जमैका। भारत के तेज गेंदबाज इशांत शर्मा गेंदबाजों के प्रदर्शन से काफी खुश हैं और उन्हें उम्मीद है कि टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ अगले तीन टेस्ट मैचों में भी सकारात्मक और निर्मम इरादों के साथ उतरेगी। भारत ने एंटीगा में खेले गए पहले टेस्ट मैच में वेस्टइंडीज को पारी और 92 रन से हराया था।
इशांत ने कहा कि हमें निर्मम बनना होगा और सकारात्मक क्रिकेट खेलनी होगी। बाकी हमें खेल आगे बढ़ने के साथ परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति बनानी होगी। पहले टेस्ट मैच में सफलता शार्ट पिच गेंद करने और कभी कभी फुल लेंथ गेंद करने से मिली।
इशांत ने कहा कि वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को शार्ट पिच गेंदों के सामने जूझना पड़ा। हमने रणनीति के अनुसार गेंदबाजी की। हमने शार्ट पिच गेंदें की और इसके अलावा कुछ फुललेंथ गेंदें भी की। ऐसी पिच जहां पर मदद नहीं मिल रही हो आपको निरंतर एक जैसी गेंदबाजी करनी चाहिए। उमेश और शमी ने पहली पारी में अच्छी गेंदबाजी की।
'…तो नहीं करनी चाहिए एक जैसी गेंदबाजी': ईशांत
सलमान खान ने किस के लिए बनाया गोराई बीच पर ये खूबसूरत बंगला
सलमान खान अपने लिए एक बीच पर बंगला बना रहे हैं। सोमवार को अपने चिंकारा केस से बरी हुए भाईजान के घर वाले उनकी शादी की तैयारी में भी जुटे हैं तो कही इसीलिए तो सलमान अपना नया आशियाना तो नहीं बना रहे। दरअसल, सुल्तान ने अपने 51वें बर्थ डे पर खुद को महाराष्ट्र के गोराई बीच पर एक घर गिफ्ट किया है।
यह घर 100 एकड़ जमीन पर बन रहा है। खबरें हैं कि यह एक 5-BHK बंगला होगा। हालांकि अभी घर पूरी तरह नहीं बना है लेकिन चारों तरफ हरियाली अभी से देखी जा सकती है। इस बीच हाउस में स्वीमिंग पूल, जिमनेजियम और थिएटर होगा। यह बंगला टू-स्टोरी बिल्डिंग के साथ तैयार किया जाएगा।
मुंबई मिरर के मुताबिक, ‘सलमान इस तरह का फॉर्म हाउस नॉर्थ-ईस्ट महाराष्ट्र में बनाना चाहते हैं। सलमान गोराई और मनोरी के प्रॉपर्टी में बहुत इन्वेस्ट भी कर रहे हैं। गोराई बीच पर उनकी इस प्रॉपर्टी की खरीदारी से बॉलीवुड के दूसरे सिलेब्स भी साल्सेट और भेट कोस्टल क्षेत्रों के पास प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं।’
सूत्र तो ये भी बता रहे हैं कि पहले सलमान अपने पनवेल फार्म हाउस में परिवार के साथ वक्त बिताते थे लेकिन जैसे ही ये घर तैयार हो जाएगा तो सलमान यहां अपने परिवार के साथ छुट्टियां बिताने आएंगे। अब सलमान यहां परिवार के साथ वक्त बिताएंगे या अपनी लाइफ पार्टनर के साथ ये तो वक्त बताएगा।
फिलहाल खान परिवार में इन दिनों खुशी का माहौल है एक तरफ सुल्तान अच्छी कमाई कर रही वहीं दूसरी और सलमान अपने सभी केस से एकतरह से बरी हो गए। बता दें सलमान निर्देशक कबीर खान की आगामी फिल्म टयूबलाइट में नजर आएंगे।
परिणीति के साथ दिलजीत करेंगे स्क्रीन शेयर
अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा जल्द ही फिल्म ‘चमेली की शादी’ के रीमेक में नजर आएंगी। इस फिल्म में उनके साथ पंजाबी एक्टर व सिंगर दिलजीत दोसांझ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे।
खबर है कि परिणीति और दिलजीत को फिल्म के लिए साइन कर लिया गया। गौरतलब है कि फिल्म ‘चमेली की शादी’ 1986 में आई थी और इस फिल्म में अमृता सिंह ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
फिल्म में अमजाद खान का भी अहम रोल था और फिल्म की कहानी चमेली की शादी के इर्द-गिर्द घूमती हुई थी। गौरतलब है कि ‘चमेली की शादी’ के रीमेक को रोहित जुगराज डायरेक्ट कर रहे हैं।
प्रेग्नेंट करीना को दीपिका पादुकोण ने किया दुखी, जानिए क्या कहा
बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की काफी लंबे समय से चर्चा थी कि वह जल्द रणवीर सिंह से शादी कर सकती है। अब हाल ही में अपने एक बयान में उन्होंने कहा कि न ही वे शादी करने जा रही है और न ही प्रेग्नेंट हैं। दीपिका की इस बात से तो यह समझ आता है कि वो सिर्फ अपने करियर पर फोकस कर रहीं हैं। लेकिन लगता है दीपिका का यह बयान करीना कपूर को पसंद नहीं आया। करीना ने दीपिका के इस बयान को ज्यादा ही पर्सनली ले लिया है।
सूत्रों की मानें तो करीना को कहना है कि जब दीपिका से उसकी प्रेग्नेंसी के बारे में पूछा ही नहीं गया तो वह इस बारे में सफाई क्यों दे रही हैं? करीना को ऐसा लगता है कि दीपिका के इस बयान से उनपर निशाना साधा गया है।
दरअसल, करीना इस बात से नाराज हैं कि शादी के बाद अभिनेत्रियां अपने करियर को सीरीयसली नहीं लेती हैं। करीना ने हाल ही में अपनी प्रेग्नेंसी पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा था कि मैं प्रेग्नेंट हूं, मरी नहीं हूं, क्यों इस मुद्दा बना रहे हैं। मां बनना नोर्मल है। हम आज की सदी के लोग हैं ना कि बरसों पुराने रीति-रिवाज मानने वाले।
ग्लैडिएटर की याद दिलाएगा ऋतिक का एक्शन
मुंबई। रसेल क्रो की ग्लैडिएटर किसे याद नहीं होगी। एपिक फिल्मों की माइलस्टोन फिल्म ग्लैडिएटर से तुलना तो हर एपिक फिल्मों की कर ही जाती है। लेकिन उसके मुकाबले खड़े होने का दम कोई नहीं भर पाता। पर मोहेंजो दारो ग्लैडिएटर के सामने कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। प्रोमो को शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म को लेकर डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर ने काफी मेहनत की है। और इसके एक्शन की तारीफ हर जगह हो रही है, जहाँ एक सीन में सरमन के बकर-जोकर नाम के दो विशालकाय लोगों से फाइट की परिकल्पना ही, 16 साल पहले ग्लैडिएटर के ओपनिंग सीन की याद दिला देते हैं।
सूत्रों की मानें तो फिल्म के इस सीन को देखकर वहां मौजूद क्रू के लोग ग्लैडिटर-ग्लैडिटर चिल्लाने लगे। सबकुछ कहीं न कहीं देखा देखा सा लग रहा था, लेकिन रसेल क्रो और ऋतिक के फाइट में बहुत कुछ अलग है। सबसे अलग तो ऋतिक के अपोजिट लड़ने वाले दो फाइटर हैं, जिनको सेलेक्ट करने के लिए आशुतोष गोवारिकर ने करीब 300 लोगों का ऑडिशन लिया था। इस पिट फाइटिंग सीन की शूटिंग भुज में हुई है। जहां की चिलचिलाती धूप में इसे कर पाना वास्तव में एक कठिन काम है। लेकिन क्रू की मेहनत और डायरेक्टर के विल के आगे इसे शूट कर ही लिया गया।
12 अगस्त को रिलीज होने वाली फिल्म मोहेंजो दारों को आशुतोष गोवालिकर ने डायरेक्ट किया है। यूटीवी मोशन पिक्चर और आशुतोष गोवालिकर प्रोडक्शन फिल्म के प्रस्तुतकर्ता हैं। सुनीता गोवालिकर व सिद्दार्थ रॉय कपूर ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में मुख्य भूमिका में रितिक रोशन हैं जिनके अपोजिट पूजा हेगड़े कास्ट की गईं है। पूजा की यह पहली फिल्म है। फिल्म में कबीर बेदी और अरुणोदय सिंह जैसे मंझे कलाकार भी हैं।
महाश्वेता देवी को सुनना ब्रेख़्त को पढ़ने जैसा
1980 में हिंदी भाषी दुनिया के गिने-चुने लोग ही बांग्ला की सुप्रसिद्ध साहित्यकार महाश्वेता देवी को जानते थे. हालांकि बांग्ला भाषी समाज में वो एक जाना-पहचाना नाम थीं. तब तक बंगाल के नक्सलबाड़ी आंदोलन की पृष्ठभूमि में लिखा गया उनका मशहूर उपन्यास ‘हज़ार चौरासी की मां’ प्रकाशित हो चुका था. ऐसे में जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के गोरख पांडे और उर्मिलेश जैसे कुछ छात्र और समकालिन तीसरी दुनिया के संपादक आनंद स्वरूप वर्मा ने महाश्वेता देवी से इंटरव्यू लिया.
आनंद स्वरूप वर्मा कहते हैं कि यह हिंदी में महाश्वेता देवी का पहला इंटरव्यू था.उन्होंने उस इंटरव्यू में कहा था कि हम सभी लेखकों को रोज़मर्रा की ज़िंदगी को नज़दीक से देखे-सुने बिना लिखने का कोई अधिकार नहीं है. यह ज़रूरी है कि हम जनता तक जाए और उनकी वास्तविक ज़िंदगी से जुड़ी कहानियों को समझें. और हमारे पास जो कुछ है वो उन्हें दें.”
वर्मा बताते हैं कि इस संदर्भ में उन्होंने शोषण की जटिल प्रक्रिया है समाज के तमाम अंतर्विरोधों को समझने की बात कही थी. जब वो ये बाते बता रही थी तब ऐसा लग रहा था कि हम ब्रेख़्त को पढ़ रहे हैं.
महाश्वेता देवी का जन्म अविभाजित बंगाल के ढाका शहर में 1926 में हुआ था. उनके पिता मनीष घटक ख़ुद एक मशहूर उपन्यासकार थे और चाचा ऋतिक घटक आगे चलकर एक फिल्मकार के रूप विख्यात हुए.
महाश्वेता देवी 1940 के दशक में बंगाल के कम्युनिस्ट आंदोलन से प्रभावित हुईं और हमेशा दबे-कुचले शोषित समाज की न्याय की लड़ाई में शामिल रहीं.
उन्हें 1986 में पदम श्री, 1996 में ज्ञानपीठ और 2006 में पदम विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
हिंदी के कवि मंगलेश डबराल कहते हैं कि महाश्वेता देवी ने तीसरी दुनिया के देशों के लेखकों के सामने एक उदाहरण पेश किया.
वो कहते हैं, “महाश्वेता देवी इस बात का बहुत बड़ा उदाहरण है कि तीसरी दुनिया के देशों के लेखकों को कैसा होना चाहिए. वो लेखक होने के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता भी थीं.”
वो आगे कहते हैं कि बाहर के देशों में भारतीय साहित्य को जिन रचनाओं की बदौलत जाना गया, उनमें महाश्वेता देवी की रचनाएं भी हैं.
मंगलेश डबराल कहते हैं कि महाश्वेता देवी पहली ऐसी लेखिका हैं जिन्होंने नक्सलबाड़ी आंदोलन के दौरान जो लोगों ने यातनाएं सहे, उनका एक दस्तावेज़ ‘हज़ार चौरासी की मां’ तैयार की.
महाश्वेता देवी ने अपने मशहूर उपन्यास ‘हज़ार चौरासी की मां’ में एक भद्रलोक वर्ग की महिला की कहानी को तब की समाजिक उथल-पुथल से जोड़ा है.
मंगलेश डबराल बताते हैं कि महाश्वेता देवी से पहले बांग्ला साहित्य में पारिवारिक द्वंद की कहानियां होती थीं.
दो साल पहले महाश्वेता देवी के बेटे नवारुण भट्टाचार्य की कैंसर से मृत्यु हो गई थी. उनकी गिनती भी बांग्ला के मशहूर कवियों में होती है.
नवारुण के साथ ‘भाषा बंधन’ नाम की पत्रिका का संपादन करने वाले अरविंद चतुर्वेद महाश्वेता देवी के मानवीय पहलू को याद करते हैं.
अरविंद बताते हैं, “बीच-बीच में वो फोन कर के बुला लेती थीं. कहती थी क्या कर रहे हो? आ जाओ. एक बार रात में मैं अख़बार के दफ़्तर से काम कर के उनके पास चला गया. तब उन्होंने कहा था कि तुम बहुत थके हुए दिख रहे हो. इतना कह कर वो उठकर बाथरूम में गई और एक तौलिए को गीला कर उसे निचोड़ कर ले आई. और मेरे पीछे खड़ी होकर मेरे सिर पर तौलिया रखकर उस थोड़ा और गीला किया. फिर कहने लगी कि जब मैं बहुत थकी होती हूं तो ऐसे ही ख़ुद से ही अपनी थकान मिटाती हूं.”
महाश्वेता देवी के साथ ही लेखकों के एक पूरी पीढ़ी का अंत हो गया है जो लेखन को सामाजिक संघर्ष का हिस्सा मानते थे, ड्राइंग रूम में किया जाने वाला सुरक्षित रचनाकर्म नहीं.
लोकल ट्रेन में लड़की की पिटाई करने वाली चार महिलाएं हिरासत में
मुंबई: मुंबई में विरार से चर्चगेट जा रही ट्रेन में 20 वर्षीय लड़की से मारपीट करने की आरोपी चार महिलाओं को गुरुवार को हिरासत में ले लिया गया। पीड़िता की पहचान पर उन्हें हिरासत में लिया गया।
पुलिस ने कहा कि इंजीनियरिंग की छात्रा पीड़िता रितुजा नायक की शिकायत के आधार पर वसई रोड थाने में बुधवार को चार महिलाओं के खिलाफ असंज्ञेय अपराध का मामला दर्ज किया गया। आरोपी नियमित यात्री हैं जिनकी पहचान रितुजा ने विरार स्टेशन पर की। घटना मंगलवार की है।
पुलिस ने कहा कि आरोपियों की पहचान दीपाली सावंत, नेहा ठाकुर, नैना ठाकुर और अश्विनी गौरव के रूप में हुई है। पीड़िता मंगवार की सुबह आठ बजकर 40 मिनट पर विरार में रेलगाड़ी पर सवार हुई थी। वसई में उतरने वालों का विरोध कर रही आरोपियों ने पीड़िता की पिटाई कर दी।
रितुजा वसई में जैसे ही उतरने लगी आरोपी महिलाओं ने उसे जबरन रोक लिया और उससे मारपीट की। पीड़िता का आरोप है कि घटना के समय उसे अस्थमा का संक्षिप्त दौरा भी पड़ा।
पुणे में निर्माणाधीन इमारत का स्लैब गिरा, 10 मजदूरों की मौत
पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में एक निर्माणाधीन इमारत की स्लैब गिरने से बड़ा हादसा हो गया है। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई है जबकि 10 से ज्यादा मजदूरों के मलबे में दबे होने की भी आशंका जताई जा रही है। राहत बचाव कार्य जारी है। दबे हुए मजदूरों को मलबे से निकालने का काम जारी है।
जानकारी के मुताबिक बिल्डिंग के 14वें फ्लोर पर काम चल रहा था। इस दौरान वहां स्लैब गिर गया, जिसके चलते हादसा हो गया। पुणे के बाड़ेवाली में स्टेडियम के पास बिल्डिंग बन रही है। बताया ये जा रहा है कि इस बिल्डिंग में 15 से 20 मजदूर काम रहे हैं। राहत और बचावएजेंसियां इमारत का मलबा हटाने, मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने एवं घायलों की मदद में जुटी हई हैं।
उत्तराखंड में चीनी सेना ने घुसपैठ नहीं, सीमा का उल्लंघन किया: पर्रिकर
केंद्र सरकार ने गुरुवार को उत्तराखंड के चमोली जिले के बाराहोटी इलाके में चीनी सेना के घुसपैठ की खबरों का खंडन किया और कहा कि यह घुसपैठ नहीं बल्कि सीमा के उल्लंघन का मामला है. रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने लोकसभा में दिए बयान में कहा, ‘जैसी मीडिया में खबरें आई हैं, उत्तराखंड में किसी तरह की घुसपैठ नहीं हुई है. यह चिनी सेना (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) द्वारा सीमा के उल्लंघन का मामूली सा मसला है.’
सीमा का निर्धारण न होने की वजह से हुआ उल्लंघन
उन्होंने कहा कि इस तरह के सीमा उल्लंघन के मामलों से निपटने के लिए एक व्यवस्थित तंत्र मौजूद है. पर्रिकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच वास्तविक सीमारेखा का निर्धारण नहीं हुआ है, जिसके कारण मतभेद खड़े होते रहे हैं. उन्होंने आगे कहा, ‘कई बार सीमा का उल्लंघन हो जाता है.’
पर्रिकर ने कहा कि चीनी सेना द्वारा सीमा के उल्लंघन के मामलों में कमी आई है. कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि चमोली के नजदीक चीनी सेना ने घुसपैठ की और वे भारतीय सीमा में 200 मीटर अंदर तक घुस आए. सिंधिया ने कहा, ‘इस तरह की खबरें भी आई हैं कि चीनी सेना ने स्थानीय राजस्व अधिकारी से बदसलूकी भी की.’
सिंधिया की चिंता का समर्थन करते हुए तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय ने सरकार से इस पर बयान देने की मांग की. समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कहा कि भारत सरकार को चीन की तरफ से होने वाले घुसपैठ के प्रति अधिक सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है.
नहीं रहे सुप्रसिद्घ तबला वादक लच्छू महाराज, असहमति को शिल्प से सोचने वाले थे कलाकार
दालमंडी की ठसाठस भरी तंग गलियां, भीड़ भरे बाजार में दुकानदार, ग्राहकों का भारी शोरगुल, इधर-उधर भागते फेरीवाले, इन सबके बीच एक मकान की दूसरी मंजिल पर बंद कमरे में तबले पर चलता रियाज। लच्छू महाराज का यही पता था। अब भी पता वही रहेगा, लेकिन लच्छू महाराज वहां नहीं मिलेंगे। शहर बनारस में रोज सामने घाट से दालमंडी तक आठ किलोमीटर की दूरी पैदल चलकर आने का सिलसिला अब खत्म। प्रख्यात फिल्म अभिनेता गोविंदा के मामा और सितारा देवी के दामाद लच्छू महाराज बनारस ही नहीं, तबला बजाने और तबले को जानने वालों के बीच किसी पहचान के मोहताज नहीं थे।
1975 में आपातकाल लगा, तो जॉर्ज फर्नांडिस, देवव्रत मजुमदार, मार्कंडेय जैसे धाकड़ समाजवादी नेताओं को लच्छू महाराज जेल में तबला बजाकर सुनाते थे। नरेन्द्र नीरव कहते हैं, वो जेल में सिर्फ तबला नहीं बजाते थे, बल्कि आपातकाल का अपने तरीके से विरोध करते थे। उन्हें संगीत नाटक एकेडमी व अन्य पुरस्कार न मिलने का कोई मलाल नहीं था। लाल रंग का एक गमछा, एक जनेऊ और पूर्वजों की तस्वीर के बीच सुबह 10 बजे से जो रियाज शुरू होता, वो शाम को 6 बजे ही खत्म होता। दाल मंडी की गलियां जो कभी तवायफों के नृत्य, तहजीब एवं अदब की बानगी थीं, वो लच्छू महाराज के पदचाप का बेसब्री से इंतजार करतीं।
लच्छू महाराज की जिद और तबले के प्रति उनके प्रेम के कई किस्से हैं। बताते हैं कि एक बार आकाशवाणी में उन्हें तबला वादन के लिए बुलाया गया जिन केंद्र निदेशक महोदय ने उन्हें बुलाया वो पांच मिनट विलंब से आए इसका नतीजा यह हुआ कि लच्छू महाराज बिना कार्यक्रम में शामिल हुए वापस लौट गए। एक घटना विश्व विख्यात संकट मोचन संगीत समारोह की है जिसमें लच्छू महाराज को तबला वादन के लिए बुलाया गया था। तबला बजाते-बजाते फट गया, नया तबला लाने में देरी हुई तो लच्छू महाराज बीच में ही उठ कर चले गए। लच्छू महाराज का जाना संगीत में विपक्ष का जाना है। सत्तातंत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले तबला वादकों को खुलकर खरी-खोटी सुना पाते थे।
सुप्रसिद्ध साहित्यकार लेखक, आलोचक और रंगकर्मी व्योमेश शुक्ल कहते हैं कि असहमति को शिल्प से सोचने का कलात्मक नजरिया खत्म हो गया। लच्छू महाराज ने अपने तबले में कभी किसी प्रभुत्वकारी शिल्प को स्वीकार नहीं किया। वो बताते हैं कि हालांकि लच्छू महाराज की जिद ने उनको कई अवसरों से वंचित किया। उनके अघोरपन के किस्से उनके अवधूत स्वरुप के किस्से इतने बड़े हो गए कि उनकी उपलब्धियां पीछे रह गईं, जिस बाजार में कबीर दास ने खड़ा होकर अपना घर जलाने की चुनौती दी थी उसी जगह लच्छू महाराज तबला बजाते थे। व्योमेश कहते हैं, तवायफों के परिवार से आने वाले कलाकार नामचीन, प्रकांड विद्वान होने पर भी कहीं न कहीं शर्म का अनुभव करते रहे हैं। यह दर्द उनके चेहरे पर भी दिखता था।







