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भाजपा पर गंभीर आरोप, जमीनों में किया बड़ा खेल

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देहरादून: कांग्रेस ने प्रैस कॉन्फ्रेंस की और भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगाए।

प्रदेश में जमीनों को लेकर विपक्ष ने भाजपा सरकारों पर बड़ा खेल करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने कहा कि त्रिवेंद्र सरकार ने जमीनों के मामले में पाप किया है तो धामी सरकार ने महा पाप किया है।

पूर्व विधायक केदारनाथ मनोज रावत ने कहा कि प्रदेश में भू कानून को लेकर बड़े पैमाने पर आंदोलन हो रहे हैं। हाल ही में सीएम ने अगस्त्यमुनि में कार्यक्रम में घोषणा की है कि वह बहुत सख्त भू कानून लाने जा रहे हैं। इससे पहले भी सीएम ने 2022 में उच्च अधिकार समिति बनाई थी। उसने क्या किया हम नहीं जानते। उत्तराखंड में जो प्रचलित भू-कानून है, उसकी दो धाराओं में बदलाव करके किसे फायदा पहुंचाया गया।

कांग्रेस ने सवाल किया कि इन बदलाव के बाद उत्तराखंड की कितनी जमीन कितने लोगों को दी गई है, उसका खुलासा करेंगे। हरिद्वार और पौड़ी जिले का हमने सर्वे किया है। जिसमें जमीनों का खेल सामने आया है। मसूरी के पास पार्क इस्टेट की 422 एकड़ जमीन थी। इसमें से पर्यटन विकास के लिए यूपी ने पूर्व में अधिग्रहित की थी।

यूपी के जमाने में समाजवादी पार्टी की सरकार में इस जमीन को एक कम्पनी को देने पर विरोध हुआ था। सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे ने 172 एकड़ पर्यटन की भूमि में से 142 एकड़ भूमि एक एडवेंचर स्पोर्ट्स कम्पनी को एक करोड़ सालाना किराये पर 15 साल के लिए दे दी है।

उत्तराखंड सरकार ने खरबों की भूमि एक कंपनी को दी। वहां से हेलिकॉप्टर संचालन था। 15 साल काम करने के बाद पर्यटन विभाग चाहेगा तो सबसे पहले इसी कम्पनी को देगा। इससे पहले सरकार ने उस जमीन के रख रखाव के लिए एडीबी से 23 करोड़ का कर्ज लिया।

जिस कंपनी को काम दिया गया, उसकी शर्तें बदली गईं। इस वजह से राजस स्पोर्ट्स कम्पनी को ठेका दिया गया। टेंडर डालने वाली तीन कंपनियां हैं, जिनका ऑफिस एक ही जगह है। उत्तराखंड सरकार वित्त अनुभाग के शासनादेश का उल्लंघन किया गया है। कंपनी ने सबसे पहले इस जमीन के आसपास रहने वालों के सभी रास्ते बंद कर दिए। इस जमीन से नियमविरुद्ध हेलिकॉप्टर संचालन हो रहा है। सरकार ने पिछले साल केदारनाथ के लिए भी राजस एरो स्पोर्ट्स को काम देना चाहती थी, जो विरोध के बाद रुका था।

कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि  2018 के बाद भू कानून में 11 परिवर्तन किए गए। त्रिवेंद्र सरकार ने जमीनों के मामले में पाप किया है तो धामी सरकार ने महापाप किया है। कहा कि त्रिवेंद्र रावत ने ये नियम जोड़ा था कि जमीन का प्रयोग नहीं किया जाएगा तो वह जमीन सरकार में निहित होगी। धामी सरकार ने 2022 में ये नियम हटा दिया। सदन में उस समय ये विधेयक लाए गए हैं, जब विपक्ष ने बहिष्कार किया है।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि उत्तराखंड के जल, जंगल, जमीन पर उत्तराखंड के जन मानस का अधिकार होना चाहिए। ये जमीनों का बड़ा घोटाला है। लैंड यूज बदल दिए गए। जनमानस का सरकार से भरोसा उठ गया है। सरकार इस ममले पर अपना रुख स्पष्ट करे।

कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड में तिवारी सरकार ने सशक्त भू कानून बनाया था, वह अपने आप में बहुत मजबूत था। मेरी अध्यक्षता में बनी मंत्रिमंडल की उप समिति ने सिफारिश की थी कि भू कानून के लिए उत्तराखंड के मूल निवासियों के लिए राहत दी जाए जो कि पिछली सरकार ने नहीं किया। आज फिर राज्य आंदोलन की भांति ही माहौल बन रहा है। हमारी प्रदेश की सरकार उत्तराखंड के लोगों के साथ अन्याय कर रही है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि 1961, 1962 के बाद से प्रदेश में बंदोबस्ती नहीं हुई, जो जल्दी किया जाए। कुमाऊँ मंडल विकास निगम ने भी इसी कम्पनी के साथ मिलकर हेली सेवा शुरू की है। लोगों की पुश्तैनी जमीनों को सरकार निहित कर रही है। जिससे लोगों में भारी आक्रोश है। प्रदेश में 80% से ज्यादा जमीनें बंजर पड़ी हैं। राजा भैया की जमीन सरकार में निहित करने वाले कल हमारी और आपकी बंजर जमीनें भी सरकार में निहित करेगी।

कांग्रेस पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि उत्तराखंड सरकार बहती हुई नदी के पास बगुले भगत की तरह है। सीएम धामी ने मजबूत भू कानून की बात की थी। अगर उन्हें लग रहा है कि गलत हो रहा है तो तत्काल अध्यादेश लाना चाहिए था। लेकिन सरकार ने सख्त कानून की घोषणा कर उन लोगों को अलर्ट किया है। उत्तराखंड में एक न्यायिक आयोग बने। वह आयोग गड़बड़ी करने वालों की जांच करे। उन्होंने सीएम के इस्तीफे की मांग की।

Tax फ्री हो सकती है 8 लाख रुपये तक की इनकम, इनको दायरे में ला सकती है सरकार!

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Income Tax Returns की संख्या हर साल बढ़ती ही जा रही है. इस साल करीब 7.3 करोड़ लोगों ने ITR भरे हैं. मार्च, 2025 तक यह आंकड़ा 9 करोड़ को पार कर सकता है. हालांकि, अगर सरकार 8 लाख रुपये की सालाना इनकम को टैक्स फ्री करने का फैसला करती है, तो यह आंकड़ा बहुत आसानी से पार किया जा सकता है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस छूट को देने की डिमांड उठाई जाने लगी है. ऐसे में सरकार 60 से 80 साल के सीनियर सिटीजन को यह राहत दे सकती है.

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के इकोनॉमिक डिपार्टमेंट की इस रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, अगर सरकार को असेसमेंट ईयर 2024-25 में आईटीआर की संख्या में तेज इजाफा करना है तो उसे ऐसे कदम उठाने से हिचकना नहीं होगा. अगर सीनियर सिटीजन को यह छूट दी जाती है तो रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में जबरदस्त इजाफा होगा.

SBI की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल करीब 2 करोड़ और ITR फाइल होने की उम्मीद है. ऐसे में वित्त वर्ष के अंत तक आईटीआर की संख्या 9 करोड़ को पार कर जाएगी. अगले साल यह आंकड़ा 10 करोड़ को आसानी से पार कर सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि असेसमेंट ईयर 2022 में कुल 7.3 करोड़ ITR भरे गए थे. असेसमेंट ईयर 2024 में यह आंकड़ा 8.6 करोड़ रहा था.

हालांकि, तय तारीख के बाद आईटीआर भरने वालों की संख्या तेजी से घटती जा रही है. ऐसे में समझ आ रहा है कि अब लोगों में ITR तय समय से भरने का अनुशासन बढ़ता जा रहा है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने भी प्रक्रिया और फॉर्म को आसान बनाकर ITR भरना आसान बना दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को टीडीएस कटौती के दायरे में सुधार करना चाहिए. साथ ही TDS सर्टिफिकेट में भी बदलाव करने चाहिए

जस्टिस संजीव खन्ना होंगे अगले मुख्य न्यायाधीश, इस दिन लेंगे लेंगे शपथ, इन फैसलों में रही अहम भूमिका

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जस्टिस संजीव खन्ना को भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की है। जस्टिस संजीव खन्ना 11 नवंबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ लेंगे। उनकी नियुक्ति वर्तमान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के सेवानिवृत्त होने के बाद हुई है।

ये हैं ख़ास बातें

  • जस्टिस संजीव खन्ना देश के 51वें CJI होंगे। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में जस्टिस संजीव खन्ना का कार्यकाल लगभग छह महीने का होगा और वह 13 मई 2025 को सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
  • जस्टिस संजीव खन्ना को गुरुवार को भारत का 51वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। वह 11 नवंबर को शपथ लेंगे, जिसके एक दिन बाद मौजूदा न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ सेवानिवृत्ति हो जाएंगे।
  • जस्टिस खन्ना को 2005 में दिल्ली उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। 2006 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया था। 18 जनवरी 2019 को उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। 14 मई 1960 को जन्मे जस्टिस संजीव खन्ना ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर में कानून की पढ़ाई की।
  • सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस खन्ना के कुछ उल्लेखनीय निर्णयों में चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के इस्तेमाल को बरकरार रखना शामिल है। वे पांच जजों की बेंच का भी हिस्सा थे, जिसने राजनीतिक दलों के वित्तपोषण के लिए बनाई गई चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित किया था।
  • जस्टिस खन्ना पांच जजों की बेंच का हिस्सा थे, जिसने संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र के 2019 के फैसले को बरकरार रखा, जिसने तत्कालीन जम्मू और कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा दिया था।

चुनाव से पहले यहां पकड़ा गया 139 करोड़ का सोना

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पुणे : महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग की स्टेटिक सर्विलांस टीम (SST) ने 139 करोड़ रुपये का सोना पकड़ा है। यह सोने की खेप एक लॉजिस्टिक सर्विस फर्म के वाहन से पकड़ी गई है। हालांकि, पुणे के एक ज्वैलर्स फर्म ने दावा किया है कि सोने की यह खेप वैध है।
महाराष्ट्र के पुणे में SST को तैनात किया गया है। पुलिस उपायुक्त (जोन 2) स्मार्तना पाटिल ने बताया कि सहकारनगर इलाके में सीक्वल ग्लोबल प्रेशियस लॉजिस्टिक्स के एक टेम्पो अचानक रोका गया। तलाशी लेने पर पता चला कि टेम्पो में रखे बक्सों में आभूषण हैं। यह टैम्पो मुंबई से आया था। इसके बाद मामले की जानकारी आयकर विभाग और चुनाव अधिकारियों को दी गई। टेम्पो में मिले आभूषण की कीमत 139 करोड़ रुपये आंकी गई है।
आभूषण कंपनी पीएन गाडगिल एंड संस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमित मोदक के मुताबिक आभूषणों की यह खेप वैध है। यह पुणे के विभिन्न सोनारों की दुकानों के आभूषण हैं। इसमें उनकी कंपनी का 10 किलोग्राम माल भी शामिल है। हर आभूषण के साथ जीएसटी का चालान भी जुड़ा है।
अमित ने बताया कि सोने की इस खेप की जानकारी टेम्पो के ड्राइवर तक को भी नहीं है। यह केवल भेजने वाले सोनार और प्राप्तकर्ता को भी पता होता है। खेप में हमारी शाखाओं से भेजे गए सोने के पुराने आभूषण भी हैं। इसके अलावा लगभग 1.5 करोड़ रुपये के हीरे के आभूषण भी हैं।
21 अक्टूबर को भी पुणे ग्रामीण में पांच करोड़ रुपये की नकदी बरामद की गई थी। मुंबई-बेंगलुरु हाइवे पर पुलिस ने नाकाबंदी की थी। इसी दौरान खेड़-शिवपुर के पास कार से यह नकदी जब्त की गई थी। यह कार सतारा की तरफ जा रही थी। कार में चार लोग सवार थे। बता दें कि महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर से आदर्श आचार संहिता लागू है।

ईरान पर इजरायल का बड़ा हमला, तीन देशों में सभी उड़ानें रद्द

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इजरायल ने ईरान पर बड़ा हमला बोला है। ईरान की राजधानी तेहरान और आसपास स्थित सैन्य ठिकानों पर भीषण धमाकों की आवाज आई है। एक अक्टूबर को ईरान ने इजरायल पर लगभग 200 बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला किया था। इजरायल ने इस हमले का बदला लेने की बात कही थी। पिछले छह महीने में ईरान इजरायल पर दो बार हमला कर चुका है। उधर, सीरिया, इराक और ईरान ने अगली सूचना तक सभी उड़ानों को स्थगित कर दिया है।
इजरायल की सेना ने कहा कि इजरायल के खिलाफ महीनों से लगातार जारी ईरानी हमलों के जवाब में अभी इजरायल रक्षा बल तेहरान में सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले कर रहे हैं। सेना ने कहा कि इजरायल को तेहरान और उसके प्रॉक्सी के हमलों का जवाब देने का अधिकार है।

 

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इजरायली मीडिया के मुताबिक दर्जनों लड़ाकू विमानों से इजरायल ने ईरान पर हमला किया है। एनबीसी न्यूज और एबीसी न्यूज ने एक इजरायली अधिकारी का हवाला देते हुए बताया कि ऊर्जा अवसंरचना और परमाणु संयंत्रों को निशाना नहीं बनाया गया है।
ईरानी फार्स समाचार एजेंसी ने कहा कि तेहरान के पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम में कई सैन्य ठिकानों को इजरायल ने निशाना बनाया है। ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि तेहरान और आसपास जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। हालांकि ईरानी मीडिया ने हमलों को कमतर बताया है। ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान भी इजरायल पर बदले की कार्रवाई करेगा। ईरान की सेना पूरी तरह से तैयार है।
तस्नीम समाचार एजेंसी ने कहा कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों पर हमला किया गया। हालांकि कोई नुकसान नहीं हुआ। सरकारी टीवी ने तेहरान के इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की फुटेज जारी की। इसमें यात्री अपनी फ्लाइट्स से उतरते दिख रहे हैं।
सीरियाई सरकारी समाचार एजेंसी सना की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार सुबह इजरायल ने सीरिया के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में कुछ सैन्य ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। हालांकि, इजरायल ने सीरिया पर हमला करने की पुष्टि नहीं की है।
इजराइल के प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री योआव गैलेंट तेल अवीव में सेना के कमांड और नियंत्रण केंद्र में ऑपरेशन पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ईरान पर हमलों से पहले इजराइल ने अमेरिका को सूचित किया है। मगर ऑपरेशन में अमेरिका शामिल नहीं है।

स्पर्श हिमालय महोत्सव पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया शुभारंभ

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स्पर्श हिमालय महोत्सव-2024’’ हुआ शुरू, राज्यपाल, पूर्व राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण।

थानौ देहरादून में देश के पहले हिमालयी ‘‘लेखक गाँव’’ का हुआ लोकार्पण।

देहरादून 25 अक्टूबर ।स्पर्श हिमालय फाउंडेशन के तत्वावधान में थानो, देहरादून में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव ‘‘स्पर्श हिमालय महोत्सव-2024’’ में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि), पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने देश के पहले हिमालयी ‘‘लेखक गाँव’’ का लोकार्पण किया। थानो स्थित इस लेखक गांव में लेखक कुटीर, संजीवनी वाटिका, नक्षत्र और नवग्रह वाटिका, पुस्तकालय, कला दीर्घा, योग-ध्यान केंद्र, परिचर्चा केंद्र, गंगा और हिमालय का मनमोहक संग्रहालय बनाया गया है। लेखक गाँव में आकर लेखक एक ही स्थान पर प्रकृति, संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान से साक्षात्कार कर विविध विषयों पर चिंतन के लिए नए दृष्टिकोण प्राप्त कर सकेंगे।

तीन दिन तक चलने वाले इस महोत्सव में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी, जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी, इस महोत्सव के संयोजक पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘‘निशंक’’ सहित देश के विभिन्न प्रदेशों सहित 40 से अधिक देशों के साहित्य, संस्कृति और कला के क्षेत्र की अनेक विभूतियों ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों द्वारा ‘‘हिमालय में राम’’ पुस्तक का भी विमोचन किया। ‘‘लेखक गाँव’’ की इस पहली रचना को डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा लिखा गया है।

महोत्सव में राज्यपाल ने कहा कि डॉ. रमेश पोखरियाल ‘‘निशंक’’ द्वारा स्थापित ‘‘स्पर्श हिमालय फाउंडेशन’’ के तत्वावधान में देश के पहले हिमालयी लेखक गाँव की स्थापना करने का यह अभिनव प्रयास न केवल हमारी संस्कृति और साहित्य को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि उत्तराखण्ड के सृजनशील युवाओं और लेखकों को मंच प्रदान करने का सुनहरा अवसर भी है। राज्यपाल ने कहा कि इस आयोजन और इस पहल के माध्यम से साहित्य, कला, और संस्कृति के क्षेत्र में जो नवाचार देखने को मिलेगा, वह हमारे उत्तराखण्ड की धरोहर को एक नई दिशा देगा।

राज्यपाल ने कहा कि यह मंच उन लेखकों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जो अपने शब्दों के माध्यम से समाज को नई राह दिखाने का सामर्थ्य रखते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड अनेक विद्वत लेखकों की जन्मभूमि रही है, ‘‘लेखक गाँव’’ जैसी पहले हमें इन महान लेखकों की विरासत को आगे ले जाने में मदद करेगी। यहाँ के वातावरण में जो सृजनशीलता का प्रवाह है, वह आज भी अनेक लेखकों और कवियों को प्रेरित करेगा। इस ‘‘लेखक गाँव’’ की स्थापना हमारी उस परंपरा का जीवंत प्रमाण है, जो हमें साहित्य के माध्यम से हमारी जड़ों से जोड़ती है और हमें आत्म-चिंतन के नए आयाम प्रदान करेगी।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि ‘‘निशंक’’ द्वारा ‘‘लेखक गाँव’’ की परिकल्पना के लिए उनकी सोच, सामर्थ्य और पराक्रम को नमन करता हूँ। उन्होंने कहा कि लेखकों, कवियों, साहित्यकारों और अन्य रचना कर्मियों द्वारा महसूस की जा रही व्यावहारिक कठिनाइयों का निवारण करने की ओर यह एक अभिनव पहल है। उन्होंने कहा कि ‘‘लेखक गाँव’’ अपने प्रकार की प्रथम परिकल्पना है।

उन्होंने कहा कि यह उत्तराखण्ड के लिए बहुत गौरव की बात है कि यहां ‘‘लेखक गाँव’’ का शुभारंभ हुआ है, उत्तराखण्ड ही एक ऐसा प्रदेश है जहां ‘‘लेखक गाँव’’ की सार्थकता नजर आएगी। देश का कोई भी प्रदेश ऐसा नहीं है जिसमें की ‘‘लेखक गाँव’’ के नाम से कोई परिकल्पना साकार हुई हो। इसके लिए उन्होंने सभी उत्तराखण्ड निवासियों को भी इसकी बहुत-बहुत बधाई दी। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि यह ‘‘लेखक गाँव’’ भविष्य का टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनकर अवश्य उभरेगा।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि लेखन में एक अद्भुत क्षमता होती है लिखने, पढ़ने और पढ़ने मात्र से आप किसी के जीवन में चमत्कार ला सकते हैं। एक लेखक के रूप में जब आप लिखते हैं तो आपको पता नहीं चलता कि आपके पास कितनी असीम शक्ति है आप लेखन के माध्यम से लोगों के मन को प्रभावित करते हैं। बिल्कुल हताश-निराश लोगों में आप लेखन के माध्यम से नई ऊर्जा और नई उमंग का संचार करते हैं। उन्होंने इस आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड सदियों से रचनात्मकता का अद्भुत केंद्र रही है। यहां के पहाड़ों की विशालता, गंगा की पवित्रता और अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य ने लेखकों, कवियों और विचारकों को प्रेरणा प्रदान करने का काम किया है। ऐसे प्रदेश में “लेखक गांव“ का बनना अपने आप में एक महान कार्य है, इसके लिए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘‘निशंक’’ को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक लेखक के लिए ऐसा वातावरण आवश्यक है, जो शांति, सौंदर्य और विचारों के स्वतंत्र प्रवाह से समृद्ध हो। यह तीन दिवसीय साहित्यिक महोत्सव हमारे राज्य के साहित्यकारों को एक मंच प्रदानIMG 20241025 WA0085 करेगा। जहाँ वे विश्व भर से आए साहित्यकारों और कलाकारों के साथ मिलकर अपने विचारों का आदान-प्रदान कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज का साहित्य ही उसका वास्तविक दर्पण होता है, जो उसकी संस्कृति, मूल्यों और विचारों को उजागर करता है। राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए प्रतिबद्ध है। हमने राज्य में ’उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान’ के माध्यम से उत्कृष्ट साहित्यकारों को सम्मानित करने का कार्य प्रारंभ किया है। राज्य में विभिन्न भाषाओं में ग्रंथ प्रकाशन के लिए ‘वित्तीय सहायता योजना’ के तहत साहित्यकारों को अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है। उत्कृष्ट साहित्यकारों को ‘साहित्य भूषण’ और ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत 05-05 लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान करने की घोषणा की है।

भारतीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने कहा कि आज एआई ने हमारे प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि जो भी अविद्या है, जो भी मानव मस्तिष्क की उपज है जैसे कविता, साहित्य आदि वह एआई कर पाएगा और वह इससे सभंव है। लेकिन चिंतन, मनन और स्वयं की खोज, जिसे ब्रह्म ज्ञान कहते हैं इसे स्वयं के साथ साक्षात्कार कहते हैं वह एआई नहीं कर पाएगा। यह विद्या रूपी ज्ञान से संभव हो पाएगा। उसके लिए आपको एकांत स्थान चाहिए उसके लिए सृजनात्मक माहौल चाहिए जहां आप स्वयं के अस्तित्व में डूबकर मोती निकाल सके, उसे इस प्रकार का लेखक गांव जैसा स्थान चाहिए।

स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा की यह एक अलग प्रकार का आयोजन है जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की। यहां लेखकों, विचारकों को अपनी कृतियों को लिखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि पुस्तकें हमारे जीवन का अभिन्न अंग बनें, उनसे दूर न रहें यहां से हम सभी को यह संकल्प लेना होगा। उन्होंने इस कार्य के लिए डॉ निशंक को बधाई दी।इस महोत्सव के सूत्रधार डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने सभी लोगों का स्वागत किया और ‘‘लेखक गाँव’’ और इस महोत्सव की परिकल्पना के बारे में अवगत कराया। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न प्रदेशों सहित 40 से अधिक देशों के लोग प्रत्यक्ष और 70 से अधिक देशों के लोग अप्रत्यक्ष रूप से साहित्य, संस्कृति और कला के क्षेत्र में अपने विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। इस महोत्सव में सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, विधायक बृजभूषण गैरोला, विधायक आदेश चौहान सहित देश एवं विदेशों से आए लेखक, चिंतक और समाजसेवी मौजूद रहे।

उत्तराखंड: देहरादून पहुंची गो प्रतिष्ठा यात्रा, शंकराचार्य महाराज का भव्य स्वागत

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LAC पर इन दो जगहों से 28-29 अक्टूबर तक पीछे हटेंगी भारत-चीन की सेनाएं

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भारत और चीन के बीच सीमा पर पिछले कुछ सालों से चला आ रहा तनाव खत्म होता दिखाई दे रहा है। हाल ही में पैट्रोलिंग को लेकर समझौता करने के बाद दोनों देशों की सेनाओं ने अपने-अपने स्थान से पीछे हटने का भी फैसला किया है।

एएनआई ने भारतीय सेना के सूत्रों के हवाले से बताया कि दोनों देश की सेनाएं 28-29 अक्टूबर तक पूरी तरह से पीछे हट जाएंगीं। हालांकि, यह समझौता केवल देपसांग और डेमचोक के लिए लागू होगा, अन्य जगहों के लिए नहीं।

सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के सैनिक 2020 से पहले की स्थिति में वापस आ जाएंगे। साथ ही सीमा से अस्थायी ढांचे को हटाने पर भी सहमति बनी है। भारतीय सेना के सूत्रों ने एजेंसी को बताया, ‘हालिया समझौते केवल देपसांग और डेमचोक के लिए लागू होंगे, अन्य स्थानों के लिए नहीं। यह समझौता अन्य टकराव वाले क्षेत्रों पर लागू नहीं होगा।

दोनों पक्षों के सैनिक अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति में वापस आ जाएंगे और वे उन क्षेत्रों में गश्त करेंगे, जहां उन्होंने अप्रैल 2020 तक गश्त की थी। नियमित ग्राउंड कमांडरों की बैठकें आयोजित की जाती रहेंगी।

गश्ती दल में सैनिकों की एक खास ताकत की पहचान की गई है और किसी भी गलतफहमी से बचने के लिए हम एक-दूसरे को सूचित करेंगे कि हम कब गश्त करने जा रहे हैं। दोनों पक्ष क्षेत्र पर निगरानी रखेंगे। देपसांग और डेमचोक में गश्त बिंदु वे बिंदु होंगे, जहां पारंपरिक रूप से अप्रैल 2020 से पहले गश्त करते थे।’

 

 

सुशांत सिंह राजपूत डेथ केस में रिया चक्रवर्ती को बड़ी राहत, CBI को झटका, लुक आउट सर्कुलर रद्द

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सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI), स्टेट ऑफ महाराष्ट्र द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज करते हुए एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक चक्रवर्ती को एक बड़ी राहत दी है। सुशांत सिंह राजपूत डेथ केस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए CBI ने सुप्रीम कोर्ट में रिया चक्रवर्ती के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOCs) को लेकर अपील दर्ज की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी ‘तुच्छ’ बताते हुए खारिज कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने उनकी याचिका को मौखिक रूप से ‘तुच्छ’ बताते हुए कहा है कि ये सिर्फ इसलिए दायर किया गया है, क्योंकि आरोपी एक हाई प्रोफाइल केस है। जब CBI के वकील ने मामले को आगे बढ़ाने के लिए कहा, तो न्यायधीश गवई बोले कि “हम वॉर्निंग दे रहे हैं। आप इतनी छोटी सी याचिका सिर्फ इसलिए दायर कर रहे हैं, क्योंकि वह एक हाई प्रोफाइल पर्सनल है। इसकी महंगी कीमत चुकानी पड़ सकती है”।
साल 2020 में सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच की मांग करते हुए पटना (बिहार) के कोर्ट में रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया था। जब यह मामला CBI को दिया गया, तो अभिनेता के निधन के मामले में CBI ने एक्ट्रेस के परिवार के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया था।
जिसे फरवरी में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कैंसिल कर दिया। बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए CBIये मामला सुप्रीम कोर्ट तक लेकर गया और वहां अपील की, जिसे उन्होंने भी खारिज कर दिया। साल 2020 में 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत ने अपनी अंतिम सांस ली थी। उनके निधन को 4 साल से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन अब तक उनकी मौत की गुत्थी नहीं सुलझ पाई है।
जब सुशांत सिंह राजपूत का निधन हुआ था, उस वक्त रिया चक्रवर्ती उनके साथ रिलेशनशिप में थीं। सुशांत सिंह  राजपूत के निधन के बाद ड्रग्स केस में उनका नाम सामने आया था, जिसके बाद उन्हें 28 दिनों तक जेल की हवा भी खानी पड़ी थी।

उत्तराखंड : 34वें पड़ाव पर पहुंची गो प्रतिष्ठा यात्रा, देहरादून में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का भव्य स्वागत

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देहरादून: गो प्रतिष्ठा यात्रा देश भर के विभिन्न पड़ावों से होते हुए अपने 34वें पड़ाव देहरादून पहुंच गई है। ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद देहरादून में भव्य स्वागत किया गया। मीनाक्षी वेडिंग प्वांइट पहुंचने टहले शंकराचार्य जी पर लोगों ने फूल बरसाए और शोभायात्रा निकाली।

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गो माता को राष्ट्रमाता घोषित कराने के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद देशभर में गौ प्रतिष्ठा यात्रा निकाल रहे हैं और लोगों को गौ माता का महत्व बता रहे हैं। अलग-अलग राज्यों के विभिन्न शहरों और क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करते हुए यात्रा देहरादून पहुंच गई। यात्रा को देशभर से लोगों का खूब सहयोग मिला रहा है।

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