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उत्तराखंड : बाघ के हमले से महिला की मौत, ग्रामीणों में आक्रोश, हाईवे जाम

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रामनगर: जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व से सटे मोहान रेंज के खाल्यों क्यारी गांव में वन्यजीव के हमले से एक महिला की मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने गुरुवार को मोहान-रानीखेत स्टेट हाईवे जाम कर दिया। ग्रामीण हिंसक वन्यजीव को नरभक्षी घोषित कर मारने की मांग पर अड़े हैं। बीती रात भी करीब आठ घंटे तक धरना देने के बाद आक्रोश फिर भड़क उठा।

घटना बुधवार शाम की है। ग्राम पंचायत खाल्यों क्यारी निवासी कुशल सिंह की पत्नी बचुली देवी (उम्र करीब 50 वर्ष) गांव के निकट जंगल में घास काटने गई थीं। कुछ अन्य महिलाएं भी साथ थीं, लेकिन वे थोड़ी दूर थीं। काफी देर तक न लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की। जंगल में एक चप्पल मिलने से हड़कंप मच गया। देर शाम ग्रामीणों को बचुली देवी का क्षत-विक्षत शव मिला। शरीर का आधा से अधिक हिस्सा गायब था, जिससे बाघ या गुलदार के हमले की आशंका जताई गई।

सूचना मिलते ही ग्रामीण क्षत-विक्षत शव लेकर मोहान-रानीखेत-खैरना स्टेट हाईवे पर धरने पर बैठ गए। देर रात डीएफओ दीपक सिंह, वन क्षेत्राधिकारी उमेश पांडे और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों ने त्वरित कार्रवाई की मांग की। डीएफओ के हिंसक वन्यजीव को पकड़ने के आश्वासन पर मध्यरात्रि करीब दो बजे धरना समाप्त हुआ।

गुरुवार सुबह डीएफओ दीपक सिंह फिर टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। वन्यजीव विशेषज्ञों को बुलाया गया ताकि पगमार्कों से हमलावर की पहचान हो सके। शव पर लगे बालों के नमूने और लार एकत्र कर डीएनए जांच के लिए देहरादून भेजे जा रहे हैं। हमलावर की पहचान के लिए क्षेत्र में दो बाघ और एक गुलदार के लिए पिंजरे लगाए गए हैं। साथ ही 15 ट्रैप कैमरे भी स्थापित किए गए हैं। जंगल में वनकर्मियों की कॉम्बिंग जारी है।

प्रधान प्रतिनिधि कुबेर सिंह ने बताया कि ग्रामीण दहशत में हैं और हिंसक वन्यजीव को नरभक्षी घोषित कर मारने की मांग कर रहे हैं। डीएफओ दीपक सिंह, एसडीएम रिंकू बिष्ट और पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे जिद पर अड़े रहे। हाईवे पर जाम से यातायात प्रभावित हुआ।

देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को पीएम मोदी दिखाएंगे हरी झंडी, इस रूट पर दौड़ेगी

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नई दिल्ली : भारतीय रेलवे ने नए साल की शुरुआत में बड़ी घोषणा की है। देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द ही पटरी पर दौड़ेगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस ट्रेन का ट्रायल और सर्टिफिकेशन पूरा हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनवरी के दूसरे पखवाड़े में इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। पहला रूट गुवाहाटी से हावड़ा (कोलकाता) के बीच होगा।

यह ट्रेन लंबी दूरी की रात्रि यात्रा के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई है। अब तक वंदे भारत ट्रेनें मुख्यतः चेयर कार वाली थीं, जिनमें बैठकर ही सफर किया जाता था, लेकिन स्लीपर वर्जन में आरामदायक बेड की सुविधा होगी। ट्रेन पूरी तरह वातानुकूलित होगी और यात्रियों को सोते हुए भी सुरक्षित व तेज सफर का अनुभव मिलेगा। ट्रेन की इंटीरियर तस्वीरें भी सामने आई हैं, जो आधुनिक सुविधाओं से लैस दिख रही हैं।

किराया हवाई यात्रा से काफी कम

रेल मंत्री ने किराए की भी जानकारी दी। गुवाहाटी-हावड़ा रूट पर:

  • थर्ड एसी (3AC): करीब 2,300 रुपये (भोजन सहित)
  • सेकंड एसी (2AC): करीब 3,000 रुपये
  • फर्स्ट एसी (1AC): करीब 3,600 रुपये

वैष्णव ने कहा कि इस रूट पर हवाई यात्रा का किराया 6,000 से 8,000 रुपये तक होता है, जबकि ट्रेन का किराया मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर काफी किफायती रखा गया है। ट्रेन में क्षेत्रीय व्यंजनों का भी ख्याल रखा जाएगा—गुवाहाटी से चलने वाली ट्रेन में असमी भोजन और कोलकाता से बंगाली व्यंजन परोसे जाएंगे।

ट्रेन में कवच सुरक्षा प्रणाली, ऑटोमैटिक दरवाजे, बेहतर अग्नि सुरक्षा और अन्य आधुनिक सुविधाएं होंगी। मंत्री ने बताया कि साल के अंत तक 12 ऐसी ट्रेनें तैयार हो जाएंगी। यह कदम रेल यात्रा को और आरामदायक व विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

इस घोषणा से पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिम बंगाल के यात्रियों को विशेष लाभ होगा, जहां लंबी दूरी की ट्रेनों की मांग लंबे समय से थी। रेलवे की यह पहल मेक इन इंडिया को भी बढ़ावा देगी।

मातम में बदला नए साल का जश्न, बार में जोरदार धमाका, कई लोगों की मौत

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जेनेवा: नए साल 2026 के जश्न को खून से रंगते हुए स्विट्जरलैंड के प्रसिद्ध अल्पाइन स्की रिजॉर्ट क्रांस-मोंटाना में एक बार में जोरदार विस्फोट हुआ। इस हादसे में कई लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि विस्फोट का कारण अभी अज्ञात है और जांच जारी है।

विस्फोट स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 1:30 बजे (जीएमटी 00:30) ‘ले कॉन्स्टेलेशन’ बार में हुआ, जहां नए साल की पूर्व संध्या पर सैकड़ों लोग जश्न मना रहे थे। पुलिस प्रवक्ता गेटान लाथियोन ने बताया कि बार में 100 से अधिक लोग मौजूद थे। विस्फोट के बाद लगी आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपुष्ट वीडियो में बार से उठती ऊंची लपटें और धुएं के गुबार दिखाई दे रहे हैं।

घटना के तुरंत बाद आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं। क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया गया है और क्रांस-मोंटाना के ऊपर नो-फ्लाई जोन घोषित कर दिया गया है। प्रभावित परिवारों के लिए पुलिस ने एक हेल्पलाइन शुरू की है। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

क्रांस-मोंटाना स्विस आल्प्स के दिल में बसा एक शानदार स्की रिजॉर्ट है, जो पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। यह स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न से करीब दो घंटे की दूरी पर स्थित है और स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग जैसी गतिविधियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। नए साल के जश्न में दुनिया भर से आए पर्यटक यहां मौजूद थे।

पुलिस ने अभी मौतों और घायलों की सटीक संख्या नहीं बताई है, क्योंकि परिजनों को सूचित करने की प्रक्रिया जारी है। जांच में विस्फोट के कारण का पता लगाया जा रहा है। यह हादसा नए साल के उत्सव पर गहरा सदमा लेकर आया है।

साइबर ठग सक्रिय: ‘हैप्पी न्यू ईयर’ मैसेज के जरिए फिशिंग स्कैम का खतरा

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देहरादून : नए साल 2026 का जश्न पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। लोग एक-दूसरे को बधाई संदेश भेज रहे हैं, लेकिन इस खुशी के मौके पर साइबर ठग भी सक्रिय हो गए हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अनजान नंबरों से आने वाले ‘हैप्पी न्यू ईयर’ मैसेज में लिंक या वेबसाइट का जिक्र होने पर सतर्क रहें। ये फिशिंग स्कैम हो सकते हैं, जिनके जरिए हैकर्स व्यक्तिगत जानकारी, बैंक डिटेल्स या ओटीपी चुराकर खाते खाली कर सकते हैं।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, त्योहारी सीजन में ऐसे फ्रॉड के मामले बढ़ जाते हैं। अनजान मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करने से फोन में मैलवेयर घुस सकता है या फर्जी वेबसाइट पर ले जाकर संवेदनशील जानकारी चुराई जा सकती है। कई मामलों में ठग बधाई के बहाने लिंक भेजकर लोगों को ठग चुके हैं। पुलिस और साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी थाने या साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर दें। नए साल के जश्न को सुरक्षित बनाएं और सतर्क रहकर इन ठगों से बचें।

इन सावधानियों से बचें-

  • अनजान लिंक पर क्लिक न करें: ‘हैप्पी न्यू ईयर’ मैसेज में यदि कोई लिंक या वेबसाइट का लिंक हो, तो उसे खोलने से बचें। ऐसे मैसेज तुरंत डिलीट करें।
  • व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें: कोई भी अनजान नंबर बैंक डिटेल्स, ओटीपी या पर्सनल जानकारी मांगे तो कभी साझा न करें। ऐसे नंबरों को ब्लॉक कर दें।
  • संदिग्ध मैसेज रिपोर्ट करें: मैसेजिंग ऐप (जैसे व्हाट्सएप, एसएमएस) में संदिग्ध मैसेज को रिपोर्ट करें और नंबर ब्लॉक करें। गलती से भी ऐसे नंबर सेव न करें।
  • सुरक्षा सेटिंग्स मजबूत करें: बैंकिंग और अन्य महत्वपूर्ण ऐप्स में दो-चरणीय प्रमाणीकरण (2FA) सक्रिय करें। इससे अनधिकृत एक्सेस मुश्किल हो जाता है।
  • फोन और ऐप्स अपडेट रखें: स्मार्टफोन व ऐप्स को हमेशा लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करें, ताकि सुरक्षा कमजोरियों से बचा जा सके।

उत्तराखंड में नए साल पर मेहरबान हो सकता है मौसम, इन जिलों में बारिश-बर्फबारी की संभावना

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देहरादून : साल 2025 के अंत में बर्फबारी की आस लगाए सैलानियों को निराशा हाथ लगी, लेकिन नए साल 2026 की शुरुआत में मौसम करवट बदलने वाला है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई जिलों में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई है। साथ ही मैदानी इलाकों में घने कोहरे और शीत दिवस को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

मौसम विभाग के अनुसार, दिसंबर में सूखी ठंड का दौर जारी रहने से राज्य में बारिश नहीं हुई, लेकिन अब मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं बागेश्वर, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, अल्मोड़ा और चंपावत जिलों में हल्की बारिश की संभावना है। 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने का अनुमान है। शेष जिलों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा।

कोहरे और शीत दिवस का अलर्ट

हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल, चंपावत, पौड़ी और देहरादून जिलों में कई क्षेत्रों में घना कोहरा छाने की आशंका है। विशेष रूप से उधम सिंह नगर, देहरादून और नैनीताल के मैदानी इलाकों में शीत दिवस की स्थिति बन सकती है। कम विजिबिलिटी के कारण सड़कों पर वाहन धीमी गति से चल रहे हैं और चालक लाइट जलाकर आवागमन कर रहे हैं। इससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।

राजधानी देहरादून में आसमान आंशिक से मुख्यतः बादलवाला रहेगा। कुछ स्थानों पर गरज-चमक वाले बादल विकसित हो सकते हैं। अधिकतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का पूर्वानुमान है।

लंबे समय से बारिश न होने से पहाड़ी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जबकि मैदानी इलाकों में कोहरा और शीत लहर ने जनजीवन प्रभावित किया है। ठंड से बचने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं। मौसम विभाग ने यात्रियों और वाहन चालकों से सतर्क रहने की सलाह दी है।

उत्तराखंड : रोडवेज बस में अचानक लगी आग, बाल-बाल बची यात्रियों की जान

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देहरादून: नए साल के पहले ही दिन उत्तराखंड के डोईवाला क्षेत्र में बड़ा हादसा टल गया। लोहाघाट से देहरादून आ रही एक बस में अचानक आग लग गई। इस दौरान चीख पुकार मच गई। गनीमत रही कि सभी सवारियां सुरक्षित हैं।से देहरादून आ रही उत्तराखंड रोडवेज की एक यात्री बस में सुबह अचानक आग लग गई। बस पूरी तरह जलकर राख हो गई, लेकिन ड्राइवर की सूझबूझ से सभी यात्रियों की जान बच गई।

घटना लाल तप्पड़ क्षेत्र में साईं मंदिर के पास सुबह की है। रोडवेज की लोहाघाट डिपो की बस (नंबर UK07 PA 4232) यात्रियों से भरी हुई थी। चलती बस में अचानक धुआं निकलने लगा और देखते ही देखते आग की लपटें उठने लगीं। आग और धुएं से यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।

ड्राइवर ने तुरंत बस रोकी और यात्रियों को बाहर निकाला। गनीमत रही कि घटनास्थल से कुछ मीटर दूर ही लाल तप्पड़ पुलिस चौकी स्थित है। सूचना मिलते ही लाल तप्पड़ पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची तथा आग पर काबू पाया। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, हालांकि इसकी विस्तृत जांच की जा रही है।

हादसे में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ और सभी यात्री सुरक्षित हैं। रोडवेज अधिकारियों ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। इस घटना ने एक बार फिर बसों की तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

साल 2026 में कब है होली, रक्षाबंधन और दिवाली जैसे बड़े पर्व, जानें 2026 का पूरा कैलेंडर

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नया साल 2026 का आगाज हो चुका है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह वर्ष विविधता और उत्साह से भरे त्योहारों का साक्षी बनेगा। देशभर में मनाए जाने वाले प्रमुख पर्वों से लोगों में धार्मिक उत्साह और सांस्कृतिक एकता का संचार होगा। जनवरी से नवंबर तक फैले इन त्योहारों में मकर संक्रांति से लेकर दिवाली तक कई महत्वपूर्ण अवसर शामिल हैं।

वर्ष के प्रारंभ में मकर संक्रांति और बसंत पंचमी जैसे पर्व सर्दियों के अंत और वसंत के आगमन का प्रतीक होंगे। इसके बाद महाशिवरात्रि, होली और नवरात्रि जैसे उत्सव रंगों और भक्ति का संगम लेकर आएंगे। गर्मियों में रथ यात्रा और गुरु पूर्णिमा, जबकि मानसून में तीज-त्योहार और जन्माष्टमी जैसे पर्व मनाए जाएंगे। शरद ऋतु में नवरात्रि, दशहरा और दिवाली का पांच दिवसीय उत्सव प्रकाश और खुशियों की बहार लाएगा।

वर्ष 2026 के प्रमुख त्योहारों की सूची:

  • 13 जनवरी: लोहड़ी
  • 14 जनवरी: मकर संक्रांति / पोंगल
  • 23 जनवरी: बसंत पंचमी
  • 15 फरवरी: महाशिवरात्रि
  • 4 मार्च: होली
  • 19 मार्च: चैत्र नवरात्रि प्रारंभ
  • 26 मार्च: राम नवमी
  • 19 अप्रैल: अक्षय तृतीया
  • 17 अगस्त: नाग पंचमी
  • 28 अगस्त: रक्षाबंधन
  • 4 सितंबर: जन्माष्टमी
  • 14 सितंबर: गणेश चतुर्थी
  • 11 अक्टूबर: शरद नवरात्रि प्रारंभ
  • 20 अक्टूबर: दशहरा
  • 29 अक्टूबर: करवा चौथ
  • 6 नवंबर: धनतेरस
  • 8 नवंबर: दिवाली
  • 15 नवंबर: छठ पूजा

ये तिथियां पंचांग के अनुसार निर्धारित हैं और क्षेत्रीय परंपराओं में मामूली अंतर संभव है। त्योहारों का यह कैलेंडर परिवारों को अग्रिम तैयारी करने में सहायक होगा, ताकि धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और उत्सव धूमधाम से मनाए जा सकें।

वर्ष 2026 में ये पर्व न केवल आस्था को मजबूत करेंगे, बल्कि सामाजिक सद्भाव और पारंपरिक मूल्यों को भी बढ़ावा देंगे। सभी को इन त्योहारों की हार्दिक शुभकामनाएं!

दीपक बिजल्वाण ने की मुख्यमंत्री धामी की सराहना, कहा-अंकिता भंडारी मामले में न्याय कर रही सरकार

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बड़कोट (उत्तरकाशी)। उत्तरकाशी जिले के बड़कोट क्षेत्र के तटाऊ में आयोजित ‘संवाद से संकल्प तक’ कार्यक्रम में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण ने कार्यकर्ताओं से संवाद किया। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दीपक बिजल्वाण ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर संवेदनशील मामले को गंभीरता से ले रही है। अंकिता भंडारी हत्याकांड में मुख्यमंत्री के निर्देश पर त्वरित और कड़ी कार्रवाई की गई, जिसके परिणामस्वरूप तीनों दोषियों को न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।

बिजल्वाण ने कहा, “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हर मामले पर पैनी नजर रखते हैं और उसका समाधान भी सुनिश्चित करते हैं। दिवंगत बहन अंकिता भंडारी के मामले में सरकार ने पूर्ण गंभीरता दिखाई और न्याय दिलाने का कार्य किया। हाल के विवादों को लेकर भी मुख्यमंत्री और पूरी सरकार गंभीर है।”

उन्होंने आगे कहा कि युवा मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में उत्तराखंड तेजी से प्रगति के पथ पर अग्रसर है। राज्य को हर क्षेत्र में अग्रणी बनाने का सरकार का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘यह दशक उत्तराखंड का दशक होगा’ के संकल्प को मुख्यमंत्री धामी धरातल पर उतारने का कार्य कर रहे हैं।

दीपक बिजल्वाण ने विश्वास जताया कि वर्तमान परिस्थितियों में भी मुख्यमंत्री न्याय के पक्ष में उचित फैसला लेकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सरकार की नीतियों की सराहना की।

त्रिपुरा की छात्र की हत्या के बाद हंगामा, चाचा ने देहरादून पुलिस पर उठाए सवाल

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देहरादून : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नस्लीय टिप्पणियों का विरोध करने पर त्रिपुरा के 24 वर्षीय एमबीए छात्र अंजेल चकमा की निर्मम हत्या ने पूरे देश में गुस्सा भड़का दिया है। 9 दिसंबर को सेलाकुई क्षेत्र में हुई इस घटना में अंजेल और उनके छोटे भाई माइकल पर कुछ स्थानीय युवकों ने ‘चीनी’, ‘चिंकी’ और ‘मोमो’ जैसे नस्लीय अपशब्द कहे। विरोध करने पर हमलावरों ने चाकू और अन्य हथियारों से攻击 किया, जिसमें अंजेल को गर्दन और पेट में गंभीर चोटें आईं। 17 दिन अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ने के बाद 26 दिसंबर को उनकी मौत हो गई।

परिवार का आरोप है कि हमले के समय आसपास के लोग तमाशबीन बने रहे और किसी ने मदद नहीं की। अंजेल के चाचा मोमेन चकमा ने कहा, “नशे में धुत युवकों ने उन्हें चीनी कहकर चिढ़ाया। विरोध करने पर हमला हुआ और अंजेल को चाकू घोंप दिया गया। यह स्पष्ट रूप से नस्लवादी घटना है।” अंजेल के पिता तरुण चकमा, जो बीएसएफ में तैनात हैं, ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शुरू में एफआईआर दर्ज करने से इनकार किया गया और मामले को छोटा बताकर टाला गया। छात्र संघों के दबाव के बाद 12 दिसंबर को एफआईआर दर्ज हुई।

Anjel Chakma Tripura Dehradun Hate Crime: "Remarks In Jest, Not A ...

पुलिस का पक्ष और कार्रवाई

देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने शुरू में कहा था कि यह नस्लीय हमला नहीं है, क्योंकि टिप्पणियां मजाक में की गई थीं और हमलावरों में एक व्यक्ति पूर्वोत्तर का ही था। हालांकि, जांच में नस्लवाद के कोण की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी यज्ञ अवस्थी नेपाल भाग गया है। उसके लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है और पुलिस टीमें नेपाल भेजी गई हैं। मौत के बाद मामले में हत्या की धारा जोड़ी गई है।

देशभर में विरोध और मांगें

इस घटना से पूर्वोत्तर राज्यों में भारी आक्रोश है। त्रिपुरा में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां छात्र संगठनों ने नस्लवाद विरोधी राष्ट्रीय कानून की मांग की है। चकमा छात्र संघ और अन्य संगठनों ने सजा-ए-मौत की मांग उठाई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे ‘भयानक नफरत अपराध’ करार दिया, जबकि अन्य नेताओं ने भी न्याय की गुहार लगाई है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। उत्तराखंड सीएम पुष्कर सिंह धामी ने परिवार से बात कर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। घटना ने एक बार फिर पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ भेदभाव की समस्या को उजागर किया है।

गिग वर्कर्स की राष्ट्रव्यापी हड़ताल: स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, अमेजन डिलीवरी हो सकती है प्रभावित

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नई दिल्ली, : नए साल 2026 के जश्न से ठीक पहले देशभर के गिग वर्कर्स ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है, जिससे स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, जीप्टो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी प्रमुख प्लेटफॉर्म्स की डिलीवरी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। यह हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) के नेतृत्व में हो रही है। यूनियनों का दावा है कि एक लाख से अधिक डिलीवरी वर्कर्स इसमें हिस्सा लेंगे और ऐप पर लॉगिन नहीं करेंगे।

नए साल की पूर्व संध्या पर ऑनलाइन फूड ऑर्डर और क्विक कॉमर्स की मांग चरम पर होती है, ऐसे में यह हड़ताल पार्टी प्लानिंग करने वालों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, कोलकाता जैसे मेट्रो शहरों के अलावा लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर, इंदौर और पटना जैसे टियर-2 शहरों में भी डिलीवरी देरी या रुकावट की आशंका है।

हड़ताल का कारण

यह हड़ताल क्रिसमस के दिन (25 दिसंबर) हुई आंशिक हड़ताल का延续 है। यूनियनों का आरोप है कि प्लेटफॉर्म कंपनियां वर्कर्स की आय घटा रही हैं, जबकि काम के घंटे और दबाव बढ़ा रही हैं। 10 मिनट डिलीवरी मॉडल को खास तौर पर खतरनाक बताया जा रहा है, जिससे सड़क हादसे बढ़ रहे हैं। धूप, बारिश, ठंड और कोहरे में दिन-रात काम करने के बावजूद वर्कर्स को दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य बीमा, पेंशन या न्यूनतम आय की गारंटी नहीं मिल रही।

अल्गोरिदम के आधार पर मनमाने तरीके से आईडी ब्लॉक करना, पेनल्टी लगाना और काम का असमान वितरण भी बड़ी शिकायतें हैं। यूनियन नेताओं का कहना है कि कंपनियां वर्कर्स को ‘पार्टनर’ कहती हैं, लेकिन कर्मचारी जैसे अधिकार नहीं देतीं।

गिग वर्कर्स की प्रमुख मांगें

यूनियनों ने 9 प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • पारदर्शी और उचित वेतन संरचना लागू करना।
  • 10 मिनट डिलीवरी मॉडल को तत्काल बंद करना।
  • बिना उचित प्रक्रिया के आईडी ब्लॉक और पेनल्टी पर रोक।
  • सुरक्षा उपकरण और जरूरी गियर प्रदान करना।
  • अल्गोरिदम से भेदभाव रोककर सभी को बराबर काम का अवसर।
  • प्लेटफॉर्म और ग्राहकों से सम्मानजनक व्यवहार।
  • काम के दौरान ब्रेक और तय घंटों से अधिक काम न कराना।
  • ऐप और तकनीकी सपोर्ट को मजबूत करना, खासकर पेमेंट व रूटिंग समस्याओं के लिए।
  • स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना कवर और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना।

कौन हैं गिग वर्कर्स?

गिग वर्कर्स वे फ्रीलांस कर्मी हैं जो ऐप-बेस्ड प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हैं। फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स में ये लास्ट-माइल डिलीवरी की रीढ़ हैं, लेकिन इन्हें स्थायी कर्मचारी जैसे लाभ नहीं मिलते। हालिया सोशल सिक्योरिटी कोड में इनके लिए कुछ प्रावधान किए गए हैं, लेकिन यूनियनों का कहना है कि इन्हें ठीक से लागू नहीं किया जा रहा।