आखिर क्यों? हाईप्रोफाइल मामलों में दुराचार के आरोप से मुकर जाती हैं युवतियां

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उत्तराखंड भाजपा के नेता हरक सिंह रावत पर दुराचार का आरोप लगाने वाली महिला अदालत में अपने बयान से मुकर गई। किसी बड़ी शख्सियत पर ऐसा आरोप लगाना और फिर उससे इनकार का यह प्रदेश में पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी दो हाईप्रोफाइल मामलों में ऐसा हुआ है।
हरक सिंह रावत से पहले अपर सचिव गृह जेपी जोशी और सोनीपत के पूर्व सांसद के पुत्र प्रदीप सांगवान पर दुराचार का आरोप लगाने वाली युवतियां बयान से मुकर चुकी हैं। इन युवतियों ने भी मजिस्ट्रेट के सामने बताया था कि उन्होंने दबाव में बयान दिया था।
इन मामलों में आज तक खुलासा नहीं हो पाया कि आरोप क्यों लगाए गए और फिर बयान क्यों बदला गया? जांच एजेंसियां किसी भी मामले में यह खुलासा नहीं कर पाई हैं कि वास्तव में अपराध हुआ भी था या नहीं। जो आरोप लगाए गए, वे किसी साजिश का हिस्सा थे या बयान दबाव में बदले गए। कानून के जानकारों की मानें तो यह स्थिति बेहद खतरनाक और चिंताजनक है।
अपर सचिव गृह रहे जेपी जोशी पर एक युवती ने 22 नवंबर 2013 को दुराचार का आरोप लगाया था। आरोप था कि नौकरी का झांसा देकर नैनीताल स्थित गेस्ट हाउस में उसके साथ दुराचार किया गया। मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार भी किया, लेकिन 18 सितंबर 2014 को युवती आरोप से मुकर गई। अदालत में दी गवाही में युवती ने कहा कि नीरज चौहान और संजय बैनर्जी के दबाव में उसने जोशी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
इसी तरह सोनीपत के पूर्व सांसद के पुत्र प्रदीप सांगवान के खिलाफ 18 अप्रैल 2014 को बिजनौर निवासी युवती ने दुराचार और अश्लील क्लीपिंग बनाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। यह युवती सहस्त्रधारा रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में काम करती थी। युवती का आरोप था कि प्रदीप सांगवान ने मसूरी में उसके साथ दुराचार किया और अश्लील क्लीपिंग बनाई। शिकायत पर पुलिस ने प्रदीप सांगवान के खिलाफ मामला दर्ज किया, लेकिन कुछ समय बाद युवती आरोप से मुकर गई।
वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक कुमार ने बताया कि इन प्रकरणों को देखकर तो यही लगता है कि कानून को मजाक बना दिया गया है। कुछ लोग कानून से खिलवाड़ कर रहे हैं। वे यह जानते हैं कि किस तरह से कानून की धाराओं का दुरुपयोग करना है।
वरिष्ठ अधिवक्ता आरपी पंत ने कहा कि मिथ्या आरोप लगाने वालों के खिलाफ जब तक सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, कानून से इसी तरह खिलवाड़ होता रहेगा। पुलिस आरोप लगने पर कार्रवाई करती है, लेकिन आरोप से मुकर जाने वालों पर कार्रवाई नहीं होती।