वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी को ‘परिवार पुरस्कार’

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मुंबई : कला, संस्कृति एवं साहित्य की प्रतिनिधि संस्था ‘परिवार’ द्वारा हिन्दी काव्य साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए प्रतिवर्ष दिया जानेवाला ‘परिवार पुरस्कार’ इस बार वरिष्ठ कवि लीलाधर जगूड़ी को दिया जायेगा। शनिवार 15 अक्टूबर, सायं 4 बजे, चर्चगेट स्थित इंडियन मर्चेंट्स चेंबर सभागृह में आयोजित एक काव्य समारोह में उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। पुरस्कारस्वरूप जगूड़ी को शॉल, श्रीफल एवं स्मृतिचिन्ह के साथ दो लाख रुपये की धनराशि भेंट की जायेगी। यह जानकारी संस्था के अध्यक्षसुशील गाडिया ने एक प्रेस वक्तव्य में दी।

‘परिवार’ के कार्याध्याक्ष सुंदर चंद ठाकुर ने बताया कि हिन्दी काव्य साहित्य को नये तेवर, जीवंत भाषा और विविधतापूर्ण कथ्य से समृद्ध करने के लिए लीलाधर जगूड़ी को यह पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है। अनुभव के आकाश में उड़ान भरनेवाले वह हिन्दी के एकमात्र ऐसे कवि हैं, जिनके यहां शब्द किसी कौतुक या क्रीड़ा का उपक्रम नहीं है। उनके यहां कविता एक सार्थक सर्जनात्मकता की कोख से जन्म लेती है। समकालीन कवियों में भाषा के सर्वाधिक नये प्रयोग उनके यहां पाये जाते हैं।

1 जुलाई, 1940 को टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड के धंगड़ गांव में जन्मे लीलाधर जगूड़ी ने अपने रचनात्मक जीवन में कई कविता संग्रह, गद्य और नाटक लिखे हैं। ‘शंखमुखी शिखरों पर’, ‘नाटक जारी है’,‘इस यात्रा में’, ‘रात अब भी मौजूद है’, ‘बची हुई पृथ्वी’, ‘घबराये हुए शब्द’, ‘भय भी शक्ति देता है’, ‘अनुभव के आकाश में चांद’, ‘महाकाव्य के बिना’, ‘ईश्वर की अध्यक्षता में’, ‘जितने लोग, उतने प्रेम’, ‘खबर का मुंह विज्ञापन से ढका है’, ‘नये मनु की प्रेमगाथा’, ‘कविता का अमर फल’, और ‘मेरे विस्तार का कोई अंत नहीं’ उनके चर्चित काव्य संग्रह हैं। गद्य लेखन में ‘मेरे साक्षात्कार’, नाटक ‘पांच बेटे’ और निबंध संग्रह ‘रचना प्रक्रिया से जूझते हुए’ प्रकाशित हुए हैं।

जगूड़ी को ‘अनुभव के आकाश में चांद’ कविता संग्रह के लिए साहित्य अकादमी सम्मान से सम्मानित किया गया है। भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से अलंकृत श्री जगूड़ी को ‘जितने लोग, उतने प्रेम’ कविता संग्रह के लिए ‘व्यास सम्मान’ से नवाजा गया है। इसके अलावा उन्हें ‘रघुवीर सहाय सम्मान’, भारतीय भाषा परिषद (कोलकाता) का शतदल सम्मान, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का नामित पुरस्कार और उड़ीसा का महाकवि गंगाधर राष्ट्रीय पुरस्कार जैसे अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले हैं।

‘परिवार’ की ओर से पिछले वर्षों में स्व. भारत भूषण, स्व. रमानाथ अवस्थी, स्व. नागार्जुन, स्व. गोपालदास ‘नीरज’, स्व. पंडित प्रदीप, माहेश्वर तिवारी, श्संतोषानंद, बुद्धिनाथ मिश्र, विष्णु खरे, विनोद कुमार शुक्ल, ऋतुराज, चंद्रकांत देवताले, स्व. केदारनाथ सिंह, नरेश सक्सेना और स्व. मंगलेश डबराल आदि शीर्ष कवियों को उनके रचनात्मक योगदान के लिए ‘परिवार पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है।