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राजाजी टाइगर रिजर्व के कोर जोन में कैबिनेट मंत्री के बेटे की शादी के लिए ताक पर रखे नियम…

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हरिद्वार। राजाजी टाइगर रिजर्व की हरिद्वार रेंज के अंतर्गत स्थित सुरेश्वरी देवी मंदिर क्षेत्र में प्रस्तावित कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे की शादी समारोह को लेकर नियमों के कथित उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं। यह क्षेत्र टाइगर रिजर्व के कोर जोन में आता है, जहां माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के तहत केवल धार्मिक पूजा-अर्चना की अनुमति है और अन्य किसी प्रकार की गतिविधियां प्रतिबंधित हैं।

सूत्रों और स्थानीय स्तर पर उठी शिकायतों के अनुसार, आज 26 अप्रैल को एक कैबिनेट मंत्री के पुत्र के विवाह समारोह का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों और कई गणमान्य अतिथियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। आरोप है कि आयोजन स्थल पर अस्थायी पंडाल, जनरेटर, विद्युत व्यवस्था, वाटर कूलर, पंखे और डीजे जैसी सुविधाओं की तैयारी की जा रही है। साथ ही भोजन बनाने के लिए लकड़ी और गैस के उपयोग के साथ ही बड़े स्तर पर टेंट और अन्य ढांचे खड़े किए गए।

स्थानीय पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े जानकारों का कहना है कि टाइगर रिजर्व के कोर जोन में इस प्रकार का आयोजन वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के विपरीत हो सकता है। विशेष रूप से आग लगने के खतरे और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन में बाधा की आशंका भी जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, आयोजन की तैयारियों में वाहनों की आवाजाही और भारी सामग्री के परिवहन की गतिविधियां भी क्षेत्र में देखी गई हैं, जिससे वन्यजीवों की गतिविधियों पर प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

इस बीच यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि वन विभाग के कुछ अधिकारी एवं कर्मचारी मौके पर व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले को लेकर अब नियमों के अनुपालन और कोर जोन में गतिविधियों की अनुमति पर सवाल उठने लगे हैं। पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों ने इस पूरे प्रकरण की जांच और स्पष्टता की मांग की है।

IGI एयरपोर्ट पर टेक-ऑफ के दौरान विमान के इंजन में लगी आग, 232 यात्री थे सवार, 6 झुलसे

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नई दिल्ली। राजधानी के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर शनिवार देर रात एक बड़ा हादसा टल गया। स्विस एयर की उड़ान LX147, जो दिल्ली से ज्यूरिख के लिए रवाना होने वाली थी, टेक-ऑफ के दौरान तकनीकी खराबी का शिकार हो गई।

जानकारी के अनुसार, टेक-ऑफ रन के दौरान विमान के इंजन नंबर-1 में अचानक खराबी आ गई और उसमें आग लग गई। उस समय विमान की गति करीब 104 नॉट्स थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पायलट ने तत्काल टेक-ऑफ रद्द कर विमान को रनवे पर ही रोक दिया।

विमान में सवार सभी 232 यात्रियों को आपातकालीन स्लाइड के माध्यम से सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि, स्लाइड से उतरते समय छह यात्री घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना के बाद एहतियातन रनवे संख्या 28 को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। एयरलाइन की ओर से यात्रियों के लिए होटल और वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स तैनात की गई है। समय रहते पायलट की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई के चलते एक बड़ा हादसा टल गया।

लू के बीच बिजली की मांग में उछाल, 252 गीगावॉट के पार पहुंचा आंकड़ा

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नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के चलते बिजली की मांग में तेज उछाल दर्ज किया गया है। शुक्रवार को देश में बिजली की पीक डिमांड 252.07 गीगावॉट (GW) तक पहुंच गई, जो इस सीजन का अब तक का उच्चतम स्तर है।

ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार यह बढ़ोतरी ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में लगातार लू चलने की चेतावनी दी है। विभाग ने मई और जून में तापमान और अधिक बढ़ने का अनुमान जताया है।

आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को बिजली की पीक मांग करीब 240 गीगावॉट रही, जबकि अधिकतम आपूर्ति 240.12 गीगावॉट दर्ज की गई थी। वहीं बुधवार को यह आंकड़ा 239.70 गीगावॉट था। लगातार बढ़ती मांग यह संकेत दे रही है कि गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की खपत भी तेजी से बढ़ रही है।

ऊर्जा विशेषज्ञ राजेश चौरसिया के अनुसार, तापमान में वृद्धि के साथ कूलिंग उपकरणों, जैसे एयर कंडीशनर, कूलर और रेफ्रिजरेशन—का इस्तेमाल बढ़ जाता है, जिससे बिजली की मांग में अचानक उछाल आता है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने पर खपत में और वृद्धि की संभावना है। सरकार ने पहले ही अनुमान लगाया था कि इस गर्मी में बिजली की पीक मांग 270 गीगावॉट तक पहुंच सकती है। ताजा आंकड़े इस अनुमान के करीब पहुंचते नजर आ रहे हैं।

गौरतलब है कि इस साल की मांग ने पिछले वर्ष जून में दर्ज 242.77 गीगावॉट के स्तर को भी पार कर लिया है। ऐसे में बिजली मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और राज्यों को आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लू का असर जारी रहता है, तो आने वाले हफ्तों में बिजली की मांग नए रिकॉर्ड बना सकती है।

चारधाम यात्रा के बीच बड़ा प्रशासनिक फैसला: सोहन सिंह बने बदरी-केदार मंदिर समिति के स्थायी CEO

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देहरादून। चारधाम यात्रा 2026 के शुरू होते ही उत्तराखंड सरकार ने एक अहम प्रशासनिक निर्णय लेते हुए बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) को स्थायी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) दे दिया है। चमोली में तैनात पीसीएस अधिकारी सोहन सिंह को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन के आदेश के तहत उन्हें डिप्टी कलेक्टर पद से मुक्त कर पूर्णकालिक रूप से BKTC का CEO नियुक्त किया गया है।

चारधाम यात्रा को प्रदेश का सबसे बड़ा धार्मिक और आर्थिक आयोजन माना जाता है, जिसमें हर वर्ष लाखों श्रद्धालु केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम पहुंचते हैं। ऐसे में यात्रा की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में बदरी-केदार मंदिर समिति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसके बावजूद यात्रा शुरू होने तक समिति में स्थायी CEO की नियुक्ति नहीं हो पाई थी, जिससे व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे थे।

इससे पहले BKTC के CEO का दायित्व अतिरिक्त प्रभार के रूप में रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा संभाल रहे थे। हालांकि जिला प्रशासन और चारधाम यात्रा जैसे बड़े आयोजन की जिम्मेदारी एक साथ निभाना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। इसी को देखते हुए सरकार ने पूर्णकालिक अधिकारी की नियुक्ति का निर्णय लिया।

सोहन सिंह को प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ चमोली जिले की भौगोलिक और स्थानीय परिस्थितियों की अच्छी समझ है। चमोली ही बदरीनाथ धाम का प्रमुख क्षेत्र है, ऐसे में उनकी नियुक्ति को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शासन को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में यात्रा प्रबंधन को और बेहतर बनाया जा सकेगा।

इससे पहले BKTC के CEO पद पर विजय थपलियाल की नियुक्ति की गई थी, लेकिन उनका कार्यकाल काफी छोटा रहा और यात्रा शुरू होने से ठीक पहले उन्हें पद से हटा दिया गया था। इससे व्यवस्थाओं में अस्थिरता की स्थिति बन गई थी। चारधाम यात्रा के शुरुआती दिनों में केदारनाथ धाम से अव्यवस्थाओं और भीड़ प्रबंधन को लेकर सोशल मीडिया पर कई शिकायतें सामने आई थीं। श्रद्धालुओं ने दर्शन व्यवस्था, सफाई और भीड़ नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए थे, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ा।

ऐसे में स्थायी CEO की नियुक्ति को व्यवस्थाओं में सुधार और प्रशासनिक स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब सोहन सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती यात्रा को सुचारू, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखना होगी। इसके लिए उन्हें मंदिर समिति के साथ-साथ जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य और अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा। चारधाम यात्रा के बीच इस नियुक्ति पर सभी की नजरें टिकी हैं। अब देखना होगा कि नए CEO सोहन सिंह श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और यात्रा को व्यवस्थित बनाने में कितनी सफलता हासिल करते हैं।

देहरादून में पुलिस मुठभेड़: स्कूटी सवार बदमाश घायल, साथी गिरफ्तार

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देहरादून के बसंत विहार थाना क्षेत्र में रविवार को पुलिस चेकिंग के दौरान संदिग्ध स्कूटी सवारों के साथ मुठभेड़ हो गई। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश गोली लगने से घायल हो गया, जबकि उसके साथी को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के अनुसार, 26 अप्रैल 2026 को हरबंसवाला बैरियर पर नियमित चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान बिना नंबर प्लेट की नीली स्कूटी पर सवार दो युवकों को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों बैरियर तोड़कर टी-स्टेट की ओर भाग निकले।

पुलिस टीम ने तुरंत पीछा किया। इस दौरान एक आरोपी ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें एक बदमाश घायल हो गया। उसे उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जबकि दूसरे आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया गया।

घायल आरोपी की पहचान 37 वर्षीय अब्दुला निवासी सहारनपुर के रूप में हुई है। वहीं गिरफ्तार आरोपी शाहनवाज सलमानी (33) वर्तमान में देहरादून के सहसपुर क्षेत्र में रह रहा था। तलाशी के दौरान दोनों के पास से एक-एक अवैध .315 बोर तमंचा, एक खोखा कारतूस और तीन जिंदा कारतूस बरामद किए गए। घटना में प्रयुक्त स्कूटी भी पुलिस ने कब्जे में ले ली है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है।

डोनाल्ड ट्रंप पर हमले की कोशिश नाकाम, सीक्रेट सर्विस ने हमलावर को दबोचा

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump पर हमले की एक बड़ी साजिश को सुरक्षा एजेंसियों ने नाकाम कर दिया। अमेरिकी समयानुसार शनिवार देर रात एक डिनर इवेंट के दौरान यह घटना सामने आई, जब एक संदिग्ध व्यक्ति ने ट्रंप को निशाना बनाने की कोशिश की।

कैसे हुई घटना?

जानकारी के मुताबिक, ट्रंप एक निजी डिनर कार्यक्रम में मौजूद थे, तभी एक हमलावर संदिग्ध तरीके से उनकी ओर बढ़ा। स्थिति को भांपते हुए United States Secret Service के एजेंट्स ने तुरंत कार्रवाई की और हमलावर को जमीन पर गिराकर काबू कर लिया।

एजेंट घायल, हालत स्थिर

इस दौरान हुई झड़प में सीक्रेट सर्विस का एक एजेंट घायल हो गया। बताया जा रहा है कि हमलावर के पास हथियार था और उसने अचानक हमला करने की कोशिश की। हालांकि एजेंट ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहन रखी थी, जिससे उसकी जान बच गई। घायल एजेंट को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है।

ट्रंप सुरक्षित, जांच शुरू

घटना के बाद डोनाल्ड ट्रंप पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें किसी तरह की चोट नहीं आई है। सुरक्षा एजेंसियों ने हमलावर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अभी तक हमलावर की पहचान और उसके मकसद के बारे में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर अमेरिका में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि सीक्रेट सर्विस की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया।

आगे क्या?

फिलहाल, जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमलावर अकेला था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी। इस घटना ने अमेरिका की राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है।

रात के 10 बजे बल्लू जेल से फुर्र: ‘खलनायक रिटर्न्स’ का फर्स्ट लुक वीडियो आउट

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  • टी.एस. लामा

Sanjay Dutt की अपकमिंग फिल्म ‘खलनायक रिटर्न्स’ को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। दमदार अभिनय के लिए मशहूर संजय दत्त एक बार फिर अपने आइकॉनिक एंटी-हीरो अंदाज में दर्शकों के बीच लौटने जा रहे हैं।

हाल ही में ‘धुरंधर’ में एसपी चौधरी के किरदार से सुर्खियां बटोर रहे संजय दत्त ने अब आधिकारिक तौर पर ‘खलनायक रिटर्न्स’ की घोषणा कर दी है। फिल्म का फर्स्ट लुक अनाउंसमेंट वीडियो जारी होते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसने फैंस की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है।

वीडियो में संजय दत्त का बेहद खौफनाक और इंटेंस अवतार देखने को मिल रहा है। लंबे बाल, बढ़ी हुई दाढ़ी और चारों ओर खून-खराबे के बीच उनका अंदाज दर्शकों को 90 के दशक की याद दिला रहा है। वीडियो में उनका डायलॉग— “नायक नहीं, खलनायक हूं मैं”—फिर से गूंजता नजर आता है, जो उनके किरदार की पहचान बन चुका है।

इस अनाउंसमेंट को शेयर करते हुए संजय दत्त ने लिखा, “कुछ कहानियां खत्म नहीं होतीं… वो दोबारा शुरू होती हैं। खलनायक रिटर्न्स।” हालांकि फिल्म की कास्ट और रिलीज डेट को फिलहाल गुप्त रखा गया है।

गौरतलब है कि 1993 में रिलीज हुई फिल्म Khalnayak, जिसे Subhash Ghai ने डायरेक्ट किया था, हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक रही है। इस फिल्म में संजय दत्त ने ‘बल्लू’ का किरदार निभाया था, जो एक ऐसा एंटी-हीरो था जिसने हीरो और विलेन की पारंपरिक छवि को बदल दिया।

अब तीन दशक बाद ‘खलनायक रिटर्न्स’ के साथ संजय दत्त एक बार फिर उसी अंदाज में बड़े पर्दे पर धमाल मचाने को तैयार हैं।

“चूहों ने खा लिए रिश्वत के नोट!”: Supreme Court of India में अजीब दलील पर सख्त टिप्पणी, सजा पर रोक

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नई दिल्ली: Supreme Court of India में शुक्रवार को एक अनोखा मामला सामने आया, जिसने न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्य संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बिहार की एक महिला अधिकारी के खिलाफ रिश्वत मामले की सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि बरामद नकदी को चूहों ने नष्ट कर दिया। इस पर अदालत ने आश्चर्य जताते हुए फिलहाल सजा पर रोक लगा दी और आरोपी को जमानत दे दी।

यह मामला बिहार की चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम ऑफिसर (CDPO) रहीं Aruna Kumari से जुड़ा है। उन पर ₹10,000 की रिश्वत मांगने का आरोप था। उनके खिलाफ Prevention of Corruption Act, 1988 की धारा 7 और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

ट्रायल कोर्ट से बरी, हाईकोर्ट ने ठहराया दोषी

इस प्रकरण में ट्रायल कोर्ट ने अरुणा कुमारी को बरी कर दिया था। हालांकि, Patna High Court ने बाद में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहराया। हाईकोर्ट ने अलग-अलग धाराओं में तीन और चार वर्ष की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट ने यह भी माना था कि जब्त रिश्वत की राशि अदालत में पेश नहीं की जा सकी, क्योंकि कथित रूप से नोट ‘चूहों द्वारा नष्ट’ हो गए थे। हालांकि, मालखाना रजिस्टर में राशि जमा होने का रिकॉर्ड मौजूद था, जिसे अदालत ने पर्याप्त माना।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति J.B. Pardiwala और K.V. Viswanathan की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि जब्त नकदी के ‘चूहों द्वारा नष्ट’ होने का दावा भरोसेमंद नहीं प्रतीत होता और यह राज्य के लिए गंभीर मामला है।

पीठ ने संकेत दिया कि इस तरह के स्पष्टीकरण पर गंभीर सवाल उठते हैं और इसकी गहन जांच आवश्यक है।

सजा पर रोक, जमानत मंजूर

शीर्ष अदालत ने मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अरुणा कुमारी की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है और उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की विस्तृत सुनवाई आगे की तारीख पर की जाएगी।

यह मामला न केवल भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है, बल्कि साक्ष्यों के संरक्षण और पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

सनसनीखेज वारदात: STF आरक्षक के घर हमला, पत्नी-बेटे की मौत, दो बच्चियां गंभीर

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दुर्ग (छत्तीसगढ़)। राज्य के दुर्ग जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। दुर्ग स्थित एसटीएफ कॉलोनी में शनिवार सुबह अज्ञात हमलावर ने एक आरक्षक के घर में घुसकर परिवार पर हमला कर दिया। इस हमले में आरक्षक की पत्नी और बेटे की मौत हो गई, जबकि दो मासूम बच्चियां गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में उनका इलाज जारी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एसटीएफ में पदस्थ आरक्षक ललितेश यादव के क्वार्टर में यह वारदात हुई। हमले में उनकी पत्नी रीना यादव और 9 वर्षीय बेटे आदित्य की जान चली गई। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।

प्रेम संबंध बना जांच का आधार

पुलिस की प्रारंभिक जांच में इस मामले को प्रेम संबंध और घरेलू विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, आरक्षक की कथित प्रेमिका सरोजनी भारद्वाज पर इस हमले को अंजाम देने का आरोप है। घटना के बाद आरोपी महिला फरार हो गई है।

पुलिस ने तेज की तलाश

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित कर दी गई है और आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

बच्चियों की हालत नाजुक

हमले में घायल दोनों बच्चियों की हालत गंभीर बताई जा रही है। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।

ज्योतिर्मठ में भू-धंसाव का खतरा बरकरार, मानसून में बढ़ सकती है जमीन खिसकने की रफ्तार

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चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले स्थित जोशीमठ (ज्योतिर्मठ) में भू-धंसाव का खतरा अभी भी पूरी तरह टला नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार, शहर में जमीन खिसकने की प्रक्रिया धीमी गति से जारी है, लेकिन आगामी मानसून में भारी बारिश होने पर इसकी रफ्तार बढ़ सकती है, जिससे स्थिति फिर गंभीर हो सकती है।

वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि जोशीमठ एक संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है और यहां लगातार निगरानी की जरूरत है। साल 2022 में शुरू हुई भू-धंसाव की समस्या 2023 में बड़े संकट के रूप में सामने आई थी, जब 800 से अधिक मकानों में दरारें पड़ गई थीं और कई परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े थे। रिपोर्टों के अनुसार, जोशीमठ में कुल 2152 मकानों में से 1403 प्रभावित हुए थे। इनमें 472 मकानों के पुनर्निर्माण और 931 की मरम्मत की जरूरत बताई गई थी, जबकि 181 भवनों को खाली कराना पड़ा था।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जोशीमठ क्षेत्र पुराने भू-स्खलन या ग्लेशियर से बने मलबे पर बसा है, जिसके कारण जमीन अस्थिर बनी हुई है। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि शहर में स्लोप खिसकने की प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय रहते मॉनिटरिंग और चेतावनी प्रणाली विकसित कर लोगों को सुरक्षित किया जा सकता है।

वाडिया संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत ने चेतावनी दी है कि मानसून के दौरान यदि जमीन खिसकने की गति बढ़ती है तो हालात फिर बिगड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि केवल प्रभावित मकानों को चिन्हित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम और समय पर विस्थापन की योजना जरूरी है।

सरकार के प्रयास जारी
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, जोशीमठ में भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों में ट्रीटमेंट कार्य शुरू कर दिया गया है। टो प्रोटेक्शन और स्लोप स्टेबलाइजेशन के लिए करीब 100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही सीवरेज, ड्रेनेज और पेयजल से जुड़े कार्यों के टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। हालांकि विस्थापन की प्रक्रिया अब भी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि कई लोग निर्धारित स्थानों पर जाने को तैयार नहीं हैं।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में जोशीमठ के पुनर्विकास के लिए 1658.17 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी थी। इसके तहत “बिल्ड बैक बैटर” सिद्धांतों पर आधारित कार्य तीन वर्षों में पूरा किया जाना है। फिलहाल विशेषज्ञों की चेतावनी और प्रशासन की तैयारियों के बीच जोशीमठ के संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों में मानसून को लेकर चिंता बनी हुई है।