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पांवटा साहिब-बल्लूपुर फोरलेन हाईवे: देहरादून का सफर अब सिर्फ 35 मिनट में, जाम से मिलेगी बड़ी राहत

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देहरादून: देहरादून और पांवटा साहिब के बीच कनेक्टिविटी में क्रांति लाने वाली महत्वपूर्ण परियोजना पांवटा साहिब-बल्लूपुर चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-07) अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। करीब 44.8 किलोमीटर लंबी इस फोरलेन परियोजना का निर्माण तेजी से पूरा हो रहा है, जिससे देहरादून शहर में यातायात जाम से राहत मिलेगी और यात्रा समय में भारी कमी आएगी।

एनएचएआई (National Highways Authority of India) द्वारा Hybrid Annuity Mode (HAM) के तहत विकसित यह परियोजना कुल ₹1646 करोड़ की लागत से बन रही है। इसमें दो पैकेज शामिल हैं:
पैकेज-1: पांवटा साहिब से मेदनीपुर (बदरीपुर) तक लगभग 18.7 किमी, जिसमें यमुना नदी पर 1175 मीटर लंबा चार लेन पुल प्रमुख है (लागत: ₹553 करोड़)।
पैकेज-2: मेदनीपुर से बल्लूपुर (देहरादून) तक लगभग 26.1 किमी, जिसमें अंडरपास, सर्विस रोड और शहरों के बाईपास शामिल हैं (लागत: ₹1093
यह ग्रीनफील्ड और अपग्रेडेशन का मिश्रित प्रोजेक्ट है, जो पांवटा साहिब, हरबर्टपुर, सहसपुर, सेलाकुई और सुधोवाला जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को बाईपास करता है। परियोजना में आधुनिक चार लेन पुल, उन्नत सड़क सुरक्षा उपकरण, स्मार्ट निगरानी व्यवस्था और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से जुड़ाव (झाझरा चौक के पास) शामिल है।

मुख्य लाभ:
पांवटा साहिब से देहरादून का सफर अब महज 35 मिनट में पूरा होगा (पहले 1.5-2 घंटे लगते थे)।
देहरादून शहर में ट्रांजिट ट्रैफिक कम होगा, जिससे स्थानीय जाम और प्रदूषण में कमी आएगी।
उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश के बीच बेहतर संपर्क, पर्यटन, उद्योग, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा।
चारधाम यात्रा (विशेषकर यमुनोत्री) के लिए सुगम पहुंच।

दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से मजबूत
परियोजना के अंतिम चरण में साइड वॉल, एप्रोच रोड और फिनिशिंग कार्य चल रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह उत्तराखंड के क्षेत्रीय विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी और हिमाचल के साथ सीधी, तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।

उत्तराखंड के चारधामों में मोबाइल फोन पर सख्त प्रतिबंध: मंदिर परिसर में अब नहीं ले जा सकेंगे फोन

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ऋषिकेश/देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा की पवित्रता और मर्यादा बनाए रखने के लिए बड़ा फैसला लिया है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। यह नियम आगामी चारधाम यात्रा सीजन से लागू होगा, जिससे श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन और धार्मिक भावनाओं की रक्षा में मदद मिलेगी।

गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने शनिवार को चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप, ऋषिकेश में आयोजित समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पिछले सीजन में श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर परिसर में वीडियो रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफी और रील्स बनाने से दर्शन व्यवस्था प्रभावित हुई थी और धार्मिक स्थलों की पवित्रता पर असर पड़ा था। इसलिए, इस वर्ष से सभी चार धामों के मंदिर परिसर में मोबाइल फोन और कैमरे ले जाना पूरी तरह वर्जित रहेगा।

बदरीनाथ में सिंहद्वार से आगे प्रतिबंध

बदरीनाथ धाम में सिंहद्वार गेट से आगे मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी। अन्य धामों में भी मंदिर के मुख्य परिसर में फोन जमा करने की व्यवस्था की जाएगी। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को क्लोक रूम सुविधा स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां श्रद्धालु अपने मोबाइल और कैमरे सुरक्षित जमा कर सकेंगे और दर्शन के बाद वापस ले सकेंगे।

आयुक्त पांडेय ने बैठक में कहा, “चारधाम यात्रा की पवित्रता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। पिछले साल 50 लाख से अधिक श्रद्धालु आए थे। इस बार यात्रा को और सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।” उन्होंने जोर दिया कि मंदिर के बाहर निर्धारित स्थानों पर फोटोग्राफी की अनुमति रहेगी, लेकिन परिसर के अंदर नहीं।

चारधाम यात्रा की तैयारियां तेज

बैठक में गढ़वाल आईजी राजीव स्वरूप भी मौजूद थे। आयुक्त ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों को फरवरी तक चारधाम प्रबंधन के लिए धनराशि अवमुक्त करने, अत्यावश्यक कार्यों की सूची तीन दिन में भेजने और एक सप्ताह में टेंडर प्रक्रिया पूरी कर फास्ट ट्रैक मोड में कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। यात्रा मार्ग पर जल आपूर्ति, चिकित्सा, परिवहन, भोजन, स्वच्छता, बिजली, दूरसंचार, हेलीकॉप्टर सेवा और आपदा नियंत्रण कक्ष जैसी 24 घंटे सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

यह फैसला रील्स, ब्लॉग और सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के बढ़ते चलन से उपजे विवादों के मद्देनजर लिया गया है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और यात्रा को शांतिपूर्ण व आध्यात्मिक बनाए रखें।

वन अनुसंधान संस्थान (FRI), देहरादून में पर्यटकों के प्रवेश पर अस्थायी रोक

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देहरादून: प्रसिद्ध वन अनुसंधान संस्थान (FRI) के संग्रहालय, मुख्य भवन और परिसर को देखने आने वाले पर्यटकों के लिए फिलहाल प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रतिदिन 500 से 700 तक पर्यटक यहां पहुंचते हैं, जबकि शनिवार और रविवार को यह संख्या और अधिक बढ़ जाती है। लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए संस्थान ने तत्काल प्रभाव से पर्यटकों (सुबह-शाम भ्रमण करने वालों को छोड़कर) के प्रवेश पर रोक लगा दी है। यह रोक अगले आदेश तक लागू रहेगी।

संस्थान के कुलसचिव विकास राणा द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत सभी पर्यटकों का प्रवेश अस्थायी रूप से बंद रहेगा। केवल पूर्व अनुमति प्राप्त शैक्षणिक भ्रमण समूहों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

हालांकि आदेश में सुरक्षा के किसी विशिष्ट कारण का विस्तार से उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह कदम सुरक्षा व्यवस्था में किए जा रहे कुछ परिवर्तनों से जुड़ा हो सकता है। कुछ चर्चाओं में इसे हाल ही में सुरक्षा कर्मचारियों की संख्या में बदलाव से भी जोड़ा जा रहा है।

कुलसचिव विकास राणा ने इस संबंध में कहा, “सुरक्षा व्यवस्था में कुछ परिवर्तन किए जा रहे हैं, इसी के चलते यह अस्थायी कदम उठाया गया है। पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया है।”

वन अनुसंधान संस्थान देहरादून उत्तराखंड का प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां छह संग्रहालयों के अलावा विशाल हरियाली और ऐतिहासिक भवन पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यह रोक लगने से पर्यटकों में निराशा है, लेकिन संस्थान ने आश्वासन दिया है कि स्थिति सामान्य होने पर प्रवेश शीघ्र बहाल कर दिया जाएगा।

भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव का असर U-19 विश्व कप पर: टॉस में ‘नो हैंडशेक’ ड्रामा

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बुलावायो (जिम्बाब्वे): ICC अंडर-19 विश्व कप 2026 में भारत और बांग्लादेश के बीच ग्रुप ए मैच के दौरान राजनीतिक तनाव साफ नजर आया, जब दोनों टीमों के कप्तानों ने टॉस के समय पारंपरिक हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। क्वींस स्पोर्ट्स क्लब में खेले जा रहे इस मैच में बांग्लादेश ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी, लेकिन भारतीय कप्तान आयुष म्हात्रे और बांग्लादेश के उपकप्तान जवाद अबरार (मुख्य कप्तान मोहम्मद अजीजुल हकीम बीमारी के कारण अनुपस्थित थे) ने एक-दूसरे से हाथ नहीं मिलाया और नजरें भी नहीं मिलाईं।

यह घटना मैदान पर स्पोर्ट्समैनशिप की बजाय दोनों देशों के बीच बढ़ते विवाद का प्रतीक बन गई। दोनों टीमों ने राष्ट्रीय गान के दौरान भी दूरी बनाए रखी और कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई। यह ‘नो हैंडशेक’ परंपरा हाल ही में सीनियर स्तर पर भी देखी गई है, जहां भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने एशिया कप में पाकिस्तान के कप्तान से हाथ मिलाने से परहेज किया था। अब यह व्यवहार बांग्लादेश के साथ भी अपनाया जा रहा है।

विवाद की जड़ें और पृष्ठभूमि

तनाव की शुरुआत दिसंबर 2025 से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों और हिंसा की घटनाओं से हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच कम से कम 15 हिंदू व्यक्तियों की हत्या हुई, जिनमें लिंचिंग और संपत्ति लूट जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन घटनाओं का भारत में जोरदार विरोध हुआ, जिसके बाद आईपीएल 2026 के लिए कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) द्वारा बांग्लादेशी गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदने पर विवाद खड़ा हो गया।

सोशल मीडिया और राजनीतिक दबाव के बाद बीसीसीआई ने KKR को मुस्तफिजुर को रिलीज करने का निर्देश दिया, जिसे फ्रेंचाइजी ने मान लिया। इसके जवाब में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने आईपीएल के प्रसारण पर रोक लगा दी और आईसीसी से अनुरोध किया कि टी20 विश्व कप 2026 (भारत और श्रीलंका सह-मेजबान) के अपने मैच भारत में न खेलकर श्रीलंका में शिफ्ट किए जाएं, सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए।

आईसीसी ने BCB की मांग को खारिज किया है और कहा है कि कोई विशेष खतरा नहीं है, लेकिन बातचीत जारी है। BCB ने स्पष्ट किया है कि वे भारत में अपनी टीम नहीं भेजना चाहते, जबकि ICC ने BCB से अपनी स्थिति पर पुनर्विचार करने को कहा है।

उत्तराखंड को स्टार्टअप इंडिया रैंकिंग में ‘लीडर’ का दर्जा मिला

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नई दिल्ली: भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा जारी States’ Startup Ecosystem Ranking के 5वें संस्करण में उत्तराखंड को मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने के लिए ‘लीडर’ श्रेणी में स्थान दिया गया है। यह रैंकिंग देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने वाले प्रयासों का मूल्यांकन करती है।

राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के अवसर पर 16 जनवरी 2026 को दिल्ली में आयोजित समारोह में उत्तराखंड सरकार के उद्योग विभाग को इस उपलब्धि के लिए Certificate of Appreciation प्रदान किया गया। इस संस्करण में कुल 34 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने भाग लिया, जिन्हें पांच श्रेणियों में विभाजित किया गया: बेस्ट परफॉर्मर्स, टॉप परफॉर्मर्स, लीडर्स, एस्पायरिंग लीडर्स और इमर्जिंग स्टार्टअप इकोसिस्टम्स।

उत्तराखंड के अलावा आंध्र प्रदेश, हरियाणा, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना, मणिपुर, मेघालय और नागालैंड को भी ‘लीडर’ श्रेणी में शामिल किया गया है। वहीं, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और गोवा को ‘बेस्ट परफॉर्मर्स’ का दर्जा मिला है।

यह रैंकिंग छह प्रमुख सुधार क्षेत्रों और 19 एक्शन पॉइंट्स के आधार पर तैयार की गई है, जिसमें नीति एवं संस्थागत सहयोग, फिजिकल एवं डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, फंडिंग तक पहुंच, मार्केट लिंकेज, क्षमता निर्माण और इनोवेशन-आधारित विकास शामिल हैं। उत्तराखंड ने इन क्षेत्रों में प्रभावी नीतियां लागू कर नवाचार, उद्यमिता और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताते हुए कहा, “यह सम्मान उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है। हमारी सरकार ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल नीतियां, सरल प्रक्रियाएं और मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया है। राज्य के युवाओं में नवाचार की अद्भुत क्षमता है और सरकार हर स्तर पर उन्हें सहयोग प्रदान कर रही है। यह उपलब्धि प्रदेश के सभी उद्यमियों, स्टार्टअप्स और अधिकारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।”

उत्तराखंड : पहाड़ों पर 23 जनवरी तक बारिश-बर्फबारी की संभाना, मैदानी इलाकों में ऐसा रहेगा मौसम

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देहरादून: उत्तराखंड में सर्दियों की ठंड के बीच मौसम विभाग ने उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार, 18 से 20 जनवरी तक उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की बारिश/बर्फबारी (3400 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई पर) हो सकती है। राज्य के बाकी जिलों में मौसम शुष्क रहेगा।

21 से 23 जनवरी तक यह संभावना बढ़कर उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों तक फैल सकती है, जहां 3200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी के आसार हैं। इन जिलों के अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में शुष्क मौसम बने रहने की उम्मीद है।

यह पूर्वानुमान ऐसे समय आया है जब उत्तराखंड में दिसंबर-जनवरी में सामान्य से काफी कम वर्षा/बर्फबारी दर्ज की गई है, जिससे कृषि, सेब की खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हल्की बर्फबारी से पर्यटन स्थलों जैसे बद्रीनाथ, केदारनाथ, औली, चोपता और मुनस्यारी में सफेद चादर बिछ सकती है, जो सैलानियों के लिए आकर्षण बढ़ाएगी।

मौसम विभाग ने लोगों से सलाह दी है कि उच्च ऊंचाई वाली सड़कों पर यात्रा करते समय सतर्क रहें, क्योंकि बर्फबारी से फिसलन और यातायात प्रभावित हो सकता है। मैदानी इलाकों में सुबह-शाम घना कोहरा और शीतलहर का प्रभाव जारी रह सकता है, जिससे न्यूनतम तापमान 0-5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।

पर्वतीय क्षेत्रों में पहले से ही कड़ाके की ठंड पड़ रही है, जहां कई जगहों पर तापमान शून्य से नीचे जा रहा है। इस हल्की बर्फबारी से किसानों और बागवानों को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन भारी बर्फबारी की उम्मीद कम है। मौसम विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और आवश्यक अलर्ट जारी करेगा।

मुंबई BMC चुनाव 2026 : जनता को नहीं भाया 20 बाद ठाकरे बंधुओं का गठबंधन

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मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव परिणामों ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। 20 साल बाद एकजुट हुए चचेरे भाई उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का गठबंधन महायुति (बीजेपी-एकनाथ शिंदे शिवसेना) के सामने फीका पड़ गया। महायुति ने कुल 227 वार्डों में से 118 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि ठाकरे गुट सिमटकर 71 सीटों पर रह गया।

यह चुनाव देश की सबसे अमीर नगर निगम BMC पर नियंत्रण के लिए लड़ा गया था। बाल ठाकरे की विरासत को बचाने और मराठी वोटों को एकजुट करने के उद्देश्य से उद्धव ठाकरे (शिवसेना यूबीटी) और राज ठाकरे (एमएनएस) ने हाथ मिलाया था, लेकिन यह रणनीति कामयाब नहीं हुई। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें मिलीं, जबकि राज ठाकरे की एमएनएस मात्र 6 सीटों पर सिमट गई। शरद पवार की एनसीपी (एसपी) का खाता भी खुल नहीं सका या बेहद कमजोर रहा।

महायुति में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी, जिसने 89 सीटें जीतीं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। यह जीत ठाकरे परिवार के 25-30 साल पुराने BMC पर वर्चस्व को समाप्त करती है। कांग्रेस ने अकेले लड़कर कुछ सीटें (लगभग 11-23) जीतीं, लेकिन कुल मिलाकर विपक्षी प्रदर्शन कमजोर रहा।

ठाकरे गठबंधन को झटका क्यों लगा?

  • गैर-मराठी वार्डों में भारी नुकसान: राज ठाकरे के अतीत में गैर-महाराष्ट्रियों के प्रति कड़े रुख और हिंसक प्रचार (जैसे मराठी न बोलने वालों पर हमले) के कारण गैर-मराठी आबादी वाले इलाकों में वोटरों ने मुंह मोड़ लिया।
  • वोट बैंक का बिखराव: मराठी वोट एकजुट होने की बजाय बंट गया। कुछ शिंदे गुट की ओर चले गए, जबकि मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक वोटरों ने ठाकरे-राज गठबंधन को नकार दिया।
  • विकास vs अस्मिता: महायुति ने विकास और अच्छे शासन पर फोकस किया, जबकि ठाकरे बंधुओं का ‘मराठी मानूस’ और अस्मिता का नैरेटिव पुराना पड़ गया।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस जीत को ‘इतिहास रचने’ वाला बताया और कहा कि महायुति ने 25 में से 29 नगर निगमों में बहुमत हासिल किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महाराष्ट्र के लोगों का आभार जताया। एकनाथ शिंदे ने कहा कि मुंबईकरों ने 25 साल के पुराने शासन के खिलाफ ‘विकास ब्रांड’ चुना।

उत्तराखंड : भीषण सड़क हादसा, खाई में गिरी कार, एक व्यक्ति की मौत

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रुद्रप्रयाग : उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। रैंतोली पेट्रोल पंप और झिरमौली के बीच सड़क से एक वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य राहत दलों ने रात भर कठिन रेस्क्यू अभियान चलाया।

प्रभारी निरीक्षक कोतवाली रुद्रप्रयाग सुरेश चन्द्र बलूनी ने बताया कि रात्रि करीब 12 बजे पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि रैंतोली पेट्रोल पंप के निकट एक वाहन सड़क से नीचे खाई में गिर गया है। सूचना मिलते ही पुलिस बल ने एसडीआरएफ और अन्य टीमों के सहयोग से तत्काल रेस्क्यू कार्य शुरू कर दिया।

रात भर चले इस चुनौतीपूर्ण अभियान में खाई में गिरे वाहन से एक व्यक्ति को अचेत अवस्था में बाहर निकाला गया। उसे तुरंत 108 एम्बुलेंस की मदद से जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

हादसे का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन पुलिस जांच कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वाहन चालक का नियंत्रण खो जाना या सड़क की दुर्गम स्थिति इसका कारण हो सकती है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से पहाड़ी इलाकों में सतर्कता बरतने और रात के समय सावधानी से वाहन चलाने की अपील की है।

आयकर विभाग की बड़ी छापेमारी, पैसे गिनते-गिनते थक गए अधिकारी

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आयकर विभाग ने देशभर में घी और दुग्ध उत्पादों से जुड़ी कई प्रमुख कंपनियों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई में उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित भोले बाबा डेयरी ग्रुप (धौलपुर फ्रेश ब्रांड) के एक ठिकाने से ही 20 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सोने-चांदी और हीरे के आभूषण जब्त किए गए हैं।

दो दिनों से जारी इस ऑपरेशन में आयकर टीमों को भोले बाबा मिल्क फूड्स धौलपुर ग्रुप के सूर्य नगर स्थित आवासीय परिसर से भारी मात्रा में आभूषण मिले हैं। अधिकारियों को नोट गिनने-गिनने में थकान हो गई, जबकि अन्य ठिकानों पर भी आभूषणों का मूल्यांकन और दस्तावेजों की जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार, विभिन्न स्थानों से करोड़ों रुपये की नकदी भी बरामद हुई है।

यह छापेमारी कानपुर जोन के प्रधान निदेशक (अन्वेषण) पीयूष कोठारी के निर्देश पर उप निदेशक हार्दिक अग्रवाल के नेतृत्व में चल रही है। 150 से अधिक कर्मचारियों वाली टीमें आगरा, कानपुर, मथुरा, अलीगढ़, गौतमबुद्ध नगर, दिल्ली, भरतपुर, धौलपुर, बीकानेर और जोधपुर समेत कुल 35 ठिकानों पर सक्रिय हैं।

कार्रवाई में शामिल प्रमुख फर्में:

भोले बाबा डेयरी ग्रुप (आगरा/धौलपुर)

दाऊजी मिल्क प्रोडक्ट्स (कमला नगर, आगरा)

पोद्दार मिल्क प्रोडक्ट्स (सिरसागंज)

आशीष अग्रवाल ग्रुप (बीकानेर)

मलानी ग्रुप (जोधपुर)

जांच में मिलावटी घी बनाने के साक्ष्य भी सामने आए हैं। दाऊजी और पोद्दार मिल्क प्रोडक्ट्स से आठ जिलों में सप्लाई से जुड़े दस्तावेज मिले हैं, जिनमें ई-वे बिल, टोल प्लाजा रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज का मिलान किया जा रहा है। आयकर टीम ने मौखिक रूप से खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचित किया है, लेकिन लिखित रिपोर्ट का इंतजार है।

इसके अलावा, बेनामी संपत्तियों, विदेशी निवेश और अन्य अनियमितताओं के प्रमाण भी प्राप्त हुए हैं। आगरा के कारोबारी कृष्ण मुरारी अग्रवाल, गोविंद अग्रवाल, तरुण अग्रवाल, हरिशंकर अग्रवाल, जितेंद्र अग्रवाल और वीरेंद्र अग्रवाल के आवासीय व व्यावसायिक ठिकानों पर तलाशी ली गई।

उत्तराखंड: विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई, जिला पूर्ति अधिकारी सहित दो गिरफ्तार

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हरिद्वार: उत्तराखंड विजिलेंस विभाग ने भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करते हुए हरिद्वार के जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) श्याम आर्य और उनके सहायक गौरव शर्मा को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई जिला पूर्ति कार्यालय परिसर में ही अंजाम दी गई, जिससे पूरे विभाग में हड़कंप मच गया।

मिली जानकारी के अनुसार, लक्सर क्षेत्र के एक राशन डीलर ने विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई थी कि जिला पूर्ति अधिकारी श्याम आर्य उनके कार्यों के बदले मोटी रकम की मांग कर रहे थे। शिकायत की पुष्टि होने पर देहरादून से विजिलेंस की विशेष टीम ने सटीक योजना बनाकर जाल बिछाया। जैसे ही राशन डीलर ने निर्धारित स्थान पर 50,000 रुपये की रिश्वत की राशि सौंपी, टीम ने दोनों आरोपियों को मौके पर ही दबोच लिया। रिश्वत की पूरी रकम भी बरामद कर ली गई।

यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ‘जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन’ नीति के तहत की गई है, जिसके तहत प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार सख्त और निर्णायक एक्शन लिया जा रहा है। विजिलेंस विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से चल रही है।

विजिलेंस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी भ्रष्टाचार का मामला सामने आए, तो बिना किसी संकोच के शिकायत दर्ज कराएं। विभाग उनकी पहचान गोपनीय रखते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।