दालमंडी की ठसाठस भरी तंग गलियां, भीड़ भरे बाजार में दुकानदार, ग्राहकों का भारी शोरगुल, इधर-उधर भागते फेरीवाले, इन सबके बीच एक मकान की दूसरी मंजिल पर बंद कमरे में तबले पर चलता रियाज। लच्छू महाराज का यही पता था। अब भी पता वही रहेगा, लेकिन लच्छू महाराज वहां नहीं मिलेंगे। शहर बनारस में रोज सामने घाट से दालमंडी तक आठ किलोमीटर की दूरी पैदल चलकर आने का सिलसिला अब खत्म। प्रख्यात फिल्म अभिनेता गोविंदा के मामा और सितारा देवी के दामाद लच्छू महाराज बनारस ही नहीं, तबला बजाने और तबले को जानने वालों के बीच किसी पहचान के मोहताज नहीं थे।
1975 में आपातकाल लगा, तो जॉर्ज फर्नांडिस, देवव्रत मजुमदार, मार्कंडेय जैसे धाकड़ समाजवादी नेताओं को लच्छू महाराज जेल में तबला बजाकर सुनाते थे। नरेन्द्र नीरव कहते हैं, वो जेल में सिर्फ तबला नहीं बजाते थे, बल्कि आपातकाल का अपने तरीके से विरोध करते थे। उन्हें संगीत नाटक एकेडमी व अन्य पुरस्कार न मिलने का कोई मलाल नहीं था। लाल रंग का एक गमछा, एक जनेऊ और पूर्वजों की तस्वीर के बीच सुबह 10 बजे से जो रियाज शुरू होता, वो शाम को 6 बजे ही खत्म होता। दाल मंडी की गलियां जो कभी तवायफों के नृत्य, तहजीब एवं अदब की बानगी थीं, वो लच्छू महाराज के पदचाप का बेसब्री से इंतजार करतीं।
लच्छू महाराज की जिद और तबले के प्रति उनके प्रेम के कई किस्से हैं। बताते हैं कि एक बार आकाशवाणी में उन्हें तबला वादन के लिए बुलाया गया जिन केंद्र निदेशक महोदय ने उन्हें बुलाया वो पांच मिनट विलंब से आए इसका नतीजा यह हुआ कि लच्छू महाराज बिना कार्यक्रम में शामिल हुए वापस लौट गए। एक घटना विश्व विख्यात संकट मोचन संगीत समारोह की है जिसमें लच्छू महाराज को तबला वादन के लिए बुलाया गया था। तबला बजाते-बजाते फट गया, नया तबला लाने में देरी हुई तो लच्छू महाराज बीच में ही उठ कर चले गए। लच्छू महाराज का जाना संगीत में विपक्ष का जाना है। सत्तातंत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले तबला वादकों को खुलकर खरी-खोटी सुना पाते थे।
सुप्रसिद्ध साहित्यकार लेखक, आलोचक और रंगकर्मी व्योमेश शुक्ल कहते हैं कि असहमति को शिल्प से सोचने का कलात्मक नजरिया खत्म हो गया। लच्छू महाराज ने अपने तबले में कभी किसी प्रभुत्वकारी शिल्प को स्वीकार नहीं किया। वो बताते हैं कि हालांकि लच्छू महाराज की जिद ने उनको कई अवसरों से वंचित किया। उनके अघोरपन के किस्से उनके अवधूत स्वरुप के किस्से इतने बड़े हो गए कि उनकी उपलब्धियां पीछे रह गईं, जिस बाजार में कबीर दास ने खड़ा होकर अपना घर जलाने की चुनौती दी थी उसी जगह लच्छू महाराज तबला बजाते थे। व्योमेश कहते हैं, तवायफों के परिवार से आने वाले कलाकार नामचीन, प्रकांड विद्वान होने पर भी कहीं न कहीं शर्म का अनुभव करते रहे हैं। यह दर्द उनके चेहरे पर भी दिखता था।
नहीं रहे सुप्रसिद्घ तबला वादक लच्छू महाराज, असहमति को शिल्प से सोचने वाले थे कलाकार
'….वर्ना 6 महीने बाद मैं मजीठिया को गिरफ्तार कर लूंगा'
अमृतसर। पंजाब के राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के मानहानि केस में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह और आशीष खेतान अमृतसर कोर्ट में पेश हुए। केजरीवाल को सुनवाई के दौरान राहत मिली और उन्हें अग्रिम जमानत मिल गई। 15 अक्टूबर को इस मामले में अगली सुनवाई है।
कोर्ट में पेश होने से पहले अरविंद केजरीवाल ने अपने बयान से सुर्खियां बटोर ली। दरअसल केजरीवाल ने कोर्ट में पेश होने से पहले कहा कि मजीठिया में हिम्मत है तो 6 महीने में मुझे गिरफ्तार कर लें, नहीं तो 6 महीने बाद मैं मजीठिया को गिरफ्तार कर लूंगा।
पेशी से पहले केजरीवाल ने अमृतसर की सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन किया। बड़ी तादाद में मौजूद अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने बादल सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि बादल सरकार के दिन अब लद गए। केजरीवाल के साथ संजय सिंह और भगवंत मान समेत पार्टी के कई दूसरे नेता भी मौजूद थे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अब बादल सरकार के दिन लद गए हैं। चुनाव में जनता मजीठिया से बदला लेगी। 6 महीने बाद हम सब मिलकर नया पंजाब बनाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मजीठिया ने पंजाब की जवानी को नशे में डुबो दिया।
उन्होंने कहा कि मैंने कुछ दिन पहले कहा था कि मजिठिया नशे का धंधा करता है तो उसने मुझ पर मानहानि का केस लगा दिया। उनकी हिम्मत कैसे हुई..? पंजाब का बच्चा-बच्चा जानता है के मजीठिया नशे का धंधा करता है। उन्होंने कहा कि अगर मेरे ऊपर झूठा पर्चा कर दिया तो आम आदमी का क्या हाल करते होंगे।
बता दें कि मजीठिया की ओर से दायर किए गए केस में माफी न मांगने पर आप नेताओं की गिरफ्तारी हो सकती है। इस दौरान कोर्ट में पेशी से पहले सीएम केजरवाल ने हरमिंदर साहब में मत्था टेका। वहीं अरविंद केजरीवाल, आशीष खेतान और संजय सिंह के साथ एक खुली गाड़ी में सर्किट हाउस से कोर्ट के लिए निकले। इस दौरान कोर्ट में जाने से पहले वो वहां मौजूद हजारों आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं को इसी खुले वाहन से सम्बोधित करेंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले 18 जुलाई को अमृतसर की एक निचली अदालत ने मानहानि के एक मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (आप) के कुछ अन्य नेताओं के नाम समन जारी किया था। पंजाब के राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की याचिका पर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने केजरीवाल के अलावा आप नेता संजय सिंह और आशीष खेतान को समन जारी कर 29 जुलाई को अदालत में पेश होने के लिए कहा था।
मजीठिया का कहना है कि आप नेताओं को आपराधिक मानहानि के मामले में समन भेजा गया। उन्होंने कहा था कि वह मानहानि के इस मामले की त्वरित सुनवाई चाहते हैं, ताकि आप नेता उनका अपमान करने के लिए जेल जा सकें।
इससे पहले आप नेताओं ने खुले तौर पर मजीठिया को ड्रग रैकेट का मुखिया कहा था और आरोप लगाया था कि राज्य में ड्रग माफिया मजीठिया के संरक्षण में काम कर रहे हैं। मजीठिया ने अपनी याचिका में आप नेताओं की ओर से अपने अपमान की तीन घटनाओं का जिक्र किया है। जिसमें 14 जनवरी को केजरीवाल और संजय सिंह द्वारा मुक्तसर साहिब में मजीठिया के खिलाफ दिया गया बयान, 27 फरवरी को अमृतसर दौरे के दौरान केजरीवाल का बयान और चंडीगढ़ में संजय और आशीष के मजीठिया के खिलाफ दिए गए बयान शामिल है।
'नाक के नीचे चोरी हो रही है, चौकीदार चुप है': राहुल गांधी
नई दिल्ली। आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के मुद्दे पर आज लोकसभा में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने लोकसभा में कहा कि आप (सरकार) स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया पर झूठे वादे कर सकती है लेकिन महंगाई पर नहीं। ये मुद्दा हमारी जनता के सामने बड़ा मुद्दा है। सच्चाई ये है कि इस मुद्दे के बारे में झूठे वादे नहीं किए जा सकते हैं।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल ने पीएम मोदी को याद दिलाते हुए कहा कि जो वादा उन्होंने किया था, वह भूल गए हैं। पीएम ने कहा था कि मुझे पीएम मत बनाओ, एक चौकीदार बनाओ। आज उसी चौकीदार की नाक के नीचे दाल की चोरी हो रही है। उन्होंने कहा कि अब आप प्रधानमंत्री बन गए हैं, बड़े आदमी बन गए हैं। आप क्यों चौकादारी करेंगे?
उन्होंने कहा कि मोदीजी खोखले वादे करने है करिए, पर इस हाउस को तारीख दे दीजिए जब मार्केट में दाम कम हो जाएंगे। एनडीए के दो साल पूरे होने पर राहुल ने कहा कि इस दौरान बड़े बड़े स्टार आए, कार्यक्रम हुआ लेकिन महंगाई पर बात नहीं हुई। पूरे सेलिब्रेशन में महंगाई पर एक शब्द सुनाई नहीं दिया। राहुल ने रेट बताते हुए कहा कि दाल 200 रुपए किलो हो चुकी है। टमाटर 2014 में 18 रुपये था आज 300 फीसदी दाम बड़ गया है। आलू 2014 में 23 रुपए का था आज 28 रूपए का हो चुका है। उड़द की दाल 70 रूपए की थी, आज 160 रूपए की हो चुकी है। तुर की दाल कुछ ही महीने पहले 230 रुपए की हो गई थी, वह 75 रुपए की हुआ करती थी। आज 180 रुपए की हो गई है।
राहुल ने कहा कि मैं सिर्फ दाम की बात नहीं करना चाहता हूं। मैं दाल में जो चोरी हो रही है, उसकी बात करना चाहता हूं। यूपीए के समय किसान को एमएसपी और मार्केट के रेट में 30 रुपए का अंतर होता था। एनडीए के समय में एमएसपी 50 रुपए की है, लेकिन वही किसान मार्केट में अपनी दाल को 180 रुपए में खरीदता है। मतलब 50 रुपए में वह बेचता है और मार्केट से 180 रुपए में खरीदता है। मोदी जी आप समझाइए कि ये 100 रुपए जो जा रहे हैं वो किसके हाथ में जा रहे हैं?
लाल किले पर भाषण के दौरान PM पर 'ड्रोन हमले' का खतरा, एजेंसियां आगाह
नई दिल्ली : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर एजेंसियों ने खतरा जताया है. एजेंसियों ने सलाह दी है कि इस बार बुलेटप्रुफ घेरे में पीएम मोदी लाल किले से अपना भाषण दें. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की सलाह के बाद खुफिया एजेंसियां और एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) पीएम की सुरक्षा को लेकर खास इंतजामों में लगे हैं.
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार इस बार खतरा इतना ज्यादा है कि बुलेटप्रुफ घेरा(शीशा) लगाना बहुत ही जरूरी है. इसके साथ ही पिछले दो बार मोदी ने अंतिम समय में बुलेटप्रुफ घेरे को हटाने का आदेश दिया था. लेकिन, इस बार घेरे के साथ ही उनके आसपास सुरक्षा के इंतजाम भी पहले से ज्यादा होंगे.
यहां तक कि आतंकी ड्रोन का इस्तेमाल कर पीएम पर हमला कर सकते हैं.
सूत्रों का कहना है कि इस बार केवल कश्मीर हिंसा या बढ़ती घुसपैठ की घटनाएं ही कारण नहीं हैं. बल्कि, एजेंसियों ने कुछ ऐसे संवाद इंटरसेप्ट किए हैं जिनमें पीएम की सुरक्षा में ड्रोन हमले के जरिए सेंध लगाने की कोशिश की चर्चा है. इसके साथ ही आईएसआईएस के बढ़ते खतरे को भांपते हुए भी सुरक्षा को लेकर खास इंतजाम किए गए हैं.
इसके साथ ही केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने यह भी बताया है कि 15 अगस्त की समारोह के बीच आतंकी संगठन ‘लोन-वॉल्फ अटैक’ (अकेले आतंकी का हमला) कर सकता है. इसके साथ ही अलकायदा और आईएसआईएस के बारे में दो इनपुट एजेंसियों ने जारी किए हैं. जिसमें सेना और पुलिस प्रतिष्ठानों पर हमले की तैयारी की जानकारी है.
सूत्रों का कहना है कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद से ही यह परंपरा बन गई थी कि लाल किले पर बुलेटप्रुफ घेरे में ही प्रधानमंत्री का भाषण होगा. लेकिन, सन 2014 में पीएम मोदी ने इस परंपरा को तोड़ा था. इसके साथ ही पिछले वर्ष 2015 में भी उन्होंने खुले में ही भाषण दिया था. इस बार एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं.
सूत्रों का कहना है कि करीब 5 हजार सुरक्षाकर्मी पीएम मोदी की सुरक्षा में लगेंगे. इसमें पुलिस, सेना, खुफिया एजेंसियों और एसपीजी के कर्मी शामिल होंगे. इसके साथ ही लाल किले से एक किलोमीटर के दायरे में सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी ट्रेंड कमांडो के हाथों होगी. यहीं परिंदे को भी पर मारने की इजाजत नहीं होगी.
दक्षेस के पाकिस्तान सम्मेलन में आतंकवाद का मुद्दा उठाएंगे राजनाथ
खबरें [राष्ट्रीय]
दक्षेस के पाकिस्तान सम्मेलन में आतंकवाद का मुद्दा उठाएंगे राजनाथ
नई दिल्ली: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अगले महीने दक्षेस देशों के गृह मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अपने पाकिस्तानी समकक्ष के बीच वार्ता सीमा पार से घुसपैठ तथा आतंकवाद के मुद्दों पर केंद्रित होगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने गुरुवार को कहा कि कश्मीर में हिंसा के कारण तनाव के बीच राजनाथ सिंह दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) में शामिल देशों के गृहमंत्रियों के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चार अगस्त को पाकिस्तान जाएंगे।
उन्होंने कहा, “इस बैठक से पहले तीन अगस्त को दक्षेस के गृह सचिवों की सातवीं बैठक तथा तीन अगस्त को दक्षेस के आव्रजन अधिकारियों की सातवीं बैठक होगी।”
हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान बानी के आठ जुलाई को मारे जाने के बाद भड़की हिंसा के लिए गृहमंत्री पहले ही पाकिस्तान की तरफ उंगली उठा चुके हैं। हिंसा में लगभग 50 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग घायल हुए हैं।
साल 2005 में ढाका में सम्मेलन के दौरान दक्षेस के नेतृत्व ने सहमति जताई थी कि दक्षेस देशों के गृह/आंतरिक मंत्री आतंकवाद-रोधी क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए सालाना बैठक करेंगे। गृह/आंतरिक मंत्रियों की पहली बैठक ढाका में 11 मई, 2006 को हुई थी।
इस बैठक में सुरक्षा संबंधित कई मुद्दों पर क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा होगी तता विभिन्न क्षेत्रीय गतिविधियों में होने वाली प्रगति का जायजा लिया जाएगा।
स्वरूप ने कहा, “हमारी भागीदारी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी के संदर्भ में है और क्षेत्रीय सहयोग के प्रति हमारी प्रतिबद्धता दक्षेस के ढांचे के दायरे में है। यह बैठक हमारे द्वारा क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग के लिए चलाए जा रहे आंदोलन की महत्ता को रेखांकित करने का भी अवसर प्रदान करती है।”
हाफिज से मिलकर आया था बहादुर अली, कश्मीर के जंगलों से दे रहा था हर खबर
नई दिल्ली। कश्मीर में जिंदा पकड़े गए आतंकी बहादुर अली ने पूछताछ में एक और बड़ा खुलासा किया है। आतंकी बहादुर अली ने बताया कि वह पीओके में हाफिज सईद से मिला था। उसे ए3 उर्फ ड्राइवर का कोड मिला था। बहादुर के मुताबिक लश्कर के रंगरूट हाफिज को चाचा बुलाते हैं।
बहादुर अली ने एनआईए पूछताछ में बताया कि भारत में घुसपैठ करने के बाद उसके तीन साथी एनकाउंटर में मार दिए गए थे। तीन साथियों की मौत के बाद वह सैटलाइट फोन से पाकिस्तान में वालिद नाम के एक शख्स के साथ संपर्क में था।
वालिद उसे उसके आगे के एक्शन के बारे में लगातार गाइड कर रहा था। वालिद ने उसे डॉक्टर और नर्स कोडवर्ड वाले दो लोगों से मुलाकात करने के लिए कहा था। ये कोडवर्ड एक पुरुष और एक महिला ऑपरेटिव्स के थे। एनआईए ने इन दोनों के ही मोबाइल नंबरों को ट्रैक कर लिया है और अलग अलग वॉट्सऐप नंबर की जानकारी भी जुटा ली है।
मुंबई आतंकी हमलों के साजिशकर्ता और जमात उद दावा के मुखिया हाफिज सईद ने कश्मीर हिंसा पर गुरुवार को बड़ा खुलासा किया। हाफिज सईद ने माना कि बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर में जारी हिंसा के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है। लश्कर के आतंकी ही घाटी में हो रहे प्रदर्शन और विरोध मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं।
पाकिस्तान के फैसलाबाद में जमात-उद-दावा के कार्यकर्ताओं की बैठक में हाफिज सईद ने ये ऐलान किया। उसने अपने खुलासे में कहा कि बुरहान वानी की हत्या के बाद कश्मीर में निकाले गए विरोध मार्च का नेतृत्व लश्कर का एक कमांडर कर रहा था।
इंडोनेशिया सरकार ने नहीं मानी सुषमा की बात, गुरदीप सिंह की सजा को नहीं किया माफ
जकार्ता:इंडोनेशिया में ड्रग मामले में मौत की सजा पाने वाले 48 वर्षीय भारतीय गुरदीप सिंह की मौत की सजा टल गई है। गुरदीप को बचाने के लिए सुषमा स्वराज और उनका विदेश मंत्रालय कोशिशें कर रहा था। लेकिन, इंडोनेशिया सरकार ने माफी की सभी अपीलें ठुकरा दी है। गुरदीप समेत ड्रग्स केस के 10 अन्य दोषियों को मौत की सजा कब दी जाएगी। इसका ऐलान अभी नहीं हुआ है। इससे पहले पंजाब के रहने वाले गुरदीप सिंह ने अपने परिवार को फोन पर कहा था कि मेरी लाश आएगी। दिल मजबूत रखना।
गुरदीप के भांजे गुरपाल सिंह के मुताबिक, उनके परिवार को अभी किसी तरह की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है कि आगे क्या होगा। गुरपाल के अनुसार गुरुवार की रात इंडोनेशिया में भारतीय दूतावास के काउन्सिलर ने पहले बताया कि गुरदीप सिंह को गोली मार दी गई है और फिर 20 मिनट बाद जानकारी दी गई कि वो सुरक्षित हैं।
इंडोनेशिया में मादक पदार्थ से जुड़े अपराध के मामले में दोषी ठहराए गए एक स्थानीय और तीन नाइजीरियाई नागरिकों को गुरुवार को मौत की सजा दे दी गई। सामान्य अपराध मामलों के उप अटार्नी जनरल नूर राचमाद ने बताया कि इन लोगों को मध्यरात्रि के ठीक बाद मौत की सजा दी गई। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया एक भारतीय सहित 10 अन्य दोषियों को मौत की सजा क्यों नहीं दी गई।
गुरदीप सिंह की पत्नी कुलविंदर कौर ने भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से गुजारिश की है कि गुरदीप पहले ही 10 साल सजा काट चुके हैं तो उनकी सजा को बदल दिया जाए। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि हम गुरदीप सिंह की मदद करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। भारतीय दूतावास का एक अधिकारी खासतौर से इस कोशिश में लगा हुआ है।
कुलविंदर ने गुरदीप के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए बताया कि मैं यहां ठीक हूं। आज रात यहां मुझे गोली मार दी जाएगी। मैं नहीं चाहता कि यहां रहूं। इसलिए मेरा शव वहीं मंगवा लेना। इंडोनेशिया में ड्रग्स से जुड़े कुछ कानून दुनिया में सबसे ज्यादा कड़े हैं। 2005 में गुरदीप को 14 लोगों के साथ मौत की सजा सुनाई गई थी। इन सभी पर हेरोइन तस्करी का केस था।
'मैं अपराध और हिंसा खत्म कर दूंगा': ट्रंप
अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अगर वो राष्ट्रपति बने तो देश से अपराध और हिंसा को खत्म कर देंगे. उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी की तरफ़ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए नामांकन स्वीकार करते हुए कहा कि देश में कानून और व्यवस्था के बिना समृद्धि नहीं आ सकती है. इसलिए हम अपने देश में सुरक्षा,समृद्धि और शांति वापस लाएंगे.
ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को भ्रष्ट कहा और खुद को अमरीका के भूले बिसरे लोगों की आवाज़ बताया. उन्होंने डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन की नैतिकता और रिकॉर्ड पर सवाल उठाए.
ओहायो के क्लीवलैंड में चल रहे रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में दिए भाषण के दौरान उन्होंने गैरक़ानूनी आप्रवासन के खिलाफ़ कड़े क़दम उठाने का वादा किया. उन्होंने आरोप लगाया कि अमरीका में जन सुरक्षा को खतरे में डालकर अप्रवासियों को प्रवेश दिया जा रहा है.
डॉनाल्ड ट्रंप ने विरोधी डेमोक्रेटिक पार्टी की उस नीति की निंदा की जिसके तहत इराक़, लीबिया, मिस्र और सीरिया में सत्ता परिवर्तन कराया गया था.
उन्होंने उसे नाकाम राष्ट्र निर्माण करार दिया. उन्होंने कहा कि वो अमरीका के उन सभी सहयोगियों के साथ काम करेंगे जो चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट को ख़त्म करना चाहते हैं.उन्होंने चीन पर बौद्धिक संपादा की चोरी का आरोप लगाया है. वह चीन को इतिहास का सबसे बड़ा करंसी मैनीप्यूलेटर भी मानते हैं. ट्रंप ने 75 मिनट तक भाषण दिया. उन्होंने 1996 में बिल क्लिंटन के दिए भाषण से ज़्यादा समय लिया.
'डोनल्ड ट्रंप भरोसे के लायक नहीं हैं': हिलेरी
हिलेरी क्लिंटन ने फिलाडेल्फिया में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार और प्रतिद्वंद्वी डोनल्ड ट्रंप पर हमला बोलते हुए कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए उनमें न तो न तो चरित्र है, ऩ ही अनुभव. क्लिंटन ने डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए नामांकन स्वीकार कर लिया है.उन्होंने सम्मेलन में बोलते हुए पार्टी की एकता का आह्वाहन किया और कहा कि हम किसी धर्म पर पाबंदी नहीं लगाएंगे.
हिलेरी क्लिंटन ने अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनल्ड ट्रंप पर हमला बोला. उन्होंने कहा, “किसी ऐसे शख्स पर भरोसा न करें जो कहता हो कि सिर्फ मैं हालात ठीक कर सकता हूं. क्लीवलैंड में डॉनल्ड ट्रंप ने ऐसा ही कहा था.”
क्लिंटन ने कहा, “हम अमरीकी ऐसा कभी नहीं कहते. अमरीकी कहते हैं कि हम मिलकर हालात ठीक करेंगे.” उन्होंने कहा कि हम किसी धर्म पर रोक नहीं लगाएंगे. हम सब मिलकर आतंकवाद से लड़ेंगे.उन्होंने बराका ओबामा का जिक्र करते हुए कहा कि ओबामा ने हमारे देश को बुरे आर्थिक संकट से बचाया. उन्होंने अपने समर्थकों को शुक्रिया कहा और अपने डेमोक्रेट प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार बर्नी सैंडर्स का भी धन्यवाद कहा.
चीन की फितरत
जब भी भारत अपनी सीमा में चीन के सैनिकों के घुस आने की शिकायत करता है तब चीन इसे गफलत का नतीजा बता कर या फिर कोई और बहाना करके अनदेखी कर देता है। लेकिन ऐसा अक्सर होने लगे और भारतीय क्षेत्र में चीन के सैनिकों की संदिग्ध उपस्थिति दर्ज की जाए तो इसे सामान्य घटना नहीं माना जा सकता। गौरतलब है कि बाईस जुलाई को उत्तराखंड के चमोली जिले के बाड़ाहाती मैदान में देखे गए चीनी सैनिकों ने उसे अपना क्षेत्र बता कर वहां निरीक्षण के लिए राज्य प्रशासन के अधिकारियों को लौटा दिया था। लगभग अस्सी वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला बाड़ाहाती मैदान 1957 से ही दोनों देशों के बीच एक विवादित हिस्सा माना जाता है।
इस मसले को दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए सुलझाने पर सहमति बनी थी। लेकिन इस सहमति की वास्तविक स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अक्सर चीन के सैनिक जमीनी से लेकर वायु सीमा तक का उल्लंघन कर भारत में प्रवेश कर जाते हैं। पिछले एक महीने के भीतर यह दूसरी बार है जब चीन के सैनिक भारत की जमीनी और वायु सीमा में अवैध तरीके से घुसे और एक तरह से यह बताने की कोशिश की कि उसे भारत की आपत्तियों की कोई परवाह नहीं है।
पर विचित्र यह है कि जब लोकसभा में यह मसला गरमाया तो केंद्र सरकार ने उसे कोई खास तवज्जो नहीं दी, उसने यही जताया कि यह सीमा के तनिक उल्लंघन का सामान्य मामला है। पर जो चीन आधुनिक तकनीकी संसाधनों के जरिए अपनी सीमा से लेकर आसपास की सभी गतिविधियों पर नजर रखने का दावा करता रहता है, क्या हर बार गफलत की उसकी दलील पर भरोसा किया जा सकता है? पिछले महीने जब अरुणाचल प्रदेश के रास्ते चीन के करीब ढाई सौ सैनिक भारतीय सीमाक्षेत्र में घुस आए थे, तो उन्हें बाहर करने के लिए भारत को काफी जद््दोजहद करनी पड़ी थी। और तब भी चीन ने यही कह कर अपनी मंशा को ढकने की कोशिश की कि उसके सैनिक सीमा पर सही निशान न होने के कारण गलती से चले गए थे।
सन 1962 में हुए युद्ध के बाद भारत और चीन के बीच सीमा-विवाद को लेकर कोई बड़ा टकराव नहीं हुआ है, लेकिन सच यह है कि दोनों देशों के बीच सीमा के अंतिम निर्धारण के मसले पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। हालांकि अरुणाचल प्रदेश से पहले चीनी घुसपैठ के ठिकाने लद्दाख क्षेत्र में सिमटे हुए थे। लेकिन भारत की ओर से ज्यादा तीखी प्रतिक्रिया न होने के चलते शायद चीन का दुस्साहस बढ़ता चला गया है। अरुणाचल प्रदेश के काफी बड़े हिस्से पर वह अपना दावा जताता रहा है।
इसी क्रम में अक्सर उसके सैनिक उधर से घुसपैठ करते हैं और भारतीय सैनिकों के विरोध करने पर वापस चले जाते हैं। लेकिन अगर चीन की दलील मान ली जाए कि उसके सैनिक घुसपैठ नहीं करते, बल्कि गलती से ऐसा हो जाता है तो ऐसी घटनाएं लद््दाख और अरुणाचल प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड में भी क्यों होने लगी हैं! जाहिर है, यह भारत के लिए चिंतित करने वाली घटना है। सीमा पर चौकसी बढ़ाने के अलावा जरूरत इस बात की है कि अब बातचीत के जरिए सीमा के पक्के निर्धारण से संबंधित किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाए।







