वैक्सीन की शॉर्टेज से मची खलबली, AIIMS निदेशक ने कहा “यह कोई रॉकेट साइंस नहीं..”

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कोरोना के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। जिसके चलते लोगों की परेशानियों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। देश में जैसे जैसे कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। ठीक वैसे ही वैक्सीनेशन पर भी जोर दिया जा रहा है। इस बीच अब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का बड़ा बयान सामने आ रहा है। बता दें कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला के बयान के बाद ही उन्होंने ये बयान दिया है। उनका कहना है कि कोरोना वैक्सीन की सप्लाई की जानकारी रखना कोई बड़ी बात नहीं हैं और न ही इसमें कोई रॉकेट साइंस’ है।

अदार पूनावाला ने अपने बयान में कहा था कि उत्पादन को बढ़ाने के लिए 3,000 करोड़ और तीन महीने की आवश्यकता है। उनकी इस बात पर टिप्पणी करते हुए डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि “मैन्यूफैक्चरिंग को लेकर निर्माता ही सब कुछ करेगा। वे केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के बाकी हिस्सों को आपूर्ति (जरूरत) के बारे में जानते हैं। यह कहना कि वे अब मैन्यूफैक्चरिंग शुरू कर देंगे, यह अटपटा है। वैक्सीन की मांग हमेशा से थी। छः महीने पहले से ही इसकी जानकारी सभी को थी कि वैक्सीन की मांग ज्यादा रहेगी।”

उन्होंने कहा कि “मैं वित्त पर सलाह नहीं दे सकता, लेकिन मुझे यकीन है कि ऐसे निवेशक होंगे जो मैन्यूफैक्चरिंग के लिए मदद करने के लिए तैयार होंगे। दुनिया वैक्सीन चाहती है। 50 वैक्सीन कैंडीडेट क्लीनिकल ट्रायल से गुजर रहे हैं क्योंकि लोग इसे न केवल मानवता बल्कि मार्केट वैल्यू के नजरिए से भी देख रहे हैं।” बता दें कि महाराष्ट्र में वैक्सीन की शॉर्टेज होने के बाद से ही वैक्सीन पर बहस छिड़ गई।