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चिन्मयानन्द ने वायरल वीडियो के बारे में कही चौं’काने वाली बात, SIT के सामने..

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लॉ की छात्रा को 1 साल तक ब्लैकमेल करके उसके साथ बलात्कार करने के आरोपी चिन्मयानंद, अभी तक अपने ऊपर लगे आरोपों से मुकरते रहे थे। लेकिन आख़िर उन्होंने एसआईटी के सामने ख़ुद पर लगे सारे आरोपों को स्वीकार कर लिया है। बहुत समय से लॉ की छात्रा के बलात्कार का यह मामला सुर्खियों में था। जहां छात्रा बार-बार यही बोल रही थी कि चिन्मयानंद ने उसके साथ बलात्कार किया है।

चिन्मयानंद के खिलाफ लॉ की छात्रा ने 12 पन्नों की शिकायत दर्ज कराई थी। और एसआईटी को दिए बयान में कई चौकाने वाली जानकारी भी सामने आई थी। पीड़िता ने कहा था कि चिन्मयानंद ने उसे ब्लैकमेल करके रेप किया है। पीड़िता का हॉस्टल के बाथरूम मे नहाने का वीडियो बनाया गया, और उस वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर 1 साल तक चिन्मयानंद उसका बलात्कार करता रहा।

लेकिन चिन्मयानंद सत्तारूढ़ पार्टी का नेता होने के ग़ुरूर में सभी आरोपों से मुकरते रहे थे। लेकिन जब उनका वीडियो फुटेज वायरल हुआ तो उत्तर प्रदेश विशेष जांच दल यानि एसआईटी ने उन्हें गिरिफ़्तार कर लिया। इसी मामले में एसआईटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की एसआईटी प्रमुख नवीन अरोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि चिन्मयानंद ने सारे आरोप क़ुबूल कर लिए हैं। साथ ही चिन्मयानंद ने ये भी स्वीकार किया है कि वायरल हुए विडियो में और कोई नहीं बल्कि ख़ुद चिन्मयानंद है।

इस वायरल हुए वीडियो फुटेज के आधार पर ही एसआईटी ने बिना एक पल की भी देर किए तुरंत चिन्मयानंद को शुक्रवार की सुबह 8:50 पर उसके आश्रम से गिरिफ़्तार कर लिया। वीडियो और ऑडियो दोनों की बड़ी बारीक़ी से जांच की गई है। एसआईटी चीफ़ नवीन अरोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ख़ुलासा किया कि चिन्मयानंद ने ख़ुद एसआईटी चीफ़ से कहा कि वो अपनी ग़लती पर शर्मिंदा है। शुक्रवार सुबह गिरिफ़्तारी के बाद चिन्मयानंद को मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल ले जाया गया था। मेडिकल जांच के बाद चिन्मयानंद को कोर्ट में पेश किया गया। जहाँ कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

बस ड्राईवर ने नहीं पहना था हेलमेट तो हो गया चालान, इस वजह से…

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जब से यातायात के नियमों पर सख्ती का आदेश आया है। तब से मीडिया में यातायात के नियम सुर्खियों में बने हुए हैं। रोज़ाना नई-नई ख़बरें आ रही हैं। और तो और इन नियमों को लेकर बने हुए जोक्स तो आजकल सोशल मीडिया में छाए हुए हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया जहां नियमों के पालन का अजीब रूप सामने आया है। जब एक बस ड्राइवर का चालान काटा गया। चालान काटना अजीब नहीं है, अजीब है चालान काटने का कारण, क्योंकि बस चालक का चालान काटने का कारण था, उसका हेलमेट ना लगाना।

गौरतलब है कि नए मोटर व्हीकल एक्ट के लागू होने के बाद से ही, वाहन चालकों से यातायात के नियमों के पालन में कोताही बरतने पर भारी जुर्माने का भुगतान करना पड़ रहा है। और कई बार तो नियमों का मज़ाक बन जाता है। जैसा कि इस मामले में हुआ, जब नोएडा में एक निजी बस मालिक ने बताया है कि गाड़ी चलाते समय हेल्मेट नहीं पहनने की वजह से उनका ₹500 का चालान काटा गया है।

ख़बर है कि यह चालान ऑनलाइन किया गया था जिसे शुक्रवार को उनके एक कर्मचारी ने देखा और उन्हें जानकारी दी। इस तरह की घटनाएं यातायात और परिवहन विभाग के काम करने के तरीक़ों को सवालों के घेरे में खड़ा करती हैं। और रोज़ाना जिस तरह की ख़बरें आ रही हैं, वो उन चालानों पर सवालिया निशान भी लगाती हैं, जहां लोगों से चालान काटकर लाखों का भुगतान कराया जा रहा है।

जहां तक इस मामले का सवाल है तो ग़लत चालान कटने के शिकार बने इस निजी बस मालिक ने कहा है कि वह पूरा मामला संबंधित अधिकारियों के सामने रखेगा। और अगर ज़रूरत पड़ी, तो अदालत भी जाएगा। वहीं, संबंधित अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। और अगर कोई ग़लती हुई है तो उसे सुधारा जाएगा।

पाकिस्तान ने फिर निकाली अपनी खीज, प्रधानमंत्री मोदी के प्लेन को नहीं..

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न्यूज़ एजेंसी ए एन आई के अनुसार पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि हमने भारतीय उच्चायोग को अवगत करा दिया है कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उड़ान के लिए अपने हवाई क्षेत्र के उपयोग की अनुमति नहीं देंगे। बता दें कि इससे पहले भी पाकिस्तानी ये हरक़त कर चुका है। पाकिस्तान ने पहले भी अपना एलस्पेस इस्तेमाल करने देने की भारत की दरख्वास्त को नजरअंदाज कर दिया था जब भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के प्लेन को पाकिस्तान के एयर स्पेस की इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी गई थी।

ज़रीन ख़ान ने अपने साथ हुए कास्टिंग काउच पर कही बड़ी बात,’एक निर्देशक ने मुझे..’

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कास्टिंग काउच और फ़िल्म इंडस्ट्री का नाता बहुत पुराना है।और सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बड़े पैमाने पर कास्टिंग काउच के मामले सामने आए हैं। साथ ही समय-समय पर देश और विदेशों के कई बड़े-बड़े फ़िल्मी सितारे कास्टिंग काउच का शिकार बनने के अपने कड़वे अनुभव साझा करते रहते हैं। ऐसा ही हुआ जब बेहद ख़ूबसूरत दिखने वाली और सलमान ख़ान के साथ फ़िल्म कर चुकी अभिनेत्री ज़रीन ख़ान ने एक इंटरव्यू में अपने साथ हुए कास्टिंग काउच के कड़वे अनुभव को साझा किया।

फ़िल्म अभिनेत्री ज़रीन ख़ान ने बताया कि वो एक नहीं बल्कि दो-दो बार कास्टिंग काउच के बुरे अनुभव से ग़ुज़र चुकी हैं। ज़रीन ख़ान ने ख़ुलासा किया कि पहली बार वो कास्टिंग काउच का शिकार फ़िल्म इंडस्ट्री में आते ही हुई थीं। अपने फ़िल्म इंडस्ट्री के इस कड़वे अनुभव के बारे में बताते हुए अभिनेत्री ज़रीन ख़ान ने बताया,”एक फ़िल्म का निर्देशक मुझसे कह रहा था कि आपको झिझक दूर करनी होगी, आपको अपने करियर की रुकावटों को दूर करना होगा।उसने ऐसा इसलिए बोला क्योंकि मैं फ़िल्म इंडस्ट्री में बिल्कुल नई थी।

ज़रीन ख़ान ने बताया कि उस निर्देशक की ऐसी बात सुनकर मैंने उससे कहा,”मैं किसिंग सीन की रिहर्सल नहीं करूंगी।अभिनेत्री ज़रीन ख़ान नेअपने दूसरे कास्टिंग काउच के अनुभव के बारे में बताते हुए कहा कि, ‘जब मैंने फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बना ली तब एक व्यक्ति ने मुझसे कहा कि अगर मैं दोस्ती से ज़्यादा आगे बढ़ने में दिलचस्पी रखती हूँ, तो वो मेरी कुछ अहम प्रोजेक्ट्स दिलाने में मदद कर सकता है। जिस पर अभिनेत्री ज़रीन ख़ान ने कहा-मेरे लिए मेरा आत्मसम्मान सबसे ज़्यादा बढ़कर है। अपने आत्मविश्वास और दृढ़ व्यक्तित्व के बल पर बड़ी बेबाक़ी के साथ अभिनेत्री ज़रीन ख़ान फ़िल्म इंडस्ट्री में अपने पैर जमाये हुए हैं।

नंदकिशोर नौटियाल जी जैसे व्यक्तित्व कभी मरते नहीं बल्कि सदा अमर रहते हैं — किशन शर्मा

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कुछ ऐसे लोग भी संसार में हुए हैं, जिनका जन्मदिन चार वर्ष में केवल एक बार ही मनाया जाता रहा है, परंतु पंडित नंदकिशोर नौटियाल जी एक ऐसे व्यक्तित्व थे, जिनका जन्मदिन कम से कम मुझ जैसे कुछ लोग तो हर वर्ष दो बार मनाया करते थे; 15 जून को स्कूल के प्रमाण पत्र में लिखी जन्मतिथि के अनुसार और 21 सितम्बर को उनकी वास्तविक जन्मतिथि के अनुसार । 2019 की 21 सितम्बर ऐसी तिथि आई है, जब पंडित नंदकिशोर नौटियाल जी का जन्मदिवस उनकी शारीरिक अनुपस्थिति में प्रणाम करते हुए मनाना है ।

यह पहला अवसर है जब 21 सितम्बर को सुबह सवेरे फ़ोन पर उनको जन्मदिन की बधाई नहीं दे पाऊंगा । 30 अगस्त 2019 को देहरादून में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया । 89 वर्ष की आयु में भी युवाओं जैसा उत्साह रखते थे नौटियाल साहब । पहाडी व्यक्तित्व में बहुत जोश भरा रहता था । हमेशा मुस्कुराते हुए मिलते थे । आंखों में स्नेह की चमक दिखाई देती रहती थी । मैं उन्हें, और वो मुझे नाम से तो जानते थे, परंतु हमारी पहली भेंट मुम्बई में मुख्य मंत्री निवास ”वर्षा” में हुई जब वे मुख्य मंत्री जी से मिलकर बाहर निकले और मुझे भीतर बुलाया गया एक लम्बे साक्षात्कार के लिये । वे मुख्य मंत्री कक्ष से बाहर आकर मेरी तरफ़ देख कर बोले, “अच्छा, तो तुम किशन शर्मा हो ।

तुम्हारी लोकप्रियता से तो मुझे लगा था कि मेरी जैसी उम्र के व्यक्ति होगे, परंतु तुम तो मेरे बेटे की उम्र के हो । मिलो बाद में मुझसे” । और मेरे सिर पर हाथ रखकर उन्होंने आशीर्वाद दिया । मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि बाद में मुझे उनके साथ ही महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी में सेवा करने का अवसर मिल जायेगा । सरकार ने मुझे अकादमी के सदस्य के रूप में नियुक्त कर दिया था । थोडे ही समय में वे मेरे कार्य, विचारों, और अनुशासनात्मक कार्य पद्धति से बहुत प्रभावित हो गए और मुझे अपने निकटतम व्यक्तियों की सूची में उन्होंने मुझे शामिल कर लिया । फ़िर अक्सर ही चर्चगेट स्टेशन के पास “टी सेंटर” में, या खार के “क्लब” में चाय-नाश्ते पर नौटियाल साहब, विश्वनाथ सचदेव जी, डॉ0 कन्हैया लाल नंदन जी, राजू भाई पटेल जी जैसे विख्यात व्यक्तित्वों से भेंट होने लगी ।

अकादमी के अगले सत्र में मुझे पुरस्कार समिति का प्रमुख बना दिया गया और अकादमी का कार्यालयीन सचिव भी बना दिया गया । अकादमी के कार्यालय में उस दौरान भीड लगी रहती थी । स्वयं मुख्य मंत्री जी भी आ जाया करते थे । माननीय विलास राव देशमुख साहब, माननीय सुशील कुमार शिंदे साहब और माननीय अशोक चव्हाण साहब मुख्य मंत्री होते हुए, अकादमी के अध्यक्ष भी रहे । मंत्रालय से विभाग के प्रधान सचिव महोदय भी समय समय पर आते रहते थे । उप सचिव तो अकादमी के कार्यालय में ही बैठा करती थीं । हर समय चहल पहल बनी रहती थी ।

साढे तीन-चार बजे के आसपास नौटियाल साहब मुझसे कहते थे, “अरे भाई, कुछ खिलाओ-पिलाओ”; और फ़िर सभी के लिये कुछ खाद्य पदार्थ और चाय पास के ही उपहार गृह से मंगवा लिये जाते थे । यह नौटियाल जी का ही असर था कि किसी भी मुख्य मंत्री महोदय ने कभी अकादमी के किसी प्रस्ताव को अस्वीकार नहीं किया और केवल कुछ हज़ार रुपयों से बढकर पुरस्कारों की राशि लाखों रुपयों तक हो गई । नौटियाल जी छोटे पैमाने का कोई कार्य नहीं करते थे । इसलिये अकादमी के बडे बडे सम्मेलन महाराष्ट्र के अनेक नगरों में आयोजित करवा दिये । विश्व भाषा सम्मेलन का प्रस्ताव उस समय के सदस्य सचिव डॉ0 केशव फ़ालके जी ने रखा था, और नौटियाल जी ने उसे भव्य स्तर पर पुणे में आयोजित करवा दिया ।

विश्व हिंदी सम्मेलन के लिये अकादमी की ओर से नौटियाल जी के नेतृत्व में पांच सदस्यों का दल हर सम्मेलन में विश्व के उन उन राष्ट्रों में भेजा गया, जहां जहां सम्मेलन आयोजित हुए । मुझे हर बार कहा गया, परंतु मैं कभी ऐसे सम्मेलनों में नहीं गया । मेरा निवेदन रहता था कि मैं तो अपने मंच कार्यक्रमों के सिलसिले में विश्व भर में घूमता ही रहता हूं, इसलिये मेरे स्थान पर ऐसे हिंदी सेवियों-विद्वानों को भेजा जाये जो कभी विदेश नहीं गये, या बहुत अधिक बार विदेश नहीं गये । मैंने नौटियाल जी के मार्गदर्शन में पुरस्कार वितरण समारोह का स्वरूप ही बदल डाला ।

विशाल सभागृह में आयोजन, शाम पांच बजे स्वादिष्ट नाश्ता और गर्म चाय, शाम ठीक छ: बजे से रात नौ बजे तक पुरस्कार वितरण, और साढे नौ बजे स्वादिष्ट भोजन । पूरा सभागार लोगों से भरा रहता था । पुरस्कृत विद्वानों को वातानुकूलित स्वतंत्र कक्षों में सुविधापूर्वक ठहराना, आने-जाने का वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी का रेल किराया, महिला पुरस्कार विजेताओं को दो व्यक्तियों का किराया, अखिल भारतीय पुरस्कार विजेताओं को दो व्यक्तियों का हवाई यात्रा का किराया, सभी को टैक्सी आदि का तथा रास्ते का खर्च, पुरस्कार स्थल पर ही नकद प्रदान कर दिया जाता था । पुरस्कारों की राशि भी लाखों रुपये कर दी गई । देश भर से विद्वानों को इन पुरस्कारों के लिये चुना जाता था ।

अकादमी ने कभी कभी कुछ करोड रुपये भी सम्मेलनों पर खर्च कर दिये । नौटियाल जी के प्रभाव के कारण कभी भी किसी ने भी कोई आनाकानी नहीं की, विरोध नहीं किया, और अस्वीकृत भी नहीं किया । मैं, डॉ0 केशव फ़ालके जी, श्री अनुराग त्रिपाठी जी, तथा अन्य सभी मित्रवर्ग एकजुट होकर सेवा करते थे । जब नौटियाल जी ने “नूतन सवेरा” का प्रकाशन शुरू किया, तब मुझे हर अंक में एक लेख लिखने के लिये प्रोत्साहित किया । मैं अभी तक नूतन सवेरा के लिये लगातार लिख रहा हूं । मुझे नौटियाल जी ने पिता तुल्य स्नेह प्रदान किया । परिवार के हर समारोह में मुझे विशिष्ट कार्य सौंप दिये जाते थे । यहां तक कि जब राजीव नौटियाल को पुत्र रत्न प्राप्त हुआ, तो नौटियाल जी के साथ मैं कहीं यात्रा कर रहा था ।

नौटियाल जी ने मुझसे ही पूछा कि उसका नाम क्या रखा जाये । मैंने “प्रवेश” नाम सुझाया और उन्होंने तुरंत वही नाम दे दिया अपने पौत्र को ।बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष चुने जाने पर नौटियाल जी ने मुझे वहां का सांस्कृतिक सचिव बना दिया और मैं उनके साथ अनेक बार चार धाम की महत्वपूर्ण यात्राएं कर आया । बडे बडे पत्रकारों और साहित्यकारों के अलावा बडे बडे नेताओं, अधिकारियों और उद्योगपतियों से भी अपने साथ मुझे मिलने का अवसर प्रदान करते रहे नौटियाल जी । द्वारका और ज्योतिष्मठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती महाराज से मेरी बहुत अधिक निकटता नौटियाल जी के ही कारण हो सकी ।

नौटियाल जी के छोटे पुत्र भरत के विवाह समारोह में भी मुझे विशेष महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में शामिल किया गया । नौटियाल जी को मैंने कभी भी नाराज़ होते या अशोभनीय भाषा का प्रयोग करते हुए नहीं देखा । वे स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कह देते थे और फ़िर मुस्कुरा देते थे । मैं जब भी किसी बात पर किसी व्यक्ति से क्रोधित हो जाता था तो वे मुझे समझाया करते थे और शांत कर दिया करते थे । बुद्धिनाथ मिश्र जी, प्रोफ़ेसर डी0 तंकप्पन नायर जी, सुशीला गुप्ता जी, डॉ0 बाल शौरी रैड्डी जी, डॉ0 राजम पिल्लै, डॉ0 महावीर अधिकारी जी जैसे व्यक्तित्वों से मेरी विशेष भेंट नौटियाल जी ने ही करवाई थी ।

डॉ0 धर्मवीर भारती जी, पुष्पा भारती जी, मनोहर श्याम जोशी जी, खुशवंत सिंह जी, डॉ0 कर्णसिंह जी और डॉ0 हरिकृष्ण देवसरे जी आदि से मेरी पहचान पहले से ही थी, क्योंकि मेरे लेख इनके द्वारा संपादित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते थे । मुझे एक बात का दुख हमेशा रहेगा । नौटियाल साहब ने अपने जीवन में अनेक व्यक्तित्वों को अनेक पुरस्कार प्रदान किये और करवाए, परंतु महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी सहित किसी भी संस्था या विभिन्न पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्थाओं और उनसे जुडे व्यक्तियों ने कभी नौटियाल साहब को सम्मानित करने के बारे में सोचा भी नहीं । अब इस बारे में सोचना भी ठीक नहीं लगता । नौटियाल साहब भले ही शारीरिक रूप से मुझसे बिछुड गये हैं, परंतु मेरे मन-मस्तिष्क में वे सदा विराजमान रहेंगे, क्योंकि ऐसे व्यक्तित्व कभी मरते नहीं, बल्कि सदा अमर रहते हैं ।

(किशन शर्मा, 901, केदार, यशोधाम एन्क्लेव, प्रशांत नगर, नागपुर – 440015; मोबाइल – 8805001042)

बिना अदालत की अनुमति ही जेलर ने क़ै’दी को कर दिया रिहा, इसके बाद जो हुआ वो..

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एक अजीबोगरीब मामला इन दिनों इंटरनेट पर ख़ूब सुर्खियां बटोर रहा है। जहाँ एक क़ैदी को जेल से रिहा करने पर देश के सर्वोच्च न्यायालय ने जेल अधीक्षक यानी जेलर को सज़ा का फ़रमान सुनाया है। यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर का है। जहां ज़िला जेल के जेल अधीक्षक ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद एक आरोपी को जेल से रिहा कर दिया था। इसके बाद जेल अधीक्षक के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की अपील दाखिल कर दी गई है।

दरअसल, याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में बताया है कि उसने पहले एक आपराधिक मामले में आरोपी को ज़मानत देने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया था, कि अगर वह आरोपी अभी भी हिरासत में है, तो अगले आदेश तक उस आरोपी को जेल से रिहा ना किया जाए। और बाद में यानी कि 3 दिसंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को ज़मानत देने के उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया था।

याचिकाकर्ता ने कहा की सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद जेल अधीक्षक ने ट्रायल कोर्ट से आरोपी के लिए एक नए जेल हिरासत वारंट की मांग की, लेकिन वारंट के जारी होने का इंतज़ार किए बिना ही जेल अधीक्षक ने आरोपी को जेल से रिहा कर दिया। जिसने रिहा होते ही याचिकाकर्ता पर जानलेवा हमला किया। अब इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के ज़िला जेल अधीक्षक के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी कर दिया है। और सुप्रीम कोर्ट ने जेल अधीक्षक को 23 सितंबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश जारी किया है।

अज़हर को मिल सकती है ये बड़ी ज़िम्मेदारी, पर्चा दाख़िल किया

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हैदराबाद: पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी मुहम्मद अजहरुद्दीन के बारे में बड़ी ख़बर आ रही है. ख़बर है कि हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष के पद के लिए अज़हर ने पर्चा दाख़िल किया है. अज़हर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी हैं और मुरादाबाद से सांसद रह चुके हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान इस तरह की ख़बरें में आ रहीं थीं कि वो तेलंगाना की किसी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं. परन्तु ऐसा नहीं हुआ.

अज़हर के बारे में लम्बे समय से ऐसी भी ख़बरें आ रहीं थीं कि वो हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन में किसी पद के लिए आवेदन कर सकते हैं. समाचार एजेंसी ANI ने इस बारे में ख़बर दी है.

EVM को लेकर चुनाव आयोग ने फिर दिया बड़ा बयान, इस मुद्दे पर भी..

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EC चीफ़ सुनील अरोड़ा ने कहा राजनीतिक पार्टियां ईवीएम के मुद्दे को उठाती रही हैं, हमने उन्हें विनम्रता और जनता से कहा है मतपत्र अब इतिहास हो गए हैं. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव अब बिल्कुल नज़दीक ही हैं। तो एक बार फिर से ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर राजनीति पार्टियां सवाल उठा रही हैं। चुनाव में ईवीएम के उपयोग को लेकर हर बार उहापोह की स्थिति बनी रहती है। और ईवीएम के नतीजों की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठते रहे हैं।

इन सवालों के जवाब देते हुए EC चीफ़ सुनील अरोड़ा ने कहा कि “पार्टियां इस मुद्दे (ईवीएम) को उठाती रही हैं। हमने उन्हें विनम्रता और दृढ़ता से कहा है कि मतपत्र अब इतिहास हो गए हैं। और मैं आपसे कह सकता हूं, कि हम सभी कह सकते हैं कि (ईवीएम) के साथ छेड़छाड़ नहीं हो सकती है।’ EC चीफ़ ने कहा ‘यह किसी अन्य मशीन…आपकी घड़ी या गाड़ी की तरह खराब हो सकती है लेकिन इससे छेड़छाड़ नहीं हो सकती ये अन्य मशीनों से हटकर है।’ EC चीफ़ सुनील अरोड़ा ने कहा कि यहाँ तक कि उच्चतम न्यायालय ने (ईवीएम) से जुड़े मुद्दे पर फ़ैसलों में एक तरह से इस बात को बरक़रार रखा है।

कुछ राजनीतिक दलों द्वारा त्योहारों को लेकर चुनाव की विशेष तारीख़ों की मांग पर EC चीफ़ सुनील अरोड़ा ने कहा किसी भी मामले में तारीख़ों पर फैसला करने में आयोग विभिन्न कारकों को ध्यान में रखता है। जैसे कि छुट्टियां और स्कूल, बच्चों की परीक्षाएं, विभिन्न धर्मों के महत्वपूर्ण त्योहार आदि। EC चीफ़ ने बताया कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा दिल्ली में की जाएगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की उनकी यात्रा के दौरान राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा की गई।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा-शिवसेना में इस मुद्दे को लेकर ठनी

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों ने अपनी अपनी ओर से तैयारी शुरू कर दी है. ऐसे में गठबंधन का भी दौर चल रहा है. सियासी गठबंधन में चुनाव से पहले सुई सीटों के बंटवारे पर अटकती है. कुछ यही बात सुनने को मिल रही है भाजपा और शिवसेना के गठबंधन में. ख़बर है कि भाजपा 180 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है लेकिन शिवसेना का कहना है कि दोनों दल बराबर सीटों पर चुनाव मैदान में उतरे.

शिवसेना के नेता तो यहाँ तक कह रहे हैं कि अगर बराबर सीटों पर चुनाव नहीं लड़ना है तो गठबंधन नहीं हो सकेगा. वहीँ हर हाल में अपने दम पर बहुमत पाने का लक्ष्य लेकर चल रही भाजपा शिवसेना को सौ से अधिक सीटें देने को तैयार नहीं है। ऐसे में गठबंधन तभी बचेगा, जब शिवसेना झुकते हुए भाजपा की शर्त स्वीकार करेगी। हालांकि इसके आसार कम ही दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव से पहले भी भाजपा और शिवसेना के बीच तनातनी चरम पर पहुंच गई थी।

बाद में दोनों दलों ने गिले-शिकवे करते हुए गठबंधन पर सहमति बना ली थी। लेकिन इन चुनावों में एक बार फिर मोदी लहर के प्रभावी साबित होने से दोनों दलों के बीच फिर से कटुता बढ़ रही है। राज्य में सीट बंटवारे का फार्मूला फिर से दोनों दलों के बीच आड़े आ गया है। दरअसल लोकसभा चुनाव में भाजपा को 140 से अधिक तो शिवसेना को करीब 80 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त मिली थी। भाजपा इसी आधार पर शिवसेना को अधिकतम 100 सीट देने को ही तैयार है। साथ ही भाजपा की निगाहें इस कवायद के जरिए अपने दम पर बहुमत हासिल कर भविष्य में शिवसेना की तरफ से किसी भी तरह के दबाव का रास्ता बंद कर देने पर भी टिकी है।

मायावती की बढ़ी मुश्किलें, चुनाव से पहले ही मिला धोखा

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Mayavati

देश में इन दिनों चुनावी माहौल गरमाने लगा है और एक बार फिर विधायकों का पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होने का सिलसिला शुरू हो गया है। हाल ही में इस सिलसिले का असर देखने मिला बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती पर जब राजस्थान में उनकी पार्टी के 6 विधायकों ने कांग्रेस में सदस्यता ले ली। हाल ही में ख़बरें आयीं कि राजस्थान में बहुजन समाज पार्टी के 6 विधायकों ने अपनी पार्टी छोड़कर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए।

ग़ौरतलब है कि इन सभी विधायकों ने सोमवार को रात करीब 10:30 बजे विधानसभा पहुंचकर कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ले ली| ये सभी नेता सदस्यता लेने से पहले ही पार्टी के बहार से कांग्रेस का समर्थन कर रहे थे| आख़िरकार उन्होंने कांग्रेस में जाने का निर्णय लिया। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि उन्होंने यह फ़ैसला राज्य के हित में लिया है| दरअसल हुआ यह कि सोमवार की रात को बसपा के 6 विधायकों ने राजस्थान की विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र सौंपकर जिसमे उन्होंने राजस्थान में पार्टी को कांग्रेस पार्टी में शामिल करने की बात लिखी थी| इस पत्र में बहुजन समाज पार्टी के विधायको ने लिखा है कि वे अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर रहे है|

इस पत्र के संदर्भ में विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि बसपा के विधायक ने उनसे मुलाकात की और पार्टी में विलय के लिए उन्हें एक पत्र सौंपा है। कांग्रेस में आने वाले नेताओ में राजेन्द्र गुढा(विधायक, उदयपुरवाटी), जोगेंद्र सिंह अवाना (विधायक, नदबई), वाजिब अली( विधायक,नगर), लाखन सिंह मीणा ( विधायक, करोली), संदीप यादव( विधायक, तिजारा) और विधायक दीपचंद खेरिया, का नाम है| इससे कांग्रेस की पार्टी और मजबूत हो जाएगी| राजस्थान विधानसभा की 200 सीटो में 100 कांग्रेस के विधायक हैं| उनके सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल के पास एक विधायक है| राजस्थान में कांग्रेस सरकार 13 निर्दलीय विधायक में से 12 विधायको का बहार से समर्थन है और 2 सीट अभी खाली है|