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औरंगजेब की कब्र हटाने के लिए आज से का अभियान, मराठा वीरों की प्रतिमा की मांग तेज

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नई दिल्ली/महाराष्ट्र: देशभर में ऐतिहासिक स्थलों और नामों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। जहां एक ओर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल ने मुगल बादशाह औरंगजेब के निशान हटाने के लिए अभियान शुरू कर दिया है, वहीं दूसरी ओर मराठा वीरों – पेशवा बाजीराव प्रथम, महादजी शिंदे और मल्हारराव होलकर – की प्रतिमाएं दिल्ली में स्थापित करने की मांग तेज हो गई है।

विहिप का औरंगजेब के विरुद्ध अभियान

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार छत्रपति शिवाजी की जयंती के अवसर पर महाराष्ट्र में जिलास्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान विहिप और बजरंग दल के पदाधिकारी औरंगाबाद के खुल्दाबाद में स्थित औरंगजेब की कब्र को हटाने और महाराष्ट्र में लगी उसकी प्रतिमाओं को हटाने की मांग करते हुए जिलाधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे।

दिल्ली में भी इस अभियान के तहत विहिप के महामंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि राजधानी में औरंगजेब रोड का नाम बदलने की मांग को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री, दिल्ली की मुख्यमंत्री और एनडीएमसी चेयरमैन को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

दिल्ली में मराठा योद्धाओं की प्रतिमा स्थापना की मांग

इसी के साथ मराठा वीरों की विरासत को सम्मान देने की मांग भी तेज हो गई है। इतिहासकारों और मराठा समाज के नेताओं का कहना है कि पेशवा बाजीराव प्रथम, महादजी शिंदे और मल्हारराव होलकर ने भारतीय उपमहाद्वीप में मराठा साम्राज्य के विस्तार में अहम भूमिका निभाई थी। उनके योगदान को उचित सम्मान देने के लिए उनकी प्रतिमाएं दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम के समीप स्थापित की जानी चाहिए।

तालकटोरा क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व भी इस मांग को प्रासंगिक बनाता है, क्योंकि यह स्थान कभी मराठा सेना का महत्वपूर्ण शिविर स्थल हुआ करता था। मराठा समाज और इतिहास प्रेमियों का कहना है कि इन महापुरुषों की मूर्तियों की स्थापना से दिल्ली में उनकी विरासत को उचित सम्मान मिलेगा। इस विषय पर प्रशासन से जल्द ही औपचारिक चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

सियासी सरगर्मी बढ़ी

इन दोनों अभियानों से राजनीतिक हलकों में भी सरगर्मी बढ़ गई है। एक ओर जहां हिंदू संगठनों द्वारा औरंगजेब से जुड़े निशानों को हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन की तैयारी हो रही है, वहीं दूसरी ओर मराठा समाज अपने नायकों के इतिहास को जीवंत करने की मुहिम में जुटा हुआ है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।

बिग ब्रेकिंग: कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने अपने पद से दिया इस्तीफा

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देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में आज एक बड़ा भूचाल आ गया जब कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। विधानसभा में उत्तराखंडियों को अपशब्द कहने के बाद प्रेमचंद अग्रवाल का विरोध पहाड़ से लेकर मैदान तक बढ़ता ही जा रहा था। हर ओर विरोध-प्रदर्शन और तीखी प्रतिक्रियाओं के कारण पार्टी पर दबाव बढ़ा, जिससे केंद्रीय नेतृत्व को सख्त फैसला लेना पड़ा।

 

BJP की लाख कोशिशें भी नहीं बचा पाईं

 

हालांकि, बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन जनता के बढ़ते आक्रोश के आगे पार्टी नेतृत्व को झुकना पड़ा। केंद्रीय हाईकमान ने स्थिति को भांपते हुए प्रेमचंद अग्रवाल को इस्तीफा देने का संकेत दिया। इससे पहले ही यह अनुमान लगाया जा रहा था कि संभावित कैबिनेट विस्तार के दौरान कुछ मंत्रियों की छुट्टी होगी और इस सूची में सबसे पहला नाम प्रेमचंद अग्रवाल का था। लेकिन उन्हें विस्तार से पहले ही जाना पड़ा।

 

मुख्यमंत्री धामी भी थे नाराज, फिर भी नहीं मांगी माफी

 

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी प्रेमचंद अग्रवाल से काफी नाराज थे। जिस दिन सदन में यह विवादित बयान दिया गया, उसी दिन सीएम धामी ने उन्हें माफी मांगने को कहा था। लेकिन अग्रवाल ने सदन में जाकर मुख्यमंत्री की बात को नजरअंदाज कर अपनी ही सफाई पेश कर दी। इसके बाद भी उन्हें माफी मांगने का एक और मौका दिया गया, लेकिन उनके अड़ियल रवैये ने उनके राजनीतिक करियर पर सवाल खड़ा कर दिया।

 

इस्तीफे के बाद भी झलका अहंकार, कहा—‘बयान को तोड़ा-मरोड़ा गया’

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रेमचंद अग्रवाल भावुक हो गए और रोते-रोते उन्होंने कहा—

 

“मैं पद से इस्तीफा दे रहा हूं, लेकिन मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।”

 

इसके बाद वह प्रेस कॉन्फ्रेंस से उठकर चले गए। लेकिन सबसे बड़ी बात यह रही कि उन्होंने माफी नहीं मांगी।

 

पहले ही सलाह दी गई थी—‘माफी मांग लो’, लेकिन नहीं माने

 

सूत्र बताते हैं कि बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें पहले ही सलाह दी थी कि माफी मांग लो, मामला शांत हो जाएगा। लेकिन अहंकार में डूबे प्रेमचंद अग्रवाल ने इसे नजरअंदाज किया, जिसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।

 

राजनीतिक इतिहास में बड़ी घटना

 

उत्तराखंड की राजनीति में यह पहली बार हुआ है कि किसी मंत्री को जनता के भारी विरोध के कारण इस्तीफा देना पड़ा हो। यह घटना भविष्य में नेताओं के लिए एक सबक बन सकती है कि जनता से ऊपर कोई नहीं।

बलूचिस्तान के नौशकी में सेना की बस पर बम हमला, 5 सैन्य अधिकारियों की मौत, 12 घायल

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत के नौशकी जिले में एक भीषण बम धमाका हुआ, जिसमें सुरक्षा बलों को ले जा रही बस निशाना बनी। इस हमले में पांच सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई, जबकि 12 अन्य जवान घायल हो गए।

हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतिबंधित संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। यह संगठन बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की मांग करता रहा है और इससे पहले भी पाकिस्तानी सेना और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाता रहा है।

कैसे हुआ हमला?

नौशकी जिले के नौशकी-दलबंदिन राजमार्ग पर यह विस्फोट हुआ। स्थानीय पुलिस प्रमुख जफर जमानानी ने बताया कि सड़क किनारे लगाए गए बम में धमाका उस समय हुआ, जब सुरक्षा बलों को लेकर जा रही एक बस वहां से गुजर रही थी। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पास में चल रही दूसरी बस भी इसकी चपेट में आ गई।

हमले के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। मृतकों और घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

बलूचिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया

बलूचिस्तान सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। सरकार ने इसे कायराना हरकत बताते हुए कहा कि सुरक्षा बलों की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। साथ ही, सरकार ने सुरक्षा हालात की समीक्षा के लिए आपात बैठक बुलाई है।

बलूचिस्तान में बढ़ रही हिंसा

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे अशांत प्रांत है, जहां लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन और आतंकवादी गतिविधियां चल रही हैं। बलूच विद्रोही समूह पाकिस्तानी सेना और सरकारी प्रतिष्ठानों को लगातार निशाना बनाते रहे हैं। हाल के महीनों में बलूचिस्तान में आतंकवादी हमलों में बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बढ़ गई है।

AI और रेट्रो संगीत का अनोखा संगम, जोधपुर के अभिषेक आर व्यास की अनूठी संगीत यात्रा

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राजस्थान : संगीत की दुनिया में तकनीक के साथ प्रयोग करने वाले कलाकारों की कमी नहीं, लेकिन अभिषेक आर व्यास ने इसमें एक अलग ही पहचान बनाई है। वे एक ऐसे दूरदर्शी संगीत निर्माता हैं, जो 90 के दशक की मधुरता को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जनित धुनों के साथ जोड़कर एक नया अनुभव रच रहे हैं।

संवेदनशीलता और एआई का मेल

अभिषेक की भावनात्मक हिंदी रचनाएँ सुनहरे दौर के संगीत को पुनर्जीवित करने का जुनून रखती हैं। उनका प्रयास श्रोताओं को न केवल गहरी भावनाओं से जोड़ता है, बल्कि एक संवेदी यात्रा पर भी ले जाता है, जहाँ संगीत सिर्फ ध्वनि नहीं, बल्कि एक अहसास बन जाता है।

देखें और सुनें:
अभिषेक आर व्यास – YouTube चैनल

YouTube चैनल: एक डिजिटल संगीतमय खजाना

उनका YouTube चैनल एआई-निर्मित गानों का एक ऐसा खजाना है, जहाँ रेट्रो संगीत का जादू आधुनिक तकनीक के साथ घुलता-मिलता नजर आता है। यहाँ कालातीत धुनें, गहरे एहसास और 90 के दशक की गर्माहट को AI की शक्ति से नया जीवन दिया जा रहा है।

अगर आप पुरानी मधुर धुनों की गर्माहट महसूस करना चाहते हैं या फिर एआई-संगीत के भविष्य को लेकर उत्सुक हैं, तो अभिषेक आर व्यास की रचनाएँ आपको एक अनोखा संगीतमय अनुभव देंगी।

सुनें और महसूस करें – बीते दिनों की यादों का जादू!

अगर आप भी इस अनोखे संगीत और तकनीक के संगम का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो अभी उनके YouTube चैनल को सब्सक्राइब करें और भूतकाल की धुनों को भविष्य की धड़कन में बदलते देखें।

उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ में भारी बर्फबारी का अलर्ट

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देहरादून: उत्तराखंड का मौसम कब करवट ले ले, यह कहना मुश्किल है। प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने कई जिलों में बारिश और बर्फबारी की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। पहाड़ी इलाकों में ठंड बढ़ गई है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में भी मौसम सुहावना हो गया है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, देहरादून, पौड़ी, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा, हरिद्वार, चंपावत और नैनीताल में भी कहीं-कहीं बादल बरस सकते हैं। साथ ही, कई जिलों में गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने का अंदेशा भी जताया गया है।

मौसम विभाग ने खासकर उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ में भारी बारिश और बर्फबारी की चेतावनी दी है। इन इलाकों में ठंडी हवाओं के साथ बर्फबारी से जनजीवन प्रभावित हो सकता है। विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

राजधानी देहरादून में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और कुछ स्थानों पर गरज के साथ बारिश हो सकती है। यहां अधिकतम तापमान 29°C और न्यूनतम तापमान 14°C के आसपास रहने की संभावना है।

प्रदेश के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बर्फबारी हो रही है। देर रात से कई जिलों में बारिश के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। बीते दिन उत्तरकाशी के चांगथांग इलाके में हिमस्खलन हुआ, जिसका वीडियो भी सामने आया था। इसके बाद बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) ने तेजी से रास्ता साफ कर यातायात बहाल किया।

मौसम विभाग ने पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों से सतर्क रहने की अपील की है। खासतौर पर ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के कारण सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं, जिससे यात्रा के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

बारिश और बर्फबारी से जहां ठंड बढ़ गई है, वहीं किसानों के लिए यह राहत भरी खबर है। बारिश से रबी की फसलों को फायदा होगा, जबकि पहाड़ों में बर्फबारी से जलस्रोतों को संजीवनी मिलेगी।

सुनीता विलियम्स की वापसी का काउंटडाउन शुरू, ISS में दाखिल हुआ NASA का Crew-10

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नई दिल्ली: अंतरिक्ष में फंसी भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विलमोर की धरती पर सुरक्षित वापसी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। स्पेसएक्स (SpaceX) द्वारा भेजा गया Crew Dragon स्पेसक्राफ्ट सफलतापूर्वक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से जुड़ चुका है, और डॉकिंग प्रक्रिया भी आज (16 मार्च) पूरी हो गई है। दोनों अंतरिक्ष यात्री 19 मार्च को धरती पर लौटेंगे

Crew-10 मिशन की सफल लॉन्चिंग

शुक्रवार, 14 मार्च को स्पेसएक्स (SpaceX) ने Crew-10 मिशन लॉन्च किया। इस मिशन के तहत फॉल्कन-9 रॉकेट से Crew Dragon कैप्सूल को लॉन्च किया गया, जो सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचा। यह नासा के कमर्शियल क्रू प्रोग्राम (Commercial Crew Program) के तहत ISS के लिए 11वीं क्रू फ्लाइट है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना और ISS के लिए आवश्यक कार्गो की आपूर्ति करना था।

क्या होती है डॉकिंग प्रक्रिया?

डॉकिंग वह प्रक्रिया है, जिसके तहत Crew Dragon को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) से जोड़ा जाता हैडॉकिंग पूरी होने के बाद
✅ अंतरिक्ष यात्री अपने स्पेससूट से बाहर आएंगे
✅ Crew Dragon से आवश्यक कार्गो उतारा जाएगा
हैच खोलने की प्रक्रिया शुरू होगी और क्रू मेंबर्स ISS में प्रवेश करेंगे।
✅ इसके बाद NASA Crew-10 के स्वागत समारोह का सीधा प्रसारण करेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी रख रहे हैं नजर

सुनीता विलियम्स की सुरक्षित वापसी को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार अपडेट ले रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क से अनुरोध किया था कि इस मिशन में तेजी लाई जाए ताकि सुनीता विलियम्स और उनके साथी जल्द से जल्द धरती पर लौट सकें।

19 मार्च को होगी वापसी

अब Crew Dragon ISS से जुड़ चुका है और मिशन की अगली महत्वपूर्ण कड़ी 19 मार्च को होगी, जब यह सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को लेकर धरती पर लौटेगा। NASA और स्पेसएक्स इस पूरी प्रक्रिया पर करीबी नजर बनाए हुए हैं, ताकि यह मिशन पूरी तरह से सफल हो।

नितिन गडकरी का बयान: मुस्लिम समुदाय से बनें अधिक आईएस, आईपीएस, इंजीनियर और डॉक्टर

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नागपुर: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने जाति और धर्म के मुद्दों को राजनीति से अलग रखने की वकालत करते हुए कहा कि नेताओं को सिर्फ विकास के काम पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने नागपुर के ननमुदा संस्थान के दीक्षांत समारोह में संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि वे कभी भी धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करते।

गडकरी ने कहा, “मैं राजनीति में हूं, और यहां बहुत कुछ कहा जाता है। लेकिन मैंने तय किया है कि मैं अपने सिद्धांतों पर कायम रहूंगा और इस बात की परवाह नहीं करूंगा कि कौन मुझे वोट देगा और कौन नहीं।” उन्होंने अपने पुराने नारे को दोहराते हुए कहा, “जो करेगा जाति की बात, उसको मारूंगा लात।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने चुनाव हारने या मंत्री पद गंवाने की कीमत पर भी यह रुख बनाए रखा है।

गडकरी ने मुस्लिम समुदाय के युवाओं से शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब वे महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) के सदस्य थे, तब उन्होंने नागपुर के अंजुमन-ए-इस्लाम संस्थान के इंजीनियरिंग कॉलेज को अनुमति दी थी।

उन्होंने कहा, “मुझे महसूस हुआ कि मुस्लिम समाज को इसकी जरूरत है। अगर मुस्लिम समुदाय से ज्यादा से ज्यादा इंजीनियर, डॉक्टर, आईपीएस और आईएएस अधिकारी निकलते हैं, तो पूरे समाज का विकास होगा। हमारे पास पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का प्रेरणादायक उदाहरण है।

उत्तराखंड में होली धूम, एमडीडीए एचआईजी सोसायटी में दिखा खास उत्साह

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पूल पार्टी का आनंद उठाती सोसाइटी की महिलाएं

देहरादून | उत्तराखंड में रंगों का पर्व होली पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। राज्य के कई जिलों में होली का त्योहार बीते दिन ही धूमधाम से मनाया गया, वहीं कुमाऊं और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में आज होली की रंगत छाई हुई है।

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देहरादून की एमडीडीए एचआईजी आईएसबीटी सोसायटी में भी होली का खासा उत्साह देखने को मिला। सोसायटी के लोगों ने एकजुट होकर रंगों का त्योहार मनाया और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की। सुबह से ही लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं देते नजर आए।

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होलिका दहन कार्यक्रम

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने संगीत, नृत्य और पकवानों के साथ इस पर्व का आनंद लिया। रंगों और उमंगों के इस पर्व ने उत्तराखंड को एक बार फिर आपसी प्रेम और एकता के सूत्र में पिरो दिया है।

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कुमाऊं में आज होली की धूम

कुमाऊं क्षेत्र की पारंपरिक बैठकी होली और खड़ी होली की परंपरा भी आज पूरे उत्साह के साथ निभाई जा रही है। कुमाऊं के विभिन्न गांवों और कस्बों में होली के गीतों की गूंज सुनाई दे रही है। होल्यारों की टोलियां पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ लोकगीत गाते हुए आनंद मना रही हैं।

हल्द्वानी, नैनीताल, अल्मोड़ा और बागेश्वर समेत कई इलाकों में होली के रंगों की छटा देखने को मिल रही है। खासतौर पर मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर होली के सांस्कृतिक आयोजन हो रहे हैं। स्थानीय बाजारों में भी इस मौके पर रौनक देखने को मिल रही है, जहां अबीर-गुलाल, पिचकारी और मिठाइयों की खरीदारी जोरों पर रही।

होली का पर्व प्रेम और सद्भाव का प्रतीक

उत्तराखंड में होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि मेल-जोल और आपसी सद्भाव का संदेश भी देती है। पर्व के दौरान लोग गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे के गले मिलते हैं और खुशियों को साझा करते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में होली की परंपराएं और भी खास होती हैं, जहां पूरे गांव के लोग मिलकर इस त्योहार को मनाते हैं।

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भोजन के बाद सुबह के उत्साह की चर्चा में महिला शक्ति जिनका सहयोग और योगदान हर कार्यक्रम को सफल बना देता है।
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कार्यक्रम के आयोजक श्री ईश्वरी दत कवि जी एवं श्री महावीर सिंह रावत जी ने बताया कि हमारा प्रयास रहता है कि समस्त एमडीडीए एचआईजी सोसायटी परिवार हर त्यौहार साथ मिलकर मनाए, किसी भी परिवार या कॉलोनी को हर सुख दुख में साथ होना चाहिए। हमने अपने तजुर्बे से यही सीखा है और अपने एचआईजी परिवार को हम ऐसे आयोजनों से यही सिखाते हैं। एक छोटा सा प्रयास बहुत बड़ा कार्य कर देता है।

 

झारखंड में 68 परिवारों की घर वापसी, जगद्गुरु शंकराचार्य जी के सान्निध्य में हुआ आयोजन

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झारखंड: पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड। सनातन धर्म से कभी भटके 68 आदिवासी परिवारों ने रविवार को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य में अपने मूल धर्म में वापसी की। इस आयोजन के दौरान कुल 200 लोगों ने गंगाजल पान कर और श्री राम नाम का वाचन करते हुए सनातन धर्म में पुनः प्रवेश किया।

यह धार्मिक अनुष्ठान पश्चिमी सिंहभूम जिले के पारलीपोस गांव, गोइलकेरा प्रखंड स्थित विश्व कल्याण आश्रम में संपन्न हुआ। यह आयोजन स्वधर्मानयन अभियान के अंतर्गत 56वें निःशुल्क चिकित्सा शिविर के दौरान किया गया, जिसमें कई श्रद्धालु एवं संतों की उपस्थिति रही।

जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज ने इस अवसर पर कहा, कि “स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः”, अर्थात अपने धर्म में रहकर जीवन व्यतीत करना श्रेष्ठ है, जबकि परधर्म भयावह हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि धर्मांतरण के कुचक्र में फंसकर जो लोग सनातन धर्म से दूर हो गए थे, वे अब जागरूक होकर वापस लौट रहे हैं। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे अपने मूल धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाएं और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में योगदान दें।

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बीते कुछ दिनों में पूज्य शंकराचार्य जी ने जिले के कई आदिवासी गांवों का दौरा कर धर्म संचार सभाओं को संबोधित किया। उनके विचारों से प्रभावित होकर अनेक लोग धर्मांतरण के षड्यंत्र को समझने लगे और स्वेच्छा से सनातन धर्म में लौटने के लिए प्रेरित हुए।

इस आयोजन को सफल बनाने में विश्व कल्याण आश्रम के नव नियुक्त प्रभारी ब्रह्मचारी विश्वानंद जी, आध्यात्मिक उत्थान मंडल के समर्पित सदस्यों और इंद्रजीत मालिक, शिव प्रसाद सिंहदेव, रॉबी लकड़ा सहित कई अन्य धर्मसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

स्वधर्मानयन अभियान के अंतर्गत ऐसे और भी आयोजन किए जाएंगे, जिनमें आदिवासी समुदायों को जागरूक करने और उन्हें सनातन धर्म की महिमा से अवगत कराने का कार्य होगा। विश्व कल्याण आश्रम के अनुसार, यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और अधिक से अधिक लोगों तक सनातन धर्म का संदेश पहुंचाया जाएगा।

झूम उठा उत्तराखंड – जुबिन नौटियाल के रंग

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जब जुबिन देहरादून एयरपोर्ट से बाहर निकले उनके चाहने वालों का हुजूम झूम उठा। उनका स्वागत फूलों की बौछार से हुआ,एयरपोर्ट पर मौजूद हर आंख चाहे वो जुबिन नौटियाल के चाहने वाले हों या वीडियो कैमरा या मोबाइल कैमरा, हर फ्रेम में जुबिन चमक रहे थे।

देवभूमि उत्तराखंड हमेशा की तरह आज भी देश दुनिया में चमक रहा था, जब उसका सपूत अपनी मिट्टी अपनी संस्कृति से जुड़ाव रखते हुए पूरे विश्व में उत्तराखंड का डंका बजा रहा था। एयरपोर्ट पर मौजूद हर उत्तराखंडी जुबिन के हाथो में आईफा अवॉर्ड देखकर जुबिन पर, खुद पर, उत्तराखंड पर गर्व कर रहा था। और करे भी क्यों ना, उनका जुबिन दूसरी बार बेस्ट सिंगर का खिताब जीत कर आया था।

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गूंज रहे थे उत्तराखंड के लोकगीत, ढोल बज रहे थे और अपनों का प्यार, आशीर्वाद देख उनका सितारा और वे वहीं थिरकने झूमने लग गए। 

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Screenshot 2025 03 14 02 06 02 83 92460851df6f172a4592fca41cc2d2e6Screenshot 2025 03 14 02 09 45 62 92460851df6f172a4592fca41cc2d2e6 Screenshot 2025 03 14 02 21 46 73 92460851df6f172a4592fca41cc2d2e6प्यार अपनापन और गर्व से सराबोर इस माहौल को हर कोई यादगार बना रहा था , हर  दिल में, हर फ्रेम में जुबिन नौटियाल चमक रहा था।