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श्री बदरीश पंचायत महोत्सव महोत्सव 5 अक्टूबर से।

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स्वच्छता ही सेवा मिशन के अंतर्गत

श्री बदरीश पंचायत महोत्सव 2024 का शुभारंभ 5 अक्टूबर को।

 

श्री बदरीनाथ धाम: 1 अक्टूबर। स्वच्छता ही सेवा मिशन के अंतर्गत जिला पुलिस -प्रशासन,नगर पंचायत बदरीनाथ, एवं श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति एवं स्थानीय होटल एसोसिएशन सहित सहयोगी संस्थाओं के बैनर तले बदरीनाथ धाम के नवनिर्मित हो रहे नगर पंचायत कार्यालय के निकट एराइवल प्लाजा परिसर में बदरीश पंचायत महोत्सव 2024 का कार्यक्रम का शुभारंभ शनिवार 5 अक्टूबर को होगा।

नगर पंचायत बदरीनाथ धाम के अधिशासी अधिकारी ( ईओ) सुनील पुरोहित ने यह जानकारी देते हुए बताया है कि 5 अक्टूबर को शुरू होकर दो दिवसीय बदरीश पंचायत महोत्सव का समापन 6 अक्टूबर रविवार को होगा। महोत्सव का थीम वाक्य “स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता” है। जिसमें महत्वपूर्ण अतिथियों सहित सभी आम तीर्थ यात्री एवं स्थानीय जनमानस को आमंत्रित किया गया है।
कहा कि स्वच्छता हर स्तर पर जरूरी है पर्यावरण साफ रहने से मनुष्य शारीरिक मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है। हमारे स्वभाव एवं संस्कार में स्वच्छता का समावेश हो बदरीनाथ धाम स्वच्छ रहे तथा यहां आनेवाले तीर्थयात्रियों को स्वच्छ आबोहवा मिले यही बदरीश पंचायत महोत्सव का उद्देश्य है।

उल्लेखनीय है कि भगवान श्री नर नारायण की तपस्थली एवं मोक्षदायिनी नगरी श्री बदरीनाथ धाम में विगत वर्ष से बदरीश पंचायत महोत्सव आयोजित हो रहा है।

कार्यक्रम के अनुसार 5 अक्टूबर अपराह्न को 3 बजे से महोत्सव शुरू हो जायेगा भगवान बदरीनाथ केदारनाथ श्री गंगोत्री – यमुनोत्री सहित मां नंदा, श्री घंटाकर्ण महाराज के स्मरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा।

पांच अक्टूबर को 4 बजे सांय शैलनट नाट्य संस्था द्वारा चक्रव्यूह मंचन होगा ,अपराह्न 6 बजे लोकगायक विपुल मेहता एवं पार्टी सांस्कृतिक कार्यक्रम 8 बजे सायं लोकगायक किशन महिपाल एवं अमित खरे सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे ।
रविवार 6 अक्टूबर शाम 4 बजे स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के तहत गोष्ठी आयोजित होगी जिसमें स्थानीय स्तर पर भागीदारी होगी तथा स्वच्छता ही सेवा पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
5 बजे शाम बजे सायं बामणी गाँव सांस्कृतिक कार्यक्रम , शाम 6 बजे माणा गाँव सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा रात 8 बजे पदमश्री श्री प्रीतम भरतवाण जागर संध्या आयोजित होगी।
इसके पश्चात शाम को ही मुख्य अतिथियों विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में कार्यक्रम का समापन हो जायेगा साथ ही स्वागत कार्यक्रम तथा स्मृति चिन्ह भी भेंट किये जायेंगे।

श्री बदरीनाथ -केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया है कि नगर पंचायत बदरीनाथ की पहल पर श्री बदरीनाथ केदारनाथ मन्दिर समिति, जिला प्रशासन चमोली,कोतवाली बदरीनाथ, होटल एशोसिएसन बदरीनाथ, व्यापार संघ बदरीनाथ, बद्रीश पण्डा पंचायत, तीर्थ पुरोहित समाज, नवयुवक मंगल दल बामणी, महिला मंगल दल बामणी, स्की माउंटेनिंग एशोसिएसन, बामणी गांव, डिमरी धार्मिक पंचायत, श्री बदीश युवा पुरोहित संगठन, ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित पंचायत, ग्राम पंचायत माणा एवं समस्त नगरवासी एवं तीर्थयात्री श्रद्धालु बदरीश पंचायत महोत्सव में सहयोगी की भूमिका में रहेंगे।

आज से बदल गए ये नियम, इन पर पड़ेगा सीधा असर

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देशभर में आज से 5 नए नियम लागू हो रहे हैं। नए नियमों का सीधा असर मोबाइल यूजर्स पर पड़ेगा। JIO, Airtel, BSNL और Vodaphone-Idia यूजर्स को नेटवर्क कवरेज की जानकारी मिलेगी, जिससे सिम कार्ड पोर्ट करने में सुविधा हो जाएगी। वही राशन कार्ड से आधार कार्ड लिंक की डेडलाइन खत्म हो गई है। इसके अलावा यूपीआई पेमेंट, से लेकर जीमेल यूजर्स को नए नियमों से एक अक्टूबर से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

  1. Gmail का नया पासवर्ड रूल
    गूगल की ओर से जीमेल के सिक्योरिटी नियमों बदलाव किया है, जिसकी वजह से 1 अक्टूबर से कुछ मोबाइल एप्लीकेशन और वेबसाइट से जीमेल यूजर्स ऑटोमेटेकली लॉगआउट हो जाएगा। जीमेल ने थर्ड पार्टी ऐप के साथ पासवर्ड शेयरिंग फीचर को 1 अक्टूबर से बंद करने का ऐलान किया है। यह नियम उन ऐप्स और वेबसाइट पर लागू होगा, जो कम सिक्योर हैं और यूजर डेटा के नियमों का उल्लंघन करते हैं।
  2. UPI पेमेंट में होगी दिक्कत
    ट्राई ने 1 अक्टूबर से नया नियम लागू किया है, जिससे फर्जी कॉल और मैसेज पर लगाम लगाया जा सके। ऐसे में 1 अक्टूबर से ऐसे टेलीमार्केटिंग और प्रमोशनल कॉल नहीं आएंगे, जो टेलिकॉम कंपनियों के पास रजिस्टर्ड नहीं हैं। ऐसे में जिन बैंक या पेमेंट प्लेटफॉर्म ने खुद को व्हाइटलिस्ट नहीं किया है, उन बैंक या प्लेटफॉर्म के यूजर्स को OTP वाले मैसेज रिसीव नहीं होंगे। ऐसे में UPI पेमेंट के दौरान दिक्कत हो सकती है।
  3. फर्जी कॉल और मैसेज की होगी छुट्टी
    DoT और TRAI ने फर्जी कॉल्स और मैसेज के नियमों को सख्त कर दिया है। नए नियमों को आज यानी 1 अक्टूबर से लागू किया जा रहा है।रिपोर्ट के मुताबिक, ट्राई ने टेलीकॉम ऑपरेटर्स को एक अक्टूबर से अन-रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से आने वाली कॉल और मैसेज को ब्लॉक करने के निर्देश दिये हैं।
  4. SIM कार्ड के नियम
    केंद्र सरकार ने नए सिम कार्ड नियम जारी किये हैं, जो 1 अक्टूबर से लागू हो रहे हैं। ट्राई ने नए नियम के तहत टेलिकॉम ऑपरेटर को यूजर्स के एरिया में उपलब्ध नेटवर्क जानकारी देनी होगी। टेलीकॉम कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर यह जानकारी देनी होगी। सभी टेलीकॉम कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर बताना होगा कि वे किस इलाके में 2G, 3G, 4G और 5G कौन सी सर्विस दे रही हैं। यह नियम JIO, Airtel, BSNL और Vodaphone-Idia समेत सभी कंपनियों पर लागू होगा।
  5. आधार और राशन कार्ड लिंक
    सरकार ने राशन कार्ड को आधार से लिंक करना अनिवार्य कर दिया है। ऐसे में अगर आपने 30 सितंबर 2024 तक राशन कार्ड को आधार से लिंक नहीं किया है, तो 1 अक्टूबर से आपका नाम राशन कार्ड का लिस्ट से कट सकता है। ऐसे में आप फ्री राशन पाने के पात्र नहीं होंगे। बता दें कि आधार कार्ड से पैन पहले से लिंक है। ऐसे में आपकी आमदनी और बाकी कमाई का सोर्स की सारी जानकारी पहले से सरकार के पास है। ऐसे में आधार कार्ड को राशन कार्ड से लिंक करके फर्जी राशन कार्ड होल्डर के नाम काटे जा रहे हैं।

PM मोदी के भाई पंकज मोदी ने किए बाबा केदार के दर्शन

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रुद्रप्रयाग : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छोटे भाई पंकज मोदी आज भगवान श्री केदारनाथ के दर्शन को पहुंचे। हैलीपेड पर श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने उनकी अगवानी की तथा तीर्थ पुरोहितों सहित मंदिर समिति ने हैलीपेड पर पंकज मोदी का स्वागत किया।

इसके पश्चात पंकज मोदी सीधे श्री केदारनाथ मंदिर पहुंचे भगवान केदारनाथ का जलाभिषेक किया और रूद्राभिषेक पूजा संपन्न की। उन्होंने जनकल्याण की कामना की तथा देश की खुशहाली हेतु आशीर्वाद मांगा।इसके पश्चात बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने मंदिर समिति की ओर से श्री पंकज मोदी को भगवान केदारनाथ का प्रसाद, अंगवस्त्र, विभूति, रूद्राक्ष माला, भेंट की।

इस अवसर पर पंकज मोदी ने कहा कि वह विगत दो दशक से श्री बदरीनाथ धाम तथा केदारनाथ धाम दर्शन हेतु पहुंचते रहे है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विजय श्री हेतु श्री पंकज मोदी ने 2014-15 में विशेष पूजा-अर्चना अनुष्ठान संपन्न करवाया था। उनका कहना है कि नरेंद्र मोदी की जीत राष्ट्र की जीत है।

वहीं, श्री केदारनाथ यात्रा ने फिर से गति पकड़ी है प्रतिदिन औसतन 10 हजार से अधिक की संख्या में तीर्थयात्री श्री केदारनाथ के दर्शन को पहुंच रहे है अभी तक श्री केदारनाथ पहुंचनेवाले तीर्थयात्रियों की संख्या साढ़े बारह लाख पार हो गयी है इसी तरह श्री बदरीनाथ धाम में दस लाख पचपन हजार से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन कर लिए है। इस तरह 23 लाख से अधिक तीर्थयात्री श्री बदरीनाथ -केदारनाथ के दर्शन कर लिए है।

यात्रियों की बढ़ती संख्या के बीच आज बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी के साथ ही पुलिस अधीक्षक रूद्रप्रयाग अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने श्री केदारनाथ धाम की सुरक्षा एवं मंदिर व्यवस्था का संयुक्त रूप से जायजा भी लिया तथा सुरक्षा में तैनात जवानों मंदिर कर्मियों से बातचीत की।

भारत ने 7 विकेट से जीता कानपुर टेस्ट, लगातार 18 सीरीज जीत चुका भारत

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कानपुर टेस्ट में भारत ने बांग्लादेश को हराकर सात विकेट से मैच अपने नाम कर लिया है. भारतीय टीम ने पांचवें दिन सात विकेट से कानपुर टेस्ट जीता. इसके साथ ही टीम इंडिया ने बांग्लादेश का सूपड़ा साफ कर दिया. दूसरी पारी में भारत को 95 रनों का लक्ष्य मिला था, जिसे रोहित एंड कंपनी ने तीन विकेट खोकर सिर्फ 17.2 ओवर में हासिल कर लिया. घर पर भारत की यह लगातार 18वीं सीरीज जीत है.

भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला टेस्ट मैच 280 रन से अपने नाम किया था. उस मैच में भारत की तरफ से आर अश्विन ने 113 रन और रवींद्र जडेजा ने 86 रन पहली पारी में बनाए थे. दूसरी पारी में शुभमन गिल ने 119 रन और ऋषभ पंत ने 109 रन की पारी खेली थी. दूसरा टेस्ट जो कि कानपुर में खेला गया, उसमें भारतीय टीम ने बांग्लादेश को 7 विकेट से मात दी.

 

बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

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नई दिल्ली : UP समेत तमाम राज्यों में बुलडोजर एक्शन के खिलाफ आज सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई हुई। SC ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोपरि है और सड़क, जल निकायों या रेल पटरियों पर अतिक्रमण करने वाले किसी भी धार्मिक ढांचे को हटाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ कहा कि बुलडोजर एक्शन पर रोक का उसका अंतरिम आदेश पूरे देश में जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और बुलडोजर कार्रवाई और अतिक्रमण विरोधी अभियान के लिए उसके निर्देश सभी नागरिकों के लिए होंगे, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो।

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ अपराध के आरोपी लोगों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। कई राज्यों में प्रचलित इस प्रवृत्ति को अक्सर ‘बुलडोजर न्याय’ कहा जाता है। राज्य के अधिकारियों ने अतीत में कहा है कि ऐसे मामलों में केवल अवैध संरचनाओं को ही ध्वस्त किया जाता है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश की ओर से पेश हुए। कोर्ट ने पूछा कि क्या आपराधिक मामले में आरोपी होना बुलडोजर कार्रवाई का सामना करने का आधार हो सकता है। इस पर मेहता ने जवाब देते हुए कहा कि बिल्कुल नहीं, बलात्कार या आतंकवाद जैसे जघन्य अपराधों के लिए भी नहीं।

तुषार मेहता ने कहा कि जैसे न्यायाधीश ने कहा कि यह भी नहीं हो सकता कि जारी किया गया नोटिस एक दिन पहले ही अटका रहे, यह पहले से ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकांश नगरपालिका कानूनों में नोटिस जारी करने का प्रावधान है। इस पर पीठ ने कहा कि नगर निगमों और पंचायतों के लिए अलग-अलग कानून हैं। एक ऑनलाइन पोर्टल भी होना चाहिए ताकि लोग जागरूक हों, एक बार जब आप इसे डिजिटल कर देंगे तो रिकॉर्ड होगा।

सॉलिसिटर जनरल ने तब कहा कि उन्हें चिंता है कि अदालत कुछ उदाहरणों के आधार पर निर्देश जारी कर रही है जिसमें आरोप लगाया गया है कि एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। जस्टिस गवई ने कहा कि अनधिकृत निर्माण के लिए एक कानून होना चाहिए, यह धर्म या आस्था या विश्वास पर निर्भर नहीं है।

143 शिक्षक मिले बीमार, कंपलसरी रिटायरमेंट होना तय!

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देहरादून: बीमार और असमर्थ शिक्षकों की कंपल्सरी रिटायरमेंट की प्रोसेस शुरू हो गई है। शिक्षा विभाग के अनुसार प्रदेश में 143 शिक्षक बीमार मिले हैं। शिक्षा महानिदेशक झरना कमठान के मुताबिक, शारीरिक और मानसिक अस्वस्थ इन शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति की दिए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

इनमें सबसे ज्यादा 100 शिक्षक देहरादून जिले के हैं। गढ़वाल मंडल के शिक्षकों की तीन अक्तूबर को स्क्रीनिंग होगी। इसके बाद शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। बीमार शिक्षकों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त करने के पूर्व में कई बार आदेश हो चुके हैं।

शिक्षा मंत्री और शासन के आदेश के बाद भी जिलों से विभाग को इस तरह के शिक्षकों की रिपोर्ट नहीं मिल रही थी। शिक्षा महानिदेशक के अनुसार प्रदेशभर में 142 शिक्षक और एक कर्मचारी शारीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थ मिले हैं। इसमें प्राथमिक के 84, सहायक अध्यापक एलटी के 44, प्रवक्ता 11, एक लिपिक और तीन प्रधानाचार्य शामिल है।

जिलों की लिस्ट                                                                       

जिला    शिक्षकों की संख्या 
बागेश्वर    03
अल्मोड़ा    02
नैनीताल    04
चमोली   08
रुद्रप्रयाग   03
ऊधमसिंह नगर   01
पिथौरागढ़   00
चंपावत   02
पौड़ी   02
देहरादून                            100
उत्तरकाशी   02
हरिद्वार                                 13
टिहरी   03

भू-कानून और मूल निवास, आखिर क्यों बार-बार उठता है ये मुद्दा, क्या है इसका इतिहास?

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  • नूतन सवेरा 

भू-कानून और मूल निवास-1950 की मांग उत्तराखंड में कोई नया मुद्दा नहीं है। ऐसा भी नहीं है कि इसके लिए पहले आंदोलन ना हुए हों। प्रदेश में भू-कानून की कवायद पहले भी होती रही है। जमीन खरीद को लेकर कुछ प्रावधान किए गए थे। लेकिन, उनमें फिर बदलाव भी कर दिए गए। भू-कानून और मूल निवास-1950 क्यों जरूरी है। पहले इसको समझने की जरूरत है।

देशभर के हिलालयी राज्यों में उत्तराखंड की ऐसा राज्य है, जहां बाहरी लोगों को किसी भी तरह की जमीनें खरीदने की खुली छूट है। अन्य किसी भी हिमालयी राज्य में इस तरह की खुली छूट नहीं है। 2000 में जब राज्य बना तो भूमि खरीद के नियम भी बदले गए, लेकिन फिर उद्योगों के बहाने जमीन खरीदने की प्रक्रिया को आसान बना दिया गया। उसके बाद से जमीन खरीद का सिलसिला चल निकला है।

उसका नजीजा यह है कि भू-कानून नहीं होने के कारण उत्तराखंड की जमीनों पर बाहरी लोगों का कब्जा होता आ रहा है। जिसके चलते उत्तराखंड के मूल निवासी भूमिहीन होते जा रहे हैं। लोग अपने भूमिधरी का अधिकारी खोते जा रहे हैं। आलम यह है कि जिन जमीनों पर कभी लोगों की खेती होती थी, उन जमीनों पर अब बाहरी लोगों का कब्जा है। बड़े-बड़े बंगले और होटल बने हैं। हिमाचल में भी कृषि भूमि के गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए खरीद बिक्री पर रोक है।

राज्य के कुल क्षेत्रफल (56.72 लाख हेक्टेअर) का अधिकांश क्षेत्र वन (कुल भौगोलिक क्षेत्र का 63.41 प्रतिशत) और बंजर भूमि के तहत आता है। जबकि कृषि योग्य भूमि बेहद सीमित, 7.41 लाख हेक्टेयर (लगभग 14 प्रतिशत) है। देश की आजीदी के वक्त राज्य में एकमात्र भूमि बंदोबस्त 1960 से 1964 के बीच हुआ था। लेकिन, पिछले करीब 60 सालों में कितनी कृषि भूमि को व्यावसायिक कार्यों के लिए बेचा गया है। इसका आंकड़ा किसी के पास नहीं है। सरकारों ने भी कही इस इस पर ध्यान नहीं दिया।

डाउन-टू-अर्थ में वरिष्ठ पत्रकार वर्षा सिंह की रिपोर्ट के अनुसार 1815-16 में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान एक-दो वर्ष के भीतर जमीनों का बंदोबस्त किया गया। क्योंकि उस समय खेती पर लिया जाने वाला टैक्स आमदनी का बड़ा जरिया था। उस समय भी पहाड़ों में 10-12 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि रही। वर्ष 1840-46, 1870 में जमीन का बंदोबस्त (लैंड सेटलमेंट) हुआ।

इस दौरान खेती का विस्तार हुआ। प्रति व्यक्ति जमीन के साथ-साथ आबादी भी बढ़ी। 1905-06 तक कुछ और जमीन बंदोबस्त हुए। ब्रिटिश काल में वर्ष 1924 के बंदोबस्त के बाद स्वतंत्रता आंदोलन तेज होने के साथ कोई उल्लेखनीय बंदोबस्त नहीं हुए। आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में यूपी जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950 (जेडएएलआर एक्ट) आया। कुमाऊं और उत्तराखंड जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1960 में राज्य में भूमि बंदोबस्त हुआ।

राज्य की सीमित कृषि योग्य भूमि का इस्तेमाल ही बुनियादी ढांचे के विकास के लिए हुआ। पाठक कहते हैं “तराई में खेती की जमीन पर उद्योग आए। शहरीकरण हुआ। पहाड़ों में जिला मुख्यालय, शिक्षण संस्थान, सब श्रेष्ठ कृषि भूमि पर बने। टिहरी बांध की झील से पहले भिलंगना और भागीरथी की घाटियां बेहद समृद्ध कृषि भूमि थीं, जो झील का हिस्सा बन गईं।

इसी तरह खेती के लिहाज से समृद्ध पिथौरागढ़ में आईटीबीपी की दो बटालियन, दो कैंटोनमेंट, रक्षा मंत्रालय का पंडा फार्म सबकुछ कृषि भूमि पर बना। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय की 16,000 एकड़ भूमि का एक बड़ा हिस्सा फैक्ट्रियों, रेलवे से लेकर सरकारी प्रतिष्ठानों को दिया गया। यहां हेलीपैड के लिए भी कृषि विवि की भूमि दी गई।”

भू-कानूनों में बदलाव
2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी सरकार ने उत्तर प्रदेश के कानून में संशोधन किया और राज्य का अपना भूमि कानून बनाया। इस कानून के तहत बाहरी लोगों के लिए कृषि भूमि की खरीद 500 वर्ग मीटर तक सीमित कर दी गई थी। 2008 में मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने इसमें संशोधन किया और पुराने कानून को कुछ और सख्त करते हुए भूमि खरीद की सीमा घटाकर 250 मीटर कर दी गई।

त्रिवेंद्र ने खोल दिए रास्ते
2018 में त्रिवेंद्र रावत ने मुख्यमंत्री रहते हुए इस कानून में बड़े बदलवा कर दिए। उन्होंने पिछले सभी प्रतिबंधों को हटा दिया। उद्योग स्थापित करने के उद्देश्य से पहाड़ में जमीन खरीदने की अधिकतम सीमा और किसान होने की बाध्यता ही खत्म कर दी। इतना ही नहीं कृषि भूमि का भू उपयोग बदलना यानी कृषि से अकृषि भूमि करना आसान कर दिया। तब से जमीनों की खरीद-फरोख्त में तेजी आई। उसीका नजीता है कि अब फिर से मांग तेजी होने लगी है।

युवाओं ने संभाली कमान
मूल निवास और भू-कानून समन्वस संघर्ष समिति लगातार इस मुद्दे को उठा रही है। इस समिति की कमान पूरी तरह से युवाओं के हाथ में हैं। जिन्होंने प्रदेश की बेहतरी और आनी वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए खुद को झांेंक दिया है, जिस उम्र में लोग करियर पर फोकस करते हैं। युवाओं की ये टोली आंदोलन कर रही है। प्रदेशभर में घूम-घूम कर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। देहरादून से लेकर गैरसैंण और ऋषिकेश तक रैलियों के जरिए लोगों को जगाने का काम कर रहे हैं। आंदोलन का असर नजर भी आ रहा है।

समिति के संयाजक मोहित डिमरी पत्रकारिता करते हुए संघर्ष की राह पर चल पड़े। मोहित डिमरी का कहना है कि सख्त भू-कानून और मूल निवास-1950 इस वक्त राज्य की सबसे बड़ी जरूरत है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम उत्तराखंड होने का अस्तित्व ही खतरे में डाल देंगे।

समिति के सह संयोजक लुसुन टोडरिया और प्रांजल नौडियाल का कहना है कि उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित रहें, इसके लिए जरूरी है कि मूल-निवासी की कट आफॅ 1950 होनी चाहिए। प्रदेश में किसी भी तरह की नौकरियों में 90 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य कके युवाओं की होनी चाहिए। भू-कानूनन के तहत शहरी क्षेत्रों में बाहरी लोगों के लिए भूमि खरीद की सीमा केवल 200 वर्ग मीटर होनी चाहिए। इसकी खरीद के लिए राज्य में 30 पहले के निवासरत रहने की शर्त लागू की जानी चाहिए।

इस आंदोलन को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कई लोगों का समर्थन मिल रहा है। राजनीतिक दलों के नेताओं भी इसमें शामिल हैं। लगातार आंदोलन और जनसमर्थन का असर यह है कि अब सरकार भी सख्त भू-कानून की बात कह रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सख्त भू-कानून की दिशा में सरकार काम कर रही है। त्रिवेंद्र सरकार में हुए गलति को सुधारने के लिए सरकार कदम बढ़ाने के संकेत दे चुकी है। सरकार क्या फैसला देती है? यह देखने वाली बात होगी। लेकिन, संघर्ष समिति ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान कर दिया है।

क्या है मूल निवास प्रमाण पत्र
1950 में प्रेसीडेंशियल नोटिफिकेशन जारी हुआ था। इसके मुताबिक देश का संविधान लागू होने के साथ वर्ष 1950 में जो व्यक्ति जिस राज्य का निवासी था, वो उसी राज्य का मूल निवासी होगा। 1961 में तत्कालीन राष्ट्रपति ने दोबारा नोटिफिकेशन के जरिये ये स्पष्ट किया था। इसी आधार पर उनके लिए आरक्षण और अन्य योजनाएं चलाई गई। उत्तराखंड में इसीके आधार पर मूल निवास की मांग की जा रही है। मूल निवास को लेकर सख्त कानून नहीं होने के कारण बाहरी लोग लगातार नौकरियों पर कब्जा कर रहे हैं।

उत्तराखंड बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी की अगुवाई में बनी भाजपा सरकार ने राज्य में मूल निवास और स्थायी निवास को एक मानते हुए इसकी कट ऑफ डेट वर्ष 1985 तय कर दी। जबकि पूरे देश में यह वर्ष 1950 है। इसके बाद से ही राज्य में स्थायी निवास की व्यवस्था कार्य करने लगी।

2010 में मूल निवास संबंधी मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने देश में एक ही अधिवास व्यवस्था कायम रखते हुए, उत्तराखंड में 1950 के प्रेसीडेंशियल नोटिफिकेशन को मान्य किया, लेकिन सरकारों ने इसको आगे नहीं बढ़ाया। सरकार ने झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में भी मूल निवास का मुद्दा उठ चुका है। इन राज्यों में भी 1950 को मूल निवास का आधार वर्ष माना गया है और इसी आधार पर जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं।

एक्टर गोविंदा को लगी गोली, अस्पताल में भर्ती

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बॉलिवुड के एक्टर Govinda को गोली लगी है. दरअसल, ये गोली उनके ही बंदूक से लगी है. घटना सुबह 5 बजे की है और वह किसी काम से बाहर निकल निकल रहे थे. जानकारी के अनुसार, गोली उनके ही बंदूक से चली है.

बॉलिवुड के एक्टर गोविंदा को गोली लगी है. दरअसल, ये गोली उनके ही बंदूक से लगी है. घटना सुबह बजे की है और वह किसी काम से बाहर निकल निकल रहे थे. जानकारी के अनुसार, गोली उनके ही बंदूक से चली है.बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा जख्मी हो गए हैं. लाइसेंसी रिवॉल्वर साफ करते समय उनके घुटने में गोली लग गई.

उन्हें इलाज के लिए पास के अस्पताल ले जाया गया है.बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा के पैर में गोली लग गई है। गोविंदा के पास लाइसेंसी रिवॉल्वर है। खबरों की मानें तो घटना सुबह करीब 5 बजे की है।

गोविंदा सुबह कहीं जाने के लिए निकल रहे थे, तभी ये हादसा हो गया। कहा जा रहा है कि वह अपनी रिवॉल्वर साफ कर रहे थे, तभी मिस फायर हो गया। अब एक्टर को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

तृतीय केदार तुंगनाथ का होगा कायाकल्प: अजेंद्र

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शासन से अनुमति के बाद श्री तुंगनाथ के कायाकल्प की बीकेटीसी की पहल शुरू हुई।

देहरादून। 30 सितंबर विश्व में सबसे ऊंचाई पर स्थित तृतीय केदार के नाम से विख्यात पौराणिक शिव मंदिर श्री तुंगनाथ के जीर्णोद्वार, सौंदर्यीकरण और आवश्यक सुरक्षात्मक कार्यों के लिए प्रदेश सरकार ने प्रतिबंधों के साथ सैद्वांतिक सहमति प्रदान कर दी है। श्री बदरीनाथ – केदारनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है।

बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र ने गत वर्ष महानिदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) व महानिदेशक, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) को पत्र लिख कर समुद्र तल से 11942 फीट की ऊंचाई पर स्थित श्री तुंगनाथ मंदिर ( समुद्र तल से ऊंचाई 11942 फीट)के जीर्णोद्वार, सौंदर्यीकरण व आवश्यक सुरक्षात्मक कार्यों को कराने के लिए तकनीकि परामर्श उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। इस पर दोनों विभागों के विशेषज्ञों ने तुंगनाथ मंदिर का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट बीकेटीसी को सौंपी थी। दोनों विभागों के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के पश्चात बीकेटीसी ने केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की से भी इस संबंध में राय मांगी है। सीबीआरआई के वैज्ञानिकों द्वारा पिछले दिनों तुंगनाथ का भ्रमण किया जा चुका है। उनकी रिपोर्ट भी जल्दी ही बीकेटीसी को मिल जाएगी।

इस बीच बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र ने शासन को एएसआई व जीएसआई की रिपोर्ट का हवाला देते तुंगनाथ मंदिर के संरक्षण कार्यों के लिए सैद्वांतिक सहमति देने का अनुरोध किया। इस पर सचिव धर्मस्व व संस्कृति हरिचन्द्र सेमवाल ने बीकेटीसी को पत्र लिख कर इसकी अनुमति प्रदान कर दी है। शासन ने मंदिर की पौराणिकता को देखते हुए इसकी विस्तृत योजना रिपोर्ट (डीपीआर) और सम्पूर्ण कार्य सीबीआरआई, रूड़की से सम्पादित कराने के निर्देश दिए हैं। शासन ने यह भी निर्देश दिए हैं कि सम्पूर्ण कार्य एएसआई व जीएसआई के तकनीकि विशेषज्ञों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए किए जाएंगे।

प्रधानमंत्री की मन की बात में छाया उत्तराखंड

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प्रधानमंत्री मोदी के “मन की बात” में छाया उत्तराखंड

जब भी अवसर आया, देश को दी देवभूमि की मिसाल

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को सराहा

नवरात्रि के शुभारंभ पर 3 अक्टूबर को 10 साल पूरे कर रहा प्रधानमंत्री का “मन की बात” कार्यक्रम

देहरादून। 30 सितंबर ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देवभूमि उत्तराखंड से विशेष लगाव रहा है। प्रधानमंत्री के “मन की बात” कार्यक्रम में उत्तराखंड छाया रहा है। शारदीय नवरात्रि के शुभारंभ पर आगामी तीन अक्टूबर को “मन की बात कार्यक्रम” दस वर्ष पूर्ण कर लेगा। इन दस वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार उत्तराखंड का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में महिलाओं, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अपने कार्यों से पूरे देश और समाज के सामने आदर्श मिसाल पेश की है। कई कार्यो को प्रेरणाजनक बताते हुए उन्होंने पूरे देश का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया।

*हर गांव में शुरू हो धन्यवाद प्रकृति अभियान*
मन की बात के 114वें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनपद उत्तरकाशी के सीमांत गांव झाला का जिक्र किया। इस गांव के ग्रामीण हर रोज दो-तीन घंटे गांव की सफाई में लगाते हैं। गांव का सारा कूड़ा कचरा उठाकर गांव से बाहर निर्धारित स्थान पर रख दिया जाता है। ग्रामीणों ने इसे धन्यवाद प्रकृति अभियान नाम दिया है। प्रधानमंत्री ने ग्रामीणों की मुहिम की सराहना कर कहा कि देश के हर गांव में यह अभियान शुरू होना चाहिए।

*जखोली में महिलाओं ने जलस्रोत किए पुनर्जीवित*
रुद्रप्रयाग जनपद के जखोली ब्लॉक की ग्राम पंचायत लुठियाग में महिलाओं ने जल संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल की है। चाल-खाल (छोटी झील) बनाकर बारिश के पानी का संरक्षण किया। इस मुहिम से गांव में सूख चुके प्राकृतिक जलस्रोत पुनर्जीवित होने से पेयजल की किल्लत काफी हद तक दूर हो गई है और सिंचाई के लिए भी पानी मिलने लगा है। प्रधानमंत्री ने महिलाओं के प्रयासों की सराहना कर इसे अनुकरणीय बताया। यहां ग्रामीणों को पानी के लिए तीन किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता था।

*रोज 5-7 किमी पैदल सफर तय कर लगाए कोरोना के टीके*
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में कोरोना काल में बेहतर काम करने वाली बागेश्वर की एएनएम पूनम नौटियाल की खूब सराहना की। कोरोना का टीका लगाने के लिए पूनम ने रोज पांच से सात किमी का पैदल सफर तय किया। जो लोग वैक्सीन लगाने से डर रहे थे, उन्हें भी पूनम जागरूक किया। पीएम ने स्वयं भी पूनम से बात की। पीएम ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्र होने से वैक्सीनेशन का सारा सामान इन्हें खुद ही अपने कंधे पर उठाकर ले जाना होता था।

*स्वच्छता अभियान में जुटे सुरेंद्र*
गुप्तकाशी के सुरेंद्र प्रसाद बगवाड़ी स्वच्छता अभियान में जुटे हैं। उन्होंने रुद्रप्रयाग के तत्कालीन जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल को गदेरे की सफाई करते देखा तो उन्होंने भी सफाई में जुटने का फैसला किया। वह केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित हैं।

*बोली-भाषा को बचाने के लिए काम कर रहा रं समाज*
प्रधानमंत्री ने अपनी मन की बात में धारचूला के रं समाज का जिक्र किया। अपनी बोली-भाषा को बचाने के लिए रं समाज द्वारा किए जा रहे प्रयासों की प्रधानमंत्री ने जमकर तारीफ की और इसे पूरी दुनिया को राह दिखाने वाली पहल बताया। पीएम ने कहा कि उन्होंने धारचूला में रं समाज के लोगों द्वारा अपनी बोली को बचाने के प्रयास की कहानी एक किताब में पढ़ी।

*पवित्र स्थलों को प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने में जुटे मनोज*
रुद्रप्रयाग के मनोज बैंजवाल पवित्र स्थलों को प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने में जुटे हैं। पीएम ने उनकी सराहना की है। जो घाट गंदगी से पटे थे, उन्होंने वहां सफाई कर आरती शुरू कर दी। अन्य लोगों को भी इससे जोड़ा। अब लोगों ने वहां गंदगी फैलाना बंद कर दिया। उन्होंने तुंगनाथ, बासुकीताल आदि बुग्यालों को कचरे से मुक्त करने के लिए अभियान चलाया। अब वह स्कूलों में छात्रों को जागरूक कर रहे हैं।

*गायत्री ने रिस्पना की पीड़ा बताई*
देहरादून के दीपनगर निवासी छात्रा गायत्री ने रिस्पना नदी की पीड़ा को प्रधानमंत्री के सामने रखा था। उन्होंने बताया कि यह नदी अब लगभग सूख चुकी है। प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में उनकी बातचीत की रिकॉर्डिंग पूरे देश को सुनाई थी।

*घोड़ा लाइब्रेरी से दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही किताबें*
नैनीताल जिले में कुछ युवाओं ने बच्चों के लिए अनोखी घोड़ा लाइब्रेरी की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री ने इस कार्य की सराहना की है। इस लाइब्रेरी की खासियत है कि दुर्गम से दुर्गम इलाकों में भी इसके जरिए बच्चों तक पुस्तकें पहुंच रही हैं और यह सेवा बिल्कुल निशुल्क है। अब तक इसके माध्यम से नैनीताल के 12 गांवों को कवर किया गया है। बच्चों की शिक्षा से जुड़े इस नेक काम में मदद करने के लिए स्थानीय लोग भी खूब आगे आ रहे हैं।

*स्कूल परिसर में उगाई हरियाली*
राजकीय इंटर कालेज कोटद्वार में गणित के शिक्षक संतोष नेगी की ओर से जल संरक्षण के लिए किए गए प्रयोग को प्रधानमंत्री ने सराहा था। संतोष नेगी ने कॉलेज परिसर में दो सौ गड्ढे बनाकर उनमें बारिश के पानी का संचय किया, जिससे पूरा परिसर हरियाली से भर गया।

*दस साल से सूखा नाला हुआ पुनर्जीवित*
पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लाक के उफ्रेखाल निवासी रिटायर्ड शिक्षक सचिदानंद भारती ने वर्ष 1989 में उफ्रेखाल में चाल खाल बनाकर बारिश के जल का संरक्षण किया। उन्होंने 30 हजार से अधिक चाल-खाल बनाकर बांज और बुरांश के पेड़ लगाए। इसका परिणाम हुआ कि 10 साल से सूखा नाला पुनर्जीवित हो उठा। उन्होंने अपने अभियान को पाणी राखो नाम दिया है।

*भोजनमाता भी कर रही स्वच्छता के प्रति जागरूक*
गुप्तकाशी के देवरगांव की चंपा देवी स्कूल में भोजन माता है और लोगों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही हैं। उन्होंने बंजर भूमि पर पेड़ लगाकर उसे हराभरा बनाया है।

*भोजपत्र पर कलाकृतियां बना रही चमोली की महिलाएं*
उत्तराखंड के चमोली जिले के उच्च हिमालय क्षेत्र में उगने वाले दुर्लभ भोजपत्र की छाल पर महिलाएं अपनी कलम चलाकर पुरातन संस्कृति की याद दिला रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बद्रीनाथ दौरे के दौरान सीमांत नीति माणा घाटी की महिलाओं ने उन्हें भोजपत्र पर लिखा एक अभिनंदन पत्र भेंट किया था। इसके बाद प्रधानमंत्री ने भोजपत्र के सोवियत बनाने को लेकर अपने मन की बात कार्यक्रम में महिलाओं की इस पहल की सराहना की।

*युवाओं ने बनाया घड़ियालों पर नजर रखने वाला ड्रोन*
रुड़की क्षेत्र में स्थित रोटर कंपनी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वन्य जीव संरक्षण और इको टूरिज्म के लिए नए-नए इनोवेशन युवा सामने ला रहे हैं । रुड़की में रोटर प्रीसिश़न ग्रुप ने वन्य जीव संस्थान की मदद से ऐसा ड्रोन तैयार किया हैं, जिससे नदी में घड़ियालों पर नजर रखने में मदद मिल रही है।

*लोक संस्कृति के संरक्षण में जुटे हैं पूरण सिंह*
जनपद बागेश्वर के रीमा गांव के निवासी पूरण सिंह उत्तराखंड की लोक संस्कृति के संरक्षण में जुटे हैं। उत्तराखंड की लोक विधा जागर, न्योली, हुड़का बोल, राजुला मालूशाही लोकगाथा के गायन में उन्होंने खास पहचान बनाई है। पूरण सिंह की बचपन मे ही दोनों आंखें खराब हो गई थी। वह पहाड़ी गीत झोड़ा, छपेली, चाचरी, न्यौली, छपेली, जागर आदि सुना करते थे। आंखें खराब होने से वह पढ़ाई नहीं कर पाए, लेकिन उन्होंने बाल्यावस्था से ही गायन शुरू कर दिया।

  1. *प्रधानमंत्री के दिल में बसता है उत्तराखंड : धामी*
    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तराखंड से अगाध प्रेम है। उत्तराखंड उनके दिल में बसता है। यह उनके देवभूमि से असीम लगाव को ही प्रदर्शित करता है कि प्रधानमंत्री ने “मन की बात” कार्यक्रम में देवतुल्य जनता, प्राकृतिक संपदा, रीति-नीति और लोक परंपराओं का अक्सर जिक्र किया है। इस कार्यक्रम ने छोटे से छोटे स्तर पर काम करने वालों को भी देश-दुनिया मे पहचान दी है।
    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि नवरात्रि के शुभारंभ पर आगामी तीन अक्टूबर को “मन की बात” कार्यक्रम के 10 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। दस वर्षों में इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री ने सामाजिक संगठनों और लोगों द्वारा जनहित में किए गए अनेक कार्यों का जिक्र कर लोगों को अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित किया है।
    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया है कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने के लिए हम सबको अपना योगदान देना है।