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उत्तराखंड: सबसे पहले महिला प्रोफेसर के पास पहुंचे थे स्क्रीनशॉट, खालिद ने किए थे व्हाट्सएप

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देहरादून : उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय पदों की लिखित परीक्षा में पेपर लीक का दावा सोशल मीडिया पर वायरल होने से हड़कंप मच गया। 21 सितंबर को आयोजित परीक्षा के कुछ प्रश्नों के स्क्रीनशॉट्स वायरल होने के बाद आयोग ने देहरादून एसएसपी अजय सिंह को प्रार्थना पत्र सौंपा, जिसके निर्देश पर विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई। देर शाम एसएसपी अजय सिंह और आयोग अध्यक्ष ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर जांच के शुरुआती नतीजे साझा किए।

एसआईटी की प्रारंभिक जांच में किसी संगठित गिरोह या पेपर लीकिंग गैंग की संलिप्तता नहीं पाई गई है। पुलिस के अनुसार, एक परीक्षा केंद्र से किसी व्यक्ति ने कुछ प्रश्नों की फोटो खींचकर भेजी थी। आरोपियों की पहचान हो चुकी है और उनके खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए गए हैं। गिरफ्तारी के लिए टीमें रवाना हो चुकी हैं। एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि परीक्षा सुबह 11 बजे शुरू होने से पहले किसी जिले से लीक की कोई सूचना नहीं मिली। पेपर खत्म होने के बाद करीब 1:30 बजे सोशल मीडिया पर 11:35 बजे के स्क्रीनशॉट्स वायरल होने की जानकारी मिली।

महिला प्रोफेसर के फोन पर पहुंची फोटो

जांच में पता चला कि प्रश्न पत्र की फोटो सबसे पहले टिहरी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात एक महिला के पास पहुंची थी। महिला ने न केवल फोटो प्राप्त की, बल्कि उन प्रश्नों के उत्तर भी भेजे। पूछताछ में महिला ने खुलासा किया कि 2018 में जब वह ऋषिकेश नगर निगम में टैक्स इंस्पेक्टर थीं, तब उनकी मुलाकात हरिद्वार निवासी खालिद मलिक से हुई थी। खालिद CPWD में संविदा पर जूनियर इंजीनियर (JE) के रूप में ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट पर तैनात था।

महिला के अनुसार, 21 सितंबर को खालिद ने अपने नंबर से प्रश्न पत्र की फोटो भेजी और खुद मीटिंग में व्यस्त होने की बात कही। इसके अलावा, खालिद की बहन बनकर एक युवती ने महिला से परीक्षा से जुड़े प्रश्नों के उत्तर मांगे। महिला ने फोटो के जरिए उत्तर भेजे और स्क्रीनशॉट्स अपने मोबाइल पर सेव कर लिए। बाद में उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस को देने के लिए प्रार्थना पत्र लिखा और बॉबी पंवार को सूचित किया, लेकिन बॉबी ने स्क्रीनशॉट्स मांगते हुए पुलिस को बताने से रोका।

बॉबी पंवार पर सनसनी फैलाने का आरोप

एसएसपी अजय सिंह ने स्पष्ट किया कि बॉबी पंवार ने बिना किसी सक्षम अधिकारी को सूचित किए या तथ्यों की पुष्टि किए परीक्षा प्रणाली को सनसनीखेज बनाने के इरादे से स्क्रीनशॉट्स सोशल मीडिया पर वायरल किए। कुछ अन्य लोगों ने भी इन्हें शेयर कर सरकार और सिस्टम के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट कीं। रायपुर थाने में उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं रोकथाम के उपाय) अध्यादेश 2023 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

एसएसपी ने कहा, “महिला से पूछताछ के आधार पर आरोपी और उनके संपर्क में रहे छात्रों की जांच चल रही है। साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह सब परीक्षा प्रणाली को बदनाम करने की साजिश थी।” आयोग अध्यक्ष ने बताया कि सभी केंद्रों पर मोबाइल जैमर्स लगाए गए थे, फिर भी लीक कैसे हुआ, इसकी आंतरिक जांच भी जारी है।

कांग्रेस का सरकार पर हमला

विपक्षी कांग्रेस ने पुष्कर सिंह धामी सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि बार-बार हो रहे लीक मामलों से भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। पूर्व में 2022 के यूकेएसएसएससी लीक कांड में भी बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुई थीं। इस घटना से अभ्यर्थियों में आक्रोश है और परीक्षा रद्द करने की मांग तेज हो गई है।

पुलिस ने आश्वासन दिया है कि पूरी जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। अभ्यर्थी संगठनों ने आयोग से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है, जबकि एसआईटी जांच को गति देने के निर्देश दिए गए हैं। यह मामला उत्तराखंड की भर्ती प्रक्रिया पर एक बार फिर गहरा सवाल खड़ा कर रहा है।

आज जीएसटी की नई दरें लागू, देखें क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा?

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नई दिल्ली : शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर देशभर में मां दुर्गा की आराधना के साथ एक और खुशहाल शुरुआत हो रही है, जीएसटी बचत उत्सव! आज से लागू हो चुके जीएसटी रिफॉर्म्स से रोजमर्रा की जरूरतों जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स, एसी, फ्रिज, कार-बाइक्स और कई अन्य वस्तुओं के दामों में भारी कमी आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में इसकी घोषणा की थी, जबकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही पुष्टि कर दी थी कि 22 सितंबर से ये सुधार पूरे देश में लागू हो गई हैं।

जीएसटी 2.0 के तहत अब केवल दो मुख्य स्लैब रह गए हैं – 5% और 18% – जबकि लग्जरी और सिन गुड्स पर 40% तक की दर लागू होगी। इससे आम आदमी को सालाना 2.5 लाख करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। नवरात्रि, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों से पहले यह कदम उपभोक्ताओं के लिए वरदान साबित होगा, क्योंकि खाद्य पदार्थों से लेकर घरेलू सामान तक सब सस्ता हो गया है। हालांकि, कुछ विलासिता की वस्तुएं महंगी भी हुई हैं।

जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक के निर्णयों के आधार पर ये बदलाव लागू हुए हैं, जो कर संरचना को सरल बनाने, उल्टे कर ढांचे को ठीक करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हैं। आइए, सिलसिलेवार देखें कि किन वस्तुओं के दाम कम हुए और किनके बढ़े।

जीरो जीएसटी वाली वस्तुएं

मोदी सरकार ने कई आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी को पूरी तरह शून्य कर दिया है, खासकर खाद्य और दैनिक उपयोग की चीजों पर। इससे गरीब और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी।

सामान पहले जीएसटी दरें वर्तमान दरें
पिज्जा ब्रेड, खाखरा, चपाती, रोटी 5% जीरो
इरेजर 5% जीरो
मैप, ग्लोब, चार्ट 12% जीरो
प्रैक्टिस बुक, नोटबुक 12% और 5% जीरो
हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस 18% जीरो
दुर्लभ औषधियां 5% या 12% जीरो

खाद्य सामग्री: रसोई का खर्च 50% तक कम

खाने-पीने की चीजों पर जीएसटी दरों में भारी कटौती से घरेलू बजट में राहत।

सामान पहले जीएसटी दरें वर्तमान दरें
वनस्पति वसा/ तेल 12% 5%
मोम 18% 5%
मांस, मछली, फूड प्रोडक्ट 12% 5%
डेयरी उत्पाद (मक्खन, घी, पनीर) 12% 5%
सोया दूध 12% 5%
चीनी 12% से 18% 5%
चॉकलेट, कोको पाउडर 18% 5%
पास्ता, कॉर्न फ्लेक्स, नूडल्स, बिस्किट 12% 5%
जैम, जेली, मुरब्बा, मेवे, सूखे मेवे 12% 5%
फलों का रस, नारियल पानी 12% 5%
पौधे-आधारित दूध, फलों के गूदे से बनी ड्रिंक्स 12% और 18% 5%

दैनिक उपयोग के सामान

व्यक्तिगत देखभाल और घरेलू वस्तुओं पर दरें घटकर 5% पर आ गईं।

सामान पहले जीएसटी दरें वर्तमान दरें
हेयर ऑयल, टूथपेस्ट, टैल्कम पाउडर 18% 5%
टॉयलेट सोप 18% 5%
शेविंग क्रीम, लोशन, आफ्टर शेव लोशन 18% 5%
सामान्य टेबलवेयर/किचनवेयर 12% 5%
मोमबत्तियां 12% 5%
छाते और संबंधित सामान 12% 5%
सिलाई और सुइयां 12% 5%
सिलाई मशीनें और संबंधित पुर्जे 12% 5%
कपास, जूट से बने हैंडबैग 12% 5%
नवजात बच्चों के लिए नैपकिन और डायपर 12% 5%
बांस, बेंत से बने फर्नीचर 12% 5%
दूध के डिब्बे 12% 5%
पेंसिल, शार्पनर, चॉक 12% 5%
ब्यूटी पार्लर सेवा 18% 5%
जॉब वर्क, छाता, छपाई, चमड़ा 12% 5%
7,500 से कम होटल का किराया 12% 5%
मूवी टिकट 100 रुपये से कम 12% 5%

इलेक्ट्रॉनिक्स: एसी-टीवी सस्ते, लेकिन सावधानी बरतें

उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स पर 28% से 18% की कटौती से त्योहारी खरीदारी में उछाल की उम्मीद।

सामान पहले जीएसटी दरें वर्तमान दरें
एयर कंडीशनर 28% 18%
बर्तन धोने की मशीनें 28% 18%
टीवी (एलईडी, एलसीडी), मॉनिटर, प्रोजेक्टर 28% 18%

कृषि क्षेत्र: किसानों के लिए राहत पैकेज

कृषि उपकरणों पर दरें घटकर 5% पर सेटल।

सामान पहले जीएसटी दरें वर्तमान दरें
ट्रैक्टर (1800 CC से अधिक क्षमता वाले) 12% 5%
पिछली ट्रैक्टर टायर/ट्यूब 18% 5%
मिट्टी/कटाई/थ्रेसिंग के लिए मशीनरी 12% 5%
कम्पोस्टिंग मशीनें 12% 5%
स्प्रिंकलर/ड्रिप सिंचाई/लॉन/स्पोर्टस रोलर्स 12% 5%
जैव-कीटनाशक, सूक्ष्म पोषक तत्व 12% 5%
पंप 28% 5%
ट्रैक्टरों के लिए हाइड्रोलिक पंप 18% 5%

स्वास्थ्य क्षेत्र: दवाओं और उपकरण सस्ते

चिकित्सा सेवाओं पर छूट से हेल्थकेयर अधिक सुलभ।

सामान पहले जीएसटी दरें वर्तमान दरें
थर्मामीटर, डायग्नोस्टिक किट 12% और 18% 5%
रक्त ग्लूकोज मॉनिटर 12% 5%
मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन और हाइड्रोजन पेरोक्साइड 12% 5%
चश्मा 12% 5%
मेडिकल/सर्जिकल रबर के दस्ताने 12% 5%
कई दवाएं 12% 5% या जीरो

ऑटो सेक्टर: कार-बाइक सस्ती, बड़ी गाड़ियां महंगी

छोटी वाहनों पर राहत, एसयूवी पर बढ़ोतरी।

सामान पहले जीएसटी दरें वर्तमान दरें
टायर 28% 18%
मोटर वाहन (छोटी कारें) 29% (28% जीएसटी + 1% सेस) 18%
मोटरसाइकिलें 350 CC से छोटी 28% 18%
बड़ी कार व एसयूवी 50% (28% जीएसटी + 22% सेस) 40%
रोइंग बोट/डोंगी 28% 18%
साइकिलें और गैर मोटर-तिपहिया वाहन 12% 5%
पेट्रोल और पेट्रोल हाइब्रिड कारें 28% 18%
डीजल और डीजल हाइब्रिड कारें 28% 18%
तिपहिया वाहन 28% 18%
मोटरसाइकिल (350 सीसी तक) 28% 18%
माल परिवहन के लिए गाड़ियां 28% 18%
छोटी कार 29% (28% जीएसटी + 1% सेस) 18%
मिडिल साइज कार 43% (28% जीएसटी + 15% सेस) 40%

कपड़े: सस्ते परिधान, महंगे डिजाइनर

आम कपड़ों पर 5%, महंगे पर 18%।

सामान पहले जीएसटी दरें वर्तमान दरें
सिंथेटिक धागे, बिना बुने कपड़े, सिलाई धागा, स्टेपल फाइबर 12% और 18% 5%
परिधान, रेडिमेड (2,500 से अधिक नहीं) 12% 5%
परिधान, रेडिमेड (2,500 से अधिक) 12% 18%

ईंट-पत्थर सस्ते

निर्माण सामग्री में मिश्रित प्रभाव।

सामान पहले जीएसटी दरें वर्तमान दरें
टाइल्स, ईंटें, पत्थर जड़ाने से संबंधित काम 12% 5%
पोर्टलैंड, स्लैग, हाइड्रोलिक सीमेंट 28% 18%

स्वास्थ्य के लिए सख्ती

ये वस्तुएं अब 40% तक महंगी।

सामान पहले जीएसटी दरें वर्तमान दरें
सिगार, सिगरेट, तंबाकू उत्पाद 28% 40%
बीड़ी (हाथ से बनी) 28% 18%
कार्बोनेटेड पेय, स्वादयुक्त पेय, कैफीनयुक्त पेय 28% 40%
कैसिनो, रेस क्लब, सट्टेबाजी, जुआ 28% 40%
क्रिकेट मैच टिकट 12% 18%

नवरात्रि के दौरान पूजा सामग्री, मूर्तियां और दैनिक खरीदारी सस्ती होने से उत्सव की रौनक बढ़ेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “ये सुधार न केवल जेब हल्की करेंगे, बल्कि आत्मनिर्भर भारत को मजबूत बनाएंगे।” वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये बदलाव 22 सितंबर से ही लागू हैं, और ई-वे बिल जैसी प्रक्रियाओं में कोई बदलाव नहीं।

उपभोक्ता सतर्क रहें: पुराने स्टॉक पर नई दरें लागू होंगी, लेकिन पहले जारी ई-वे बिल वैध रहेंगे। यह जीएसटी क्रांति न केवल अर्थव्यवस्था को गति देगी, बल्कि त्योहारों को और यादगार बनाएगी। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक जीएसटी पोर्टल देखें।

Uttarakhand Breaking: देहरादून में BNS की धारा 163 लागू, पांच या उससे ज्यादा लोगों के जुटने पर रोक

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देहरादून : देहरादून जिले में चल रहे धरना-प्रदर्शनों, यातायात अवरोधों और विभिन्न स्थानों पर हाल ही में आई आपदा की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने शांति और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई प्रमुख स्थानों पर धारा 163 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) लागू की है।

यह आदेश 22 सितंबर से प्रभावी है, जिसका उद्देश्य आम जनता को होने वाली असुविधा को रोकना और कानून व्यवस्था बनाए रखना है।

  • घण्टाघर
  • चकराता रोड
  • गांधी पार्क
  • सचिवालय रोड
    न्यू कैंट रोड
  • सहस्त्रधारा रोड
  • नेशविला रोड
  • राजपुर रोड
  • ई.सी. रोड
  • सहारनपुर रोड
  • परेड ग्राउंड
  • सर्वे चौक/डीएवी कॉलेज रोड

इन स्थानों और इनके 500 मीटर के दायरे में निम्नलिखित गतिविधियां पूर्ण रूप से प्रतिबंधित हैं:

  • सार्वजनिक सभाएं, जुलूस या प्रदर्शन।
    पांच या अधिक व्यक्तियों का समूह के रूप में एकत्रित होना।
  • बिना लिखित अनुमति के लाउडस्पीकर, डीजे या किसी ध्वनि विस्तारक यंत्र का उपयोग।
  • हथियार, लाठी-डंडे, औजार या कोई आपत्तिजनक सामग्री लेकर चलना।
  • प्रशासन ने कहा है कि जिले में हाल ही में आपदा से उत्पन्न चुनौतियों और धरना-प्रदर्शनों के कारण होने वाली असुविधाओं को देखते हुए ये कदम आवश्यक हैं।

इन आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ धारा 163 बीएनएसएस के प्रावधानों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने निवासियों और संगठनों से सहयोग करने और इन आदेशों का पालन करने की अपील की है।

श्री बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्म कपाल में सर्व पितृ आमावस्या पर पितृ पक्ष समापन

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श्री बदरीनाथ धाम
ब्रह्मकपाल में सर्वपितृ अमावस्या के साथ ही श्राद्ध पक्ष का हुआ समापन

• बड़ी संख्या में तीर्थयात्री श्री बदरीनाथ धाम दर्शन को पहुंचे ब्रह्मकपाल में किया पूवर्जों का स्मरण एवं श्राद्ध तर्पण

श्री बदरीनाथ धाम: 21 सितंबर। श्री बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्म कपाल में श्राद्ध पक्ष के आखिरी दिन बड़ी संख्या में देश विदेश से श्री बदरीनाथ धाम पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों का श्राद्ध तर्पण किया। सभी पितृजनों को स्मरण कर श्रद्धांजलि दी गयी इसी के साथ 7 सितंबर से शुरू हुए पितृ पक्ष का आज सर्व पितृ आमावस्या पर समापन हो गया है।

श्री बदरीनाथ -केदारनाथ मंदिर समिति मीडिया प्रभारी डा.हरीश गौड़ ने बदरीनाथ धाम से बताया कि श्री बदरीनाथ धाम में पितृपक्ष के दौरान 48 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किये, वही कपाट खुलने से अभी श्री बदरीनाथ धाम में 1362278 श्रद्धालु दर्शन कर चुके है सोमवार 22 सितंबर से बीकेटीसी द्वारा श्री बदरीनाथ धाम में शारदीय नवरात्रि पर्व मनाया जायेगा मंदिर परिसर में घट स्थापना के साथ नौ दिन महानवमी 2 अक्टूबर तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना संपन्न होगी।

ब्रह्मकपाल में आज सर्व पितृ आमावस्या पर चहल पहल रही लोगों ने पवित्र अलकनंदा स्थित गांधीघाट पर स्नान किया तथा पित्रों के श्राद्ध तर्पण के साथ सर्व पितृ आमावस्या पर पित्रों का स्मरण किया ब्रह्म कपाल के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित वीरेंद्र हटवाल ने बताया कि सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व है इस दिन ब्रह्मकपाल ज्ञात अज्ञात सभी पितृ जनों का श्राद्ध किया गया जिनकी श्राद्ध तिथि पता नही है अथवा यह भी ज्ञात न हो कि अमुक की मृत्यु किस तिथि पर हुई इसे महालय श्राद्ध भी कहा जाता है सर्वपितृ अमावस्या के दिन से सभी पितृ इस भूलोक को छोड़कर पुनः सद्गति प्राप्त कर परलोक को चले जाते है।

आज इस अवसर पर ब्रह्मकपाल में तीर्थ पुरोहित वीरेंद्र हटवाल, संजय हटवाल, सुधीर हटवाल, अरविंद हट

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वाल, प्रमोद हटवाल, श्री बदरीश पंडा पंचायत अध्यक्ष प्रवीण ध्यानी, उपाध्यक्ष सुधाकर बाबुलकर, सचिव रजनीश मोतीवाल, कोषाध्यक्ष अशोक टोडरिया तीर्थ पुरोहित रमेश रैवानी,सुब्रांशु जोशी प्रियांशु बाबुलकर आदि मौजूद रहे।

उत्तराखंड में फिर पेपर लीक: बॉबी पंवार और बेरोजगार संघ ने सोशल मीडिया में शेयर किए स्क्रीनशॉट

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देहरादून: उत्तराखंड में एक बार फिर पेपर लीक की घटना ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय परीक्षा के दौरान पेपर लीक होने का दावा सामने आया है। इस मामले में विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने शनिवार को कुख्यात नकल माफिया हाकम सिंह रावत और उनके सहयोगी पंकज गौड़ को देहरादून से गिरफ्तार किया था। लेकिन, गिरफ्तारी के बावजूद पेपर लीक की खबर ने हड़कंप मचा दिया है।

बॉबी पंवार का सनसनीखेज दावा

उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष और बेरोजगार संघ के पूर्व अध्यक्ष बॉबी पंवार ने अपने फेसबुक हैंडल पर दावा किया है कि UKSSSC की स्नातक स्तरीय परीक्षा का पेपर शुरू होने के कुछ ही देर बाद बाहर आ गया था। उन्होंने सरकार और आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, “परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर हर बार पेपर लीक कैसे हो जाता है? सरकार और प्रशासन इस पर जवाब दें।” पंवार ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित लीक पेपर की कॉपी का हवाला देते हुए तत्काल जांच की मांग की है।

बेरोजगार संघ की चेतावनी थी पहले से

उत्तराखंड बेरोजगार संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम कंडवाल ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने दावा किया कि बेरोजगार संघ ने पहले ही पुलिस और प्रशासन को पेपर लीक की आशंकाओं से अवगत कराया था। सवाल यह है कि इतनी सतर्कता के बावजूद परीक्षा शुरू होने के कुछ ही देर बाद पेपर बाहर कैसे आ गया? यह सरकार और आयोग की नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने पेपर लीक के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की।

पेपर लीक का पुराना इतिहास

उत्तराखंड में पेपर लीक कोई नई बात नहीं है। हाकम सिंह रावत पहले भी कई भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों में शामिल रहा है। 2021 की स्नातक स्तरीय परीक्षा, वन दरोगा भर्ती और सचिवालय रक्षक भर्ती जैसे मामलों में उसका नाम सामने आ चुका है। जमानत पर रिहा होने के बाद भी उसकी गतिविधियां रुकी नहीं थीं। एसटीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हाकम का नेटवर्क प्रिंटिंग प्रेस कर्मचारियों और कुछ अधिकारियों तक फैला हुआ था। उसकी गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में और खुलासे होने की उम्मीद है।”

सरकार पर दबाव, अभ्यर्थियों में आक्रोश

पेपर लीक की खबर से अभ्यर्थियों में भारी रोष है। देहरादून के एक परीक्षा केंद्र के बाहर अभ्यर्थी राहुल ने कहा, “हम रात-दिन मेहनत करते हैं, लेकिन नकल माफिया और प्रशासन की लापरवाही हमारा भविष्य बर्बाद कर रही है।” सोशल मीडिया पर भी #PaperLeak और #UKSSSC जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही पेपर लीक के मामलों में जीरो टॉलरेंस की बात कही थी। अब देखना यह है कि इस ताजा मामले में सरकार और पुलिस क्या कदम उठाती है। एसटीएफ ने जांच तेज कर दी है और लीक के स्रोत का पता लगाने के लिए डिजिटल और फिजिकल साक्ष्यों की पड़ताल शुरू कर दी है।

बड़ा सवाल…हाकम किसके भरोसे दे रहा था नौकरी का लालच?

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देहरादून: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय परीक्षा के ठीक एक दिन पहले कुख्यात नकल माफिया हाकम सिंह रावत एक बार फिर सलाखों के पीछे पहुंच गया। विशेष कार्य बल (STF) और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने शनिवार को देहरादून से हाकम को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी न केवल नकल गैंग के नेटवर्क पर फिर से पुलिस का शिकंजा कसने का संकेत देती है, बल्कि कई सवाल भी खड़े करती है, आखिर हाकम किसके भरोसे युवाओं को नौकरी का झांसा दे रहा था? उसके संपर्कों की जड़ें कहां-कहां फैली हुई हैं?

हाकम सिंह रावत उत्तराखंड के सबसे बड़े पेपर लीक कांडों का मास्टरमाइंड माना जाता है। 2021 की स्नातक स्तरीय परीक्षा, वन दरोगा भर्ती, सचिवालय रक्षक और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षाओं में धांधली के कई मामले उसके नाम से जुड़े हैं। 2022 में हिमाचल बॉर्डर पर गिरफ्तार होने के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत पाने के बावजूद, उसकी गतिविधियां रुकी नहीं थीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जमानत पर रहते हुए भी हाकम सक्रिय था और युवाओं को नौकरी के नाम पर ठग रहा था।

दोहरी रणनीति: पेपर लीक से लेकर सेटिंग तक

हाकम सिंह की गिरफ्तारी से पहले भी उसके दो तरीकों से नौकरी का लालच देने के मामले सामने आ चुके हैं। पहला, प्रकाशकों और प्रिंटिंग कंपनियों के साथ मिलकर पेपर लीक कराना। दूसरा, विभिन्न विभागों के अधिकारियों से सांठ-गांठ करके सीधी नौकरी लगवाने का दावा। एसटीएफ के अनुसार, हाकम ने सांकरी (उत्तरकाशी) में अपने गेस्ट हाउस को नकल का अड्डा बनाया था, जहां अभ्यर्थियों को ठहराकर पेपर लीक करवाया जाता था। इसके अलावा, उसके नेटवर्क में प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारी, आयोग के अधिकारी और मध्यस्थ शामिल थे।

पिछले दो वर्षों में एसटीएफ ने हाकम केस में 56 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें सैयद सादिक मूसा, योगेश्वर राव, शशिकांत, बलवंत रौतेला जैसे नाम प्रमुख हैं। गैंगस्टर एक्ट के तहत 23 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, और छह लोगों की संपत्ति अटैच की गई है। लेकिन जमानत के बाद हाकम की फिर से सक्रियता ने सवाल उठाए हैं—क्या उसने अधिकारियों तक अपनी पैठ दोबारा बना ली? क्या प्रेस कर्मचारियों के जरिए पेपर लीक का खतरा अभी भी मंडरा रहा है?

बड़े सवाल: हाकम के ‘सहयोगी’ कौन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाकम सिंह युवाओं को किसके भरोसे नौकरी का आश्वासन दे रहा था? क्या उसके संपर्क में आयोग के उच्च अधिकारी, विभागीय अफसर या बाहरी मध्यस्थ शामिल हैं? STF को अब हाकम के फोन रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और मीटिंग्स की गहन जांच करनी होगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हाकम का पुराना नेटवर्क बहुत विस्तृत था। जमानत के बाद भी उसके संपर्क बरकरार थे। पूछताछ में कई बड़े नाम उभर सकते हैं।

युवाओं में आक्रोश है। देहरादून में परीक्षा केंद्र के बाहर एक अभ्यर्थी ने कहा, “हम मेहनत करते हैं, लेकिन ऐसे माफिया सब बर्बाद कर देते हैं। हाकम जैसे लोग नौकरी के नाम पर लाखों ठग लेते हैं।” मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले भी साफ कहा था कि पेपर लीक के किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

नकल गैंग पर लगाम: पुलिस की सतर्कता

हाकम की गिरफ्तारी के साथ ही एसटीएफ और एसओजी ने नकल गैंग की जड़ों तक पहुंचने का अभियान तेज कर दिया है। साइबर कमांडो पहले से ही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। आज हो रही यूकेएसएसएससी परीक्षा में कड़े इंतजाम किए गए हैं—सीसीटीवी, जेबर स्कैनर और फ्लाइंग स्क्वायड तैनात हैं। पुलिस का दावा है कि हाकम के गिरोह की ‘छटपटाहट’ अब खत्म हो जाएगी।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि नकल माफिया को जड़ से उखाड़ने के लिए आयोग की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना जरूरी है। भविष्य की परीक्षाओं में डिजिटल पेपर सिस्टम और सख्त सत्यापन ही असली हथियार साबित हो सकता है। हाकम की पूछताछ से जो भी खुलासे होंगे, वे उत्तराखंड की भर्ती प्रक्रिया को नई दिशा दे सकते हैं।

ततैया के हमले से पिथौरागढ़ में एक और मौत, जिले में बढ़ा खतरा

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पिथौरागढ़ : सीमांत जिले पिथौरागढ़ के मुनस्यारी क्षेत्र में ततैयों के हमले ने एक और जान ले ली। शनिवार को मदकोट में ततैया के काटने से 55 वर्षीय बहादुर सिंह पुत्र गंगा सिंह की मौत हो गई। मृतक का शव जिला मुख्यालय की मोर्चरी में रखा गया है, और रविवार को पोस्टमार्टम किया जाएगा।

मदकोट से पांच किलोमीटर दूर रहने वाले बहादुर सिंह सिलाई का काम करते थे और रोजाना अपने गांव से मदकोट की दुकान पैदल आते-जाते थे। स्थानीय निवासी हरीश सिंह चिराल के अनुसार, शनिवार को भी वह दुकान के लिए निकले थे, तभी ततैयों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। घायल अवस्था में परिजन उन्हें मदकोट अस्पताल ले गए, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद मुनस्यारी रेफर किया गया। मुनस्यारी में हालत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने उन्हें जिला अस्पताल भेजा। जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. भागीरथी गर्थ्याल ने बताया कि अस्पताल पहुंचने के कुछ देर बाद ही बहादुर सिंह की मृत्यु हो गई।

एक सप्ताह पहले भी हुआ था हमला

यह पहली घटना नहीं है। एक सप्ताह पहले पिथौरागढ़ के ऐंचोली जंगल में 26 वर्षीय हेमा देवी पर ततैयों ने हमला किया था। घास काटने गई हेमा पर ततैयों के झुंड ने हमला बोला, जिससे उनके सिर और हाथ में सूजन आ गई। भागने की कोशिश में वह जमीन पर बैठ गईं, लेकिन 9-10 ततैयों ने उनके सिर पर हमला किया। परिजनों ने उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ।

पिछले साल भी हुई थी मौत

पिछले वर्ष नवंबर में मूनाकोट विकासखंड के मल्ली भटेड़ी में भी एक महिला पर ततैयों ने हमला किया था। गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंची महिला की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी।

बढ़ता जा रहा है ततैयों का खतरा

पिथौरागढ़ जिले में ततैयों के हमले लगातार जानलेवा साबित हो रहे हैं। बीते एक वर्ष में जिले के विभिन्न हिस्सों में ततैयों के काटने से एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं, और चार लोगों की मौत हो चुकी है। स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल है, और प्रशासन से इस समस्या के समाधान की मांग उठ रही है।

गुलदार से गांव बचाने के लिए देहरादून में घंटाघर पर ढोल बजाकर किया प्रदर्शन

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पौड़ी जिले के पोखड़ा क्षेत्र के श्रीकोट गांव में चार वर्षीय मासूम रिया की गुलदार के हमले में दुखद मृत्यु के बाद शनिवार को घंटाघर पर स्थानीय लोगों ने गुस्से और दुख के साथ प्रदर्शन किया। स्थानीय संगठन धाद और फील गुड ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को उजागर किया गया। प्रदर्शनकारियों ने पारंपरिक ढोल-दमाऊ बजाकर अपनी सुरक्षा की मांग को और जोरदार तरीके से उठाया।

यह घटना इसी सप्ताह की है, जिसने ग्रामीणों में भारी आक्रोश पैदा किया है। वे प्रशासन पर बार-बार होने वाले मानव-वन्यजीव टकराव के बावजूद निष्क्रियता का आरोप लगा रहे हैं। महिला कार्यकर्ता शांति बिंजोला और अंबिका उनियाल ने ढोल-दमाऊ के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व किया, जो ग्रामीण समुदायों को शिकारी वन्यजीवों से बचाने की तात्कालिकता का प्रतीक था। प्रदर्शन का संचालन नीलेश नेगी ने किया, जिन्होंने फील गुड ट्रस्ट के मांगपत्र को पढ़कर सुनाया।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि वन्यजीवों के हमले में किसी व्यक्ति की मृत्यु पर परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा और यदि माता-पिता की मृत्यु हो तो परिवार को वैकल्पिक रोजगार दिया जाए। मानव या पशुधन को चोट लगने पर पूर्ण चिकित्सा उपचार और उचित मुआवजा प्रदान करने की मांग भी की गई। मांगपत्र में मनरेगा के तहत मुख्य मार्गों और स्कूलों के रास्तों पर झाड़ियों की सफाई को प्राथमिकता देने, गांवों के 100 मीटर के दायरे में खेतों को आबाद करने, कुकाट, काला बांस, गाजर घास जैसी जंगली झाड़ियों को हटाने और संवेदनशील गांवों में जालीनुमा तारों की बाड़ लगाने की मांग शामिल थी।

इसके अतिरिक्त, वन विभाग को पर्याप्त पिंजड़े उपलब्ध कराने, गुलदारों और बाघों की गणना कर कॉलर आईडी लगाने ताकि गलती से गैर-नरभक्षी जानवर न मारे जाएं, और नवजात शावकों की निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने जंगल की आग या अपने खेतों के अलावा अन्य स्थानों पर आग लगाने वालों के लिए कम से कम पांच साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान करने की भी मांग की। उन्होंने एआई-आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, सेंसर-युक्त लाइट्स और ड्रोन तकनीक से गुलदारों की निगरानी की वकालत की।

धाद के प्रतिनिधि लोकेश नावानी ने प्रदर्शन स्थल पर उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) को मांगपत्र सौंपा, जिसमें त्वरित समाधान और निवारक कदमों की मांग की गई। सभा को संबोधित करते हुए पोखड़ा के सामाजिक कार्यकर्ता कविंद्र इस्टवाल ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, “पहाड़ों में ग्रामीण आत्मरक्षा के लिए हथियारों का उपयोग नहीं कर सकते, फिर भी ये जानवर हमारे प्रियजनों को शिकार बना रहे हैं।” सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन मेहंदीरत्ता ने वन विभाग के बजट आवंटन की आलोचना की, जिसमें ग्रामीण सुरक्षा के सवाल पर लापरवाही का आरोप लगाया।

उत्तराखंड आंदोलनकारी प्रदीप कुकरेती ने इस मुद्दे को उच्च सरकारी स्तर तक ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया और चेतावनी दी कि मांगें न माने जाने पर प्रदर्शन और तेज होंगे। संयुक्त नागरिक संगठन के सुशील त्यागी ने बच्ची की जन्मदिन पर मृत्यु को “हृदय विदारक” बताया और कहा कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं सामाजिक आक्रोश को बढ़ा रही हैं। धाद के डी.सी. नौटियाल ने संगठन की प्रतिबद्धता दोहराई, कहा कि वे पिछले एक साल से इस मुद्दे पर समाज और शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं और दीर्घकालिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं।

कांग्रेस प्रदेश सचिव कवींद्र ईष्टवाल ने कहा कि देहरादून के घंटाघर पर, ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक बड़ा प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने वन मंत्री और मुख्यमंत्री से जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इन हमलों के कारण ग्रामीण जीवन, पशुपालन और खेती संकट में हैं। उन्होंने सरकार द्वारा दिए गए लाइसेंसी हथियारों की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया, क्योंकि उनका कहना है कि इन हथियारों के इस्तेमाल के लिए हर बार अधिकारियों से अनुमति लेनी पड़ती है, जिससे उनका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर 15 दिनों के भीतर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो वे अपने हथियार जिला मजिस्ट्रेट (DM) को सौंप देंगे। यह आंदोलन न सिर्फ अपनी सुरक्षा के लिए है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी है।

प्रदर्शन में अवधेश शर्मा, सुरेंद्र सिंह रावत, दिनेश भंडारी, किशन सिंह, सुशील कुमार, गणेश उनियाल, आशा डोभाल, चंद्रा भागा शुक्ला, अशोक जोशी, विजय जोशी, नरेंद्र सुंदरियाल, उमेश्वर सिंह रावत, अजीत सिंह गुसाईं, पंकज सुंदरियाल, कुलदीप रावत, कैलाश लखेड़ा, मोहन सती, सुमन ढौंडियाल, नरेंद्र पाल, अनिल जुयाल, प्रकाश नांगिया, तन्मय ममगाईं, शांति प्रकाश जिज्ञासु, हिमांशु आहूजा, दीपक सुंदरियाल और गुणानंद जखमोला सहित कई लोग शामिल थे।

कश्मीर में पाकिस्तान ने तोड़ा सीजफायर, मुठभेड़ में एक जवान शहीद

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श्रीनगर/उधमपुर : पाकिस्तानी सेना ने शनिवार रात उत्तरी कश्मीर के नौगाम सेक्टर (कुपवाड़ा) में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सीजफायर का उल्लंघन करते हुए अकारण गोलाबारी की। भारतीय सेना ने इसका मुंहतोड़ जवाब देते हुए पाकिस्तान की एक निगरानी चौकी को भारी नुकसान पहुंचाया। उधर, उधमपुर के सियोजधार में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में सेना के लांस दफादार बलदेव चंद शहीद हो गए।

नौगाम में सीजफायर उल्लंघन

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने शनिवार शाम करीब 5:30 बजे नौगाम सेक्टर के तूतमार गली में भारतीय चौकियों पर गोलीबारी शुरू की। भारतीय सैनिकों ने शुरू में संयम बरता, लेकिन जब गोलाबारी की तीव्रता बढ़ी तो जवाबी कार्रवाई की। लगभग 40 मिनट तक दोनों पक्षों के बीच भीषण गोलीबारी हुई। रात 9:30 बजे पाकिस्तान ने दोबारा गोलाबारी शुरू की, जिसका भारतीय सेना ने कड़ा जवाब दिया। इस कार्रवाई में एलओसी के पार लीपा घाटी में स्थित पाकिस्तानी निगरानी चौकी को व्यापक नुकसान पहुंचा। सेना ने देर रात तक इस घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी।

उधमपुर में मुठभेड़, जवान शहीद

दूसरी ओर, उधमपुर और डोडा जिले के बीच सियोजधार के जंगली क्षेत्र में शुक्रवार देर शाम से आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ जारी है। इस दौरान राष्ट्रीय राइफल्स और उधमपुर पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) की संयुक्त गश्त पर आतंकियों ने गोलीबारी शुरू की। जवाबी कार्रवाई में सेना के लांस दफादार बलदेव चंद (निवासी बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश) गंभीर रूप से घायल हो गए और शनिवार सुबह अस्पताल में वीरगति प्राप्त की।

आतंकियों की तलाश में तेज अभियान

सुरक्षाबलों ने शनिवार को सियोजधार और डुडु-बसंतगढ़ क्षेत्र में आतंकियों की तलाश के लिए व्यापक कांबिंग ऑपरेशन शुरू किया। ड्रोन और खोजी श्वानों की मदद से घने जंगलों और ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। डोडा और उधमपुर से अतिरिक्त बल भी मौके पर भेजे गए हैं। हालांकि, शनिवार को आतंकियों से दोबारा संपर्क नहीं हो सका।

शहीद को श्रद्धांजलि

व्हाइट नाइट कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग और सभी रैंकों ने लांस दफादार बलदेव चंद को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “राष्ट्र लांस दफादार बलदेव चंद के अदम्य साहस और कर्तव्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का हमेशा ऋणी रहेगा। इस दुख की घड़ी में हम उनके परिवार के साथ एकजुटता से खड़े हैं।”

सुरक्षा बलों की सतर्कता

पाकिस्तान द्वारा सऊदी अरब के साथ हाल के रक्षा समझौते के ठीक एक दिन बाद सीजफायर उल्लंघन की यह घटना सामने आई है। सुरक्षाबल आतंकियों और सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। उधमपुर और कश्मीर में अभियान को और तेज कर दिया गया है।