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बेरोजगारी और ‘वोट चोरी’ पर राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला

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नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। मंगलवार को उन्होंने युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर सरकार को घेरा। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार युवाओं को रोजगार और अवसर देने में विफल रही है, जिसका सीधा संबंध ‘वोट चोरी’ और संस्थाओं के दुरुपयोग से है।

सोशल मीडिया पर साधा निशाना

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भारत में युवाओं की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है, और इसका सीधा रिश्ता वोट चोरी से है। जब कोई सरकार जनता का विश्वास जीतकर सत्ता में आती है, तो उसका पहला कर्तव्य होता है युवाओं को रोजगार देना। लेकिन भाजपा चुनाव ईमानदारी से नहीं जीतती, बल्कि वोट चोरी और संस्थाओं को कैद करके सत्ता में बनी रहती है। यही कारण है कि बेरोजगारी 45 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है।”

वीडियो के जरिए दिखाई हकीकत

अपने पोस्ट में राहुल ने दो वीडियो साझा किए। पहले वीडियो में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज की घटना दिखाई गई, जबकि दूसरे वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पौधरोपण करते और पानी डालते हुए दिखाया गया। राहुल ने तंज कसते हुए कहा, “मोदी जी अपनी पीआर, सेलिब्रिटीज से गुणगान करवाने और अरबपतियों के मुनाफे में व्यस्त हैं, जबकि देश का युवा मेहनत करता है, सपने देखता है और अपने भविष्य के लिए संघर्ष करता है। युवाओं की उम्मीदों को तोड़ना इस सरकार की पहचान बन चुकी है।”

पेपर लीक और भ्रष्टाचार का आरोप

कांग्रेस नेता ने भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा, “हर परीक्षा पेपर लीक और हर भर्ती भ्रष्टाचार की कहानियों से जुड़ी है। नौकरियां घट रही हैं, भर्ती प्रक्रियाएं ध्वस्त हो चुकी हैं। युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है।”

‘वोट चोरी’ के खिलाफ युवाओं को ललकार

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट के अंत में युवाओं में जोश भरते हुए लिखा, “अब हालात बदल रहे हैं। भारत का युवा समझ चुका है कि असली लड़ाई सिर्फ नौकरियों की नहीं, बल्कि वोट चोरी के खिलाफ है। जब तक चुनाव चोरी होते रहेंगे, तब तक बेरोजगारी और भ्रष्टाचार बढ़ता रहेगा। अब युवा न नौकरी की लूट सहेगा, न वोट की चोरी। भारत को बेरोजगारी और वोट चोरी से मुक्त करना ही सबसे बड़ी देशभक्ति है।”

युवराज सिंह को ईडी ने ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में पूछताछ के लिए बुलाया

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नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी युवराज सिंह को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए तलब किया है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, युवराज सिंह मंगलवार, 23 सितंबर को दोपहर 12 बजे ईडी के दिल्ली कार्यालय पहुंचे।

इस मामले में इससे पहले भारतीय क्रिकेट टीम के अन्य स्टार खिलाड़ी सुरेश रैना और शिखर धवन को भी समन जारी किया जा चुका है, और उनसे ईडी द्वारा पूछताछ की जा चुकी है।

सूत्रों के मुताबिक, ईडी इस मामले में ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप से जुड़े वित्तीय लेनदेन और संभावित अनियमितताओं की जांच कर रही है। युवराज सिंह से इस मामले में उनकी जानकारी और संलिप्तता के बारे में पूछताछ की जा रही है। हालांकि, अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक आरोप तय नहीं किए गए हैं।

युवराज सिंह, जो 2011 विश्व कप विजेता भारतीय टीम के अहम सदस्य रहे हैं, क्रिकेट जगत में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं। इस घटनाक्रम ने क्रिकेट प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है। ईडी की जांच आगे क्या मोड़ लेती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

उत्तराखंड कैबिनेट ने दी ‘महक क्रांति नीति’ को मंजूरी, 91,000 किसानों को मिलेगा लाभ

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में कुल 6 प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिनमें उत्तराखंड में सगंध खेती को बढ़ावा देने के लिए ‘महक क्रांति नीति’ को मंजूरी देना सबसे प्रमुख रहा।

महक क्रांति नीति

उत्तराखंड सरकार ने लंबे समय से चर्चा में रही ‘महक क्रांति नीति’ को अंततः हरी झंडी दे दी है। इस नीति का उद्देश्य सगंध फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देना और उत्तराखंड को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सगंध उत्पादों के लिए एक ब्रांड के रूप में स्थापित करना है। हाल ही में सौगंध पौधा केंद्र द्वारा तिमरु से तैयार किया गया परफ्यूम, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहा था, इस नीति की प्रेरणा का एक प्रमुख आधार रहा।

नीति के पहले चरण में 2026 से 2036 तक ‘सशक्त उत्तराखंड’ के संकल्प को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत 91,000 किसानों को जोड़कर 22,750 हेक्टेयर भूमि पर सगंध खेती शुरू की जाएगी। किसानों को प्रोत्साहन के लिए सब्सिडी का प्रावधान किया गया है, जिसमें एक हेक्टेयर तक की खेती पर 80% और उससे अधिक भूमि पर 50% सब्सिडी दी जाएगी। यह नीति सगंध खेती के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अन्य महत्वपूर्ण कैबिनेट निर्णय

  1. कारागार प्रशासन में सुधार: उत्तराखंड कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग के ढांचे में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके तहत अधीनस्थ कारीगरों के लिए 24 नए पद और सुधारात्मक विंग के लिए 3 पद सृजित किए जाएंगे।

  2. पीएम आवास योजना: रुद्रपुर में पीएम आवास योजना के तहत निर्मित 1,872 EWS मकानों के निर्माण में लगी अतिरिक्त 27.85 करोड़ रुपये की लागत को राज्य सरकार वहन करेगी।

  3. शिक्षा के क्षेत्र में पहल: पीएम ई-विद्या कार्यक्रम के तहत वर्तमान में 5 मुफ्त शैक्षिक टीवी चैनलों का प्रसारण किया जा रहा है। इसे और प्रभावी बनाने के लिए केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (CIET), NCERT, नई दिल्ली और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखंड के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस कार्यक्रम के संचालन के लिए 8 नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई।

उत्तराखंड के लिए नई दिशा

महक क्रांति नीति और अन्य फैसलों के जरिए उत्तराखंड सरकार ने राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। खास तौर पर सगंध खेती को बढ़ावा देने की यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि उत्तराखंड को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान भी दिलाएगी।

उत्तराखण्ड ने रचा इतिहास: ₹5,310 करोड़ का राजस्व अधिशेष

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देहरादून: उत्तराखण्ड ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में ₹5,310 करोड़ का राजस्व अधिशेष हासिल कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट ने इसकी पुष्टि की है। इस उपलब्धि के साथ उत्तराखण्ड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जिन्होंने इस अवधि में राजस्व अधिशेष प्राप्त किया।

सीएजी रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

राजस्व अधिशेष: उत्तराखण्ड ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में ₹5,310 करोड़ का राजस्व अधिशेष हासिल किया।

वित्तीय सुधार: यह उपलब्धि राज्य की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार का प्रतीक है।

आर्थिक सुदृढ़ता: कभी “बिमारू” माने जाने वाले उत्तराखण्ड ने सतर्क वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शी नीतियों के दम पर यह उपलब्धि हासिल की।

सुशासन का परिणाम: सकारात्मक आर्थिक बदलाव और वित्तीय अनुशासन ने राज्य को इस मुकाम तक पहुंचाया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को सुशासन और पारदर्शिता का परिणाम बताते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प से प्रेरित होकर हमने उत्तराखण्ड को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। यह केवल आंकड़ों की जीत नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की आर्थिक आत्मनिर्भरता और समृद्ध भविष्य की ओर एक मजबूत कदम है।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन के साथ उत्तराखण्ड को एक विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह उपलब्धि न केवल राज्य की आर्थिक प्रगति को दर्शाती है, बल्कि उत्तराखण्ड के उज्ज्वल भविष्य की नींव भी रखती है।

उत्तराखण्ड की यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा है कि सही नीतियों और दृढ़ संकल्प के साथ आर्थिक चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है।

उत्तराखंड: पेपर लीक से युवाओं में आक्रोश, परेड ग्राउंड के बाहर सड़क पर डटे बेरोजगार

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देहरादून: उत्तराखंड में स्नातक स्तरीय परीक्षा के पेपर लीक मामले ने युवाओं में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। पेपर के तीन पन्नों के स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद पुलिस जांच में इसकी पुष्टि हो गई है। इस मामले में पुलिस ने एक महिला असिस्टेंट प्रोफेसर को मुख्य आरोपी बनाया है, जिसने कथित तौर पर उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बॉबी पंवार को स्क्रीनशॉट उपलब्ध कराए थे। इस कार्रवाई के खिलाफ बॉबी पंवार ने कड़ा विरोध जताया है।

पेपर लीक के विरोध में बेरोजगार युवाओं का आंदोलन तेज हो गया है। देहरादून के परेड ग्राउंड के बाहर युवाओं ने पूरी रात सड़क पर डेरा डाला और वहीं बिस्तर बिछाकर सोए। देर रात तक भोजन की व्यवस्था भी सड़क पर ही की गई। इस आंदोलन को अभिभावकों का भरपूर समर्थन मिला, जबकि सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों ने बेरोजगार संघ को आर्थिक सहायता और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों में मदद प्रदान की।

यह आंदोलन अब व्यापक रूप लेने की ओर अग्रसर है। पेपर लीक के खिलाफ प्रदेशभर के विभिन्न जिलों में युवा प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं। देहरादून में भी बड़ी संख्या में युवाओं के जुटने की संभावना है, जिससे सरकार के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।

दूसरी ओर, सरकार का दावा है कि यह पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि केवल तीन पेजों के स्क्रीनशॉट ही लीक हुए हैं। भाजपा के मंत्री और विधायक सरकार का बचाव कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सोशल मीडिया पर युवाओं की तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है। युवा नेताओं के बयानों पर कड़ा विरोध दर्ज कर रहे हैं, जिससे सरकार की स्थिति और जटिल हो गई है।

बागेश्वर जिला चिकित्सालय में बच्चे की मृत्यु के मामले में स्वास्थ्य विभाग की सख्त कार्रवाई

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बागेश्वर: बागेश्वर जिला चिकित्सालय में एक बच्चे की मृत्यु के मामले में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर कठोर कार्रवाई की है। जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट और कारण बताओ नोटिस के जवाब के आधार पर दोषी चिकित्सकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त निर्णय लिए गए हैं।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारी संवेदनशीलता के साथ निभाने के निर्देश दिए गए हैं, अन्यथा कठोर कार्रवाई होगी।

प्रमुख कार्रवाइयाँ:

  1. डॉ. तपन शर्मा, प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक: असंवेदनशीलता, एम्बुलेंस व्यवस्था में लापरवाही और प्रशासनिक अक्षमता के आरोप में तत्काल प्रभाव से पद और दायित्वों से मुक्त कर निदेशक कुमाऊं मंडल के साथ संबद्ध किया गया।
  2. ईश्वर सिंह टोलिया और लक्ष्मण कुमार, 108 वाहन चालक: कर्तव्यों के प्रति उदासीनता और असंवेदनशीलता के लिए एक माह तक कार्य से निलंबित करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
  3. महेश कुमार, हिमानी (नर्सिंग अधिकारी) और सूरज सिंह कन्नाल (कक्ष सेवक): कर्तव्यों में लापरवाही और असंवेदनशीलता के लिए कठोर चेतावनी जारी की गई, साथ ही भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का आदेश दिया गया।
  4. डॉ. भूरेन्द्र घटियाल, चिकित्साधिकारी: कर्तव्यों में उदासीनता और संवेदनशीलता की कमी के लिए कठोर चेतावनी जारी की गई।
  5. डॉ. अंकित कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ: बच्चे के प्रति सहानुभूति की कमी और उदासीनता के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए, जिसके लिए प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने का आदेश दिया गया।

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी स्तरों पर कड़े कदम उठाए जाएंगे, ताकि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जा सकें।

उत्तराखंड : निर्दलीय विधायक संजय डोभाल का सीएम आवास कूच, दून पहुंचने से पहले जगह-जगह रोका गया काफिला

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देहरादून: उत्तरकाशी जिले की यमुनोत्री विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक संजय डोभाल के काफिले को मसूरी में पुलिस ने रोक लिया, जिससे वहां तीखी झड़प हो गई। विधायक का दावा है कि वे शांतिपूर्ण धरना देने के लिए देहरादून जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोककर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया। वहीं, मसूरी पुलिस का कहना है कि गलोगी के पास भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के कारण सड़क बंद है, इसलिए सभी वाहनों को रोका जा रहा है। लगभग एक घंटे के ड्रामे के बाद सड़क खुलने पर विधायक देहरादून रवाना हो गए।

विधायक संजय डोभाल ने सरकार पर यमुनोत्री और चारधाम यात्रा की उपेक्षा, आपदा प्रभावित क्षेत्रों की अनदेखी, कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति तथा भ्रष्टाचार के मुद्दों पर 22 सितंबर को देहरादून में सीएम आवास कूच का ऐलान किया था। सोमवार सुबह उत्तरकाशी से समर्थकों के साथ रवाना हुए डोभाल का काफिला मसूरी पहुंचा, जहां छुनाखाला बैरियर पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया।

विधायक ने आरोप लगाया कि यह सब एक सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें देहरादून पहुंचने से रोकने की कोशिश है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि सड़क बंद होने तक किसी को भी आगे नहीं जाने दिया जाएगा। करीब एक घंटे की हलचल के बाद सड़क बहाल होते ही काफिला रवाना हो गया।

विधायक संजय डोभाल ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा, ष्लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हमारा संवैधानिक अधिकार है। लेकिन आज उत्तराखंड को छावनी में बदलकर जगह-जगह आंदोलनकारियों को रोका जा रहा है। इससे साफ पता चलता है कि सरकार घबरा गई है। यदि यही ऊर्जा और संसाधन जनता की मांगें पूरी करने और विकास कार्यों में लगाए जाते, तो आज यह दिन देखने की नौबत न आती। याद रखो, हम रुकने वाले नहीं, हम झुकने वाले नहीं।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यह विरोध-प्रदर्शन से सरकार को डर लग गया है और राज्य को श्लोकतंत्र की हत्याश् करने की साजिश रची जा रही है। डोभाल ने मसूरी पुलिस की कार्रवाई को श्जबरदस्ती रोकनेश् का प्रयास बताते हुए कहा कि लैंडस्लाइड का बहाना बनाकर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

मसूरी पुलिस ने स्पष्ट किया कि गलोगी क्षेत्र में भारी भूस्खलन के कारण मसूरी-देहरादून मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया था। एसएसपी देहरादून के निर्देश पर सभी वाहनों को मसूरी में ही रोका गया था, जिसमें विधायक का काफिला भी शामिल था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ष्यह सुरक्षा का मामला है।

भूस्खलन प्रभावित इलाके में जाने से खतरा हो सकता था। सड़क बहाल होते ही सभी को रवाना कर दिया गया। उत्तराखंड में मानसून के बाद भूस्खलन की घटनाएं आम हैं, और हाल ही में कई सड़कें अवरुद्ध हो चुकी हैं। पुलिस ने विधायक के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्रवाई निष्पक्ष थी और किसी विशेष व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया गया।

संजय डोभाल, जो 2022 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय जीते थे, लगातार पुष्कर सिंह धामी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। पिछले महीने भी उन्होंने उत्तरकाशी प्रशासन के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की बात कही थी। यह घटना राज्य में बढ़ते राजनीतिक तनाव को दर्शाती है, खासकर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में। विपक्षी दल कांग्रेस ने भी पुलिस कार्रवाई की निंदा की है, जबकि भाजपा ने इसे श्सुरक्षा प्रोटोकॉलश् बताया है।

घटना के बाद विधायक देहरादून पहुंच चुके हैं और धरना की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है, जबकि अभियान प्रभावित ग्रामीणों ने विधायक के समर्थन में बयान जारी किए हैं। यह मामला उत्तराखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है।

श्री बदरीनाथ धाम में नवरात्रि पर्व पर देवी उर्वशी पूजा शुरू

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श्री बदरीनाथ धाम

शारदीय नवरात्रि घट स्थापना एवं माता लक्ष्मी, देवी उर्वशी पूजा के साथ दुर्गासप्तशती पाठ शुरू हुआ

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श्री बदरीनाथ धाम: 22 सितंबर। श्री बदरीनाथ धाम में अश्विन शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर आज मंदिर परिसर मे लगे दुर्गापूजा पांडाल में अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना के साथ ही माता लक्ष्मी तथा देवी उर्वशी पूजन और दुर्गासप्तशती पाठ शुरू हो गया जोकि महानवमी तक चलेगा। इस अवसर पर मंदिर समिति पदाधिकारी अधिकारी कर्मचारी पूजा में शामिल हुए।बड़ी संख्या में तीर्थयात्री कलश स्थापना तथा पूजा अर्चना के समय दर्शन को पहुंचे।

श्री बदरीनाथ मंदिर परिसर में प्रत्येक वर्ष नवरात्रि के अवसर पर नौ दिनों तक माता दुर्गा, माता लक्ष्मी तथा देवी उर्वशी की विशेष पूजा-अर्चना होती है। श्री बदरीनाथ धाम मे देवी उर्वशी का शक्तिपीठ स्थित है मान्यता है कि भगवान नारायण ने मेनका के दंभ को समाप्त करने के लिए उर्वशी को प्रकट किया तब से उर्वशी श्री बदरीनाथ धाम में निवास करती है बामणी गांव में माता नंदा मंदिर के अलावा देवी उर्वशी का भी मंदिर है।
नवरात्र के दौरान श्री बदरीनाथ मंदिर परिसर में माता दुर्गा के नौ रूपों के अलावा देवी उर्वशी की भी पूजा होती है।

बीते कल रविवार शाम को श्री बदरीनाथ मंदिर परिसर में नवरात्र पूजा पांडाल बनाया गया सुबह को साज-सज्जा के साथ ही माता दुर्गा के नौ रूपों का स्मरण करते हुए कलश अर्थात घट की स्थापना की गयी इसके साथ ही नौ दिनों तक माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा तथा साथ ही माता लक्ष्मी तथा देवी उर्वशी की पूजा-अर्चना शुरू हुई।

*अपने संदेश में श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने नवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी है।वहीं बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण सहित मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने नवरात्रि शुभारंभ पर सभी तीर्थयात्रियों को बधाई दी है।*
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श्री बदरीनाथ धाम में नवरात्रि पूजा का शुभारंभ आज प्रातः कलश ( घट) स्थापना से हुआ पवित्र अलकनंदा गंगा से जल कलश मंदिर परिसर लाया गया जहां आचार्यगणों विजय प्रसाद पाण्डेय आशीष उनियाल, राजेंद्र तिवारी ने पूजा-अर्चना संपन्न कर विधि-विधान से घटस्थापित किया तथा पूजा अर्चना शुरू की।
इस अवसर पर बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती बदरीनाथ मंदिर परिसर में माता दुर्गा पूजा उर्वशी पूजन में विशेष रूप से मौजूद रहे उन्होंने कहा कि नवरात्रि के पर्व का श्री बदरीनाथ धाम में विशेष महत्व है माता लक्ष्मी तथा देवी उर्वशी का निवास श्री बदरीनाथ धाम है प्रत्येक वर्ष मंदिर परिसर में नवरात्रि पूजा धूमधाम से आयोजित होती है।

नवरात्रि घटस्थापना पूजा में रावल अमरनाथ नंबूदरी विशिष्ट अतिथि अनिल थपलियाल, नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी, धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल वेदपाठी रविंद्र भट्ट मीडिया प्रभारी डा.हरीश गौड़, आदि मौजूद रहे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी पूजा में शामिल हुए।

उत्तराखंड: UKSSSC पेपर लीक कांड, सड़कों पर उतरे हजारों युवा

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देहरादून: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में पेपर लीक का मामला तूल पकड़ गया है। रविवार, 21 सितंबर को आयोजित परीक्षा के कुछ प्रश्नों के स्क्रीनशॉट्स सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हजारों युवा सड़कों पर उतर आए। देहरादून से लेकर हरिद्वार और कुमाऊं क्षेत्र में प्रदर्शन हुए, जिसमें गुस्साए युवाओं ने सड़कें जाम कर दीं और सचिवालय कूच किया। पुलिस ने जगह-जगह प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिससे तनाव बढ़ गया।

पेपर लीक ने मचाया हड़कंप

परीक्षा से एक दिन पहले, 20 सितंबर को उत्तराखंड STF और SOG की संयुक्त टीम ने कुख्यात पेपर लीक मास्टरमाइंड हाकम सिंह और उसके एक साथी को गिरफ्तार किया। इसके बावजूद, रविवार को सुबह 11 बजे शुरू हुई परीक्षा के आधे घंटे बाद ही, 11:35 बजे, प्रश्न पत्र के तीन स्क्रीनशॉट्स सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने दावा किया कि हरिद्वार के एक परीक्षा केंद्र से पेपर लीक हुआ, जिससे परीक्षा की गोपनीयता भंग हुई।

संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल ने देहरादून के प्रेस क्लब में पत्रकारों से कहा, “वायरल प्रश्नों का मिलान परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से किया गया, और कई सवाल एकसमान पाए गए। यह साफ है कि पेपर लीक हुआ है।” उन्होंने हरिद्वार के एक केंद्र को लीक का स्रोत बताया और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की।

सचिवालय कूच और सड़क जाम

सोमवार को देहरादून के परेड मैदान में हजारों युवा एकत्र हुए और आंदोलन की रणनीति बनाकर सचिवालय की ओर कूच किया। प्रदर्शनकारी पूछ रहे हैं कि बार-बार पेपर लीक की घटनाएं क्यों हो रही हैं और आयोग इसकी गोपनीयता सुनिश्चित करने में विफल क्यों है। देहरादून, हरिद्वार और कुमाऊं क्षेत्र में सड़क जाम और नारेबाजी से माहौल तनावपूर्ण रहा। भारी पुलिस बल तैनात किया गया, और कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों को रोका गया।

पहले भी मांगी थी स्थगन

राम कंडवाल ने बताया कि उत्तराखंड हाल ही में आपदा से प्रभावित रहा है, जिसके चलते संघ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आयोग अध्यक्ष से परीक्षा स्थगित करने की मांग की थी। उन्होंने कहा, “हमारी अपील को अनसुना किया गया, और अब पेपर लीक ने साबित कर दिया कि सिस्टम में खामियां हैं।” युवाओं ने आयोग की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस और आयोग की कार्रवाई

पेपर लीक की शिकायत के बाद यूकेएसएसएससी ने देहरादून एसएसपी अजय सिंह को प्रार्थना पत्र सौंपा, जिसके आधार पर विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई। प्रारंभिक जांच में हरिद्वार के एक केंद्र से प्रश्न पत्र की तस्वीरें लीक होने की पुष्टि हुई है। एसटीएफ ने हाकम सिंह को पहले ही हिरासत में ले लिया था, और अब अन्य संदिग्धों की तलाश में छापेमारी चल रही है।

परीक्षा रद्द करने की मांग

कांग्रेस ने धामी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बार-बार पेपर लीक से भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता खतरे में है। 2022 के यूकेएसएसएससी पेपर लीक कांड के बाद भी सुधार नहीं हुआ। प्रदर्शनकारी युवा परीक्षा रद्द करने और नई तारीख की घोषणा की मांग कर रहे हैं।

आयोग ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने तक सभी तथ्यों को सामने लाया जाएगा। एसएसपी अजय सिंह ने कहा, “दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। जांच में पारदर्शिता बरती जाएगी।” इस बीच, युवाओं का आंदोलन तेज होने से सरकार पर दबाव बढ़ गया है। यह मामला उत्तराखंड में बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया की खामियों को फिर से उजागर करता है।

पाकिस्तानी वायुसेना का अपने ही गांव पर हमला, घाटी में 30 से अधिक नागरिक मारे गए

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इस्लामाबाद : पाकिस्तान की खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में तिराह घाटी के मत्रे दारा गांव पर रविवार देर रात पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने बमबारी की, जिसमें कम से कम 30 नागरिकों की मौत हो गई। मरने वालों में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय मीडिया और बुद्धिजीवी स्रोतों के अनुसार, यह हमला सुबह करीब 2 बजे किया गया, जब परिवार सो रहे थे। पाकिस्तानी सेना ने हमले से इनकार करते हुए इसे आतंकी समूहों के छिपे हथियारों के विस्फोट का नतीजा बताया है, लेकिन प्रत्यक्षदर्शी इसे हवाई हमला बता रहे हैं।

बमबारी में तबाही

एनडीटीवी और न्यूज18 जैसी भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया कि पाकिस्तानी वायुसेना के जेएफ-17 लड़ाकू विमानों ने मत्रे दारा गांव पर आठ चीनी मूल के एलएस-6 प्रिसिजन गाइडेड बम गिराए। हमले से घनी आबादी वाले इलाकों में घर ध्वस्त हो गए, पशुधन नष्ट हो गया और शवों का ढेर लग गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में मलबे में दबे शवों, खासकर बच्चों के, की भयावह तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। बचाव दल अब भी मलबे से शव निकालने और घायलों को सुरक्षित करने में जुटे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमला इतना जोरदार था कि आसपास के इलाकों में धमाकों की गूंज सुनी गई। एक ग्रामीण ने कहा, “हम सो रहे थे जब आसमान से मौत बरसी। यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि हवाई हमला था।” घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है, जहां चिकित्सकों ने स्थिति को गंभीर बताया है।

सेना का इनकार

पाकिस्तानी सेना ने हमले की जिम्मेदारी से इनकार किया है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि मत्रे दारा में “खारिज आतंकवादियों” द्वारा छिपाए गए बड़े पैमाने पर विस्फोटकों के गोदाम में धमाका हुआ, जिससे आसपास की इमारतें ढह गईं और नागरिक हताहत हुए। हालांकि, खुफिया सूत्रों और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ऑपरेशन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) जैसे उग्रवादी समूहों के खिलाफ था, जो अफगान सीमा के पास सक्रिय हैं। तिराह घाटी लंबे समय से संघर्ष का केंद्र रही है, जहां पाकिस्तानी सेना ने कई अभियान चलाए हैं।

 जिरगा में विरोध का फैसला

हमले के बाद तिराह के अकाखेल कबीले ने जिरगा (जनजातीय परिषद) बुलाई, जिसमें महिलाओं के शवों को दफनाने और पुरुषों व बच्चों के शवों को कोर कमांडर के घर के बाहर प्रदर्शन के लिए रखने का फैसला लिया गया। कबीले ने इसे “युद्ध अपराध” करार देते हुए पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र लंबे समय से अशांत रहा है, जहां सरकारी नियंत्रण कमजोर है और उग्रवादियों की सक्रियता बढ़ रही है।

अंतरराष्ट्रीय नजरें

यह घटना पाकिस्तान की आंतरिक अस्थिरता को उजागर करती है, जहां सैन्य अभियानों में नागरिक हताहत आम हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने ऐसी घटनाओं पर चिंता जताई है। भारत ने भी इस पर टिप्पणी की है, इसे पाकिस्तान की “आतंकवाद से लड़ाई” की विफलता का उदाहरण बताते हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है, खासकर अफगानिस्तान सीमा पर।

पाकिस्तानी सरकार ने अभी तक आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। स्थानीय मीडिया ने ड्रोन हमलों के बढ़ते इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। यह घटना न केवल पाकिस्तान की आंतरिक कलह को दर्शाती है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।