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एशिया की सबसे बड़ी भागीरथ इलेक्ट्रिक मार्केट में भीषण आग, कई दुकानें राख

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नई दिल्ली :  देश ही नहीं, बल्कि एशिया की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक मार्केट में शुमार चांदनी चौक के भगीरथ पैलेस मार्केट में लगी भीषण आग लगातार दूसरे दिन भी नहीं बुझाई जा सकी है।

शुक्रवार सुबह भी यहां की दुकानों में लगी आग को बुझाने का काम जारी है। इस बीच मिली जानकारी के मुताबिक, कई दुकानें जलकर राख हो गईं और लाखों का नुकसान होने का अंदेशा जताया जा रहा है। वहीं, दिल्ली दमकल विभाग के मुखिया अतुल गर्ग के मुताबिक, भगीरथ पैलेस मार्केट बिल्डिंग का अधिकतर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है। इमाारत बहुत नुकसान पहुंचा है।

 

आफताब ने आवेश में नहीं, प्लान से की थी हत्या, इंटरनेट पर सर्च किया था ‘कट बॉडी फाउंड’

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श्रद्धा हत्याकांड की जांच में पुलिस को आरोपी आफताब के बारे में जो जानकारियां मिल रही हैं उससे यह बात पुख्ता होती जा रही है कि आफताब ने आवेश में आकर नहीं बल्कि पूरे षडयंत्र के तहत उसकी हत्या की है।

आफताब के मोबाइल व लैपटाप से पुलिस को पता चला है कि वह हत्या से पहले और बाद में भी इसे लेकर इंटरनेट पर सर्च करता था। उसके इंटरनेट सर्च हिस्ट्री पता चला है कि वह हर रात कट बॉडी फाउंड, हाउ टू कट ह्यूमन बॉडी आदि सर्च करता था।

 

आधार को लेकर सरकार ने जारी किए ये निर्देश, जानें क्या है खास?

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आधार (Unique Identification Authority of India, UIDAI ) ने को आधार कार्ड के सत्‍यापन पर जोर दिया और कहा है कि आइडेंटिटी प्रूफ यानि पहचान पत्र के तौर पर दिए गए फिजिकल या इलेक्‍ट्रानिक आधार कार्ड की कॉपी को सत्‍यापित करने की आवश्‍यकता है।

UIDAI ने आधार के सत्‍यापन को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें बताया गया है कि किसी भी रूप में पेश किए गए आधार कार्ड पर मौजूद QR कोड को UIDAI के QR कोड मोबाइल ऐप (mAadhaar application or Aadhaar QR code scanner) से स्कैन कर उसकी सत्यता और विश्वसनीयता की जांच की जाए।

इसके अनुसार, UIDAI का QR कोड मोबाइल ऐप एंड्रॉयड, IOS और विंडो फॉर्मेट के ऐप स्टोर पर मौजूद है। साथ ही सभी आधार कार्ड धारकों को सलाह भी दी गई है। इसमें बताया गया है कि आधार कार्ड के सही इस्तेमाल के प्रति जागरूक रहें।UIDAI द्वारा जारी सलाह का पालन करें क‍ि क्‍या करना है और क्‍या नहीं ।

UIDAI ने सभी राज्‍यों को भी इस बारे में सतर्क किया है और कहा है कि इस बारे में आवश्‍यक निर्देश जारी कर दें। इससे जब भी आइडेंटिटी प्रूफ के तौर पर आधार पेश किया जाएगा तो इसका सत्‍यापन भली-भांति किया जा सकेगा। अथॉरिटी ने सर्कुलर भी जारी किया है। इसमें सत्‍यापन पर जोर दिया गया है और कहा प्रोटोकॉल का पालन करने की बात कही गई है।

सितंबर, 2022 को UIDAI ने गाइडीलाइंस जारी किए थे। इसमें सलाह दी गई थी-

संभाल कर रखें अपना आधार कार्ड, इसे यहां-वहां न रखें।

सोशल मीडिया से दूर रखें अपना आधार कार्ड।

किसी के साथ m-Aadhaar PIN को शेयर न करें।

 

उत्तराखंड: विधानसभा से बर्खास्त कर्मचारियों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, डबल बेंच ने पलट दिया फैसला

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नैनीताल: नैनीताल हाईकोर्ट में  विधानसभा से बर्खास्त कर्मचारियों को एकलपीठ के बहाल किए जाने के आदेश को  निरस्त करते हुए विधान सभा सचिवालय के आदेश को हाईकोर्ट ने सही ठहराया।

उत्तराखंड विधानसभा में पूर्व में विधानसभा अध्यक्षों द्वारा नियुक्त कर्मचारियों को सेवा से निकाले जाने के सरकार के निर्णय पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। बता दें, उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने विधानसभा में बैकडोर से हुईं 250 भर्तियां रद्द कर दी थी। इनमें 228 तदर्थ और 22 उपनल के माध्यम से हुईं नियुक्तियां शामिल हैं।

विधानसभा भर्ती घोटाले मामले में विधानसभा सचिव मुकेश सिंघल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करते हुए उनके खिलाफ जांच बैठा दी गई थी। विधानसभा में हुईं भर्तियों की जांच के लिए बनी तीन सदस्यीय विशेषज्ञ जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट दे थी। इस रिपोर्ट की सिफारिश के आधार पर 2016 में हुईं 150 तदर्थ नियुक्तियां, 2020 में हुईं छह तदर्थ नियुक्तियां, 2021 में हुईं 72 तदर्थ नियुक्तियां और उपनल के माध्यम से हुईं 22 नियुक्तियां रद्द की गई।

 

EC नियुक्ति मामला: SC ने सरकार से पूछा- ‘स्पीड’ से क्यों चली अरुण गोयल की नियुक्ति की फाइल?

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नई दिल्ली : केंद्र ने गुरुवार को चुनाव आयुक्त (Election Commissioner) अरुण गोयल (Arun Goel) की नियुक्ति की मूल फाइल सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी। इससे पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति से जुड़ी फाइल को पेश करने का आदेश दिया था ।

मामले की सुनवाई जस्टिस केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय बेंच कर रही है। इसमें जस्टिस अजय रस्तोगी, अनिरुद्ध बोस, हृषिकेश रॉय और सीटी रविकुमार शामिल हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता लाने की मांग पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। बता दें कि याचिका में मांग की गई है कि चुनाव आयुक्त का चयन CJI, पीएम और नेता विपक्ष की कमिटी को करना चाहिए।

 

15 मई से खाली था पद- SC

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता लाने पर SC में आज सुनवाई की गई । EC अरुण गोयल की नियुक्ति की फाइल देख कोर्ट ने सवाल किया, ‘ 15 मई से पद खाली था। इसके बाद अचानक 24 घंटे से भी कम समय में नाम भेजने से लेकर मंजूरी देने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। 15 मई से 18 नवंबर के बीच क्या हुआ?

मामले की सुनवाई कर रही बेंच ने सवाल किया, ‘कानून मंत्री ने जो 4 नाम भेजे, उन नामों में क्या विशेष बात है। उसमें से सबसे जूनियर अधिकारी को ही क्यों और कैसे चुना गया। रिटायर होने जा रहे अधिकारी ने इस पद पर आने से पहले VRS भी लिया। इस पर केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल ने जवाब दिया।

 

दिग्गज एक्टर कमल हासन अस्पताल में भर्ती, ये है कारण

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हिन्दी और साउथ सिनेमा के दिग्गज एक्टर को श्री रामचंद्र मेडिकल सेंटर (SRMC) में भर्ती कराया गया है। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें 23 नवंबर को रेगुलर हेल्थ चेकअप के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि उन्हें बुखार था जिसके लिए दवा दे दी गई है।

डॉक्टरों ने उन्हें अगले कुछ दिनों तक पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है। इसके साथ ही अभिनेता को आज छुट्टी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को कमल हासन को बेचैनी महसूस होने लगी इसके साथ ही उन्हें हल्का बुखार भी था। हैदराबाद से लौटने के बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए चेन्नई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

डॉक्टरों ने उनका चेकअप किया और उन्हें आराम करने का सुझाव दिया। उम्मीद जताई जा रही है कि आज उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल जा जाएगी।

उत्तराखंड: सुबह-सुबह इनकम टैक्स विभाग की छापेमारी

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देहरादून: राजधानी देहरादून में आयकर विभाग ने सुबह-सुबह छापेमारी की। निवेशकों और उद्योगपतियों के ठिकानों पर आयकर ने छापे मारे। दिल्ली से सुबह-सुबह आईं आयकर अफसरों की कई टीमों के पहुंचते ही हड़कंप मच गया। मिली जानकारी के अनुसार पुलिस फोर्स मांगी है।

नेशविला रोड में एक के बाद एक आयकर विभाग की कई गाड़ियां पहुंची। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियों के पहुंचने आसपास भीड़ जुट लगई। कई निवेशकों व उद्योगपतियों के घर छापा पड़ा है। इनमें से अभी एमजे रेजिडेंसी के मालिक के घर पर छापा पड़ने की खबर सामने आई है।

 

आयकर विभाग ने देहरादून, ऋषिकेश ,दिल्ली व सहारनपुर के प्रॉपर्टी डीलर के तीन दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की है। मिली जानकारी के मुताबिक देहरादून के प्रॉपर्टी डीलर मंजीत जौहर, राज लुम्बा, मेहता ब्रदर्स, नट्स भाटिया,नवीन कुमार मित्तल व भू माफिया मितिन गुप्ता के ठिकानों व घरों पर रेड जारी है।

देहरादून में आयकर विभाग के एडिशनल डायरेक्टर ठाकुर मपवाल व डिप्टी डायरेक्टर रितेश भट्ट के नेतृत्व में छापे की कार्रवाई शुरू की गई। विभागीय अधिकारियों ने छापे के बाबत कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया।

 

एक ऐसा गांव, जहां आजादी के बाद से एक भी मामला नहीं पहुंचा थाने…ये है वजह

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जहानाबाद: बिहार अपराध और अपराधियों के लिए बदनाम रहा है। यहां गुंडा राज और जंगल राज की बातें होती रही हैं। लेकिन, बिहार में एक गांव ऐसा भी हैं, जहां एक भी मामला थाने नहीं पहुंचता है। बड़े-बड़े से विवाद का निपटारा गांव के बुजुर्ग ही देते हैं। यह गांव है बिहगा, जो जहानाबाद के घोसी प्रखंड स्थित धौताल में पड़ता है। आजादी के बाद आपसी विवाद को लेकर ये लोग कभी थाने नहीं गए।

गांव के किसी भी शख्स ने आपसी लड़ाई को लेकर थाने में एफआईआर तक दर्ज नहीं कराया। गांव के शांतिप्रिय लोगों ने विवाद की सूरत में भी नजीर पेश की, बिना कोर्ट गए ही मामले का निपटारा कर लिया। करीब 120 घरों में 800 की आबादी वाले इस गांव के लोगों ने प्रेरणादायी मिसाल कायम की है। घोसी प्रखंड मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूरी पर स्थित यह गांव एकदम अलग और अनूठे प्रकृति का है।

गांव के सबसे बुजुर्ग जगदीश यादव, नंदकिशोर प्रसाद, संजय कुमार ने बताया कि यहां लोग एकता के सूत्र में इस तरह बंधे हैं कि पंचायत चुनाव में भी वार्ड और पंच पद पर निर्विरोध निर्वाचन होता है। अगर गांव में किसी बात को लेकर विवाद होता भी है तो उसे आपस में ही बात करके निबटा लिया जाता है।

ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में आज तक कोई ऐसा बड़ा और गंभीर विवाद नहीं हुआ जिसे सुलझाने के लिए थाने या कोर्ट कचहरी जाने की नौबत आए। छोटे-मोटे विवाद को गांव के बड़े बुजुर्ग की पहल कर निपटारा करा दिया जाता है। गांव के कुछ बुजुर्ग लोग आपस में विवाद होने पर तुरंत हस्तक्षेप करते हैं। दोनों पक्षों से बात करके समझा-बुझाकर सुलह करा देते हैं।

पर सुप्रीम कोर्ट के केंद्र से कड़े सवाल, ये है मामला, जानिए संविधान क्या कहता है?

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Supreme Court

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। 5 जजों की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार पर तीखे सवाल दागे। कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि 2004 के बाद से मुख्य चुनाव आयुक्तों के कार्यकाल क्यों कम हो रहे हैं? निष्पक्ष और पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया के लिए कानून क्यों नहीं बना? मौजूदा प्रक्रिया में सरकार अपनी पसंद के व्यक्ति को चुनाव आयुक्त नियुक्त कर सकती है।

जबकि, ऐसे शख्स की नियुक्ति की जानी चाहिए जो बिना किसी दबाव या प्रभाव के स्वतंत्र फैसले ले सके। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त के चयन और नियुक्ति को लेकर कानून की बात कही गई है लेकिन 7 दशक बाद भी कोई कानून नहीं बना। यह संविधान की ‘चुप्पी’ के शोषण की तरह है। आइए जानते हैं कि चुनाव आयोग को लेकर संविधान में क्या प्रावधान हैं। आखिर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर संविधान क्या कहता है।

चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है जो देश में चुनावों को कराती है। इसकी स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुआ था। संविधान के मुताबिक, चुनाव आयोग को स्वायत्तता मिली हुई है और यह स्वतंत्र रूप से काम करता है। संविधान के अनुच्छेद 324 से लेकर 329 तक चुनाव आयोग से जुड़े हुए हैं। इनमें आयोग के सदस्यों की शक्तियां, कामकाज, कार्यकाल वगैरह के बारे में बताया गया है।

चुनाव आयोग से जुड़े संविधान के अनुच्छेद

  • अनुच्छेद 324- चुनावों को कराने, नियंत्रित करने, दिशानिर्देश देने, देखरेख की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की
  • अनुच्छेद 325- धर्म, जाति या लिंग के आधार पर किसी भी व्यक्ति विशेष को वोटर लिस्ट में शामिल न करने और इनके आधार पर वोटिंग के लिए अयोग्य नहीं ठहराने का प्रावधान।
  • अनुच्छेद 326- लोकसभा और राज्यों की विधानसभा के लिए चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होगा।
  • अनुच्छेद 327- चुनाव से जुड़े प्रावधानों को लेकर संसद को कानून बनाने की शक्ति।
  • अनुच्छेद 328- किसी राज्य के विधानमंडल को चुनाव से जुड़े कानून बनाने की शक्ति।
  • अनुच्छेद 329- चुनाव से जुड़े मामलों में अदालतों के हस्तक्षेप पर अंकुश

चुनाव आयोग में कौन-कौन
शुरुआत में चुनाव आयोग में सिर्फ एक ही सदस्य होता था- मुख्य चुनाव आयुक्त। 16 अक्टूबर 1989 से चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा 2 चुनाव आयुक्त की व्यवस्था की गई। उसी दिन वोटर के लिए न्यूनतम उम्र भी 21 साल से घटाकर 18 साल कर दी गई। जनवरी 1990 में एक सदस्यीय चुनाव आयोग को बहाल कर दिया गया। लेकिन अक्टूबर 1993 में राष्ट्रपति ने दो और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कर फिर से इसे तीन सदस्यीय स्वरूप दिया। तब से यही व्यवस्था चली आ रही है।

कौन करता है नियुक्ति
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते है। ये आईएएस रैंक के अधिकारी होते हैं। इनका कार्यकाल 6 साल या 65 साल की उम्र (दोनों में से जो भी पहले हो) तक होता है। उनका दर्जा सुप्रीम कोर्ट के जजों के समकक्ष होता है और उन्हें भी वही वेतन और भते मिलते हैं जो सुप्रीम कोर्ट के जजों को मिलते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव आयोग का प्रमुख होता है लेकिन उसके अधिकार भी बाकी चुनाव आयुक्तों के बराबर ही होते हैं। आयोग के फैसले सदस्यों के बहुमत या सर्वसम्मति के आधार पर होते हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त को संसद से महाभियोग की प्रक्रिया के जरिए ही पद से हटाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के जजों को भी हटाने की यही प्रक्रिया होती है। हालांकि, चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश पर राष्ट्रपति जब चाहे तब हटा सकता है। चुनाव आयुक्त अपने कार्यकाल से पहले इस्तीफा दे सकते हैं या कार्यकाल पूरा होने से पहले भी उन्हें हटाया जा सकता है।

नियुक्ति प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों उठाए सवाल
मौजूदा व्यवस्था के तहत सरकार अपनी पसंद के नौकरशाहों को मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के तौर पर नियुक्त करती है। जस्टिस केएम जोसेफ, अजय रस्तोगी, अनिरुद्ध बोस, ऋषिकेश रॉय और जस्टिस सीटी रविकुमार की 5 जजों वाली संविधान पीठ चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केंद्र से कड़े सवाल किए। इस दौरान शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 324 (2) का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें CEC/EC के चयन और नियुक्ति के लिए कानून बनाने की बात कही गई है लेकिन पिछले 7 दशकों में कुछ नहीं किया गया। बेंच ने कहा, ‘यह दिखाता है कि संविधान की चुप्पी का किस तरह शोषण होता है।’

अनुच्छेद 324(2) में क्या है जिसका सुप्रीम कोर्ट ने किया जिक्र
आखिर अनुच्छेद 324 (2) में है क्या? संविधान का यह अनुच्छेद कहता है, ‘चुनाव आयोग मुख्‍य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों से, यदि कोई हों, जितने राष्ट्रपति समय-समय पर तय करें, मिलकर बनेगा। मुख्‍य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, संसद की तरफ से बनाए गए कानून के प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।’ सुप्रीम कोर्ट का इशारा इसी अनुच्छेद की तरफ था और उसने पूछा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया बनाने के खातिर 72 वर्षों में कोई कानून क्यों नहीं बना।

6 साल का कार्यकाल लेकिन 2004 से ऐसा नहीं हुआ
सुप्रीम कोर्ट ने 2004 के बाद मुख्य चुनाव आयुक्तों के छोटे कार्यकाल को लेकर भी सवाल किए। संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस के.एम. जोसफ ने कहा कि साल 2004 से देखें तो किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त ने 6 साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है। यूपीए सरकार के 10 साल के शासन में 6 मुख्य चुनाव आयुक्त हुए। एनडीए सरकार के 8 वर्षों में 8 मुख्य चुनाव आयुक्त हो चुके हैं। यह चिंताजनक है। चूंकि संविधान इस बारे में चुप है तो उसकी चुप्पी का फायदा उठाया जा रहा है। कोई कानून नहीं है इसलिए वे (केंद्र) कानूनन सही भी हैं। कानून के अभाव में कुछ किया भी नहीं जा सकता है।

उत्तराखंड : युवाओं के लिए अच्छी खबर, अगले महीने इतने पदों पर निकलेगी भर्ती

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देहरादून: सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे बेरोजगार युवाओं के लिए अच्छी खबर है। सरकार ने खाली पदों को भरने का अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत लोक सेवा आयोग अगले महीने 519 पदों पर भर्ती निकालने वाला है। इसके लिए सभी तैयारियां आयोग की ओर से पूरी कर ली गई है। अगर आप भी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, तो तैयारी और तेजी कर दें।

विभिन्न विभागों में समूह-ग के 519 पदों पर भर्ती शुरू होने वाली है। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने इसकी तैयारी तेज कर दी है। अधियाचन से जुड़ी खामियां भी दूर की जा रही हैं। राज्य लोक सेवा आयोग के पास अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की करीब 18 समूह-ग भर्तियों की जिम्मेदारी है।

आयोग अब तक पुलिस कांस्टेबल, पटवारी-लेखपाल, फॉरेस्ट गार्ड, सहायक लेखाकार और बंदीरक्षक के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर चुका है। अगले सप्ताह आयोग विभिन्न विभागों में कनिष्ठ सहायक के 519 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी करेगा। अधियाचन में कई विभागों से जुड़ी कुछ गलतियां और कमियां हैं, जिसके लिए इसे लौटा दिया गया था।

आयोग के सचिव जीएस रावत ने बताया कि अधियाचन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कई विभागों में भर्ती होने के कारण विभागों की अलग-अलग सेवा नियमावलियों का अध्ययन किया जा रहा है। इसी हिसाब से नवंबर के अंतिम सप्ताह में कनिष्ठ सहायक भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा।

कनिष्ठ सहायक के बाद राज्य लोक सेवा आयोग कृषि, पशुपालन और उद्यान विभाग में समूह-ग के 463 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जनवरी में जारी करेगा। कैलेंडर के हिसाब से दिसंबर में पुलिस कांस्टेबल भर्ती के चलते कोई भी नया विज्ञापन जारी नहीं होगा।