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अंकिता भंडारी हत्याकांड: उर्मिला सनावर ने कोर्ट में जमा कराया मोबाइल

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हरिद्वार : अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े वायरल ऑडियो प्रकरण में शुक्रवार को महत्वपूर्ण विकास हुआ। रोशनाबाद स्थित जिला न्यायालय में अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने अपना मोबाइल फोन जांच के लिए जमा करा दिया।

कोर्ट की निगरानी में निर्धारित प्रक्रिया के तहत मोबाइल को सील करके सुरक्षित रखा गया है। यह फोन वायरल ऑडियो क्लिप्स और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से जुड़ा होने का दावा किया जा रहा है, जो मामले की जांच में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उर्मिला सनावर ने कोर्ट में हाजिर होकर फोन सौंपा, जबकि पुलिस टीम ने पूरी कार्रवाई की निगरानी की।

मामले में नामजद पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर अदालत में उपस्थित नहीं हो सके। उनकी ओर से अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र दाखिल कर अगली तिथि तक समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित कर दी है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रोशनाबाद कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए, जिसमें लगातार गश्त और निगरानी शामिल थी। विवेचक इंस्पेक्टर आरके सकलानी, इंस्पेक्टर योगेश दत्त तथा सिडकुल थाना प्रभारी नितेश शर्मा सहित पुलिस टीम मौजूद रही।

आगे की जांच में दोनों पक्षों के वॉयस सैंपल अदालत में जमा कराए जाएंगे। फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव 2026: बीएमसी समेत कई शहरों में महायुति की मजबूत बढ़त, शुरुआती रुझानों में बहुमत के करीब

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मुंबई: महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं (नगर निगमों) के चुनाव 15 जनवरी को संपन्न हुए, जिनके नतीजे आज (16 जनवरी) घोषित हो रहे हैं। मतगणना सुबह 10 बजे शुरू हुई और शुरुआती रुझानों में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन (भाजपा + शिंदे गुट की शिवसेना) ने बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) समेत अधिकांश प्रमुख शहरों में स्पष्ट बढ़त बना ली है। यह चुनाव महाराष्ट्र की शहरी राजनीति के लिए निर्णायक माना जा रहा है, जहां ठाकरे बंधुओं (उद्धव और राज) की एकजुटता के बावजूद महायुति का पलड़ा भारी दिख रहा है।

बीएमसी में महायुति की मजबूत स्थिति बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के 227 वार्डों में मतगणना जारी है। शुरुआती रुझानों (दोपहर 1 बजे तक) के अनुसार, भाजपा-शिंदे शिवसेना गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा (114 सीटें) पार कर लिया है। विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक:

  • भाजपा: 88-119 वार्डों में आगे
  • शिंदे गुट की शिवसेना: 29-31 वार्डों में आगे
  • शिवसेना (UBT) + MNS: 65-70 वार्डों में आगे
  • कांग्रेस: 11-13 वार्डों में आगे

महायुति की यह बढ़त ठाकरे परिवार के 30 साल पुराने BMC पर नियंत्रण को चुनौती दे रही है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने दावा किया कि मुंबई का अगला मेयर महायुति से होगा और वह मराठी भाषी होगा। उन्होंने कहा, “उद्धव ठाकरे 25-30 साल तक सत्ता में रहे क्योंकि वे भाजपा के साथ थे। अब न भाजपा है, न आरपीआई (ए), और राज ठाकरे के साथ गठबंधन से कुछ फायदा मिल सकता है, लेकिन ज्यादातर सीटें महायुति को ही मिलेंगी।”

अन्य प्रमुख शहरों में स्थिति महाराष्ट्र के अन्य बड़े नगर निगमों में भी महायुति का दबदबा दिख रहा है:

  • पुणे: भाजपा आगे
  • नवी मुंबई: भाजपा आगे
  • मीरा-भायंदर: भाजपा आगे
  • उल्हासनगर: भाजपा आगे
  • वसई-विरार: भाजपा आगे
  • नागपुर: भाजपा आगे
  • पिंपरी-चिंचवड़: भाजपा आगे
  • नासिक: भाजपा आगे
  • छत्रपति संभाजी नगर: भाजपा आगे
  • सोलापुर: भाजपा आगे
  • धुले, जालना, अमरावती, अकोला: भाजपा आगे
  • कल्याण-डोंबिवली, ठाणे, मालेगांव: शिंदे गुट की शिवसेना आगे
  • भिवंडी, कोल्हापुर, लातूर, चंद्रपुर: कांग्रेस आगे
  • अहिल्यानगर: एनसीपी (अजित पवार गुट) आगे

कुल मिलाकर, महायुति 29 में से अधिकांश (करीब 22-25) नगर निगमों में आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस और अन्य दलों को सीमित सफलता मिली है।

AIMIM की ऐतिहासिक जीत बीएमसी में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने पहली बार सीट जीत ली है। पार्टी की उम्मीदवार मेहजबीन खान ने वॉर्ड नंबर 134 (M/East) से जीत दर्ज की। यह AIMIM के लिए मुंबई के सबसे बड़े नगर निकाय में पहली सफलता है।

हर की पैड़ी में ‘अहिंदुओं का प्रवेश निषेध’ के पोस्टर लगे, 1916 के म्युनिसिपल बायलॉज का हवाला

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हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार के विश्व प्रसिद्ध हर की पैड़ी क्षेत्र में अहिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के पोस्टर लगाए गए हैं। ये पोस्टर श्री गंगा सभा की ओर से लगाए गए हैं, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा है कि “अहिंदुओं का प्रवेश निषेध है”। पोस्टरों में 1916 के हरिद्वार म्युनिसिपल बायलॉज का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह क्षेत्र उस कानूनी प्रावधान के अंतर्गत आता है, जिसके तहत गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।

श्री गंगा सभा, जिसकी स्थापना महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी, हर की पैड़ी क्षेत्र की व्यवस्थाओं, सफाई, सुरक्षा और धार्मिक मर्यादा की देखरेख करती है। सभा के वर्तमान अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा, “1916 के म्युनिसिपल बायलॉज में स्पष्ट प्रावधान हैं कि हर की पैड़ी जैसे प्रमुख घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है।

लंबे समय से इस नियम का उल्लंघन हो रहा है, जिससे सनातन आस्था को ठेस पहुंच रही है। प्रशासन से कई बार मांग करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए अब हमने पोस्टर लगाकर कानून की जानकारी दी है।” नितिन गौतम ने आगे कहा, “हमारा उद्देश्य तीर्थ क्षेत्र की मर्यादा बनाए रखना है। कोई असामाजिक तत्व गैर-हिंदुओं की पोशाक पहनकर यहां प्रवेश न कर सके, इसलिए यह कदम जरूरी था।”

यह मांग इसलिए और तेज हुई जब बीते मंगलवार को दो युवकों ने अरबी शेखों की पोशाक पहनकर हर की पैड़ी पर टहलते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। दोनों युवक हिंदू धर्म के थे और सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि पाने के लिए यह हरकत की थी। वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने दोनों को पकड़कर माफी मंगवाई और पुलिस एक्ट में चालान किया।

इस घटना के बाद तीर्थ पुरोहितों, साधु-संतों और हिंदूवादी संगठनों ने एक बार फिर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर सख्त रोक लगाने की मांग तेज कर दी। श्री गंगा सभा के पदाधिकारियों का कहना है कि पहले भी चेकिंग अभियान चलाए गए थे, जिसमें रेहड़ी-पटरी वालों, भिखारियों तक के आधार कार्ड चेक किए गए थे।

1916 का हरिद्वार म्युनिसिपल बायलॉज क्या है? पंडित मदन मोहन मालवीय और ब्रिटिश सरकार के बीच 1916 में हुए इस समझौते के तहत हरिद्वार की धार्मिक पवित्रता और सनातन परंपराओं को बनाए रखने के लिए प्रमुख घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश और स्थायी निवास पर रोक लगाई गई थी। यह नियम आज भी हरिद्वार नगर निगम के बायलॉज में दर्ज है। श्री गंगा सभा का कहना है कि नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की है, लेकिन यदि प्रशासन कार्रवाई नहीं करता तो संगठन खुद जागरूकता फैलाने के लिए ऐसे कदम उठा रहा है।

उत्तराखंड : प्राथमिक शिक्षक काउंसलिंग, क्या कानूनी दांव-पेच में फंसेगी भर्ती, ये है वजह!

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देहरादून : उत्तराखंड शिक्षा विभाग द्वारा प्राथमिक स्तर पर सहायक अध्यापक (बेसिक) के 1670 पदों के लिए 12 जनवरी को एक साथ सभी जिलों में आयोजित काउंसलिंग प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। विभाग द्वारा पहली बार सभी जिलों में एक ही दिन काउंसलिंग कराने के प्रयोग से कई जिलों में भारी भीड़, हंगामा और अव्यवस्था की स्थिति बनी, जबकि कुछ जगहों पर कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों के चयन की शिकायतें सामने आई हैं। इससे पूरी भर्ती प्रक्रिया कानूनी दांव-पेंच में फंसने की आशंका जताई जा रही है।

शिक्षा विभाग ने पहले अलग-अलग तिथियों पर काउंसलिंग कराई जाती थी, जिससे अभ्यर्थी एक जिले की नियुक्ति छोड़कर दूसरे जिले में चले जाते थे और कई पद खाली रह जाते थे। इस समस्या से निपटने के लिए विभाग ने इस बार नए प्रयोग के तहत 12 जनवरी को सभी जिलों में एक साथ काउंसलिंग का आयोजन किया। लेकिन इससे जहां पदों के मुकाबले कई गुना अधिक अभ्यर्थी पहुंचे, वहां हंगामे की स्थिति बन गई।

कई जिलों में अच्छी मेरिट वाले अभ्यर्थी काउंसलिंग में शामिल नहीं हो पाए, जबकि कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों को मौका मिला। कुछ अभ्यर्थी डीईओ कार्यालय पहुंचे लेकिन उनकी काउंसलिंग नहीं हुई। विभाग का दावा है कि काउंसलिंग के लिए मेरिट सूची विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध थी और अभ्यर्थियों को मेरिट देखकर ही पहुंचना चाहिए था। वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि विभाग ने सभी को एक साथ बुला लिया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।

अभ्यर्थियों ने सुझाव दिया है कि विभाग को पहले केवल उच्च मेरिट वाले अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के लिए बुलाना चाहिए था। उसके बाद खाली रहने वाले पदों के लिए अगले दिन कम मेरिट वालों को बुलाया जाना चाहिए था। इससे प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित रहती।

इस मामले में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल से संपर्क करने के प्रयास सफल नहीं हुए। शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि प्रक्रिया पारदर्शी रखने के लिए यह प्रयोग किया गया, लेकिन भारी भीड़ और कुछ जिलों में अव्यवस्था के कारण समीक्षा की जा रही है।

उत्तराखंड में प्राथमिक शिक्षा में शिक्षकों की कमी लंबे समय से समस्या बनी हुई है। हाल के वर्षों में 1649-1670 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है, लेकिन नियमावली, मेरिट और काउंसलिंग से जुड़े विवाद बार-बार सामने आ रहे हैं। अभ्यर्थी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि कम मेरिट वालों का चयन साबित हुआ तो अदालत में चुनौती दी जाएगी, जिससे भर्ती प्रक्रिया लंबित हो सकती है।

LoC के पास फिर दिखे संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन, इंडियन आर्मी की गोलीबारी

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जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी संदिग्ध ड्रोनों की गतिविधियां एक बार फिर बढ़ गई हैं। भारतीय सेना ने सीमा पर नियमित निगरानी के दौरान कई पाकिस्तानी ड्रोनों को भारतीय क्षेत्र में घुसते देखा और तुरंत उन पर फायरिंग की। फायरिंग के बाद ड्रोन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की ओर वापस लौट गए।

सेना के अनुसार, बीते कुछ दिनों में पाकिस्तान की ओर से ड्रोनों की ऐसी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, जिसके चलते LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) पर तैनात सैनिकों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

हाल की प्रमुख घटनाएं:

  • पुंछ जिले के फॉरवर्ड पोस्ट के पास एक संदिग्ध ड्रोन देखा गया, जिस पर सेना ने तुरंत कार्रवाई की।
  • जम्मू के रामगढ़ सेक्टर में भी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ऐसा ही एक ड्रोन नजर आया।
  • पिछले पांच दिनों में कम से कम तीन बार पाकिस्तानी ड्रोन भारतीय सीमा में दाखिल हुए हैं।

इससे पहले:

13 जनवरी को राजौरी जिले में पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए थे, जहां सेना ने फायरिंग की और ड्रोन वापस लौट गए।

11 जनवरी को नौशेरा सेक्टर, धरमसाल सेक्टर, रियासी, सांबा और पुंछ के मंकोट सेक्टर में एक साथ पांच ड्रोन एक साथ नजर आए थे। इनमें से कई पर मशीन गनों से फायरिंग की गई, जिसके बाद वे वापस चले गए।

सुरक्षा बलों को आशंका है कि पाकिस्तान इन ड्रोनों के जरिए हथियार, नशीले पदार्थ या अन्य सामग्री की तस्करी या सीमा की रेकी कर रहा है। गणतंत्र दिवस की तैयारियों के मद्देनजर सीमा पर निगरानी और सतर्कता को और बढ़ा दिया गया है। भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि ऐसी किसी भी उकसावे वाली हरकत का सख्त जवाब दिया जाएगा।

दिल्ली-एनसीआर में कड़ाके की ठंड, घने कोहरे ने थामी रफ्तार

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राजधानी दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में शुक्रवार सुबह ठंड और कोहरे का जबरदस्त असर देखने को मिला। सुबह होते ही शहर घने कोहरे की गिरफ्त में आ गया, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम दर्ज की गई और सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम-सी गई।

मौसम विभाग के अनुसार, आज दिल्ली का न्यूनतम तापमान 4.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से काफी नीचे है। लगातार गिरते तापमान के चलते लोग शीतलहर की चपेट में हैं।

सुबह 6 बजे के आसपास पालम में 800 मीटर और सफदरजंग में 700 मीटर तक दृश्यता दर्ज की गई। हालांकि, जैसे-जैसे समय बढ़ा, हालात और बिगड़ते चले गए। सुबह 7 बजे पालम में दृश्यता घटकर 350 मीटर रह गई, जबकि 7:30 बजे घना कोहरा छाने से विजिबिलिटी महज 150 मीटर तक सिमट गई।

घने कोहरे के कारण सड़क यातायात प्रभावित रहा। वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर और धीमी गति से सफर करना पड़ा। वहीं, ठंड के बढ़ते प्रकोप से लोग सुबह-सुबह घरों से निकलने में हिचकिचाते नजर आए।

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी सुबह और रात के समय कोहरा बने रहने की संभावना जताई है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

धामी कैबिनेट की बैठक में 19 प्रस्तावों पर लगी मुहर, उपनल कर्मियों के लिए बड़ा फैसला, UCC में संशोधन

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में 19 प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में उपनल कर्मचारियों से लेकर गन्ना किसानों तक के लिए कई अहम निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री सचिव शैलेश बगौली और बंशीधर तिवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से फैसलों की जानकारी दी।

उपनल कर्मचारियों के लिए बड़ी सौगात

कैबिनेट ने उपनल कर्मचारियों को समान कार्य–समान वेतन देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह लाभ चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा। पहले चरण में 7,000 से अधिक उपनल कर्मचारियों को इसका फायदा मिलेगा। सैनिक कल्याण विभाग में कार्यरत कार्मिकों को भी वर्ष 2015 से यह लाभ दिया जाएगा। भविष्य में उपनल के माध्यम से भूतपूर्व सैनिकों के पुनर्वास कार्य ही किए जाएंगे।

गन्ना किसानों को राहत, चीनी मिलों को गारंटी

गन्ना एवं चीनी उद्योग विभाग के तहत राज्य सरकार ने चीनी मिलों को ₹270 करोड़ की शासकीय गारंटी प्रदान की है ताकि वे बैंकों से ऋण ले सकें। इसके साथ ही पेराई सत्र 2025–26 के लिए गन्ने का मूल्य भी तय कर दिया गया है — सामान्य प्रजाति ₹405 प्रति क्विंटल और अन्य प्रजाति ₹395 प्रति क्विंटल।

न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 16 विशेष न्यायालय

राज्य में एनडीपीएस, पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामलों की सुनवाई के लिए 16 विशेष न्यायालय स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए 144 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। ये न्यायालय देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और उधमसिंह नगर में बनाए जाएंगे।

शिक्षा और संस्कृत के क्षेत्र में नए कदम

दून विश्वविद्यालय में ‘हिंदू अध्ययन केंद्र’ के तहत 6 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई। वहीं, उत्तराखंड संस्कृत अकादमी का नाम अब ‘उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम’ होगा। निर्वाचन विभाग में सेवा नियमावली को भी स्वीकृति दी गई।

विज्ञान, ऊर्जा और बागवानी के लिए नए पद और लाभ

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत अल्मोड़ा और चंपावत के साइंस सेंटरों में 6–6 पद स्वीकृत किए गए।

ऊर्जा विभाग की 2024–25 की वार्षिक रिपोर्ट को विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।

बागवानी मिशन के तहत ‘एंटी हेल नेट’ पर केंद्र की 50% सहायता के साथ राज्य सरकार अब 25% अतिरिक्त अनुदान देगी।

खेल और युवा कल्याण में पुरस्कार राशि बढ़ी

राज्य में आयोजित होने वाले खेल महाकुंभ में पुरस्कार राशि बढ़ाने का निर्णय हुआ।

विधायक स्तर पर ₹1 लाख और ट्रॉफी

सांसद स्तर पर ₹2 लाख और ट्रॉफी

राज्य स्तर पर ₹5 लाख और ट्रॉफी प्रदान की जाएगी।

UCC, गृह विभाग और पर्यटन से जुड़े अहम संशोधन

कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (UCC) में संशोधन को स्वीकृति दी। अब विवाह पंजीकरण के लिए अवधि छह माह से बढ़ाकर एक वर्ष कर दी गई है। साथ ही, रजिस्ट्रार जनरल अब अपर सचिव स्तर के अधिकारी होंगे और समय पर कार्य न होने पर पेनाल्टी का प्रावधान रहेगा।

पर्यटन विभाग की नई नीति के तहत होम स्टे योजना का लाभ केवल स्थानीय निवासियों को मिलेगा। बाहरी राज्यों के लोग अब केवल ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ सुविधा ही दे सकेंगे।

केदारनाथ में पायलट प्रोजेक्ट, वन निगम की रिपोर्ट सदन में

कैबिनेट ने केदारनाथ धाम में एक पायलट प्रोजेक्ट की मंजूरी दी है, जिसमें गोबर और चीड़ की पत्तियों से बायोमास पैलेट तैयार किए जाएंगे।

साथ ही, वन निगम की रिपोर्ट और खनन विभाग से जुड़े संशोधित आदेशों को भी सदन में रखने की मंजूरी दी गई है।

धामी सरकार की यह कैबिनेट बैठक कर्मचारियों के हितों, न्याय व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण, कृषि, शिक्षा, पर्यटन और खेल विकास की दिशा में कई दूरगामी प्रभाव छोड़ने वाली साबित हो सकती है।

उच्च शिक्षा में बड़ी राहत: 268 असिस्टेंट प्रोफेसरों का स्थायीकरण मंजूरी

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देहरादून : उत्तराखंड सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के 268 असिस्टेंट प्रोफेसरों के स्थायीकरण को मंजूरी दे दी है। विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभाग द्वारा प्रस्तुत स्थायीकरण प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया। ये सभी असिस्टेंट प्रोफेसर विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में वर्ष 2020 से 2022 के बीच नियुक्त हुए थे और उन्होंने दो वर्ष की परवीक्षा अवधि संतोषजनक रूप से पूरी कर ली है।

विभिन्न विषयों में तैनात इन प्राध्यापकों में राजनीति विज्ञान के 71, हिंदी के 71, संस्कृत के 35, अर्थशास्त्र के 35, शिक्षा शास्त्र के 26, गृह विज्ञान के 13, समाजशास्त्र के 5, इतिहास के 4, भूगोल और भौतिक विज्ञान के 2-2 तथा रसायन विज्ञान, जंतु विज्ञान और अंग्रेजी के 1-1 प्राध्यापक शामिल हैं।

उच्चतर शिक्षा (समूह ‘क’) सेवा नियमावली-2003 के तहत इन शिक्षकों का स्थायीकरण किया गया है। स्थायीकरण के लिए उनके कार्य, आचरण, सत्यनिष्ठा और प्रदर्शन को संतोषजनक पाया गया।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा, “268 असिस्टेंट प्रोफेसरों के स्थायीकरण से न केवल शिक्षकों को सेवा सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में शैक्षिक निरंतरता और अकादमिक गुणवत्ता भी मजबूत होगी। यह निर्णय उच्च शिक्षा के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ कर्मचारियों के हितों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।”

स्थायीकरण से लाभान्वित शिक्षकों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया है। सरकार का मानना है कि शिक्षकों को सुरक्षित और सम्मानजनक सेवा वातावरण उपलब्ध कराना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मजबूत नींव है।

उत्तराखंड : किसान आत्महत्या मामला, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

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नैनीताल। उत्तराखंड नैनीताल हाईकोर्ट ने हल्द्वानी में किसान सुखवंत सिंह के आत्महत्या मामले में आरोपित कुलविंदर सिंह सहित अन्य की गिरफ्तारी पर रोक से जुड़े प्रकरण में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित की है।

मामले में कुलविंदर सिंह सहित छह आरोपितों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या से उनका कोई संबंध नहीं है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच केवल प्रॉपर्टी डीलिंग का व्यवसायिक संबंध रहा है और उन्होंने कभी भी सुखवंत सिंह को आत्महत्या के लिए प्रेरित नहीं किया। उन्होंने स्वयं को झूठा फंसाए जाने का आरोप लगाया है।

गौरतलब है कि किसान सुखवंत सिंह ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो बनाया था, जिसमें उसने पुलिस पर विपक्षी पक्षों से मिलीभगत करने के गंभीर आरोप लगाए थे। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने सुखविंदर सहित कुल 26 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

इस मामले की सुनवाई शीतकालीन अवकाश के दौरान कार्यरत न्यायाधीश न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकल पीठ में हुई, जिसमें अदालत ने राज्य सरकार से मामले की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।

भैरव बटालियन, ब्रह्मोस मिसाइल, रोबोट डॉग्स…दुनिया ने देखी भारत की ताकत

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जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में पहली बार 78वें सेना दिवस के अवसर पर आर्मी एरिया के बाहर भव्य परेड का आयोजन किया गया। जगतपुरा स्थित महल रोड पर आयोजित इस ऐतिहासिक परेड में सेना की विभिन्न टुकड़ियों ने शानदार मार्च पास्ट किया। परेड को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग तड़के सुबह से ही आयोजन स्थल पर पहुंच गए।

सेना दिवस परेड सुबह 10 बजे शुरू होकर 11:25 बजे तक चली। सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनजर पंजीकरण कराने वाले दर्शकों की एंट्री सुबह 8:45 बजे बंद कर दी गई थी। करीब तीन किलोमीटर लंबी इस परेड में महल रोड, जीवन रेखा हॉस्पिटल चौराहा और बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहा शामिल थे।

इस भव्य आयोजन के करीब डेढ़ लाख से अधिक लोग साक्षी बने। भारी भीड़ को देखते हुए जयपुर प्रशासन की ओर से शहर में 18 स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। परेड स्थल और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में पुलिस और सेना के जवान तैनात रहे, वहीं डॉग स्क्वॉड और मेटल डिटेक्टर से पूरे मार्ग की गहन जांच की गई।

परेड की शुरुआत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बलिदान हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इस दौरान गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित अधिकारियों ने सलामी दी। परेड की अगुवाई अशोक चक्र, परमवीर चक्र, कीर्ति चक्र और महावीर चक्र से सम्मानित वीर अधिकारियों ने की।

जयपुर की सेना दिवस परेड में कुल सात रेजिमेंट की टुकड़ियां शामिल रहीं। इनमें 61वीं कैवेलरी रेजिमेंट भी शामिल थी, जो दुनिया की एकमात्र सक्रिय घुड़सवार रेजिमेंट मानी जाती है। इसके साथ ही वर्ष 1954 में स्थापित नेपाल आर्मी बैंड ने भी परेड में हिस्सा लेकर आयोजन को विशेष बना दिया।

इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान मौजूद रहे। खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, मिजोरम के राज्यपाल जनरल वी.के. सिंह सहित सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी परेड में शिरकत की।

परेड का एक विशेष आकर्षण नवनिर्मित भैरव बटालियन रही, जिसे पैरा स्पेशल फोर्स और पैदल बटालियन के बीच प्रदर्शित किया गया। यह भैरव बटालियन की पहली सार्वजनिक परेड थी, जिसे देखकर दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला।