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उत्तराखंड : खेल महाकुंभ का नाम बदलकर रखा मुख्यमंत्री चैंपियंस ट्रॉफी

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देहरादून : उत्तराखंड में इस वर्ष खेल महाकुंभ नए प्रारूप में “मुख्यमंत्री चैंपियंस ट्रॉफी 2025-26” के नाम से आयोजित किया जाएगा। इसकी शुरुआत 23 दिसंबर से होगी और समापन 28 जनवरी को होगा। गुरुवार को सचिवालय में प्रेस वार्ता कर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने यह जानकारी दी।

मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि प्रतियोगिता चार चरणों न्याय पंचायत, विधानसभा क्षेत्र, संसदीय क्षेत्र और राज्य स्तर—में आयोजित की जाएगी। कुल 26 खेल स्पर्धाएं होंगी, जिनमें परंपरागत खेलों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है।

चैंपियन का निर्धारण खिलाड़ियों द्वारा जीते गए मेडलों के आधार पर दिए गए अंकों के योग से होगा। मुख्यमंत्री चैंपियंस ट्रॉफी विजेता को 5 लाख रुपये की नगद पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इसी तरह सांसद ट्रॉफी विजेता टीम को 2 लाख रुपये और विधानसभा ट्रॉफी विजेता टीम को 1 लाख रुपये दिए जाएंगे। राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने वाले खिलाड़ी को अतिरिक्त 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।

1.10 लाख से अधिक पंजीकरण मंत्री ने बताया कि चैंपियनशिप के लिए पंजीकरण 14 अक्टूबर से शुरू हो चुके हैं और अब तक 1 लाख 10 हजार से ज्यादा खिलाड़ी रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। ऑनलाइन पंजीकरण 22 दिसंबर तक开放 रहेंगे।

दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए अलग स्पर्धाएं प्रदेश के दिव्यांग खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए एथलेटिक्स, बैडमिंटन और तैराकी की अलग स्पर्धाएं आयोजित की जाएंगी। इस श्रेणी के लिए भी पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

खिलाड़ियों की सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश खेल मंत्री ने सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर स्पष्ट निर्देश दिए कि ट्रायल एवं प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रत्येक खिलाड़ी के पास जूते और ट्रैकसूट अनिवार्य रूप से हों। सर्दी से बचाव के लिए पर्याप्त इंतजाम, हर खेल स्थल पर स्वास्थ्य टीम की तैनाती, आवश्यकता पड़ने पर रात्रि विश्राम एवं भोजन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।

राजस्व वसूली बढ़ाने पर मुख्यमंत्री सख्त, तय लक्ष्य समय पर पूरे करने के निर्देश

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की राजस्व प्राप्ति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को राजस्व वसूली बढ़ाने और तय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सचिवालय में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी और जिलाधिकारी जनपद स्तर पर राजस्व वसूली की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने निबंधन और रजिस्ट्रेशन से जुड़े सभी कार्यों के पूर्ण डिजिटाइजेशन, सब रजिस्ट्रार कार्यालयों के नियमित निरीक्षण और रजिस्ट्री के दौरान संपत्ति के सही मूल्यांकन के लिए स्थलीय जांच के निर्देश भी दिए।

प्रदेश से बाहर के वाहनों से ग्रीन सेस वसूली में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को यह प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए राज्य के हित में वन संपदा का संतुलित उपयोग किया जाए। तराई क्षेत्रों में कमर्शियल प्लांटेशन और जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में ठोस कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए राजस्व वृद्धि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “इस दशक को उत्तराखंड का दशक” बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए संसाधन वृद्धि को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विशेष श्रेणी के राज्यों में उत्तराखंड को शीर्ष स्थान मिला है और खनन सुधारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को ₹200 करोड़ की केंद्रीय प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है।

बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹24,015 करोड़ का कर राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें अब तक 62 प्रतिशत से अधिक की प्राप्ति हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने शेष लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति के लिए विभागों को समन्वित और सक्रिय प्रयास करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के लिए पूंजीगत निवेश पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पूंजीगत व्यय में 34 प्रतिशत की वृद्धि से राज्य में आधारभूत ढांचे के विकास को गति मिलेगी। उन्होंने पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित को केंद्र में रखकर कड़े वित्तीय अनुशासन के साथ कार्य करने पर बल दिया।

लोकसभा में G Ram G विधेयक पास होने के बाद हंगामा, विपक्ष ने फाड़ी बिल की कॉपी

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नई दिल्ली। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लाने वाला जी राम जी बिल सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के भारी विरोध के बीच पारित हो गया। विपक्षी दलों ने बिल को स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की मांग करते हुए सदन के वेल में प्रदर्शन किया और कुछ सांसदों ने बिल की प्रतियां भी फाड़ दीं।

स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि इस कानून पर सदन में पर्याप्त चर्चा हो चुकी है और अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। उन्होंने विपक्षी सदस्यों को फटकार लगाते हुए कहा कि संसद में इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।

विपक्ष का विरोध

बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाड्रा, डीएमके के टीआर बालू और समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने इसका विरोध किया। विपक्ष का कहना था कि कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाना राष्ट्रपिता का अपमान है और इससे राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।

सरकार का पक्ष

बिल का समर्थन करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने अपने समय में कई कानूनों के नाम नेताओं के नाम पर रखे, लेकिन अब एनडीए सरकार पर सवाल उठा रही है। उन्होंने कहा कि मनरेगा भ्रष्टाचार का माध्यम बन गया था और नया कानून सभी हितधारकों से चर्चा के बाद तैयार किया गया है। चौहान ने यह भी कहा कि सरकार नाम बदलने पर नहीं, बल्कि काम पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

सदन में हंगामा

बिल पारित होने के बाद भी विपक्षी सांसदों ने विरोध जारी रखा और वेल में पहुंचकर नारेबाजी की। कुछ सांसदों ने कागज फाड़े, जिस पर स्पीकर ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि जनता संसद की कार्यवाही देख रही है।

प्रियंका गांधी का बयान

कार्यवाही स्थगित होने के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि विपक्ष इस बिल का जोरदार विरोध करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को कमजोर करेगा और राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डालेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा गरीबों के लिए सहारा है और नया बिल गरीब विरोधी है।

अन्य मंत्रियों की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने सदन में कागज फाड़ने की घटना को निंदनीय बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में इस तरह के आचरण की कोई जगह नहीं है। वहीं, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन संसद के भीतर इस तरह का व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘राम’ नाम का महात्मा गांधी से गहरा जुड़ाव रहा है।

उत्तराखंड : यहां हाईवे पर दर्दनाक हादसा, कार खाई में गिरी, तीन की मौत

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भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर निगलाट के पास शुक्रवार को एक कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। हादसे में उत्तर प्रदेश के तीन सैलानियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को खाई से निकालकर उपचार के लिए अस्पताल भेजने की तैयारी की जा रही है।

कोतवाली प्रभारी प्रकाश सिंह मेहरा ने बताया कि रेस्क्यू अभियान जारी है। फिलहाल मृतकों और घायलों की शिनाख्त नहीं हो पाई है। मामले की जांच की जा रही है।

स्वच्छ आबोहवा पर संकट, देहरादून में बिगड़ रहे हालात

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देहरादून : देशभर में बढ़ते वायु प्रदूषण का असर अब देहरादून की आबोहवा पर भी साफ नजर आने लगा है। राजधानी की हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। मंगलवार को इस साल का अब तक का सबसे खराब वायु गुणवत्ता स्तर दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक देहरादून का एक्यूआई 294 रहा। इससे पहले दीपावली के बाद 20 अक्तूबर को शहर में अधिकतम 254 एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया था।

दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती हवा से हालात गंभीर बने हुए हैं और अब देहरादून की स्थिति भी इससे अलग नहीं दिख रही। स्वच्छ हवा के लिए पहचाने जाने वाले देहरादून में दिसंबर के कुछ दिनों को छोड़ दिया जाए तो लगातार वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है। शाम ढलते ही शहर में स्मॉग की परत नजर आने लगती है और हवा की स्थिति कई मायनों में दिल्ली जैसी हो गई है।

उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार सोमवार को देहरादून का एक्यूआई 299 दर्ज किया गया। इस दौरान पीएम 2.5 का स्तर 119.83 और पीएम 10 का स्तर 134.11 रहा। वहीं, सीपीसीबी की मंगलवार की रिपोर्ट में एक्यूआई 294 दर्ज किया गया। दोनों ही एजेंसियों ने प्रदूषण का मुख्य कारण पीएम 2.5 और पीएम 10 के बढ़े हुए स्तर को माना है।

जल्द राहत के आसार कम, मरीजों की बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ दिनों में वायु गुणवत्ता में खास सुधार की संभावना नहीं है। बारिश या तेज हवाएं चलने पर एक्यूआई में गिरावट आ सकती है, लेकिन फिलहाल ऐसे हालात बनने के आसार कम हैं। बारिश से हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कण नीचे बैठ जाते हैं, जबकि तेज हवाएं इन्हें फैला देती हैं। इस प्राकृतिक प्रक्रिया को रेन वाशआउट या वेट डिपोजीशन कहा जाता है, जिससे अस्थायी राहत मिलती है।

बढ़ते प्रदूषण के बीच सांस के रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों की चिंता बढ़ गई है। चिकित्सकों का कहना है कि एक्यूआई 200 के पार पहुंचते ही इन वर्गों के लिए खतरा काफी बढ़ जाता है, ऐसे में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।

दीपावली के दौरान देहरादून का अधिकतम एक्यूआई

  • 18 अक्तूबर: 171

  • 19 अक्तूबर: 162

  • 20 अक्तूबर: 254

  • 21 अक्तूबर: 174

  • 22 अक्तूबर: 149
    (स्रोत: उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड)

दिसंबर में देहरादून का एक्यूआई

  • 01 दिसंबर: 131

  • 04 दिसंबर: 173

  • 05 दिसंबर: 138

  • 06 दिसंबर: 201

  • 07 दिसंबर: 161

  • 10 दिसंबर: 151

  • 11 दिसंबर: 199

  • 15 दिसंबर: 189

  • 16 दिसंबर: 299

  • 17 दिसंबर: 294
    (स्रोत: उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/सीपीसीबी)

ऋषिकेश में भी बढ़ा प्रदूषण

प्रदूषण का असर ऋषिकेश में भी देखने को मिल रहा है। मंगलवार को यहां का एक्यूआई 105 दर्ज किया गया। यह भले ही खराब श्रेणी में न आए, लेकिन सालभर अपेक्षाकृत साफ हवा वाले शहर के लिए यह चिंता का विषय माना जा रहा है।

क्या हैं पीएम 10 और पीएम 2.5

पीएम 10 और पीएम 2.5 हवा में मौजूद सूक्ष्म ठोस कण या तरल बूंदें होती हैं। पीएम 10 का आकार 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है, जबकि पीएम 2.5 का आकार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। बेहद छोटे आकार के कारण पीएम 2.5 फेफड़ों के भीतर गहराई तक जाकर रक्त में मिल सकता है, जिससे यह पीएम 10 की तुलना में अधिक खतरनाक माना जाता है।

मौसम का हाल

मौसम विभाग ने उत्तराखंड के मैदानी जिलों, खासकर हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में घने कोहरे का यलो अलर्ट जारी किया है। अन्य जिलों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। वहीं, देहरादून में आंशिक रूप से बादल छाए रहने के आसार जताए गए हैं।

उत्तराखंड में बिजली संकट से जल्द मिलेगी राहत: नियामक आयोग ने दी 500 MW RTC बिजली खरीद की मंजूरी

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देहरादून: उत्तराखंड में लंबे समय से चली आ रही बिजली की कमी अब काफी हद तक दूर होने वाली है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) को मध्यम अवधि (मिड टर्म) के लिए 500 मेगावाट राउंड-द-क्लॉक (RTC) बिजली खरीदने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से राज्य में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच का अंतर लगभग समाप्त हो जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को महंगी दरों पर बिजली खरीदने की मजबूरी से छुटकारा मिलेगा।

UPCL के निदेशक (परिचालन) एमआर आर्या ने बताया कि राज्य में बिजली की औसत मांग 2000 से 2200 मेगावाट के बीच रहती है, जबकि केंद्र से मिलने वाली हिस्सेदारी सहित उपलब्धता मात्र 1500 से 1600 मेगावाट होती है। इससे करीब 500 मेगावाट की कमी बनी रहती थी। अब इस मिड टर्म खरीद के बाद राज्य में 2000 से 2100 मेगावाट बिजली उपलब्ध हो सकेगी। सामान्य दिनों में बिजली कटौती का संकट खत्म हो जाएगा। साथ ही, अतिरिक्त आपूर्ति होने पर बिजली बैंकिंग की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

बिजली खरीद की बोली प्रक्रिया में दो कंपनियां सफल रहीं। जिंदल पावर लिमिटेड से 150 मेगावाट और पावरपल्स ट्रेडिंग सॉल्यूशंस लिमिटेड से 350 मेगावाट बिजली खरीदी जाएगी। दोनों ने 5.85 रुपये प्रति यूनिट की एकसमान दर प्रस्तावित की है। ट्रांसमिशन लॉस जोड़ने के बाद प्रभावी दर लगभग 6.06 रुपये प्रति यूनिट होगी। यह दर बाजार की तुलना में काफी किफायती है, जिससे UPCL को महंगे स्पॉट मार्केट से बचने में मदद मिलेगी।

यह कदम राज्य की बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल आपूर्ति स्थिर होगी, बल्कि उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का अतिरिक्त बोझ भी कम पड़ेगा।

दून इंटरनेशनल स्कूल में ऊर्जा संरक्षण पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित, छात्रों को मिले आकर्षक पुरस्कार

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देहरादून : दून इंटरनेशनल स्कूल (सीनियर विंग) में ऊर्जा संरक्षण के महत्व को बढ़ावा देने के लिए एक पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के “जिज्ञासा” कार्यक्रम के तहत सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) और सोसाइटी फॉर रिसर्च एंड डेवलपमेंट इन साइंस टेक्नोलॉजी एंड एग्री के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

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प्रतियोगिता में विभिन्न स्कूलों से आए छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दो वर्गों में विभाजित इस आयोजन में पहला वर्ग कक्षा 6 से 8 और दूसरा वर्ग कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए था।

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कुल 26 प्रतिभागियों को आकर्षक पुरस्कार, मोमेंटो और प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। विजेता छात्रों की रचनाओं को स्कूल में आगामी पैरेंट-टीचर मीटिंग (पीटीएम) के दौरान प्रदर्शित किया जाएगा।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के निदेशक डॉ. हरेंद्र सिंह बिष्ट ने प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार वितरित किए। अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने छात्रों को ऊर्जा के विभिन्न रूपों की जानकारी दी और दैनिक जीवन में ऊर्जा संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।

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ज्यूरी सदस्यों में डीएवी कॉलेज के प्रो. हरिओम शंकर, एसजीआरआर यूनिवर्सिटी की डॉ. नेहा सक्सेना और दून इंटरनेशनल स्कूल की सुश्री अनीता देवी शामिल थे, जिन्होंने विजेताओं का चयन किया। कार्यक्रम का संचालन स्कूल समन्वयक सुश्री काजल क्षेत्री ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रधानाचार्य डॉ. दिनेश बर्तवाल ने किया।

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आयोजन में डॉ. कुँवर राज अस्थाना (आयोजन सचिव), जिज्ञासा कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आरती तथा टीम सदस्य डॉ. ज्योति पोरवाल, डॉ. कमल कुमार, अंजलि भटनागर, सपना पैन्यूली, संजय कुमार, गोकुल कुमार और पंकज भास्कर उपस्थित रहे।

 

सड़क दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख तक कैशलेस इलाज, मदद करने वालों को 25,000 इनाम

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नई दिल्ली : केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज योजना के विस्तार की जानकारी दी। इस योजना के तहत दुर्घटना के शुरुआती सात दिनों में प्रति पीड़ित 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज सरकार वहन करेगी। योजना का उद्देश्य ‘गोल्डन ऑवर’ में त्वरित चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित कर जानें बचाना है।

मंत्री ने सदन को बताया कि पहले कुछ क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई यह योजना अब पूरे देश में लागू हो चुकी है। राज्य सरकारों के सहयोग से बिना किसी प्रारंभिक भुगतान के तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

एम्बुलेंस 10 मिनट में पहुंचेगी

गडकरी ने घोषणा की कि सरकार एक ऐसे मॉडल पर काम कर रही है, जिसमें विशेष एम्बुलेंस दुर्घटना स्थल पर 10 मिनट के अंदर पहुंच सके। इसके लिए आधुनिक एम्बुलेंस तैनात की जाएंगी और एक केंद्रीकृत आपात हेल्पलाइन को अपग्रेड किया जाएगा। विशेष रूप से खाई में गिरे वाहनों के लिए जरूरी उपकरणों वाली एम्बुलेंस उपलब्ध कराई जाएंगी। यदि एम्बुलेंस निर्धारित समय में पहुंचती है, तो सरकार संबंधित राज्यों के साथ एमओयू के तहत खर्च वहन करेगी।

‘राह-वीर’ योजना में इनाम बढ़ाकर 25,000 रुपये

दुर्घटना पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने वाले गुड समारिटन को प्रोत्साहित करने के लिए ‘राह-वीर’ योजना के तहत इनाम को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है। मदद करने वाले को ‘राहवीर’ की उपाधि भी दी जाएगी। मंत्री ने कहा कि इससे लोग ‘गोल्डन ऑवर’ में मदद करने के लिए आगे आएंगे।

गडकरी ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि समय पर इलाज से हर साल करीब 50,000 सड़क दुर्घटना मौतों को रोका जा सकता है। आपात देखभाल में देरी कई मौतों की प्रमुख वजह है, जिसे दूर करने के लिए ये कदम उठाए जा रहे हैं।

उत्तराखंड श्रम विभाग की वेबसाइट पर साइबर अटैक, ऑनलाइन सेवाएं ठप

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देहरादून : उत्तराखंड के श्रम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर मंगलवार को साइबर हमला हुआ, जिससे विभाग की कई ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित हो गईं। इस हमले से विभागीय कार्यों में बाधा आई और अधिकारियों में हड़कंप मच गया। यह राज्य में सरकारी वेबसाइटों पर बढ़ते साइबर खतरों की एक और कड़ी है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि हमला विदेश से किया गया हो सकता है। विभाग के अधिकारी और आईटी टीम हमले की उत्पत्ति और हमलावरों का पता लगाने में जुटी हुई है।

प्राइवेट सर्वर की वजह से कमजोरी राज्य के सभी सरकारी विभागों के डेटा की सुरक्षा और मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी आईटी डेवलपमेंट एजेंसी (ITDA) की है, लेकिन श्रम विभाग अपनी वेबसाइट प्राइवेट क्लाउड सर्वर पर चलाता है। इसी कारण यह ITDA की नियमित निगरानी के दायरे से बाहर थी।

ITDA के डेटा सेंटर इंचार्ज राम उनियाल ने कहा, “ऐसे साइबर हमले समय-समय पर होते रहते हैं। श्रम विभाग की वेबसाइट प्राइवेट सर्वर पर होने से यह हमारी सीधी निगरानी में नहीं थी। इस हमले का अन्य विभागों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।” उन्होंने बताया कि ITDA की तकनीकी टीम श्रम विभाग को पूरा सहयोग दे रही है और डेटा सुरक्षित रखने के उपाय किए जा रहे हैं।

पिछले हमलों की याद ताजा यह उत्तराखंड में सरकारी सिस्टम पर पहला साइबर अटैक नहीं है। पिछले साल अक्टूबर में स्टेट डेटा सेंटर पर बड़े रैंसमवेयर अटैक से 190 से अधिक वेबसाइटें प्रभावित हुई थीं, जिन्हें बहाल करने में दिन लगे थे। विदेशी हैकर्स, खासकर चीन से जुड़े हमलों की आशंका पहले भी जताई गई है। इन घटनाओं ने सरकारी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।

सरकार ने साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन लगातार हमले बड़ी चुनौती बने हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि डेटा सुरक्षित है और जल्द सेवाएं बहाल कर ली जाएंगी। राज्य सरकार ने सभी विभागों से अपील की है कि वे ITDA के दायरे में आने वाले सर्वर का इस्तेमाल करें ताकि बेहतर निगरानी हो सके। इस घटना ने एक बार फिर साइबर सुरक्षा की जरूरत को रेखांकित किया है।

अग्निवीर के शहीद परिवार को पेंशन से वंचित करने पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब

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मुंबई : बॉम्बे हाईकोर्ट ने अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों और नियमित सैनिकों के बीच लाभों को लेकर होने वाले कथित भेदभाव पर केंद्र सरकार को कड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए अग्निवीर मुरली धोंडिबा नाइक की मां ज्योतिबाई नाइक की याचिका पर रक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2026 को होगी।

न्यायमूर्ति रविंद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति वाय. जी. खोब्रागड़े की खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “अग्निवीर भी सीमा पर नियमित सैनिकों की तरह ही गोली खाते हैं, वही जोखिम उठाते हैं। फिर उनके परिवार को पेंशन और अन्य दीर्घकालिक लाभ क्यों नहीं मिलते?”

याचिका में क्या है दावा? याचिका में कहा गया है कि 9 मई 2025 को पुंछ सेक्टर में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी गोलीबारी में शहीद हुए अग्निवीर मुरली नाइक (महाराष्ट्र के सातारा जिले के निवासी) के परिवार को केवल एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि और कुछ अन्य सीमित लाभ दिए गए, जबकि समान परिस्थिति में शहीद होने वाले नियमित सैनिक के परिवार को आजीवन फैमिली पेंशन, एक्स-ग्रेशिया, कैंटीन सुविधा, मेडिकल लाभ और अन्य कल्याणकारी योजनाएं मिलती हैं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि अग्निवीर और नियमित सैनिक के बीच यह भेदभाव “मनमाना, तर्कहीन और असंवैधानिक” है तथा संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।

ऑपरेशन सिंदूर का बैकग्राउंड याचिका में उल्लेख है कि अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत के बाद भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई के तहत ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इसी अभियान के दौरान 9 मई को पुंछ में पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में अग्निवीर मुरली नाइक शहीद हो गए थे। वे जून 2023 में अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती हुए थे।

शहीद होने के बाद उनकी मां ने कई बार रक्षा मंत्रालय, सेना मुख्यालय और संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर नियमित सैनिकों के समान लाभ देने की मांग की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

याचिका की प्रमुख मांगें

  • शहीद अग्निवीरों के परिवारों को भी नियमित सैनिकों की तरह आजीवन फैमिली पेंशन और अन्य सभी कल्याणकारी लाभ दिए जाएं।
  • अग्निपथ योजना के उन प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया जाए जो अग्निवीरों और नियमित सैनिकों में भेदभाव करते हैं।

हालांकि याचिका में पूरी अग्निपथ योजना की वैधता को चुनौती नहीं दी गई है, सिर्फ भेदभावपूर्ण प्रावधानों पर सवाल उठाया गया है। गौरतलब है कि अग्निपथ योजना 2022 में शुरू की गई थी और इसके तहत भर्ती सैनिकों को चार साल की सेवा के बाद बिना पेंशन के रिटायरमेंट दिया जाता है। योजना शुरू होने के बाद से ही इसे लेकर देशभर में विरोध और कानूनी चुनौतियां चल रही हैं।