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द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वर मंदिर के कपाट वैदिक विधि-विधान के साथ खुले

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रुद्रप्रयाग। द्वितीय केदार के रूप में प्रसिद्ध भगवान श्री मदमहेश्वर मंदिर के कपाट गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। पूर्वाह्न 11:30 बजे कर्क लग्न में मंदिर के कपाट खुलते ही पूरा धाम भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। इस अवसर पर मंदिर को भव्य रूप से फूलों से सजाया गया था तथा सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान मदमहेश्वर के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कपाट खुलने पर देश-विदेश के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान मदमहेश्वर की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे। वहीं बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि यात्रा को सुगम एवं सुरक्षित बनाने के लिए समिति की ओर से व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली 19 मई को श्री ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से प्रथम पड़ाव श्री राकेश्वरी मंदिर के लिए रवाना हुई थी। 20 मई को डोली हकहकूकधारियों के गांव गौंडार पहुंची और गुरुवार सुबह गौंडार से प्रस्थान कर श्री मदमहेश्वर धाम पहुंची। निर्धारित मुहूर्त में पूर्वाह्न 11:30 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

उन्होंने बताया कि 19 मई को श्री ओंकारेश्वर मंदिर से रावल भीमाशंकर लिंग एवं मंदिर प्रभारी बिजेंद्र बिष्ट ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद डोली को रवाना किया था। मंदिर प्रभारी बिजेंद्र बिष्ट के अनुसार कपाट खुलने के प्रथम दिन 1135 श्रद्धालु भगवान मदमहेश्वर के दर्शन के लिए धाम पहुंचे।

कपाट खुलने की प्रक्रिया के दौरान पुजारी शिवशंकर लिंग ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई। इस अवसर पर भगवान मदमहेश्वर के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप से श्रृंगार रूप प्रदान किया गया। इससे पूर्व भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली भंडार गृह के अवलोकन के लिए पहुंची।

कपाटोत्सव के अवसर पर मंदिर समिति सदस्य प्रह्लाद पुष्पवान, दानीदाता दिनेश कानोड़िया, डोली प्रभारी किशन त्रिवेदी, वीरेश्वर भट्ट, विशेश्वर भट्ट, दिनेश पंवार, गणेश सेमवाल, प्रकाश पंवार सहित स्थानीय हकहकूकधारी, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

उत्तराखंड : जंगल में आग बुझाने गया फायर वाचर खाई में गिरा, दर्दनाक मौत

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चमोली। चमोली जनपद के बिरही क्षेत्र में चीड़ के जंगल में लगी आग बुझाने के दौरान एक फायर वाचर की दर्दनाक मौत हो गई। आग बुझाने गए फायर वाचर का शव गुरुवार सुबह करीब 70 मीटर गहरी खाई में मिला। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। मृतक की पहचान पाखी जलगवाड़ गांव निवासी 42 वर्षीय राजेंद्र सिंह नेगी पुत्र नंदन सिंह नेगी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि बुधवार दोपहर बेड़ूबगढ़ बिरही में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित चीड़ के जंगल में अचानक भीषण आग भड़क उठी थी। आग तेजी से फैलने लगी तो वन विभाग ने तत्काल फायर वाचरों की टीम को मौके पर भेजा।

बद्रीनाथ के रेंज प्रभागीय वनाधिकारी सर्वेश दुबे ने बताया कि आग बुझाने के लिए चमोली रेंज से 15 कर्मियों की टीम भेजी गई थी, जिसमें राजेंद्र सिंह नेगी भी शामिल थे। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद शाम तक आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया। अपराह्न करीब सात बजे जब सभी फायर वाचर वापस बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहुंचे तो राजेंद्र सिंह वहां नहीं मिले। साथियों ने तुरंत अधिकारियों को उनके लापता होने की सूचना दी। इसके बाद वन विभाग ने मामले की जानकारी पुलिस प्रशासन को दी।

स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट की टीम और वन कर्मियों ने रात में ही जंगल में खोज अभियान शुरू किया। देर रात करीब साढ़े दस बजे जंगल से राजेंद्र सिंह का मोबाइल फोन बरामद हुआ, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका। अंधेरा और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण रात में अभियान रोकना पड़ा।

गुरुवार सुबह दोबारा खोज अभियान शुरू किया गया। इस दौरान राजेंद्र सिंह का शव जंगल से करीब 70 मीटर नीचे गहरी खाई में मिला। अधिकारियों के अनुसार शव आग से बुरी तरह झुलसा हुआ था। प्रारंभिक आशंका जताई जा रही है कि आग बुझाने के दौरान वह चट्टानी हिस्से से फिसलकर खाई में गिर गए होंगे।

घटना की सूचना मिलते ही मृतक के परिजन, ग्रामीण और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंच गए। गांव में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने सरकार से प्रभावित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। वन विभाग और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं राजेंद्र सिंह की मौत के बाद जंगलों में आग बुझाने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

मार्केट में भीषण आग, दमकलकर्मी और सुरक्षा गार्ड की मौत

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ठाणे। महाराष्ट्र के ठाणे रेलवे स्टेशन के पास स्थित गामदेवी मार्केट परिसर में गुरुवार तड़के भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। इस दर्दनाक हादसे में आग बुझाने के दौरान एक दमकलकर्मी और एक सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई, जबकि दो अन्य दमकलकर्मी गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के प्रमुख यासिन तड़वी के अनुसार, आग तड़के करीब 3:45 बजे गामदेवी मार्केट परिसर में लगी। परिसर में कपड़ों, फल और सब्जियों की बड़ी संख्या में दुकानें और ठेले मौजूद थे। आग लगते ही देखते-ही-देखते लपटें तेजी से फैल गईं और पूरे बाजार को अपनी चपेट में ले लिया।

आग इतनी भयावह थी कि आसमान में धुएं का घना गुबार छा गया और दूर-दूर तक ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग ने तुरंत विशेष आपातकालीन अग्निशमन अभियान घोषित किया।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त प्रशांत रोडे ने बताया कि हादसे में जान गंवाने वाले दमकलकर्मी और सुरक्षा गार्ड लोगों को बचाने तथा आग पर काबू पाने के प्रयास में जुटे हुए थे। इसी दौरान वे आग की चपेट में आ गए। दो अन्य दमकलकर्मी भी बचाव अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए।

आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, आग ने पूरे गामदेवी मार्केट परिसर को भारी नुकसान पहुंचाया है। कपड़ों की अनेक दुकानें, फल-सब्जी मंडी और परिसर में स्थित नगर निगम का वार्ड कार्यालय पूरी तरह जलकर खाक हो गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार हादसे में करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है।

दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बाजार में बड़ी मात्रा में कपड़े और अन्य अत्यधिक ज्वलनशील सामान रखा हुआ था, जिसके कारण आग तेजी से फैलती चली गई। संकरी गलियों और लगातार उठती लपटों के कारण राहत एवं बचाव कार्य में भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

आग पर काबू पाने के लिए ठाणे तथा आसपास के विभिन्न दमकल केंद्रों से कई अग्निशमन वाहन मौके पर भेजे गए। क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन दल की पूरी टीम भी राहत कार्य में जुटी रही। कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर आंशिक रूप से नियंत्रण पाया जा सका।फिलहाल पुलिस और प्रशासन आग लगने के कारणों की जांच में जुटे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

उत्तराखंड मौसम अपडेट : पहाड़ों पर बारिश, मैदान के इन जिलों के लिए लू का येलो अलर्ट

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देहरादून : उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कुछ पर्वतीय जिलों में बारिश और गरज-चमक की संभावना है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में भीषण गर्मी और लू को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और दोपहर के समय अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार आज उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है। वहीं प्रदेश के अन्य अधिकांश जिलों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर और देहरादून से सटे इलाकों के साथ-साथ उत्तरकाशी के सीमावर्ती क्षेत्रों में लू चलने की आशंका जताई है। इसे देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

राजधानी देहरादून में आसमान मुख्य रूप से साफ रहने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक शहर में अधिकतम तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को दिन के समय भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क

प्रदेश में बढ़ते तापमान और संभावित लू को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। National Health Mission की ओर से सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को लू से संबंधित बीमारियों की रोकथाम और प्रभावी प्रबंधन के निर्देश जारी किए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों, ओआरएस घोल और प्राथमिक उपचार की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही लोगों को अधिक पानी पीने, धूप से बचने और बुजुर्गों तथा बच्चों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

भीषण गर्मी के चलते विद्यालयों के समय में बदलाव

ऊधम सिंह नगर जिले में लगातार बढ़ती गर्मी और लू के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने विद्यालयों के संचालन समय में बदलाव किया है। जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष नितिन सिंह भदौरिया ने जिले के सभी शिक्षण संस्थानों को संशोधित समय के अनुसार संचालित करने के निर्देश जारी किए हैं।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आदेशों का पालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। मौसम विभाग और प्रशासन ने लोगों से गर्मी के दौरान विशेष सावधानी बरतने, पर्याप्त पानी पीने और दोपहर के समय खुले में काम करने से बचने की अपील की है।

गुलदार का आतंक, लगातार हमलों से ग्रामीणों में दहशत

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पौड़ी। जनपद पौड़ी के कमंद गांव और आसपास के क्षेत्रों में गुलदार के लगातार बढ़ते हमलों ने ग्रामीणों की जिंदगी को भय और असुरक्षा के माहौल में धकेल दिया है। बीते शुक्रवार को कमंद गांव में गुलदार के हमले में एक व्यक्ति की मौत के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई, जबकि अगले ही दिन पास के गांव में एक महिला पर भी गुलदार ने हमला कर दिया। लगातार हो रही इन घटनाओं से ग्रामीणों में भारी आक्रोश और डर का माहौल बना हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि शाम ढलते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। गांव के आसपास कई गुलदारों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद लोगों ने रात के समय घरों से बाहर निकलना लगभग बंद कर दिया है। खासकर छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, स्कूल जाने वाले बच्चों को लेकर अभिभावकों में सबसे ज्यादा भय बना हुआ है। गांव में पर्याप्त वाहन सुविधा न होने के कारण कई अभिभावक स्वयं बच्चों को स्कूल छोड़ने और वापस लाने को मजबूर हैं। प्रशासन ने एहतियातन कुछ दिनों के लिए गांव के विद्यालय बंद रखने के निर्देश दिए हैं, लेकिन स्कूल दोबारा खुलने के बाद भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बरकरार है।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव के कई बुजुर्ग अकेले रहते हैं और उनका जीवन खेती-बाड़ी तथा बागवानी पर निर्भर है। ऐसे में उन्हें रोजाना खेतों और बगीचों तक जाना पड़ता है, जहां जंगली जानवरों के हमले का खतरा लगातार बना रहता है। लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो कोई और ग्रामीण भी गुलदार का शिकार बन सकता है।

गांव के लोगों का कहना है कि पहले शाम के समय बच्चे घरों के बाहर खेलते थे और ग्रामीण सड़कों पर टहलने निकलते थे, लेकिन लगातार दो हमलों के बाद अब पूरा माहौल बदल गया है। कई ग्रामीणों ने गुलदार को गांव की सड़कों और आबादी वाले क्षेत्रों में घूमते हुए देखा है, जिससे लोगों में भय और अधिक बढ़ गया है।

घटनाओं के बाद वन विभाग ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। Uttarakhand Forest Department की टीम लगातार गांव में गश्त कर रही है। डीएफओ महातिम यादव ने बताया कि गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इलाके में सीसीटीवी कैमरे और ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही विभाग का शूटर भी मौके पर तैनात किया गया है।

वन विभाग के अनुसार, प्राथमिकता गुलदार को पिंजरे में कैद करने और ट्रेंकुलाइज करने की है। यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर होती है तो अंतिम विकल्प के रूप में उसे मार गिराने की कार्रवाई भी की जा सकती है। विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और सहयोग करने की अपील की है।

लोगों को रात के समय अकेले बाहर न निकलने, बच्चों को अकेला न छोड़ने और जंगल से सटे इलाकों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से क्षेत्र में अतिरिक्त गश्त, पिंजरे लगाने और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि गांव में फैले भय के माहौल को खत्म किया जा सके।

आया था आतंक फैलाने, हेयर ट्रांसप्लांट कराने के चक्कर में भूल गया मिशन, जांच में चौंकाने वाले खुलासे

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नई दिल्ली। आतंकवादी संगठनों के मॉड्यूल और उनकी गतिविधियों की जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक बेहद चौंकाने वाला पहलू आया है। सूत्रों के मुताबिक, Lashkar-e-Taiba (LeT) का आतंकी उस्मान जट्ट भारत में स्लीपर सेल तैयार करने के मिशन पर भेजा गया था, लेकिन अपनी बदलती शक्ल-सूरत और निजी दिखावे की चाहत के कारण वह एजेंसियों की नजर में आ गया।

जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान से अवैध रूप से भारत में दाखिल होने के बाद जट्ट ने अपने नेटवर्क को सक्रिय करने के बजाय श्रीनगर के एक निजी मेडिकल क्लिनिक में हेयर ट्रांसप्लांट करवाने को प्राथमिकता दी। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि तेजी से झड़ते बालों के कारण उसका आत्मविश्वास बुरी तरह प्रभावित हो रहा था और वह अपने लुक को लेकर मानसिक दबाव महसूस कर रहा था।

दांतों के इलाज के लिए पहुंचा था दूसरा आतंकी

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह कोई अकेला मामला नहीं है। मार्च में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किए गए शब्बीर अहमद लोन ने भी अपनी गुप्त गतिविधियों के दौरान गुरुग्राम के एक निजी क्लिनिक में दांतों का इलाज करवाया था। बताया जा रहा है कि लोन बांग्लादेश में Lashkar-e-Taiba का नेटवर्क खड़ा करने में जुटा था।

सूत्रों के मुताबिक, लोन से जुड़े मॉड्यूल ने AI समिट से पहले दिल्ली में भड़काऊ पोस्टर लगाने की साजिश रची थी। पुलिस का दावा है कि इस मॉड्यूल में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से युवकों की भर्ती की गई थी। जल्द दाखिल होने वाली चार्जशीट में इन गतिविधियों और इलाज से जुड़े दस्तावेजों का भी उल्लेख किया जाएगा।

साजिद मीर से प्रेरित होने की आशंका

जांचकर्ताओं का मानना है कि आतंकियों के बीच अपनी पहचान बदलने के लिए कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं का चलन बढ़ रहा है। एजेंसियों को शक है कि ये आतंकी 26/11 मुंबई हमलों के आरोपी Sajid Mir से प्रेरित हो सकते हैं। साजिद मीर पर पहले भी प्लास्टिक सर्जरी के जरिए अपना चेहरा बदलने के आरोप लग चुके हैं। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, चेहरे या शारीरिक बनावट में बदलाव के बाद आतंकी नकली पासपोर्ट बनवाकर अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार करने और एयरपोर्ट सुरक्षा प्रणाली से बचने की कोशिश करते हैं।

मानसिक दबाव और कट्टरपंथ के बीच संघर्ष

पूछताछ के दौरान उस्मान जट्ट ने बताया कि प्रशिक्षण शिविरों में उसे जिस आक्रामक विचारधारा और प्रचार से प्रेरित किया गया था, वास्तविक जीवन में वह उससे अलग मानसिक संघर्ष झेल रहा था। अधिकारियों के अनुसार, उसने अपने सौंपे गए मिशन से ज्यादा महत्व अपनी गिरती हेयरलाइन और व्यक्तिगत छवि को देना शुरू कर दिया था। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला दर्शाता है कि व्यक्तिगत असुरक्षा, आत्म-सम्मान की कमी और सामाजिक छवि को लेकर तनाव कई बार कट्टरपंथी मानसिकता पर भी भारी पड़ सकता है।

जांच एजेंसियों की बढ़ी चिंता

हालांकि, जांच एजेंसियां इसे केवल व्यक्तिगत कमजोरी का मामला मानकर नहीं चल रहीं। अधिकारियों का कहना है कि कॉस्मेटिक सर्जरी और मेडिकल ट्रीटमेंट का इस्तेमाल आतंकवादी पहचान छिपाने के सुनियोजित तरीके के रूप में भी कर सकते हैं।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कुख्यात अंतरराष्ट्रीय आतंकी “कार्लोस द जैकल” के बारे में भी माना जाता है कि उसने अपनी पहचान बदलने के लिए चेहरे में कई बदलाव करवाए थे। अधिकारी के अनुसार, “चेहरे की बनावट बदलने से फर्जी दस्तावेजों के सहारे यात्रा करना आसान हो जाता है और कई बार एयरपोर्ट के ऑटोमैटिक अलर्ट सिस्टम भी सक्रिय नहीं हो पाते।” सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की भी जांच कर रही हैं कि भारत में मेडिकल और कॉस्मेटिक सुविधाओं का इस्तेमाल कहीं आतंकियों द्वारा अपनी पहचान छिपाने के लिए तो नहीं किया जा रहा।

पंचतत्व में विलीन हुए पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी, राजकीय सम्मान के साथ हरिद्वार में अंतिम संस्कार

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देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि) बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। हरिद्वार के खड़खड़ी घाट पर राजकीय एवं सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके पुत्र मनीष खंडूड़ी ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान पूरे प्रदेश में शोक की लहर रही और राज्य सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है।

बुधवार सुबह देहरादून स्थित वसंत विहार आवास पर उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं उनकी अर्थी को कंधा दिया। हरिद्वार के खड़खड़ी घाट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।

श्रद्धांजलि देने पहुंचे नेताओं में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, तीरथ सिंह रावत, रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, सांसद अनिल बलूनी, सांसद अजय भट्ट, सतपाल महाराज, मदन कौशिक, धन सिंह रावत और मनिंदरजीत सिंह बिट्टा सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और आम नागरिक भी मौजूद रहे।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का सोमवार सुबह देहरादून के मैक्स अस्पताल में निधन हुआ था। वह 92 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। खंडूड़ी वर्ष 2007 और 2011 में दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। वह गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद भी रहे। उनकी बेटी रितु खंडूड़ी वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष हैं।

79वें कान्स फिल्म महोत्सव में छाया मराठी रंग, अशोक सराफ और निवेदिता सराफ ने जीता दुनिया का दिल

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  • टी.एस. लामा 

फ्रांस के फ्रेंच रिवेरा में आयोजित 79वें कान्स फिल्म महोत्सव में इस बार मराठी सिनेमा और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत की खास झलक देखने को मिली। मराठी फिल्मों के दिग्गज अभिनेता अशोक सराफ ने 78 वर्ष की आयु में पहली बार कान्स के प्रतिष्ठित रेड कार्पेट पर कदम रखा। उनके साथ उनकी पत्नी और प्रसिद्ध अभिनेत्री निवेदिता सराफ भी मौजूद रहीं।

इस प्रतिष्ठित जोड़े ने अपने पारंपरिक महाराष्ट्रीयन अंदाज से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय संस्कृति की शानदार छाप छोड़ी। जहां दुनियाभर के सितारे आधुनिक और पश्चिमी फैशन में नजर आए, वहीं अशोक और निवेदिता सराफ ने अपनी जड़ों से जुड़ी पारंपरिक वेशभूषा पहनकर अलग पहचान बनाई।

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अशोक सराफ ऑफ-व्हाइट बंदगला कोट और काले ट्राउजर में बेहद शालीन नजर आए, जबकि निवेदिता सराफ ने पेस्टल रंग की पारंपरिक पैठानी साड़ी पहनकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। उन्होंने मराठी पारंपरिक गहने, नथ और गजरे से सजे जूड़े के साथ अपने लुक को पूरा किया।

रेड कार्पेट पर पहुंचते ही दोनों ने हाथ जोड़कर “नमस्ते” के अंदाज में वैश्विक मीडिया और प्रशंसकों का अभिवादन किया। यह भावुक और सांस्कृतिक क्षण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। प्रशंसकों ने इसे भारतीय संस्कार और मराठी अस्मिता का गौरवपूर्ण प्रदर्शन बताया।

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यह दिग्गज जोड़ा कान्स पहुंचे मराठी मनोरंजन प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा था। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय पवेलियन से जुड़े कई कार्यक्रमों में भाग लिया, जिनमें ओटीटी प्लेटफॉर्म “अभिजात मराठी” के वैश्विक लॉन्च को विशेष महत्व दिया गया।

इस प्रतिनिधिमंडल में अभिनेत्री प्राजक्ता माली, डिजिटल क्रिएटर अंकिता प्रभु-वालावलकर, फिल्म निर्माता केदार जोशी और पॉडकास्टर जयंती वाघधारे सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल रहीं।

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गौरतलब है कि अशोक सराफ को वर्ष 2023 में महाराष्ट्र भूषण और 2025 में पद्म श्री सम्मान से नवाजा जा चुका है। कान्स में उनकी यह ऐतिहासिक उपस्थिति मराठी सिनेमा के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। सोशल मीडिया पर प्रशंसक इसे “ग्लोबल मंच पर मराठी संस्कृति की जीत” बता रहे हैं।

बिग ब्रेकिंग : बद्रीनाथ से लौट रहे हेलीकॉप्टर की टिहरी में इमरजेंसी लैंडिंग, महिला पायलट की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

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टिहरी : चारधाम यात्रा के दौरान बुधवार को बद्रीनाथ धाम से देहरादून लौट रहे एक हेलीकॉप्टर की टिहरी गढ़वाल जिले के सत्यो क्षेत्र में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। हेलीकॉप्टर में सवार सभी श्रद्धालु सुरक्षित बताए जा रहे हैं। महिला पायलट की सतर्कता और सूझबूझ के चलते एक बड़ा हादसा टल गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार हेलीकॉप्टर बद्रीनाथ से यात्रियों को लेकर देहरादून की ओर रवाना हुआ था। उड़ान के दौरान तकनीकी समस्या महसूस होने पर पायलट ने तुरंत स्थिति को भांपते हुए टिहरी गढ़वाल के सत्यो क्षेत्र में सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई। लैंडिंग के दौरान स्थानीय लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा, लेकिन बाद में सभी यात्रियों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हेलीकॉप्टर नीचे उतरते समय काफी सावधानी बरती गई और पायलट ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद नियंत्रण बनाए रखा। हेलीकॉप्टर में मौजूद श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंच गए। तकनीकी टीम द्वारा हेलीकॉप्टर की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी में तकनीकी खराबी को इमरजेंसी लैंडिंग की वजह माना जा रहा है।

चारधाम यात्रा के दौरान लगातार बढ़ रही हेलीकॉप्टर सेवाओं के बीच इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है और मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी।

स्थानीय प्रशासन ने बताया कि सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। महिला पायलट की त्वरित निर्णय क्षमता और पेशेवर कौशल की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।

उत्तराखंड में ‘पुरस्कार चोरी’ का मामला उजागर, कन्हैयालाल डंडरियाल पुरस्कार निरस्त

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देहरादून। उत्तराखंड में साहित्यिक पुरस्कारों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा वर्ष 2025 के लिए दिया गया प्रतिष्ठित कन्हैयालाल डंडरियाल पुरस्कार निरस्त कर दिया गया है। यह पुरस्कार गढ़वाली काव्य संग्रह ‘कुरमुरी’ के लिए साहित्यकार ओम बधाणी को प्रदान किया गया था।

पुरस्कार निरस्त कर दिया
उत्तराखंड भाषा संस्थान की निदेशक माया ढकरियाल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत और जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद पुरस्कार निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह का मामला पहली बार सामने आया है, इसलिए आगे की कार्रवाई के लिए भाषा मंत्री से दिशा-निर्देश मांगे गए हैं।

प्रकाशन वर्ष बदलने का आरोप
मामले की शुरुआत दिल्ली निवासी संदीप गढ़वाली द्वारा की गई शिकायत से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ओम बधाणी का काव्य संग्रह ‘कुरमुरी’ मूल रूप से वर्ष 2013 में प्रकाशित हुआ था, जबकि पुरस्कार के नियमों के अनुसार वर्ष 2022 से 2024 के बीच प्रकाशित मौलिक गढ़वाली पद्य पुस्तकें ही पात्र थीं।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि पुस्तक का कवर पेज बदलकर तथा प्रकाशन वर्ष 2013 की जगह 2023 दर्शाकर उसे दोबारा प्रकाशित किया गया और पुरस्कार के लिए आवेदन किया गया। शिकायत के साथ संस्थान को संबंधित दस्तावेज और प्रमाण भी सौंपे गए थे।
नोटिस के बाद लौटा पुरस्कार

ओम बधाणी से पुरस्कार वापस ले लिया
मामले की गंभीरता को देखते हुए भाषा संस्थान ने ओम बधाणी को नोटिस जारी किया। जवाब में उन्होंने इसे “भूलवश हुई त्रुटि” बताया, लेकिन शिकायतकर्ता ने इसे जानबूझकर किया गया कृत्य बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। जांच के बाद संस्थान ने आरोपों को सही पाया और ओम बधाणी से पुरस्कार वापस ले लिया। उन्होंने पुरस्कार की धनराशि और सम्मान पत्र भी संस्थान को लौटा दिए हैं।

अन्य पुरस्कारों की जांच की मांग
इस घटना के बाद साहित्यिक जगत में भी हलचल मच गई है। कई साहित्यकारों ने पिछले वर्षों में दिए गए अन्य पुरस्कारों की भी जांच कराने की मांग उठाई है। साथ ही पुरस्कार प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और योग्य उम्मीदवारों को सम्मान दिलाने के लिए आवेदकों की न्यूनतम संख्या तय करने की मांग भी की जा रही है।

विश्वसनीयता पर सवाल
साहित्यकारों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल पुरस्कारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं, बल्कि साहित्य और भाषा के क्षेत्र में ईमानदारी से कार्य करने वाले रचनाकारों के साथ अन्याय भी करती हैं।