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सेना के पांच जवान शहीद, ऑपरेशन जारी, इंटरनेट सेवा बंद

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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में कांडी वन क्षेत्र में आतंकियों से मुठभेड़ में सेना के पांच जवान शहीद हो गए. पहले दो जवानों के शहीद होने और एक अधिकारी समेत चार के जख्मी होने की जानकारी सामने आई थी, इसके बाद घायलों में से तीन और ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. उत्तरी कमान के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के राजौरी में अभियान के दौरान आतंकियों ने एक विस्फोट किया, जिसमें सेना के जवान शहीद हो गए.क्षेत्र में सेना का अभियान जारी है. सुरक्षा के लिहाज से जिले में इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया है.

सेना ने एक बयान में कहा कि यह घटना तब हुई, जब सेना की टीम राजौरी सेक्टर के कंडी वन क्षेत्र में तलाशी अभियान चला रही थी. टीम मंगलवार को जम्मू क्षेत्र के भाटा धूरियन के तोता गली इलाके में सेना के एक ट्रक पर घात लगाकर हमला करने वाले आतंकवादियों के एक समूह का पता लगाने के लिए खुफिया जानकारी मिलने पर अभियान चला रही है. कंडी जंगल के घनी वनस्पति और चट्टानी इलाके में एक गुफा में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना के आधार पर गुरुवार को एक संयुक्त अभियान शुरू किया गया.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकियों का एक समूह क्षेत्र में फंसा हुआ है. सेना की उत्तरी कमान की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, “राजौरी सेक्टर में कांडी वन में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में विशिष्ट सूचना के आधार पर तीन मई को संयुक्त अभियान शुरू किया गया था. शुक्रवार सुबह करीब साढ़े सात बजे तलाशी दल ने एक गुफा में छिपे आतंकवादियों के एक समूह को घेरा. आतंकियों ने इसके जवाब में विस्फोट कर दिया. बयान में कहा गया है कि आस-पास के क्षेत्रों से अतिरिक्त टीम को मुठभेड़ स्थल भेजा गया है और घायल सैन्यकर्मियों को उधमपुर में कमान अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

जमीन के लिए जमकर गोलीबारी, 6 लोगों की हत्या

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मध्यप्रदेश :मुरैना में जमीनी विवाद में छह लोगों की गोली मारकर हत्या करने का मामला सामने आया है। गोलीबारी में छह लोगों की मौत हो गई है, जबकि दो लोग गंभीर हैं। जानकारी के अनुसार जिले के सिंहोंनिया थाना अंतर्गत लेपा गांव में शुक्रवार सुबह धीर सिंह ने हथियारों सहित गजेंद्र सिंह के घर पर पुरानी रंजिश को लेकर हमला किया था। दोनों परिवारों के बीच 2013 से घूरे पर कूड़ा डालने को लेकर विवाद चल रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पुरानी रंजिश में धीर सिंह ने गजेंद्र सिंह के परिवार के छह लोगों को गोली मारी, जिनमें तीन महिला और तीन पुरुषों को गोली लगी। गोली लगने से तीन पुरुष और दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि एक महिला ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। फिलहाल दो गंभीर अस्पताल में भर्ती हैं। घटना के बाद गांव में तनाव के हालात हैं। भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

बताया जा रहा है कि घटना के बाद आरोपी गांव छोड़कर फरार हो गए हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा है। वहीं, घायलों को पुलिस लाइन जिला चिकित्सालय में भर्ती किया गया है। जिले के प्रभारी पुलिस अधीक्षक ने घटना की गंभीरता को देखते हुए गांव में भारी संख्या में पुलिस बल भेजा है। विवाद के दौरान मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने घटना का वीडियो भी बनाया है, जो कि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

बताया जा रहा है कि 10 साल पहले 2013 में धीर सिंह तोमर और गजेंद्र सिंह तोमर के परिवार के बीच विवाद हुआ था, इस दौरान धीर सिंह के परिवार के दो लोगों की मौत हो गई थी। हत्या का आरोप गजेंद्र सिंह के परिवार पर लगा था। जिसके बाद कोर्ट में केस चला और फिर बाद में दोनों परिवारों ने सामाजिक तौर पर समझौता कर लिया था। सुलह होने के बाद गजेंद्र सिंह का परिवार लेपा गांव में फिर से रहने के लिए पहुंचा था।

शुक्रवार सुबह पुराने जमीनी विवाद को लेकर धीर सिंह के परिवार के लोगों ने गजेंद्र सिंह के परिवार पर पहले लाठी डंडों से हमला किया, जब विवाद और बढ़ा तो धीर सिंह के पक्ष के श्यामू और अजीत ने मिलकर गजेंद्र सिंह और उसके परिवार पर गोलियां चलाना शुरू कर दी। इस दौरान तीन लोगों की गोली लगने से मौत हो गई, बाद में दो और लोगों ने दम तोड़ दिया।

बड़ी खबर: राजौरी में सेना के दो जवान शहीद, अधिकारी समेत चार घायल, मुठभेड़ जारी

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जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के कंडी इलाके में आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ में दो जवान शहीद हो गए हैं। जबकि, एक अधिकारी समेत चार जवान घायल बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार सेना को राजौरी सेक्टर के कंडी जंगल में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में जानकारी मिली थी। विशेष सूचना पर एक संयुक्त अभियान शुरू किया गया था। तलाशी के दौरान आतंकियों को सुरक्षाबलों ने घेर लिया और मुठभेड़ शुरू हो गई थी।

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच शुक्रवार को मुठभेड़ हुई। तलाशी अभियान के दौरान आतंकियों ने विस्फोटक से ब्लास्ट किया। एक अधिकारी सहित चार जवान इस हमले में घायल हो गए हैं। दो जवान शहीद हो गए हैं। घायल कर्मियों को उधमपुर के कमांड अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसी बीच जम्मू-कश्मीर के राजौरी में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है।

इलाके में आतंकियों के समूह को सुरक्षाबलों ने घेर रखा है। सुबह से शुरू हुई ये मुठभेड़ अभी भी जारी है। सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला हुआ है। इलाके में 2 से 3 आतंकवादियों के छिपे होने की खबर मिली थी। जिसके बाद से सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया था। सुबह से जारी यह मुठभेड़ राजौरी जिले के बनयारी पर्वतीय क्षेत्र के डोक इलाके की बताई जा रही है। राजौरी में जारी मुठभेड़ के बीच एहतियातन इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि शुक्रवार को इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद को फिलहाल के लिए बंद कर दिया गया है।

20 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में हुए आतंकी हमले में सेना के पांच जवान बलिदान हो गए थे। इस हमले के बाद से ही भारतीय सेना लगातार आतंकियों के खिलाफ अभियान चला रही है। जम्मू-कश्मीर में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही बुधवार से ही घाटी के अलग-अलग इलाके में आतंकियों को ढेर करने का सिलसिला लगातार जारी है।

उत्तराखंड : पराक्रम और वीरता के 136 गौरवशाली वर्ष, पढ़ें गढ़वाल राइफल का इतिहास

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आज के ही दिन गढ़वाल राइफल की स्थापना हुई थी। स्थापना के बाद के गढ़वाल राइफल के इतिहास को तो सभी जानते हैं, लेकिन उससे पहले भी जब हमारे वीर जवानों ने अपने युद्ध का लोहा मनाया था। ऐसे कारनामें कर दिखाए थे, जिनका नतीजा आज की गढ़वाल राइफल है। एक कॉम जो बलभद्र सिंह नेगी जैसा आदमी पैदा कर सकती है उनकी अपनी अलग बटालियन होनी चाहिए ” । अफगान युद्ध में सूबेदार बलभद्र सिंह के अद्वितीय साहस को देखकर उस समय के कमांडर इन चीफ मार्शल एसएस रॉबर्ट्स के इन्हीं शब्दों से शुरुआत होती है गढ़वाल रेजिमेंट की स्थापना की और एक ऐसे शौर्य गाथा की, जिसकी बहादूरी की कायल आज भी पूरी दूनिया है।

सूबेदार बलभद्र सिंह ने कमांडर इन चीफ को अलग से गढ़वाली रेजीमेंट बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने गढ़वालियों की अलग रेजीमेंट बनाने का प्रस्ताव तत्कालीक वायस राय लाड डफरिन के पास भेजा। अप्रैल 1887 में दूसरी बटालियन तीसरी गोरखा रेजीमेंट की स्थापना के आदेश दिए गए, जिसमें छह कंपनियां गढ़वालियों की और दो कंपनियां गोरखाओं की थी। पांच मई 1887 को चौथी गोरखा को बटालियन क्षेत्र के कालौडांडा (लैंसडौन का प्राचीन नाम), पहुंची इसके बाद में तत्कालीन वायसराय लाड लैंसडौन के नाम पर जाना गया।

thakur balbhadr singh negi

1891 में 2-3 गोरखा रेजीमेंट की दो कंपनियों से एक गोरखा पलटन 2-3 क्वीन अलेक्टजेन्टास आन (बटालियन का नाम) खड़ी की गई और शेष बटालियन को दोबारा नए बंगाल इन्फैंट्री की 39 वी गढ़वाल रेजीमेंट के नाम से जाना गया। बैज से गोरखाओं की खुखरी हटाकर उसका स्थान फोनिक्स बाज को दिया गया। इसने गढ़वाल राइफल्स को अलग रेजीमेंट की पहचान दी। 1891 में फोनिक्स का स्थान माल्टीज क्रास ने लिया। इस पर द गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट अंकित था। बैज के ऊपर पंख फैलाए बाज थे, यह पक्षी शुभ माना जाता था। इससे गढ़वालियों की सेना में अपनी पहचान का शुभारंभ हुआ।

अफगान युद्ध के दौरान कमांडर इन चीफ सूबेदार बलभ्रद सिंह की वीरता के कायल होग गए, यही वजह रही कि सूबेदार बलभद्र सिंह ने कमांडर इन चीफ को अलग से गढ़वाली रेजीमेंट बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने गढ़वालियों की अलग रेजीमेंट बनाने का प्रस्ताव तत्कालीक वायस राय लाड डफरिन के पास भेजा।

अप्रैल 1887 में दूसरी बटालियन तीसरी गोरखा रेजीमेंट की स्थापना के आदेश दिए गए, जिसमें छह कंपनियां गढ़वालियों की और दो कंपनियां गोरखाओं की थी। पांच मई 1887 को चौथी गोरखा को बटालियन क्षेत्र के कालौडांडा (लैंसडौन का प्राचीन नाम), पहुंची इसके बाद में तत्कालीन वायसराय लाड लैंसडौन के नाम पर जाना गया।

1891 में 2-3 गोरखा रेजीमेंट की दो कंपनियों से एक गोरखा पलटन 2-3 क्वीन अलेक्टजेन्टास आन (बटालियन का नाम) खड़ी की गई और शेष बटालियन को दोबारा नए बंगाल इन्फैंट्री की 39 वी गढ़वाल रेजीमेंट के नाम से जाना गया। बैज से गोरखाओं की खुखरी हटाकर उसका स्थान फोनिक्स बाज को दिया गया। इसने गढ़वाल राइफल्स को अलग रेजीमेंट की पहचान दी। 1891 में फोनिक्स का स्थान माल्टीज क्रास ने लिया। इस पर द गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंट अंकित था। बैज के ऊपर पंख फैलाए बाज थे, यह पक्षी शुभ माना जाता था। इससे गढ़वालियों की सेना में अपनी पहचान का शुभारंभ हुआ।

19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत के सीमावर्ती अभियानों के साथ-साथ विश्व युद्धों और स्वतंत्रता के बाद लड़े गए युद्धों में भी गढ़वालियों ने अपनी वीरता और युद्ध कौशल का लोहा बनवाया। गढ़वाल राइफल में गढ़वाल क्षेत्र के सात जिलों चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी, देहरादून, पौड़ी गढ़वाल और हरिद्वार के जवानों को भर्ती किया जाता है।

गढ़वाल स्काउट्स जो स्थायी रूप से जोशीमठ में तैनात हैंऔर 121 इंफ बीएन टीए और 127 इन्फ बीएन टीए (इको) और 14 आरआर, 36 आरआर, 48 आरआर बटालियन सहित प्रादेशिक सेना की दो बटालियन भी रेजिमेंट का हिस्सा हैं। तब से पहली बटालियन को मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री में बदल दिया गया।

1887 तक गढ़वालियों को बंगाल इंफैंट्री और पंजाब फ्रंटियर फोर्स से संबंधित गोरखाओं की पांच रेजिमेंटों में शामिल किया गया था। सिरमूर बटालियन (बाद में दूसरा गोरखा), जिसने 1857 में दिल्ली की घेराबंदी में प्रसिद्धि हासिल की थी। उस समय उसका हिस्सा 33 प्रतिशत गढ़वाली योद्धा थे। मूल रूप से गढ़वाली योद्धाओं की हासिल की गई सभी उपलब्धियों का श्रेय गोरखाओं को दिया जाता था।

बटालियन गठन

प्रथम गढ़वाल राइफल्स-05 मई 1887 को अल्मोड़ा में गाठित और 04 नवंबर 1887 को लैंसडौन में आगमन

द्वितीय गढ़वाल राइफल्स-01 मार्च 1901 को लैंसडौन में गठित

तृतीय गढ़वाल राइफल्स- 20 अगस्त 1916 को लैंसडौन में

चौथी गढ़वाल राइफल्स – 28 अगस्त 1918 को लैंसडौन में

पांचवी गढ़वाल राइफल्स – एक फरवरी 1941 को लैंसडौन में

छठवीं गढ़वाल राइफल्स 15 सितंबर 1941 को लैंसडौन में

सातवीं गढ़वाल राइफल्स- एक जुलाई 1942 को लैंसडौन में

आठवीं गढ़वाल राइफल्स- एक जुलाई 1948 को लैंसडौन में

नौवी गढ़वाल राइफल्स- एक जनवरी 1965 को कोटद्वार में

दसवीं गढ़वाल राइफल्स- 15 अक्टूबर 1965 को कोटद्वार में

ग्याहवीं गढ़वाल राइफल्स- एक जनवरी 1967 को बैंगलौर में

बारहवीं गढ़वाल राइफल्स- एक जून 1971 को लैंसडौन में

तेरहवीं गढ़वाल राइफल्स- एक जनवरी 1976 को लैंसडौन में

चौदहवीं गढ़वाल राइफल्स- एक सितंबर 1980 को कोटद्वार में

सोलहवीं गढ़वाल राइफल्स – एक मार्च 1981 को कोटद्वार में

सत्रहवी गढ़वाल राइफल्स- एक मई 1982 को कोटद्वार में

अठारहवी गढ़वाल राइफल्स- एक फरवरी 1985 को कोटद्वार में

उन्नीसवी गढ़वाल राइफल्स- एक मई 1985 को कोटद्वार में

इसके अलावा गढ़वाल स्काउट्स का आठ अप्रैल 1964 को कोटद्वार में 121 इन्फ्रैंट्री बटालियन का एक अप्रैल को कोलकाता, 121 टीए का एक दिसंबर 1982 को लैंसडौन में, चौदह राष्ट्रीय राइफल्स का 14 जून 1994 को कोटद्वार और 36 राष्ट्रीय राइफल्स का एक सितंबर 1994 में, जबकि 48 राष्ट्रीय राइफल्स का पंद्रह सितंबर 2001 को कोटद्वार में गठन हुआ।

कौन होगा NCP का अगला अध्यक्ष? आज हो सकता है एलान!

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NCP का अगला अध्यक्ष कौन होगा, इस पर सस्पेंस बरकरार है। एनसीपी कार्यकर्ता शरद पवार से लगातार एनसीपी अध्यक्ष के पद पर बने रहने की मांग कर रहे हैं। पवार ने गुरुवार को कहा कि वह अगले कुछ दिनों में अंतिम निर्णय लेंगे। कहा जा रहा है कि शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले या फिर पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार पार्टी के अगले अध्यक्ष हो सकते हैं।

एनसीपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर विचार के लिए आज समिति की बैठक होगी। शरद पवार ने ही अध्यक्ष चुनने के लिए 18 सदस्यों की समिति का गठन किया था। समिति शरद पवार से अपने इस्तीफे पर पुनर्विचार की मांग कर सकती है। या फिर नए अध्यक्ष के नाम का एलान भी हो सकता है। पवार को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के लिए प्रस्ताव भी लाया जा सकता है।

शरद पवार ने गुरुवार को कहा कि पार्टी के भविष्य और नया नेतृत्व बनाने के लिए उन्होंने अपने पद से हटने का फैसला लिया है। वाईबी चव्हाण सेंटर के बाहर पवार ने कहा कि वह अगले कुछ दिनों में अंतिम फैसला लेंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं की उपेक्षा नहीं की जाएगी।

पवार के समर्थक पार्टी प्रमुख के रूप में उनके पद पर बने रहने की मांग को लेकर यहां डेरा डाले हुए हैं। वहीं, पवार ने कार्यकर्ताओं से कहा कि मैं जानता हूं कि आप मुझे पार्टी अध्यक्ष पद से हटने का फैसला लेने की अनुमति नहीं देते। शरद पवार ने कहा कि वह महाराष्ट्र के बाहर के कुछ पार्टी सहयोगी इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को मुलाकात करेंगे। मैं एक या दो दिन में अंतिम फैसला लूंगा।

एनसीपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि पवार को कम से कम 2024 तक पार्टी का नेतृत्व करना चाहिए, क्योंकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। शरद पवार ने दो मई को एनसीपी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। पवार ने अपनी आत्मकथा ‘लोक माझे सांगाती’ (लोग मेरे साथी) के लोकार्पण मौके पर इस्तीफे का एलान किया था।

पवार ने कहा था, ‘राज्यसभा सदस्य के रूप में मेरा तीन साल का कार्यकाल बाकी है। इस दौरान मैं पार्टी में कोई पद लिए बिना महाराष्ट्र और देश से जुड़े महत्वपूर्ण मसलों पर ध्यान केंद्रित करूंगा। एक मई, 1960 से एक लंबा वक्त हो चुका है और अब जरूरी है कि मैं पीछे हटूं। मैं आपके साथ रहूंगा, लेकिन पार्टी प्रमुख के रूप में नहीं।’

पवार के इस्तीफे के अचानक एलान से ही पार्टी कार्यकर्ता हैरान रह गए। पार्टी के कुछ कार्यकर्ता फूट-फूटकर रोने लगे। उन्हें मनाने की भी कोशिश की गई। उद्धव गुट के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा है कि शरद पवार के एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ने के निर्णय का महाविकास आघाड़ी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यह एनसीपी का अंदरूनी मामला है।

भीषण सड़क हादसा, आटो में सवार पांच लोगों की मौत, 10 घायल

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उत्तर प्रदेश के बहराइच में भीषण सड़क हादसा हो गया है। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही पांच लोगों की मौत हो गई। लखनऊ मार्ग पर कैसरगंज कस्बे में गुरुवार रात एक बजे भीषण सड़क हादसा हो गया। ऑटो सवार लोगों को एक डंपर ने रौंद दिया। ऑटो ओवर लोडेड था।

हादसे में ऑटो सवार पांच लोगों की मौत हो गई। जबकि 10 लोग गंभीर लोग से घायल हो गए। घायलों को पुलिस ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। मृत लोगों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सभी लोग तिलक कार्यक्रम से वापस अपने घर आ रहे थे।

जिले के हुजूरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पुरैनी निवासी मंशाराम की बेटी का विवाह कैसरगंज कोतवाली क्षेत्र के रुकनापुर गांव से तय हुआ था। गुरुवार को तिलक कार्यक्रम था। जिस पर मंशाराम रिश्तेदार और परिवार के लोगों के साथ तिलक लेकर रूकनापुर गांव ऑटो से गया था।

तिलक कार्यक्रम निपटाने के बाद सभी रात में वापस लौट रहे थे। रात एक बजे के आसपास सभी ऑटो सवार लखनऊ- बहराइच मार्ग पर कैसरगंज कोतवाली के मदनी हॉस्पिटल के सामने पहुंचे। तेज रफ्तार में डंपर ने ऑटो को रौंद दिया। हादसे में मौके पर ही पांच लोगों की मौत हो गई। इसमें लड़की की बहन भी शामिल है। जबकि 10 लोग घायल हुए हैं।

हादसे के बाद मौके पर अफरा तफरी मच गई। कोतवाल दद्दन सिंह, सीओ कमलेश सिंह, एसडीएम महेश कुमार कैथल भी पहुंच गए। पुलिस ने घायलों को एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया। कोतवाल ने बताया कि हादसे में ऑटो सवार पांच लोगों की मौत हुई है। जबकि 10 लोग घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि डंपर चालक दुर्घटना के बाद फरार हो गया है। उसके विरूद्ध मुकदमा दर्ज कर तलाश शुरू कर दी गई है।

साल का पहला चंद्र ग्रहण आज, 130 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, जानें दिखेगा या नहीं?

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2023 का पहला चंद्र ग्रहण 5 मई को पड़ रहा है। यह उपछाया चंद्र ग्रहण होगा। भारत में लोग इस खगोलीय घटना को देख सकेंगे। हालांकि, इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। यह ग्रहण बुद्ध पूर्णिमा पर 130 साल बाद लग रहा है। चंद्र ग्रहण तब होता है, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच से पृथ्वी गुजरती है। वहीं, एक उपछाया चंद्र ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया के हल्के बाहरी क्षेत्र में गुजरता है, जिसे पेनम्ब्रा कहा जाता है। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां पृथ्वी सूर्य की डिस्क के हिस्से को ढकती हुई प्रतीत होती है।

उपछाया चंद्र ग्रहणएशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, प्रशांत, अटलांटिक, हिंद महासागर, अंटार्कटिका और यूरोप के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा। इसे नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, वाराणसी, मथुरा, पुणे, सूरत, कानपुर, विशाखापत्तनम, पटना, ऊटी, चंडीगढ़, उज्जैन, वाराणसी, मथुरा, इंफाल, ईटानगर, कोहिमा सहित भारत के सभी शहरों में देखा जा सकेगा।

खगोल शास्त्र और हिंदू पंचांग के अनुसार, भारत में चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स की नमानें तो भारत के कुछ हिस्सों में चंद्र ग्रहण को लोग देख सकते हैं। साल 2023 का पहला चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार 5 मई की रात 8 बजकर 44 मिनट से शुरू होगा। यह 6 मई की रात 1 बजकर 1 मिनट तक चलेगा। चंद्र ग्रहण का उच्चतम काल रात 10 बजकर 52 मिनट पर होगा।

उपच्छाया चंद्र ग्रहण भारतीय शहरों में कब दिखेगा गा?

नई दिल्ली: रात 8:44 (5 मई) बजे से 1:01 बजे (6 मई)
मुंबई: रात 8:44 बजे से 1:01 बजे (6 मई)
गुरुग्राम: रात 8:44 बजे (5 मई) से 1:01 बजे (6 मई)
हैदराबाद: रात 8:44 बजे (5 मई) से 1:01 बजे (6 मई)
बेंगलुरु: रात 8:44 बजे (5 मई) से 1:01 बजे (6 मई)
चेन्नई: रात 8:44 बजे (5 मई) से 1:01 बजे (6 मई)
कोलकाता: रात 8:44 बजे (5 मई) से 1:01 बजे (6 मई)
भोपाल: रात 8:44 बजे (5 मई) से 1:01 बजे (6 मई)
चंडीगढ़: रात 8:44 बजे (5 मई) से 1:01 बजे (6 मई)
पटना: रात 8:44 बजे (5 मई) से 1:01 बजे (6 मई)
अहमदाबाद: रात 8:44 बजे (5 मई) से 1:01 बजे (6 मई)
विशाखापत्तनम: रात 8:44 बजे (5 मई) से 1:01 बजे (6 मई)
गुवाहाटी: रात 8:44 बजे (5 मई) से 1:01 बजे (6 मई)
रांची: रात 8:44 बजे (5 मई) से 1:01 बजे (6 मई)
इंफाल: रात 8:44 बजे (5 मई) से 1:01 बजे (6 मई)
ईटानगर: रात 8:44 बजे (5 मई) से 1:01 बजे (6 मई)

उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने के आदेश, अब तक 9 हजार लोग शिफ्ट

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इंफाल: मणिपुर में हालात हर दिन खराब होते जा रहे हैं. बुधवार को आदिवासियों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी. इसके बाद 8 जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया. सरकार ने दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया गया है. हिंसाग्रस्त इलाकों में धारा 144 लागू है. पूरे राज्य में 5 दिनों के लिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है.

ऑल इंडिया ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन ने बुधवार को आदिवासी एकजुटता मार्च बुलाया था. इसी दौरान आदिवासी और गैर-आदिवासी समुदायों में झड़प हो गई. आदिवासी समुदाय उस मांग का विरोध कर रहा था, जिसमें गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिया जाए.

मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि मैतेई समुदाय की मांग पर विचार किया जाए. 4 महीने के भीतर केंद्र को इसकी सुझाव भेजने को कहा गया है. इसी आदेश के बाद आदिवासी और गैर-आदिवासियों के बीच हिंसा शुरू हो गई. जगह-जगह आगजनी और हिंसा की खबर है. हालात को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने कई राउंड आंसू गैस के गोले भी दागे, लेकिन हिंसा नहीं रुकी. अब आर्मी और असम राइफल्स की 55 टुकड़ियों को तैनात किया गया है.

मणिपुर में हिंसा को देखते हुए सरकार ने उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया है. राज्यपाल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि ‘‘समझाने और चेतावनी के बावजूद स्थिति काबू में नहीं आने पर ‘देखते ही गोली मारने’ की कार्रवाई की जा सकती है. राज्य सरकार के आयुक्त (गृह) द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के प्रावधानों के तहत जारी की गई है. राज्य के इम्फाल पश्चिम, कैकचिंग थोऊबल, जिरिबाम, बिश्नुपुर, चूड़ाचंदपुर, कांगपोकपी और तेनग्नोउपाल में कर्फ्यू लागू किया गया है.

सेना के प्रवक्ता ने बताया कि अब तक 9,000 लोगों को सुरक्षाबलों ने हिंसा प्रभावित इलाकों से निकालकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया है. प्रवक्ता ने बताया कि करीब 5,000 लोगों को चुराचांदपुर में सुरक्षित गृहों में पहुंचाया गया, वहीं 2,000 लोगों को इंफाल घाटी में और अन्य 2,000 लोगों को तेनुगोपाल जिले के सीमावर्ती शहर मोरेह में स्थानांतरित कर दिया गया है.

गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से फोन पर बात कर हालात की जानकारी ली. बीरेन सिंह ने आज सुबह एक वीडियो मैसेज जारी कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की. केंद्र ने पूर्वोत्तर राज्य के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में तैनाती के लिए RAF की टीमों को भी भेजा है. RAF की पांच कंपनियों को इंफाल एयरलिफ्ट किया गया है, जबकि 15 अन्य जनरल ड्यूटी कंपनियों को भी राज्य में तैनाती के लिए तैयार रहने को कहा गया है.

मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने कहा कि हिंसा की वजह दो समुदायों के बीच गलतफहमियां हैं. लंबे समय से चली आ रही शिकायतों को सही तरीके से लोगों की सलाह के जरिए हल कर लिया जाएगा. शांति बनाए रखें. मैतेई एक गैर-आदिवासी समुदाय है. यह मणिपुर की आबादी का 53% हिस्सा है. ये मुख्य रूप से इस समुदाय के लोग मणिपुर घाटी में रहते हैं. पिछले 10 साल से ये समुदाय ST का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे हैं.

भैरों ग्लेशियर टूटने से केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग बंद

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रुद्रप्रयाग: केदारनाथ यात्रा पैदल मार्ग एक बार फिर बंद हो गया है। पैदल मार्ग आज दिन में ही अब तक दो बार ग्लेशियर टूटने से बंद हो चुका है, जिससे यात्रा प्रभावित हो रही है।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने अवगत कराया है कि केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग विगत सायं को भैंरों गदेरे एवं कुबेर ग्लेशियर पर ग्लेशियर टूटने के कारण केदारनाथ यात्रा मार्ग आवागमन हेतु बंद हो गया था।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में यात्रा मार्ग को सुचारू करने के लिए DDMA, SDRF, DDRF, NDRF, YMF व पुलिस के जवानों ने दोनों ग्लेशियरों से बर्फ हटाने का कार्य किया जा रहा है।

भैंरों ग्लेशियर से बर्फ हटाने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जबकि कुबेर ग्लेशियर पर बर्फ हटाने का कार्य किया जा रहा है, जो कि पैदल यात्रा कर रहे तीर्थ यात्रियों के लिए ही यात्रा मार्ग खोल दिया गया था। लेकिन,  2 बजकर 25 मिनट पर भैरों ग्लेशियर पर दुबारा ग्लेशियर टूटने के कारण यात्रा मार्ग आवाजाही हेतु पूर्णतः बंद हो गया हैl

DM मयूर दीक्षित ने केदारनाथ धाम पैदल यात्रा कर रहे तीर्थ यात्रियों से अपील की है कि यात्रा मार्ग पूरी तरह से सुचारू न होने तक केदारनाथ की यात्रा पर न जाएं जिस स्थान पर हैं उसी स्थान पर सुरक्षित रहें l उन्होंने यह भी कहा कि जो यात्री हैली सेवा से दर्शन करना चाहते हैं वो हैली सेवा के माध्यम से केदारनाथ धाम के दर्शन कर सकते हैं l

उन्होंने यात्रा मार्ग में दोनों ग्लेशियर पर तैनात SDRF, RF, SDRF, NDRF, YMF व पुलिस के जवानों को निर्देश दिए कि अपनी सुरक्षा के साथ ही तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखें l

एक और माफिया का सफाया, गैंगस्टर अनिल दुजाना मुठभेड़ में ढेर

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मेरठ : गैंगस्टर अनिल दुजाना को एसटीएफ ने मुठभेड़ में ढेर कर दिया है। जानकारी के अनुसार कुख्यात अनिल दुजाना के मेरठ में भोला झाल पर सक्रिय होने की पुख्ता जानकारी होने के बाद एसटीएफ ने उसे चारों ओर से घेर लिया। बताया गया कि पुलिस पर फायरिंग करते हुए वह फरार होने की कोशिश कर रहा था। इसी बीच पुलिस की गोली लगने से उसकी मौत हो गई।

अनिल दुजाना पर यूपी समेत अन्य राज्यों में 64 हत्या, रंगदारी, फिरौती आदि के केस दर्ज हैं। बादलपुर का दुजाना गांव कभी कुख्यात सुंदर नागर उर्फ सुंदर डाकू के नाम से जाना जाता था। सत्तर और अस्सी के दशक में सुंदर का दिल्ली-एनसीआर में खौफ था।

उसने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक को जान से मारने की धमकी दे दी थी। इसी दुजाना गांव का है अनिल नागर उर्फ अनिल दुजाना। पुलिस रिकॉर्ड में 2002 में गाजियाबाद के कवि नगर थाने में इसके खिलाफ हरबीर पहलवान की हत्या का पहला मुकदमा दर्ज हुआ। मुजफ्फरनगर के रोहाना में भी एक हत्या के मामले में वह शामिल रहा था।