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चारधाम यात्रा से पहले घोड़े-खच्चरों में इक्वाइन इन्फ्लुएंजा की पुष्टि

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रुद्रप्रयाग : चारधाम यात्रा से पहले घोड़े-खच्चरों में इक्वाइन इन्फ्लुएंजा की पुष्टि हुई है। रुद्रप्रयाग जिले के वीरोन और बस्ती गांव में घोड़े-खच्चरों में संक्रामक रोग इक्वाइन इन्फ्लुएंजा की पुष्टि होने के बाद सरकार सतर्क हो गई है। चारधाम यात्रा से पहले इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में रोगग्रस्त पशुओं को चारधाम यात्रा में शामिल नहीं होने दिया जाएगा।

चारधाम यात्रा से पहले होगी अनिवार्य स्क्रीनिंग

पशुपालन मंत्री ने सचिवालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक में स्पष्ट किया कि चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले सभी घोड़े-खच्चरों की अनिवार्य स्क्रीनिंग होगी। उन्होंने संबंधित जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि रुद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी, बागेश्वर और चमोली जिलों में पशु स्वास्थ्य परीक्षण अभियान चलाया जाए।

chardham yatra

इसके अलावा, अन्य राज्यों से आने वाले घोड़े-खच्चरों को भी स्वास्थ्य प्रमाणपत्र और इक्वाइन इन्फ्लुएंजा की निगेटिव रिपोर्ट के बिना उत्तराखंड में प्रवेश नहीं मिलेगा। सीमावर्ती इलाकों में पशु रोग नियंत्रण चौकियों पर हर घोड़े-खच्चर की जांच अनिवार्य कर दी गई है।

बीमारी रोकने के लिए क्वारंटीन सेंटर बनेंगे

मंत्री बहुगुणा ने रुद्रप्रयाग जिले में क्वारंटीन केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि संक्रमित पशुओं को अलग रखा जा सके। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्ग में किसी भी संक्रमित पशु के पाए जाने पर तत्काल उसे अलग कर उपचार दिया जाए।

Equine influenza

इक्वाइन इन्फ्लुएंजा (घोड़ों का फ्लू) के मुख्य तथ्य

  1. संक्रामक रोग – यह एक अत्यधिक संक्रामक श्वसन रोग है, जो बिना टीकाकरण वाले घोड़ों में तेजी से फैलता है।

  2. तेजी से फैलाव – यह वायरस हवा के माध्यम से 5 किलोमीटर तक फैल सकता है और संक्रमित घोड़ों, लोगों, उपकरण, चारे और टैक से भी फैल सकता है।

  3. लक्षण

    • सूखी, तेज खांसी

    • नाक से स्राव (नजल डिस्चार्ज)

    • बुखार

    • भूख न लगना

    • सुस्ती

    • कुछ मामलों में न्यूमोनिया (विशेषकर छोटे या कमजोर घोड़ों में)

  4. प्रभावित घोड़े

    • बिना टीकाकरण वाले घोड़ों में गंभीर लक्षण देखे जा सकते हैं।

    • टीकाकरण वाले घोड़ों में हल्के लक्षण हो सकते हैं।

  5. मौत की संभावना – यह बीमारी सामान्यतः घोड़ों के लिए घातक नहीं होती, लेकिन छोटे या कमजोर घोड़ों में गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकती है।

  6. दीर्घकालिक प्रभाव

    • अधिकांश घोड़े दो हफ्तों में ठीक हो जाते हैं।

    • कुछ में लंबे समय तक खांसी रह सकती है।

    • कुछ मामलों में मांसपेशियों और हृदय की सूजन (मायोकार्डिटिस) हो सकती है, जिससे अनियमित धड़कन की समस्या हो सकती है।

  7. इलाज

    • विशिष्ट इलाज उपलब्ध नहीं है, मुख्य रूप से देखभाल और सहायक उपचार दिया जाता है।

    • बैक्टीरियल संक्रमण होने पर अतिरिक्त इलाज की जरूरत पड़ सकती है।

  8. आराम जरूरी

    • घोड़े को कम से कम 6 हफ्ते का पूर्ण आराम देना जरूरी है।

    • यदि बिना उचित आराम के घोड़ा फिर से व्यायाम करने लगे, तो दीर्घकालिक जटिलताएँ हो सकती हैं।

जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के आदेश

बैठक में पशुपालन मंत्री ने घोड़े-खच्चरों के इलाज के लिए जरूरी दवाओं और अन्य संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई होगी।

यात्रा मार्ग पर सख्ती, बीमारी पर कड़ी नजर

राज्य सरकार इस संक्रमण को गंभीरता से ले रही है, क्योंकि चारधाम यात्रा के दौरान हजारों घोड़े-खच्चर तीर्थयात्रियों को लाने-ले जाने का काम करते हैं। ऐसे में संक्रमण फैलने से रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग संयुक्त रूप से इस पर निगरानी रखेंगे।

लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित, आज राज्यसभा में होगा पेश

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लोकसभा ने बुधवार रात करीब एक बजे वक्फ संशोधन विधेयक को बहुमत से पारित कर दिया। विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े, जबकि 232 सांसदों ने विरोध किया। विपक्ष द्वारा प्रस्तावित सभी संशोधनों को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। एनके प्रेमचंद्रन के संशोधन प्रस्ताव को भी मतदान में 231 के मुकाबले 288 मतों से खारिज कर दिया गया। विधेयक पर सदन में 12 घंटे से अधिक चर्चा हुई और अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा।


धर्म में हस्तक्षेप नहीं, संपत्तियों का प्रबंधन

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किसी धर्म में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी बनाना है।

  • धारा 40 हटाई गई: इस धारा के तहत वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित कर सकता था, जिसे केवल न्यायाधिकरण ही रद्द या संशोधित कर सकता था। हाईकोर्ट में अपील की अनुमति नहीं थी।

  • संपत्ति की जब्ती का डर गलत: रिजिजू ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय की कोई जमीन नहीं छीनी जाएगी।


गृह मंत्री अमित शाह का जवाब

गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज़ाद भारत में मुगलकालीन कानूनों की जगह नहीं।

शाह के प्रमुख तर्क

  • सरकार वक्फ बोर्ड में दखल नहीं देगी: वक्फ ट्रस्ट, मुतवल्ली और संपत्ति मुस्लिम समुदाय की ही रहेगी।
  • गैर-मुस्लिम सदस्यों की अफवाहें गलत: कोई भी गैर-मुस्लिम वक्फ बोर्ड में शामिल नहीं होगा।
  • वक्फ बोर्ड धार्मिक गतिविधियां नहीं चलाता: यह सिर्फ प्रशासनिक संस्था है, न कि धार्मिक निकाय।
  • संशोधन से संपत्ति की सुरक्षा: संपत्ति विवादों में फैसला करने का अधिकार अब कलेक्टर को होगा, ताकि अनियमितताओं पर लगाम लग सके।

विपक्ष का विरोध, ओवैसी ने फाड़ी विधेयक की प्रति

विधेयक के खिलाफ विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

  • AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सदन में विधेयक की प्रति फाड़ दी, इसे अल्पसंख्यकों पर हमला करार दिया।

  • कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार वक्फ संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेना चाहती है, जिससे मुकदमेबाजी बढ़ेगी।

  • तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने कहा कि वक्फ संपत्तियों का अधिकार सिर्फ अल्लाह के पास है और सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।


सरकार का जवाब: कानून सबको मानना होगा

गृह मंत्री शाह ने कहा कि यह देश का कानून है और सबको मानना होगा।

  • राम मंदिर, CAA और अनुच्छेद 370 पर अफवाहें फैलाई गई थीं, लेकिन कुछ गलत नहीं हुआ।

  • वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग हो, इसके लिए प्रशासनिक सुधार जरूरी हैं।

  • गरीबों और जरूरतमंदों को संपत्तियों से अधिक लाभ मिले, यह सुनिश्चित किया जाएगा।

अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 26% टैरिफ लगाया, टेक्सटाइल-इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर पर असर

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नई दिल्ली। भारतीय समयानुसार आज सुबह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत कई देशों के निर्यात पर 26% टैरिफ लगाने का ऐलान किया। इस फैसले से भारतीय टेक्सटाइल, ज्वेलरी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर सीधा प्रभाव पड़ने की आशंका है।

टैरिफ क्यों लगाया गया?

अमेरिकी सरकार के अनुसार, यह रेसिप्रोकल (पारस्परिक) टैरिफ उन देशों पर लागू किया गया है, जो अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगा रहे थे। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अब अमेरिका भी ऐसे देशों से उतना ही टैरिफ वसूलेगा, जितना वे अमेरिका से लेते हैं।

विशेषज्ञों की राय

बैंकिंग और अंतरराष्ट्रीय स्टॉक एक्सपर्ट अजय बग्गा ने इस फैसले को लेकर कहा कि अमेरिकी टैरिफ कई गणनाओं पर आधारित है, जिनमें कस्टम ड्यूटी, करेंसी बदलाव और जीएसटी जैसी चीजें शामिल होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका “अमेरिका फर्स्ट” नीति को और मजबूत कर रहा है।

किन सेक्टर्स पर असर?

  • टेक्सटाइल, ज्वेलरी और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर सीधा प्रभाव

  • मेटल और तेल की कीमतों में गिरावट

  • फार्मा सेक्टर फिलहाल स्थिति का आकलन कर रहा है

  • भारतीय घरेलू बाजार पर सीधा असर नहीं, लेकिन निर्यात प्रभावित होगा

निवेशकों की रणनीति

अजय बग्गा के अनुसार, इस स्थिति में निवेशक अधिक सुरक्षित प्लेटफॉर्म की ओर रुख करेंगे, जिसमें गोल्ड, जापानी येन और जापान सरकार के बॉन्ड शामिल हैं। उन्होंने भारतीय बिजनेसमैन को निर्यात शुल्क और अमेरिका पर निर्भरता को लेकर नई रणनीति बनाने की सलाह दी।

शेयर बाजार पर असर

भारतीय शेयर बाजार की शुरुआती ट्रेडिंग में इस खबर का प्रभाव देखा जा सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय व्यापारियों को अब नए बाजारों की तलाश करनी होगी और निर्यात नीति में बदलाव लाना होगा।

लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर तीखी बहस, विपक्ष ने जताई आपत्ति

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नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में आज बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को लोकसभा में पेश किया, जिसका उद्देश्य 1995 के वक्फ अधिनियम में संशोधन करना है। विधेयक पर 8 घंटे की चर्चा निर्धारित की गई है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है।

बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। हालांकि, भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्षी गठबंधन इंडिया के बीच किसी आम सहमति के संकेत नहीं हैं, जिससे विधेयक पर फैसला बहुमत के आधार पर होने की संभावना है।

प्रमुख घटनाक्रम:

🔹 रिजिजू ने दी सफाई:
लोकसभा में विधेयक पेश करने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि मस्जिदों, दरगाहों और मुस्लिम संपत्तियों को जब्त करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि वक्फ उपयोगकर्ता प्रावधान हटाने के बावजूद इन संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

🔹 कांग्रेस का हमला:
कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने सरकार से पूछा कि लोकसभा में उनके कितने अल्पसंख्यक सांसद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अल्पसंख्यकों की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन ईद की नमाज के लिए सड़कों पर अनुमति नहीं दी गई।

🔹 अखिलेश यादव का विरोध:
समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी इस विधेयक के जरिए अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मुस्लिमों की जमीन की पहचान इसलिए कर रही है ताकि अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके।

🔹 रविशंकर प्रसाद का बचाव:
बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वक्फ विधेयक किसी भी धार्मिक संस्था के खिलाफ नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि वक्फ संपत्तियों को लूटने नहीं दिया जाएगा और इनका उचित प्रबंधन जरूरी है।

🔹 अमित शाह की टिप्पणी:
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस के समय में समितियां सिर्फ मुहर लगाने के लिए बनाई जाती थीं, जबकि बीजेपी सरकार में व्यापक चर्चा के बाद निर्णय लिए जाते हैं।

🔹 विपक्ष का आरोप:
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार जबरन कानून थोप रही है और विधेयक पर समुचित चर्चा का अवसर नहीं दिया गया।

🔹 राम गोपाल यादव का बयान:
समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने विधेयक को तानाशाहीपूर्ण और असंवैधानिक करार दिया और कहा कि विपक्ष इसे लेकर विस्तृत चर्चा चाहता है ताकि देश को असलियत पता चल सके।

🔹 गिरिराज सिंह का बयान:
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि यह विधेयक पूरी तरह से संवैधानिक है और इसका विरोध करने वाले ही असल में मुसलमानों के खिलाफ हैं।

विधेयक को लेकर सदन में जबरदस्त बहस चल रही है। सरकार इसे पारित कराने के लिए पूरी तरह तैयार है, जबकि विपक्ष इस पर खुली चर्चा और संशोधन की मांग कर रहा है।

कबाड़ के गोदाम में भीषण आग, यहां की है घटना

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File Photo

विकासनगर :  ढकरानी क्षेत्र में एक कबाड़ी के गोदाम में अचानक लगी आग ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि आसपास के हरे पेड़ भी झुलस गए, और आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया। स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी, जिसके बाद दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत कर आग पर काबू पाया।

दो दमकल गाड़ियों ने संभाला मोर्चा

सूचना मिलते ही डाकपत्थर फायर स्टेशन से दमकल की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। गोदाम में कबाड़ और कारों के स्क्रैप की वजह से आग तेजी से फैल गई और कई गाड़ियों का स्क्रैप व अन्य सामान जलकर राख हो गया। दमकल कर्मियों और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयास से बड़ा हादसा टल गया और किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।

आग लगने का कारण चिंगारी होने की आशंका

डाकपत्थर फायर स्टेशन के इंचार्ज पवन शर्मा ने बताया कि सुबह 11:22 बजे आग लगने की सूचना मिली। आग लगने की वजह की जांच की जा रही है, लेकिन प्राथमिक अनुमान है कि पास के वर्कशॉप से निकली चिंगारी की वजह से आग भड़की। उन्होंने यह भी बताया कि बीती रात एटनबाग में भी आग की घटना हुई थी, जहां वे नुकसान का आंकलन कर रहे थे।

उत्तराखंड: धामी सरकार में जनहित के दायित्व बंटे।

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उत्तराखंड: प्रदेश सरकार ने जनहित में बांटे दायित्व 

देहरादून :  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा बीते मंगलवार देर शाम जनहित में विभिन्न महानुभावों को विभागीय दायित्व सौंपे है।
सौंपे गये विभागीय दायित्वों से प्रदेश में विभागीय जन कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आयेगी तथा उनके प्रभावी अनुश्रवण में भी मदद मिलेगी।

इस संबंध में जानकारी देते हुए सूचना महानिदेशक  बंशीधर तिवारी ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा जिन महानुभावों को दायित्व सौंपे गये हैं उनमें  हरक सिंह नेगी जनपद चमोली को उपाध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद,  ऐर्श्वया रावत रूद्रप्रयाग को उपाध्यक्ष राज्य महिला आयोग,  गंगा विष्ट जनपद अल्मोडा को उपाध्यक्ष राज्य महिला उद्यमिता परिषद,  श्याम अग्रवाल जनपद देहरादून को उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड आवास सलाहकार परिषद,  मेहरा जनपद नैनीताल को उपाध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद,  भगवत प्रसाद मकवाना जनपद देहरादून को उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड सफाई कर्मचारी आयोग,  हेमराज विष्ट जनपद पिथौरागढ को उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड राज्य स्तरीय खेल परिषद, राम चंद्र गौड जनपद चमोली को अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद, पूरन चंद नैलवाल जनपद अल्मोडा को उपाध्यक्ष प्रवासी उत्तराखण्ड परिषद,  रामसुन्दर नौटियाल जनपद उत्तरकाशी उपाध्यक्ष भागीरथी नदी घाटी प्राधिकरण,  सायरा बानो जनपद ऊधम सिंह नगर उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग, रेनू अधिकारी जनपद नैनीताल को अध्यक्ष राज्य महिला उद्यमिता परिषद, रजनी रावत जनपद देहरादून उपाध्यक्ष समाज कल्याण योजनाएं अनुश्रवण समिति, ओम प्रकाश जमदग्नि जनपद हरिद्वार उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड पारिस्थितिकीय पर्यटन सलाहकार परिषद,  भूपेश उपाध्याय जनपद बागेश्वर उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड जैविक उत्पाद परिषद,  कुलदीप कुमार जनपद देहरादून अध्यक्ष उत्तराखण्ड वन पंचायत सलाहकार परिषद,  ऋषि कण्डवाल जनपद पौडी उपाध्यक्ष सिंचाई सलाहकार समिति,  वीरेन्द्र दत्त सेमवाल जनपद टिहरी उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड हतकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद,  अजय कोठियाल जनपद टिहरी अध्यक्ष उत्तराखण्ड राज्य पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार समिति,  श्याम नारायण पाण्डे जनपद नैनीताल उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड वन एवं पर्यावरण सलाहकार समिति का दायित्व सौंपा गया है।

वक्फ विधेयक लोकसभा में पेश, रिजिजू ने यूपीए सरकार में हुए बदलावों पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली : लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पेश होते ही संसद में हंगामा शुरू हो गया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया, जिस पर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विधेयक की प्रति देर से मिलने के कारण उन्हें इसकी समीक्षा के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।

किरेन रिजिजू ने 2013 के संशोधन पर उठाए सवाल

विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने यूपीए सरकार द्वारा किए गए संशोधन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उस संशोधन में वक्फ बोर्ड को इतना अधिकार दे दिया गया कि उसके आदेश को किसी सिविल अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती थी। उन्होंने यह भी कहा, “अगर यूपीए सरकार सत्ता में होती तो संसद भवन, एयरपोर्ट समेत कई इमारतों को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया जाता।”

जेपीसी पर उठा सवाल

रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) पर सवाल उठाते हुए कहा कि जेपीसी के पास विधेयक में संशोधन करने का अधिकार नहीं है। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि नियमों के तहत जेपीसी को संशोधन करने का पूरा अधिकार है।

AIMPLB ने दी देशव्यापी विरोध की चेतावनी

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने विधेयक का विरोध करते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। संगठन के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा, “अगर यह विधेयक संसद में पारित हो जाता है, तो हम इसके खिलाफ़ देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। हम कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों का उपयोग करेंगे और जब तक प्रस्तावित संशोधन वापस नहीं लिए जाते, हम शांतिपूर्ण विरोध जारी रखेंगे।” उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण और सांप्रदायिकता से प्रेरित बताया और कहा कि जेपीसी में विपक्ष की बात को नजरअंदाज कर दिया गया।

मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा रहा

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद बीरेंद्र सिंह ने कहा कि धार्मिक मामलों में छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या जमीन को लेकर विवाद केवल मुस्लिम समुदाय में है? हिंदू और ईसाई समुदायों में भी ऐसे मामले होते हैं। लेकिन सरकार सिर्फ एक समुदाय को टारगेट कर रही है, जिसका हम विरोध करते हैं।”

एनसीपी-एससीपी का बयान

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और समाजवादी कांग्रेस पार्टी (एससीपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, “हम भारत गठबंधन के साथ हैं और पूरी ताकत से एकजुट रहेंगे।”

LoC पर घुसपैठ की कोशिश नाकाम, भारतीय सेना ने दिया मुंहतोड़ जवाब, पाकिस्तान के 10 जवान घायल

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जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर मंगलवार को घुसपैठ की बड़ी कोशिश को भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया। इस दौरान बारूदी सुरंगों में धमाके हुए, जिससे सीमा पार पाकिस्तान में भारी नुकसान की खबर है। भारतीय सेना की मुस्तैदी के चलते आतंकियों के मंसूबे विफल हो गए और वे भागने पर मजबूर हो गए। इस दौरान भारत-पाकिस्तान सेना के बीच भारी गोलीबारी हुई, जिसमें पाकिस्तानी सेना के 8 से 10 जवानों के घायल होने की सूचना है।

कैसे हुई घुसपैठ की कोशिश?

दोपहर करीब 12 बजे कृष्णा घाटी सेक्टर में भारतीय सेना की अग्रिम पोस्ट के नजदीक जंगली इलाके में तीन बारूदी सुरंगों में अचानक धमाके हुए। माना जा रहा है कि एलओसी के उस पार से आतंकी भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बारूदी सुरंगों में विस्फोट से उनकी योजना ध्वस्त हो गई।

दो घंटे तक हुई भीषण गोलीबारी

जैसे ही घुसपैठ नाकाम हुई, पाकिस्तानी सेना ने आतंकियों को बचाने के लिए भारतीय चौकियों पर फायरिंग शुरू कर दी। भारतीय सेना ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया और दोनों ओर से लगभग दो घंटे तक भारी गोलीबारी जारी रही।

पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान

सूत्रों के मुताबिक, इस जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के 10 सैनिक घायल हुए और सीमा पार बड़े स्तर पर नुकसान की भी खबर है। हालांकि, भारतीय सेना को कोई क्षति नहीं हुई है।

पहले भी हुई थी घुसपैठ की कोशिश

गौरतलब है कि दो महीने पहले भी इसी क्षेत्र में पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की कोशिश की गई थी, लेकिन भारतीय सेना ने तीन आतंकियों को मार गिराया था।

जब किया नहीं कोई काम तो अब सरकार का नाम बदलो अभियान, केवल ध्यान भटकाने का प्रयास

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देहरादून – उत्तराखंड में भाजपा सरकार द्वारा कस्बों और गांवों के नाम बदलने का अभियान विपक्ष के निशाने पर आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सूर्यकांत धस्माना ने इसे जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाने की साजिश करार दिया है।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान धस्माना ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बीते आठ वर्षों में भाजपा की “ट्रिपल इंजन” सरकार रही, लेकिन विकास का पहिया ठप है। त्रिवेंद्र सिंह रावत से लेकर तीरथ सिंह रावत और अब पुष्कर सिंह धामी तक, कोई भी सरकार जनता की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने में नाकाम रही है।

धस्माना ने आरोप लगाया कि सरकार ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है—कभी ‘धर्म युद्ध’, कभी ‘लव जिहाद’, कभी ‘लैंड जिहाद’ और अब ‘नाम परिवर्तन’ का खेल। उन्होंने खास तौर पर गढ़वाल के ‘मियां’ जाति के सनातनी ठाकुरों के गांवों के नाम बदलने को सरकार की संकीर्ण मानसिकता करार दिया। धस्माना ने साफ कहा कि अब भाजपा सरकार नाम बदलने के सहारे सत्ता नहीं बचा सकती।

भाजपा का दिवालियापन इस हद तक है कि गढ़वाल के मियां जाती के लोग जो सनातनी ठाकुर हैं, उनके नाम के मियां वाला का नाम मुसलमान मान कर उसको बदल दिया। धस्माना ने कहा कि जगहों के नाम बदलने से अब भाजपा का काम चलने वाला नहीं है।

क्योंकि अब जनता जमीन पर काम चाहती है, जो हो नहीं रहा। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जगहों का नाम बदलने से क्या, राज्य की बेरोजगारी खत्म हो जाएगी? क्या अंकिता भंडारी को न्याय मिल जाएगा? क्या राज्य में महिलाओं पर हो रही अत्याचार बलात्कार व हिंसा रुक जाएगी?

 

भीषण सड़क हादसा: बस और एसयूवी की टक्कर में पांच की मौत, कई घायल

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महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले से एक भीषण सड़क हादसे की खबर सामने आई है। खामगांव-शेगांव राजमार्ग पर महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) की बस और एक बोलेरो एसयूवी की टक्कर में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए।

कैसे हुआ हादसा?

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, एमएसआरटीसी की बस बोलेरो से टकरा गई। इसके तुरंत बाद एक निजी बस भी दुर्घटनाग्रस्त वाहनों से टकरा गई, जिससे हादसा और भी भयावह हो गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल में जुट गई है। निजी बस का ड्राइवर केबिन में फंसा हुआ था, जिसे बाहर निकालने के प्रयास जारी हैं। वहीं, घायलों को तुरंत खामगांव के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

हादसे के कारणों की जांच जारी

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह भीषण हादसा कैसे हुआ और इसमें किसकी गलती थी। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है।