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नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना, जानिए महत्व और पूजा विधि

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आज शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि है। इस दिन कलश स्थापना के साथ नवरात्र शुरू हो गए हैं। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाती है। मां दुर्गा की पूजा करने से साधक ही हर मनोकामना पूरी होती है। इसके साथ ही घर में सुख एवं समृद्धि आती है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना पर 3 दुर्लभ एवं शुभ योग का निर्माण हो रहा है।

इन योग में जगत की देवी मां दुर्गा की पूजा करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होगी। नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां शैलपुत्री हिमालयराज की पुत्री हैं। आइए जानते हैं नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना का मुहूर्त, मां शैलपुत्री की पूजा विधि, आरती भोग और मंत्र सब कुछ।

कलश स्थापना तिथि और मुहूर्त

कलश स्थापना मुहूर्त, द्वि-स्वभाव कन्या लग्न के दौरान है।

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – अक्तूबर 03, 2024 को 12:18 बजे दिन में।

प्रतिपदा तिथि समाप्त – अक्तूबर 04, 2024 को 02:58 बजे।

कलश स्थापना शुभ मुहूर्त।

कन्या लग्न प्रारम्भ – अक्तूबर 03, 2024 को 06:15 बजे

कन्या लग्न समाप्त – अक्तूबर 03, 2024 को 07:21 बजे।

कलश स्थापना मुहूर्त – 06:15 से 07:21।

अवधि – 01 घण्टा 06 मिनट।

कलश स्थापना अभिजित मुहूर्त – 11:46 ए एम से 12:33 बजे।

अवधि – 00 घण्टे 47 मिनट।

मां शैलपुत्री का स्वरूप

देवी शैलपुत्री वृषभ पर सवार हैं। माता ने श्वेत रंग के वस्त्र ही धारण किये हुए हैं। इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प होता है। मां का यह रूप सौम्यता, करुणा, स्नेह और धैर्य को दर्शाता है। मान्यता है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार मां शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती हैं। मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की आराधना करने से चंद्र दोष से मुक्ति भी मिलती है।

पूजा विधि

  • नवरात्रि के पहले दिन प्रातः स्नान कर निवृत्त हो जाएं।
  • फिर मां का ध्यान करते हुए कलश स्थापना करें।
  • कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री के चित्र को स्थापित करें।
  • मां शैलपुत्री को कुमकुम (पैरों में कुमकुम लगाने के लाभ) और अक्षत लगाएं।
  • मां शैलपुत्री का ध्यान करें और उनके मंत्रों का जाप करें।
  • मां शैलपुत्री को सफेद रंग के पुष्प अर्पित करें।
  • मां शैलपुत्री की आरती उतारें और भोग लगाएं।

मां शैलपुत्री पूजा मंत्र

बीज मंत्र- ह्रीं शिवायै नम:

प्रार्थना मंत्र- वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्।   वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।

स्तुति मंत्र- या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

 

DM ने तोड़ा कानूनः ‘‘अंग्रेजी नमक कानून’’ ‘नून’ नदी से जलभरकर दिलाई स्वतत्रंता आन्दोलन की याद

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देहरादून:  प्राकृतिक सौंदर्य के बीच जिलाधिकारी सविन बंसल ने ऐतिहासिक महत्वपूर्ण विरासत स्थल पर बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और विरासत विशेषज्ञों सहित युवाओं के बीच जन संवाद के माध्यम से स्वच्छता तथा जल संरक्षण का संकल्प लेते हुए सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने इस स्थान पर ‘नून’ से नमक आन्दोलन का नेतृत्व किया था।

विगत दिनों से जिलाधिकारी युवाओं और सामाजिक संगठनों के साथ ऐतिहासिक प्राकृतिक जल स्रोतों को चिन्हित करते हुए उनकी स्वच्छता और संरक्षण का कार्य भी कर रहे हैं। गांधी जयंती के अवसर पर ‘‘खारा खेत’ में इस कार्यक्रम का आयोजन इन उद्देश्यों की पूर्ति को और अधिक विस्तार देगा, ऐसा मेरा मानना है।

ऐतिहासिक स्थल खाराखेत में आयोजित स्वच्छता कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए शहीदों की याद में बनाए गए स्मारक पर पुष्प अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया तथा इसके उपरान्त उन्होने इस ऐतिहासिक स्थल पर वृक्षारोपण भी किया। खाराखेत में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने 1930 को ‘नून’ नदी के पानी से नमक बनाकर अंग्रेजों की नीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई थी। जिलाधिकारी ने उस स्थान का भी निरीक्षण किया जहां पर स्वतंत्रता सग्राम सैनानियों ने नमक बनाया था, जिलाधिकारी ने ‘नून’ नदी से जलभरकर स्वतत्रंता आन्दोलन की याद दिलाई।

जिलाधिकारी ने कहा कि देहरादून, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ ऐतिहासिक विरासतों के लिए भी पहचाना जाता है, इसी क्रम में आज हम एक महत्वपूर्ण विरासत स्थल पर एकत्रित हुए हैं। ‘खारा खेत’ में वर्ष 1930 में देहरादून के स्वतंत्रता सेनानियों ने स्थानीय ‘नदी’ में नमक बनाकर अंग्रेजों के नमक कानून का विरोध किया और उस नमक को देहरादून के ‘टाउन हॉल’ में विक्रय किया।

आज हम नगर के बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और विरासत विशेषज्ञों सहित युवाओं के समूह के साथ इस स्थल पर जन संवाद के माध्यम से स्वच्छता तथा जल संरक्षण का संकल्प लेते हुए उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने इस स्थान पर स्वतंत्रता के लिए अपना अमूल्य योगदान दिया।

हाईलाइट्स

DM ने तोड़ा कानूनः ‘‘अग्रेजी नमक कानून’’ ‘नून’ नदी से जलभरकर दिलाई स्वतत्रंता आन्दोलन की याद।

गांधी जयंती को खाराखेत वासियों के साथ मनाने वाले पहले डीएम बने सविन बंसल।

स्वतंत्रता संग्राम में आहूति देने वाले सैनानियों की दिलाई याद, जिनकी स्मृति हो रही थी विस्मृत।

खाराखेत हमारी अमूल्य विरासत में से एक, गुमनाम विरासतों को किया जाएगा पुनर्जीवितः डीएम।

प्राकृतिक संसाधनों, एवं ऐतिहासिक धरोहर के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं को दिया जाएगा हरसंभव सहयोगः डीएम।

डीएम ने खाराखेत स्थल पर बैठने और संवाद-मंथन हेतु स्थान बनाये जाने, जल सयोंजन हेतु मौके पर ही दी स्वीकृति।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री उत्तराखंड की प्रेरणा से ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण कार्यों की गति में आई है तेजी।

ऐतिहासिक स्थलों एवं सांस्कृतिक धरोहर तथा प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण एवं संवर्धन हम सभी की अहम जिम्मेदारी हैः डीएम।

उन्होंने कहा कि विगत दिनों पहाड़ी पेडलर्स के युवाओं द्वारा ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ प्राकृतिक जल स्रोतों को चिन्हित करते हुए उनकी स्वच्छता और संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए जिला प्रशासन निरंतर सहयोग प्रदान करेगा। जिलाधिकारी ने कहा कि सामाजिक संगठन, युवाओं स्कूल के बच्चों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ इस ऐतिहासिक स्थल पर उपस्थित रहने का एक ही उद्देश्य है कि यहां अपनी ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों एवं जल संरक्षण एवं संवर्धन हेतु जनमानस तक एक संदेश जा सके।

स्वच्छता जल संरक्षण ऐतिहासिक स्थलों का संवर्धन एवं संरक्षण आर्थिक प्रगति के साथ-साथ इनको भी संरक्षित रखना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इस दौरान जिलाधिकारी ने स्थानीय लोगों की मांग पर खाराखेत में हेरिटेज पर्यटन दृष्टिकोण से विकसित करने की मांग पर उक्त स्थल पर बैठने, संवाद हेतु निर्माण एवं जल संयोजन हेतु मोके पर स्वीकृति दी तथा पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश सीडीओ को दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड द्वारा विकास के साथ-साथ ऐतिहासिक एवं हेरिटेज स्थलों तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन पर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनकी प्ररेणा से देश एवं राज्य में हमारी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक धरोहरों के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने हेतु विशेष प्रयास गतिमान है। विकास एवं प्राकृतिक संसाधनों स्थलों हेरिटेज की संरक्षण के संवर्धन को साथ-2 लेकर चलना होगा तभी आर्थिक सांस्कृतिक एवं भौतिक विकास की परिकल्पना पूर्ण हो सकती है।

पर्यावरण विशेषज्ञ पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने कहा कि खारा खेत स्थल समूचे भारत वर्ष के लिए एक ऐतिहासिक स्थल और धरोहर है। यह वह स्थान है जो हमें स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद दिलाता है। आज यह ऐतिहासिक स्थल यूं ही वीरानियों में गुमनाम हो गया है। हमें मिलकर इसे इसकी खोई पहचान और गरिमा लौटानी होगी। खारा खेत में चलाया गया स्वच्छता अभियान/ कार्यक्रम में शामिल देहरादून के विभिन्न स्कूलों के छात्रों और पहाड़ी पैडलर्स के सदस्यों द्वारा स्वच्छता अभियान भी चलाया गया।

कार्यक्रम का समापन नून नदी से जल लाकर गांधी पार्क में स्थित गांधी जी के स्मारक में समर्पित किया। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा विभाग द्वारा कार्यक्रम स्थल पर स्वास्थ्य जांच कैंप लगाया गया था जिसमें उपस्थित लगभग 200 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

इस अवसर पर पर्वतीय क्षेत्र के व्यंजनों को प्रमोट कर रहे बूढ़ दादी, हिमालयन ट्रेडिशनल फ़ूड द्वारा मोटे अनाज मँडुवा से बने व्यंजन ढिंढका, झंगोरे से बनी बिरंजी एवं मसूर की दाल से बने व्यंजन बड़ील कार्यक्रम में उपस्थित लोगो को सर्व किये गए। *जिलाधिकारी के कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के पारम्परिक व्यंजनों पर काम करने वाले लोगों को विभिन्न सरकारी कार्यक्रम में बढावा दिया जाएगा।

उपस्थित सभी लोगों बच्चों, अधिकारियों, कार्मिकों को पहाड़ी नाश्ता कराया। इस दौरान जिलाधिकारी ने मालू के पत्तों पर पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद चखा, उन्होंने मालू के बेल अधिक से अधिक लगाने को कहा ताकि प्राकृतिक रूप बने प्लेट आदि का उपयोग कर पर्यावरण सरंक्षण की दिशा में सहयोग पूर्वक आगे बढा जा सके।

इस अवसर पर पर्यावरण विशेषज्ञ पदमश्री कल्याण सिंह रावत, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. संजय जैन, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. निधि रावत, विरासत विशेषज्ञ डॉ लोकेश ओहरी, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, स्थानीय ग्राम प्रधान कार्यक्रम में स्थानीय ग्राम समुदाय, बीटीडीटी, अक्शी पर्वतीय विकास समिति, पहाड़ी पेडलर्स, न्यू विजन, सेर सलीका,जिला प्रशासन स्वास्थ्य विभाग इत्यादि द्वारा भारी संख्या में प्रतिभाग किया गया।

मुख्यमंत्री धामी ने शहीद स्थल रामपुर तिराहा में राज्य आंदोलनकारी शहीदों को दी श्रद्धांजलि

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को शहीद स्थल रामपुर तिराहा, मुजफ्फरनगर, (उ.प्र.) में उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी शहीदों की पुण्य स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए शहीद स्मारक में पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा गोलीकांड में शहीद हुए प्रत्येक राज्य आंदोलनकारी की याद में शहीद स्थल रामपुर में उनकी प्रतिमा लगाए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने शहीद स्थल के लिये भूमि दान करने वाले दिवंगत महावीर शर्मा की प्रतिमा का भी शिलान्यास किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शहीदों के बलिदान एवं परिश्रम से हमें उत्तराखंड राज्य प्राप्त हुआ है। पृथक उत्तराखंड राज्य के लिए चलाए गए आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों को अनेकों यातनाओं और अत्याचारों को सहना पड़ा था।

2 अक्टूबर 1994 को रामपुर तिराहे पर घटित हुए गोली कांड राज्य आंदोलन का सबसे क्रूर और गहरा जख्म देने वाला अध्याय रहा। शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने जा रहे आंदोलनकारियों पर हुए अत्याचारों से मिले घावों को कोई भी उत्तराखंडवासी भुला नहीं सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण और बेहतर भविष्य के लिए आंदोलनकारियों ने अपना वर्तमान बलिदान कर दिया था। उत्तराखण्ड की जनता सदैव इन वीरों की ऋणी रहेगी। उन्होंने कहा राज्य निर्माण आंदोलन में राज्य की महिलाओं ने बढ़ चढ़कर भाग किया, राज्य की महिलाएं कभी अत्याचारों के आगे नहीं झुकी। जिस राज्य के निर्माण के लिए हमारे आंदोलनकारियों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर दिए। राज्य सरकार उस उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना हेतु रात दिन कार्यरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शहीद आंदोलनकारियों के आदर्शों और उनके सपनों को साकार करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।विकल्प रहित संकल्प के मूलमंत्र पर चलते हुए उत्तराखंड में विभिन्न योजनाओं के जरिए राज्य के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास की धारा पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। राज्य सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण लागू किया है । शहीद आंदोलनकारियों के परिवारों को पेंशन देने के साथ ही, आंदोलन के दौरान जेल जाने वाले और घायल हुए सभी सक्रिय आंदोलनकारियों को प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। राज्य आंदोलनकारियों को बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा भी प्रदान की जा रही है।

पृथक राज्य की परिकल्पना में हमारे प्रदेश की डेमोग्राफी को संरक्षित रखने की चिंता भी शामिल थी। राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड की डेमोग्राफी को संरक्षित रखने हेतु प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। डेमोग्राफी को संरक्षित करने का का दायित्व हर किसी ने निभाना है। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में सख्त धर्मांतरण रोधी कानून लागू किया गया है। सरकारी भूमि से अतिक्रमण को हटाने का कार्य जारी है। अब तक 5000 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त करवाया गया है। राज्य में देश का सबसे कड़ा नकल विरोधी कानून और दंगा रोधी कानून भी लागू किया है।

  • रामपुर, गोलीकांड में शहीद हुए प्रत्येक राज्य आंदोलनकारी की शहीद स्थल रामपुर में लगाई जाएगी प्रतिमा : मुख्यमंत्री।
  • शहीदों के बलिदान एवं परिश्रम से हमें उत्तराखंड राज्य प्राप्त हुआ।
  • उत्तराखंड राज्य के बेहतर भविष्य के लिए दिया आंदोलनकारियों ने अपना बलिदान।
  • मातृशक्ति और युवाओं को आगे आकर, समाज का प्रहरी बनकर डेमोग्राफी को संरक्षित करने का दायित्व निभाना है।
  • उत्तराखंड में सख्त भू-कानून लाने की तैयारी कर रही है राज्य सरकार।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हर नागरिक को समान अधिकार देने उद्देश से समान नागरिक संहिता का अधिनियम पास किया गया है। उन्होंने कहा राज्य सरकार बहुत जल्द उत्तराखंड में सख्त भू-कानून को लाने की तैयारी कर रही है। जिसके लिए सभी स्टेकहोल्डर, विशेषज्ञों, आंदोलनकारियों से विचार विमर्श किया जा रहा है। उन्होंने कहा नीति आयोग द्वारा जारी किए गए सतत् विकास लक्ष्यों की रैंकिंग में उत्तराखंड को पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त हुआ है। उत्तराखंड, निवेशकों की पहली पसंद बन रहा है जिसकी वजह से हमारे राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होने शुरु हो गए हैं। राज्य GDP की तर्ज पर GEP की गणना करने वाला देश का प्रथम राज्य बन गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और सहयोग से हम उत्तराखंड को श्रेष्ठ उत्तराखंड बनाने के लिए प्रतिबद्ध होकर निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा जब तक हम आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड नहीं बना लेते, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक ने शहीद राज्य आंदोलनकारियो को नमन करते हुए कहा कि वीर सपूतों की बदौलत हमें राज्य मिला है। उन्होंने कहा रामपुर तिराहा कांड सत्य और अहिंसा की कड़ियों से जुड़ा हुआ है। उत्तराखंड की महिलाओं ने इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा सन 2000 में तीन राज्यों का गठन हुआ था। जिसमें उत्तराखंड राज्य विकास के क्षेत्र में सबसे आगे है। केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रयासों से राज्य निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

उत्तराखंड की GSDP में 20 माह में हुई 1.3 गुना वृद्धि

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देहरादून : सचिव डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम ने मीडिया सेंटर सचिवालय में मीडिया से औपचारिक वार्ता करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा 2022 में आगामी 05 वर्षों में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी.) को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया। उत्तराखंड राज्य की जी.एस.डी.पी में पिछले 20 माह में 1.3 गुना वृद्धि हुई है।

राज्य की प्रति व्यक्ति आय 2021-22 में 02 लाख 05 हजार रूपये थी 2023-24 में यह बढ़कर 02 लाख 60 हजार रूपये हो गई है। पिछले दो सालों में राज्य की प्रति व्यक्ति आय में 26 प्रतिशत वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर दो सालों में प्रतिव्यक्ति आय 01 लाख 50 हजार 906 से बढ़कर 01 लाख 84 हजार हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रति व्यक्ति आय में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

सचिव डॉ.आर. मीनाक्षी सुंदरम ने जानकारी दी कि भारत सरकार के पी.एल.एफ.सर्वेक्षण के अनुसार राज्य का 2022- 23 में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 15 से 29 आयु वर्ग में 43.7 प्रतिशत था जो 2023-24 में बढ़कर 49 प्रतिशत हो गया है। इसी प्रकार राज्य का वर्क पॉपुलेशन रेशियो 37.5 प्रतिशत से बढ़कर 44.2 प्रतिशत हो गया है। 15 से 59 आयु वर्ग में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 60.1 से बढ़कर 64.4 प्रतिशत और वर्क पॉपुलेशन रेशियो 57.2 से बढ़कर 61.2 प्रतिशत हो गया है। राज्य में 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के सभी लोगों का लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 56 से बढ़कर 60.7 प्रतिशत और वर्क पॉपुलेशन रेशियो 53.5 से बढ़कर 58.1 हो गया है।

  • दो सालों में राज्य की प्रति व्यक्ति आय में हुई 26 प्रतिशत वृद्धि ।

  • भारत सरकार के पी.एल.एफ.सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट, वर्क पॉपुलेशन रेशियो में हुई वृद्धि।

  • उत्तराखण्ड में एक साल में बेरोजगारी दर 4.4 प्रतिशत हुई कम।

  • राज्य में वर्क पॉपुलेशन रेशियो में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।

  • सचिव डॉ.आर.मीनाक्षी सुंदरम ने मीडिया सेंटर सचिवचालय में मीडिया से वार्ता कर दी जानकारी।

राज्य में वर्क पॉपुलेशन रेशियो में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। 15 से 29 आयु वर्ग में यह 26.1 प्रतिशत से बढ़कर 32.4 प्रतिशत और 15 से अधिक आयु वर्ग में 37 प्रतिशत से बढ़कर 43.7 प्रतिशत हुई है। राज्य में लखपति दीदी योजना और महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने की वजह से भी महिलाओं के वर्क पॉपुलेशन रेशियो में वृद्धि हुई है। राज्य में 15 से 29 आयु वर्ग में बेरोजगारी दर में कमी आई है।

 2022-23 में राज्य का बेरोजगारी दर 14.2 प्रतिशत था जो 2023-24 में घटकर 9.8 प्रतिशत रह गई है। उत्तराखण्ड में एक साल में बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की कमी आई है। राज्य सरकार की नई नीतियों और पुरानी नीतियों में संशोधन व रोजगार और स्वरोजगार के लिए चलाये गये कार्यक्रमों से भी जीएसडीपी में वृद्धि हुई है। राज्य में पर्यटन, विनिर्माण क्षेत्र और सरकारी नौकरियों में लोगों को अधिक रोजगार मिला है।

पानी में गिरा एयरफोर्स का हेलिकॉप्टर, राहत सामग्री ड्रॉप करते वक्त हादसा

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बिहार: बिहार में बाढ़ प्रभावितों को राहत सामग्री एयर ड्रॉप करने वाले ऐयरफोर्स के हेलिकॉप्टर को पानी में लैंडिंग करनी पड़ी। यह मामला मुजफ्फरपुर का है। यहां वायुसेना का हेलिकॉप्टर क्रैश होकर पानी में गिर गया। हालांकि, वायुसेना ने इसे एहतियातन लैंडिंग बताया है और हेलिकॉप्टर में सवार सभी तीन कर्मी सुरक्षित हैं। बताया जा रहा है कि मुजफ्फरपुर के औराई स्थित घनश्यामपुर में ये हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ है। हेलिकॉप्टर बाढ़ राहत सामग्री ड्रॉप कर रहा था।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, भारतीय वायुसेना ने बताया कि एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर को बिहार के सीतामढी में बाढ़ रिलीफ ऑपरेशन के दौरान एहतियातन लैंडिंग करनी पड़ी। हेलिकॉप्टर में दो पायलट समेत तीन कर्मी सवार थे। हालांकि, सभी सुरक्षित हैं।

दरअसल, नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ के बाद 29 सितंबर को कोसी बैराज, वीरपुर से 6,61,295 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. यह 1968 के बाद छोड़ा गया सर्वाधिक पानी है। इस बैराज से 1968 में अधिकतम 7.88 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इसी वजह से बिहार और यूपी के तमाम जिलों में बाढ़ का संकट पैदा हो गया है।

ईरान में रह रहे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी

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इस्राइली सेना के मुताबिक, कुछ समय पहले ईरान से इस्राइल की ओर मिसाइलें दागी गई थीं। इस्राइली नागरिकों को सतर्क रहने और होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का ठीक से पालन करने का निर्देश दिया गया है।

ईरान- इस्राइल के बीच जारी संघर्ष को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से अहम प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने कहा, हम इस क्षेत्र में हो रही गतिविधियों पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। भारतीय नागरिकों को ईरान की सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी जाती है। वर्तमान में ईरान में रहने वाले लोगों से अनुरोध है कि वे सतर्क रहें और तेहरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।

ईरान और इस्राइल के बीच जारी संघर्ष लगातार गहराता जा रहा है। इस्राइल अब पलटवार करने के मूड में है। नेतन्याहू ने बदला लेने की कसम खाई है। माना जा रहा है कि, किसी भी वक्त इस्राइल ईरान पर हवाई हमला कर सकता है। इस खतरे की आशंका को देखते हुए अब ईरान ने गुरुवार सुबह 5 बजे तक अपने एयर स्पेस को बंद कर दिया है।

आईडीएफ ने एक्स पर लिखा कि, कल इस्राइल के खिलाफ ईरान द्वारा किए गए हमले के बाद चीफ ऑफ द जनरल स्टाफ हर्जी हलेवी ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर जनरल माइकल एरिक से मौजूदा स्थिति के बारे में बात की। ईरानी हमले से पहले उसके दौरान और उसके बाद कई दिनों तक आईडीएफ और अमेरिकी सशस्त्र बलों ने रक्षा में एक साथ सहयोग किया।

आईडीएफ इस सहयोग की बहुत प्रशंसा व्यक्त करता है और क्षेत्रीय स्थिरता और सेनाओं के बीच समन्वय को मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है। इस्राइल अमेरिकी सशस्त्र बलों के साथ अपने संबंधों को गहरा करना जारी रखेगा।

बड़ी खबर: कई रेलवे स्टेशनों और शहरों को बम से उड़ाने की धमकी

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राजस्थान के कई रेलवे स्टेशनों और अन्य स्थानों को बम विस्फोट की धमकी मिली है। पुलिस ने बताया कि धमकी भरा पत्र हनुमानगढ़ रेलवे स्टेशन पर मिला है।

हनुमानगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्यारे लाल मीना ने बताया कि पत्र डाक के जरिए हनुमानगढ़ स्टेशन मास्टर को दिया गया और मंगलवार शाम को स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी गई।

उन्होंने बताया कि जैश-ए-मोहम्मद के नाम से भेजे गए पत्र में धमकी दी गई है कि 30 अक्टूबर को रेलवे स्टेशन और गंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर, बीकानेर, कोटा, बूंदी, उदयपुर, जयपुर के स्थानों को बम से उड़ा दिया जाएगा।

जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन है। पुलिस ने बताया कि राजकीय रेलवे पुलिस (GRP), स्थानीय पुलिस और बीएसएफ के जवानों ने तलाशी ली है। जीआरपी थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और भेजने वाले का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।

 

उत्तराखंड: बर्फ़ में 56 साल बाद मिला सेना के जवान का शव

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चमोली: 1968! आज से ठीक 56 साल पहले। हिमाचल में एक मिशन पर निकला एयर फोर्स का एक विमान हादसे का शिकार हो गया था। इसमें सेना के जवान शहीद हो गए थे। उस वक्त कुछ के शव बरामद हो गये थे, जबकि कुछ के शव नहीं मिल पाए थे। लेकिन, अब 56 साल बाद चार जवानों के शव मिले हैं, जिनमें एक उत्तराखंड के चमोली जिले के नारायण सिंह का शव भी शामिल है।

चमोली जिले के थराली तहसील के गांव कोलपुड़ी के लापता सैनिक की पार्थिव देह 56 साल बाद अपने गांव पहुंचेगी। गांव के नारायण सिंह वर्ष 1968 में हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे में वायुसेना के एएन-12 विमान दुर्घटनाग्रस्त होने पर लापता हो गए थे। 56 साल बाद जिन चार सैनिकों के अवशेष मिले हैं, उनमें एक कोलपुड़ी गांव के नारायण सिंह का शव भी शामिल है।

कोलपुड़ी गांव के प्रधान और नारायण सिंह के भतीजे जयवीर सिंह ने बताया कि सोमवार को सेना के अधिकारियों ने सूचना दी उनकी पहचान हो जाने की सूचना दी। उन्होंने बताया कि जेब में मिले पर्स में एक कागज में नारायण सिंह ग्राम कोलपुड़ी और बसंती देवी नाम दर्ज था। साथ ही उनकी वर्दी के नेम प्लेट पर भी उनका नाम लिखा था।

सेना के अधिकारियों ने जयवीर सिंह को बताया कि बर्फ में शव सुरक्षित था, लेकिन बर्फ से बाहर निकालने के बाद शव गलने लगा है, जिससे उसे सुरक्षित किया जा रहा है। साथ ही उनका डीएनए सैंपल लिया जा रहा है।

जयवीर सिंह बोले कि माता बसंती देवी ने बताया था कि पति नारायण सिंह सेना में तैनात थे। वह साल में एक बार घर आते थे, अक्सर पत्रों से ही हाल पता लगता था। एक बार एक टेलीग्राम आया जिसमें अंग्रेजी में विमान के लापता होने और उसमें नारायण सिंह के लापता होने की बात लिखी थी।

उसके बाद परिजन इंतजार करते रहे लेकिन कोई खबर नहीं आई। मां जब तक जिंदा थी नारायण सिंह का इंतजार करती रहीं। वर्ष 2011 में बसंती देवी की मृत्यु हो गई।

भारतीय सेना के एक अभियान दल ने 1968 में हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में दुर्घटनाग्रस्त हुए AN-12 विमान के मलबे से चार सैनिकों के पार्थिव अवशेष बरामद किए हैं। भारतीय वायु सेना (IAF) का यह विमान 102 सैन्यकर्मियों को लेकर चंडीगढ़ से लेह की उड़ान पर था, जब पांच दशक पहले यह दुर्घटना हुई थी।

लाहौल-स्पीति जिले के पुलिस अधीक्षक मयंक चौधरी ने सोमवार शाम को न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि सेना के अभियान दल से सैटेलाइट फोन के जरिए इस खोज की जानकारी मिली है। यह दल लाहौल-स्पीति में बटाल के पास CB-13 (चंद्रभागा-13 चोटी) के सुदूर और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में पर्वतारोहण अभियान चला रहा था।

मुख्यमंत्री की अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक, दिए ये निर्देश

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरियाणा चुनाव प्रचार से वापस आकर देर शाम मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश में आपदा से हुए क्षतिग्रस्त सड़क मार्गों व पेयजल लाइनों को अभियान के तहत पुनः सुचारू करने, डेंगू की रोकथाम, चारधाम यात्रा समेत विभिन्न विषयों पर विस्तृत दिशा निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश का मौसम लगभग समाप्त हो गया अतः सड़कों के निर्माण और मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया जाए। मानसून के दौरान आपदा में जो भी पेयजल और बिजली की लाइन सहित संपर्क मार्ग क्षति ग्रस्त हुए हैं उन्हें प्राथमिकता से ठीक किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून के दौरान सभी विभागों के सामने विभिन्न चुनौतियां थी लेकिन अब इस अभियान में कोई भी लापरवाही बरदाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि आपदा से जहां-जहां नुक़सान हुआ है।उसके पुनर्निर्माण हेतु समय बद्ध कार्यवाही की जाए। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा को लेकर समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के बाद दीपावली तक पुनः धाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी ऐसे में किसी प्रकार की अव्यवस्था ना हो इसके लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा अच्छी चल रही है, यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसका ध्यान रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में डेंगू की रोकथाम के लिए किए हा रहे प्रयासों पर समीक्षा करते हुए कहा कि डेंगू के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं।इस पर रोकथाम हेतु स्वास्थ्य विभाग सहित सभी मिलकर कार्य करें।और प्रभावी नियंत्रण करें। मुख्यमंत्री ने नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में साफ़ सफ़ाई पर विशेष दिए जाने के निर्देश दिए।

बैठक में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव डॉ. आर.के.सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, गढ़वाल आयुक्त और सचिव विनय शंकर पांडेय, सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

जनता की भावनाओं के अनुरूप होना चाहिए मूल निवास और भू-कानून: मोहित डिमरी

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देहरादून। मूल निवास, भू- कानून समन्वय संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि मूल निवास और भू-कानून जनता की भावनाओं के अनुरूप होना चाहिए। विधानसभा में कानून पारित होने से पूर्व इसके ड्रॉफ्ट के स्वरूप को लेकर सर्वदलीय और संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ सरकार को चर्चा करनी चाहिए। आम सहमति के बाद ही विधानसभा में मूल निवास और भू-कानून बनने चाहिए।

प्रेस क्लब देहरादून में पत्रकारों से वार्ता करते हुए संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि वर्ष 2022 में भू-कानून को लेकर सुभाष कुमार की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होनी चाहिए। उद्योगों के नाम पर दी गई जमीनों का ब्यौरा भी सार्वजनिक होना चाहिए।

स्थिति यह है कि जिस प्रयोजन के लिए जमीन दी जा रही है, वहां उस प्रयोजन के बजाय प्रोपर्टी डीलिंग का काम चल रहा है। ऐसे बहुत सारे मामले सामने आ रहे हैं। उत्तराखंड में जितने भी इन्वेस्टमेंट सम्म्मेलन हो रहे हैं, वह सब जमीनों की लूट के सम्मेलन थे। इस लूट की जांच होनी चाहिए।

  • इन्वेस्टमेंट के नाम पर दी गई जमीनों की रिपोर्ट सार्वजनिक करे सरकार।

  • मलिन बस्तियों को जमीन का न मिले मालिकाना हक।

  • उद्योगों के लाभांश में जमीन मालिक की भी हो बराबर की हिस्सेदारी, लीज पर ही दी जाय जमीन।

  • देहरादून में मूल निवास, भू-कानून संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी की पत्रकार वार्ता।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला जमीनों का है। जमीनों की लूट में शामिल और भू-कानून को कमजोर करने वाले मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, नौकरशाह और इनके करीबियों की गहन जांच भी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में 30 साल से रह रहे व्यक्ति को ही घर बनाने के लिए 200 वर्ग मीटर तक जमीन मिलनी चाहिए। इसके साथ ही मलिन बस्तियों को जमीन का मालिकाना हक नहीं मिलना चाहिए।

किसी भी तरह के उद्योग में जमीन के मालिक की बराबर की हिस्सेदारी होनी चाहिए और उद्योगों के लिए जमीन को दस साल की लीज पर ही दी जाय। उन्होंने कहा की प्रदेश में कृषि भूमि की खरीद पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगना चाहिए और शहरी क्षेत्रों में निकायों का विस्तार भी रुकना चाहिए।

उन्होंने आंदोलन की रणनीति को लेकर कहा कि केदारनाथ में जल्द स्वाभिमान महारैली आयोजित करेंगे। इसके बाद हरिद्वार, पिथौरागढ़, रामनगर, पौड़ी, विकासनगर सहित अन्य हिस्सों में स्वाभिमान महारैलियां आयोजित की जायेंगी।

यह आंदोलन निरंतर चलता रहेगा। इस मौके पर संघर्ष समिति के सह संयोजक लुशुन टोडरिया, सचिव प्रांजल नौडियाल, संरक्षक मोहन सिंह रावत, कोर मेंबर विपिन नेगी, मनीष गोनियाल आदि मौजूद थे।