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उत्तराखंड के लिए फायदे का सौदा होगा जीएसटी

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गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) का रास्ता साफ होने के बाद इससे जुड़े नफे नुकसान के पहलुओं पर चर्चाएं आम हैं। इस बीच वाणिज्य कर विभाग की कैलकुलेशन के हिसाब से देखें तो जीएसटी यहां के उद्योगपतियों और व्यापारियों के लिए फायदेमंद साबित होगा। हालांकि अभी टैक्स की दर तय होने का इंतजार है।
वाणिज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर व जीएसटी एक्सपर्ट यशपाल सिंह ने बताया कि जीएसटी उपभोग आधारित टैक्स है। जहां उपभोग होगा, वहां टैक्स मिलेगा।
उन्होंने बताया कि उद्योगों के नजरिए से देखें तो उन्हें पहले कई टैक्स का सामना करना पड़ता था। कच्चा माल खरीदने से लेकर माल सप्लाई करते तक अलग-अलग टैक्स के बजाय अब केवल एक ही टैक्स देना होगा। राजस्व के नजरिए से देखें तो वाणिज्य कर विभाग में इस वक्त करीब 70 हजार करदाता हैं, लिहाजा जीएसटी भरने पर राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
इसके अलावा व्यापारियों को भी जीएसटी से लाभ होने वाला है। यशपाल सिंह ने बताया कि पहले व्यापारी अगर दूसरे राज्य से माल खरीदता था तो वहां अलग टैक्स देना पड़ता था और अपने राज्य में अलग टैक्स देना पड़ता था।
अब उसे केवल एक बार टैक्स जमा कराना है और इसके बाद वह देश के किसी भी कोने से माल खरीदकर बेच सकता है। इससे यह लाभ भी होगा कि कई उपभोग की वस्तुएं जहां तैयार होती हैं, वहां सस्ते दामों पर मिल जाती हैं।
लिहाजा, वह सस्ता माल खरीदकर बेहतर मुनाफा कमा सकेंगे। हालांकि उनका कहना है कि अभी जीएसटी की टैक्स दर लागू होनी बाकी है। ये लागू होने के बाद स्थिति ज्यादा साफ होगी।

फफक-फफक कर रो पड़े भाजपा नेता हरक, चेहरे पर दिखा बदनामी का डर

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रेप प्रकरण में दून पहुंचने पर पूर्व मंत्री और भाजपा नेता हरक सिंह रावत जब मीडिया के सामने पहुंचे तो फूट-फूट कर रो पड़े। रोते-रोते हरक ने अपनी सफाई भी दे डाली। इस दौरान हरक इमोशनल कार्ड खेलने से नहीं चूके। बोले कि मैं सिपाही का बेटा हूं। 1977 से सड़कों पर संघर्ष करके यहां तक पहुंचा हूं।
कहा कुछ लोग मुझे सामाजिक तौर पर बदनाम कर मेरा रा‌जनीतिक करियर बरबाद करना चाहते हैं। हालांकि मीडिया के बार-बार पूछने पर भी उन्होंने मुख्यमंत्री हरीश रावत का नाम नहीं लिया। बोले किसी का नाम लेकर गिरकर राजनीति नहीं करना चाहता।
शुक्रवार को हरक सिंह रावत पर जब प्रेस कांफ्रेंस में पहुंचे तो उनकी बॉडी लैंग्वेज बदली नजर आई। हमलावर तेवर छोड़कर बचाव और सफाई के अंदाज में अपनी बात कहते नजर आए।
हरक बोले मैं दूध का धुला नहीं हूं पर उन्हें उस बात की सजा मिल रही है जो उन्होंने की ही नहीं। कहा उस महिला की शक्ल मैने टीवी पर देखी। हरक ने कहा वह इस मामले को जनता की अदालत में ले जा रहे हैं। प्रदेश में घिनौनी राजनीति हो रही है। इसके बाद हरक ने रेप का आरोप लगाने वाली महिला के मैसेज और फोन की सिलसिलेवार टाइमिंग बतानी शुरू की।

आखिर क्यों? हाईप्रोफाइल मामलों में दुराचार के आरोप से मुकर जाती हैं युवतियां

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उत्तराखंड भाजपा के नेता हरक सिंह रावत पर दुराचार का आरोप लगाने वाली महिला अदालत में अपने बयान से मुकर गई। किसी बड़ी शख्सियत पर ऐसा आरोप लगाना और फिर उससे इनकार का यह प्रदेश में पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी दो हाईप्रोफाइल मामलों में ऐसा हुआ है।
हरक सिंह रावत से पहले अपर सचिव गृह जेपी जोशी और सोनीपत के पूर्व सांसद के पुत्र प्रदीप सांगवान पर दुराचार का आरोप लगाने वाली युवतियां बयान से मुकर चुकी हैं। इन युवतियों ने भी मजिस्ट्रेट के सामने बताया था कि उन्होंने दबाव में बयान दिया था।
इन मामलों में आज तक खुलासा नहीं हो पाया कि आरोप क्यों लगाए गए और फिर बयान क्यों बदला गया? जांच एजेंसियां किसी भी मामले में यह खुलासा नहीं कर पाई हैं कि वास्तव में अपराध हुआ भी था या नहीं। जो आरोप लगाए गए, वे किसी साजिश का हिस्सा थे या बयान दबाव में बदले गए। कानून के जानकारों की मानें तो यह स्थिति बेहद खतरनाक और चिंताजनक है।
अपर सचिव गृह रहे जेपी जोशी पर एक युवती ने 22 नवंबर 2013 को दुराचार का आरोप लगाया था। आरोप था कि नौकरी का झांसा देकर नैनीताल स्थित गेस्ट हाउस में उसके साथ दुराचार किया गया। मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार भी किया, लेकिन 18 सितंबर 2014 को युवती आरोप से मुकर गई। अदालत में दी गवाही में युवती ने कहा कि नीरज चौहान और संजय बैनर्जी के दबाव में उसने जोशी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
इसी तरह सोनीपत के पूर्व सांसद के पुत्र प्रदीप सांगवान के खिलाफ 18 अप्रैल 2014 को बिजनौर निवासी युवती ने दुराचार और अश्लील क्लीपिंग बनाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। यह युवती सहस्त्रधारा रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में काम करती थी। युवती का आरोप था कि प्रदीप सांगवान ने मसूरी में उसके साथ दुराचार किया और अश्लील क्लीपिंग बनाई। शिकायत पर पुलिस ने प्रदीप सांगवान के खिलाफ मामला दर्ज किया, लेकिन कुछ समय बाद युवती आरोप से मुकर गई।
वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक कुमार ने बताया कि इन प्रकरणों को देखकर तो यही लगता है कि कानून को मजाक बना दिया गया है। कुछ लोग कानून से खिलवाड़ कर रहे हैं। वे यह जानते हैं कि किस तरह से कानून की धाराओं का दुरुपयोग करना है।
वरिष्ठ अधिवक्ता आरपी पंत ने कहा कि मिथ्या आरोप लगाने वालों के खिलाफ जब तक सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, कानून से इसी तरह खिलवाड़ होता रहेगा। पुलिस आरोप लगने पर कार्रवाई करती है, लेकिन आरोप से मुकर जाने वालों पर कार्रवाई नहीं होती।

18 साल से कम उम्र के ‘गोविंदा’ पर स्पष्टीकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची महाराष्ट्र सरकार

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महाराष्ट्र सरकार ने दाही-हांडी उत्सव के दौरान 18 साल से कम उम्र के लोगों के भाग लेने पर पाबंदी के 2014 के आदेश पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए उच्चतम न्यायालय का रूख किया है।
बंबई उच्च न्यायालय ने 11 अगस्त, 2014 को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह दही-हांडी उत्सव के दौरान 18 साल से कम उम्र के ‘गोविंदा’ पर पाबंदी लगाने और पिरामिड की उंचाई 20 फुट तक सीमित करने के लिए परिपत्र जारी करे। उल्लेखनीय है कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस फैसले पर रोक लगाई थी, लेकिन इसे रद्द नहीं किया था।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जन्माष्टमी पर्व नजदीक आ रहा है और दही-हांडी इसका प्रमुख हिस्सा है। उन्होंने न्यायमूर्ति ए आर दवे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ से कहा कि इसको लेकर स्पष्टीकरण चाहिए कि क्या उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक अभी बरकरार है।

महाराष्ट्र में विधायकों के वेतन में 166 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी

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महाराष्ट्र विधानसभा में विधायकों के वेतन में बढ़ोत्तरी संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है. खबरों के अनुसार मॉनसून सत्र के आखिरी दिन सरकार ने सचिवों और विधायकों के वेतन में समानता लाने की बात कहते हुए इस प्रस्ताव को पेश किया था जिसे सभी दलों ने एक राय से मंजूर कर लिया. खबरों के मुताबिक इस बढ़ोत्तरी के पहले महाराष्ट्र में साधारण विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक का वेतन राज्य के मुख्य सचिव के वेतन के आधे से भी कम था.
सदन में यह प्रस्ताव पास होने के बाद अब विधायकों का वेतन 166 प्रतिशत बढ़कर एक लाख 70 हजार रुपये प्रतिमाह हो जाएगा. इस प्रस्ताव में ये भी कहा गया है कि अब विधानसभा के सदस्यों के वेतन में पद के अनुसार फर्क होगा. अब मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों को प्रतिमाह दो लाख रुपये मिलेंगे, जबकि राज्य मंत्रियों को एक लाख 80 हजार वेतन मिलेगा. महाराष्ट्र में इससे पहले तक सभी सदस्यों को हर महीने न्यूनतम 75 हजार रुपये मिलते थे.

अंडरवर्ल्ड पर किताब लिखने के चलते हुई जे डे की हत्या

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मुंबई। मिड डे के पत्रकार जे डे की हत्या अंडरवर्ल्ड पर लिखी जा रही उनकी किताब के कारण हुई। विशेष मकोका अदालत में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से गैंगस्टर छोटा राजन के खिलाफ दायर पूरक चार्जशीट में यह बात सामने आई। पांच जुलाई को जज एसएस अदकर ने चार्जशीट के लिए जांच एजेंसी को पांच अगस्त तक का समय दिया था।
सीबीआई ने शुक्रवार को 300 पन्नों की चार्जशीट दायर की। इसके मुताबिक, डे “चिंदी : रंक से राजा” नाम से किताब लिख रहे थे, जिसमें 20 अपराधियों की कहानी थी। इनमें एक राजन भी था। चिंदी अपराधियों के लिए अपमानजनक शब्द माना जाता है। किताब से राजन के कई झूठ सामने आने वाले थे।
राजन को कुछ लोगों के जरिये किताब की जानकारी मिल गई थी। तभी से वह किताब न छपवाने के लिए दबाव बना रहा था, लेकिन डे ने उसकी बात नहीं मानी। इसी कारण 2011 में उनकी हत्या हुई।
जांच एजेंसी ने चार्जशीट में 41 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। गवाहों में रविराम रत्तेसर भी शामिल है। उसे अतिरिक्त आरोपी बनाया गया है। सीबीआइ अधिकारी ने बताया कि रविराम पहले गवाह था लेकिन बाद में उसे राजन और सतीश कालिया के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी पाया गया।
उसने राजन के निर्देश पर कई ग्लोबल सिम मुहैया कराए थे। चार्जशीट में अन्य आरोपी से राजन की बातचीत के टेप को भी शामिल किया गया है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में टेप की आवाज राजन के वॉइस सैंपल से मिलने की बात कही गई है।

पुलिस की हैवानियत: कान में करंट लगाया, पानी में डुबो कर मारा

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बृहस्पतिवार को अहिरवां पुलिस चौकी में कमल बाल्मीकि ने पुलिस की यातना से त्रस्त होकर फांसी लगाई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुलिस की हैवानियत सामने आई है।
पूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ें तो समझ में आता है कि पुलिस की थर्ड डिग्री ऐसी होती है कि कोई भी फांसी लगा लेगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मौत से पहले कमल को बहुत यातनाएं दी गईं। दोनों कानों के पीछे मिले बड़े घाव बता रहे थे कि कमल के कानों में करंट लगाने के लिए क्लिप लगाई गई होगी।
चकेरी की अहिरवां चौकी में चोरी के आरोप में पकड़ कर लाए गए युवक कमल बाल्मीकि (26) का शव बृहस्पतिवार सुबह आरक्षी बैरक में पंखे से लटका मिला था। बृहस्पतिवार देर रात ढाई बजे के बाद तक कमल के शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल ने किया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार कमल के दाहिने पुट्ठे पर एक बड़ा घाव मिला है। यह पुलिस की पिटाई से हुआ है। कानों में करंट लगाने का पता चला है। कमल के पेट में सिर्फ 12 एमएल तरल पदार्थ मिला है।
जिससे स्पष्ट है कि टार्चर के 12 घंटे पहले से कमल को सिर्फ पानी दिया गया था, खाने को कुछ भी नहीं दिया गया। कमल के शरीर पर सभी चोटें मृत्यु पूर्व की थीं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक लूट कबूलवाने के लिए कमल को खाली पेट रखा गया और बुरी तरह पीटा गया। बुधवार रात 12 और बृहस्पतिवार दिन में 12 बजे के बीच कमल की मौत हुई।
गले में रस्सी का तिरछा निशान साबित करता है कि कमल फंदे पर लटका था। अब सवाल ये है कि अहिरवां चौकी में रस्सी कहां से आई। कमल जब फंदा लगा रहा था तो चौकी के पुलिसकर्मी कहां थे।
कमल बाल्मीकि के भाई निर्मल ने पुलिसिया टार्चर की पूरी कहानी खोल कर रख दी। निर्मल ने बताया कि चकेरी पुलिस की स्पेशल टीम ने उसे और उसके बड़े भाई कमल को मंगलवार को उनके घर के पास से उठाया था। निर्मल के मुताबिक पहली रात उन्हें कोयलानगर चौकी में रखा गया था।
चौकी में सिपाहियों ने एक ड्रम में पानी भरकर रखा था और करंट वाली मशीन रखी थी। एक बार पानी में मुंह डुबाते थे फिर मुंह में कपड़ा ठूंसकर करंट लगाते थे। पानी में मुंह डूबने पर हम लोग छटपटाते थे तो सिपाही पीछे से डंडा मारते थे। ये यातना घंटों चली और लाख मांगने पर भी पानी की एक बूंद नहीं दी गई।
पुलिस उनसे टीवी एक्ट्रेस के घर चोरी कबूलने को कह रही थी। निर्मल के मुताबिक अगली रात उसे और कमल को लालबंगला चौकी में रखा गया। वहां भी घंटों टार्चर चलता रहा। टार्चर से टूटकर कमल चोरी कबूलने को तैयार हो गया था लेकिन पुलिस उससे माल बरामदगी के लिए गहने और पैसे का इंतजाम करने को कह रही थी।
इसके बाद बुधवार रात पुलिस कमल को कहीं और ले गई। निर्मल के अनुसार कमल की मौत के बाद ही घबराकर पुलिस ने उसे छोड़ा वर्ना उसे भी फर्जी मामले में फंसा देती।

शरद यादव का विवादित बयान, कहा- बेरोजगारी की वजह से सड़कों पर बढ़े कांवड़िए

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जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) नेता शरद यादव मोदी सरकार को घेरने के चक्कर में खुद निशाने पर आ गए हैं. वह बेरोजगारी पर बोले कि सड़कों पर बढ़ती कांवड़ियों की संख्या देश में बढ़ती बेरोजगारी का बेहतरीन उदाहरण है.
शरद यादव ने कहा कि अगर रोजगार होता तो कांवड़ियों की इतनी बड़ी तादाद सड़कों पर न होती. दरअसल, शरद यादव ने कानपुर में मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि नौकरियां देने का वादा कर बीजेपी केंद्र में आई, लेकिन वह ये वादा पूरा नहीं कर सकी. इसकी मिसाल है हाल ही में सड़कों पर निकले लाखों कांवड़िए. अपने बयान में शरद यादव ने कांवड़ियों को बेरोजगारी की निशानी बता दिया.
शरद यादव के इस बयान से शिव भक्तों के साथ ही धर्मगुरु भी नाराज हैं. सुमेरू पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्र नंद, अखाड़ा परिषद के नरेंद्र गिरि और आत्मानंद ब्रह्मचारी, हिंदू महासभा के स्वामी चक्रपाणी ने इस बयान पर विरोध दर्ज करवाया है. उत्तर भारत में सावन के महीने में शिव भक्त जलाभिषेक के लिए निकलते हैं. सालों से ये परंपरा चली आ रही है. इनमें हर तबके के भक्त होते हैं. ऐसे में भक्तों को बेरोजगार बता कर शरद यादव बुरी तरह से घिर गए हैं.

अमित शाह और आनंदीबेन के बीच तकरार के बाद विजय रुपानी को गुजरात का मुख्यमंत्री चुना गया

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आनंदीबेन पटेल के इस्तीफ़े के बाद गुजरात भाजपा के अध्यक्ष विजय रुपानी को राज्य का अगला मुख्यमंत्री चुना गया है. साथ ही स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल को राज्य का उपमुख्यमंत्री चुना गया. शुक्रवार को गांधीनगर में हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में यह फैसला लिया गया है. इस बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने भी हिस्सा लिया था.
समाचार वेबसाइट इंडिया टुडे के मुताबिक बैठक में मुख्यमंत्री के चयन को लेकर अमित शाह और आनंदीबेन के बीच काफी देर तकरार हुई थी. बताया जाता है कि आनंदीबेन हर हाल में नितिन पटेल को मुख्यमंत्री देखना चाहती थीं जबकि अमित शाह अपने करीबी विजय रुपानी के नाम पर अड़े हुए थे.
इंडिया टुडे के अनुसार बैठक में आनंदीबेन से कहा गया कि नितिन पटेल के पाटीदारों से अच्छे संबंध नहीं हैं, ऐसे में उनके सीएम बनने पर राज्य में पार्टी पर अगला चुनाव हारने का खतरा बना रहेगा. इसके बाद भी जब पूर्व मुख्यमंत्री तैयार नहीं हुईं तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें फोन करके समझाया. इसके बाद दोनों पक्षों में विजय रुपानी को मुख्यमंत्री और नितिन पटेल को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने पर सहमति बनी.
इस पूरे घटनाक्रम का एक दिलचस्प पहलू यह है कि शुक्रवार सुबह से ही मीडिया में नितिन पटेल के अगला मुख्यमंत्री चुने जाने की खबरें आने लगी थीं. यहां तक कि घोषणा से पहले नितिन पटेल ने बधाई लेना भी शुरू कर दिया था लेकिन, इसके कुछ ही घंटे बाद विजय रुपानी के नाम की घोषणा ने सभी को चौंका दिया.

128 वर्षों में पहली बार पार्टी उम्मीदवार ट्रंप का समर्थन नहीं करेगा हार्वर्ड रिपब्लिकन क्लब

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हार्वर्ड रिपब्लिकन क्लब 128 वर्षों में पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेगा। क्लब ने डोनाल्ड ट्रंप के ‘नस्लीय और नफरत भरी बयानबाजी’ और उनके द्वारा सैनिकों के बलिदान का बार बार अपमान करने की निंदा करते हुए उन्हें समर्थन नहीं करने का फैसला किया है। 70 वर्षीय नेता पर निशाना साधते हुए क्लब ने कहा कि इसके सदस्य ट्रंप पर ‘शर्मिंदा’ हैं। क्लब ने ट्रंप को ‘गणराज्य के अस्तित्व के लिए खतरा’ करार देते हुए साथी रिपब्लिकन से ‘खतरनाक व्यक्ति’ से समर्थन वापस लेने का आह्वान किया।
ट्रंप पर हमला बोलते हुए क्लब ने कहा कि अमेरिका का नेतृत्व करने के लिए जिस स्वभाव और योग्यता की जरूरत है वह उनके पास नहीं है। क्लब ने कहा कि वह उनके ‘कटु बयानबाजी’ का समर्थन नहीं करेगा जो कि देश और इसके बच्चों में ‘जहर घोल’ रहा है। क्लब ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, ‘हम अपनी पार्टी के निर्वाचित नेताओं से डोनाल्ड ट्रंप से अपना समर्थन वापस लने का आह्वान करते हैं और हम अपने साथी कॉलेज रिपब्लिकन से खतरनाक व्यक्ति की निंदा करने और उनसे अपना समर्थन वापस लेने के लिए हमसे जुड़ने का आग्रह करते हैं।’
क्लब ने कहा कि 128 वर्षों में ऐसा पहली बार हो रहा है जब वह रिपब्लिन उम्मीदवार का समर्थन नहीं कर रहा है। क्लब ने ट्रंप के विचारों की कड़ी आलोचना करते हुये कहा कि उनके विचार ‘न केवल एक रिपब्लिकन के रूप में बल्कि एक अमेरिकी के रूप में भी हमारे मूल्यों के विपरीत हैं।’