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मनोज तिवारी समेत 9 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, लगा ये आरोप…

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झारखंड पुलिस भाजपा के नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन नेताओं में सांसद मनोज तिवारी, सांसद निशिकांत दुबे समेत 9 लोग शामिल हैं। मिली जानकारी के अनुसार इन नेताओं ने जबरदस्ती देवघर से टेक-ऑफ के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम में घुसकर मंजूरी ली। इस मामले में झारखंड पुलिस ने एक्शन लेते हुए सभी के खिलाफ मामला दर्ज कर दिया। बताते चले कि देवघर हवाई अड्डे पर रात में संचालन के लिए अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। सूरज डूबने से आधे घंटे पहले ही हवाई अड्डे पर सभी सेवाएं बंद कर दी जाती हैं।

लेकिन पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार बीजेपी नेताओं ने इसके लिए जबरन इजाजत ली। देवघर हवाई अड्डे के सुरक्षा प्रभारी डीएसपी सुमन आनन ने इसकी शिकायत की है। उनके अनुसार मनोज तिवारी के साथ 9 लोग और मौजूद थे। झारखंड पुलिस ने मनोज तिवारी, निशिकांत दुबे, उनके दो बेटों और देवघर हवाई अड्डे के डायरेक्टर सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ कथित तौर मुकदमा दर्ज किया गया है। ये मामला 31 अगस्त शाम 05: 25 बजे का है।

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एयरपोर्ट के सुरक्षा प्रभारी ने शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने कहा कि “31 अगस्त को शाम 05: 25 बजे सांसद और अन्य यात्री देवघर एयरपोर्ट पहुंचे। वे सब प्लेन के अंदर चले गए और प्लेन का गेट बंद कर दिया गया। कुछ देर बाद प्लेन का गेट खोलकर पायलट नीचे उतरा और एटीसी की तरफ जाने लगा। एटीसी कंट्रोल रूम में पायलट ने टेक ऑफ की इजाजत देने के लिए दबाव डाला। कुछ देर बाद दोनों सांसद और अन्य यात्री भी एटीसी कंट्रोल रूम में पहुंच गए। उन्होंने दबाव डाला और एटीसी का क्लियरेंस मिल गया।”

बड़ी खबर: तो क्या खतरे में पड़ जाएगी शिंदे सरकार? इन चर्चाओं ने बढ़ा दी धड़कनें!

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महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार को गिराकर एकनाथ शिंदे गुट ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली थी। लेकिन, सरकार बनने के बाद से लगातार शिंदे और भाजपा सरकार पर खतरा बना हुआ है। विधायकों की अयोग्यता का मामला हो फिर कुछ निर्दलीय और शिवसेना विधायकों की वापसी की चर्चा से शिंदे-भाजपा सरकार की चिंताएं दूर नहीं हुई हैं।

शिवसेना से बगावत करके महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनने वाले एकनाथ शिंदे के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है। अभी सरकार बने करीब तीन महीने ही बीते हैं, लेकिन उन्हें अपने साथ आए विधायकों की नाराजगी से गुजरना पड़ रहा है। इसी के चलते वह कैबिनेट का दूसरा विस्तार भी नहीं कर पा रहे हैं।

शिवसेना से बागी ज्यादातर विधायक एकनाथ शिंदे सरकार में खुद को मंत्री देखना चाहते हैं और यही मुश्किल की वजह है। फिलहाल असली शिवसेना और नकली शिवसेना का विवाद भी चल रहा है, जो सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के समक्ष लंबित है। ऐसे में चर्चा है कि कुछ ऐसे विधायक भी हैं, जो मंत्री न बन पाने की स्थिति में उद्धव ठाकरे गुट के साथ जा सकते हैं। ऐसा होता है तो एकनाथ शिंदे के लिए यह बड़ी मुश्किल होगी।

यदि कुछ विधायक जाते हैं तो फिर एकनाथ शिंदे गुट के सामने दलबदल कानून का खतरा पैदा हो जाएगा। एकनाथ शिंदे ने जब शिवसेना से बगावत करके सरकार बनाई थी तो उन्हें 40 विधायकों का समर्थन मिला था। शिवसेना के कुल 54 विधायक हैं। ऐसे में उन्हें कम से कम 37 विधायक विवाद हल होने तक अपने साथ रहना जरूरी है ताकि दलबदल कानून से बच सकें। इसलिए यदि बागी विधायकों में से 4 भी अलग हुए तो संख्या 36 ही रह जाएगी और दलबदल कानून का खतरा पैदा हो जाएगा।

शिंदे ग्रुप के एक सदस्य ने कहा कि फिलहाल यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसके अलावा चुनाव आयोग के पास भी दोनों पक्षों की याचिका लंबित है। लेकिन इस वक्त यदि कैबिनेट विस्तार होता है और यदि मंत्री पद न पाने वाले नेता उद्धव खेमे में चले जाते हैं तो फिर असली शिवसेना पर दावे का आधार ही कमजोर हो जाएगा।

पहले कैबिनेट विस्तार में एकनाथ शिंदे गुट के 40 में से 9 विधायक ही मंत्री बने हैं। ऐसे में बाकी लोगों के बीच असंतोष है कि उन्हें शिवसेना से बगावत करने पर आखिर क्या मिला है। इसके अलावा एक बड़ा गुट यह भी सोच रहा है कि शिवसेना से बगावत पर एक तरफ उनकी चुनावी संभावनाएं कमजोर हो सकती हैं तो दूसरी तरफ उन्हें मंत्री पद जैसे फायदा भी नहीं मिल सका है।

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे अब ज्यादा से ज्यादा 23 और लोगों को मंत्री बना सकते हैं, जबकि उम्मीद सभी 31 विधायक कर रहे हैं। इसके अलावा भाजपा को भी कोटे में रखना है। ऐसे में एकनाथ शिंदे के लिए यह चिंता की बात है कि कैसे विधायकों को साधा जाए। दरअसल दूसरे कैबिनेट विस्तार पर भाजपा की भी नजर है और उसके विधायकों की संख्या अधिक है। ऐसे में वह ज्यादा मंत्री पद चाहती है। इसके अलावा छोटे दलों के विधायक भी मंत्री पद मांग रहे हैं।

उत्तराखंड ब्रेकिंग: पेपर लीक कांड में एक और गिरफ्तारी, हुआ ये खुलासा

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देहरादून: यूकेएसएसएससी प्रश्न पत्र लीक मामले में एसटीएफ उत्तराखंड ने यूकेएसएसएससी के पीआरडी कर्मचारी संजय राणा पुत्र हयात सिंह राणा निवासी भीमतला जिला चमोली को गिरफ्तार किया है।

अभियुक्त द्वारा पूर्व पीआरडी कर्मचारी मनोज जोशी के साथ मिलकर अपने घर मे लखनऊ से लीक प्रश्न पत्र की फ़ोटो कॉपी करवाई गई एवं अपनी पत्नी को प्रश्न पत्र देकर चयनित करवाया गया। गवाहों के बयान एवं टेक्निकल साक्ष्य के आधार पर अभियुक्त को अरेस्ट किया गया।

अभियुक्त के कब्जे से फोटो कॉपी मशीन और सीपीयू बरामद हुआ है। अभियुक्त वर्ष 2014 से 2022 अप्रैल तक यूकेसीएसएससी में पीआरडी कर्मचारी नियुक्त था।

उत्तराखंड ब्रेकिंग: सुबह-सुबह बड़ा हादसा, खाई में गिरा वाहन, एक घायल, दो लापता

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उत्तरकाशी: उत्तराखंड में हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला उत्तरकाशी जिले के चामी और बर्नीगाड़ के बीच का है, जहां एक वाहन गहरी खाई में जा गिरा। इस हादसे में एक व्यक्ति गंभीर घायल बताया जा रहा है। जबकि, 2 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

घटना की जानकारी मिलने के बाद SDRF और आपातकालीन सेवा 108 मौके के लिए रवाना हो गई है। घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।जबकि, 2 लापता लोगों की तलाश के लिए SDRF रेस्क्यू अभियान शुरू करने जा रही है।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि हादसे में एक व्यक्ति घायल और दो व्यक्ति लापता हैं।

 

घायल व लापता लोगों के नाम

1- सतीता रावत 510 रमेश रावत Rio राजा रोड़ सेलाकुई देहरादून उम्र – 40 वर्ष लभगभ (घायल) वाहन स्वामी / चालक, वाहन संख्या – UK07 FC – 1215

2- सन्दीप पुण्डीर निवासी जमनपुर सेलाकुई – (लापता) 3- जितेन्द्र ध्यानी, निवासी सिंहनीवाला (लापता)

उत्तराखंड: BJP के अवैध खनन प्रेम ने हिलाई पुल की नींव, DM और SDM पर कौन बना रह था दबाव?

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कोटद्वार : उत्तराखंड विकास पार्टी ने सुखरो नदी में पुल की नींव हिल जाने से पुल पर आवाजाही बंद करने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग द्वारा सन 2020 में ही लगातार अवैध खनन की अख्यायें दी थी मगर भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खासमखास इस कदर प्रशासन पर हावी थे कि प्रशासन ने अवैध खनन करने वाले भाजपा के पदाधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर ही झूठे मुकदमें दर्ज करवा दिए।

मुजीब नैथानी ने कहा कि आज अवैध खननकारी भाजपा में प्रदेशस्तरीय पदों पर बने हुए हैं। और कोटद्वार भाभर की जनता को अब समझ में आ रहा है कि अवैध खनन के दुष्परिणाम क्या होते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए सीधेतौर पर तत्कालीन सरकार और के मुखिया ही जिम्मेदार हैं।

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उत्तराखंड में खनन माफिया सरकार और अधिकारियों में कितनी गहरी पैठ रखते हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि माफिया नदियों में पोकलैंड और जेसीबी तक से खुदाई करते हैं। ऐसा नहीं है कि इन माफिया के खिलाफ लोगों ने शिकायत नहीं की। शिकायतें भी की गई। प्रदर्शन भी किए गए, लेकिन सत्ता में अपने मठाधीसों पर मजबूत पकड़ रखने वाले माफिया को अभयदान मिल जाता है, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

कुछ ऐसा ही कोटद्वार में भी सामने आया है। यहां आखिरी वही हुआ, जिसकी लंबे समय से आशंका जाहिर की जा रही थी। सवाल भी उठ रहे थे, लेकिन अधिकारी और सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ा। कोटद्वार क्षेत्र में बीते वर्ष रिवर ट्रेनिंग के नाम पर हुए खनन की भेंट सुखरो नदी का पुल चढ़ गया। पर्वतीय क्षेत्रों में बीती रात हुई भारी बारिश के दौरान सुखरो नदी उफान पर आ गई।

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इस दौरान शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे सुखरो नदी पर बने पुल का एक पिलर धंसने लगा जिससे पुल क्षतिग्रस्त हो गया। प्रशासन ने पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही रुकवा दी। बीते वर्ष कोटद्वार क्षेत्र में जहां राजस्व विभाग की ओर से सुखरो नदी में रीवर ट्रेनिग के पट्टे जारी किए गए, वहीं मालन व सुखरो नदियों में वन क्षेत्र के अंतर्गत रीवर चौनेलाइजेशन के नाम पर खनन किया गया। वन महकमे के अधिकारी वन भूमि पर धड़ल्ले से चल रहे खनन को देखकर भी अनजान बने रहे।

रिवर ट्रेनिंग के नाम पर चल रहा खनन कार्य तो बंद हो गया। लेकिन, क्षेत्र के नदियों में आज भी बदस्तूर अवैध खनन जारी है। जिस सुखरो नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त हुआ है, वहां बीती रात जेसीबी मशीन लगाकर खनन किया जा रहा था। खनन कार्यों ने प्रशासन की कथित मिलीभगत से जहां पुल की बुनियाद तक खोद दी, वहीं पुल से लगातार ओवर लोडेड खनिज से लदे डंपर गुजरते रहे।

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लोक निर्माण विभाग की दुगड्डा इकाई ने इस संबंध में कई मर्तबा जिलाधिकारी व आयुक्त को पत्र भेज पुल से ओवरलोडेड डंपरों की आवाजाही रोकने व पुल के आसपास अवैध खनन पर रोक लगाने की भी मांग की। लेकिन, प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। प्रशासन की इस अनदेखी का ही परिणाम रहा कि 2010 में जिस पुल का लोकार्पण किया गया था, टूट चुका है। केवल टूटा ही नहीं बल्कि ढहने की कगार पर पहुंच गया है।

उत्तराखंड पुलिस इस मामले में नंबर वन, रिपोर्ट में खुलासा

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देहरादून : NCRB के रिपोर्ट में उत्तराखंड पुलिस की खास वजह से चर्च हो रही हैl हाल मी में प्रकाशित क्राइम इन इंडिया 2021 की रिपोर्ट में चोरी हुई संपत्ति/समान की रिकवरी में उत्तराखंड पुलिस को पहला स्थान प्राप्त हुआ हैl

पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने बताया कि चोरी के मामलों में आधुनिक तकनीक के अधिकतम प्रयोग से राज्य पुलिस को यह सफलता प्राप्त हुई हैl उत्तराखंड पुलिस के द्वारा चोरी की घटनाओं में गहनता से विवेचना करते हुए अभियुक्तों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के साथ ही संपत्ति की प्राप्ति हेतु किए गए विशेष प्रयासों के कारण राज्य पुलिस का रिकवरी रेट देश में सबसे अधिक हैl

उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री महोदय के स्मार्ट पुलिस के विजन के अंतर्गत की गई पुलिसिंग का नतीजा हैl क्राइम इन इंडिया 2021 की रिपोर्ट जिसमें चोरी हुई संपत्ति की रिकवरी में उत्तराखंड पुलिस 68.7 प्रतिशत के साथ नंबर वन पर है, जो कि अन्य समस्त राज्यों के राष्ट्रीय औसत 30.2 प्रतिशत के दुगने से भी अधिक हैl उत्तराखंड पुलिस के बाद तमिलनाडु 64.8 प्रतिशत दूसरे नंबर एवं हिमाचल प्रदेश 55 प्रतिशत रिकवरी के साथ तीसरे नंबर पर हैl

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा -आप एक लाइन ही सुना दो, पढ़ें पूरी खबर

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में जब भी किसी खास मसले पर सुनवाई होती है, बहस के दौरान कई एसे लम्हें आ जाते हैं, जो यादगार बन जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट में संस्कृत को राष्ट्रभाषा घोषित करने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि यह एक नीतिगत फैसला है, जिसके लिए संविधान में संशोधन की जरूरत है।

जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता से संस्कृत में एक लाइन सुनाने के लिए भी कहा। उच्चतम न्यायालय में रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट डीजी वंजारा की तरफ से याचिका दायर की गई थी। उन्होंने संस्कृत को राष्ट्रभाषा घोषित किए जान के जरिए भाषा के प्रचार की बात की थी। इसपर जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने कहा, श्यह नीति निर्णय के दायरे में आता है।

इसके लिए भी संविधान में संशोधन की जरूरत होगी। किसी भाषा को राष्ट्रभाषा घोषित करने के लिए संसद को रिट जारी नहीं किया जा सकता। बेंच ने सवाल किया, भारत में कितने शहरों में संस्कृत बोली जाती है? इधर, वंजारा का कहना है कि वह केंद्र की तरफ से इस पर चर्चा चाहते हैं और अदालत की तरफ से एक दखल सरकार के स्तर पर चर्चा शुरू करने में मददगार होगा।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अनुच्छेद-32 का हवाला दिया और कहा कि शीर्ष न्यायालय के पास इसे लेकर गुंजाइश हैं और केंद्र का मत जानकर चर्चा शुरू की जा सकती है। इसपर कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता इस तरह रिप्रेजेंटेशन पेश का विचार रखते हैं, तो उनके पास इसे लेकर सरकार के पास जाने की आजादी हो सकती है।

मोहम्मद शमी की EX वाइफ ने लिखा- औरतबाजों से नहीं बचती देश की गरिमा

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टीम इंडिया के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की पूर्व पत्नी वाइफ हसीन जहां की सोशल मीडिया पोस्ट खूब वायरल हो रही है, जिसमें उन्होंने हार्दिक पांड्या की फोटो शेयर कर कैप्शन के जरिए ऐसा लग रहा है अपने पूर्व पति पर तंज कसा है। भारत को पाकिस्तान के खिलाफ जीत दिलाने में हार्दिक पांड्या का बड़ा हाथ रहा था। हार्दिक को ऑलराउंड खेल के लिए मैन ऑफ द मैच भी चुना गया था। हार्दिक ने ही छक्के के साथ टीम इंडिया को जीत दिलाई थी।

हार्दिक की फोटो शेयर करते हुए हसीन जहां ने पाकिस्तान के खिलाफ भारत की पांच विकेट से जीत के बाद लिखा, ‘बधाई, शानदार जीत। हमारे शेरों को बहुत-बहुत शुक्रिया, जिन्होंने देश को जीत दिलाई। यह तो होना ही था, देश का रुतबा, देश की गरिमा, ईमानदारों और देशभक्तों से ही बचती है ना कि अपराधियों और औरतबाजों से।

ऐसा लग रहा है कि हसीन जहां ने इस तरह से मोहम्मद शमी का नाम लिए बिना उन पर ही निशाना साधा है। दरअसल शमी एशिया कप 2022 के लिए भारतीय स्क्वॉड का हिस्सा नहीं हैं। टीम इंडिया अपने पहले दो मैच जीतकर सुपर 4 में जगह बना चुकी है। अब उसे सुपर फोर में तीन मैच खेलने हैं, जिसमें से एक मैच पाकिस्तान या हांगकांग से होगा, जबकि बाकी दो मैच श्रीलंका और अफगानिस्तान के खिलाफ खेलना है।

वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी को ‘परिवार पुरस्कार’

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मुंबई : कला, संस्कृति एवं साहित्य की प्रतिनिधि संस्था ‘परिवार’ द्वारा हिन्दी काव्य साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए प्रतिवर्ष दिया जानेवाला ‘परिवार पुरस्कार’ इस बार वरिष्ठ कवि लीलाधर जगूड़ी को दिया जायेगा। शनिवार 15 अक्टूबर, सायं 4 बजे, चर्चगेट स्थित इंडियन मर्चेंट्स चेंबर सभागृह में आयोजित एक काव्य समारोह में उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। पुरस्कारस्वरूप जगूड़ी को शॉल, श्रीफल एवं स्मृतिचिन्ह के साथ दो लाख रुपये की धनराशि भेंट की जायेगी। यह जानकारी संस्था के अध्यक्षसुशील गाडिया ने एक प्रेस वक्तव्य में दी।

‘परिवार’ के कार्याध्याक्ष सुंदर चंद ठाकुर ने बताया कि हिन्दी काव्य साहित्य को नये तेवर, जीवंत भाषा और विविधतापूर्ण कथ्य से समृद्ध करने के लिए लीलाधर जगूड़ी को यह पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है। अनुभव के आकाश में उड़ान भरनेवाले वह हिन्दी के एकमात्र ऐसे कवि हैं, जिनके यहां शब्द किसी कौतुक या क्रीड़ा का उपक्रम नहीं है। उनके यहां कविता एक सार्थक सर्जनात्मकता की कोख से जन्म लेती है। समकालीन कवियों में भाषा के सर्वाधिक नये प्रयोग उनके यहां पाये जाते हैं।

1 जुलाई, 1940 को टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड के धंगड़ गांव में जन्मे लीलाधर जगूड़ी ने अपने रचनात्मक जीवन में कई कविता संग्रह, गद्य और नाटक लिखे हैं। ‘शंखमुखी शिखरों पर’, ‘नाटक जारी है’,‘इस यात्रा में’, ‘रात अब भी मौजूद है’, ‘बची हुई पृथ्वी’, ‘घबराये हुए शब्द’, ‘भय भी शक्ति देता है’, ‘अनुभव के आकाश में चांद’, ‘महाकाव्य के बिना’, ‘ईश्वर की अध्यक्षता में’, ‘जितने लोग, उतने प्रेम’, ‘खबर का मुंह विज्ञापन से ढका है’, ‘नये मनु की प्रेमगाथा’, ‘कविता का अमर फल’, और ‘मेरे विस्तार का कोई अंत नहीं’ उनके चर्चित काव्य संग्रह हैं। गद्य लेखन में ‘मेरे साक्षात्कार’, नाटक ‘पांच बेटे’ और निबंध संग्रह ‘रचना प्रक्रिया से जूझते हुए’ प्रकाशित हुए हैं।

जगूड़ी को ‘अनुभव के आकाश में चांद’ कविता संग्रह के लिए साहित्य अकादमी सम्मान से सम्मानित किया गया है। भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से अलंकृत श्री जगूड़ी को ‘जितने लोग, उतने प्रेम’ कविता संग्रह के लिए ‘व्यास सम्मान’ से नवाजा गया है। इसके अलावा उन्हें ‘रघुवीर सहाय सम्मान’, भारतीय भाषा परिषद (कोलकाता) का शतदल सम्मान, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का नामित पुरस्कार और उड़ीसा का महाकवि गंगाधर राष्ट्रीय पुरस्कार जैसे अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले हैं।

‘परिवार’ की ओर से पिछले वर्षों में स्व. भारत भूषण, स्व. रमानाथ अवस्थी, स्व. नागार्जुन, स्व. गोपालदास ‘नीरज’, स्व. पंडित प्रदीप, माहेश्वर तिवारी, श्संतोषानंद, बुद्धिनाथ मिश्र, विष्णु खरे, विनोद कुमार शुक्ल, ऋतुराज, चंद्रकांत देवताले, स्व. केदारनाथ सिंह, नरेश सक्सेना और स्व. मंगलेश डबराल आदि शीर्ष कवियों को उनके रचनात्मक योगदान के लिए ‘परिवार पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है।

उत्तराखंड: पेपर लीक मामले में CM धामी का बड़ा एक्शन, आयोग के पूर्व सचिव सस्पेंड

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देहरादून: अधीनस्त चयन सेवा आयोग भर्ती परीक्षा में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हुई है। सीएम धामी ने बड़ा एक्शन लिया है। सीएम के निर्देश के बाद शासन ने आयोग के पूर्व सचिव संतोष बडोनी को सस्पेंड कर दिया है। विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक विवाद में घिरे उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पूर्व सचिव संतोष बडोनी को शासन ने निलंबित कर दिया है।

सचिव प्रभारी, सचिवालय प्रशासन विनोद कुमार सुमन ने बृहस्पतिवार देर रात उनके निलंबन के आदेश जारी किए। पिछले माह स्नातक स्तरीय परीक्षा के पेपर लीक होने के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर एसटीएफ ने जांच शुरू की थी। पेपर लीक विवाद के बीच पहले अध्यक्ष एस राजू ने नैतिकता के तहत अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 13 अगस्त को सरकार ने आयोग के सचिव पद से संतोष बडोनी को हटा दिया था। चूंकि बडोनी सचिवालय सेवा के अधिकारी हैं, इसलिए उन्हें सचिवालय में बतौर संयुक्त सचिव ज्वाइनिंग दी गई थी।

इस बीच पेपर छापने वाली कंपनी आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशन के मालिक राजेश चौहान सहित 31 आरोपी सलाखों के पीछे जा चुके हैं। जबकि सचिवालय रक्षक भर्ती का पेपर आयोग की प्रिंटिंग प्रेस से पेन ड्राइव के माध्यम से चोरी होने का मामला भी सामने आया। लगातार आयोग के पदाधिकारी व अधिकारियों पर सवाल उठ रहे थे। पेपर लीक का मामला जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे ही विपक्ष भी लगातार अध्यक्ष व सचिव के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग करता आ रहा है।

सचिव, सचिवालय प्रशासन विनोद कुमार सुमन ने संतोष बडोनी को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। उन्हें सचिव पद पर रहते हुए अपने कार्यों को ठीक से न करने और उदासीनता बरतने का दोषी मानते हुए निलंबित किया गया है। उन्हें राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली 2002 के नियम तीन के उप नियम 1 व 2 और उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) संशोधन नियमावली 2010 के नियम 4 के उपनियम 1 के तहत निलंबित किया गया है।

आयोग के स्तर से भर्ती परीक्षाओं के काम जिस तरह से करवाए गए, उस पर आयोग लगातार कटघरे में है। एक ही कंपनी को बार-बार पेपर छपवाने का ठेका देना, आयोग की हाई सिक्योरिटी जोन वाली प्रिंटिंग प्रेस से पेपर चोरी होना, अनुबंध संबंधी मामलों में स्थिति स्पष्ट न होना जैसे तमाम आरोप लगातार लग रहे हैं।