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उत्तराखंड : 234 प्रवक्ताओं की AIIMS कर रहा जांच, नौकरी पर मंडराया ख़तरा

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देहरादून: उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने राज्य गठन के बाद दिव्यांग आरक्षण कोटे से नियुक्त सभी 234 प्रवक्ताओं की दिव्यांगता की जांच शुरू करने का फैसला किया है। यह जांच अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के विशेष मेडिकल बोर्ड द्वारा की जाएगी, जिसकी शुरुआत रविवार 7 मार्च 2026 से हो रही है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर कहा है कि राज्य गठन के बाद से अब तक दिव्यांग कोटे में भर्ती हुए प्रवक्ता संवर्ग के हर शिक्षक का स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य रूप से कराया जाएगा।

जांच सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक एम्स ऋषिकेश में होगी। पहले चरण में 7 मार्च को 50 प्रवक्ताओं की जांच होगी, जबकि शेष शिक्षकों की जांच 12 मार्च, 14 मार्च, 28 मार्च और 2 अप्रैल 2026 को क्रमवार पूरी की जाएगी। शिक्षा विभाग ने सभी 13 जिलों, देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, हरिद्वार, टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली, चंपावत से दिव्यांग कोटे में नियुक्त प्रवक्ताओं की सूची तैयार कर मुख्य शिक्षा अधिकारियों को भेज दी है। इन शिक्षकों को अपनी निर्धारित तारीख पर एम्स पहुंचना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ एकतरफा विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

यह पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड (उत्तराखंड) ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया कि कई अपात्र लोग फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र, खासकर दृष्टिबाधित श्रेणी में बनवाकर दिव्यांग कोटे का लाभ उठाकर सरकारी नौकरी हासिल कर रहे हैं, जिससे वास्तविक दिव्यांग अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। वर्ष 2022 में राज्य मेडिकल बोर्ड ने कुछ प्रमाणपत्रों की जांच की थी, जिसमें कई फर्जी पाए गए थे। इसके बाद हाईकोर्ट और न्यायालय आयुक्त दिव्यांगजन ने 22 नवंबर 2025 को सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

कोर्ट के आदेश पर अब एम्स ऋषिकेश में न्यूरोसर्जन और स्वास्थ्य विभाग के अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम यह जांच कर रही है। स्वास्थ्य महानिदेशक सुनीता टम्टा ने भी जांच की पुष्टि की है। शिक्षा विभाग का यह कदम फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने और आरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच के नतीजों के आधार पर दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई होने की संभावना है।

उत्तराखंड की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025-26 जारी, GSDP में डेढ़ गुना से अधिक की वृद्धि

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उत्तराखंड की आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 रिपोर्ट नौ मार्च से शुरू हो रहे विधानसभा के बजट सत्र में सदन के पटल पर रखी जाएगी। इससे पहले नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने देहरादून में प्रेस वार्ता कर रिपोर्ट की मुख्य विशेषताओं और आंकड़ों को साझा किया। उन्होंने बताया कि यह रिपोर्ट न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति का आकलन करती है, बल्कि वित्त विभाग के लिए एक दिशा-निर्देशक दस्तावेज भी है, जो आगामी बजट में किन क्षेत्रों पर फोकस करना चाहिए, इसकी रणनीति तय करने में मदद करती है।

इस बार रिपोर्ट तैयार करने में पहली बार नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च की विशेषज्ञ सहायता ली गई है, जिससे आंकड़ों की गुणवत्ता और विश्लेषण में सुधार हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 की तुलना में 2025 में उत्तराखंड की नॉमिनल जीएसडीपी में डेढ़ गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 में 7.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है।

प्रति व्यक्ति आय 2022 में 1.94 लाख रुपये से बढ़कर 2025 में 2,73,921 रुपये पहुंच गई है। अगले वर्ष के लिए 8.2 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान लगाया गया है। गरीबी सूचकांक 2022 के 9.70 से घटकर 2025 में 6.92 पर आ गया है, जबकि ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स 0.718 से बढ़कर 0.722 हो गया है। लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट भी 60.1 से बढ़कर 64.4 प्रतिशत हो गया है।

उद्योग और रोजगार क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। एमएसएमई की संख्या 2022 में 59,798 से बढ़कर 2025 में 79,394 हो गई, जिससे रोजगार 3.44 लाख से बढ़कर 4.57 लाख हो गया है। लार्ज इंडस्ट्री की संख्या 107 से बढ़कर 128 हुई है। स्टार्टअप की संख्या 702 से बढ़कर 1,750 हो गई है। बिजली उत्पादन में भी बड़ा उछाल आया हैकृ2022 में 5,157 मिलियन यूनिट से बढ़कर 2025 में 16,500 मिलियन यूनिट हो गया है। सोलर ऊर्जा क्षमता 439 मेगावाट से बढ़कर 1,027 मेगावाट पहुंच गई है। विद्युत खपत भी 12,518 मिलियन यूनिट से बढ़कर 17,192 मिलियन यूनिट हो गई है।

शिक्षा क्षेत्र में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो में सुधार हुआ है। प्राइमरी स्कूलों में यह 91.19 प्रतिशत से बढ़कर 103 प्रतिशत हो गया है, जबकि सेकेंडरी स्तर पर 88.23 से बढ़कर 93.54 प्रतिशत हुआ है। ड्रॉपआउट दर प्राइमरी में 1.64 से घटकर 1.41 प्रतिशत और सेकेंडरी में 7.65 से घटकर 4.59 प्रतिशत रह गई है। डिग्री कॉलेजों की संख्या 124 से बढ़कर 139 और इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या 20 से बढ़कर 52 हो गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव दिखे हैंकृशिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 22 से घटकर 20, मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 103 से घटकर 91 और औसत आयु 71.7 से बढ़कर 73 वर्ष हो गई है।

कृषि, पर्यटन और बुनियादी ढांचे में भी प्रगति दर्ज की गई है। सभी घरों में शौचालय की उपलब्धता 97 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो गई है। चावल-गेहूं का उत्पादन 28.23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 32.47 क्विंटल हो गया है। मेडिसिनल एवं एरोमेटिक प्लांट्स का क्षेत्रफल 900 हेक्टेयर से बढ़कर 10,000 हेक्टेयर हो गया है। दूध उत्पादन 50.92 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़कर 54.59 लाख लीटर और मछली उत्पादन 7,325 टन से बढ़कर 10,487 टन प्रति वर्ष हो गया है। पर्यटन क्षेत्र में होटलों की संख्या 8,225 से बढ़कर 10,509 और होमस्टे की संख्या 3,935 से बढ़कर 6,061 हो गई है। सड़कों की कुल लंबाई 50,393 किमी से बढ़कर 51,278 किमी, हेलीपोर्ट्स 2 से बढ़कर 7 और हेलीपैड 60 से बढ़कर 118 हो गए हैं।

उत्तराखंड : नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, पति समेत 5 पर हत्या का मुकदमा, पति गिरफ्तार

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देहरादून: देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र अंतर्गत रिस्पना नगर में एक नवविवाहिता की संदिग्ध मौत के मामले में दहेज प्रताड़ना और हत्या का गंभीर आरोप लगा है। मृतका के भाई की शिकायत पर पति सहित ससुराल पक्ष के पांच लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304बी (दहेज हत्या), 498ए (क्रूरता) और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, मृतका कहकशा आलम (निवासी रुद्रप्रयाग) की शादी 19 नवंबर 2025 को शहबाज आलम (निवासी रिस्पना नगर, देहरादून) से हुई थी। शहबाज एक लैब टेक्निशियन के रूप में काम करते हैं। परिजनों का आरोप है कि शादी के तुरंत बाद से ही ससुराल पक्ष दहेज की मांग को लेकर कहकशा को लगातार प्रताड़ित करता रहा।

मृतका के भाई सलमान आसिफ ने थाने में दी तहरीर में बताया कि 18 फरवरी 2026 की रात कहकशा ने उन्हें फोन कर बताया था कि ससुराल वाले सहस्रधारा रोड पर प्लॉट खरीदने के लिए 50 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं और इस बात को लेकर उसे परेशान किया जा रहा है। इसके बाद 3 मार्च 2026 को सुबह करीब 11 बजे भी कहकशा ने फोन पर बताया कि पति, सास-ससुर, देवर और ननद बहुत गुस्से में हैं और पैसों की मांग कर रहे हैं। उसी रात करीब 1:30 बजे ससुर यासीन ने मृतका के पिता को फोन कर बताया कि कहकशा को कुछ हो गया है।

परिजन तुरंत देहरादून पहुंचे और दून अस्पताल में जानकारी मिली कि कहकशा को मृत अवस्था में लाया गया था। मायके पक्ष ने आरोप लगाया कि पति शहबाज आलम, सास खुर्शीदा, ससुर यासीन, देवर सरताज और ननद शबनम ने दहेज के लिए प्रताड़ित करने के बाद उसकी हत्या कर दी।

एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि मृतका के भाई सलमान आसिफ की शिकायत पर सभी पांच आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मुख्य आरोपी शहबाज आलम को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी हो चुकी है और शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है, जिसमें दहेज प्रताड़ना के सबूतों, कॉल डिटेल्स और गवाहों के बयानों पर फोकस है।

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर: 10 बार सीएम, अब राज्यसभा का रास्ता, BJP को मिलेगी बिहार की कमान?

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पटना: बिहार की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्य की सत्ता से दिल्ली की ओर रुख करने के लिए राजी कर लिया है। नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के चेहरे पर एनडीए को मिली प्रचंड जीत के बावजूद अब वह राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर रहे हैं। 2005 से 2025 तक विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों में नीतीश ने 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अब सवाल यह है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? क्या भाजपा कोई चौंकाने वाला चेहरा सामने लाएगी या परंपरागत नामों पर दांव खेलेगी?

नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने पहली बार 2000 में सिर्फ सात दिनों के लिए मुख्यमंत्री पद संभाला था। उसके बाद से वह बिहार की राजनीति के केंद्र में बने रहे, गठबंधनों को तोड़ते-जोड़ते हुए। अब राज्यसभा जाने के फैसले से बिहार में नई सत्ता समीकरण बनने की संभावना है। भाजपा सूत्रों के अनुसार, नीतीश के जाने से पार्टी को पहली बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का मौका मिलेगा, जो 2014 के बाद से उसके चौंकाने वाले फैसलों की कड़ी में शामिल होगा।

नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बनने का सफर

नीतीश कुमार बिहार के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। उनके कार्यकाल में विकास, सुशासन और गठबंधन राजनीति की मिसालें देखने को मिलीं। यहां उनके मुख्यमंत्री पद की शपथों का क्रमवार विवरण:

  • 2000: पहली बार 3 मार्च 2000 को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत न जुटा पाने के कारण 10 मार्च को इस्तीफा देना पड़ा। यह सिर्फ सात दिनों का कार्यकाल था।
  • 2005: विधानसभा चुनाव में भाजपा के समर्थन से नीतीश दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। यह एनडीए गठबंधन की शुरुआत थी, जिसने बिहार को ‘जंगल राज’ से बाहर निकालने का दावा किया।
  • 2010: एक बार फिर विधानसभा चुनाव में जीत के बाद तीसरी बार शपथ ली। इस कार्यकाल में सुशासन बाबू की छवि मजबूत हुई।
  • 2014: लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। जीतन राम मांझी को सीएम बनाया, लेकिन 2015 में अंदरूनी कलह के बाद मांझी को हटाकर चौथी बार खुद शपथ ली।
  • 2015: महागठबंधन (जदयू, राजद, कांग्रेस) की जीत के बाद पांचवीं बार मुख्यमंत्री बने। यह गठबंधन एनडीए के खिलाफ था।
  • 2017: तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद महागठबंधन छोड़कर एनडीए में लौटे। जुलाई 2017 में छठी बार शपथ ली।
  • 2020: विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बावजूद जदयू की सीटें कम होने पर भी सातवीं बार मुख्यमंत्री बने। भाजपा में असंतोष की खबरें आईं।
  • 2022: एनडीए से अलग होकर महागठबंधन में लौटे और आठवीं बार शपथ ली।
  • 2024: जनवरी में महागठबंधन छोड़कर फिर एनडीए में शामिल हुए, नौवीं बार मुख्यमंत्री बने। भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
  • 2025: नवंबर के चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद दसवीं बार शपथ ली। अब यह उनका आखिरी कार्यकाल साबित हो रहा है, क्योंकि वह राज्यसभा जा रहे हैं।

नीतीश कुमार ने 37 साल की राजनीति में वीपी सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी सरकारों में केंद्रीय मंत्री भी रहे। अब मोदी सरकार में उनकी भूमिका क्या होगी, यह देखना बाकी है।

अगला मुख्यमंत्री कौन? 

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार का नया मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इस पर सस्पेंस बरकरार है। भाजपा 2014 से चौंकाने वाले फैसले लेती रही है—जैसे नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना। संभावित नामों में शामिल हैं:

  • नित्यानंद राय: केंद्रीय राज्यमंत्री, 2020 चुनाव से पहले चर्चा में थे।
  • सम्राट चौधरी: उपमुख्यमंत्री, 2025 चुनाव से पहले नाम उभरा।
  • नितिन नवीन: भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष, लेकिन राज्यसभा नामांकन के बाद सीएम की दौड़ से बाहर माने जा रहे हैं।
  • श्रेयसी सिंह: भाजपा कोटे की मंत्री, महिला चेहरे के रूप में चर्चा।

कुछ सूत्रों का कहना है कि भाजपा कोई नया चेहरा ला सकती है, जो ओबीसी या ईबीसी समुदाय से हो। नीतीश कुमार कब इस्तीफा देंगे—खरमास से पहले या बाद—यह भी सवाल है। एनडीए विधायकों के बयानों से लगता है कि फैसला जल्द होगा।

नीतीश कुमार के इस फैसले को ‘महा-त्याग’ कहा जा रहा है। पटना में जदयू दफ्तर में हंगामा हुआ, जहां अमित शाह नीतीश से मिले। राजद नेता तेजस्वी यादव ने इसे भाजपा की साजिश बताया। बिहार में राजनीतिक हलचल तेज है, और सभी की नजरें नए सीएम पर टिकी हैं।

उत्तराखंड में इस दिन से पहाड़ों पर हल्की बारिश-बर्फबारी की संभावना, मैदानी इलाकों में बढ़ेगी गर्मी

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देहरादून : मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने उत्तराखंड के लिए अगले कुछ दिनों का जनपद-स्तरीय पूर्वानुमान जारी किया है। राज्य में फिलहाल शुष्क और साफ मौसम बना हुआ है, लेकिन 8 मार्च से एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बदलाव शुरू हो सकता है।

8 मार्च को उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की बारिश, गरज-चमक के साथ बिजली चमकने और 4000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी की संभावना जताई गई है, जबकि अन्य सभी जिलों में मौसम शुष्क रहेगा।

9 से 11 मार्च के बीच उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भी कहीं-कहीं इसी तरह की बहुत हल्की बारिश, गरज-चमक और 3800 मीटर से अधिक ऊंचाई पर बर्फबारी हो सकती है, बाकी जिलों में शुष्क मौसम जारी रहेगा।

मौसम विभाग के अनुसार अगले 3-4 दिनों में मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान धीरे-धीरे 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिससे देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे क्षेत्रों में गर्मी का एहसास तेज हो जाएगा। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी से सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं, इसलिए यात्रा करने वालों को सतर्क रहने और मौसम अपडेट चेक करने की सलाह दी गई है।

उत्तराखंड :भीषण हुई जंगल की आग, 20 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र जलकर राख, गौशालाओं और गांवों पर खतरा

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थराली : उत्तराखंड के चमोली जिले में बदरीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत मध्य पिंडर रेंज के जंगलों में बुधवार से भीषण आग लगी हुई है, जो अब तक काबू में नहीं आई है। चेपड़ों और सौगांव गांवों के जंगल से शुरू हुई यह आग तेजी से फैलकर खाड़ीबगड़, सौगांव जूनिधार और गोठिंडा के वन क्षेत्रों तक पहुंच गई है। आग ने अब तक 20 हेक्टेयर से अधिक जंगल क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है, जिसमें मुख्य रूप से घने चीड़ के जंगल जलकर खाक हो गए हैं।

आग की लपटें चेपड़ों गांव की गौशालाओं तक पहुंच गई हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ऊपर की ओर लपटें जूनिधार गांव तक फैल चुकी हैं, जिससे ग्रामीण आबादी और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। जलते पेड़ और चट्टानें स्टेट हाईवे थराली-देवाल मोटर मार्ग पर गिर रही हैं, जिससे राहगीरों और वाहनों के लिए आवागमन जोखिम भरा हो गया है।

वन विभाग की टीम और अग्निशमन कर्मचारी आग बुझाने में जुटे हैं, लेकिन खड़ी चट्टानों, घने जंगलों और रात होने के कारण ऑपरेशन में भारी चुनौतियां आ रही हैं। मध्य पिंडर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी मनोज देवराड़ी ने बताया कि टीम लगातार प्रयासरत है, लेकिन लगातार पत्थर और पेड़ गिरने से आग पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि आग लगाने वाले शरारती तत्वों की तलाश तेज कर दी गई है और जांच चल रही है।

आग से बहुमूल्य वनस्पति और छोटे-बड़े पेड़ जल चुके हैं, जिससे लाखों की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। पूरे क्षेत्र में घना धुआं छा गया है, जिससे आंखों में जलन, श्वास संबंधी समस्याएं और प्रदूषण बढ़ गया है। वन्यजीवों के लिए भी खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि कई प्रजातियां आग की चपेट में आ सकती हैं।

वन विभाग के अनुसार, लंबे समय से बारिश न होने और सूखे मौसम के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने भी आग बुझाने में सहयोग किया है, लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और हाईवे पर अनावश्यक यात्रा टालने की अपील की है।

बिहार में सियासी हलचल: नीतीश कुमारजा सकते हैं राज्यसभा, कौन बनेगे CM, अटकलें शुरू?

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पटना: बिहार की राजनीति में बुधवार से शुरू हुई अटकलों ने गुरुवार को और तेजी पकड़ ली है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह बिहार में दो दशकों से अधिक समय से सत्ता संभाल रहे नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे का संकेत माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार आज (5 मार्च) सुबह विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रह सकते हैं। जदयू की ओर से नीतीश कुमार के साथ रामनाथ ठाकुर का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है। भाजपा ने पहले ही अपने दो उम्मीदवारों—राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और अन्य—के नाम घोषित कर दिए हैं, जबकि राजग सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा को दूसरी बार राज्यसभा भेजने की पुष्टि हो चुकी है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद भाजपा बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री बना सकती है। NDA में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी (89 विधायक) होने के कारण यह संभव माना जा रहा है। संभावित उम्मीदवारों में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, नित्यानंद राय या अन्य भाजपा नेता शामिल हो सकते हैं।

इस बीच, नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार (करीब 40 वर्ष) की राजनीति में एंट्री की खबरें भी जोर पकड़ रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि समझौते के तहत निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि जदयू से एक या दो डिप्टी सीएम बनाने का फॉर्मूला भी चर्चा में है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “आज होली है। ऐसे मजाक होली पर आम होते हैं। नीतीश कुमार जी ही मुख्यमंत्री हैं।

जदयू के विधान परिषद सदस्य संजय कुमार ने भी आश्चर्य जताते हुए कहा, “पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवारों के बारे में हमें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। रामनाथ ठाकुर अपनी सीट बरकरार रख सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला मुख्यमंत्री खुद लेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें अप्रैल 2026 में खाली हो रही हैं। नामांकन की अंतिम तिथि आज है, स्क्रूटनी कल होगी। NDA के पास विधानसभा में बहुमत होने से सभी पांच सीटें जीतने की संभावना मजबूत है।

होली के बाद मौसम ने ली करवट, उत्तर भारत में गर्मी बढ़ी, पहाड़ों पर बारिश की संभावना

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देहरादून/नई दिल्ली: होली (4 मार्च) के ठीक बाद मौसम ने तेजी से मिजाज बदला है। रंगों के त्योहार के दौरान मैदानी इलाकों में चुभन भरी गर्मी रही, जबकि अब भारत मौसम विभाग (IMD) के अनुसार आने वाले दिनों में उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में तापमान और बढ़ेगा, वहीं पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है।

IMD की ताजा प्रेस रिलीज और अपडेट्स के मुताबिक:

  • उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अधिकतम तापमान सामान्य से 3-6 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में अगले 4-5 दिनों में तापमान में 2-4 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है।
  • दिल्ली-NCR में आज (5 मार्च) अधिकतम तापमान 33-35 डिग्री के आसपास रह सकता है, जो सामान्य से 3-5 डिग्री अधिक है। अगले सप्ताह तक यह 35-36 डिग्री तक पहुंच सकता है।
  • पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव: एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ 4 मार्च से प्रभावी है, जिससे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में 4-9 मार्च तक हल्की बारिश/बर्फबारी संभव है। 6-7 मार्च से नया विक्षोभ सक्रिय होने की उम्मीद है, जिसका असर हिमाचल प्रदेश (7-10 मार्च) और उत्तराखंड (8-10 मार्च) में हल्की से मध्यम बारिश/बर्फबारी के रूप में दिखेगा।
  • पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम, मेघालय में 3-4 मार्च को हल्की-मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें देखी गईं/देखी जा सकती हैं। सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में भी कुछ इलाकों में हल्की बारिश संभव।
  • तेज सतही हवाएं (20-30 किमी/घंटा) हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और असम-मेघालय में चल सकती हैं, जिससे प्रदूषण में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन गर्मी का एहसास बढ़ेगा।
  • दक्षिण भारत और पश्चिमी तट पर मौसम शुष्क रहेगा, लेकिन कुछ इलाकों में गर्म और आर्द्र हालात बने रहेंगे।

IMD ने सलाह दी है कि मैदानी इलाकों में बढ़ती गर्मी से सावधानी बरतें—हाइड्रेटेड रहें, दोपहर में बाहर निकलने से बचें। पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी से सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं, यात्रा करते समय सतर्क रहें।

कांग्रेस ने की राज्यसभा चुनावों के लिए छह उम्मीदवारों की घोषणा

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नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने आगामी राज्यसभा द्विवार्षिक चुनावों के लिए छह उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। तेलंगाना से वरिष्ठ नेता एवं सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी को दोबारा नामित किया गया है, जबकि दूसरी सीट पर मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के करीबी सलाहकार वेम नरेंद्र रेड्डी को मैदान में उतारा गया है।

एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी आधिकारिक संचार में यह जानकारी दी गई है। सिंघवी वर्तमान में तेलंगाना से राज्यसभा सदस्य हैं और यह उनका संभावित पांचवां कार्यकाल होगा। वहीं, वेम नरेंद्र रेड्डी राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं और पहले तेलुगु देशम पार्टी से जुड़े रहे थे, लेकिन 2017 में कांग्रेस में शामिल हो गए।

अन्य उम्मीदवारों में शामिल हैं:

  • छत्तीसगढ़ से आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम (वर्तमान सदस्य, पुनर्नामांकन)।
  • हरियाणा से करमवीर सिंह बौद्ध।
  • हिमाचल प्रदेश से अनुराग शर्मा।
  • तमिलनाडु से एम. क्रिस्टोफर तिलक।

राज्यसभा की कुल 37 सीटें 10 राज्यों (महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना) से अप्रैल 2026 में खाली हो रही हैं। इन चुनावों के लिए मतदान 16 मार्च 2026 को होगा और मतगणना उसी दिन शाम 5 बजे होगी।

नॉमिनेशन दाखिल करने की अंतिम तिथि आज (5 मार्च) है, स्क्रूटनी कल (6 मार्च) को होगी और उम्मीदवार 9 मार्च तक नाम वापस ले सकते हैं। तेलंगाना में कांग्रेस के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या है, जिससे एक सीट पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट के लिए अन्य दलों के विधायकों का समर्थन महत्वपूर्ण होगा।

नाम घोषित होने के बाद वेम नरेंद्र रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, प्रियंका गांधी, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सहित पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।

MDDA एचआईजी कॉलोनी में रंगारंग होली कार्यक्रम, खूब उड़ा अबीर-गुलाल

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देहरादून। एमडीडीए एचआईजी कॉलोनी में होली के पावन अवसर पर एक रंगारंग और उत्साहपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कॉलोनी के निवासियों ने जमकर भाग लिया। यह उत्सव रंगों, संगीत, नृत्य और आपसी भाईचारे की मिसाल बन गया।

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उत्सव में उमड़ा रंगों का मेला

एचआईजी कॉलोनी के निवासियों ने होली को पारंपरिक तरीके से मनाया। सुबह से ही लोग एकत्र हुए और एक-दूसरे पर अबीर-गुलाल, रंग लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। कॉलोनी के निवासियों ने बताया कि इस साल का होली मिलन विशेष था, क्योंकि इसमें सभी आयु वर्ग के लोग शामिल हुए। महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाए, जबकि पुरुषों ने ठंडाई और गुजिया का लुत्फ उठाया।

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सामुदायिक एकता का प्रतीक

एमडीडीए एचआईजी कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि यह कार्यक्रम सिर्फ होली मनाने का नहीं, बल्कि पड़ोसियों के बीच रिश्तों को मजबूत करने का भी माध्यम बना। यहां हर साल की तरह इस बार भी सभी परिवारों ने मिल-जुलकर उत्सव मनाया, जिससे आपसी प्रेम और सद्भाव बढ़ा। कॉलोनीवासियों ने बताया कि कार्यक्रम सुबह 10 बजे से दोपहर तक चला, जिसमें स्वच्छता और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया। ऑर्गेनिक कलर्स का इस्तेमाल किया।

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होली की शुभकामनाएं

कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को गले लगाकर होली की बधाई दी। कॉलोनी के बच्चे और युवा विशेष रूप से उत्साहित दिखे, जो रंगों से लिपटे हुए फोटो खिंचवाते नजर आए। एमडीडीए एचआईजी कॉलोनी का यह रंगारंग होली कार्यक्रम देहरादून के अन्य इलाकों के लिए भी एक उदाहरण बन गया, जहां सामुदायिक स्तर पर त्योहारों को हर्षोल्लास के साथ मनाया जा सकता है।