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उत्तराखंड पेपर लीक: सरकार की जवाबदेही पर सवाल, चरम पर युवाओं का आक्रोश

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देहरादून : उत्तराखंड में पेपर लीक का एक और मामला सामने आने से राज्य में हड़कंप मच गया है। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा 21 सितंबर 2025 को आयोजित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में हरिद्वार के बहादराबाद केंद्र से प्रश्न पत्र के तीन पेज लीक होने की घटना ने न केवल लाखों युवाओं के सपनों पर कुठाराघात किया है, बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

पेपर लीक की घटना: क्या हुआ?

UKSSSC द्वारा आयोजित इस परीक्षा का प्रश्न पत्र शुरू होने के मात्र 35 मिनट बाद ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बेरोजगार युवा संगठनों का दावा है कि उन्हें परीक्षा शुरू होने के आधे घंटे के भीतर ही पूरा प्रश्न पत्र प्राप्त हो गया था। इस घटना ने न केवल परीक्षा की निष्पक्षता को संदिग्ध बना दिया, बल्कि उन लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को खतरे में डाल दिया, जिन्होंने इस परीक्षा के लिए सालों तक मेहनत की थी।

पुलिस जांच में मुख्य आरोपी खालिद मलिक और उसकी बहन साबिया को गिरफ्तार किया गया। खालिद ने चार अलग-अलग केंद्रों से आवेदन किया था, जो UKSSSC के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके अलावा, हरिद्वार के परीक्षा केंद्र के 18 में से तीन कमरों में जैमर न होने की बात सामने आई है, जिसने लीक की संभावना को और बढ़ा दिया।

सरकार की कार्रवाई: कितनी कारगर?

पेपर लीक के बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई का दावा करते हुए जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक केएन तिवारी को निलंबित कर दिया। वित्त सचिव दिलीप जावलकर के आदेश में कहा गया कि तिवारी को परीक्षा केंद्र में सुचिता बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन उनकी लापरवाही के कारण प्रश्न पत्र लीक हुआ। इसके साथ ही, सरकार ने हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है, जिसे एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश है।

हालांकि, ये कदम युवाओं के गुस्से को शांत करने और उनकी शंकाओं को दूर करने में नाकाफी साबित हो रहे हैं। सरकार की कार्रवाइयों पर कई सवाल उठ रहे हैं:

  1. बार-बार पेपर लीक क्यों?
    उत्तराखंड में यह कोई पहला मामला नहीं है। 2021 और 2022 में भी UKSSSC की परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए थे। सख्त नकल विरोधी कानून लागू होने के बावजूद ऐसी घटनाएं क्यों दोहराई जा रही हैं? क्या सरकार पहले के घोटालों से कोई सबक नहीं ले रही?

  2. सुरक्षा व्यवस्था में खामी
    हरिद्वार के परीक्षा केंद्र में तीन कमरों में जैमर न होना एक गंभीर चूक है। क्या UKSSSC और सरकार ने केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच में लापरवाही बरती? 5G नेटवर्क को नियंत्रित करने में जैमर की असफलता क्यों रही?

  3. आवेदन प्रक्रिया में ढिलाई
    खालिद जैसे अभ्यर्थी द्वारा चार केंद्रों से आवेदन करना नियमों की अवहेलना दर्शाता है। क्या UKSSSC के पास आवेदनों की जांच के लिए कोई मजबूत तंत्र नहीं है?

  4. जांच की निष्पक्षता
    सरकार ने SIT गठित की है, लेकिन युवा संगठन और विपक्ष CBI जांच की मांग कर रहे हैं। क्या SIT की जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी, या यह पहले की तरह केवल खानापूर्ति बनकर रह जाएगी?

  5. बड़े माफियाओं पर नकेल क्यों नहीं?
    विपक्षी नेता भुवन कापड़ी ने आरोप लगाया कि सरकार छोटे अपराधियों को पकड़ रही है, जबकि बड़े माफियाओं को संरक्षण मिल रहा है। क्या सरकार प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है?

युवाओं का गुस्सा और सड़कों पर प्रदर्शन

पेपर लीक की घटना के बाद उत्तराखंड के युवा सड़कों पर उतर आए हैं। देहरादून और हरिद्वार में बेरोजगार संघ और छात्र संगठनों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए, जिसमें परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग जोर-शोर से उठाई गई। युवाओं का कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा के लिए सालों की मेहनत और आर्थिक संसाधन झोंक दिए थे, लेकिन इस घटना ने उनकी उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया।

सरकार कठघरे में

यह घटना मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के लिए एक बड़ा झटका है। विपक्ष, खासकर कांग्रेस, ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता माहरा ने कहा कि सख्त कानून के बावजूद माफिया बेखौफ हैं और सरकार प्रभावशाली लोगों को बचा रही है। 2022 में हुए पेपर लीक घोटाले में 41 लोग गिरफ्तार हुए थे, लेकिन क्या उससे कोई सबक लिया गया? अगर सरकार ने पहले की गलतियों से सीख ली होती, तो क्या आज युवाओं को फिर से सड़कों पर उतरना पड़ता?

उत्तराखंड: पेपर लीक मामले में सख्त कार्रवाई, परियोजना निदेशक निलंबित

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देहरादून : उत्तराखंड में पेपर लीक मामले ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। इस मामले में युवाओं का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा, वहीं राज्य सरकार ने सख्ती दिखाते हुए जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक केएन तिवारी को निलंबित कर दिया है।

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा 21 सितंबर को आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा के दौरान हरिद्वार के एक परीक्षा केंद्र से प्रश्न पत्र के तीन पेज लीक होने का मामला सामने आया था। इस घटना ने परीक्षा की शुचिता पर सवाल खड़े कर दिए। सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, और लीक में शामिल खालिद नामक व्यक्ति को गिरफ्तार भी कर लिया गया है।

UKSSSC PAPER LEAK CASEवित्त सचिव दिलीप जावलकर द्वारा जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि परियोजना निदेशक केएन तिवारी को परीक्षा केंद्र में सुचिता बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, प्रश्न पत्र के पेज केंद्र से बाहर जाने की घटना से स्पष्ट है कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया। आदेश में उनकी प्रथम दृष्टया लापरवाही को निलंबन का आधार बताया गया है।

UKSSSC ने हरिद्वार के परीक्षा केंद्र में हुई इस लापरवाही के लिए सरकार को कार्रवाई की सिफारिश की थी। आयोग का कहना है कि परीक्षा शुरू होने के मात्र आधे घंटे में प्रश्न पत्र के पेज बाहर भेजे गए, जो केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था में खामी को दर्शाता है।

UKSSSC PAPER LEAK CASE
सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए न केवल लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई शुरू की है, बल्कि दोषियों की खोजबीन के लिए जांच को और तेज कर दिया है। इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं, और युवाओं में बढ़ते असंतोष ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।

उत्तराखण्ड को स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र सरकार से मिला बड़ा तोहफ़ा

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देहरादून: प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत उत्तराखण्ड को स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र सरकार से बड़ा तोहफ़ा मिला है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्य में हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (HEOC) की स्थापना को मंज़ूरी प्रदान की है।

यह सेंटर स्वास्थ्य आपदाओं के समय राज्य की तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को मज़बूत बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया जा रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि HEOC के संचालन के लिए कुल नौ संविदा पदों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें वरिष्ठ सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाहकार, सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाहकार, डेटा विश्लेषक, हब इंजीनियर और डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद शामिल हैं।

 

मंत्रालय के अनुसार HEOC के लिए धनराशि PM-ABHIM परियोजना अवधि 2021–26 तक उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवधि के बाद आगे की निरंतरता योजना की स्वीकृति पर निर्भर करेगी। राज्य सरकार से अनुरोध किया गया है कि वह इन पदों पर संविदा आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र शुरू करे और HEOC को जल्द से जल्द क्रियाशील बनाए। निधि हस्तांतरण के लिए HEOC के नाम से एक अलग बैंक खाता भी खोला जाएगा।

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने उत्तराखण्ड को स्वास्थ्य सुरक्षा का बड़ा तोहफ़ा दिया है। “हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर की स्थापना से राज्य की स्वास्थ्य आपदा प्रबंधन क्षमता और मज़बूत होगी। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से आपात स्थितियों में समय पर और समन्वित कार्रवाई संभव हो सकेगी। मैं प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त करता हूँ,”।

 

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उत्तराखण्ड के लिए हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर की स्थापना को मंज़ूरी दी है। हम जल्द ही संविदा पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करेंगे और HEOC को क्रियाशील बनाएंगे। यह सेंटर स्वास्थ्य आपदाओं के दौरान समयबद्ध प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा, जिससे जनता को सीधे लाभ मिलेगा।

देश भर में HEOCs की स्थापना भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को मज़बूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्वास्थ्य आपात स्थितियों के समय समयबद्ध कार्रवाई और बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सकेगा।

धामी ने किया डिजिटल क्लासरूम का शुभारंभ, CSR के तहत 24 विद्यालय होंगे डिजिटलाइज्ड

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित उत्तराखंड सीएसआर डायलॉग कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस मौके पर उन्होंने मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट के प्राथमिक विद्यालय में डिजिटल क्लासरूम का वर्चुअल शुभारंभ किया।

कार्यक्रम में एक्सिस बैंक समूह के साथ राज्य के 24 विद्यालयों के डिजिटलाइजेशन के लिए तथा टोयटा कंपनी के साथ पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामुदायिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में सीएसआर गतिविधियां संचालित करने हेतु एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट हाउस अपने सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी इनिशिएटिव्स के अंतर्गत उत्तराखंड में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय योगदान दे रहे हैं। इस कड़ी में आईआईएफसीएल, मैनकाइंड, अवाना फाउंडेशन, टोयटा, नेस्ले, टीएचडीसी, आईआरसीटीसी, एचडीएफसी और ब्रिटानिया जैसी कई संस्थाएं विभिन्न सामाजिक गतिविधियां चला रही हैं।

धामी ने बताया कि 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में राज्य को 3.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले थे, जिनमें से करीब 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव अब धरातल पर उतर चुके हैं। राज्य सरकार ने 30 से अधिक औद्योगिक, लॉजिस्टिक, स्टार्टअप और एमएसएमई नीतियां लागू कर उद्योगों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराया है। स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं और 200 करोड़ रुपये का वेंचर फंड बनाया गया है।

शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू किया। सभी सरकारी विद्यालयों में एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य की गई हैं। पहली बार 12वीं के व्यावसायिक छात्रों के लिए रोजगार मेलों का आयोजन किया गया, जिसमें 146 विद्यार्थियों का चयन प्रतिष्ठित कंपनियों में हुआ। राज्य ने बुनियादी शिक्षा के लिए ‘राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा’ भी तैयार की है।

नकल माफियाओं पर सख्ती का जिक्र करते हुए धामी ने कहा कि उत्तराखंड ने देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया है। इसके परिणामस्वरूप साढ़े चार वर्षों में 25 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है और 100 से अधिक नकल माफिया जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेलने के लिए संगठित रूप से पेपर लीक कराने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सरकार इन्हें जड़ से खत्म किए बिना चैन से नहीं बैठेगी।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर, टोयटा के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी, सचिव उद्योग विनय शंकर पाण्डेय, अपर सचिव मनमोहन मैनाली सहित विभिन्न कंपनियों और संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में आजीवन कारावास को कहा विचित्र, निचली अदालत ने सुनाई थी आजीवन कारावास की सजा

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नैनीताल:उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को दो अलग-अलग आपराधिक मामलों में महत्वपूर्ण फैसले सुनाए। पहले मामले में रुद्रपुर की निचली अदालत द्वारा हत्या के एक मामले में दी गई आजीवन कारावास की सजा को श्विचित्रश् करार देते हुए निलंबित कर दिया और आरोपी को जमानत दे दी। वहीं, दूसरे मामले में एक नाबालिग बच्ची के साथ सामूहिक दुराचार के दोषी की आजीवन कारावास की सजा को घटाकर 20 साल के कठोर कारावास में बदल दिया।

हत्या के मामले में विचित्र फैसला
मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने रुद्रपुर के तृतीय अपर जिला जज द्वारा 28 जुलाई 2023 को राकेश माली को हत्या के मामले में दी गई आजीवन कारावास की सजा को प्रथम दृष्टया विचित्र करार दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि 29 जुलाई 2019 को राकेश माली का एक व्यक्ति से विवाद हुआ था, जिसकी 17 अगस्त 2019 को हृदयाघात से मृत्यु हो गई।

हाईकोर्ट ने पाया कि कथित हत्या का हथियार बरामद नहीं हुआ, अभियोजन पक्ष के दस्तावेजों में विरोधाभास है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण हृदयाघात बताया गया। इसके अलावा, मुख्य गवाह की जिरह का अवसर आरोपी को नहीं दिया गया, जो निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों का उल्लंघन है। इन आधारों पर कोर्ट ने सजा को अपील के लंबित रहने तक निलंबित कर दिया और राकेश माली को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानतदार पर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई के लिए तिथि नियत की जाएगी।

गैंगरेप के दोषी की सजा में कमी
दूसरे मामले में, हाईकोर्ट ने 2015 में 9 साल की बच्ची के साथ सामूहिक दुराचार और अपहरण के दोषी कन्हाई बैरागी की सजा को आंशिक रूप से कम कर दिया। रुद्रपुर की निचली अदालत ने 22 अगस्त 2015 को बैरागी को धारा 376डी (सामूहिक बलात्कार) के तहत आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना, साथ ही धारा 366 (अपहरण) के तहत 10 साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने सजा को अत्यधिक कठोर बताते हुए कमी की मांग की, हालांकि दोषसिद्धि को चुनौती नहीं दी। जस्टिस रविंद्र मैठाणी की पीठ ने पीड़िता, उसके चाचा और मां के बयानों के साथ मेडिकल रिपोर्ट को विश्वसनीय पाया। अदालत ने माना कि अपराध जघन्य है, लेकिन आरोपी की उम्र (घटना के समय 18 साल, 10 दिन) और आपराधिक इतिहास की कमी को देखते हुए आजीवन कारावास अत्यधिक है।

इसलिए, धारा 376डी के तहत सजा को घटाकर 20 साल के कठोर कारावास में बदल दिया गया, जबकि धारा 366 की सजा और सभी जुर्माने यथावत रखे गए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि पीड़िता को दी जाए। दोषी को तुरंत हिरासत में लेकर शेष सजा काटने के लिए जेल भेजने का आदेश दिया गया।

भगवान बदरी विशाल के दर्शन को पहुंचे सैन्य अधिकारी

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सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने किये बदरी विशाल के दर्शन*

• बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने बदरी विशाल का प्रसाद भेंट किया।

श्री बदरीनाथ धाम: 24 सितंबर।बीते मंगलवार शाम को मेजर जनरल अजय कुमार सहित सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने भगवान बदरी विशाल के दर्शन किये। इस अवसर पर श्री बदरीनाथ -केदारनाथ मंदिर समिति उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने सेना अधिकारियों को भगवान बदरी विशाल का प्रसाद भेंट किया।IMG 20250923 WA0083

इस अवसर पर गढ़वाल स्काउट के अधिकारी एवं सेना के जवान तथा बीकेटीसी कर्मचारी मौजूद रहे।

 

वसंतकुंज आश्रम संचालक स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती पर 15 छात्राओं से छेड़छाड़ का गंभीर आरोप, आरोपी फरार

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नई दिल्ली: दिल्ली के वसंतकुंज क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध आश्रम के संचालक स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती पर 15 छात्राओं के साथ छेड़छाड़ का सनसनीखेज आरोप लगा है। इस मामले में वसंतकुंज (उत्तर) पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, आरोपी स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती वर्तमान में फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।

पुलिस को मिली शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आश्रम में पढ़ने वाली छात्राओं ने स्वामी पर छेड़छाड़ और अनुचित व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार करने की बात कही जा रही है।

इस घटना ने स्थानीय समुदाय में आक्रोश पैदा कर दिया है। आश्रम, जो लंबे समय से आध्यात्मिक और शैक्षिक गतिविधियों के लिए जाना जाता था, अब इस विवाद के कारण चर्चा में है। पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और जांच में सहयोग करने की अपील की है।

उत्तराखण्ड: वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी ने दिया त्यागपत्र, पदोन्नति में देरी से थे नाराज

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देहरादून: उत्तराखण्ड के शिक्षा विभाग में लंबे समय तक समर्पित सेवा देने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने पदोन्नति में देरी और प्रशासनिक उदासीनता के चलते त्यागपत्र दे दिया है। अपने अर्द्धशासकीय पत्र में अधिकारी ने 27 मार्च 1999 से शुरू हुई अपनी सेवा के दौरान शिक्षा विभाग, राज्य और हितधारकों के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ कार्य करने का उल्लेख किया। उन्होंने शिक्षा योजनाओं और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ नवाचारों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

महत्वपूर्ण योगदान अधिकारी ने अपने पत्र में तीन प्रमुख उपलब्धियों का जिक्र किया। पहला, वर्ष 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तावित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय की स्थापना में उनकी अहम भूमिका रही। ननूरखेड़ा में भूमि चयन और समतलीकरण के बाद 9 नवंबर 2002 को प्रथम विद्यालय का शिलान्यास हुआ। आज इस परिसर में राजीव गांधी नवोदय विद्यालय के साथ-साथ इग्नू कार्यालय, एससीईआरटी (दस वर्षों तक) और राज्य का वर्चुअल स्टूडियो संचालित हो रहा है। इस दौरान उन्हें स्थानीय विरोध और तत्कालीन मंत्री हीरा सिंह बिष्ट के गुस्से का सामना करना पड़ा।

दूसरा, वर्ष 2004 में निदेशक विद्यालयी शिक्षा एस.के. माहेश्वरी द्वारा उन्हें उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा अधिनियम और विभिन्न संवर्गों के सेवा नियमों का ड्राफ्ट तैयार करने का दायित्व सौंपा गया। उत्तर प्रदेश के इंटरमीडिएट एक्ट-1921 और बेसिक शिक्षा अधिनियम-1972 को एकीकृत कर नया अधिनियम बनाया गया। साथ ही, 300 से अधिक न्यायालयी मामलों का अध्ययन कर शिक्षकों, मिनिस्टीरियल स्टाफ, प्रारम्भिक शिक्षा, प्रशिक्षित स्नातक, प्रवक्ता, निरीक्षक और प्रधानाचार्यों से लेकर निदेशक तक के लिए सेवा नियम तैयार किए गए। इस आधार पर प्रारम्भिक शिक्षा का राजकीयकरण भी संभव हुआ।

पदोन्नति में देरी से हताशा पत्र में अधिकारी ने बताया कि फरवरी 2025 में घोषित रिक्तियों के बावजूद, अपर निदेशक के पद पर उनकी पदोन्नति आठ माह से लंबित है। इस देरी का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया, जिससे उनकी हताशा बढ़ी। उन्होंने कहा कि विभाग अधीनस्थ कर्मचारियों से समयबद्ध कार्य की अपेक्षा करता है, लेकिन उनकी स्वयं की आकांक्षाओं की अनदेखी की जा रही है।

विभागीय चुप्पी पदोन्नति में देरी और समुचित कारण न बताए जाने को अधिकारी ने ‘यंत्रणा’ करार दिया। शिक्षा विभाग में इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह घटना विभागीय कार्यप्रणाली और वरिष्ठ अधिकारियों के मनोबल पर सवाल उठाती है।

उत्तराखंड बेरोजगार संघ का आंदोलन: पेपर लीक कांड के बीच साजिश का खुलासा, आंदोलन से किसको हो रही दिक्कत?

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देहरादून: उत्तराखंड में पेपर लीक कांड को लेकर बेरोजगार युवाओं का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। देहरादून के परेड ग्राउंड के बाहर सड़कों पर धरना दे रहे उत्तराखंड बेरोजगार संघ और उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के युवाओं ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंगलवार को बेरोजगार संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं, लेकिन देर रात एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री को कटघरे में खड़ा कर दिया।

बेरोजगार संघ के अनुसार, बेरोजगारों के आंदोलन को कमजोर करने की साजिश के तहत हरिद्वार से बसों में भरकर विभिन्न स्थानों के बच्चों को एकता विहार धरना स्थल पर लाया गया। इन बच्चों को सरकार से परीक्षा परिणाम जारी करने की मांग के लिए नारेबाजी करने को कहा गया। जैसे ही उत्तराखंड बेरोजगार संघ और स्वाभिमान मोर्चा को इसकी भनक लगी, उनकी टीम तुरंत एकता विहार पहुंची। वहां पहुंचते ही कुछ अज्ञात संगठनों की ड्रेस में आए बच्चे भाग खड़े हुए। बेरोजगार युवाओं ने उनका पीछा किया और ऋषिकेश तक पहुंच गए।

जब पत्रकारों ने बसों में सवार बच्चों से सवाल किए, तो उन्होंने एक सनसनीखेज खुलासा किया। बच्चों ने बताया कि उन्हें यह नहीं बताया गया था कि उन्हें करना क्या है। उन्हें बसों में भरकर देहरादून लाया गया और नारेबाजी करने के लिए कहा गया। हैरानी की बात यह है कि इनमें से किसी भी बच्चे ने स्थानीय स्तर की परीक्षा में हिस्सा नहीं लिया था।

इस घटना ने पेपर लीक कांड में धांधली की गंभीरता को और उजागर कर दिया है। बेरोजगार संघ ने इसे सरकार की साजिश करार देते हुए कहा कि यह आंदोलन को तोड़ने और जनता को गुमराह करने की कोशिश है। संघ ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषियों को सजा दी जाए।

उत्तराखंड बेरोजगार संघ के इस आंदोलन ने न केवल पेपर लीक कांड को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को भी उजागर किया है। इस घटना के बाद आंदोलन और तेज होने की संभावना है।

पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, मोहकमपुर में अभिभावक-शिक्षक बैठक, अभिभावकों ने दिए सुझाव

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देहरादून : पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, आईआईपी मोहकमपुर, देहरादून में प्राचार्य मनोज कुमार के मार्गदर्शन में कक्षा पांचवीं के अभिभावकों और शिक्षकों की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षिक प्रगति, अनुशासन, आगामी परीक्षाओं की तैयारी और अभिभावक-शिक्षक समन्वय को मजबूत करना था।

विद्यालय के मुख्य अध्यापक एम.एस. रावत ने सभी अभिभावकों का स्वागत करते हुए कहा, “शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। अभिभावकों और शिक्षकों का सक्रिय सहयोग बच्चों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।” उन्होंने आवधिक परीक्षाओं में छात्रों के प्रदर्शन, अर्धवार्षिक परीक्षा की समय-सारणी, पाठ्यक्रम की तैयारी, अनुशासन और शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार के लिए अभिभावकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। श्री रावत ने जोर देकर कहा कि अभिभावक-शिक्षक सहयोग से बच्चों में सकारात्मक दृष्टिकोण और पढ़ाई के प्रति उत्साह को बढ़ाया जा सकता है।

अभिभावकों के सुझाव

बैठक में अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक अपने विचार साझा किए। अभिभावक अवधेश नौटियाल ने गणित को रोचक और छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाने वाला बनाने का सुझाव दिया। प्रदीप रावत ने शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार की बात कही। मनोज कुमार सिन्हा ने पुनरावृत्ति कार्य पर ध्यान देने और स्कूल बैग का भार कम करने की सिफारिश की। वहीं, अंजना पुंडीर और चारु चंदोला ने शिक्षण प्रक्रिया को और आकर्षक व सहभागी बनाने के विचार प्रस्तुत किए।

सहयोगात्मक प्रयासों का संकल्प

बैठक में कक्षा अध्यापक संदीप उनियाल, दुर्गम सिंह राणा और तुषार अरोड़ा ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने अभिभावकों को छात्रों की पढ़ाई, अनुशासन और गतिविधियों की जानकारी दी तथा उनके सक्रिय सहयोग की अपेक्षा जताई। बैठक के अंत में सभी ने सहमति जताई कि अभिभावक और शिक्षक मिलकर बच्चों के लिए बेहतर शैक्षिक वातावरण तैयार कर सकते हैं। सभी ने बच्चों के समग्र विकास के लिए सहयोगात्मक प्रयासों को जारी रखने का संकल्प लिया।