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कश्मीर पर पाक का नया 'पैंतरा', इस बीच अमेरिकी सांसदों ने दिया है बड़ा झटका

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कश्मीर हिंसा को लेकर पाकिस्तान हर बार नया पैंतरा खेल रहा है. पहले उसने आतंकी को मार गिराए जाने के लिए भारत की ‘निंदा’ कर दी. अब पाकिस्तान दुनिया के 5 बड़े देशों के सामने ‘शिकायत’ लेकर पहुंच गई है. पाक ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के पांच स्थायी सदस्य देशों (पी-5) से कहा कि वे कश्मीर में तनावपूर्ण हालात का संज्ञान लें. इधर आतंकवाद मामले में अमेरिकी सांसदों एवं विशेषज्ञों ने पाक को बड़ा झटका दिया है.
इससे पहले पी-5 से पाक ने कहा है कि भारत से अपील करें कि वह हिंसा प्रभावित घाटी में लोगों के ‘मानवाधिकारों का सम्मान’ करे. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बयान दिया है कि विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी ने चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के दूतों को कश्मीर के हालात की जानकारी दी. हालांकि, इससे पहले ही अमेरिका ने कह दिया है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है.
पाकिस्तान के इन सब पैंतरों के बीच अमेरिकी सांसदों एवं विशेषज्ञों ने पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद में कटौती करने को कहा है. इसके साथ ही पाक को आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश के तौर पर सूचीबद्ध करने की अपील की है. विशेषज्ञों ने हा कि आतंकवादी तत्वों को समर्थन देने वाला और चीजों को जोड़ तोड़ कर पेश करने वाला यह देश(पाकिस्तान) अमेरिका को मूर्ख समझता रहा है.
सदन की विदेश मामलों की समिति की एशिया एवं प्रशांत उपसमिति के अध्यक्ष मैट सैल्मन ने कहा, ‘वे हमें मूर्ख बना रहे हैं. वे हमें मूर्ख समझते हैं. यह माफिया को धन देने की तरह है.’ पूर्ववर्ती बुश काल के शीर्ष राजनयिक जाल्मे खलीलजाद ने सांसदों से कहा कि पाकिस्तानी नेतृत्व ने किस प्रकार दशकों से अमेरिकी प्रणाली के साथ खेल खेला है.
उन्होंने कहा, ‘यदि मैं गैरराजनयिक शब्द का इस्तेमाल कर सकता हूं तो हम बहुत भोले भाले रहे हैं.’ सैल्मन ने खलीलजाद की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘भोले भाले मूर्ख अधिकतर अमेरिकी यह देख सकते हैं और हमारे तथाकथित नेताओं को यह बात अभी तक समझ नहीं आई.’
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के लॉन्ग वार जर्नल के वरिष्ठ संपादक बिल रोजियो ने खलीलजाद से अपील की कि पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद में कटौती की जाए. उसे आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश के रूप में सूचीबद्ध किया जाए. रोजियो ने कांग्रेस की सुनवाई के दौरान खलीलजाद एवं अन्य विशेषज्ञों के साथ ‘पाकिस्तान: आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मित्र या दुश्मन’ विषय पर अपना पक्ष रखा.
उन्होंने कहा, ‘अंतत: वे हमें मूर्ख समझकर हमसे व्यवहार कर रहे हैं और हम पाकिस्तान को धन देने के लिए बहुत आतुर हैं.’ खलीलजाद ने बुश के शासनकाल में अफगानिस्तान में अमेरिकी राजदूत एवं संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि समेत विभिन्न राजनयिक पदों की जिम्मेदारी संभालते हुए पाकिस्तान नेतृत्व के साथ हुए अनुभव को साझा किया.
उन्होंने जानकारी दी कि, ‘पाकिस्तान बहुत चालाकी से चीजों को तोड़ मरोड़कर पेश करके हमारा इस्तेमाल करता रहा है. मुझे यह कहना होगा.’ उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस के विशिष्ट सदस्यों तक पहुंचते हैं. वे उन्हें यात्रा के लिए आमंत्रित करते हैं. वे उन्हें लुभाते हैं, वे एक बार फिर वादा करते हैं और हमारे बयानों का ऐसा निष्कर्ष निकालते हैं जो तथ्यों के सापेक्ष ‘हैरान करने वाले’ होते हैं.
यह पूछे जाने पर कि अमेरिका उसी नीति को क्यों अपनाता रहा है. खलीलजाद ने कहा कि अपने कृत्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की पाकिस्तान की क्षमता इसका एक कारण रही है. पूर्व शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा, ‘पाकिस्तान के साथ संबंधों का मेरा अनुभव यह है कि वे आपको तभी कुछ देंगे, जब उन्हें यह पता होगा कि उन्हें कुछ मिलने वाला है.’
कांग्रेस के सदस्य डाना रोहराबाचर ने कहा कि पाकिस्तान सरकार और सउदी अरब ने तालिबान एवं हक्कानी नेटवर्क बनाया. रोहराबाचर ने कहा कि अमेरिका का पाकिस्तान को मदद देना ‘मूखर्तापूर्ण’ है. उन्होंने कहा, ‘यह भ्रष्ट दमनकारी शासन बलूचिस्तान के लोगों को मार रहा है. बलूचिस्तान के लोगों को यह समझना चाहिए कि अमेरिका एक भ्रष्ट, आतंकवादी समर्थन शासन से उनकी स्वतंत्रता एवं स्वाधीनता के लिए उनके साथ है.’
उन्होंने कहा, ‘ऐसी ही स्थिति सिंधियों के साथ है. ऐसे ही हालात पाकिस्तान के अन्य समूहों के साथ हैं. यदि कोई शासन लोगों की जान लेता है, दमन करता है और भ्रष्ट है और इसके बावजूद हम उन्हें किसी प्रकार का समर्थन देना जारी रखते हैं.. तो यह वाकई बेतुका है.’ आतंकवाद, अप्रसार एवं व्यापार उपसमिति के रैंकिंग सदस्य विलियम कीटिंग ने पैनल के सदस्यों से सवाल किया कि क्या आईएसआईएस सरकार के भीतर एक सरकार है.
अमेरिकन यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर ट्रीसिया बैकन ने कहा, ‘यह पाकिस्तान के भीतर एक दुष्ट संस्था कतई नहीं है. यह स्वतंत्र रूप से या स्वयं संचालन नहीं करता. यह पाकिस्तानी सेना का एक हथियार है. यह पाकिस्तानी सेना की नीतियां लागू कर रहा है. यह पाकिस्तानी सेना की ओर से नीतियां लागू कर रहा है.’
बैकन ने कहा, ‘रोजियो ने कहा कि आईएसआई पाकिस्तानी सेना की एक शाखा है. यह पाकिस्तानी सेना की इच्छा को अंजाम दे रहा है जो वास्तव में पाकिस्तानी सरकार है. (चयनित) सरकार पाकिस्तानी सेना का केवल चेहरा है.’ खलीलजाद ने कहा, ‘मैं अपने सहकर्मी से सहमत हूं.’ सैल्मन ने कहा कि निजी रूप से उनका मानना है कि अमेरिका को पहले कदम के तौर पर पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए.

श्वेत पत्र में चीन का दावा, 2000 साल से दक्षिण चीन सागर पर उसका अधिकार

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चीन ने आज संयुक्त राष्ट्र समर्थित न्यायाधिकरण के उस फैसले के खिलाफ श्वेत पत्र जारी किया है, जिसने दक्षिण चीन सागर (एससीएस) में उसके ऐतिहासिक अधिकारों को निरस्त कर दिया है। श्वेत पत्र जारी करते हुए चीन ने कहा कि इस रणनीतिक क्षेत्र में बीजिंग का दावा 2000 साल पुराना है।
चीन को कूटनीतिक तौर पर एक बड़ा झटका देते हुए स्थायी मध्यस्थता अदालत ने कल रणनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण दक्षिण चीन सागर में इस कम्युनिस्ट देश के दावों को निरस्त कर दिया था।
हेग स्थित अदालत ने कहा है कि चीन ने फिलीपीन के संप्रभुता के अधिकारों का उल्लंघन किया है। उसने कहा कि चीन ने कृत्रिम द्वीप बनाकर मूंगे की चट्टानों वाले पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है।
श्वेत पत्र में कहा गया कि चीन का 2000 साल से दक्षिण चीन सागर पर दावा है और याचिका दायर करने वाला फिलीपीन चीनी क्षेत्र पर कब्जा कर रहा है।
इसमें कहा गया कि दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपीन के बीच विवादों के मूल में वे क्षेत्रीय मुद्दे हैं, जो 1970 के दशक में शुरू हुई फिलीपीन की घुसपैठ और कुछ द्वीपों एवं चीन के नांशा कुंदाओ (नांशा द्वीपसमूहों) पर अवैध कब्जे के कारण पैदा हुए हैं।
चीन और फिलीपीन के बीच दक्षिण चीन सागर को लेकर उपजे प्रासंगिक विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने को तैयार है चीन शीर्षक वाले दस्तावेज में कहा गया, फिलीपीन ने इस तथ्य को छिपाने के लिए और अपने क्षेत्रीय दावे बरकरार रखने के लिए कई बहाने गढ़े हैं।
स्टेट काउंसिल इंफॉर्मेशन ऑफिस की ओर से जारी श्वेत पत्र में कहा गया कि फिलीपीन का दावा इतिहास और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार आधारहीन है।
पत्र में कहा गया कि इसके अलावा, समुद्र के अंतरराष्ट्रीय कानून के विकास के साथ दक्षिण चीन सागर के कुछ नौवहन क्षेत्रों को लेकर चीन और फिलीपीन में नौवहन सीमा-निर्धारण संबंधी विवाद भी पैदा हो गया।
श्वेत पत्र में फिलिपीन पर हमला बोलते हुए कहा गया कि मनीला ने चीन और फिलीपीन के बीच के द्विपक्षीय सहमति को नजरअंदाज करते हुए बार-बार प्रासंगिक विवादों को जटिल करने वाले कदम उठाए हैं, जिससे वे बढ़े ही हैं।
इस श्वेत पत्र में कहा गया है कि फिलिपीन ने घुसपैठ और अवैध कब्जा करके चीन के नांशा द्वीपसमूह के कुछ द्वीपों पर सैन्य प्रतिष्ठान बनाए हैं। उसने जानबूझकर चीन की ओर से लगाए गए सर्वेक्षण संकेतक नष्ट कर दिए और एक सैन्य वाहन को अवैध रूप से चलाकर चीन के रेनाई जियाओ द्वीप पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की।
इसमें कहा गया कि फिलिपीन चीन के हुआनग्यान दाओ के क्षेत्र पर भी दावा करता है। यह इसे अवैध रूप से कब्जाने की कोशिश कर चुका है और इसने जानबूझकर हुआनग्यान दाओ की घटना को अंजाम दिया था।
श्वेत पत्र के अनुसार, फिलिपीन ने बार-बार चीनी मछुआरों को प्रताड़ित किया और मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर हमला किया।
पत्र में कहा गया है कि जनवरी 2013 में, फिलिपीन गणतंत्र की तत्कालीन सरकार ने एकपक्षीय तरीके से दक्षिण चीन सागर मध्यस्थता शुरू कर दी थी। ऐसा करके उसने द्विपक्षीय वार्ता के जरिए विवादों को सुलझाने के चीन के साथ चल रहे समझौते का उल्लंघन किया।
इसमें कहा गया, फिलिपीन ने तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा है, कानूनों की गलत व्याख्या की है और बहुत से झूठ गढ़े हैं ताकि दक्षिण चीन सागर में चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री अधिकार एवं हितों को नकारा जा सके।
आगे श्वेत पत्र में कहा गया है कि फिलिपीन के एकपक्षीय अनुरोध पर स्थापित न्यायाधिकरण का यह अधिकारक्षेत्र नहीं है और इसकी ओर से सुनाए गए फैसले अमान्य हैं और ये बाध्यकारी नहीं हैं। चीन ऐसे फैसलों को न तो स्वीकार करता है और न ही मान्यता देता है।

गांगुली का बड़ा बयान, टीम इंडिया को मिल सकता है नया बॉलिंग कोच

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अनिल कुंबले के हेड कोच बनने के साथ ही टीम इंडिया के लिए और बड़ी खबर मिल सकती है। सूत्रों के मुताबिक पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जहीर खान भारतीय टीम के अगले बॉलिंग कोच बन सकते हैं। खबर है कि अनिल कुंबले अनुभवी भारतीय गेंदबाजों की तलाश कर रहें है, जो इस रोल के लिए फिट हों।
कुंबले को हेड कोच चुनने वाली कमेटी के सदस्य और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने कहा कि जहां तक सहायक कोच चुनने की बात है, गेंद पूरी तरह से बीसीसीआई के पाले में है।
साथ ही उन्होंने कहा कि जहीर के उपलब्ध होने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यह फैसला बीसीसीआई को लेना है और साथ ही यह भी देखना होगा कि क्या जहीर पूरे साल उपलब्ध होंगे। गांगुली ने स्पष्ट किया का क्रिकेट सलाहकार समिति का सहायक कोच चुनने में कोई रोल नहीं होगा। सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण भी क्रिकट सलाहकार समिति के सदस्य हैं।
गांगुली ने बताया कि अनिल खुद एक गेंदबाज हैं, इसलिए शायद उन्होंने कोई बॉलिंग कोच नहीं नियुक्त किया। हो सकता कि वो कोई तेज गेंदबाजी कोच चुन सकते हैं।
इससे पहले गांगुली ने कहा कि पूर्व भारतीय निदेशक रवि शास्त्री को बल्लेबाजी कोच का पद ऑफर किया गया था।, जिसका कोई नतीजा नहीं निकला था। भारतीय टीम फिलहाल वेस्टइंडीज के मेजबानी में 4 टेस्ट मैचों के सीरीज खेलने गई हुई है।
जहीर खान ने हाल ही में क्रिकेट से संन्यास लिया था। जहीर ने इस साल आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स की कप्तानी भी की थी। जहीर भारत के सबसे सफल बाएं हाथ के तेज गेंदबाज माने जाते हैं। जहीर स्विंग और रिवर्स स्विंग दोनों में माहिर हैं। यदि वो इस पद पर नियुक्त होते हैं, तो भारतीय टीम को फायदा ही होगा।

लूलिया के घरवालों से मिलने चले सलमान, जल्द कर सकते हैं शादी का फैसला?

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सलमान खान की लव लाइफ एकदम सही ट्रैक पर जा रही है। सलमान की शादी के इंतजार में बैठे फैन्स के लिए एक खुशखबरी है। सलमान खान ने तय किया है कि वो लूलिया के घरवालों से जल्द ही मिलेंगे। अब जल्द मिलने का कारण तो हम सभी जानते हैं। लगता है कि अब यह रिश्ता पक्का होकर ही रहेगा।
बॉलीवुड लाइफ की खबर के मुताबिक सलमान खान ने लूलिया के घरवालों के लिए सुल्तान की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी है। यह स्क्रीनिंग कहीं और नहीं बल्कि सलमान खान के पनवेल फार्म हाउस पर होगी। खबर यह भी है कि इस स्क्रीनिंग को खुद लूलिया होस्ट करेंगी। आपको बता दें कि यह पहली बार होगा जब सलमान खान इस रोमानियाई सुंदरी के घरवालों से मिलेंगे।
इससे पहले लूलिया सलमान खान की सुल्तान में की एक्टिंग की काफी मुरीद दिखीं। बॉलीवुड लाइफ की ही एक खबर के मुताबिक अभी कुछ दिनों पहले लूलिया सलमान खान के घरवालों के साथ उनके गैलेक्सी अपॉर्टमेंट वाले घर में रुकीं थी।
यही नहीं सलमान ने लूलिया के साथ मोर्निंग में रोमांटिक स्टाइल में साइलिंग भी की। खबर के मुताबिक फिल्म की स्क्रीनिंग इसी महीने के अंत तक हो सकती है। आपको बता दें कि सलमान जल्द ही कबीर खान की अगली फिल्म ट्यूबलाइट की शूटिंग स्टार्ट करने वाले हैं।

‘सुल्तान’ के सुपर-डुपर हिट होने के बाद जानिए फैंस से क्या बोले सलमान?

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मुंबई: बॉलीवुड सुपर स्टार सलमान खान इस बात से काफी खुश हैं कि उनके प्रशंसकों ने हाल में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘‘सुल्तान’’ में एक पहलवान के रूप में उनकी भूमिका को पसंद किया। सलमान ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, ‘सुल्तान को सराहने के लिए धन्यवाद।’ अली अब्बास जफर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘सुल्तान’ ईद के मुबारक मौके पर रिलीज हुई थी।
‘दबंग’ स्टार ने आइफा 2016 में अपनी प्रस्तुति का भी जिक्र किया। सलमान ने चार वर्ष के अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्म अकादमी पुरस्कार में प्रस्तुति दी। सलमान अभिनीत ‘बजरंगी भाईजान’ ने समारोह में वर्ष की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार अपने नाम किया।
गौर हो कि अभिनेता सलमान खान की फिल्म ‘सुल्तान’ बॉक्स ऑफिस पर कमाई के नए रिकॉर्ड बना रही है। अपने रिलीज के चौथे दिन भी इस फिल्म की कमाई की रफ्तार धीमी नहीं पड़ी है। अली अब्बास की इस फिल्म को देखने के लिए सिनेमाघरों में दर्शकों की भारी भीड़ पहुंच रही है। ‘सुल्तान’ की कमाई का सिलसिला यूं ही चलता रहा तो यह फिल्म इस साल ब्लॉकबस्टर साबित होगी।

शादी के बाद नहीं मिल रहा काम, फिल्मों से संन्यास लेंगी बिपाशा!

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बिपाशा बसु भी उन हीरोइनों की फेहरिस्त में शामिल हो गई हैं जिन्हें शादी के बाद निर्माता-निर्देशक आकर्षक रोल ऑफर करना बंद कर देते हैं। ऐक्टर करन सिंह ग्रोवर से बिपाशा की शादी को अभी ढाई महीने ही हुए हैं और उनके सामने यह सच्चाई सिर उठा कर खड़ी हो गई है। सूत्रों की मानें तो कभी हॉट कहलाने वाली बिपाशा ने भी खुद अपने दिल को समझाना शुरू कर दिया है कि फिल्मों में उनकी पारी आखिरी पड़ाव पर आ गई है। इसलिए वह अब इन दिनों अपने लिए नया करिअर तलाशने में लग गई हैं।
हकीकत भी यही है कि पिछले कुछ वर्षों में बिपाशा ने कोई यादगार फिल्म नहीं दी। उल्टे हाल के वर्षों में उन पर केवल हॉरर फिल्मों की हीरोइन होने का लेबल लग गया और वह फिल्में भी फ्लॉप होती गईं। सूत्रों की मानें तो लंबे हनीमून से लौटीं बिपाशा बॉलीवुड में काम तो करना चाहती हैं परंतु उन्हें ढंग के ऑफर नहीं मिल रहे हैं। हॉरर फिल्मों से अब वह थोड़ा दूर रहना चाहती हैं। परंतु जब अच्छे ऑफर नहीं आ रहे हैं तो बिपाशा ने अब घर की साज सज्जा के सामान यानी होम डेकोर के क्षेत्र में हाथ आजमाने का फैसला किया है।
सूत्रों के मुताबिक बिपाशा इन दिनों बॉलीवुड की उन महिला सेलेब्रिटीज से सलाह मशवरा कर रही हैं जो पहले से इस फील्ड में हैं। बिपाशा का इरादा अपने नाम के ब्रांड वाली घर की सजावटी चीजों को बाजार में उतारने की है। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों उन्होंने इस सिलसिले में शिल्पा शेट्टी, मलाइका अरोड़ा और सुजैन खान से लंबा सलाह-मशविरा किया।
बिपाशा के करीबी दोस्त डिजाइनर रॉकी एस ने भी उन्हें विश्वास दिलाया है कि वह उनके ब्रांड की चीजों को बाजार में जमाने में मदद करेंगे। अब तय है कि आपको बिपाशा की तरफ से कुछ नई घोषणाओं की खबरें मिलेंगी परंतु वह फिल्मों की नहीं बल्कि घरेलू साज-सज्जा की होंगी।

दुनिया की आबादी बढ़ना बहुत चिंताजनक है तो आदिवासियों की आबादी घटना भी कम फिक्र की बात नहीं

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बढ़ती आबादी से उपजने वाली चिंताओं पर दुनिया को जागरूक करने के उद्देश्य के साथ आज विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जा रहा है. जनसंख्या वृद्धि एक मुख्य समस्या के तौर पर विमर्श और नीतियों का आधार बनी हुई है. लेकिन, इसके बरक्स आदिवासियों की घट रही जनसंख्या पर न के बराबर बात हो रही है.
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े बताते हैं कि आज दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में 37 करोड़ आदिवासी रह रहे हैं. भारत में भी लगभग 705 जनजातीय समूह हैं जिनकी कुल संख्या 2011 में 10 करोड़ से थोड़ा ज्यादा दर्ज की गई थी. चिंता की बात यह है कि इनमें कई ऐसे जनजातीय समूह हैं जो अब विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गए हैं. अंडमान में जारवा जनजाति की जनसंख्या तो लगभग 400 के आंकड़े तक सिमट गई है.
भारत के जिन राज्यों में एक बड़ी संख्या में आदिवासी आबादी रहती है उनमें छत्तीसगढ़ प्रमुख है. 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि राज्य के सात जिलों जशपुर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और कोरिया में आदिवासी आबादी काफी गिरी है. करीब 30 फीसदी आदिवासी आबादी वाले इस राज्य में नक्सल प्रभावित इलाकों को देखें तो वहां आबादी की वृद्धि दर तेजी से घटी है. 2001 की जनगणना में यह दर 19.30 फीसदी थी जो 2011 में घटकर 8.76 फीसदी रह गई. इन आंकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद तमाम आदिवासी संगठनों ने राज्य सरकार से इस मुद्दे की तरफ ध्यान देने की मांग की थी लेकिन, उसका कोई खास नतीजा देखने में नहीं आया.
छत्तीसगढ़ की पांच संरक्षित जनजातियों-बिरहोर, पहाड़ी, अबूझमाड़िया, बैगा, कोरवा और कमार- की आबादी लगातार कम हो रही है. राज्य में लुप्त प्राय बिरहोर आदिवासियों की आबादी का आंकड़ा 401 तक सिमट गया है. जशपुर जिले में बसने वाली असुर जाति के तो अब सिर्फ 305 लोग बचे हैं.
एक साक्षात्कार में छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजित जोगी स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी को इसकी वजह मानते हैं. वे कहते हैं कि नक्सल प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों में 95 फीसदी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर काबिल डॉक्टर नहीं हैं. उनके मुताबिक जब वे मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने आदिवासी इलाकों में परिवार नियोजन बंद करा दिया था लेकिन, अब टारगेट पूरा करने के लिए यह अभियान चोरी-छिपे चलाया जा रहा है.
हजारों साल से अपनी दुनिया में मस्त और अपनी कम ज़रूरतों में खुश रहने वाले आदिवासियों पर आधुनिकीकरण की मार भी पड़ रही है. जानकारों के मुताबिक उनके परिवेश में दूसरे समुदायों के दखल से उनका विस्थापन तो हो ही रहा है, उनमें कई आधुनिक बीमारियों का संक्रमण भी तेजी से फैलता जा रहा है. लंबे समय से अपने परिवेश तक सीमित रहे आदिवासियों की प्रतिरोधक क्षमता इन बीमारियों के आगे बेहद कमजोर पड़ जाती है इसलिए उनकी मृत्यु दर में बढ़ोतरी हो रही है.
भोजन के मोर्चे पर सिमटते संसाधन इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं. बाजरा, कोदों, कुटकी जैसे अनाजों की घटती खेती के साथ आदिवासियों का परंपरागत भोजन खत्म होने के कगार पर पहुंच रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके चलते 54 फीसदी आदिवासी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. तीन साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का एक बड़ा कारण डायरिया होता है. आयरन की भरपूर मात्रा के चलते बाजरा न सिर्फ शरीर के लिए पोषक होता है बल्कि डायरिया से लड़ने में भी यह बहुत प्रभावी होता है. यह तथ्य सामने आने के बाद सरकार ने कई जगहों पर बच्चों को आंगनबाड़ी में जिंक और आयरन की गोलियां देने का उपाय खोजा है. लेकिन इसी तरह की आपात कोशिशें इस दिशा में नहीं दिखतीं कि आदिवासी समुदाय को फिर उसकी परंपरागत फसलों से जोड़ा जाए.
मुख्यधारा के विमर्श में ऐसे मुद्दों पर चर्चा के बजाय आबादी के बढ़ने से खाद्यान संकट पैदा होगा जैसे वाक्यों का दोहराव जारी है. पत्रकार प्रमोद भार्गव लिखते हैं, ‘बढ़ती आबादी को लेकर खाद्यान्‍न संकट की भयावहता दिखाई जा रही है. लेकिन हैरानी यह है कि वर्तमान में ही खाद्यान्‍न का जो उत्‍पादन हो रहा है वह 11.5 अरब लोगों की भूख मिटाने के लिए पर्याप्‍त है. एक व्‍यक्‍ति को 2400 कैलोरी खाद्यान्‍न चाहिए, जबकि प्रति व्‍यक्‍ति उपलब्‍ध कैलोरी 4600 है.’ भार्गव के मुताबिक समस्‍या खाद्यान्‍न की कमी नहीं बल्कि उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने में व्यवस्था की अक्षमता है.
अक्सर यह भी कहा जाता है कि आदिवासियों की आबादी पर मुख्यधारा के दूसरे समुदायों की आबादी बढ़ने का दुष्प्रभाव पड़ रहा है. कहा जाता है कि जंगलों में आम शहरी और ग्रामीण समुदाय का दखल बढ़ने से ऐसे चिंताजनक हालात पैदा हो रहे हैं. इसे सही ठहराने के लिए कई उदाहरण भी दिए जाते हैं. जैसे अंडमान द्वीप में रहने वाली जारवा जनजाति को पर्यटकों के लिए अघोषित रूप में ह्यूमन सफारी की तरह इस्तेमाल किया जाता है. इसी तरह अबूझमाड़ में रहने वाले माड़िया आदिवासियों को भी अजूबे की तरह देखने आने वालों की संख्या कम नहीं रहती. लेकिन इस तर्क में यह बात छिपाने की कोशिश की जाती है कि वे कौन हैं जो वहां दखल देकर आदिवासियों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं, उनके वनों, रीति-रिवाजों,पेड़-पौधों, भोजन और भाषा को नष्ट करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इसकी जिम्मेदार भी हमारी बढ़ती आबादी यानी आम जनता है. एकबारगी तो यही लगता है क्योंकि अक्सर हवाला दिया जाता है कि हमारी ज़रूरतें बढ़ रही हैं इसलिए जंगलों का भी सफाया हो रहा है और आदिवासियों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है. आदिवासियों के बीच काम करने वाले पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी महात्मा गांधी का उद्धरण देते हुए कहते हैं कि हमारी ज़रूरतों की पूर्ति के लिए पर्याप्त मात्रा में संसाधन उपलब्ध हैं लेकिन हमारे लोभ की पूर्ति के लिए ये कम हैं. वे आगे कहते हैं, ‘मैं मानता हूं कि बढ़ती आबादी का प्रभाव भी इन आदिवासियों पर पड़ रहा है लेकिन, मूल बात यह नहीं है. मूल बात यह है कि इन पर कुछ लालची तत्वों का दुष्प्रभाव पड़ रहा है जो अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए आदिवासियों को मिटाने पर तुले हुए हैं.’
आबादी का बढ़ना चिंता की बात नहीं है, यह नहीं कहा जा सकता. लेकिन किसी समुदाय का अस्तित्व खत्म होना भी कम चिंताजनक नहीं है. आदिवासी मामलों के विशेषज्ञ और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक गंगा सहाय मीणा कहते हैं, ‘कथित विकास के नाम पर विकास का बाहरी मॉडल आदिवासियों पर थोपा जा रहा है जिससे इनके अस्तित्व के लिए संकट पैदा हो रहा है. इनकी घटती आबादी को लेकर किसी को कोई परवाह नहीं है. अगर परवाह है तो उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाना चाहिए.’
आदिवासी समाज की सेहत हमारे पर्यावरण के स्वास्थ्य की भी सूचक है. उनकी खुशहाली का मतलब है कि हमारे जंगल और बड़े अर्थों में देखें तो हमारा पर्यावरण सुरक्षित है. इसलिए दुनिया की आबादी बढ़ना जितना चिंताजनक है उससे कम चिंताजनक आदिवासियों की आबादी घटना नहीं है

संदीप गाड़ोली एनकाउंटर मामला: मुंबई एसआईटी ने एसीपी राजेश से की पूछताछ

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मुंबई। गैंगस्टर संदीप गाड़ोली एनकाउंटर मामले में मुंबई एसआईटी ने गुड़गांव के तत्कालीन एसीपी राजेश कुमार से पूछताछ की. एसीपी राजेश आजकल फरीदाबाद में तैनात है और संदीप के एनकाउंटर के वक़्त वो गुड़गांव में तैनात थे.
मुंबई पुलिस शनिवार को एसीपी राजेश के फरीदाबाद दफ्तर में पहुंची और पूछताछ की, इसके बाद मुंबई पुलिस ने अगले ही दिन रविवार को एसीपी राजेश को मुंबई बुलाया और वहां लगातार दो दिन रविवार और सोमवार को पूछताछ की.
गौरतलब है की 7 फ़रवरी को गुड़गांव पुलिस ने गैंगस्टर संदीप का मुंबई के एक होटल में एनकाउंटर कर दिया था. तभी से गैंगस्टर का परिवार इस एनकाउंटर को फ़र्ज़ी बता आरोप लगा रहा है कि गुड़गांव पुलिस ने दूसरे गैंगस्टर बिन्दर गुर्जर से सुपारी लेकर संदीप का फ़र्ज़ी एनकाउंटर किया है.
एसआईटी ने इस केस में कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया है. इनमें सब इंस्पेक्टर प्रद्युम्न यादव सहित पांच पुलिस वाले हैं. प्रद्युम्न को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया था. एसआईटी सूत्रों के अनुसार, कुछ आरोपियों के कॉल डेटा (सीडीआर) में राजेश का नंबर आया था.
संदीप गाडोली के परिवार वालों ने भी राजेश पर गंभीर आरोप लगाए हैं. एसआईटी ने अभी अधिकृत रूप से साफ नहीं किया है कि वह गुड़गांव के एसीपी को अपने केस में गवाह बनाएगी या आरोपी. एक टॉप लेबल के अधिकारी के अनुसार, जांच में यह बात भी सामने आई है कि गुड़गांव की पुलिस टीम वहां के एक डीसीपी की परमिशन लेकर फरवरी में मुंबई आई थी. आने वाले दिनों में इस डीसीपी का भी स्टेटमेंट लिए जाने की संभावना है.

महाराष्ट्र के कृषि मंत्री सब्जियों से भरे 300 ट्रक लेकर मंडी पहुंचे

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मुंबई। महाराष्ट्र के किसानों के उत्पादन सीधे बाजारों और ग्राहकों को बेचने को लेकर निर्णय लिये जाने के बाद मंगलवार को राज्य के कृषि मंत्री भाउ साहेब खोत महाराष्ट्र के अलग-अलग जिले से तकरीबन 300 से भी जादा साग-सब्जियों से भरे ट्रक लेकर मुंबई के दादर मार्केट पहुंचे। गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले से सीधे तौर पर किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार ने किसानों को फल और सब्जियां ग्राहकों तक सीधे बेचने का रास्ता अब मंत्री जी के पहल के बाद खोल दिया है।
किसानों का मानना है कि किसानों का उत्पादन सीधे बाजार लाकर या ग्रहाकों को बेचने से किसानों के घर खुशहाली आएगी क्योंकि यहां उनकी कमाई पर डंक मारनेवाला कोई बिचौलिया नहीं होगा। सुबह 5 बजे मुंबई के दादर सब्जी मंडी में महाराष्ट्र सरकार के इस निर्णय पर अपनी मुहर खुद लगाने के लिये कृषि मंत्री भाउसाहेब खोत किसानों को उत्पादित साग-सब्जी सीधे ग्राहकों को बेचते दिखाई दिए।
सरकार का मानना है कि इस पहल के बाद किसानों को अपने उत्पाद का सही दाम मिल सकेगा। जिससे उनकी आमदनी भी बढ़ेगी और विश्वास भी। मौजूदा हालात में किसानों के उत्पादों को बेचने के लिए नवी मुंबई के APMC अर्थात सरकारी मंडी का ही सहारा लिया जाता है। जहां 7.5 से 10 प्रतिशत तक दलाली देने के बाद किसान को पैसे मिलते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार की पॉलिसी के तहत महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को अपना माल खुले बाजार में बेचने की छूट देने के तहत इस तरह का यह खास निर्णय लिया है।
मंगलवार को मुंबई के दादर मार्केट में कृषि मंत्री के साथ भले ही किसान पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ आकर अपने उत्पादों को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हों लेकिन ये पहल आनेवाले दिनों में क्या इसी तरह टिक सकेगी ये गौर करनेवाली बात होगी। दादर के कई बड़े सब्जी विक्रेता का संबंध अन्य सब्जी मार्केट से है, जो रोजाना वहां से सब्जियां खरीदकर यहां बेचते हैं। ऐसे में किसानों के उत्पादन के सस्ते दाम एक तरफ और दूसरी तरफ बड़े विक्रेताओं के दामों को लेकर नोक-जोंक भी हो सकती है।

कच्ची नौकरी को ऐसे पक्की करेगी उत्तराखंड सरकार

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आउटसोर्सिंग समाप्त कर उपनल कर्मचारियों को नियमित करने की मांग को लेकर शासन ने नया फार्मूला निकाला है। चतुर्थ श्रेणी के पदों की भर्ती में उपनल के अकुशल श्रेणी कर्मचारियों को 50 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा, जबकि अर्द्धकुशल और कुशल श्रेणी वालों को 20 प्रतिशत का वेटेज देने की योजना है। इसके साथ ही निकाले गए सभी उपनल कर्मचारियों को तुरंत वापस रख भविष्य में नहीं निकालने पर भी सहमति बनी है।
उपनल कर्मचारियों की हड़ताल सरकार के गले की फांस बन चुकी है। नियमितीकरण की मांग कर रहे उपनल कर्मचारियों को राहत देने के लिए शासन स्तर पर हुई बैठक में निगम के अकुशल कर्मियों (चतुर्थ श्रेणी) को विभागीय भर्तियों में पचास प्रतिशत वेटेज देने पर सहमति बनी।
उपनल कर्मियों को विभागीय भर्ती में साक्षात्कार के दौरान इस वेटेज का लाभ मिलेगा। तृतीय श्रेणी के पदों में आउटसोर्सिंग पर तैनात उपनल कर्मचारियों को नियमित विज्ञाप्ति होने वाले पदों पर बीस प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। इसके अलावा निकाले गए सभी उपनल कर्मियों को दोबारा तैनात करने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए जाएंगे।
हालांकि उपनल के माध्यम से तैनाती समाप्त कर सीधे विभागीय संविदा पर नियुक्ति की मांग पर शासन सहमत नहीं है। सचिव सैनिक कल्याण आनंद बर्धन ने बताया कि उपनल महासंघ को इस संबंध में अवगत करवा दिया गया है। चतुर्थ और तृतीय श्रेणी के पदों पर होने वाली भर्तियों के साक्षात्कार के दौरान उपनल कर्मचारियों को वेटेज दिए जाने पर सहमति बनी है।