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उक्रांद नेता आशीष नेगी को मिली जमानत

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देहरादून – उत्तराखंड क्रांति दल युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष आशीष नेगी को आज न्यायालय से जमानत पर रिहाई का आदेश मिला है। उनके अधिवक्ता आलोक घिल्डियाल ने बताया कि आशीष नेगी को राजनैतिक दबाव के कारण पुलिस ने विभिन्न धाराएं लगाकर गिरफ्तार कर लिया था। आज माननीय न्यायालय ने उन्हें जमानत पर रिहाई के आदेश पारित किए, आगे हम मजबूती से युवा नेता आशीष नेगी के खिलाफ इस फर्जी मुकदमे को खारिज करवाएंगे।

माननीय न्यायालय का आदेशScreenshot 2025 04 04 23 34 04 76 92460851df6f172a4592fca41cc2d2e6Screenshot 2025 04 04 23 34 19 66 92460851df6f172a4592fca41cc2d2e6 1Screenshot 2025 04 04 23 34 33 96 92460851df6f172a4592fca41cc2d2e6

उत्तराखंड चार धामों में चार आईएएस को जिम्मेदारी

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उत्तराखंड चार धाम यात्रा 2025

• चार आईएएस अधिकारियों को चार धामों की जिम्मेदारी।

• सचिव संस्कृति आईएएस युगल किशोर पंत ने केदारनाथ यात्रा पड़ावों पर पहुंच यात्रा तैयारियों का लिया जायजा। बीकेटीसी तथा श्री केदारसभा ने सचिव को यात्रा व्यवस्थाओं के बावत अवगत कराया।

• श्री केदारनाथ धाम के शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में दर्शन किये।

 

देहरादून/ उखीमठ/ उत्तरकाशी : 4 अप्रैल मुख्य मंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार उत्तराखंड चारधाम यात्रा तैयारियों में जुटी हुई है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले तैयारियों पूरी की जा रही है।तीर्थयात्रियों को धामों में सरल सुगम दर्शन प्राथमिकता है तो तीर्थयात्रियों को मूलभूत सुविधाओं में कोई कमी न रहे इसके लिए लागातार धरातल पर कार्य हो रहे है।
श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई, श्री केदारनाथ धाम के 2 मई तथा श्री गंगोत्री यमुनोत्री धाम के कपाट 30 अप्रैल अक्षय तृतीया को दर्शनार्थ खुल रहे है।

इसी संदर्भ में प्रदेश के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के निर्देश पर सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे ने अनुभवी एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को चारों धामों की यात्रा तैयारियों के आंकलन हेतु बतौर नोडल अधिकारी अतिरिक्त जिम्मेदारी दी है।

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तथा सचिव संस्कृति युगल किशोर पंत को केदारनाथ धाम की यात्रा तैयारियों की मानिटरिंग का जिम्मा है इसी संदर्भ में सचिव युगल किशोर पंत ने बीते कल बृहस्पतिवार देर शाम तक केदारनाथ यात्रा मार्ग में तीर्थयात्रियों की मूलभूत सुविधाओं पेयजल, विद्युत, संचार, परिवहन, स्वास्थ्य, आवासीय व्यवस्थाओं, पार्किंग की स्थिति, केदारनाथ धाम हेतु पैदल मार्ग हेतु घोड़े खच्चर, डंडी सड़क मार्ग का अवलोकन किया।
सचिव युगल किशोर पंत सड़क मार्ग से देहरादून से होते हुए चारधाम यात्रा के मुख्य पड़ावों ऋषिकेश, देवप्रयाग,श्रीनगर, रूद्रप्रयाग , अगस्त्यमुनि से होते हुए कल उखीमठ पहुंचे।
इस दौरान उन्होंने तीर्थयात्रा से जुड़ी संस्थाओं श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी),स्थानीय लोगों, हक हकूकधारियों, तथा श्री केदारनाथ सभा से भी बातचीत की तथा केदारनाथ यात्रा के संबंध में सुझाव सुने।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंच कर सचिव युगल किशोर पंत ने श्री केदारनाथ धाम के शीतकालीन गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ में दर्शन किये। इस दौरान बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल की ओर से केदारनाथ धाम प्रभारी अधिकारी यदुवीर पुष्पवान ने सचिव को शीतकालीन पूजा व्यवस्था के विषय में अवगत कराया।
इस अवसर पर श्री केदार सभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी ने केदारनाथ धाम यात्रा के विषय में सचिव के सम्मुख सुझाव रखे।
पुजारी शिवशंकर लिंग, पुजारी टी गंगाधर लिंग वेदपाठी यशोधर मैठाणी,कुलदीप धर्म्वाण सहित समिति कर्मचारी, अन्य विभागों के अधिकारीगण एवं स्थानीय लोग इस अवसर पर मौजूद रहे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आईएएस नीरज खैरवाल ने बतौर नोडल अधिकारी यमुनोत्री धाम मार्ग की यात्रा तैयारियों का जायजा लिया तथा मां यमुना के शीतकालीन प्रवास खरसाली पहुंचे।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में शीघ्र चारधाम यात्रा प्रारम्भ होने वाली है, जिसमें देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालुओं को सुविधाजनक यात्रा कराये जाने के दृष्टिगत चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं को अत्यधिक सुदृढ़ किये जाने हेतु धामों एवं यात्रा मार्गों की व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत किये जाने हेतु मुख्य सचिव महोदय के निर्देशों के कम में
सचिव ,आईएएस बी,वी,आर,सी, पुरुषोतम को
श्री गंगोत्री धाम तथा सचिव आईएएस आर राजेश कुमार को श्री बदरीनाथ धाम चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं हेतु बतौर नोडल अधिकारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली है।

पर्यटन विभाग द्वारा बताया गया है कि अधिकारीगण देहरादून से सड़क मार्ग से धामों तक स्थलीय निरीक्षण करते हुए 11 अप्रैल को पूर्वान्ह 11:30 बजे देहरादून में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रस्तावित बैठक यात्रा तैयारियों की प्रगति का खाका में प्रस्तुत करेंगे।

भारत-बांग्लादेश रिश्तों में दरार: बैंकॉक में पीएम मोदी-यूनुस की ‘ठंडी’ मुलाकात ने बढ़ाई हलचल

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भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में पिछले कुछ समय से जो ठंडक महसूस की जा रही थी, वो अब धीरे-धीरे सार्वजनिक मंचों पर भी झलकने लगी है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद, अंतरिम सरकार की कमान संभाल रहे मोहम्मद यूनुस और भारत के बीच कूटनीतिक तनाव की खबरें पहले से ही चर्चा में थीं। अब इस तनाव की झलक बैंकॉक में आयोजित बिम्सटेक (BIMSTEC) शिखर सम्मेलन में भी देखने को मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोहम्मद यूनुस आमने-सामने आए।

बैंकॉक में दोनों नेताओं की यह मुलाकात जितनी प्रतीक्षित थी, उतनी ही ठंडी भी रही। ना तो वो गर्मजोशी दिखाई दी, जो आमतौर पर प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय मुलाकातों में देखने को मिलती है, और ना ही उस आत्मीयता की कोई छाया दिखी, जो भारत-बांग्लादेश जैसे पड़ोसी और ऐतिहासिक रूप से जुड़े देशों के नेताओं की बातचीत में होनी चाहिए।

जानकारों का मानना है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के कुछ फैसले भारत के लिए असहज करने वाले रहे हैं। खासतौर पर चिटगांव और मोन्गला बंदरगाहों तक भारत की पहुंच पर रोक लगाने की चर्चाएं, और बांग्लादेश की नई सरकार का चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियां – ये सब बातें भारत को सोचने पर मजबूर कर रही हैं।

वहीं बांग्लादेश के भीतर भी एक तबका भारत के ‘हस्तक्षेप’ के खिलाफ मुखर हुआ है, खासकर चुनावों में भारत के कथित समर्थन को लेकर। मोहम्मद यूनुस, जिन्हें अभी तक भारत समर्थक माना जा रहा था, उनके रुख में भी हालिया दिनों में बदलाव देखा गया है।

बिम्सटेक सम्मेलन की इस मुलाकात से जहां उम्मीदें थीं कि कुछ संवाद आगे बढ़ेगा, वहीं जो तस्वीरें और संकेत सामने आए हैं, उन्होंने रिश्तों में जमी बर्फ को और भी ठोस बना दिया है। अब निगाहें आने वाले हफ्तों पर होंगी – क्या यह ठंडक आगे चलकर दूरी में बदलेगी या फिर कोई नया कूटनीतिक प्रयास इस दरार को पाटने की कोशिश करेगा?

भारत-बांग्लादेश की यह सियासी ताश की बाज़ी अभी बाकी है।

अगर चाहो तो इसमें लोकल राजनीति या चीन-पाक एंगल को और विस्तार से जोड़ सकते हैं। बताओ, बढ़ाएं इसे?

सावरकर मामले में राहुल गांधी को हाईकोर्ट से झटका

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को वीर सावरकर पर कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में कोई राहत नहीं दी है। राहुल गांधी ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें समन जारी करते हुए दो सौ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।

कोर्ट ने उनकी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनके पास सत्र अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने का विकल्प मौजूद है, इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत इस याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकती।

मामला 17 नवंबर 2022 का है, जब ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के अकोला में सार्वजनिक मंच से वीर सावरकर पर कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी की थी। वादी नृपेंद्र पांडेय ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की टिप्पणी न केवल सावरकर बल्कि देश के सभी स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान थी।

कोर्ट में पेश न होकर हाजिरी माफी की अर्जी देने पर राहुल पर दो सौ रुपये का हर्जाना लगाया गया था। याचिका में यह भी कहा गया कि राहुल गांधी ने वीर सावरकर को अंग्रेजों का “पेंशनर” बताया और कई अन्य अपमानजनक बातें भी कहीं।

वक्फ बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी कांग्रेस

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नई दिल्ली। लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पारित हो गया, लेकिन इस पर कांग्रेस और डीएमके समेत कई विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस ने इस विधेयक को लेकर संविधान विरोधी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है।

एआईसीसी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पार्टी जल्द ही इस विधेयक की संवैधानिकता पर सवाल उठाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस, मोदी सरकार के संविधान विरोधी कदमों का हर हाल में विरोध करेगी।

राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने इसे ‘मुस्लिम विरोधी’ करार दिया और जोरदार आपत्ति जताई। इससे पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने भी इस विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा की थी।

स्टालिन ने लोकसभा में इसे पास किए जाने के विरोध में तमिलनाडु विधानसभा में काली पट्टी बांधकर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि देश के कई दलों के विरोध के बावजूद, रात के दो बजे आनन-फानन में विधेयक पारित करवाना संविधान की मूल भावना पर सीधा हमला है।

फिल्मी जगत में शोक की लहर, दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार का 87 वर्ष की उम्र में निधन

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मुंबई। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे। 87 वर्षीय मनोज कुमार का शुक्रवार सुबह मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया। वह कुछ समय से हार्ट से जुड़ी जटिलताओं और डीकंपेंसेटेड लिवर सिरोसिस से पीड़ित थे। उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।

भारत कुमार का सफर हुआ समाप्त

तीन दशकों तक हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में देने वाले मनोज कुमार को लोग ‘भारत कुमार’ के नाम से जानते थे। देशभक्ति से ओत-प्रोत उनकी फिल्मों ने भारतीय दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उन्होंने भले ही दो दशक पहले सिनेमा से दूरी बना ली थी, लेकिन उनकी फिल्मों का प्रभाव आज भी बरकरार है।

फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर

मनोज कुमार के निधन पर फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े सितारों ने शोक व्यक्त किया। फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने कहा,
“मनोज कुमार जी, जो दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित थे और हमारी प्रेरणा थे, अब हमारे बीच नहीं रहे। यह फिल्म उद्योग के लिए बहुत बड़ी क्षति है और पूरी इंडस्ट्री उन्हें याद करेगी।”

क्यों कहा गया उन्हें ‘भारत कुमार’?

24 जुलाई 1937 को जन्मे मनोज कुमार का असली नाम हरिकिशन गिरि गोस्वामी था। उन्होंने कई तरह के किरदार निभाए, लेकिन देशभक्ति पर आधारित फिल्मों के लिए उन्हें विशेष पहचान मिली। इसी वजह से उन्हें ‘भारत कुमार’ कहा जाने लगा।

मनोज कुमार की यादगार फिल्में

  • शहीद (1965)

  • उपकार (1967) – यह फिल्म उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के कहने पर बनाई थी।

  • पूरब और पश्चिम (1970)

  • रोटी, कपड़ा और मकान (1974)

  • क्रांति (1981)
    उन्होंने अपने करियर की अंतिम फिल्म मैदान-ए-जंग (1995) में अभिनय किया था, जबकि 1999 में आखिरी बार जय हिंद फिल्म का निर्देशन किया।

सम्मान और पुरस्कार

मनोज कुमार को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया—

  • पद्मश्री (1992)

  • दादा साहब फाल्के पुरस्कार (2016)

  • 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड, जिनमें ‘उपकार’ के लिए बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट स्टोरी और बेस्ट डायलॉग अवॉर्ड शामिल हैं।

  • एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

मनोज कुमार का जाना हिंदी सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने भारतीय समाज और सिनेमा पर जो अमिट छाप छोड़ी है, वह हमेशा याद रखी जाएगी।

अमेरिकी टैरिफ फैसले का असर, भारतीय शेयर बाजार में गिरावट

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नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) के एलान के बाद दुनियाभर के शेयर बाजारों में हड़कंप मच गया है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को सेंसेक्स में 500 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी 200 अंक लुढ़ककर 23 हजार के करीब कारोबार करता दिखा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका अब सभी आयातित वस्तुओं पर न्यूनतम 10% टैरिफ लगाएगा। कुछ देशों के लिए यह दर 25% तक पहुंच सकती है। चीन पर कुल 54%, वियतनाम पर 46%, कंबोडिया पर 49% और इंडोनेशिया पर 32% तक का टैरिफ लगाया गया है। इस फैसले का सबसे गहरा असर वॉल स्ट्रीट पर पड़ा है, जहां बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई।

गुरुवार को भी शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली थी। कारोबारी सप्ताह के चौथे दिन बीएसई का सेंसेक्स 322 अंकों की गिरावट के साथ 76,295.36 पर बंद हुआ था। एनएसई का निफ्टी भी 0.39 फीसदी की गिरावट के साथ 23,242.00 पर क्लोज हुआ। बीएसई लिमिटेड, तेजस नेटवर्क, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, बजाज फाइनेंस और इंफोसिस एनएसई पर सबसे ज्यादा सक्रिय शेयरों में शामिल रहे।

डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति ने वैश्विक व्यापार माहौल में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिसका असर निवेशकों की भावनाओं पर साफ नजर आ रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार में और भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

उत्तराखंड चारधाम यात्रा: 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर खुलेंगे यमुनोत्री धाम के कपाट

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उत्तरकाशी। चारधाम यात्रा के पहले प्रमुख पड़ाव यमुनोत्री धाम के कपाट 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। इससे पहले, माँ यमुना की डोली अपने शीतकालीन प्रवास स्थल, खरसाली गांव से सुबह 8:00 बजे पारंपरिक रीति-रिवाजों और भक्ति संगीत के साथ यमुनोत्री धाम के लिए प्रस्थान करेगी।

यमुना जयंती के अवसर पर खरसाली स्थित यमुना मंदिर परिसर में विधिवत रूप से ज्योतिषीय गणना के आधार पर शुभ मुहूर्त निकाला गया। इसके अनुसार, रोहिणी नक्षत्र और सिद्ध योग के संयोग में 30 अप्रैल को पूर्वाह्न 11:55 बजे माँ यमुना के पवित्र मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।

मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया कि सुबह 8:28 बजे, खरसाली से माँ यमुना की डोली को पारंपरिक वाद्य यंत्रों और भक्तों की जय-जयकार के बीच विदा किया जाएगा। इस अवसर पर माँ यमुना के भाई शनिदेव महाराज की डोली भी यमुनोत्री धाम की यात्रा में सम्मिलित होगी।

राहुल गांधी ने अमेरिकी टैरिफ पर सरकार से मांगा जवाब

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लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 27% टैरिफ को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह टैरिफ भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगा, खासकर ऑटोमोबाइल, फार्मा और कृषि क्षेत्रों को। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र सरकार इस गंभीर मुद्दे से कैसे निपटेगी?

राहुल गांधी ने विदेश नीति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अमेरिका, जो भारत का सहयोगी माना जाता है, ने अचानक इतना बड़ा शुल्क लगा दिया, और सरकार इसे रोकने में असमर्थ रही। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि वे न बाएं झुकीं, न दाएं, बल्कि भारतीय हितों के लिए हमेशा सीधी खड़ी रहीं। लेकिन भाजपा और आरएसएस का रुख अलग है—वे विदेशी ताकतों के सामने सिर झुकाते हैं।

एलएसी पर स्थिति और चीन से संबंध

राहुल गांधी ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के कब्जे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि चीन ने 4,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय जमीन पर कब्जा कर लिया है, और सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर हमारी जमीन को वापस लेने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि भारत-चीन राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है, जबकि 2020 में गलवान में हमारे 20 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्होंने विदेश सचिव विक्रम मिस्री के चीनी राजदूत के साथ केक काटने की घटना का जिक्र करते हुए इसे ‘शहादत का अपमान’ बताया।

सरकार को घेरा, जवाब मांगते हुए उठाए गंभीर सवाल

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने चीन को पत्र लिखा है, लेकिन यह जानकारी भारत सरकार की ओर से नहीं, बल्कि खुद चीनी राजदूत के जरिए सामने आई। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर चीन को भेजे गए पत्रों में क्या लिखा था और हमारी जमीन को वापस लाने के लिए क्या रणनीति बनाई जा रही है?

उन्होंने स्पष्ट कहा कि सामान्य संबंधों के विरोध में कांग्रेस नहीं है, लेकिन उससे पहले यथास्थिति बहाल होनी चाहिए और भारत को अपनी जमीन वापस मिलनी चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह अमेरिका के टैरिफ और चीन के कब्जे को लेकर देश को स्पष्ट जवाब दे।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 25 हजार शिक्षकों और कर्मचारियों को नौकरी से हटाने का आदेश!

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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में 2016 शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़ा अहम फैसला सुनाते हुए 25,000 से अधिक शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द कर दी हैं। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने इस मामले में पिछले साल हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।

क्या है मामला?

2016 में स्टेट स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित हुई थी, जिसमें 23 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने भाग लिया था। लेकिन भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और धांधली के आरोप लगे थे। इस पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने अप्रैल 2024 में भर्ती को अवैध घोषित करते हुए सभी नियुक्तियां रद्द कर दी थीं और कर्मचारियों से वेतन वापस लेने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

नियुक्तियां अवैध: सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को “धोखाधड़ी और जोड़-तोड़ से भरी” करार दिया। वेतन वापस करने की जरूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें शिक्षकों को वेतन लौटाने के लिए कहा गया था।

नई भर्ती प्रक्रिया: अदालत ने तीन महीने के भीतर नई भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। ईमानदार उम्मीदवारों को राहत: जो अभ्यर्थी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं थे, उन्हें नई भर्ती में कुछ छूट दी जा सकती है।

दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए राहत: एक दिव्यांग कर्मचारी को नौकरी जारी रखने की अनुमति दी गई है, जबकि अन्य दिव्यांग उम्मीदवारों को नई भर्ती में विशेष रियायतें दी जाएंगी।

इस पूरे घोटाले की CBI जांच को भी हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट 4 अप्रैल को सुनवाई करेगा। इसके अलावा, सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि नई भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो ताकि योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिले।