Home Blog Page 373

सुप्रीम कोर्ट ने मजदूर के बेटे को दिलाया IIT में एडमिशन

0

नई दिल्ली। पैसों की तंगी के चलते समय से आईआईटी एडमिशन की फीस न भर पाने वाले वंचित छात्र के हक में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी को उसका एडमिशन करने का निर्देश दिया है। याचिका करने वाला छात्र उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और उसके पिता दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार छात्र का एडमिशन प्रतिष्ठित आईआईटी धनबाद में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्स में हुआ था। उसे 24 जून शाम 5 बजे तक एडमिशन सुरक्षित करने के लिए ऑनलाइन फीस जमा करनी थी। उसके मजदूर पिता को इतने पैसे इकट्ठे करने में समय लग गया। हालांकि, उन्होंने किसी तरह शाम 4.45 बजे तक पैसे इकट्ठा भी कर लिए थे, लेकिन समय सीमा से पहले शुल्क नहीं भर पाए।

इसके बाद उसे दाखिला नहीं दिया गया। इससे आहत छात्र के पिता ने तीन महीने तक एससी/एसटी आयोग, झारखंड और मद्रास हाईकोर्ट तक अपील की। अंत में जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब सुप्रीम कोर्ट छात्र की मदद के लिए आगे आया है।

सोमवार को मामले पर फैसला सुनाते हुए सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश मनोज मिश्रा की पीठ ने आईआईटी धनबाद को निर्देश देते हुए कहा कि छात्र को कोर्स की उसी सीट पर दाखिला दिया जाए, जिस पर उसका शुरू में एडमिशन हुआ था।

गढ़वाल की ऐतिहासिक रामलीला की तैयारियां जोरों पर, 6–70 साल तक के कलाकार करेंगे अभिनय

0

देहरादून : “श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून (पंजी.)” द्वारा गढ़वाल की ऐतिहासिक राजधानी – पुरानी टिहरी प्राचीन रामलीला को टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है और इस हेतु देहरादून के टिहरी–नगर के “आजाद मैदान, टिहरी नगर, निकट बंगाली कोठी, दून यूनिवर्सिटी रोड, देहरादून ” में 11 दिन की ‘भव्य रामलीला’ का मंचन शारदीय नवरात्रों में 03 से 13 अक्टूबर 2024 तक किया जाएगा।

“श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून” के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा की गढ़वाल की ऐतिहासिक राजधानी रामलीला 1952 से पुरानी टिहरी की रामलीला 1952 के ‘आजाद मैदान में 2002 तक टिहरी के डूबने तक होती रही और टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में इसको 21 वर्षों बाद भव्य रूप से 2023 में पुनर्जीवित किया गया। 2023 में आयोजित भव्य रामलीला में विशेष आकर्षण के रूप में उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार Laser Show व Digital Live Telecast का प्रसारण किया गया था जिससे विभिन्न माध्यमों के द्वारा हमारे रामलीला मंचन को 2023 में रिकॉर्ड 10 लाख लोगो तक पहुंचने में सफलता पाई।

इससे गढ़वाल के इतिहास को भव्य रूप से पुनर्जीवित करने का मौका मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए मनोरंजन से अपने इतिहास और सनातन धर्म की परंपराओं के साथ जुड़ने का अवसर भी मिलेगा। इस बार रामलीला में विशेष आकर्षण के रूप में उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार Digital Live Telecast System से रामलीला मंचन का प्रसारण को 50लाख से अधिक दर्शको द्वारा देखा जाएगा।

रामलीला समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा की इस बार रामलीला मंचन को विशेष यादगार बनाने के लिए रामलीला समिति दिन–रात कार्यरत है। इस रामलीला में अनुभवी और युवा कलाकारों का संगम दिखेगा। 70 वर्ष के राकेश चंद्र पांडेय पात्र खेलेंगे वही 6 वर्ष से 14 वर्ष के नए कलाकारों का अभिनय भी देखने को मिलेगा। कलाकारों में मूलरूप से उत्तरकाशी निवासी अनिल नौटियाल भटवाड़ी, उत्तरकाशी, ऋषिकेश आदि कई प्रसिद्ध रामलीलाओ के अनुभव के साथ राम का पात्र निभाएंगे और साथ ही गढ़वाली फिल्मों की प्रसिद्ध गायिका “प्यारी निर्मला” फेम शिवानी नेगी और “कान्हा रे कान्हा” फेम पूनम सकलानी जैसे प्रसिद्ध कलाकार भी इस रामलीला में अभिनय करेंगे।

उल्लेखनीय है की देहरादून स्थित “टिहरी नगर” में रामलीला आने वाले शारदीय नवरात्रों में 03 अक्टूबर 2024 से भव्य रूप से आयोजित करी जाएगी, जिसमे गढ़वाल के टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, कुमाऊं, मैदानी व उत्तराखंड से बाहर के कई क्षेत्रों के लोग Digital प्रसारण हेतु संपर्क कर रहे है।

संस्कृति और तकनीक के अद्भुत संगम की ऐसी भव्य रामलीला का उत्तराखंड के प्रमुख क्षेत्र गढ़वाल, कुमाऊँ व उत्तराखंड से बाहर के क्षेत्र में विभिन्न डिजिटल माध्यम से 50 लाख से अधिक दर्शकों तक पहुंचने वाली यह उत्तराखंड की पहली रामलीला होगी। इस रामलीला में चौपाई, कथा, संवाद,मंचन आदि सब गढ़वाल की 1952 से चली आ रही प्रसिद्ध व प्राचीन रामलीला के जैसा ही होगा, जिससे गढ़वाल के लोगों का अपनत्व देहरादून में भी जुड़ा रहे।  रामलीला की तैयारियों में अभिनव थापर, सचिव अमित पंत, शिव प्रसाद नौटियाल,  गिरीश चंद्र पांडेय, नरेश कुमार, मनोज कुमार जोशी, उर्मिला पंत, गुड्डी थपलियाल, अजय पैन्यूली, आदि ने भाग लिया।

उत्तराखंड STF ने किया बड़ा खुलासा, कई देशों में फैला था जाल

0

उत्तराखंड STF द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय साईबर अपराधियों को फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले एक मास्टर माइण्ड साईबर अपराधी को थाना मंगलौर क्षेत्र हरिद्वार से किया गया गिरफ्तार। गिरफ्तार मास्टर माइण्ड अभियुक्त द्वारा अब तक 20 हजार से ज्यादा सिम कार्ड को एक्टिवेट कर फर्जी तरीके से दक्षिण ऐशियाई देशों थाईलैण्ड, कम्बोडिया, म्यामांर आदि देशों के अलावा भारत के कई राज्यों के साईबर ठगों को उपलब्ध कराया गया।

पकडे गये मास्टर माईण्ड ने थाना मंगलौर क्षेत्र में घर घर जाकर कई महिलाओं को फर्जी सरकारी स्कीम अथवा कंपनी की ओर से कप का सेट देने का लालच देकर उनके आधार कार्ड आदि दस्तावेज व बायोमैट्रिक मशीन पर अंगूठा निशानी लेकर फर्जी तरीके से हजारों सिम कार्डस को किया गया है एक्टिवेट। पकड़े गये मास्टरमाइण्ड अभियुक्त द्वारा फर्जी तरीके से प्राप्त इन हजारों सिम कार्ड को चाइनीज व कम्बोडिया से संचालित व्हाट्सएप ओटीपी ग्रुप के माध्यम से साईबर ठगों को 03 रुपये से लेकर 50 रुपये प्रति ओटीपी के हिसाब से बेचे जा रहे सिम कार्डस।

चाइनीज व कम्बोडिया से संचालित उक्त व्हाट्सएप ओटीपी ग्रुप के माध्यम से सुदूर विदेशों में बैठे अन्य अभियुक्तों के द्वारा इन भारतीय सिमों पर व्हाट्सएप व अन्य एप्लिकेशन्स एक्टिवेट कर व्हाट्सएप कॉलिंग कर या इंस्टाग्राम पर मासूम लोगों को अपने जाल में फंसा कर ट्रेडिंग/इन्वेस्टमेंट के नाम पर व अन्य लालच देकर पूरे भारतवर्ष में की जा रही थी साइबर ठगी। अभियुक्त के कब्जे से 1816 सिम कार्डस, दो चैक बुक, 05 मोबाइल फोन व 02 बायोमैट्रिक डिवाइस बरामद।

निलेश आनन्द भरणे पुलिस महानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था उत्तराखण्ड द्वारा जानकारी देते हुये बताया कि माह अप्रैल-2024 में माजरी माफी मोहकमपुर देहरादून निवासी एक पीडित/शिकायतकर्ता की तहरीर के आधार पर थाना नेहरु कॉलोनी जनपद देहरादून पर दर्ज मुकदमे की विवेचना एस0टी0एफ0/साइबर क्राईम पुलिस स्टेशन को प्राप्त हुई थी जिसमें पीडित द्वारा बताया गया कि वह पिछले 08 महीने से फेसबुक पर कथित कल्याणी निवासी चेन्नई नामक फेसबुक फ्रैण्ड के सम्पर्क में था जिसके द्वारा Metal Advisor का कार्य करना बताया गया था और वह किसी वेबसाईट पर लोगों को पैसा इन्वेस्ट कर तीनगुना मुनाफा कमाने को कहती थी।

उसके द्वारा फेसबुक पर कई ऐसी chat के स्क्रीनशॉट डाले गये थे जिसमें लोगों ने तीन गुना फायदा होने की बात स्वीकार की गयी थी। उसके द्वारा कई महीनों तक नोटिस करने के बाद खुद भी इन्वेस्टमेण्ट करने का फैसला किया और उक्त कल्याणी से जानकारी प्राप्त की गयी जिसके द्वारा उसे अपने व्हाट्सएप नम्बर दिये गये और फिर व्हाट्सएप पर एक website का link भेजकर बताया कि कैसे- कैसे उसे उस website पर अपना user ID बनाना है और भी क्या-क्या करना है फिर एक प्रोग्रामर का व्हाट्सएप नम्बर दिया जिसके द्वारा बताना शुरू किया कि क्या करना है website पर कहा जाना है कौन सा link open करना है आदि आदि।

उन पर विश्वास कर वह उनके बताये अनुसार वैसा-वैसा करता गया और सबसे पहले 10,000/- रुपये इन्वेस्ट किये जिसका मुनाफा 02 दिन के अन्दर कुल रुपये 23,776/- उसके बैंक अकाउण्ट में आ गये। उसके बाद उसने 25,000/- रुपये इन्वेस्ट किये तो बताया कि Management के द्वारा limit Minimum 50,000 रूपये कर दिये हैं, जिसके लिये आपको 25 हजार रुपये और इन्वेस्ट करने होंगे नहीं तो पहले के 25 हजार भी नहीं निकाल पाओगे। उसके द्वारा 25 हजार का नुकसान बचाने के लिये और 25 हजार रुपये उनके बताये गये खाते में इन्वेस्ट हेतु जमा कर दिये गये और उन्हें पहले की तरह गाईड करने को कहा ताकि मैं पैसा निकाल सकूं किन्तु उनके द्वारा पुनः पॉलिसी बदलने की बात कहकर और एक लाख रुपया जमा करने को कहा गया। शक होने पर जब उसके द्वारा साइबर क्राईम को रिपोर्ट करने की बात कही तो उसका नं0 ब्लॉक कर दिया गया और वह Website- td network.info एवं tdnetwork.top भी बन्द आ रहे हैं।

उक्त प्रकरण की गम्भीरता के दृष्टिगत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एस0टी0एफ0 द्वारा घटना के शीघ्र अनावरण हेतु पुलिस उपाधीक्षक साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन देहरादून के निकट पर्यवेक्षण में पुलिस टीम गठित की गयी एवं अभियोग के शीघ्र एवं सफल अनावरण हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये। विवेचक निरीक्षक विकास भारद्वाज के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा घटना में प्रयुक्त बैंक खातों/मोबाइल नम्बरों आदि की जानकारी हेतु सम्बन्धित बैंकों, सर्विस प्रदाता कम्पनी तथा मेटा एवं गूगल आदि से पत्राचार कर डेटा प्राप्त किया गया और प्राप्त डेटा का गहनता से विश्लेषण करते हुये तकनीकी / डिजिटल साक्ष्य एकत्र किये गये साथ ही विवेचना से यह तथ्य भी प्रकाश में आये कि घटना में प्रयुक्त कॉलिंग मोबाइल नम्बर धारक महिलाओं से घटना के मास्टर माइण्ड अभियुक्त द्वारा सरकारी स्कीम के तहत कप का सेट देने की बात कहकर उनका आधार कार्ड, फोटो व एक मशीन पर अंगूठे का निशान लिया था व उन्हें धोखे में रखकर व झूठ बोलकर उनकी आई0डी0 पर सिम कार्ड निकलवाया गया है।

उक्त समस्त तथ्यों, साक्ष्यों एवं विवेचना का समेकित रुप से विश्लेषण के आधार पर घटना में संलिप्त मुख्य अभियुक्त को चिन्ह्ति किया गया एवं तलाश जारी करते हुये कई स्थानों पर दबिश दी गयी और आखिरकार साईबर पुलिस टीम द्वारा अथक मेहनत एवं प्रयास से तकनीकी संसाधनों का प्रयोग करते हुये अभियोग के मास्टर माइण्ड एवं मुख्य अभियुक्त सोहिल (काल्पनिक नाम) निवासी मंगलौर जनपद हरिद्वार को गिरफ्तार किया गया जिसके कब्जे से 1816 सिम कार्डस, दो चैक बुक, 05 मोबाइल फोन व 02 बायोमैट्रिक डिवाइस बरामद हुई।

मामले की विवेचना इंस्पेक्टर विकास भारद्वाज ने की, जिनका सहयोग एडिशनल एसपी चंद्रमोहन सिंह एवं पुलिस उपाधीक्षक श्री आर0वी0 चमोला की देखरेख में STF इंस्पेक्टर एनके भट्ट और उनकी टीम ने किया। उन्होंने डिप्टी एसपी अंकुश मिश्रा को मामले की बारीकी से निगरानी करने का निर्देश दिया. डिप्टी एसपी मिश्रा ने मोबाइल नंबरों का विश्लेषण करने के लिए I4C, गृह मंत्रालय के साथ समन्वय किया और पूरे भारत में कई आपराधिक शिकायतें मिलीं।

अपराध का तरीका

साइबर अपराधियों द्वारा साइबर अपराध से बेखबर लोगों को झांसा देकर जाल में फंसाने के लिये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, टेलीग्राम आदि पर पोस्ट / विज्ञापनों के माध्यम से ऑनलाईन ट्रेडिंग / इन्वेस्टमेण्ट की जानकारी देकर कम समय मे अधिक मुनाफा कमाने का लालच दिया जाता है यहां तक की शुरुआत में छोटे इन्वेस्टमेण्ट में मुनाफे की रकम भी दी जाती है। इसके बाद लिंक के माध्यम से इन्वेस्टमेण्ट हेतु फर्जी वैबसाइट से जोडा जाता है जिसमें इनके नाम के बनाये गये फर्जी खातो/डेसबोर्ड में इन्वेस्ट की गयी धनराशि को मुनाफा सहित दिखायी जाती है जिससे पीड़ित को अधिक मुनाफा होने का भरोसा हो जाता है और अधिक से अधिक इन्वेस्टमेण्ट कर मुनाफा कमाने का लालच देकर लाखों से करोडों रुपये की धोखाधडी को अंजाम दे दिया जाता है। अपराधियों द्वारा धोखाधडी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैक खातों में प्राप्त कर उक्त धनराशि को अन्य खातों में स्थानान्तरण कर कमिशन के रुप में लाभ प्राप्त किया जाता है ।

गिरफ्तार अभियुक्त द्वारा पूछताछ में बताया गया कि उसके द्वारा अपने कस्बे की कई महिलाओं को फर्जी सरकारी स्कीम अथवा कंपनी को ओर से कप का सेट देने का लालच देकर उनके आधार कार्ड आदि दस्तावेज व बायोमैट्रिक प्राप्त करके उन महिलाओं की आईडी पर फर्जी तरीके से धोखा देकर सिमकार्ड प्राप्त किये गये हैं और इन सिम कार्ड से मैं ओटीपी बायर को सिम कार्ड के जरिए ओटीपी बनाकर बेचता हूं। प्रत्येक सिम कार्ड के ओटीपी पर मुझे 03 रुपये से लेकर 50 रुपये तक का मुनाफा होता है। उसके बाद मैं सिम कार्ड तथा मोबाइल को तोड़कर जला देता हूं।

विवेचना से प्रकाश में आया है कि अभियुक्त द्वारा फर्जी तरीके से मोबाइल सिम कार्ड एक्टिवेट कर उसका ओटीपी अपने अन्य सहयोगियों को देकर व्हाट्सएप एक्टिवेट कराया गया है जिसके माध्यम से वादी से 50,000 की ठगी की गई है। तथा कई अन्य महिलाओं की आईडी पर धोखाधड़ी से हजारों सिम कार्ड एक्टिवेट कर उनके व्हाट्सएप व अन्य एप्लीकेशंस के ओटीपी जनरेट कर चाइनीज व कम्बोडिया से संचालित व्हाट्सएप ओटीपी ग्रुप के माध्यम से अन्य अभियुक्तों को दिए गए जिनके द्वारा व्हाट्सएप कॉलिंग कर या इंस्टाग्राम पर मासूम लोगों को अपने जाल में फंसा कर इन्वेस्टमेंट के नाम पर व अन्य लालच देकर साइबर ठगी को अंजाम दिया जा रहा है।* इसके अलावा और भी कई तथ्यों एवं अन्य पहलूओं के सम्बन्ध में विवेचना जारी है। गृह मंत्रालय के I4C द्वारा उत्तराखंड पुलिस को सहायता प्रदान की गई। इसके लिए हम सीईओ I4C डॉ. राजेश कुमार, निदेशक I4C रूपा एम, उप निदेशक मुनीश दत्त, वरिष्ठ फोरेंसिक विश्लेषक रूशी मेहता को धन्यवाद देते हैं।

गिरफ्तार अभियुक्त का नाम पता-
सोहिल (काल्पनिक नाम) निवासी मंगलौर, जनपद हरिद्वार।

दिनाँक गिरफ्तारी- 29.09.2024

बरामदगी- 1816 सिमकार्ड, दो चैक बुक, 5 मोबाइल फोन व 2 बायोमैट्रिक डिवाइस.

गिरफ्तारी पुलिस टीम-
1-निरी विकास भारद्वाज
2- निरी नन्द किशोर भट्ट
3- उनि विपिन बहुगुणा
4- उनि राजीव सेमवाल
5- अपर उनि मनोज बेनीवाल
6- अपर उनि देवेन्द्र भारती
7- हे का प्रमोद कुमार
8- हे कॉन्स देवेन्द्र मंमगाई
9-हे कॉन्स प्रमोद
10-कॉन्स नितिन कुमार
11-कानि शादाब अली
12-कानि मोहित जोशी

निलेश आनन्द भरणे पुलिस महानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था उत्तराखण्ड द्वारा जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के लोक लुभावने अवसरों/फर्जी साइट/धनराशि दोगुना करने व टिकट बुक करने वाले अंनजान अवसरो के प्रलोभन में न आयें। फर्जी निवेश ऑफर जैसे You Tube like सब्सक्राइब, टेलीग्राम आधारित निवेश वेबसाइट ऑफर में निवेश न करें व किसी भी अन्जान व्यक्ति के सम्पर्क में न आये अथवा न ही किसी भी अन्जान व्यक्ति से सोशल मीडिया पर दोस्ती न करें।

किसी भी अन्जान कॉल आने पर लालच में न आये, अन्जान कॉलर की सत्यता की जांच करे बिना किसी भी प्रकार की सूचना/ दस्तावेज न दें। किसी भी प्रकार के ऑनलाईन जॉब हेतु एप्लाई कराने से पूर्व उक्त साईट का पूर्ण वैरीफिकेशन सम्बन्धित कम्पनी आदि से भलीं भांति इसकी जांच पड़ताल अवश्य करा लें तथा गूगल से किसी भी कस्टमर केयर नम्बर सर्च न करें व शक होने पर तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर क्राईम पुलिस स्टेशन पर इसकी शिकायत जरुर करें । वित्तीय साईबर अपराध घटित होने पर तुरन्त 1930 नम्बर पर सम्पर्क करें।

उत्तराखंड: हल्द्वानी में सड़कों पर उतरे कांग्रेसी, निकाली जन आक्रोश रैली

0

हल्द्वानी: हल्द्वानी में कांग्रेस ने जन आक्रोश रैली निकाली। डीएम कार्यालय की ओर बढ़ रही रैली को पुलिस ने कैंप कार्यालय से करीब 200 मीटर पहले ही पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग पर चढ़कर उसे पार कर लिया और जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन और नारेबाजी की।

रैली में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, विधायक सुमित हृदयेश, उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी समेत कांग्रेस के कई दिग्गज नेता शामिल हुए। कांग्रेस ने दुष्कर्म, हत्या, लूट-डकैती, भ्रष्टाचार, महंगाई, रोजगार, अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम, स्थानीय मुद्दों को लेकर जनाक्रोश रैली निकाली है। इस दौरान सड़कों पर भारी भीड़ उमड़ गई।

कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नजर नहीं आ रही है। अपराधी उत्तराखंड को अपना असान ठिकाना बना रहे हैं। प्रदेश में लगातार अपराध बढ़ रहे हैं। लेकिन, सरकार को इससे कोई फर्क पड़ता हुआ नजर नहीं आ रही है।

सुनवाई के दौरान वकील पर भड़के मुख्य न्यायाधीश, बोले-ये कोई कॉफी शॉप नहीं है…

0

सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने एक वकील को फटकार लगा दी। CJI वकील की भाषा से इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने वकील को लगभग फटकार लगाते हुए कहा कि यह कोई कॉफी शॉप नहीं सुप्रीम कोर्ट है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वकील ने सुनवाई के दौरान हां (Yas) शब्द का इस्तेमाल किया। जिस पर मुख्य न्यायाधीश नाराज हो गए।

वकील ने साल 2018 की याचिका पेश की थी, जिसमें वकील ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई को प्रतिवादी बनाया हुआ था। याचिका पर सुनवाई करते हुए CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने हैरानी जताते हुए पूछा कि ‘यह अनुच्छेद 32 की याचिका है? आप एक न्यायाधीश को प्रतिवादी बनाते हुए याचिका कैसे दायर कर सकते हैं।

अनुच्छेद 32 देश के नागरिकों को अधिकार देता है कि जब उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन होने पर उनका इस्तेमाल कर सकते हैं। इस पर वकील ने कहा कि ‘हां, हां इसमें तब के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को प्रतिवादी बनाया गया है। मुझे सुधारात्मक याचिका दायर करने को कहा गया था।

वकील के इतना कहते ही मुख्य न्यायाधीश नाराज हो गए और वकील को टोकते हुए कहा कि ‘यह कोई कॉपी शॉप नहीं है, ये क्या है हां, हां…। मुझे इस शब्द से नफरत है। कोर्ट में इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। CJI ने कहा कि ‘जस्टिस गोगोई इस अदालत के पूर्व जज हैं और आप इस तरह से किसी जज के खिलाफ याचिका दायर कर ये मांग नहीं कर सकते कि इसकी आंतरिक जांच की जाए, क्योंकि इससे पहली बेंच ने आपकी याचिका को स्वीकार नहीं किया था।

इसके बाद मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि रजिस्ट्री विभाग याचिका को सूचीबद्ध करने पर फैसला लेगा। साथ ही उन्होंने याचिकाकर्ता से याचिका में जस्टिस गोगोई नाम को हटाने का निर्देश दिया क्योंकि जस्टिस गोगोई अब राज्यसभा के सदस्य हैं।

दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

0

सिनेमा की दुनिया से बड़ी खबर आई है। भारतीय सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को ‘दादा साहेब फाल्के’ लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

8 अक्टूबर को प्रदान किया जाएगा यह पुरस्कार

पश्चिम बंगाल के सुपरस्टार मिथुन चक्रवर्ती को यह पुरस्कार मंगलवार, 8 अक्टूबर 2024 को आयोजित होने वाले 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के दौरान प्रदान किया जाएगा। ऐसे में 8 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल में शुरू होने जा रहा नवरात्रि का मौसम यानि दुर्गा पूजा पर्व और भी खास होने वाला है।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी

यह जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी है। बताना चाहेंगे 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

मिथुन दा की उल्लेखनीय सिनेमाई यात्रा पीढ़ियों को करती है प्रेरित 

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, मिथुन दा की उल्लेखनीय सिनेमाई यात्रा पीढ़ियों को प्रेरित करती है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक साधारण परिवार से एक प्रसिद्ध फिल्म आइकन बनने तक मिथुन चक्रवर्ती का सफर उम्मीद और दृढ़ता की भावना को दर्शाता है, जो साबित करता है कि जुनून और समर्पण के साथ, कोई भी सबसे महत्वाकांक्षी सपने को भी हासिल कर सकता है। उनके समर्पण और कड़ी मेहनत ने उन्हें महत्वाकांक्षी अभिनेताओं और कलाकारों के लिए एक आदर्श बना दिया है।

मिथुन दा का उल्लेखनीय सफर

सुपरस्टार मिथुन चक्रवर्ती ने न केवल भारतीय फिल्मों में अभिनय किया है बल्कि बंगाली फिल्मों में उन्हें सुपरस्टार के तौर पर देखा जाता रहा है। मिथुन चक्रवर्ती, जिन्हें ‘मिथुन दा’ के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रतिष्ठित भारतीय अभिनेता, निर्माता और राजनीतिज्ञ हैं। मिथुन चक्रवर्ती को उनकी बहुमुखी भूमिकाओं और विशिष्ट नृत्य शैली के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपनी फिल्मों में कई तरह की भूमिकाएं अदा की हैं, जिसमें एक्शन से भरपूर किरदारों से लेकर मार्मिक नाटकीय प्रदर्शन तक शामिल हैं।

1976 में अपनी पहली ही फिल्म “मृगया” में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता

16 जून, 1950 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में जन्मे ‘गौरांग चक्रवर्ती’ ने अपनी पहली ही फिल्म “मृगया” (1976) में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता। प्रतिष्ठित फिल्म और टेलीविजन संस्थान (FTII) के पूर्व छात्र, मिथुन चक्रवर्ती ने अपने हुनर को निखारा और सिनेमा में अपने शानदार करियर की नींव रखी।

1980 के दशक में फिल्म “डिस्को डांसर” से घर-घर में मशहूर हो गए मिथुन 

मृणाल सेन की फिल्म में संथाल विद्रोही की भूमिका निभाने के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा मिली। मिथुन ने 1980 के दशक में “डिस्को डांसर” (1982) में अपनी भूमिका से काफी लोकप्रियता हासिल की। यह एक ऐसी फिल्म थी जो भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी सफलता बन गई, जिसने उन्हें एक डांसिंग सनसनी के रूप में स्थापित कर दिया। डिस्को डांसर (1982) में अपनी प्रतिष्ठित भूमिका से वे घर-घर में मशहूर हो गए, यह एक ऐसी फिल्म थी जिसने न केवल उनके असाधारण नृत्य कौशल को प्रदर्शित किया बल्कि भारतीय सिनेमा में डिस्को संगीत को भी लोकप्रिय बनाया।

‘अग्निपथ’ में 1990 में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला 

अग्निपथ में उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें 1990 में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला। बाद में, उन्होंने तहदेर कथा (1992) और स्वामी विवेकानंद (1998) में अपनी भूमिकाओं के लिए दो और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते।

हिंदी, बंगाली, ओडिया, भोजपुरी और तेलुगु सहित 350 से अधिक फिल्मों में किया अभिनय

अपने व्यापक करियर के दौरान, मिथुन ने हिंदी, बंगाली, ओडिया, भोजपुरी और तेलुगु सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। उन्हें एक्शन से लेकर ड्रामा और कॉमेडी तक के अपने विविध अभिनय के लिए जाना जाता है और उन्होंने कई पुरस्कार जीते हैं, जिनमें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार शामिल हैं।

मिथुन दा की दोहरी विरासत

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मिथुन दा को न केवल उनकी सिनेमाई उपलब्धियों के लिए बल्कि सामाजिक कार्यों के प्रति उनके समर्पण के लिए भी जाना जाता है। वे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और वंचित समुदायों का समर्थन करने के उद्देश्य से विभिन्न धर्मार्थ पहलों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं, जो समाज को वापस देने के लिए उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने संसद सदस्य के रूप में भी काम किया है, जो सार्वजनिक सेवा और शासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

लगभग पांच दशकों के करियर में, मिथुन चक्रवर्ती ने कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं, जो भारतीय सिनेमा में उनके महत्वपूर्ण योगदान को मान्यता देते हैं। उन्हें हाल ही में भारतीय सिनेमा में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित पद्म भूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। “डिस्को डांसर” और “घर एक मंदिर” जैसी क्लासिक फिल्मों के साथ, उन्होंने न केवल लाखों लोगों का मनोरंजन किया है, बल्कि बॉलीवुड और क्षेत्रीय सिनेमा के परिदृश्य को भी आकार दिया है। उनका प्रभाव सिल्वर स्क्रीन से परे भी फैला हुआ है, क्योंकि वे फिल्म और परोपकार के क्षेत्र में अपने काम के माध्यम से पीढ़ियों को प्रेरित करते रहते हैं।

उत्तराखंड में ‘हाउस अरेस्टिंग’ का एक और मामला, 2 करोड़ 27 लाख ठगे

0

देहरादून: हाउस अरेस्टिंग के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। राजधानी देहरादन में ही पिछले कुछ महीनों में कई मामले सामने आ चुके हैं। ताजा मामला भी देहरादून का ही है। यहां एक रिटायर्ड टीचर को हाउस अरेस्टिंग के जरिए डर दिखाने वाले साइर ठगों ने 9 दिन तक घर में हाउस हरेस्ट रखा। डिजिटली हाउस अरेस्टिंग के जरिए ठगों ने उनसे 2 करोड़ 27 लाख हड़प लिए।

डिजिटल ठगों ने उनको मनी लाड्रिंग के 20 लाख रुपये के लेनदेन की बात कहकर डराया। हमेशा ती तरह इस बार भी पुलिस और जांच एजेंसी का डर दिखाकर शिक्षक को ठगा गया। ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया। उनको हर तीन घंटे में वाट्सएप पर उपस्थित होने की धमकी दी गईं। साइबर थाना पुलिस ने इस मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

मामला देहरादून के निरंजनपुर का है। रिटायर्ड शिक्षक महिपाल सिंह ने पुलिस को बताया कि 9 सितंबर को उनके पास मुंबई साइबर क्राइम के नाम से काल आई। खुद को सब इंस्पेक्टर विनोय कुमार चौबे बताने वाले ने एक मुकदमे के संबंध में वीडियो काल पर बात करने के लिए कहा। वीडियो काल पर कहा गया कि उनके आधार कार्ड और मोबाइल नंबर से एक बैंक का खाता खोला गया है, जिसमें अपराध से संबंधित मनी लाड्रिंग का 20 लाख रुपये का लेनदेन हुआ है। डरा धमकाकर यह भी कहा गया कि उनके नाम से अरेस्ट वारंट निकला है। उन्हें 24 घंटे में गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

ठगों ने इस बार मामले का राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बताया और किसी को नहीं बताने की धमी दी। इससे बचने के लिए जब उन्होंने उनसे जानकारी पूछी तो ठगों ने इस केस को उच्चस्तर का बताया और कहा कि वह उनकी निगरानी में रहेंगे और हर तीन घंटे में वाट्सएप पर अपनी उपस्थिति के मैसेज करने होंगे।

10 सितंबर को विनोय कुमार नाम के व्यक्ति ने फिर फोन किया और पुलिस अधिकारी आकाश कुल्हारी से बात करने को कहा। इस बीच उन्हें नोटिस और कोर्ट के दस्तावेज भी भेजे गए। ठगों ने उनके सभी बैंक खातों की जानकारी भी ले ली। इसके बाद 11 सितंबर से 17 सितंबर के बीच ठगों के खातों में दो करोड़ 27 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

इसके बाद ठगों ने कहा कि अवैध लेनदेन को ट्रेक करने के लिए उनके बैंक खातों की निगरानी की जा रही है। 24 से 48 घंटे के बाद सारे रुपये वापस हो जाएंगे। लेनदेन गलत पाए जाने पर घर की नीलामी होने की भी चेतावनी दी गई। ठगों ने इसके बाद और धनराशि खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहा तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ। अब मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने इस मामले की विवेचना निरीक्षक देवेंद्र सिंह नबियाल को सौंपी है।

साहित्यकार महावीर रवांल्टा को मिला ‘श्री रघुनाथ कीर्ति सेवा सम्मान’

0

देवप्रयाग: प्रसिद्ध साहित्यकार महावीर रवांल्टा को हिन्दी पखवाड़ा के समापन पर केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर-देवप्रयाग में ‘श्री रघुनाथ कीर्ति हिन्दी सेवा सम्मान -2024’ से सम्मानित किया गया। उनको यह सम्मान पूर्व केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने दिया। सम्मान के तहत स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र व सम्मान राशि का चेक भेंट किया किया गया। इस अवसर पर देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी, अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. पी. वी. बी. सुब्रह्मण्यम, हिन्दी पखवाड़ा कार्यक्रम के संयोजक डॉ. वीरेन्द्र सिंह बर्तवाल ने उपस्थिति रहे।

प्रति वर्ष यह सम्मान हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है। इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों को भी इस अवसर पर पुरस्कृत किया गया। वहीं, इस मौके पर डॉ. वीरेन्द्र सिंह वर्त्वाल की पुस्तक ‘नौ नाथ, सौ सिद्ध’ का लोकार्पण किया गया। संचालन डॉ. ब्रह्मानंद मिश्रा ने किया।

महावीर रवांल्टा ने कहा कि केन्द्रीय संस्कृत विश्व विद्यालय, श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर की ओर से मिले इस सम्मान ने सृजन के प्रति मेरी जिम्मेदारी को और भी बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि परिसर के सभी जनों से मिली आत्मीयता व प्रेम से अभिभूत हूं।

जानें कौन हैं महावीर रवांल्टा

उत्तराखंड के समकालीन साहित्यकारों में महावीर रवांल्टा ने विशिष्ट पहचान बनाई है। महावीर रवांल्टा गद्यकार, अभिनेता और कवि हैं। उन्होंने अपने साहित्य में लोक को सबसे ज्यादा स्थान दिया। अपने आसपास की घटनाओं को उन्होंने अपना विषय चुना। पहाड़ी लोकजीवन की ऐसी गहरी समझ किसी और में नहीं दिखाई देती है। अब तक उनकी विभिन्न विधाओं में 43 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

लोक के प्रति प्रेम

अपने लोक के प्रति उनका प्रेम उनकी रचनाओं में साफ नजर आता है। रवांई क्षेत्र की संस्कृति, लोकजीवन, लोक परंपराओं और लोकगीत भी कहीं ना कहीं उनकी रचनाओं में अपनी जगह बना ही लेते हैं। महावीर रवांल्टा साहित्य विभिन्न विधाओं को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने नाटक, उपन्यास, कहानी, रवांल्टी कविता संग्रह, लोक कथाएं और बाल साहित्य भी रचा है।

दरवालु जनलहर में प्रकाशित

महावीर रवांल्टा का जन्म सरनौल गांव में 10 मई 1966 को हुआ। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा गांव और फिर उत्तरकाशी में हुई। 1995 में पहली रवांल्टी कविता दरवालु जनलहर में प्रकाशित हुई। देशभर की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्रिकाओं मे रचनाओं का प्रकाशन लगातार हो रहा है।

आकाशवाणी और दूरदर्शन में प्रसारण

आकाशवाणी और दूरदर्शन में प्रसारण का सिलसिला भी जारी है। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में इनके साहित्य पर लघु शोध और शोध कार्य हो चुके हैं। महावीर रवांल्टा का कहना है कि साहित्य, संस्कृति और लोक भाषा हमारी पहचान है। पहाड़ की विकटता को करीबी से देखा और जाना है।

रवांल्टी को संरक्षित करने का काम

महावीर रवांल्टा ने हिन्दी साहित्य के साथ लोकभाषा रवांल्टी को संरक्षित और संवर्धित करने का काम किया है। उन्होंने रवांल्टी में लेखन के लिए एक टीम तैयार की। आकाशवाणी से लेकर दूरदर्शन और विभिन्न मंचों पर भी रवांल्टी को कविताओं में रूप में पहुंचाया। रवांल्टी भाषा आंदोलन का असर भी देखने को मिल रहा है। रवांल्टी में लिखने में दिलचस्पी बढ़ी है। सोशल मीडिया में बहुत सारे लोग लगातार लिख रहे हैं।

अब तक मिले ये सम्मान

1. सैनिक एवं उनका परिवेश विषय पर अखिल भारतीय कहानी लेखन प्रतियोगिता में ‘अवरोहण’ कहानी के लिए कानपुर (उत्तर प्रदेश) में परमवीर चक्र विजेता ले. कर्नल धन सिंह थापा सुप्रसिद्ध उद्घोषक पद्मश्री जसदेव सिंह और एयर मार्शल आरसी वाजपेयी के हाथों पहली बार सम्मान मिला।

2. स्व. वेद अग्रवाल स्मृति सम्मान (मेरठ)।

3. सेठ गोविन्द दास सम्मान (जबलपुर)।

4. डॉ. बाल शौरि रेड्डी सम्मान (उज्जैन)।

5. स्पेनिन साहित्य गौरव सम्मान (रांची)।

6. यमुना घाटी का प्रतिष्ठित तिलाड़ी सम्मान (बड़कोट)।

7. जनधारा सम्मान (नैनबाग)।

8. अम्बिका प्रसाद दिव्य रजत अलंकरण (भोपाल)।

9. उत्तराखण्ड शोध संस्थान रजत जयंती सम्मान हल्द्वानी।

10. कमलराम नौटियाल स्मृति सम्मान (उत्तरकाशी)।

11. तुलसी साहित्य सम्मान (भोपाल)।

12. उत्तरखंड फिल्म, टेलीविसिओ एवं रेडियो एसोसिएशन की ओर से सम्मान (देहरादून)।

13. युवा लघु कथाकार सम्मान (दिल्ली)।

14. बाल साहित्य संस्थान (अल्मोड़ा)।

15. बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केन्द्र (भोपाल)।

16. उत्तराखंड बाल कल्याण साहित्य संस्थान (खटीमा)।

17. उत्तराखंड भाषा संस्थान का प्रतिष्ठित उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान-गोविंद चातक सम्मान।

18.रवांई लोक महोत्सव में बर्फिया लाल जुवांठा सम्मान।

19. श्रीदेव सुमन सम्मान मिला।

20. बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा की ओर से बाल साहित्य के लिए सम्मानित।

23. अमर उजाला की ओर से उत्तराखंड उदय सम्मान।

मूल निवास और भू-कानून के लिए ऋषिकेश में सड़कों पर उतरे लोग

0

ऋषिकेश। मूल निवास 1950, और सशक्त भू-कानून की मांग को लेकर ऋषिकेश में विशाल महारैली का आयोजन किया गया। इस महारैली में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों लोग शामिल हुए।’मूल निवास, भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति’ के आह्वान पर हुई इस महारैली में प्रदेश के विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों, पूर्व सैनिकों, पूर्व कर्मचारियों ने शिरकत की।

कार्यक्रम शुरू होने से पूर्व मूल निवास, भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने नटराज चौक पर उत्तराखंड राज्य निर्माण के नायक रहे इंद्रमणि बडोनी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद संघर्ष समिति के बैनर तले जनसभा का आयोजन किया गया। जनसभा के बाद आंदोलनकारियों ने IDPL ऋषिकेश से त्रिवेणी घाट तक विशाल जुलूस निकाला।

 

इस मौके पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मूल निवास, भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि, 40 से ज्यादा आंदोलनकारियों की शहादत से हासिल हुआ हमारा उत्तराखंड राज्य आज 24 साल बाद भी अपनी पहचान के संकट से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि यहां के मूल निवासियों को उनका वाजिब हक नहीं मिल पाया है और अब तो हालात इतने खतरनाक हो चुके हैं कि मूल निवासी अपने ही प्रदेश में दोयम दर्जे के नागरिक बनते जा रहे हैं। आज न मूल निवासियों को नौकरी मिल रही और न ठेकेदारी। हर तरह के संसाधन मूल निवासियों के हाथों खिसकते जा रहे हैं।

डिमरी ने कहा कि मूल निवास की कट ऑफ डेट 1950 लागू करने के साथ ही प्रदेश में मजबूत भू-कानून लागू किया जाना बेहद जरूरी है। मूल निवास का मुद्दा उत्तराखंड की पहचान के साथ ही यहां के लोगों के भविष्य से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि मूल निवास की लड़ाई जीते बिना उत्तराखंड का भविष्य असुरक्षित है। मजबूत भू-कानून न होने से ऋषिकेश ही नहीं पूरे उत्तराखंड में जमीनों की खुली बंदरबांट चल रही है। इससे राज्य की डेमोग्राफी बदल गई है। हमारे लोगों को जमीन का मालिक होना था और वे लोग रिसोर्ट/होटलों में नौकर/चौकीदार बनने के लिए विवश हैं। हम अपने लोगों को नौकर नहीं मालिक बनते हुए देखना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि आज ऋषिकेश अपराधियों का अड्डा बनता जा रहा है। सरेआम मूल निवासियों को मारा-पीटा जा रहा है। ड्रग्स और नशे के कारोबार कारण हमारे बच्चों का भविष्य ख़त्म हो रहा है।

‘मूल निवास, भू-कानून समन्वय संघर्ष समिति’ के सह संयोजक लुसुन टोडरिया और सचिव प्रांजल नौडियाल ने कहा कि उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित रहें, इसके लिए मूल निवास 1950 और मजबूत भू-कानून लाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के युवाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

समिति से जुड़े हिमांशु बिजल्वाण, कोर मेंबर सुरेंद्र नेगी, और हिमांशु रावत ने कहा कि जिस तरह प्रदेश के मूल निवासियों के हक हकूकों को खत्म किया जा रहा है, उससे एक दिन प्रदेश के मूल निवासियों के सामने पहचान का संकट खड़ा हो जाएगा।

समिति के गढ़वाल संयोजक अरुण नेगी और कुमांऊ संयोजक राकेश बिष्ट ने कहा कि अगर सरकार जनभावना के अनुरूप मूल निवास और मजबूत भू-कानून लागू नहीं करेगी तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

सामाजिक कार्यकर्ता एलपी रतूड़ी, विकास सेमवाल, हर्ष व्यास, सुदेश भट्ट, हिमांशु पंवार, अनिल डोभाल, गोकुल रमोला, कुसुम जोशी, पंकज उनियाल, प्रमोद काला, उषा डोभाल, सुरेंद्र रावत, आशीष नौटियाल, नमन चंदोला, शूरवीर चौहान, नीलम बिजल्वाण, केपी जोशी ने कहा कि इस आंदोलन को प्रदेशभर से लोगों का मजबूत समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले साल 24 दिसंबर को देहरादून में हुई महारैली के बाद हल्द्वानी, टिहरी, श्रीनगर और कोटद्वार, गैरसैंण के बाद अब ऋषिकेश में जिस तरह से जनसैलाब उमड़ा है, उससे स्पष्ट है कि राज्य के लोग अपने अधिकारों, सांस्कृतिक पहचान और अस्तित्व को बचाने के लिए निर्णायक लड़ाई के लिए तैयार हैं। कार्यक्रम का संचालन प्रांजल नौडियाल और संजय सिलस्वाल ने किया।

 

स्वाभिमान यात्रा निकालेगी संघर्ष समिति

ऋषिकेश में हुई रैली के बाद मूल निवास आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए जल्द ही अगले कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी। संघर्ष समिति के संयोजक मोहित डिमरी ने बताया कि प्रदेश में मूल निवास की सीमा 1950 और मजबूत भू-कानून लागू करने को लेकर चल रहे आंदोलन को घर-घर में ले जाया जाएगा।अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

उन्होंने कहा कि बहुत जल्द ठोस कार्यक्रम बनाकर पूरे प्रदेश में स्वाभिमान यात्रा शुरू शुरू की जाएगी। डिमरी ने बताया कि चरणबद्ध तरीके से समिति विभिन्न कार्यक्रम करेगी, जिसके तहत गांव-गांव जाने से लेकर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में जाकर युवाओं से संवाद किया जाएगा। इस बाबत जल्द ही कार्यक्रम का ऐलान किया जाएगा।

 

प्रमुख मांगे

 

1- प्रदेश में मूल निवास की कट ऑफ डेट 1950 घोषित की जाए। इसके आधार पर मूल निवासियों को सरकारी और प्राइवेट नौकरियों, ठेकेदारी, सरकारी योजनाओं सहित तमाम संसाधनों में 90 प्रतिशत हिस्सेदारी दी जाय।

2- प्रदेश में मजबूत भू-कानून लागू हो, जिसके तहत शहरी क्षेत्रों में 200 वर्ग मीटर भूमि खरीदने की सीमा लागू किया जाए तथा इसकी खरीद के लिए 30 वर्ष पहले से उत्तराखंड में रहने की शर्त लागू हो।

 

3- प्रदेश के समस्त ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि खरीदने-बेचने पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगे।

 

4- राज्य गठन के बाद से वर्तमान तिथि तक सरकार द्वारा विभिन्न व्यक्तियों, संस्थानों, कंपनियों आदि को बेची गई और दान व लीज पर दी गई भूमि का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए।

5- प्रदेश में किसी भी तरह के उद्योग के लिए जमीन को 10 साल की लीज पर दिया जाय। इसमें भी पचास प्रतिशत हिस्सेदारी स्थानीय लोगों की तय की जय और ऐसे सभी उद्यमों में 90 प्रतिशत रोजगार स्थानीय लोगों को दिया जाना सुनिश्चित किया जाए। जिस उद्योग के लिए जमीन दी गई है, उसका समय-समय पर मूल्यांकन किया जाय। इसी आधार पर लीज आगे बढ़ाई जाय।

निष्क्रिय इच्छामृत्यु पर सरकार की नई गाइडलाइंस, कब हटा पाएंगे लाइफ सपोर्ट?

0

स्वास्थ्य मंत्रालय ने पैसिव यूथनेसिया यानी निष्क्रिय इच्छामृत्यु पर ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की हैं। यह ऐसी स्थिति है जब मरीज गंभीर और न ठीक होने वाली बीमारी से जूझ रहा हो। उसके ठीक होने की कोई उम्मीद न बची हो। भारत सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए लाइलाज बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए लाइफ सपोर्ट हटाने संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं।

इन दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि एक लाइलाज बीमारी से पीड़ित मरीज के लिए लाइफ सपोर्ट जारी रखना बेमानी हो और मरीज के परिवार या प्रतिनिधि भी इस बात से सहमत हों, तो अस्पताल के मेडिकल बोर्ड की अनुमति से लाइफ सपोर्ट हटाया जा सकता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने 20 अक्टूबर तक इस ड्राफ्ट पर राय मांगी है। हालांकि, इस निर्णय को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं क्योंकि इससे मरीजों को अनावश्यक पीड़ा से बचाया जा सकता है। वहीं, कुछ लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इस निर्णय का गलत इस्तेमाल हो सकता है। इसके लिए 4 शर्तें तय की गई हैं।

जब लाइफ सपोर्ट से मरीज को कोई लाभ न मिल रहा हो। उसे पीड़ा हो रही है। जब मरीज को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया हो। मरीज या उसके परिजन लिखित में लाइफ सपोर्ट जारी रखने से मना कर दें। यह निर्णय उन मरीजों पर लागू होगा जिनके लिए वेंटिलेटर, सर्जरी या कोई और मेडिकल ट्रीटमेंट भी फायदेमंद नहीं हैं। सरकार का मानना है कि ऐसे मामलों में लाइफ सपोर्ट जारी रखना न केवल मरीज के लिए बल्कि उसके परिवार के लिए भी एक भावनात्मक और आर्थिक बोझ होता है।

इस फैसले पर पहुंचने से पहले एक प्राइमरी मेडिकल बोर्ड और फिर एक अन्य मेडिकल बोर्ड द्वारा मरीज की स्थिति जांची जाएगी। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस प्रक्रिया में मरीज और उसके परिवार की स्वायत्तता का सम्मान किया जाए। यह निर्णय निश्चित रूप से एक जटिल मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं मरीज की ओर से इस पर फैसला कौन करेगा जब मरीज खुद ऐसा नहीं कर पा रहा। ऐसी स्थिति में सरोगेट पर निर्भर करेगा। यह निर्णय लाइफ सपोर्ट हटाने के बारे में हो सकता है। सरोगेट कौन होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज ने पहले से कोई निर्देश दिया है या नहीं।