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ये दवा राहत नहीं आफत है, जानें आखिर क्या है माजरा?

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ठंड दस्तक दे रही है, तो कई लोगों को खांसी भी आएगी। इसके बाद दवा दुकानों पर चक्कर भी लगेंगे और आसानी से मिलने वाली ओवर दा काउंटर यानी OTC कफ सिरप घर पर आएगी। देश के कई आम घरों की यही कहानी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आसानी से मिलने वाली इन अधिकांश सिरप में कोडीन होता है, जिसमें आपको फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की ताकत है। इतना ही नहीं यह लती भी बना सकती है। विस्तार से समझें।

पहले आसान भाषा में समझते हैं

कोडीन वाली कफ सिरप यानी CCS। अब यह शामिल ऐसी कई OTC कफ सिरप हैं, जिनकी 100 एमएल बोतल का असर 30 एमजी मॉर्फीन की गोली जितना होता है। अब मॉर्फीन क्या है? यह भी एक नार्कोटिक है और हेरोइन के वर्ग में शामिल है। तकनीकी तौर पर देखें, तो अफीम से तैयार होने वाला कोडीन लिवर में पहुंचने के बाद मोरफीन में बदल जाता है।

 

कैसे करता है असर

इसके छोटे डोज से ही व्यक्ति को नशा सा महसूस होने लगता है। दरअसल, कोडीन ब्रेन स्टेम के कफ सेंटर पर सीधा असर डालकर उन संकेतों को कमजोर कर देता है, जिनकी वजह से व्यक्ति खांसी के लिए तैयार होता है। हालांकि, कोडीन खांसी का बार-बार आना या अवधि को कम नहीं करता है। हमें लगता है कि सिरप से हमारी बेचैनी दूर हो रही है, लेकिन यह बहुत थोड़ी राहत देता है।

CCS का गलत इस्तेमाल और असर

बाजार में CCS की संख्या 100 से ज्यादा है। इनमें Phensedyl या Corex की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। सिरप के लती इन्हें सोडा के साथ मिलाकर पी लेते हैं। बाद में इनका असर बढ़ाने के लिए गर्म चाय या कॉफी का इस्तेमाल करते हैं। खास बात है कि यह सस्ता नशा करीब 75 रुपये में ही उपलब्ध हो जाता है। CCS के असर में चक्कर आना, बोलने में दिक्कत, भ्रम होना, हार्ट रेट बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर जैसी चीजें शामिल हैं।

 

CCS का ड्रग की तरह क्यों हो रहा इस्तेमाल?

चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च की तरफ से 1997 में की गई एक स्टडी के अनुसार, CCS में ओपिऑइड और क्लोर्फेनिरामाइन जैसे सिम्पैथोमिमैटिक एजेंट के मिलने से एक खास उत्साह जैसा असर हो सकता है। अब इसके साथ ही कम कीमत और आसानी से मिलना CCS का ड्रग के तौर पर इस्तेमाल होने का बड़ा कारण हो सकता है।

खास बात है कि साल 2016 यानी पीजीआई रिपोर्ट के आने के करीब 2 दशकों के बाद सरकार ने CCS पर प्रतिबंध का ऐलान कर दिया था। कंपनियों पर इस बात की निगरानी का दबाव आ गया कि वह लत और तस्करी से निपटने के लिे अपना ड्रग्स कैसे बेचेंगे। भारत में सिपला ने साल 2017 में CCS बनाना बंद कर दिया था, लेकिन बाजार के दिग्गज अमेरिकी कंपनी फाइजर और एबॉट लैबोरेटरीज ने दुरुपयोग को रोकने के लिए कम ही काम किया।

 

क्या हो सकता है उपाय?

पहले तो ऐसी सिरप को डॉक्टर की सलाह के बगैर नहीं बेचा जाना चाहिए। परेशानी यही है कि सरकार को नहीं पता कि कितने लोग इन्हें ले रहे हैं, क्योंकि यह बगैर डॉक्टर के पर्चे के भी उपलब्ध हैं। ऐसे में दवा के व्यापारी से कोडीन फॉस्फेट कफ सिरप की बिक्री की पर्चियों को अपने पास रखने के लिए कहना मददगार हो सकता है। इसके अलावा नियामक स्तर पर भी बदलाव की जरूरत है। निर्माताओ को ‘एक बैच एक खरीदार’ के नियम का पालन करना चाहिए।

इसके अलावा नियामकों की ताकत बढ़ाए जाने की भी जरूरत है। रिपोर्ट में बीएसफ की एक पुरानी रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि भारत में 10 हजार से ज्यादा दवा फैक्ट्रियों पर केवल 1500 इंस्पेक्टर हैं।

 

एक खतरा तस्करी भी

गुजरात से त्रिपुरा और जम्मू-कश्मीर से तमिलनाडु तक कड़ी कार्रवाई के बाद भी CCS का असर बढ़ रहा है। इसके अलावा बांग्लादेश और नेपाल में भी सीमापार तस्करी बड़े स्तर पर जारी है। NCB यानी नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि 2014 और 2015 के बीच कोडीन शामिल 26 लाख 35 हजार 848 लीटर सिरप पकड़ी थी।

 

गाम्बिया की घटना याद होगी

हाल ही में गाम्बिया में diethylene glycol या ethylene glycol मिली हुई कफ सिरप पीने के बाद 66 बच्चों की मौत हो गई थी। हालांकि, हरियाणा की कंपनी की तरफ से तैयार इन सिरप में कोडीन नहीं था। इसके साथ ही कोडीन आधारित सिरप पर बैन की मांग तेज हो गई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एमएस भाटिया की अगुवाई में एक कमेटी गठित की थी, जिसने कोडीन आधारित सिरप पर प्रतिबंध का सिफारिश की थी।

एक ओर जहां सरकार बैन चाहती है। वहीं, दवा निर्माता इसका जमकर विरोध कर रहे हैं। इंडियन ड्रग मैन्युफेक्चरर एसोसिएशन (IDMA) बैन को रोकने की पूरी कोशिश कर रहा है। एसोसिएशन का दावा है कि प्रतिबंध से सरकारी खजाने को 300 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।

 

उत्तराखंड : दीपावली की छुट्टी गए गुरुजी, नहीं लौटे, सस्पेंड

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उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में 4 शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। दीपावली की छुट्टियां खत्म होने के बावजूद यह शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचे और विद्यालय में ताला लटका रहा, जबकि बच्चों की अर्द्धवार्षिक परीक्षा चल रही थी। शिक्षकों के विद्यालय न पहुंचने के कारण 29 अक्टूबर को विद्यालय में अध्यनरत 20 छात्र-छात्राएं अर्धवार्षिक परीक्षा से वंचित रहे।

मामले के अनुसार, दीपावली का अवकाश समाप्त होने के बाद भी उत्तरकाशी जिले में डुंडा ब्लाक के अंतर्गत ब्रह्मखाल के निकट सुगम क्षेत्र में आने वाला जूनियर हाईस्कूल जेमर में 28 और 29 अक्टूबर को ताले नहीं खुले। विद्यालय में तैनात 4 शिक्षकों में से एक भी शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचा।

जिसके कारण 29 अक्टूबर को प्रस्तावित अर्द्धवार्षिक परीक्षा में कक्षा 6, 7 और 8 का अंग्रेजी और संगीत का पेपर नहीं हो पाया।

इस दिन सभी बच्चे स्कूल पहुंचे, लेकिन विद्यालय का ताला नहीं खुला। सूचना पर अभिभावक स्कूल में पहुंचे। इसी बीच एक शिक्षिका भी आई। परंतु उसके पास स्कूल की चाबी नहीं थी। जिसके बाद अभिभावकों ने मुख्य गेट पर ताला मार दिया और परीक्षार्थियों को बिना परीक्षा दिए ही वापस लौटना पडा।

अवकाश के बाद भी विद्यालय न पहुंचने वाले चार शिक्षकों को जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ने निलंबित कर दिया है। इन शिक्षकों में प्रधानाध्यापक दुर्गा लाल खनेटी, गंगेश्वर परमार, सुशीला बहुगुणा और दिनेश चमोली शामिल हैं।

बेसिक जिला शिक्षा अधिकारी पदमेंद्र सकलानी ने बताया कि, चारों शिक्षकों पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप है। चारों शिक्षकों को निलंबित किया गया है और अलग-अलग ब्लॉकों के ब्लॉक शिक्षा कार्यालय में अटैच किया गया है। इसके साथ ही इस मामले की जांच खंड शिक्षा अधिकारी से नेतृत्व में गठित टीम से करवाई जा रही है।

वहीं, स्कूल में तैनात प्रधानाध्यापक सहित चार शिक्षकों के विरुद्ध अभिभावकों और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों में आक्रोश था। ग्रामीणों का कहना है कि, पर्याप्त शिक्षक होने के बाद भी स्कूल में शिक्षा व्यवस्था सही नहीं है। जिसके कारण ग्रामीण अपने बच्चों का दाखिला प्राइवेट स्कूलों में करा रहे हैं।

प्रधानाध्यापक दुर्गा प्रसाद खनेड़ी ने बताया कि, 28 अक्टूबर को मेरे भाई का निधन हुआ। जिस कारण वह अवकाश पर थे। अन्य शिक्षकों के बारे में जानकारी नहीं है।

NCP प्रमुख शरद पवार की तबियत खराब, ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती

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महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार की तबियत बिगड़ गई है। उन्हें राजधानी मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। खबर है कि उन्हें इस सप्ताह ही डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

वह आगामी नवंबर में होने वाले पार्टी कार्यक्रमों में शामिल होते रहेंगे। कहा जा रहा है कि वह कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो’ यात्रा में भी शामिल होने वाले हैं।

राकंपा ने जानकारी दी है कि तबियत खराब होने के चलते पवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पार्टी ने बताया है कि उन्हें 2 नवंबर तक डिस्चार्ज किया जा सकता है। साथ ही वरिष्ठ नेता शिर्डी में 4-5 नवंबर को होने वाले कैंप में शामिल होंगे। खास बात है कि 81 वर्षीय लगातार राजनीति में सक्रिय बने हुए हैं।

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में जारी भारत जोड़ो यात्रा 8 अवंबर को महाराष्ट्र में एंट्री करेगी। खबर है कि पदयात्री नांदेड़ के जरिए राज्य में यात्रा का आगाज करेंगे। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले का कहना है कि पवार ने यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।

 

भगत सिंह नाटक की रिहर्सल कर रहा था बच्चा, फांसी लगने से मौत

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कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में दिल दहला देने वाला एक मामला सामने आया है। यहां 12 साल के एक बच्चे की नाटक के रिहर्सल के दौरान मौत हो गई है। बच्चे की मौत के बाद उसके परिवार में मातम पसर गया है। बच्चे की अचानक मौत से आसपास के लोग भी स्तब्ध है। मामले की जानकारी पुलिस को दे दी गई है।

समाचार एजेंसी से मिली जानकारी के मुताबिक, मृतक बच्चे का नाम संजय गौड़ा था। संजय एसएलवी स्कूल में सातवीं कक्षा का छात्र था। पुलिस ने मामले में अधिक जानकारी दी है। पुलिस ने बताया कि संजय के स्कूल में भगत सिंह की फांसी के एक सीन का प्ले किया जाना था। संजय को स्कूल में भगत सिंह का रोल करना था।

जानकारी में आगे पता चला कि संजय घर में भगत सिंह को फांसी की प्रैक्टिस करता था। प्रैक्टिस के दौरान उसने स्टूल लगाकर फांसी का फंदा गले में डाल लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। हादसे के वक्त बच्चा घर में अकेला था। संजय के परिजन जब घर लौटे तो हैरान रह गए। उन्होंने अपने बेटे संजय को पंखे से लटका पाया।

 

राष्ट्रपति मुर्मू के काशी दौरे की तैयारियां शुरू, क्रूज से करने वाली हैं…

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देश के राष्ट्रपति (President of India) के तौर पर चुने जाने के बाद द्रौपदी मुर्मू काशी का अपना पहला दौरा करने जा रही हैं। बताया जा रहा है कि ये दो दिवसीय दौरा होने वाला है। जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देव दीपावली की अनुपम छटा को निहारेंगी। उनके आने की तैयारी शुरू हो चुकी है। हालांकि अभी तक ये कन्फर्म नहीं हुआ कि वह आएंगी है। लेकिन बताया जा रहा है कि उनके आने की काफी संभावना है। जिसके चलते उनके रहने के लिए बेरका गेस्ट हाउस को तैयार कराया जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सात नवंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक विशेष विमान के जरिए लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बाबतपुर पहुंचेंगी।

जहां उनका इस्तगबाल करने स्वागत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुचेंगे। यहां से निकल कर वह हेलिकॉप्टर के जरिए बरेका परिसर पहुंचेंगी और फिर यहां से सड़क के रास्ते गेस्ट हाउस जाएंगी। बताया जा रहा है कि गेस्ट हाउस पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कुछ देर तक आराम करेंगी उसके बाद वह सड़क के रास्ते से ही नमो घाट जाएंगी। गोरतलब हैं कि उनके आगमन की पूरी तैयारी की जा रही है।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसके बाद जलयान से गंगा घाटों की सुंदरता और दीपोत्सव का अवलोकन करेंगी। यहां से जाने के बाद वह सीधा गेस्ट हाउस जाएंगी और यहां रात्रि विश्राम कर सुबह दिल्ली वापस हो जाएंगी। उनके इस दौरे के दौरान उनकी सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। बता दें कि वह देश की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं।

झूलता पुल टूटने से 100 से अधिक लोगों की मौत, भावुक बीजेपी सांसद बोले “नहीं बख्शे जाएंगे…”

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पिछले कुछ समय से लगभग हर दिन हादसों की खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में कई सारे रोड हादसे हुए थे। जिसके बाद अब एक ऐसा हादसा पेश आया है, जिसके बारे में सुनकर हर कोई हैरान है। बताया जा रहा है कि इस हादसे में 100 से भी अधिक लोगों की मौत हो गई है। ये हादसा रविवार को गुजरात के मोरबी में पेश आया है। खबरों के अनुसार मोरबी में एक झूलता हुआ पुल टूट गया। जिसके टूटने से कई सारे लोगों की मौत हुई है। बताया जा रहा है कि इस हादसे का शिकार राजकोट से बीजेपी सांसद मोहनभाई के रिश्तेदार भी हुए।

बताया जा रहा है कि इस हादसे में उनके करीब 12 रिश्तेदारों की मौत हो गई। अगर बात करें अब तक मरने वालों की संख्या की तो अब तक 140 लोगों की बॉडी तलाश ली गई है। इस दौरान करीब 70 से ज्यादा लोग बुरी तरह से घायल भी हुए हैं। इस हादसे को लेकर मोहनभाई ने कहा कि “मैंने इस दुर्घटना अपनी बहन के जेठ यानी मेरे जीजा के भाई की 4 बेटियों, 3 जमाई और 5 बच्चों को खो दिया है। यह बेहद दुखद है। मैं कल हादसे के बाद से यहीं पर हूं। 100 से ज्यादा लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। अभी और डेड बॉडी निकलने की आशंका है।”

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उन्होंने आगे बात करते हुए कहा कि “जिसकी भी गलती होगी, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों का सच सामने आएगा।” मिली जानकारी के अनुसार हादसे के बाद से ही बीजेपी सांसद मोहनभाई घटनास्थल पर मौजूद हैं। बता दें कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मामले पर नजरें टिकाए हुए हैं। वह लगातार इस हादसे से जुड़ी जानकारी ले रहे हैं।

शिंदे Vs उद्धव: CAG करेगा BMC की दो सालों की जांच, सरकार के आदेश

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मुंबई  महा नगरपालिका (BMC) में चुनाव से पहले बड़ी हलचल की तैयारी है। महाराष्ट्र सरकार ने CAG के जरिए बीएमसी की कामों की जांच कराने के आदेश दिए हैं। संभावनाएं जताई जा रही हैं कि कोरोनावायरस महामारी के दौरान BMC की तरफ से लिए गए फैसले भी कैग की जांच के दायरे में आ सकते हैं। राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 24 अगस्त को महाराष्ट्र विधानसभा में कैग ऑडिट की घोषणा की थी।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को बीएमसी की तरफ से 28 नवंबर 2019 और 28 फरवरी 2022 के बीच 12 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं की जांच के लिए कैग का रुख किया है। उस दौरान राज्य में महाविकास अघाड़ी की सरकार थी। साथ ही बीएमसी पर भी तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली तब की शिवसेना का नियंत्रण था।

CM की ओर से जारी आदेशानुसार, कैग महामारी के दौरान अस्पताल स्थापित करने से जुड़े विवादित फैसलों की जांच कर सकता है। इसमें दहिसर में हुई जमीन की खरीद के साथ-साथ वेंडर्स से उपकरण, दवाएं और ऑक्सीजन खरीदना भी शामिल है, जिनके कथित तौर पर अधिकारियों और राजनेताओं से तार जुड़े हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पाया गया था कि जून-जुलाई 2021 में बीएमसी ने अलग-अलग अस्पतालों में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाने के ऑर्डर दिए थे। खास बात है कि इसके लिए ब्लैक लिस्ट हो चुकी हाईवे निर्माण कंपनी को 16 जून 2021 को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। इसके अलावा कोविड केयर सेंटर्स और जंबो या फील्ड अस्पतालों और दी जा सेवाओं को लेकर कॉन्ट्रैक्ट्स पर भी सवाल उठे हैं।

 

खबर है कि लाइफलाइन हॉस्पिटल मैनेजमेंट नाम की फर्म को ऐसे पांच सेंटर चलाने का काम दिया गया था। 26 जून 2020 को कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने के दौरान यह कंपनी रजिस्टर्ड नहीं थी। बाद में पाया गया कि यह गैर-पंजीकृत कंपनी है और इसे अपारदर्शी तरीके से 100 करोड़ रुपये का काम दिया गया था।

 

 

उत्तराखंड : गुलदार की दहशत, सेना के जवानों पर हमला

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File photo

लैंसडाउन : पौड़ी जनपद में गुलदार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। लैंसडाउन में भी एक बार और गुलदार की धमक से दहशत बन गई है।

 

लैंसडाउन रेंज अधिकारी अजय ध्यानी ने बताया कि 29 अक्तूबर की देर शाम करीब 7:45 बजे नायक ललित मोहन (33) पुत्र महेशानंद बाइक से अपने एक साथी के साथ जीआरआरसी लैंसडाउन में कंपनी रिपोर्टिंग ड्यूटी से लौट रहे थे।

लैंसडाउन में एक गुलदार ने ड्यूटी से लौट रहे बाइक सवार सैनिक पर झपट्टा मारकर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। बाइक सवार युवक ने बाइक तेज दौड़ाई और गुलदार से दोनों की जान बचाई।

सैनिक का उपचार सैन्य चिकित्सालय में किया जा रहा है। गुलदार के क्षेत्र में सक्रिय होने के कारण लोगों में दहशत का माहौल बना है। वन विभाग और सेना के गश्ती दल ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है।

मोरबी हादसे में अब तक 141 लोगों की मौत

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गुजरात के मोरबी में एक सस्पेंशन ब्रिज के गिरने से मरने वालों की संख्या सोमवार सुबह तक बढ़कर 141 हो गई है, एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की है। बचाव अभियान जारी है।

मोरबी जिले में रविवार शाम करीब 6.30 बजे मच्छू नदी पर बना केबल पुल टूट गया था। हादसे के समय पुल पर 300 से अधिक लोग मौजूद थे। यह पुल 233 मीटर लंबा और करीब सौ साल पुराना था।

मोरबी बी डिवीजन के पुलिस निरीक्षक प्रकाशभाई देकावड़िया द्वारा पुल के रखरखाव और एमजीएमटी एजेंसियों के खिलाफ धारा 304 (गैर इरादतन हत्या), 308 (गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास) और 114 (अपराध होने पर उपस्थित होने वाले) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

पीएम ने कहा, हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति मैं अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। दुख की इस घड़ी में सरकार हर तरह से शोक संतप्त परिवारों के साथ है। गुजरात सरकार कल से राहत और बचाव कार्य कर रही है। केंद्र भी राज्य सरकार को हर संभव मदद दे रहा है।

 

 

सरकार का बड़ा फैसला, अब जांच के लिए CBI को लेनी होगी परमिशन

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हैदराबाद, तेलंगाना सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब CBI को किसी केस की जांच के लिए राज्य सरकार से अनुमति लेना जरूरी होगा। पहले इसकी जरूरत नहीं पड़ती थी। इस कदम को केसीआर के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा विधायकों के अवैध शिकार मामले में केंद्र के किसी भी हस्तक्षेप को रोकने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के चार विधायकों को भाजपा में शामिल करने के लिए रिश्वत देने की कोशिश करते हुए भाजपा के तीन कथित एजेंटों की गिरफ्तारी से उत्पन्न राजनीतिक गर्मी के बीच सरकार का यह कदम सामने आया है। भाजपा मांग करती रही है कि ‘विधायकों के अवैध शिकार’ मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए।

सरकारी आदेश (GO) 30 अगस्त को जारी किया गया था, लेकिन इसे गोपनीय रखा गया था। इसे शनिवार को सार्वजनिक किया गया था, जब राज्य सरकार ने तेलंगाना उच्च न्यायालय को सीबीआई को सामान्य सहमति वापस लेने के बारे में सूचित किया था, जिसमें भाजपा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्रीय एजेंसी को जांच स्थानांतरित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। उच्च न्यायालय ने शनिवार को मामले की जांच पर अगले आदेश तक रोक लगा दी और राज्य सरकार को चार नवंबर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

गृह विभाग के प्रधान सचिव रवि गुप्ता ने कहा, ‘तेलंगाना की सरकार दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा-6 के तहत राज्य सरकार द्वारा जारी सभी पिछली सहमति को वापस लेती हैं, जो तेलंगाना राज्य में उक्त अधिनियम के तहत शक्तियों और अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने के लिए दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान के सभी सदस्यों को प्रदान करती हैं।

इसमें कहा गया है, ‘पहले जारी की गई सभी सामान्य सहमति वापस लेने के परिणामस्वरूप, किसी भी अपराध या अपराधों के वर्ग की जांच के लिए तेलंगाना सरकार की पूर्व सहमति मामला-दर-मामला आधार पर ली जानी चाहिए। दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 के नियमों के अनुसार, जिसके तहत सीबीआई का गठन किया गया था, जांच एजेंसी का दिल्ली पर पूरा अधिकार क्षेत्र है, लेकिन यह उस राज्य की सरकार की आम सहमति से दूसरे राज्यों में भी प्रवेश कर सकता है। अनुमति के अभाव में सीबीआई अब तेलंगाना की सीमा के भीतर होने वाले किसी भी मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।