सोल। उत्तर कोरिया ने बुधवार को पहली बार सीधे जापान के नियंत्रण वाले जलक्षेत्र में एक बैलेस्टिक मिसाइल दागी जिस पर टोक्यो ने कड़ी प्रतिक्रिया दी तथा अमेरिका तथा दक्षिण कोरिया के साथ उसका तनाव और बढ़ गया।
अमेरिकी सेना ने कहा कि उत्तर कोरिया ने असल में एक साथ मध्यम दूरी की दो रोडांग मिसाइलें दागीं लेकिन ऐसा लगता है कि एक मिसाइल में उड़ान के समय विस्फोट हो गया।
मिसाइल प्रक्षेपण ऐसे समय हुआ है जब उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया में एक अत्याधुनिक अमेरिकी मिसाइलरोधी प्रणाली की प्रस्तावित तैनाती पर भौतिक कार्रवाई की धमकी दी थी। इसके अलावा कुछ हफ्तों में दक्षिण कोरिया और अमेरिका का संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास शुरू होना है।
जापान ने कहा कि एक मिसाइल जापान के उत्तरी तट से करीब 250 किलोमीटर दूर जापान सागर में देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र के भीतर जाकर गिरी।
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबे ने कहा, यह हमारे देश की सुरक्षा के खिलाफ एक गंभीर खतरा है। यह उकसाने वाली हरकत है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अमेरिका ने इसकी निंदा करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उन प्रस्तावों का साफ उल्लंघन बताया जिनमें उत्तर कोरिया पर बैलेस्टिक मिसाइल तकनीक के उपयोग पर पाबंदी लगाई गई है।
पेंटागन प्रवक्ता गैरी रोज ने कहा, इस उकसावे से केवल (उत्तर कोरिया की) प्रतिबंधित क्रियाकलापों के जवाब में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धता में बढ़ोतरी होगी।
अमेरिकी रणनीतिक कमान ने कहा कि उत्तर कोरिया के पश्चिमी क्षेत्र के एक स्थल से दो मिसाइलें सोल के समयानुसार सुबह करीब सात बजकर 50 मिनट पर छोड़ी गईं। यह पहली बार है जब उत्तर कोरिया की मिसाइल सीधे जापानी जलक्षेत्र में दागी गई है। इससे पहले 1998 में दूसरे चरण की मध्यम दूरी की मिसाइल जापान के ऊपर से दागी गई जो जापान के प्रशांत महासागर के तट पर विशेष आर्थिक क्षेत्र के अंदर आगर गिरी थी।
जापान सरकार के शीर्ष प्रवक्ता योशिहिदे सुगा ने इस परीक्षण की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने बताया, इसके बारे में कोई पूर्व चेतावनी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा, विमान एवं पोतों की सुरक्षा के लिहाज से यह भारी समस्या पैदा करने वाला खतरनाक कृत्य है।
उत्तर कोरिया द्वारा जनवरी में किए गए चौथे परमाणु परीक्षण के बाद संयुक्त राष्ट्र ने उस पर कई प्रतिबंध लगाए थे लेकिन उनका उल्लंघन कर वह इस साल कई परमाणु परीक्षण कर चुका है। इससे पहले 19 जुलाई को उसने तीन बैलेस्टिक मिसाइल छोड़ी थी, जिसमें एक रोडोंग भी थी।
उत्तर कोरिया ने जापान के जलक्षेत्र में बैलेस्टिक मिसाइल दागी
पश्चिम बंगाल की इस छलांग का महत्व प्रतीकात्मक भी है और व्यावहारिक भी
पिछले 70 साल से पश्चिम बंगाल के लोग इस पर सिर खुजाते रहे हैं कि वे किसके पश्चिम में थे. बंटवारे से पहले बंगाल एक था- उपनिवेश का एक विशाल प्रांत जिसमें आज का बांग्लादेश, बिहार, उड़ीसा और पूर्वोत्तर और बर्मा के भी कुछ हिस्से शामिल थे. आजादी के बाद पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिम बंगाल. 1971 में पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया लेकिन बंगाल पश्चिम ही रहा. अब ममता बनर्जी सरकार ने फैसला किया है कि यह पश्चिम शब्द हटा दिया जाए. उसके मुताबिक अब अंग्रेजी में यह सिर्फ बंगाल रहेगा और बंगाली में इसे बांग्ला या बंग कहा जाएगा.
यह प्रस्ताव कोई पहली बार नहीं आया है. वाम मोर्चा सरकार ने भी 1999 में कुछ ऐसी ही कोशिश की थी लेकिन, यह नाकाम रही. हालांकि ऐतिहासिक और व्यावहारिक कारणों के हिसाब से यह एक बढ़िया विचार है. ऐतिहासिक रूप से बंगाली बोलने वाले लोगों के इलाके का जिक्र 280 ईसापूर्व रचे गए अर्थशास्त्र में मिलता है जिसमें इसे बंग कहा गया है. अंग्रेजों ने जब भारत को उपनिवेश बनाया तो उनके लिए बंगाल कोई सांस्कृतिक या भाषाई नहीं बल्कि एक सुविधाजनक प्रशासनिक इकाई था. 1767 से लेकर 1911 तक तो उन्होंने कलकत्ता से ही पूरे देश का राजकाज चलाया.
व्यावहारिक तौर पर देखें तो नाम के पश्चिम बंगाल से बंगाल होने से यह वर्णानुक्रम के हिसाब से बनी राज्यों के नाम की सूची में कई स्थान ऊपर पहुंच जाएगा. अभी इसका स्थान आखिरी है और यह उत्तर प्रदेश के बाद आता है. यानी जब अंतरराज्यीय काउंसिल की बैठक होगी तो उस चर्चा में पश्चिम बंगाल के वार्तकारों को बनिस्बत पहले बोलने का मौका मिलेगा जो आखिर तक जाते-जाते बोझिल हो जाती है. प्रशासकों के लिए यह मायने रखता है. बाकी यह सोचकर सुकून महसूस कर सकते हैं कि वे किसी के पश्चिम में नहीं बल्कि बंगाल में रहते हैं. वैसे राज्य के प्रशासकों और लोगों ने कभी नहीं कहा कि पैंथेरा टिगरिस का नाम रॉयल वेस्ट बंगाल टाइगर किया जाए और यह तथ्य अपनी कहानी खुद कह देता है.
जमैका टेस्ट: क्या वेस्टइंडीज के लिये राहत बनेगी बरसात
ऐसा लगता है कि बरसात सबीना पार्क मैदान पर जारी दूसरे टेस्ट मैच में वेस्टइंडीज को भारत के हाथों हार से बचा लेगी। शुरुअती दो दिनों तक कोई बारिश नहीं हुई लेकिन तीसरे दिन से बारिश का जो रुक-रुक कर होने का सिलसिला चला वह थमने का नाम नहीं ले रहा।
बारिश के कारण ही भारत ने अपनी पहली पारी विकेट पर 500 रनों पर घोषित कर दी थी और अब चौथे दिन मंगलवार को बारिश के कारण 15.5 ओवरों का खेल सम्भव हो सका।
भारत ने हालांकि जितना खेल सम्भव हो सका, उसका भरपूर फायदा उठाते हुए 48 रनों के कुल योग पर मेजबान टीम के चार विकेट झटक लिए हैं।
डैरन ब्रावो (20) का विकेट गिरने के साथ खेल रुका था और रुका ही रहा। जर्मेन ब्लैकवुड तीन रन बनाकर नाबाद हैं।
कैरेबियाई टीम ने अबतक क्रेग ब्रैथवेट (23), राजेंद्र चंद्रिका (1), मार्लन सैमुएल्स (0) और ब्रावो के विकेट गंवाए हैं। मेजबानों को हार बचाने के लिए काफी संघर्ष करना होगा लेकिन अगर बारिश मेहरबान रही तो फिर उसका काम आसान हो सकता है।
अभी मेजबान 256 रनों से पीछे हैं और उनके सिर्फ छह विकेट सुरक्षित हैं, जिनमें से दो ही विशेषज्ञ बल्लेबाज हैं। भारत के लिए इशांत शर्मा और अमित मिश्रा ने एक-एक सफलता हासिल की है जबकि मोहम्मद शमी को दो विकेट मिले हैं।
भारत की ओर से पहली पारी में लोकेश राहुल (158) और अजिंक्य रहाणे (नाबाद 108) ने शतक लगाये हैं। मेजबान टीम ने पहली पारी में 196 रन बनाए थे।
'ढिशूम' की सफलता को देख सीक्वल की तैयारी शुरू
मुंबई। पिछले शुक्रवार रिलीज हुई फिल्म ’ढिशूम’ मुम्बई में हो रही भारी बारिश के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है। फिल्म की सफलता को देख इसके सीक्वल की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। खबर है कि इसके निर्माता साजिद नाडियाडवाला ’ढिशूम-2’ जल्द से जल्द बनाना चाहते हैं।
बाक्स आॅफिस पर ’ढिशूम’ पहले वीकेंड में ढिशूम ने करीब 37.5 करोड़ का बिजनेस किया है। वो भी ऐसे समय में जब लगभग पूरे देश में वर्षा हो रही है। दिल्ली- एनसीआर में भी जाम के कारण सड़कों पर ही वीकेंड बीत गया। ऐ समय े में 37.5 करोड़ वास्तविक आंकड़ों से कहीं ज्यादा लगते हैं क्योंकि इतनी बारिश नहीं होती तो शायद और ज्यादा दर्शक सिनेमाघरों तक पहुंच सकते है।
फिल्म की स्टोरी लाइन और एक्शन दृश्यों को दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं। समीक्षकों की भी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। ’ढिशूम’ के अच्छे प्रदर्शन की वजह से इसकी टीम के हौसले बुलंद हैं और सीक्वल की तैयारी कर रहे हैं। खबर है कि निर्माता साजिद नाडियाडवाला सीक्वल की रिलीज को लेकर भी योजना बना रहे हैं।
जॉन अब्राहम और वरुण धवन से भी फिल्म की शूटिंग के लिए डेट एडजस्ट करने के लिए बात चल रही है। हो सकता है वरुण और जॉन के साथ ’ढिशूम-2’ में जैकलीन फर्नांडिज भी नजर आये।
ऐश्वर्या राय के 'इंटिमेंट सीन्स' पर बच्चन परिवार नाराज!
मुंबई : ऐश्वर्या राय बच्चन बॉलीवुड की अपनी दूसरी पारी में चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं और नए प्रयोग करती नजर आ रही हैं। ‘जज्बा’ और ‘सरबजीत’ में चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने वाली ऐश्वर्या की अगली फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ है। इस फिल्म के निर्माता करण जौहर हैं। फिल्म में ऐश्वर्या के साथ रणबीर कपूर दिखाई देंगे। फिल्म में अनुष्का शर्मा भी नजर आएंगी।
मीडिया रिपोर्टों की मानें तो ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में ऐश्वर्या ने रणबीर के साथ काफी बोल्ड सीन्स दिए हैं। हालांकि, पहले ही यह चर्चा थी कि ऐश्वर्या ने रणबीर के साथ ‘इंटिमेट सीन्स’ करने से मना कर दिया है लेकिन करण के समझाने के बाद वह ‘इंटिमेट सीन्स’ करने के लिए राजी हुईं। इस बीच, यह भी चर्चा है कि रणबीर-ऐश्वर्या के बीच ‘इंटिमेट सीन्स’ को लेकर बच्चन परिवार खासकर जया बच्चन नाराज हैं।
चर्चा है कि अमिताभ बच्चन ने फिल्म से बोल्ड दृश्यों का हटाने के लिए करण जौहर को फोन किया और उनसे ‘लव सीन्स’ हटाने का अनुरोध किया है।
दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं में से एक ऐश्वर्या राय बच्चन ने पिछले साल फिल्म ‘जज्बा’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। जिसके बाद उन्होंने फिल्म ‘सरबजीत’ की। दोनों ही फिल्मों को क्रिटिक्स की तरफ से मिला जुली प्रतिक्रिया मिली लेकिन दोनों में से कोई भी फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा पायी।
अदालत का यह निर्णय बताता है कि आरक्षण तो ठीक है, लेकिन योग्यता भी जरूरी है
(शीर्ष अदालत का मानना है कि नियुक्तियों के वक्त सीटें खाली रह जाना न्यूनतम योग्यता को दरकिनार करने की वजह नहीं हो सकता)
बात 2011 की है. पंजाब में पीसीएस (जे) की प्रारंभिक परीक्षा का आयोजन हुआ था. पीसीएस (जे) यानी न्यायिक सेवा सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की परीक्षा. इसी के जरिये निचली अदालतों में जजों की नियुक्ति होती है. पंजाब लोक सेवा आयोग ने जब इस परीक्षा के परिणाम जारी किये तो वे सारे देश में चर्चा का मुद्दा बन गए. दरअसल इस परीक्षा में जहां सामान्य वर्ग के परीक्षार्थी न्यूनतम 315 अंक और अनुसूचित जाति के परीक्षार्थी न्यूनतम 265 अंक लेकर पास हुए थे, वहीं एक परीक्षार्थी ऐसा भी था जो माइनस दस अंक लेकर भी इस परीक्षा को पास कर गया था. इस परीक्षार्थी का नाम था तजिंदर सिंह.
तजिंदर ने इस परीक्षा में कुल 125 सवालों के जावाब दिए थे. इसमें से उनके सिर्फ 23 जवाब ही सही थे जबकि 102 गलत. नेगेटिव मार्किंग के चलते उनके कुल अंक माइनस दस बने. लेकिन इसके बावजूद भी वे इस परीक्षा को इसलिए पास कर गए क्योंकि वे आरक्षण की एक ऐसी श्रेणी में आते थे जहां एक तरह से उन्हें अपनी न्यूनतम योग्यता खुद ही तय करनी थी.
वे अनुसूचित जाति के साथ ही ‘लीनिअल डिसेंडेंट ऑफ़ एक्स-सर्विसमैन’ (भूतपूर्व सैनिक के नजदीकी वंशज) की भी श्रेणी में आते थे. इस श्रेणी में बेहद कम परीक्षार्थी होने के चलते प्रतियोगिता इतनी कम थी कि तजिंदर माइनस दस अंकों के साथ भी जज बनने की पहली सीढ़ी पार कर गए.
तजिंदर सिंह का यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया. हालांकि तजिंदर पीसीएस (जे) की मुख्य परीक्षा में असफल रहे क्योंकि यहां आयोग और उच्च न्यायलय द्वारा अंकों का एक न्यूनतम आंकड़ा तय किया गया था जिसे पार करना हर परीक्षार्थी के लिए अनिवार्य था. लेकिन तजिंदर के मुख्य परीक्षा तक पहुंचने से ही देश भर में आलोचकों ने पूरी आरक्षण व्यवस्था को ही सवालों के घेरे में ला खडा किया था. इस मामले ने कई लोगों को यह मौका दे दिया था कि वे आरक्षण व्यवस्था पर पुनर्विचार के लिए सरकार से मांग करने लगे थे.
2011 के इस मामले का जिक्र आज हम इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हाल ही में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में एक संस्था ने एक जनहित याचिका दाखिल की थी. इस याचिका में मांग की गई थी कि आरक्षित परीक्षार्थियों के लिए उस न्यूनतम योग्यता को भी समाप्त कर दिया जाए जिसके चलते तजिंदर जज नहीं बन सके थे. ‘वालंटियर्स फॉर सोशल जस्टिस’ नाम की इस संस्था का याचिका में कहना था कि उच्च न्यायालय तथा पंजाब लोक सेवा आयोग द्वारा पीसीएस (जे) की मुख्य परीक्षा में अनुसूचित जाति के परीक्षार्थियों के लिए जो न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक हासिल करने की बाध्यता रखी गई है, उसे समाप्त कर दिया जाए.
संस्था ने यह याचिका हाल ही आए पीसीएस (जे) के परिणामों को देखते हुए दाखिल की थी. कुछ समय पहले पंजाब में हुई यह परीक्षा कुल 119 पदों के लिए आयोजित की गई थी. इनमें से 22 पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थे. परीक्षा में नियमों के अनुसार सामान्य वर्ग के परीक्षार्थियों को मुख्य परीक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के परीक्षार्थियों को न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक हासिल करने जरूरी थे. चूंकि इस परीक्षा में अनुसूचित जाति के सिर्फ तीन छात्र ही मुख्य परीक्षा पास कर पाए थे इसलिए इस याचिका दाखिल करने वाली संस्था का मानना था कि इस शर्त को समाप्त कर दिया जाए.
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस पीबी भजंतरी की पीठ ने इस याचिका की सुनवाई की. उन्होंने इस याचिका को यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि कई मौके ऐसे भी आते हैं जब सामान्य वर्ग के पद भी योग्य परीक्षार्थियों की कमी के चलते खाली रह जाते हैं. लिहाजा किसी परीक्षा में पदों के खाली रह जाने के चलते न्यूनतम योग्यता जैसी शर्तों को समाप्त नहीं किया जा सकता. बीती दस मार्च को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया था जिसके चलते संस्था ने अब सर्वोच्च न्यायालय में अपील दाखिल कर दी.
सर्वोच्च न्यायालय पहुंचे इस मामले की सुनवाई बीती 25 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की संयुक्त पीठ में हुई. इस पीठ ने भी संस्था की अपील को ठुकराते हुए उच्च न्यायालय के फैसले को ही सही ठहराया है. न्यायालय ने याचिका ख़ारिज करते हुए कहा कि ‘जजों की नियुक्ति के लिए एक न्यूनतम योग्यता होना जरूरी है, इसके लिए एक पैमाना होना जरूरी है. सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति से आता है, उसके लिए सारे पैमानों को समाप्त नहीं किया जा सकता.’
मुंबई हमले के मुख्य आरोपित जुंदाल को औरंगाबाद हथियार बरामदगी मामले में उम्रकैद
मुंबई आतंकी हमले के मुख्य आरोपित अबू जुंदाल सहित सात दोषियों को साल 2006 के औरंगाबाद हथियार बरामदगी मामले में उम्र कैद की सजा सुनाई गई है. मुंबई की मकोका अदालत ने इसी मामले में दो अन्य दोषियों को 14 साल और तीन दोषियों को आठ साल की सजा सुनाई. अदालत के मुताबिक 2002 के गुजरात दंगों के बाद राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया की हत्या की साजिश रची गई थी और औरंगाबाद से बरामद ये हथियार इसी साजिश को अंजाम देने के लिए ढोए जा रहे थे.
2006 में औरंगाबाद के करीब आतंकवाद निरोधी दस्ते ने एक टाटा सूमो और इंडिका कार से 30 किलो आरडीएक्स,10 एके-47 राइफलें और 3,200 कारतूस बरामद किए थे. इन वाहनों में से एक जुंदाल चला रहा था लेकिन, हथियार बरामदगी के दौरान वह पुलिस को चकमा देकर भाग गया. इसके बाद बांग्लादेश के रास्ते वह पाकिस्तान पहुंच गया था. 2012 में अबू जुंदाल को सऊदी अरब से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था.
अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील वैभव बगाडे ने अदालत से दोषियों को गैर- कानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम के तहत अधिकतम सजा की मांग की थी.
मुंबई-गोवा हाइवे पर भारी बारिश से पुल ढहा, 2 बसें बहीं, 22 लापता
मुंबई: रायगढ़ के महाड़ में मुंबई-गोवा हाइवे पर बना ब्रिटिश कालीन पुल बारिश की वजह से बह गया है. महाबलेश्वर इलाके में भारी बारिश के चलते सावित्री नदी में आए तेज बहाव के बाद पुल बहा. इसमें 2 बसें और तीन गाड़ियां बह गई हैं, जिसमें 18 मुसाफिर, दो ड्राइवर और दो कंडक्टर लापता हैं. बसों की जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 02141222118 जारी किया गया.
पुलिस ने एपी को बताया कि दो या तीन वाहनों के इसमें बह जाने की खबर हैं, जिसमें कई लोग मौजूद थे. पुलिस अधिकारी संजय पाटिल ने कहा कि बचावदल को अभी तक कोई वाहन या लापता लोग नहीं मिले हैं. यह ब्रिज मंगलवार रात टूट गया था.
एनडीआरएफ के ओपी सिंह ने कहा कि करीब 80 बचावकर्मी, जिसमें गोताखोर भी शामिल हैं, बचावकार्य में लगे हैं, लेकिन भारी बारिश की वजह से उनका काम प्रभावित हो रहा है. कोस्ट गार्ड ने चेतक हेलीकॉप्टर से लापता लोगों को ढूंढने का अभियान शुरू किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस से बात की और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
सीएम फडणवीस ने कहा, ‘‘मुंबई-गोवा राजमार्ग पर स्थित पुल के ढहने की घटना के बारे में मैंने रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी से बात की है। बचाव कार्य और तात्कालिक उपायों के लिए प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच चुके हैं।’’ उन्होंने बताया, ‘‘वहां दो समानांतर पुल थे। इनमें से एक पुल नया था जबकि दूसरा अंग्रेजों के जमाना का था। पुराना वाला पुल गिरा है।’’ उन्होंने कहा कि पुल पर पड़ने वाला भारी दबाव पुल गिरने की मुख्य वजह लग रहा है। यह दबाव महाबलेश्वर में भारी बारिश के कारण सावित्री नदी में आई बाढ़ के कारण है।
फडणवीस ने आज सुबह ट्वीट कर कहा, ‘‘राजमार्ग पर यातायात रोक दिया गया है। प्रशासन नए पुल की मजबूती और क्षमता का आकलन कर रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हताहत हुए लोगों के बारे में कोई निश्चित जानकारी नहीं है।’’
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने का प्रस्ताव, ममता ने विशेष सत्र बुलाया
पश्चिम बंगाल का नाम जल्द ही बदल सकता है. राज्य के संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी ने मीडिया को बताया, ‘हमने पश्चिम बंगाल का नाम फिर से अंग्रेजी में ‘बंगाल’ और बंगाली में ‘बंग’ या ‘बांग्ला’ रखने का प्रस्ताव किया है. इसके लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा. 29 व 30 अगस्त को सदन में इस पर चर्चा होगी और हम सभी दलों से इसे स्वीकार करने का आग्रह करेंगे जिसके बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा.’
उन्होंने यह भी बताया कि यह कोई नई मांग नहीं है और इसकी वजह अंग्रेजी की वर्णमाला है. राज्य के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जब सभी राज्यों के सम्मेलन आयोजित होते हैं तो उसमें पश्चिम बंगाल के वक्ताओं को काफी देर से बोलने का मौका मिलता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन सम्मेलनों में वक्ताओं को अंग्रेजी की वर्णमाला के क्रम में बोलने के लिए बुलाया जाता है. इस वजह से उन्हें अपने विचारों को रखने के लिए अक्सर काफी कम वक्त मिल पाता है और उस वक्त वे काफी थके हुए भी होते हैं.
राज्य सरकार इससे पहले साल 2011 में भी राज्य का नाम बदलने का प्रयास कर चुकी है लेकिन तब उसे केंद्र से इसकी अनुमति नहीं मिल पाई थी.
ओडीशा: अब जेल की सुरक्षा किन्नर करेंगे
शादी ब्याह में नाचते हुए, रेलगाडियों में पैसा मांगते हुए नज़र आने वाले किन्नरों की ज़िंदगी में बदलाव के लिए ओडीशा सरकार ने एक अनोखा कदम उठाया है. सरकार ने जेल सुरक्षा के लिए ट्रांसजेंडरों को नियुक्त करने की योजना बनाई है. ओडीशा देश का पहला राज्य है जहां किन्नरों को जेल की सुरक्षा में लगाया जा रहा है.
सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्देश के मुताबिक किन्नरों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए ये फ़ैसला किया गया है. इसके लिए किन्नरों को अन्य वर्गों की तरह कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा भी पास करनी होगी.
ओडीशा के जेल आईजी अरुण कुमार राय ने बताया कि ओडीशा में 90 जेल हैं और यहां 250 वॉर्डन के पद खाली हैं. इन पर नियुक्ति के लिए ट्रांसजेंडर आवेदन कर सकते हैं. शारीरिक परीक्षा में किन्नरों को महिलाओं में शामिल किया गया है. ओडीशा में लगभग 20 हज़ार किन्नर रहते हैं, इनमें से दो से ढाई हज़ार किन्नर शिक्षित हैं.
राज्य में विकलांगों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सश्कितकरण योजना के सचिव नितिन चंद्रा ने बताया, “अब राज्य में किन्नरों को मुख्य धारा में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है.”किन्नरों ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है.
भुवनेश्वर स्थित ट्रांसजेंडर सुरक्षा ट्रस्ट की प्रमुख मेनका ने राज्य सरकार के इस कदम की सराहना की. मेनका का मानना है कि अगर सरकार शैक्षणिक योग्यता में किन्नरों के लिए थोड़ी छूट दे तो किन्नर इसका ज़्यादा लाभ ले सकते हैं.







