंस चार्ल्स ने देहरादून के नवधान्य फार्म में किसान बनकर जिस लालू और धोरिया के साथ जौ का बीज बोया था वे लालू और धोरिया नामक दोनों बैल सोमवार की रात चोरी हो गए। इनके अलावा बैलों की एक और जोड़ी नवधान्य फार्म गायब हो गई है।
इंग्लैंड के राजकुमार चार्ल्स सात नवंबर 2013 को दून के रामगढ़ गांव आए थे। यहां स्थित नवधान्य जैविक फार्म में उन्होंने लालू और धोरिया बैलों के साथ जौ की बुआई की।
करीब सवा घंटे चार्ल्स खेत में रहे और प्रसिद्ध पर्यावरणविद एवं नवधान्य की संस्थापक डॉ. वंदना शिवा से उन्होंने किसानों के बारे में जानकारी ली थी।
नवधान्य के कार्यकारी निदेशक डॉ. विनोद भट्ट ने बताया कि प्रिंस चार्ल्स ने जिस बैल की जोड़ी से सात नवंबर 2013 को नवधान्य फार्म पर हल चलाया था, बैलों की वह जोड़ी एवं एक अन्य जोड़ी सोमवार की रात फार्म से चोरी हो गई है।
स्थानीय पुलिस में इसकी रिपोर्ट लिखाई गई है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि चोर उन्हें शीशम बाड़ा के जंगल से शिवालिक की पहाड़ियों से ले गए हैं।
रेप पीड़िता के साथ सेल्फी खींचकर तफरी करती दिखीं महिला आयोग की सदस्य
ज्यादा दिन नहीं हुए जब राजस्थान से आई एक खबर ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया था। खबर थी एक विवाहिता पर उसके ससुरालियों द्वारा किए गए जुल्मों की, जिसमें उसके साथ पति की शह पर गैंगरेप करते हुए उसके हाथ पर लिख दिया गया था ‘मेरा बाप चोर है।’
ऐसे में जब हर किसी की सहानभूति उस पीड़िता के साथ है और हर कोई उसे न्याय दिलाना चाहता है तब उससे मिलने पहुंची राजस्थान महिला आयोग की सदस्याएं तफरी के मूड़ में दिखीं। आयोग की अध्यक्षा और एक सदस्या तो पीड़िता के साथ सेल्फी खींचने में लगी रही।
इसकी तस्वीरें वायरल हुई तो मामले में लीपापोती भी ऐसी कि सुनने वाले ताज्जुब में पड़ जाएं। आयोग अध्यक्षा ने सेल्फी खींचने वाली सदस्य को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है जबकि वह खुद उस समय मौके पर मौजूद थीं।
जानकारी के अनुसार मामला राजस्थान की राजधानी जयपुर का है। जहां जयपुर उत्तर के महिला थाने में मौजूद पीड़िता से मिलने के लिए आयोग की अध्यक्षा सुमन शर्मा और सदस्य सौम्या गुर्जर गईं थी। इसी दौरान पीड़िता से बातचीत के बाद सौम्या गुर्जर उसके साथ सेल्फी खींचने लगी।
खास बात ये रही कि उनके साथ अध्यक्ष सुमन शर्मा भी उस समय वहीं पर थी। इस दौरान दोनों खूब खिलखिलाकर पीड़िता से बातचीत कर रही थीं। आयोग की दोनों सदस्यों का यह संवेदनहीन रवैया पूरे आयोग को कटघरे में खड़ा करने वाला है, क्योंकि जब उन्हें पीड़िता के साथ संवेदना बरतते हुए उसके दुख को कम करने का प्रयास करना चाहिए था तब वह तफरी के मूड़ में दिखीं।
बहरहाल तस्वीरें खींची गईं थी तो सामने भी आनी थी। खासकर ये सोशल मीडिया में आई तो इनको लेकर बवाल मच गया। देखते ही देखते यह तस्वीरें वायरल हुई तो हंगामा खड़ा हो गया। इसके बाद महिला आयोग बैकफुट पर आ गया।
मीडिया में यह मामला आया तो आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने सदस्य सौम्या गुर्जर को नोटिस भेजकर जवाब मांग लिया, लेकिन सवाल ये है कि जब वह खुद मौके पर मौजूद थीं और सेल्फी खिंचवाने में लगी थी तब सवाल जवाब की खानापूर्ति से क्या हासिल होगा।
हालांकि आयोग की अध्यक्ष की दलील है कि यह फोटो किसी और ने खींच कर डाला है सेल्फी नहीं ली गई थी। हालांकि तस्वीर उनके इस बयान की चुगली कर रही है। वहीं इससे पहले उन्होंने टीवी पर सफाई दी थी कि आमतौर पर जब हम ऐसी जगह जाते हैं तो पीड़िता काफी डरी सहमी होती है इसलिए उसका मन हल्का करने के लिए इस तरह की हल्की फुल्की बातें की जाती थी। सेल्फी भी इसी लिए ली गई थी। मामले पर विवाद शुरू हुआ तो तुरंत उनके सुर बदल गए।
चांदीपुर में भारत-इस्राइल की मिसाइल का सफल परीक्षण
बालेश्वर। भारत ने इस्राइल के साथ संयुक्त रूप से विकसित की गई सतह से हवा में मार करने वाली एक नई मिसाइल का आज सफलतापूर्वक प्रायोगिक परीक्षण किया। यह परीक्षण ओडिशा के तट के पास स्थित रक्षा ठिकाने से किया गया। डीआरडीओ के एक अधिकारी ने कहा कि मध्यम दूरी की मिसाइल (एमआर-एसएएम) भारत और इस्राइल के साझा उपक्रम का एक उत्पाद है। इसे चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से सुबह लगभग आठ बजकर 15 मिनट पर एक मोबाइल लॉन्चर की मदद से दागा गया।
उन्होंने कहा कि यह प्रायोगिक परीक्षण सफल रहा और इसने सभी लक्ष्य पूरे कर लिए। अधिकारियों ने कहा कि मिसाइल को आईटीआर के लॉन्च पैड-3 पर रखा गया था। यह रेडारों से सिग्नल मिलने के बाद सक्रिय हो गई थी। मिसाइल द्वारा बंगाल की खाड़ी के उपर गतिशील हवाई लक्ष्य को अवरूद्ध किए जाने में मानवरहित वायुयान (यूएवी) ‘बेंशी’ की एक अहम भूमिका रही।
उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रणाली में मिसाइल के अलावा बहु संचालनात्मक निरीक्षण और खतरे की सूचना देने वाला रेडार (एमएफ एसटीएआर) लगा है ताकि मिसाइल और उसके रास्ते की पहचान की जा सके और उसका दिशानिर्देशन किया जा सके।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक ने कहा कि एमएफ-स्टार के साथ यह मिसाइल प्रयोगकर्ताओं को हवाई खतरों को अप्रभावी करने की क्षमता से लैस करेगी। डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित भारतीय रक्षा अनुसंधान प्रयोगशाला (डीआरडीएल) ने इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्री के साथ मिलकर संयुक्त रूप से यह मिसाइल विकसित की है।
सतह से हवा में लंबी और मध्यम दूरी तक की मारक क्षमता रखने वाली ऐसी 100 मिसाइलों का प्रति वर्ष उत्पादन करने के लिए मेसर्स भारत डायनेमिक्स लिमिटेड में एक नई उत्पादन इकाई की स्थापना की गई है। इस मिसाइल का परीक्षण कल ही होना था लेकिन अंतिम समय पर इसे आज के लिए टाल दिया गया था।
अधिकारियों ने कहा कि इससे पहले, भारतीय नौसेना ने सतह से हवा में लंबी दूरी तक की मारक क्षमता रखने वाली मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। यह परीक्षण 30 दिसंबर 2015 को पश्चिमी समुद्री तट पर आईएनएस कोलकाता से किया गया था।
उन्होंने कहा कि सतह से हवा में मारने वाली इस तरह की मध्यम दूरी की मिसाइलों की मारक क्षमता 50 से 70 किलोमीटर की होती है। ये मिसाइलें भारत के अस्त्रागार में फिलहाल मौजूद मिसाइलों के अंतर को पाट सकती हैं।
प्रयोगकर्ता परीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद इन मिसाइलों को तीनों सेवाओं में शामिल किया जाएगा। जिला राजस्व अधिकारी ने कहा कि मिसाइल का सफल परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए बालेश्वर जिला प्रशासन ने रक्षा अधिकारियों से परामर्श करके आईटीआर के लॉन्च पैड संख्या 3 के ढाई किलोमीटर के दायरे में रहने वाले 3652 नागरिकों को अस्थायी रूप से पास के आश्रय केंद्रों में स्थानांतरित कर दिया। बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित ओडिशा के तीन जिलों- बालेश्वर, भद्रक और केंद्रपाड़ा के मछुआरों से कहा गया था कि वे परीक्षण के समय समुद्र में न जाएं।







