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उत्तराखंड : IAS-IPS अधिकारियों को तरक्की का तोहफा, 8 अपर सचिव बने सचिव, कई IPS को मिला उच्च पद

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देहरादून : नए साल की पूर्व संध्या पर उत्तराखंड के प्रशासनिक अधिकारियों को बड़ा तोहफा मिला है। कार्मिक विभाग ने IAS अधिकारियों की पदोन्नति के आदेश जारी किए, जबकि गृह विभाग ने IPS अधिकारियों को तरक्की दी। इन आदेशों से आठ अपर सचिव स्तर के IAS अब सचिव बन गए हैं। सभी पदोन्नतियां एक जनवरी 2026 से प्रभावी होंगी। आदेश सचिव कार्मिक एवं गृह शैलेश बगौली ने जारी किए हैं।

IAS अधिकारियों की पदोन्नति

2010 बैच के IAS अधिकारियों डॉ. अहमद इकबाल, सोनिका, रंजना राजगुरु, ईवा आशीष श्रीवास्तव, आनंद स्वरूप, देवकृष्ण तिवारी, उमेश नारायण पांडेय और राजेंद्र कुमार को अपर सचिव से सचिव स्तर पर पदोन्नत किया गया है। इनमें ईवा आशीष श्रीवास्तव को प्रतिनियुक्ति पर होने के कारण परफॉर्मा पदोन्नति दी गई है।

इसके अलावा, 2001 बैच के वरिष्ठ IAS प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम को लेवल-15 ग्रेड में पदोन्नति प्रदान की गई है। 2013 बैच के IAS मयूर दीक्षित, वंदना, विनीत कुमार, रीना जोशी और डॉ. आनंद श्रीवास्तव को चयन वेतनमान लेवल-13 में तरक्की मिली है।

2017 बैच के अधिकारियों नमामि बंसल, गौरव कुमार, संदीप तिवारी, रवनीत चीमा, विनोद गिरी गोस्वामी, प्रशांत कुमार आर्या, आशीष कुमार भटगाई, प्रकाश चंद्र, दीप्ति सिंह तथा निधि यादव को कनिष्ठ प्रशासनिक वेतनमान लेवल-12 दिया गया है। 2022 बैच के युवा IAS दीपक रामचंद्र सेठ, राहुल आनंद और आशिमा गोयल को वरिष्ठ वेतनमान लेवल-11 प्रदान किया गया है।

IPS अधिकारियों को मिली तरक्की

गृह विभाग ने भी कई IPS अधिकारियों को पदोन्नति दी है। एडीजी अभिनव कुमार को डीजी रैंक प्रदान किया गया है। डीआईजी निवेदिता कुकरेती, पी. रेणुका देवी और बरिंदरजीत सिंह को आईजी पद पर पदोन्नत किया गया है।

इसके साथ ही प्रहलाद नारायण मीणा, प्रीति प्रियदर्शिनी और यशवंत सिंह को एसएसपी से डीआईजी पद पर तरक्की मिली है। IPS तृप्ति भट्ट और रामचंद्र राजगुरु को सेलेक्शन ग्रेड लेवल-13, अर्पण यदुवंशी को जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड तथा निशा यादव व जितेंद्र चौधरी को वरिष्ठ वेतनमान लेवल-11 दिया गया है।

उत्तराखंड : अस्पताल परिसर में गोदाम में लगी भीषण आग, वाहन और सामान जलकर खाक

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नैनीताल : नैनीताल शहर में बुधवार तड़के उस समय हड़कंप मच गया जब जिला अस्पताल बीडी पांडे के परिसर में स्थित आउट हाउस के पुराने गोदाम में शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि गोदाम पूरी तरह जलकर खाक हो गया और इसके साथ ही करीब आधा दर्जन दोपहिया वाहन भी आग की चपेट में आकर राख हो गए। गनीमत रही कि समय पर सूचना मिलने से दमकल विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया, नहीं तो अस्पताल और आसपास की घनी आबादी को बड़ा खतरा हो सकता था।

सूत्रों के अनुसार, आग सुबह करीब 4 बजे लगी। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को इसका कारण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों ने आग की लपटें देखकर तुरंत दमकल विभाग को सूचना दी। दमकल टीम के मौके पर पहुंचने तक गोदाम में रखा पुराना सामान और पार्क किए गए तीन स्कूटी व तीन मोटरसाइकिल पूरी तरह जल चुके थे। आग की चपेट में अस्पताल परिसर का आउट हाउस क्षेत्र आया, जो मुख्य अस्पताल भवन के ठीक सामने स्थित है। बगल में घनी बस्ती होने से आग फैलने का खतरा अधिक था, लेकिन दमकल कर्मियों की त्वरित कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया।

तीन महीनों में आग की तीसरी बड़ी घटना

नैनीताल में आग लगने की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। पिछले तीन महीनों में यह तीसरी बड़ी आगजनी की घटना है। इससे पहले ओल्ड लंदन हाउस क्षेत्र में एक घर में आग लगने से पूरा मकान जल गया और एक बुजुर्ग महिला की जलकर मौत हो गई थी। दूसरी घटना सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में हुई, जहां स्कूल भवन खाक हो गया और प्रधानाचार्य सहित उनके परिवार की जान बाल-बाल बची। अब अस्पताल परिसर में यह घटना सामने आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों में हीटर और विद्युत उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से शॉर्ट सर्किट की घटनाएं बढ़ रही हैं। प्रशासन से अग्नि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराने की मांग उठ रही है। घटना की जांच की जा रही है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने आग से मुख्य भवन को कोई नुकसान नहीं होने की पुष्टि की है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

उत्तराखंड : पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी के आसार; मैदानी इलाकों में घने कोहरे का येलो अलर्ट

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देहरादून: मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार, नए साल की शुरुआत से पहले उत्तराखंड के मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। बुधवार 31 दिसंबर को पर्वतीय जिलों में हल्की बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना जताई गई है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इससे राज्य भर में तापमान में और गिरावट आने की उम्मीद है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है। विशेष रूप से 3200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी के आसार हैं। इससे उच्च हिमालयी इलाकों में ठंड और बढ़ जाएगी, जिसका असर पूरे राज्य के तापमान पर पड़ेगा। वहीं, मैदानी जिलों हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, देहरादून के साथ-साथ चंपावत, नैनीताल और पौड़ी के निचले इलाकों में घना कोहरा छाए रहने की चेतावनी दी गई है। कम दृश्यता के कारण सड़क और हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है।

आने वाले दिनों का पूर्वानुमान

मौसम विभाग के अनुसार, 3 और 5 जनवरी को प्रदेश भर में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा। हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 31 दिसंबर से 2 जनवरी तक कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश या बर्फबारी संभव है।

नए साल के जश्न के लिए तैयारियां

नए साल 2026 के जश्न को देखते हुए देहरादून-मसूरी में पर्यटकों की भारी भीड़ की उम्मीद है। पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था की है, जिसमें कई रूटों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। पर्यटकों से अनुरोध है कि वे निर्धारित पार्किंग स्थलों का उपयोग करें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें। मौसम की इस करवट से जहां पहाड़ों में बर्फबारी का नजारा पर्यटकों को लुभा सकता है, वहीं मैदानी क्षेत्रों में कोहरे से सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

उत्तराखंड में THDC की सुरंग में हादसा: दो लोको ट्रेनों की टक्क, 60 घायल, काम ठप

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गोपेश्वर (चमोली) : उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर बन रही टीएचडीसी की 444 मेगावाट विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की 13 किलोमीटर लंबी सुरंग में मंगलवार रात करीब 9:30 बजे बड़ा हादसा हो गया। सुरंग के अंदर मजदूरों और सामग्री को ले जाने वाली दो लोको ट्रेनें आपस में टकरा गईं, जिससे करीब 60 लोग घायल हो गए। हादसे के बाद निर्माण कार्य पूरी तरह रोक दिया गया है।

जानकारी के अनुसार, हादसा शिफ्ट बदलने के दौरान हुआ, जब एक ट्रेन मजदूरों को लेकर बाहर जा रही थी और दूसरी सामग्री ढोकर अंदर आ रही थी। सुरंग की एकल पटरी पर दोनों ट्रेनों की जोरदार टक्कर हो गई, जिससे दो कोच पटरी से उतर गए। उस समय सुरंग में 109 अधिकारी, कर्मचारी और मजदूर मौजूद थे। अफरा-तफरी के बीच सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन 60 लोगों को चोटें आईं। इनमें से 42 घायलों का इलाज जिला अस्पताल गोपेश्वर में चल रहा है, जबकि 17 को पीपलकोटी के विवेकानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ज्यादातर घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है, हालांकि 4-5 की स्थिति गंभीर है।

चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया, “हादसे की सूचना मिलते ही हम मौके पर पहुंचे। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों को बेहतर उपचार के निर्देश दिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में तकनीकी खामी या सिग्नलिंग में चूक का संकेत मिल रहा है। जांच समिति गठित की जा रही है।” पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने कहा कि राहत कार्य में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगी हुई हैं।

यह परियोजना अलकनंदा नदी पर हेलंग और पीपलकोटी के बीच बन रही है, जो चार टरबाइनों से 111 मेगावाट बिजली उत्पादन करेगी। सुरंग का करीब 7 किलोमीटर हिस्सा पूरा हो चुका है। टीएचडीसी के अधिकारी ने बताया कि हादसे के कारण काम प्रभावित हुआ है, लेकिन सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाएगी।

हादसे ने एक बार फिर जलविद्युत परियोजनाओं में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि मजदूरों की सुरक्षा के लिए आधुनिक उपकरण और बेहतर प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है और जांच के आदेश दिए हैं।

पुस्तक समीक्षा : रवांल्टी शब्दकोश-लोक भाषा को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास

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  • प्रदीप रावत ‘रवांल्टा’

दिनेश रावत की यह पुस्तक उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की रवांई घाटी की अनमोल सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। पुस्तक का पूरा शीर्षक रवांल्टी शब्दकोश है, जो एक तरह से “हिंदी-रवांल्टी-अंग्रेजी के त्रिभाषी शब्दकोश” है। इसमें रवांई क्षेत्र की स्थानीय बोली रवांल्टी के शब्दों को हिंदी और अंग्रेजी के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। यह एक बेहतरीन त्रिभाषी शब्दकोश है, जो मातृभाषा के रूप में रवांल्टी को केंद्र में रखते हुए देश-दुनिया तक इसके वैभव को पहुंचाने का सराहनीय कार्य करता है।

सामग्री और संरचना
पुस्तक में रवांई क्षेत्र के लोकजीवन, संस्कृति, परंपराओं, देवालयों और दैनिक बोलचाल के शब्दों का विस्तृत संकलन है। आपको पुस्तक की अनुक्रमणिका से ही पता चल जाएगा कि पुस्तक के पन्नों पर आपको क्या-क्या पढ़ने को मिलने वाला है। पुस्तक में लोकजीवन, सांस्कृतिक विरासत, देवगाथाएं, खान-पान, रहन-सहन और लोक प्रचलित शब्दों को समेटा गया है। लेखक ने रवांई की समृद्ध परंपराओं को न केवल शब्दों के रूप में दर्ज किया है, बल्कि उनके सामाजिक, धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ भी दिए हैं। प्रस्तावना में दिनेश रावत अपनी मातृभूमि रवांई के प्रति गहन प्रेम व्यक्त करते हैं और बताते हैं कि कैसे यह बोली हिमालय की गोद में पली-बढ़ी है, लेकिन आधुनिकता के दौर में पीछे ना छूटे उसके लिए उन्होंने यह अभिनव पहल की है।

 

पुस्तक का मुख्य हिस्सा शब्दकोश है, जहां रवांल्टी शब्दों के हिंदी और अंग्रेजी समानार्थी दिए गए हैं। उदाहरण के लिए, स्थानीय देवताओं, लोककथाओं, कृषि, प्रकृति और दैनिक जीवन से जुड़े शब्दों का संकलन बेहद समृद्ध है। अंतिम पृष्ठों पर लेखक का व्यक्तिगत स्पर्श दिखता है, जहां वे रवांई की सांस्कृतिक-सामाजिक विशेषताओं का वर्णन करते हैं।

पुस्तक की विशेषताएं और महत्व
संरक्षण का प्रयासर : रवांल्टी जैसी क्षेत्रीय बोलियां तेजी से विलुप्त हो रही हैं। ऐसे में यह शब्दकोश न केवल शब्दों को बचाता है, बल्कि पूरी सांस्कृतिक विरासत को दस्तावेजीकृत करता है।

त्रिभाषी दृष्टिकोण: हिंदी और अंग्रेजी के साथ रवांल्टी को जोड़कर यह पुस्तक स्थानीय लोगों के साथ-साथ शोधकर्ताओं, भाषाविदों और पर्यटकों के लिए उपयोगी है। यह पुस्तक नई पीढ़ी को निश्चित ही अपनी भाषा को वैज्ञानिक ढंग से समझने का असवर प्रदान करेगी। साथ ही अपनी लोक भाषा की ओर आकर्षित करने में भी कारगर साबित होगी।

लेखन शैली: पुस्त की लेखन शैली बेहत सरल, भावपूर्ण और प्रामाणिक है। दिनेश रावत जो शिक्षक और लोक संस्कृतिकर्मी हैं, वे अपनी जड़ों से गहराई से जुड़े हैं, जो इस पुस्तक के हर पृष्ठ पर झलकता है।

रवांई की जीवंत सांस्कृतिक आत्मा
यह पुस्तक केवल एक शब्दकोश नहीं, बल्कि रवांई की जीवंत सांस्कृतिक आत्मा का दर्पण है। उत्तराखंड की क्षेत्रीय बोलियों और लोक संस्कृति में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है। दिनेश रावत ने अपनी मातृभाषा और मातृभूमि के प्रति जो श्रद्धा दिखाई है, वह प्रेरणादायी है। यह कार्य भावी पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य विरासत साबित होगा।

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लेखक परिचय: दिनेश रावत
दिनेश रावत हिमालय की गोद में बसी उत्तराखंड की रवांई घाटी के एक सजग सांस्कृतिक संवाहक एवं समर्पित साहित्यकार हैं। उनका जन्म 7 जून 1981 को उत्तरकाशी जिले के रवांई क्षेत्र के कोटी, बनाल गांव में हुआ। प्रकृति की छांव में पले-बढ़े दिनेश रावत ने अपनी मातृभूमि की मिट्टी, लोक कथाओं, देवगाथाओं और स्थानीय बोली रवांल्टी की सुगंध को बचपन से ही हृदय में संजोया है। दिनेश रावत संवेदनशील कवि, लेखक, लोकसंस्कृतिकर्मी और समर्पित शिक्षक हैं। विज्ञान स्नातक के पश्चात् इतिहास, समाजशास्त्र व शिक्षा शास्त्र में स्नातकोत्तर और बी.एड. की उपाधि प्राप्त कर उन्होंने अपनी बौद्धिक यात्रा को लोक की माटी से जोड़ा।

उनकी रचनाएं हिमालयी लोकजीवन की गहन अनुभूति से आप्लावित हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘रवांई के देवालय एवं देवगाथाएं’, ‘रवांई क्षेत्र के लोकदेवता एवं लोकोत्सव’, ‘माटी’, ‘तेरे जाने के बाद’, ‘पहाड़ बनते पहाड़’ (कविता संग्रह), ‘का न हंदू’ (रवांल्टी कविता संग्रह) और ‘रवांल्टी शब्दकोश’ उल्लेखनीय हैं। ये रचनाएं रवांई की सांस्कृतिक धरोहर, देवगाथाओं और क्षेत्रीय भाषा की संरक्षा में अमूल्य योगदान हैं।

बहुआयामी दिनेश रावत ‘हिमांतर’ के हिमालयी लोक कला-साहित्य-संस्कृति और रवांल्टी कविता विशेषांक, ‘राहें हमारी’ विद्यालयी पत्रिका और ‘श्री रघुनाथ चरितावली’ का कुशल सम्पादन भी कर चुके हैं। यह उनकी सृजनशीलता का प्रमाण है। उत्तराखंड की लोकभाषाओं, विरासत एवं शब्दकोश निर्माण संबंधी राज्य स्तरीय पुस्तकों के लेखन-संपादन मंडल में उनकी सक्रिय सदस्यता उनकी विद्वत्ता को रेखांकित करती है।

दूरदर्शन और आकाशवाणी के माध्यम से लोकभाषा कवि सम्मेलनों एवं वार्ताओं का संचालन-प्रतिभागिता के साथ ही देशव्यापी पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन और सेमिनारों में शोध-पत्र प्रस्तुति उनकी साहित्यिक पहुंच को दर्शाती है। उन्हें राष्ट्रीय युवा पुरस्कार-2009, विज्ञान शिक्षा एवं प्रसार सम्मान-2022, देवभूमि उत्कृष्ट शिक्षा सम्मान-2023, टीचर्स ऑफ दी इयर-2021 सहित अनेक सम्मानों से विभूषित किया गया है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।

वर्तमान में वे हरिद्वार के राजकीय प्राथमिक विद्यालय नंबर-4, ज्वालापुर में अध्यापन कर रहे हैं, जहां वे भावी पीढ़ी को लोकसंस्कृति व शिक्षा की ज्योति प्रदान कर रहे हैं। उनकी रचनाएं एवं कर्म हिमालय की उस अटल माटी की तरह हैं, जो सदैव लोक की सेवा में समर्पित रहती है।

एंजेल चकमा हत्याकांड: कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने सरकार पर साधा निशाना, कहा- पूरा उत्तराखंड शर्मिंदा

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देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के 24 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा की कथित नस्लीय हिंसा से जुड़ी निर्मम हत्या से पूरे राज्य को शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है। इस जघन्य अपराध ने उत्तराखंड की छवि पर काला धब्बा लगा दिया है। यह बात उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने अपने कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कही।

धस्माना ने कहा कि धर्म, नस्ल या भाषा के नाम पर वोट बैंक की राजनीति करने वाले लोग यह समझें कि उनके अपने बच्चे भी देश-विदेश में पढ़ाई या नौकरी के लिए जाते हैं। कल उनके साथ भी ऐसी घटना हो सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देहरादून अब उच्च और तकनीकी शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां उत्तर-पूर्वी राज्यों सहित देश भर से हजारों छात्र आते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि यदि एंजेल चकमा और उनके भाई के साथ हुई हिंसा जैसी घटनाएं दोहराई गईं, तो बाहरी राज्यों के छात्र देहरादून और उत्तराखंड आना बंद कर देंगे, जिससे राज्य की बदनामी के साथ-साथ उच्च शिक्षा संस्थानों को भी भारी नुकसान होगा।

धस्माना ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की आलोचना करते हुए कहा कि हालांकि सीएम ने एंजेल के पिता से फोन पर दुख व्यक्त किया, लेकिन राज्य के मुखिया के नाते उन्हें पूरे राज्य की ओर से माफी मांगनी चाहिए थी। साथ ही, देश भर के लोगों को आश्वासन देना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।

प्रदेश कांग्रेस की ओर से धस्माना ने एंजेल चकमा के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा, “हम उनके परिवार से क्षमा चाहते हैं कि हमारे राज्य में उनके बेटे की जान नस्लीय हिंसा में चली गई।” उन्होंने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की गहन जांच करने तथा सभी आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग की।

गौरतलब है कि एंजेल चकमा पर 9 दिसंबर को देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र में कथित नस्लीय टिप्पणियों का विरोध करने पर हमला हुआ था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 26 दिसंबर को अस्पताल में उनका निधन हो गया। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य आरोपी की तलाश जारी है।

परीक्षा में फर्जीवाड़ा: ‘पेपर सॉल्वर’ गिरफ्तार, 12 लोगों को दिलाई सरकारी नौकरी

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देहरादून: कोतवाली पटेल नगर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए IBPS परीक्षा में दूसरे की जगह पेपर देने वाले शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने पूछताछ में कबूला कि उसने अब तक 12 लोगों को फर्जीवाड़े से सरकारी नौकरी दिलाई है। पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है। जांच में पता चला है कि आरोपी लाखों रुपये लेकर यह काला धंधा चला रहा था।

शक पर चढ़ा हत्थे पुलिस के अनुसार, रविवार को पटेल नगर स्थित आई क्रिएट सॉल्यूशन परीक्षा केंद्र पर IBPS RRB ऑफिसर स्केल-3 की परीक्षा चल रही थी। IBPS की डिवीजन हेड सोम बाला ने संदेह जताते हुए इनपुट दिया कि बिजनौर निवासी एक अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक और फोटो मिलान नहीं कर रहा। केंद्र व्यवस्थापक सूरज पाल सिंह रावत ने परीक्षा समाप्त होने के बाद आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया।

पूछताछ में खुले कई राज गिरफ्तार आरोपी ऋषि कुमार (37 वर्ष) ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह पैसे लेकर दूसरों की जगह परीक्षा देता था। उसने राजस्थान और बिजनौर के कई अभ्यर्थियों के लिए पेपर सॉल्व किया, जो अब सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं। आरोपी ने फोटो मिक्सिंग तकनीक से एडमिट कार्ड में छेड़छाड़ कर सिस्टम को चकमा दिया। ऋषि कुमार ने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बीटेक और पुणे के सिंबायोसिस से एमबीए किया है। 2016 से 2021 तक नेशनल इंश्योरेंस कंपनी में 80 हजार रुपये मासिक वेतन पर अधिकारी रहा। लेकिन कम समय में करोड़पति बनने की लालच में उसने अच्छी नौकरी छोड़ यह गोरखधंधा शुरू कर दिया।

 

लाखों में सौदा, पुराना अपराधी जांच में सामने आया कि आरोपी एक पेपर सॉल्व करने के लिए 5-6 लाख रुपये लेता था। वह अभ्यर्थी को जाल में फंसाता, अपना फोटो और बायोमेट्रिक लगवाता, फिर चयनित उम्मीदवार को जॉइनिंग करवाता। 2022 में राजस्थान में SSC परीक्षा में नकल के आरोप में वह जेल भी जा चुका है।

पुलिस अब आरोपी को रिमांड पर लेकर सिंडिकेट के अन्य सदस्यों का पता लगा रही है। कोतवाली प्रभारी चंद्रभान अधिकारी ने बताया, “आरोपी बैंकिंग और SSC परीक्षाओं में कई युवकों को नौकरी दिला चुका है। पूर्ण जांच जारी है। यह मामला सरकारी भर्ती परीक्षाओं में बढ़ते फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है, जहां शातिर गिरोह बायोमेट्रिक तक को चकमा दे रहे हैं। पुलिस ने अन्य राज्यों की एजेंसियों से भी संपर्क साधा है।

नव वर्ष 2026 के लिए उत्तराखंड में पुख्ता तैयारी, सीएम धामी ने दिए सख्त निर्देश

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देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नव वर्ष 2026 के मद्देनजर पर्यटकों की सुरक्षा, सुविधा और यातायात प्रबंधन को लेकर उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। 30 दिसंबर से 5 जनवरी 2026 तक विशेष ध्यान देने के आदेश देते हुए सीएम ने कहा कि देवभूमि में कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

सचिवालय में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नव वर्ष पर पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा होने की संभावना को देखते हुए सभी व्यवस्थाएं पुख्ता की जाएं। प्रमुख पर्यटक स्थलों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और शराब के ठेकों के आसपास समुचित सुरक्षा तैनात करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, शराब पीकर वाहन चलाने और अनियंत्रित ड्राइविंग पर सख्त निगरानी रखने को कहा गया।

सीएम धामी ने जोर दिया कि देवभूमि में आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा, सुविधा और आतिथ्य का पूरा ख्याल रखा जाए। चेकिंग के नाम पर आम जनता या पर्यटकों को अनावश्यक परेशान न किया जाए। पुलिस को नियमित रात्रिकालीन गश्त करने और उच्च अधिकारियों को समय-समय पर स्थलीय निरीक्षण करने के आदेश दिए गए। आपात स्थिति में पुलिस को 5 मिनट के अंदर घटनास्थल पर पहुंचने की तैयारी सुनिश्चित करने को कहा गया।

देहरादून सहित अन्य जनपदों में सड़कों पर अतिक्रमण की समस्या पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए। जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, परिवहन और एमडीडीए की संयुक्त टास्क फोर्स बनाकर निरंतर कार्रवाई करने को कहा। होटल-रिसॉर्ट्स में फायर सेफ्टी की जांच अनिवार्य की गई।

शीतकालीन यात्रा को देखते हुए जानकारी केंद्र, स्ट्रीट लाइट और अलाव की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के आदेश दिए। प्रदेश में स्वच्छता अभियान तेज करने और प्लास्टिक मुक्ति के लिए सामाजिक, राजनीतिक व धार्मिक संगठनों के साथ मिलकर मुहिम चलाने को कहा गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आपराधिक कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी विभाग मिलकर नव वर्ष को सुरक्षित और सुगम बनाएं, ताकि पर्यटक बिना किसी असुविधा के देवभूमि का आनंद ले सकें।

यह निर्देश नव वर्ष पर पर्यटकों की भारी आमद को देखते हुए जारी किए गए हैं, जिससे राज्य में ट्रैफिक जाम, दुर्घटनाओं और असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाया जा सके।

SSC GD Constable 2026: आवेदन की अंतिम तिथि कल, 10वीं पास युवा तुरंत करें अप्लाई

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नई दिल्ली :कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs), सचिवालय सुरक्षा बल (SSF) और असम राइफल्स में कॉन्स्टेबल (जनरल ड्यूटी) तथा राइफलमैन के पदों पर भर्ती के लिए जारी अधिसूचना के तहत आवेदन प्रक्रिया कल समाप्त हो रही है। योग्य उम्मीदवारों के लिए यह अंतिम अवसर है कि वे 31 दिसंबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर लें।

SSC GD Constable 2026 भर्ती के लिए कुल 25,487 रिक्तियां घोषित की गई हैं। इनमें बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF), सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF), सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF), इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP), सशस्त्र सीमा बल (SSB), असम राइफल्स और SSF सहित विभिन्न बलों में पद शामिल हैं।

योग्यता मानदंड:

  • उम्मीदवारों को किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं (मैट्रिक) पास होना अनिवार्य है।
  • आयु सीमा: 18 से 23 वर्ष (1 जनवरी 2026 के अनुसार)। आरक्षित वर्गों को नियमानुसार छूट मिलेगी।
  • महिला उम्मीदवारों, अनुसूचित जाति/जनजाति और पूर्व सैनिकों को आवेदन शुल्क में छूट है। सामान्य/ओबीसी पुरुष उम्मीदवारों के लिए शुल्क 100 रुपये है।

आवेदन प्रक्रिया 1 दिसंबर 2025 से शुरू हुई थी और अब अंतिम चरण में है। आयोग ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे अंतिम समय में सर्वर की समस्या से बचने के लिए जल्द से जल्द आवेदन पूरा कर लें। आवेदन केवल आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर ही स्वीकार किए जाएंगे।

चयन प्रक्रिया में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT), शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET), शारीरिक मापदंड परीक्षा (PST) और मेडिकल टेस्ट शामिल हैं। CBT परीक्षा फरवरी-अप्रैल 2026 में संभावित है।

मुख्य सचिव आनंद बर्धन के सख्त निर्देश: सरकारी विद्यालयों के गर्ल्स टॉयलेट्स को 8 मार्च 2026 तक पूरी तरह उपयोग योग्य बनाएं

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देहरादून: सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में हुई सचिव समिति की बैठक में शिक्षा, बाल विकास, खेल और पर्यटन क्षेत्र में कई दूरगामी फैसले लिए गए। सभी जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक में शामिल हुए।

शिक्षा के क्षेत्र में मुख्य सचिव ने सबसे बड़ा जोर लड़कियों की सुविधा और सुरक्षा पर दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में लड़कियों के शौचालयों को 8 मार्च 2026 तक पूरी तरह सुविधाजनक और स्वच्छ बनाया जाए। उन्होंने कहा कि ज्यादातर स्कूलों में शौचालय बने तो हैं, लेकिन सफाई और रखरखाव के अभाव में वे उपयोग में नहीं आ रहे। शिक्षा विभाग को पूरे राज्य में शौचालयों की सफाई और देखभाल के लिए तत्काल कार्ययोजना बनाने को कहा गया।

बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए मुख्य सचिव ने स्कूलों में 2-3 दिन के स्थानीय पर्यटन भ्रमण कार्यक्रम शुरू करने पर बल दिया। इससे छात्र-छात्राएं उत्तराखंड की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर को करीब से जान सकेंगे।

आंगनवाड़ी केंद्रों के विकास पर विशेष ध्यान देते हुए मुख्य सचिव ने सभी केंद्रों को आदर्श स्तर तक विकसित करने के निर्देश दिए। 2026-27 के वित्तीय वर्ष में सीएसआर फंड का पूरा उपयोग आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए करने को कहा गया। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से अपील की गई कि वे अपने आसपास के आंगनवाड़ी केंद्रों को गोद लें। नए केंद्र स्कूलों के पास ही बनाए जाएं, ताकि प्री-स्कूल और प्राथमिक शिक्षा के बीच का अंतर कम हो सके।

खेल के क्षेत्र में मुख्य सचिव ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि 2036 ओलंपिक में उत्तराखंड के खिलाड़ी जरूर हिस्सा लें, इसके लिए अभी से तैयारी शुरू करनी होगी। विभिन्न खेलों के लिए अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चों का चयन कर उन्हें अगले 10 साल तक प्रशिक्षण देने की योजना बनाई जाए।

प्रतियोगिताओं के जरिए 1000 से 1500 प्रतिभाशाली बच्चों को चिह्नित करने के निर्देश दिए गए। खेल विभाग को मौजूदा स्टेडियम और मैदानों का सालभर अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने और स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी जल्द शुरू करने को कहा गया। जिलाधिकारियों से अपने-अपने जिले में सबसे लोकप्रिय खेल चुनकर ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन स्पोर्ट’ लागू करने के निर्देश दिए गए।

प्रशासनिक सुधार के तहत सभी विभागों और जिला कार्यालयों में 100 प्रतिशत ई-ऑफिस व्यवस्था लागू करने के सख्त निर्देश दिए गए। आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति को वेतन प्रणाली से जोड़ने का तंत्र शीघ्र तैयार करने को कहा गया।

पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए ‘वन स्टेट वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’ योजना के तहत 5 से 7 प्रमुख पर्यटन स्थलों का चयन करने के निर्देश दिए गए। साथ ही हर जिले से अपने सबसे आकर्षक त्योहार को चिह्नित कर ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल’ लागू करने को कहा गया।

बैठक में सभी संबंधित विभागों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्य सचिव के इन निर्देशों से प्रदेश में शिक्षा, खेल और पर्यटन के क्षेत्र में नई गति आने की उम्मीद जगी है।